सोने से पहले ये चीजें तो नहीं खाते आप? नींद तो खराब आती ही है, सपने भी बुरे दिखाई देते हैं?

सोने से पहले ये चीजें तो नहीं खाते आप? नींद तो खराब आती ही है, सपने भी बुरे दिखाई देते हैं?


इंसान को फ्रेश होने के लिए, स्टेबल रहने के लिए और वर्क के लिए रेडी रहने के लिए नींद की जरूरत होती है. हालांकि, कभी-कभी घंटों बिस्तर पर पड़े रहने के बाद भी नींद नहीं आती, बार-बार बैचेनी होती है और हमें लगता है कि ऐसा क्या हो गया कि इतनी कोशिश के बाद भी नींद क्यों नहीं आ रही है. इसके अलावा, कई बार बीच में डरावने और भयानक सपने आने लगते हैं और नींद खुल जाती है. अगर आपके साथ भी इस तरह की दिक्कत हो रही है, तो चलिए बताते हैं कि आखिर वह कौन-सा कारण है जिससे आप इस तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं.

इसको लेकर हुई रिसर्च

इस तरह की दिक्कतों को लेकर एक कनाडाई रिसर्च फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी में पब्लिश हुई. इसमें बताया गया कि इस तरह की परेशानियों के पीछे हमारे खाने-पीने के तरीके जिम्मेदार हैं. खासकर डेयरी प्रोडक्ट्स, मिठाइयां और मसालेदार खाना हमारी नींद पर असर डालते हैं और उसे खराब कर देते हैं. इसके अलावा, इनके चलते ही डरावने सपने भी आने लगते हैं.

क्या निकला रिसर्च में?

इस रिसर्च में 1,082 छात्रों को शामिल किया गया और उनसे डेली रूटीन की जानकारी ली गई, जैसे कि वे क्या खाते हैं और उनकी नींद कैसी रहती है. इसमें से करीब 41 प्रतिशत छात्रों का कहना था कि कुछ खाने की वजह से उनकी नींद में खलल पड़ता है. वहीं, 5.5 प्रतिशत का कहना था कि खाना उनके सपनों को बदल देता है. रिसर्च में शामिल कुल छात्रों में से करीब एक-तिहाई ने माना कि उन्हें बुरे और डरावने सपने आते हैं.

किन फूड्स से होती है दिक्कत?

रिसर्च में पता चला कि दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स और चॉकलेट, केक, पेस्ट्री व मिठाइयों के अलावा तीखी करी, चटनी और स्नैक्स लोगों की नींद और लाइफस्टाइल पर असर डालते हैं. इसका असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर देखने को मिला जिन्हें पहले से किसी तरह की फूड एलर्जी थी. डेयरी प्रोडक्ट खाने के बाद कई लोगों को गैस, पेट दर्द और कब्ज की समस्या हुई. इसके चलते उन्हें या तो नींद आने में दिक्कत हुई या फिर बार-बार नींद टूट गई और डरावने सपने आए.

अच्छी नींद के लिए क्या करें?

अगर आप रात को अच्छी नींद लेना चाहते हैं और शरीर की थकान से राहत पाना चाहते हैं, तो अपनी रात की डाइट में थोड़ा बदलाव कर सकते हैं. सोने से पहले कुछ खास फूड्स खाने से न सिर्फ नींद बेहतर आती है बल्कि कई तरह की परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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भारत में 15 पर्सेंट बढ़ा ब्लड डोनेशन का रुझान, जानें किस राज्य के लोग सबसे ज्यादा करते हैं रक्त

भारत में 15 पर्सेंट बढ़ा ब्लड डोनेशन का रुझान, जानें किस राज्य के लोग सबसे ज्यादा करते हैं रक्त


Blood Donation in India: रक्तदान एक ऐसा नेक कार्य है, जो न केवल दूसरों की जान बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है. भारत में बीते कुछ सालों में लोगों की जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के चलते ब्लड डोनेशन का रुझान करीब 15 पर्सेंट बढ़ा है. यह बदलाव समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि, लोग अब रक्तदान को लेकर ज्यादा संवेदनशील और सक्रिय हो रहे हैं.

किस राज्य में सबसे ज्यादा ब्लड डोनेट किया गया

जानकारी के अनुसार, मिजोरम ने रक्तदान सबसे ज्यादा किया गया है. यहां 93.71 प्रतिशत लोग ब्लड डोनेट करते हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. मिजोरम के लोग सामुदायिक सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाते हैं. यही कारण है कि इस छोटे से राज्य ने पूरे भारत को रक्तदान के क्षेत्र में प्रेरणा दी है.

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क्यों बढ़ा ब्लड डोनेशन का रुझान?

  • जागरूकता अभियान: सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने समय-समय पर ब्लड डोनेशन कैंप और कैंपेन चलाए हैं
  • सोशल मीडिया का प्रभाव: युवाओं में रक्तदान को लेकर जागरूकता सोशल मीडिया से तेजी से बढ़ी है
  • स्वास्थ्य के फायदे: अब लोग समझने लगे हैं कि रक्तदान करने से शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है और दाता स्वस्थ रहता है
  • कोविड-19 का असर: महामारी के समय ब्लड की कमी ने लोगों को और अधिक जागरूक किया, जिसके चलते रक्तदान का रुझान बढ़ा

रक्तदान के फायदे

  • रक्तदान से ब्लड प्रेशर और आयरन लेवल कंट्रोल में रहते हैं
  • यह दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है
  • शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है
  • सबसे बड़ा फायदा है, किसी की जान बचाना

लोगों के लिए संदेश

ब्लड डोनेशन एक सामाजिक कर्तव्य है. हर स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम 1 बार रक्तदान करना चाहिए। यह न केवल दूसरों की मदद करता है, बल्कि दाता को भी स्वस्थ रखता है. मिजोरम जैसे राज्य हमें यह सिखाते हैं कि, जब पूरा समाज एकजुट होता है तो बड़े बदलाव संभव हैं.

भारत में ब्लड डोनेशन का बढ़ता रुझान एक सुखद संकेत है. 15 पर्सेंट की यह बढ़त बताती है कि लोग अब पहले से ज्यादा जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं. आखिरकार, एक बोतल रक्त किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है.

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कोरोना ने हमारी नसों को बना दिया बूढ़ा, बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, चौंकाने वाली रिसर्च

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Covid-19 Effect on Veins: कोरोना महामारी ने न केवल हमारी फेफड़ों और इम्यूनिटी को प्रभावित किया, बल्कि हमारी नसों और दिल की सेहत पर भी गंभीर असर डाला है. हाल ही में यूरोपियन हार्ट जर्नल में रिसर्च के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. इस अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और यूरोप समेत 16 देशों के लगभग 2400 लोगों को शामिल किया गया. जिसमें पाया गया कि, कोरोना संक्रमित लोगों की नसें सामान्य से ज्यादा उम्रदराज़ हो गई हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

कोरोना संक्रमण का नसों पर असर

रिसर्च में यह पाया गया कि. कोविड-19 संक्रमित लोगों की अर्टरीज (में लोच और लचीलापन कम हो गया है. इसका मतलब यह है कि नसें समय से पहले बूढ़ी हो गई हैं. नसों की उम्र बढ़ने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ा देती है.

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2400 लोगों पर रिसर्च की गई है

शोध में शामिल 2400 लोगों में से कई ऐसे भी थे जो कोरोना से ठीक हो चुके थे. इनमें 40% लोगों में नसों की उम्र असल उम्र से 5 साल ज्यादा पाई गई. यह आंकड़ा दर्शाता है कि, कोविड-19 का असर सिर्फ संक्रमण के दौरान ही नहीं, बल्कि रिकवरी के बाद भी शरीर पर बना रहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस नसों के अंदर सूजन और डैमेज पैदा कर सकता है. इससे नसों की लचीलापन खत्म हो जाता है और हार्ट पर तनाव बढ़ता है.

कैसे बचाएं दिल और नसों को

  • संतुलित आहार अपनाएं: फल, सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर युक्त आहार नसों और दिल के लिए फायदेमंद हैं
  • नियमित व्यायाम करें: रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या योग नसों की लचीलापन बनाए रखने में मदद करता है
  • ब्लड प्रेशर और शुगर: हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज नसों की उम्र तेजी से बढ़ाते हैं
  • तनाव कम करें: तनाव और चिंता हार्ट और नसों को प्रभावित करती है। ध्यान, मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज से इसे नियंत्रित करें
  • नियमित हेल्थ चेकअप: कोरोना के बाद नसों और हार्ट की सेहत का टेस्ट करवाना जरूरी है

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ये 5 लक्षण दिखें तो समझ जाएं बॉडी से कम हो रहा प्रोटीन, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल

ये 5 लक्षण दिखें तो समझ जाएं बॉडी से कम हो रहा प्रोटीन, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल


प्रोटीन की कमी का पहला संकेत सूजन है. हाथ, पैर या पेट में सूजन दिख सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटीन खून में फ्लूड को संतुलित रखता है. इसकी कमी होने पर पानी टिश्यू में जमा होने लगता है और शरीर फूल जाता है.

प्रोटीन सिर्फ मांसपेशियों को नहीं बनाता, यह दिमाग को भी सही रखता है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड दिमाग के केमिकल्स (जैसे डोपामिन, सेरोटोनिन) बनाने में मदद करते हैं. इनकी कमी होने पर इंसान चिड़चिड़ा, उदास और डिप्रेस महसूस कर सकता है.

प्रोटीन सिर्फ मांसपेशियों को नहीं बनाता, यह दिमाग को भी सही रखता है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड दिमाग के केमिकल्स (जैसे डोपामिन, सेरोटोनिन) बनाने में मदद करते हैं. इनकी कमी होने पर इंसान चिड़चिड़ा, उदास और डिप्रेस महसूस कर सकता है.

अगर आप पूरी नींद लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं तो इसका कारण प्रोटीन की कमी हो सकती है. प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने वाले हार्मोन और एंजाइम बनाने में जरूरी है. इसकी कमी से कमजोरी, सुस्ती और दिमागी थकान बढ़ जाती है.

अगर आप पूरी नींद लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं तो इसका कारण प्रोटीन की कमी हो सकती है. प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने वाले हार्मोन और एंजाइम बनाने में जरूरी है. इसकी कमी से कमजोरी, सुस्ती और दिमागी थकान बढ़ जाती है.

प्रोटीन में मौजूद केराटिन और कोलेजन बाल, स्किन और नाखून के लिए बहुत जरूरी हैं. जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता तो बाल गिरने लगते हैं, नाखून टूटते हैं और त्वचा रूखी हो जाती है.

प्रोटीन में मौजूद केराटिन और कोलेजन बाल, स्किन और नाखून के लिए बहुत जरूरी हैं. जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता तो बाल गिरने लगते हैं, नाखून टूटते हैं और त्वचा रूखी हो जाती है.

अगर आपको हमेशा भूख लगती रहती है तो यह भी प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और अनावश्यक क्रेविंग रोकता है. इसकी कमी होने पर बार-बार खाने की इच्छा होती है.

अगर आपको हमेशा भूख लगती रहती है तो यह भी प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और अनावश्यक क्रेविंग रोकता है. इसकी कमी होने पर बार-बार खाने की इच्छा होती है.

शुरुआती लक्षण अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर इन संकेतों को समय रहते नहीं समझा गया तो गंभीर प्रोटीन की कमी (जैसे क्वाशीओरकर) हो सकती है.

शुरुआती लक्षण अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर इन संकेतों को समय रहते नहीं समझा गया तो गंभीर प्रोटीन की कमी (जैसे क्वाशीओरकर) हो सकती है.

अपने खाने में प्रोटीन से भरपूर चीज़ें ज़रूर शामिल करें. दूध, दालें, अंडे, मछली, सोया, पनीर और ड्राई फ्रूट्स अच्छे स्रोत हैं. अगर लक्षण ज्यादा हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

अपने खाने में प्रोटीन से भरपूर चीज़ें ज़रूर शामिल करें. दूध, दालें, अंडे, मछली, सोया, पनीर और ड्राई फ्रूट्स अच्छे स्रोत हैं. अगर लक्षण ज्यादा हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

Published at : 20 Aug 2025 10:29 AM (IST)


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एक ब्लड टेस्ट से ही फर्स्ट फेज में पता लग जाएगी यह खतरनाक बीमारी, जानें यह कितना कामयाब?

एक ब्लड टेस्ट से ही फर्स्ट फेज में पता लग जाएगी यह खतरनाक बीमारी, जानें यह कितना कामयाब?


पार्किंसन डिजीज एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. अब इसकी पहचान और इलाज में बड़ा बदलाव आने वाला है. हाल ही में Nature Aging में छपी रिसर्च में दावा किया गया है कि एक नई RNA-बेस्ड ब्लड टेस्ट से बीमारी का पता हाथ-पैर कांपने या चलने में दिक्कत जैसे सिम्पटम्स शुरू होने से पहले ही लगाया जा सकता है. यानी अब मरीजों को शुरुआती स्टेज पर ही डायग्नोस करना आसान होगा.

ब्लड टेस्ट कैसे काम करता है?

यह टेस्ट tRNA (Transfer RNA) के छोटे-छोटे फ्रैगमेंट्स पर आधारित है. पहले tRNA को सिर्फ प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया से जोड़ा जाता था, लेकिन अब रिसर्च में पता चला कि इसके फ्रैगमेंट्स बीमारी की जानकारी भी दे सकते हैं.

रिसर्चर्स को मिले दो खास बायोमार्कर

  • न्यूक्लियर tRNA फ्रैगमेंट, जो पार्किंसन मरीजों में ज्यादा होता है.
  • माइटोकॉन्ड्रियल tRNA फ्रैगमेंट, जो मरीजों में कम होता है.

इन दोनों के अनुपात से पता लगाया गया कि व्यक्ति नॉर्मल है, शुरुआती स्टेज पर है या एडवांस स्टेज पर. बड़ी स्टडी में इस टेस्ट की सटीकता 86 प्रतिशत निकली.

क्यों खास है यह खोज?

अभी तक पार्किंसन का पता तभी चलता है जब म सिम्पटम्स सामने आते हैं. लेकिन यह ब्लड टेस्ट:

  • यह बाकी इलाजों से काफी सस्ता है 
  • इससे बीमारी के बारे में तेजी से पता चल जाएगा
  • इसके अलावा सिर्फ ब्लड सैंपल से (मिनिमली-इनवेसिव) टेस्ट प्रोसेस हो जाता है.

यह टेस्ट उन लोगों के लिए कारगर हो सकता है जिनमें पार्किंसन का रिस्क ज्यादा है, जैसे, जनेटिक बीमारी, REM Sleep Disorder या सूंघने की क्षमता (Smell) का जल्दी खत्म होना.

FDA अप्रूवल और फ्यूचर

अभी इस टेस्ट पर और ट्रायल होंगे. लेकिन हाल ही में FDA ने Alzheimer’s disease के लिए ब्लड टेस्ट को मंजूरी दी है, जिससे उम्मीद है कि पार्किंसन टेस्ट को भी जल्दी अप्रूवल मिल सकता है. भविष्य में यह टेस्ट सिर्फ डायग्नोस करने के लिए ही नहीं बल्कि डिजीज प्रोग्रेशन ट्रैक करने और ट्रीटमेंट का असर देखने के लिए भी काम आ सकता है. अगर सब ठीक रहा तो यह टेस्ट रूटीन हेल्थ चेकअप का हिस्सा बन सकता है. रिसर्चर्स मानते हैं कि आने वाले समय में इस टेस्ट को और बड़े स्तर पर जांचा जाएगा. साथ ही इसमें और बायोमार्कर्स जोड़कर इसे और सटीक बनाया जाएगा. भविष्य में जेनेटिक टेस्टिंग और ब्रेन इमेजिंग के साथ मिलकर यह एक ताकतवर डायग्नोस्टिक टूल बन सकता है.

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रोज खाइए इस छोटी सी सफेद चीज के तीन टुकड़े, एक नहीं 10 हैं फायदे

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Health Benefits of Garlic: लहसुन भारतीय रसोई का वो खास मसाला है जो खाने का स्वाद तो बढ़ाता ही है, साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसे लेकर डॉ. शेफाली पंड्या बताती हैं कि, रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन के 3 टुकड़े खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं. यहकेवल इम्युनिटी को मजबूत करता है, बल्कि दिल और पाचन और त्वचा के लिए भी लाभकारी है.

इम्युनिटी को मजबूत बनाता है

लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं कम होती हैं.

दिल को रखे स्वस्थ

लहसुन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को भी घटाता है.

पाचन को बनाए दुरुस्त

खाली पेट लहसुन खाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी से राहत दिलाता है.

डायबिटीज कंट्रोल में मददगार

लहसुन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायक है. डायबिटीज के मरीजों के लिए यह प्राकृतिक औषधि का काम करता है.

कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

लहसुन “बैड कोलेस्ट्रॉल” (LDL) को कम करता है और “गुड कोलेस्ट्रॉल” (HDL) को बढ़ाता है, जिससे धमनियों में रुकावट नहीं होती.

शरीर से टॉक्सिन निकालता है

लहसुन शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है. यह खून को साफ करता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालता है.

वजन घटाने में सहायक

लहसुन का सेवन मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्न जल्दी होता है. यह वज़न घटाने वालों के लिए बेहद फायदेमंद है.

हड्डियों को बनाए मजबूत

लहसुन में सल्फर यौगिक और मिनरल्स होते हैं, जो हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए ज़रूरी हैं. यह गठिया जैसी समस्याओं में भी लाभ देता है.

त्वचा और बालों को रखे हेल्दी

लहसुन के एंटी-ऑक्सीडेंट गुण झुर्रियों को कम करते हैं और स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं=. साथ ही यह बालों को झड़ने से रोकता है.

संक्रमण से बचाव

लहसुन में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं, जो फंगल इन्फेक्शन और अन्य संक्रमणों से शरीर को बचाते हैं.

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