क्या सच में एग योक से होता है हार्ट अटैक? एक्सपर्ट्स ने बताया इस मिथक के पीछे का बड़ा सच

क्या सच में एग योक से होता है हार्ट अटैक? एक्सपर्ट्स ने बताया इस मिथक के पीछे का बड़ा सच


पिछले कुछ सालों में हेल्थ और फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता बड़ी है, लेकिन इसके साथ ही कई मिथक भी तेजी से फैलने लगे हैं. इनमें से एक बड़ा दावा यह है कि अंडे की जर्दी यानी एक योक दिल के लिए खतरनाक होती है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. कई लोग वजन और कोलेस्ट्रॉल के डर से केवल एग व्हाइट खाना पसंद करते हैं और योक को हटा देते हैं. लेकिन क्या यह डर वाकई सही है. इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स इस मिथक के पीछे का सच बताते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या सच में एग योक से हार्ट अटैक होता है और इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्या बड़ा सच बताते हैं.

एग योक से नहीं बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स के अनुसार हमारे शरीर में 80 प्रतिशत कोलेस्ट्रॉल लिवर खुद बनाता है. यानी खाने से मिलने वाला कोलेस्ट्रॉल खून में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि एग योक खाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा नहीं बढ़ता, बल्कि यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देता है. एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि 1.5 लाख लोगों पर हुई एक स्टडी में सामने आया कि रोज एक अंडा खाने से दिल की बीमारियों का खतरा नहीं बढ़ता है.

एग योक के फायदे भी ज्यादा

एक्सपर्ट्स के अनुसार अंडे की जर्दी में मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं. एग योक हमारे शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है. ल्यूटिन, काॅलीन और कई आवश्यक विटामिन दिल, लिवर और दिमाग को हेल्दी रखता है. एक्सपर्ट्स इसे लेकर वजन बढ़ाने या कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने की गलतफहमी को भी पूरी तरह मिथक बताते हैं. वह बताते हैं कि एक हेल्दी नॉन- डायबेटिक और नॉन हाइपरटेंसिव व्यक्ति रोजाना तीन पूरे अंडे खा सकता है.

समस्या एग योक में नहीं कुकिंग स्टाइल में

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादातर परेशानी एक योक में नहीं बल्कि उसे पकाने के तरीके में होती है. बटर, क्रीम या ज्यादा तेल में बनी एग डिशेज पाचन में दिक्कत और फैट बढ़ा सकती है. ऐसे में एग को हेल्दी तरीके से पकाना जरूरी है. वहीं एक्सपर्ट्स बताते हैं कि एक उबले अंडे में 77 कैलोरीज, 3.5 ग्राम टोटल फैट, 1.6 ग्राम सैचुरेटेड फैट, 186 एमजी कोलेस्ट्रॉल, 62 एमजी सोडियम, 0.56 ग्राम कार्ब्स, 0.56 ग्राम शुगर और 6.3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा एग में विटामिन ए, डी, ई, के और कई तरह के विटामिन बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सफदरजंग में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन ट्रीटमेंट शुरू, डिप्रेशन–OCD मरीजों का फ्री होगा इलाज

सफदरजंग में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन ट्रीटमेंट शुरू, डिप्रेशन–OCD मरीजों का फ्री होगा इलाज



राजधानी दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी पहल करते हुए मुफ्त न्यूरोमॉड्यूलेशन उपचार की शुरुआत कर दी है. यह कदम ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद लेकर आया है, जिन्हें पारंपरिक दवाओं या काउंसलिंग से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता.

कई गंभीर मानसिक रोगों में मिलेगा लाभ

सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग ने 6 दिसंबर 2025 को रैपिटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (rTMS), मॉडिफाइड इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (mECT) और ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिम्युलेशन (tDCS) जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस मुफ्त सेवाएं शुरू कीं. ये उपचार उन मरीजों के लिए खास तौर पर प्रभावी माने जाते हैं, जिन्हें दवाओं के बावजूद सुधार नहीं दिखता.

इन रोगियों के लिए नई उम्मीद

विशेषज्ञों के अनुसार, नई सेवाएं गंभीर अवसाद, ऑब्सेसिव–कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), स्किज़ोफ्रेनिया सहित कई मानसिक बीमारियों में अत्यंत प्रभावी हो सकती हैं. अक्सर ऐसे मरीजों को दवा और काउंसलिंग के साथ वैकल्पिक तकनीकों की जरूरत होती है, जिसे अब सफदरजंग अस्पताल मुफ्त उपलब्ध कराएगा.

सरकार के मानसिक स्वास्थ्य मिशन को भी मिलेगी मजबूती

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह पहल न सिर्फ सेवा विस्तार है, बल्कि संवेदनशील और समान अवसर आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है. यह पहल केंद्र सरकार के उन प्रयासों को भी मजबूती देती है, जिनका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को देशभर में सुलभ बनाना है.

आर्थिक स्थिति अब उपचार में बाधा नहीं बनेगी

VMMC और सफदरजंग अस्पताल लंबे समय से इस मिशन पर काम कर रहे हैं कि कोई भी मरीज आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रह जाए. न्यूरोमॉड्यूलेशन सेवाओं की शुरुआत इसी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है, खासकर उन मरीजों के लिए जो महंगे उपचार वहन नहीं कर पाते.

ये अधिकारी रहे मौजूद

उद्घाटन समारोह में निदेशक डॉ. संदीप बंसल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. चारु बाम्बा और मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज वर्मा मौजूद रहे. अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे मरीजों के लिए बड़ा राहत कदम बताया. उनका कहना था कि आधुनिक, साक्ष्य-आधारित थेरेपी को जनता तक बिना किसी शुल्क के पहुंचाना मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम बदलाव है.

इसे भी पढ़ें: Jaggery Side Effects: सर्दियों में क्या आप भी फायदेमंद समझ भर-भरकर खाते हैं गुड़, ज्यादा गुड़ खाने से क्या होती हैं दिक्कतें?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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लिवर कैंसर से पहले शरीर करता है ये 5 इशारे, पहचान लिया तो बच जाएगी जान

लिवर कैंसर से पहले शरीर करता है ये 5 इशारे, पहचान लिया तो बच जाएगी जान


लिवर हमारे शरीर के दाहिने हिस्से में होता है, इसलिए जब इसमें कोई समस्या होती है तो उसी हिस्से में दर्द, भारीपन या खिंचाव महसूस होता है. अगर आपको भी ऐसा दर्द होता है और लगातार बना रहे या बढ़ जाता तो यह लिवर कैंसर का शुरुआत हो सकता है. वहीं कई लोग इसे गैस समझकर अनदेखा करते हैं जो खतरनाक होता है.

वहीं अगर आप डाइट या एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं और फिर भी वजन तेजी से कम हो रहा है तो भी लिवर कैंसर का संकेत हो सकता है. दरअसल, ट्यूमर के कारण शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होने लगती है, जिससे बिना कुछ किए भी वजन गिरने लगता है.

वहीं अगर आप डाइट या एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं और फिर भी वजन तेजी से कम हो रहा है तो भी लिवर कैंसर का संकेत हो सकता है. दरअसल, ट्यूमर के कारण शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होने लगती है, जिससे बिना कुछ किए भी वजन गिरने लगता है.

इसके अलावा भूख में कमी और जल्दी पेट भर जाना लिवर की खराब पाचन क्रिया को सीधे प्रभावित करता है. इस कारण खाने की इच्छा कम होती है और थोड़ा सा खाना खाने के बाद भी पेट भर भारी महसूस होता है. यह भी ज्यादातर लिवर कैंसर का शुरुआती के संकेत हो सकता है.

इसके अलावा भूख में कमी और जल्दी पेट भर जाना लिवर की खराब पाचन क्रिया को सीधे प्रभावित करता है. इस कारण खाने की इच्छा कम होती है और थोड़ा सा खाना खाने के बाद भी पेट भर भारी महसूस होता है. यह भी ज्यादातर लिवर कैंसर का शुरुआती के संकेत हो सकता है.

वहीं लिवर खराब होने पर शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, जिससे आंखें और स्किन पीली पड़ने लगती है. वहीं अगर अचानक पीलिया हो जाए और लंबे समय तक ठीक न हो तो इसे भी बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह भी लिवर कैंसर का गंभीर संकेत हो सकता है.

वहीं लिवर खराब होने पर शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, जिससे आंखें और स्किन पीली पड़ने लगती है. वहीं अगर अचानक पीलिया हो जाए और लंबे समय तक ठीक न हो तो इसे भी बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह भी लिवर कैंसर का गंभीर संकेत हो सकता है.

जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता है तो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है. इसी कारण लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस होती है. यह थकान आराम करने के बाद भी दूर नहीं होती है जो कैंसर का चेतावनी संकेत हो सकता है.

जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता है तो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है. इसी कारण लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस होती है. यह थकान आराम करने के बाद भी दूर नहीं होती है जो कैंसर का चेतावनी संकेत हो सकता है.

Published at : 08 Dec 2025 05:54 PM (IST)

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सर्दियों में क्या फायदेमंद समझ भर-भरकर खाते हैं गुड़, ज्यादा गुड़ खाने से होती हैं ये दिक्कतें?

सर्दियों में क्या फायदेमंद समझ भर-भरकर खाते हैं गुड़, ज्यादा गुड़ खाने से होती हैं ये दिक्कतें?



Disadvantages Of Eating Jaggery: भारत में मीठा खाना सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक तरह की परंपरा है. कई लोग इसे स्वाद के लिए खाते हैं, तो कई अपनी फिटनेस या डायबिटीज जैसी स्थितियों के कारण मीठे से दूरी बनाए रखते हैं. फिर भी थोड़ा-सा मीठा मन को अच्छा महसूस कराता है, और ज्यादातर लोग रिफाइंड शुगर की जगह ‘नेचुरल स्वीट’ चुनना ज्यादा हेल्दी मानते हैं. इन्हीं में से सबसे पसंद किया जाने वाला विकल्प है गुड़. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर दिन गुड़ खाना कितना सुरक्षित है? अगर आप बिना सोचे-समझे गुड़ खा रहे हैं, तो एक बार इसके नुकसान जानना जरूरी है.

क्यों गुड़ हमेशा सुरक्षित विकल्प नहीं होता?

गुड़ में आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इसे हेल्दी माना जाता है. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि किसी भी चीज की अधिकता नुकसान करती है, गुड़ पर भी यही नियम लागू होता है. अगर आपको डायबिटीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं हैं, तो गुड़ आपकी ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा सकता है. इसलिए इसे हेल्दी समझकर ज़रूरत से ज्यादा खाना कई दिक्कतें पैदा कर सकता है.

गुड़ में भी है शुगर और काफी मात्रा में

कई लोग गुड़ को चीनी का सुरक्षित विकल्प मानकर रोजाना खाते हैं, लेकिन उन्हें शायद पता नहीं कि 100 ग्राम गुड़ में करीब 10 से 15 ग्राम फ्रक्टोज होता है. रोजाना गुड़ खाने से ब्लड शुगर बढ़ना बिल्कुल संभव है. यानी जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर गुड़ भी चीनी की तरह ही काम करता है कि इसलिए खाने से पहले जरूर सोचें.

इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है

गुड़ गन्ने के रस से तैयार किया जाता है और इसे बनाने की प्रक्रिया हमेशा साफ-सुथरी नहीं होती. कई बार कच्चे रस की ठीक से सफाई न होने पर इसमें कीटाणु या अशुद्धियां रह जाती हैं. अगर गुड़ की गुणवत्ता खराब है या यह गंदे माहौल में बना है, तो इससे पेट के इंफेक्शन होने की संभावना रहती है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद ब्रांड का गुड़ ही चुनें और एक बार में ज़रूरत से ज्यादा न खाएं.

खाने से एलर्जी भी हो सकती है

आमतौर पर गुड़ को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी अधिक मात्रा एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकती है, जैसे पेट दर्द, सर्दी, खांसी, मतली, सिरदर्द या उल्टी.
इसलिए अगर गुड़ खाने के बाद शरीर में कोई असामान्य प्रतिक्रिया दिखे, तो इसे नियंत्रित मात्रा में ही लें.

वजन बढ़ने का भी खतरा

हेल्थ-कॉन्शियस लोग अक्सर सोचते हैं कि गुड़ खाने से उनकी डाइट पर असर नहीं पड़ेगा. लेकिन सच यह है कि गुड़ में फ्रक्टोज, ग्लूकोज और कुछ मात्रा में फैट भी मौजूद रहता है. सिर्फ 100 ग्राम गुड़ में लगभग 383 कैलोरी होती हैं, इसलिए इसका ज्यादा सेवन वजन बढ़ाने में योगदान दे सकता है.

ज्यादा गुड़ पाचन गड़बड़ कर सकता है

थोड़ी मात्रा में गुड़ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, लेकिन अधिक मात्रा में यह पाचन को बिगाड़ देता है. गुड़ शरीर में गर्मी पैदा करता है कि इससे पेट में जलन, कब्ज या असहजता हो सकती है. इसलिए गुड़ खाने का सही तरीका है, कम मात्रा, सही समय और गुणवत्ता पर ध्यान.

इसे भी पढ़ें- पित्त की पथरी अब बच्चों में भी आम, क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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15 साल उम्र होते ही दिखने लगते हैं ये 5 लक्षण, इग्नोर करने वालों को हो जाता है यह कैंसर

15 साल उम्र होते ही दिखने लगते हैं ये 5 लक्षण, इग्नोर करने वालों को हो जाता है यह कैंसर


दरअसल, बच्चों में कैंसर बहुत दुर्लभ होता है, इसलिए सामान्य बच्चों के लिए कोई रूटीन स्क्रीनिंग टेस्ट की सलाह नहीं दी जाती. लेकिन जिन बच्चों में जेनेटिक जोखिम होता है, उन्हें डॉक्टर जेनेटिक काउंसलिंग या टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं.

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी बच्चों में कैंसर के आम लक्षणों में गर्दन, सीने, बगल या पेट में नई गांठ या सूजन शामिल है. बिना वजह होने वाली बहुत ज्यादा थकान भी एक महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत है.

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी बच्चों में कैंसर के आम लक्षणों में गर्दन, सीने, बगल या पेट में नई गांठ या सूजन शामिल है. बिना वजह होने वाली बहुत ज्यादा थकान भी एक महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत है.

बिना कारण चोट लगना, आसानी से खून बहना या रुकने में दिक्कत, बिना वजह दर्द होना, चलने में लड़खड़ाना या लंगड़ाना भी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं.

बिना कारण चोट लगना, आसानी से खून बहना या रुकने में दिक्कत, बिना वजह दर्द होना, चलने में लड़खड़ाना या लंगड़ाना भी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं.

अनजान बुखार, लंबे समय तक ठीक न होने वाली बीमारी, बार-बार सिरदर्द के साथ उल्टी, आंखों या नजर में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंख के बीच सफेद चमक दिखना भी एक चेतावनी है.

अनजान बुखार, लंबे समय तक ठीक न होने वाली बीमारी, बार-बार सिरदर्द के साथ उल्टी, आंखों या नजर में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंख के बीच सफेद चमक दिखना भी एक चेतावनी है.

बिना कोशिश के तेजी से वजन कम होना भी एक आम लक्षण है. हालांकि ये संकेत कई सामान्य बीमारियों में भी दिख सकते हैं, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

बिना कोशिश के तेजी से वजन कम होना भी एक आम लक्षण है. हालांकि ये संकेत कई सामान्य बीमारियों में भी दिख सकते हैं, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

डॉक्टर पहले बच्चे का मेडिकल हिस्ट्री  और लक्षण समझते हैं, फिर शारीरिक जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर वे ब्लड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट या गांठ होने पर बायोप्सी करवाकर उसकी जांच कर सकते हैं.

डॉक्टर पहले बच्चे का मेडिकल हिस्ट्री और लक्षण समझते हैं, फिर शारीरिक जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर वे ब्लड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट या गांठ होने पर बायोप्सी करवाकर उसकी जांच कर सकते हैं.

Published at : 08 Dec 2025 03:11 PM (IST)

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साइलेंट किलर होती हैं ये 5 बीमारियां, बिना कोई वॉर्निंग दिए बना लेती हैं अपना शिकार

साइलेंट किलर होती हैं ये 5 बीमारियां, बिना कोई वॉर्निंग दिए बना लेती हैं अपना शिकार



Diseases With No Early Symptoms: अक्सर लोग मानते हैं कि शरीर हर समस्या का संकेत खुद दे देता है, लेकिन सच यह है कि कई गंभीर बीमारियां धीरे-धीरे बिना किसी जाहिर लक्षण के बढ़ती रहती हैं. इन्हें ही ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है. ये दिल, लीवर, किडनी और पैंक्रियाज जैसे अहम अंगों को चुपचाप नुकसान पहुंचाती रहती हैं. जब तक इनके लक्षण सामने आते हैं, तब तक कई बार शरीर को बड़ा नुकसान हो चुका होता है. इसलिए इन बीमारियों के बारे में जागरूक रहना और उनके जोखिम कारणों को समझना बेहद जरूरी है. नियमित हेल्थ चेकअप, सही लाइफस्टाइल और समय पर जांच ही इन छिपे हुए खतरों से बचाने का सबसे असरदार तरीका है. चलिए आपको 5 बीमारियों के बारे में बताते हैं. 

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी

WHO का कहना है कि नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीजेस आज दुनिया में सबसे बड़े छिपे हुए किलर हैं, जो हर साल करीब तीन-चौथाई मौतों के लिए जिम्मेदार हैं. इन बीमारियों में हार्ट की बीमारी, कैंसर, क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज और डायबिटीज शामिल हैं, जो धीरे-धीरे महीनों या सालों में बढ़ती हैं और अचानक गंभीर रूप ले लेती हैं. इसमें

 फैटी लिवर रोग

जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो शुरुआत में इसका कोई ख़ास लक्षण दिखाई नहीं देता. यही वजह है कि कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. समय रहते ध्यान न देने पर यह सूजन, स्कारिंग और बाद में लिवर फेलियर तक का कारण बन सकता है.

कैसे बचें
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन कंट्रोल और समय-समय पर लिवर टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है.

 हार्ट डिजीज

दिल की बीमारी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण है. कई बार शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नजर नहीं आते. जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज में नसें धीरे-धीरे संकरी होती जाती हैं, लेकिन दर्द या असुविधा महसूस नहीं होती और अचानक दिल का दौरा आ सकता है. साइलेंट हार्ट अटैक भी बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इसमें छाती में तेज दर्द नहीं होता, बल्कि थकान, हल्का दर्द या सांस फूलने जैसी मामूली बातें नज़र आती हैं, जिन्हें लोग इग्नोर कर देते हैं.

कैसे बचें

हार्ट-हेल्दी डाइट, व्यायाम, तनाव कम करना और नियमित हार्ट चेकअप सबसे जरूरी हैं.

 हाइपरटेंशन 

हाइपरटेंशन  को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी संकेत के बढ़ता रहता है. यह धीरे-धीरे रक्त वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है और दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेलियर तक का कारण बन सकता है.

कैसे बचें

रोज ब्लड प्रेशर चेक करना, नमक कम करना, एक्टिव रहना, शराब-तंबाकू से दूरी और तनाव कंट्रोल करना.

एचआईवी और एड्स

HIV इंफेक्शन शुरू में कोई खास लक्षण नहीं दिखाता. कई बार हल्का बुखार या गले में दर्द जैसे सामान्य संकेत दिखते हैं, जिन्हें लोग सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन वायरस धीरे-धीरे इम्यून सिस्टम को कमजोर करता रहता है.

कैसे बचें

सेफ फिजिकल रिलेशन प्रैक्टिस करें, नियमित HIV टेस्ट करवाएं और पॉजिटिव होने पर ART ट्रीटमेंट समय पर शुरू करें. इससे वायरस नियंत्रण में रहता है और AIDS बनने से रोका जा सकता है.

टाइप-2 डायबिटीज

इस बीमारी में शरीर इंसुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देता या पर्याप्त इंसुलिन बन नहीं पाता. शुरुआती समय में इसके कोई अलग लक्षण नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे यह दिल, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है.

कैसे बचें

संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच से इस बीमारी को शुरुआती स्टेप्स में पकड़ा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- Low Calorie Snacks: मूंगफली या मखाना… वजन घटाने के लिए कौन-सा स्नैक्स बेस्ट? देख लें पूरी रिपोर्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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