कुत्ते को अपने बिस्तर पर तो नहीं सुलाते आप, डॉक्टर्स से जानिए ये कितना खतरनाक

कुत्ते को अपने बिस्तर पर तो नहीं सुलाते आप, डॉक्टर्स से जानिए ये कितना खतरनाक


Sleeping with Dog Health Risk: आजकल पालतू कुत्ते सिर्फ घर के पहरेदार ही नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुके हैं. लोग अपने डॉग्स को बच्चे की तरह प्यार करते हैं, उनके साथ खेलते हैं, खाते हैं और यहां तक कि कई लोग उन्हें अपने बिस्तर पर सुलाना भी पसंद करते ह. । यह आदत सुनने में तो बहुत प्यारी और भावनात्मक लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डॉक्टर्स के अनुसार कुत्ते को अपने बेड पर सुलाना सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकता है?

क्यों लोग कुत्ते को अपने बिस्तर पर सुलाते हैं?

  • प्यार और अपनापन दिखाने के लिए
  • कुत्ते को अकेलापन न लगे
  • ठंड के मौसम में गर्माहट पाने के लिए
  • सुरक्षा और मानसिक सुकून के लिए

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डॉक्टर्स क्या कहते हैं?

  • डॉ. नरेश राखा बताते हैं कि, कुत्ते को बेड पर सुलाना कई बार हानिकारक साबित हो सकता है
  • एलर्जी का खतरा कुत्तों के बाल, डैंडर और उनकी त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया से एलर्जी और सांस की समस्या हो सकती है
  • संक्रमण का रिस्क कुत्ते मिट्टी और गंदगी में घूमते हैं, जिससे उनके पंजों और फर पर बैक्टीरिया और परजीवी चिपक जाते हैं। ये सीधे आपके बिस्तर तक पहुंच जाते हैं
  • नींद में खलल पालतू जानवर रात में करवट बदलते रहते हैं, जिससे आपकी नींद बार-बार टूट सकती है
  • त्वचा रोग कुत्तों की स्किन पर मौजूद फंगस या कीड़े मनुष्य तक पहुंचकर त्वचा रोग पैदा कर सकते हैं

किन लोगों को खासतौर पर सावधान रहना चाहिए?

  • जिनको अस्थमा या एलर्जी की समस्या हो
  • बच्चों और बुजुर्गों को जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो
  • प्रेग्नेंट महिलाएं, क्योंकि संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है
  • त्वचा रोग से पीड़ित लोग
  • कुत्ते को बेड पर सुलाना ही है तो ये सावधानियां बरतें
  • कुत्ते को रोजाना नहलाएं और उसके फर की सफाई करें
  • बेड पर चढ़ाने से पहले उसके पंजे धो दें
  • उसके लिए अलग कंबल या बेडशीट का इस्तेमाल करें
  • नियमित रूप से डॉग की वैक्सिनेशन और डिवार्मिंग कराएं

कुत्ते को अपने बेड पर सुलाना भावनात्मक रूप से अच्छा लग सकता है, लेकिन डॉक्टर्स की मानें तो यह स्वास्थ्य के लिए कई तरह से हानिकारक हो सकता है. यदि आप ऐसा करना चाहते हैं, तो ऊपर बताई गई सावधानियों का ध्यान ज़रूर रखें। याद रखें, प्यार जरूरी है लेकिन सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या मानसून में गंजा कराने से रुक जाता है हेयर फॉल? हेयर एक्सपर्ट से समझें जरूरी बात

क्या मानसून में गंजा कराने से रुक जाता है हेयर फॉल? हेयर एक्सपर्ट से समझें जरूरी बात


बरसात का मौसम यानी मानसून अक्सर हमारे बालों की सेहत पर असर डालता है. कई लोगों को लगता है कि इस मौसम में बालों का झड़ना कम हो जाता है या गंजापन रुक जाता है. लेकिन क्या सच में मानसून में हेयर फॉल रुक जाता है? हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार, मौसम बदलने से बालों की ग्रोथ पर कुछ असर पड़ता है, लेकिन यह पूरी तरह से गंजापन रोकने का उपाय नहीं है.

मानसून और बालों का झड़ना

बरसात में हवा और नमी ज्यादा होती है, जिससे बाल मुलायम और चमकदार नजर आते हैं. हालांकि, यह केवल बाहरी नमी का असर होता है, बालों की जड़ों से जुड़ी समस्या यानी हेयर फॉल और गंजापन मौसम बदलने से पूरी तरह नहीं रुकते. असली कारण आमतौर पर पोषण की कमी, हॉर्मोनल इंबैलेंस, स्ट्रेस और स्कैल्प की समस्याएं होती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

मानसून में बालों की देखभाल को लेकर फेमस डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर एक्सपर्ट अंकुर सरीन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में बालों की समस्याएं बढ़ जाती हैं, खासकर बाल झड़ने की समस्या आम हो जाती है. एक्सपर्ट के अनुसार उन्होंने यहां बताया है कि अगर हम कुछ आसान आदतें अपनाएं तो इस परेशानी से बचा जा सकता है.

डॉ. सरीन के अनुसार, मानसून में बालों को हेल्दी रखने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार तेल लगाना बहुत जरूरी है. तेल बालों को पोषण देता है और उन्हें टूटने या डैमेज होने से बचाता हैय मानसून के दौरान बाल पहले से ही कमजोर होते हैं, इसलिए उन्हें extra ध्यान की जरूरत होती है.

हेयर फॉल रोकने के लिए जरूरी बातें

सही डाइट: बालों को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन, आयरन, विटामिन B और विटामिन D बहुत जरूरी हैं. दाल, अंडा, हरी सब्जियां और नट्स को डाइट में शामिल करें.

स्कैल्प की सफाई: मानसून में बाल जल्दी गीले हो जाते हैं, जिससे डैंड्रफ और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. हफ्ते में 2-3 बार हल्के शैम्पू से बाल धोना चाहिए.

ऑयलिंग: हल्के नारियल या आर्गन तेल की मसाज बालों की जड़ों को मजबूत करती है और सिर की त्वचा को मॉइश्चराइज रखती है.

स्ट्रेस मैनेजमेंट- स्ट्रेस भी हेयर फॉल का बड़ा कारण है. मेडिटेशन, योग और पर्याप्त नींद लेने से बालों की सेहत बेहतर रहती है.

मेडिकल चेकअप: अगर अचानक बाल ज्यादा झड़ रहे हैं, तो हेयर एक्सपर्ट या डर्मेटोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें. यह हॉर्मोनल इश्यू या थायरॉइड जैसी समस्या की वजह से भी हो सकता है.

हेयर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गंजापन रोकने के लिए समय पर हेयर फॉल ट्रीटमेंट शुरू करना जरूरी है. माइनॉक्सिडिल या अन्य डॉक्टर की सलाह वाले टॉपिकल मेडिसिन का इस्तेमाल बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद कर सकता है. इसके साथ ही हेयर ड्रायर और स्ट्रेटनिंग जैसे हार्ड ट्रीटमेंट कम इस्तेमाल करें ताकि बाल कमजोर न हों. मानसून में बालों का झड़ना थोड़ा कम दिख सकता है, लेकिन यह गंजापन रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है. संतुलित डाइट, स्कैल्प की सही देखभाल, स्ट्रेस कम करना और समय पर एक्सपर्ट की सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण है. याद रखें, स्वस्थ बाल केवल मौसम पर नहीं बल्कि सही जीवनशैली और देखभाल पर निर्भर करते हैं.

इसे भी पढ़ें: मॉनसून में टूटने लगे हैं बाल तो क्या गंजा होना है सटीक इलाज, क्या कहते हैं हेयर एक्सपर्ट्स?

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पैरों में क्यों पहनते हैं काला धागा? जान लें इससे जरूरी बातें

पैरों में क्यों पहनते हैं काला धागा? जान लें इससे जरूरी बातें


Benefits of Wearing Black Thread on Leg: भारत में परंपराओं और मान्यताओं का गहरा रिश्ता हमारी जीवनशैली से जुड़ा हुआ है.इन्हीं मान्यताओं में से एक है काला धागा पहनना, खासकर पैरों मेंअक्सर आपने देखा होगा कि बच्चे, महिलाएं पैरों की एड़ी या टखने में काला धागा पहनते हैं. कई लोग इसे सिर्फ अंधविश्वास मानते हैं, तो कुछ इसे स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा बताते हैं. लेकिन आखिर पैरों में काला धागा पहनने का क्या कारण है और इसके पीछे कौन-सी मान्यताए छिपी हैं?

नजर से बचाने का उपाय

भारतीय परंपरा में यह माना जाता है कि काला धागा बुरी नजर से बचाता है. खासकर छोटे बच्चों के पैरों में यह इसलिए बांधा जाता है ताकि उन पर नजर न लगे और वे स्वस्थ रहें। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है, इसीलिए पैरों में काला धागा पहनना शुभ माना जाता है.

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धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, काला धागा पहनना शनि दोष और राहु-केतु से संबंधित परेशानियों को कम करता है. पैरों में काला धागा पहनने से ग्रहों का बुरा असर कम होता है और जीवन में नकारात्मकता घटती है. कई लोग इसे मंगलवार या शनिवार को विशेष विधि से धारण करते हैं ताकि इसका प्रभाव और भी बढ़ सके.

स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यता

  • यह पैरों की नसों को मजबूती प्रदान करता है
  • थकान और पैरों में होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है
  • कुछ लोग मानते हैं कि इससे ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है
  • इन दावों के पीछे वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी इसे एक कारगर घरेलू उपाय माना जाता है

बच्चों में काला धागा पहनाने की परंपरा

छोटे बच्चों के पैरों में काला धागा बांधना एक आम परंपरा है. इसका उद्देश्य उन्हें नज़र से बचाना और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखना होता है. कई परिवारों में इसे जन्म के तुरंत बाद ही बच्चे को पहनाया जाता है.

फैशन और ट्रेंड के लिए पहनना

आज के समय में पैरों में काला धागा पहनना सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं है. यह धीरे-धीरे फैशन का हिस्सा भी बन गया है. कई युवा इसे एंकलेट या स्टाइलिश धागे की तरह पहनते हैं. इसमें मोती या छोटे-छोटे चार्म्स भी लगाए जाते हैं, जो इसे और आकर्षक बना देते हैं.

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आपने अपना टूथब्रश कब से नहीं बदला? जानें ओरल हेल्थ के लिए ये कितना खतरनाक

आपने अपना टूथब्रश कब से नहीं बदला? जानें ओरल हेल्थ के लिए ये कितना खतरनाक


हम सभी रोजाना दांतों की सफाई के लिए टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप अपना टूथब्रश समय पर नहीं बदलते हैं, तो यह आपकी ओरल हेल्थ के लिए काफी खतरनाक हो सकता है? डॉक्टर और डेंटल एक्सपर्ट्स के अनुसार, टूथब्रश को हर 3-4 महीने में बदलना बेहद जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों है और अगर आप नहीं बदलते तो इसका क्या प्रभाव होता है हमारी हेल्थ पर. 

टूथब्रश पर बैक्टीरिया का खतरा

जिस चीज का खतरा सबसे ज्यादा है वह है टूथब्रश लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर बैक्टीरिया और वायरस का घर बन जाता है. हर बार जब आप दांत साफ करते हैं, तो भोजन के टुकड़े और म्यूकस ब्रिसल्स पर चिपक जाते हैं. समय के साथ ये बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं. अगर आप ऐसे टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं, तो यह गम इन्फेक्शन, मुंह की बदबू और दांतों की सड़न का कारण बन सकता है. जो आगे चलकर आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो जाता है.

ब्रसल्स का नुकसान

पुराने टूथब्रश की ब्रसल्स झड़ने लगते हैं या मुड़ जाते हैं. इससे दांतों की सफाई सही से नहीं हो पाती. साथ ही, सख्त और टेढ़ी-मेढ़ी ब्रिसल्स से मसूड़ों को चोट लग सकती है. मासूम बच्चे और बुजुर्गों में यह और भी गंभीर समस्या बन सकती है. इसके अलावा इनसे दांतों की सफाई भी पहले जितनी नहीं हो पाती है.

कैसे पहचानें कि टूथब्रश बदलने का समय आ गया?

अगर आपका टूथब्रश 3-4 महीने से ज्यादा इस्तेमाल हुआ है, ब्रसल्स झुके हुए हैं या टूथब्रश में दुर्गंध आ रही है, तो इसे तुरंत बदल दें. खासकर सर्दियों और फ्लू के सीजन में, पुराने टूथब्रश से बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है.

अच्छी ओरल हेल्थ के लिए टिप्स

  • टूथब्रश हर 3-4 महीने में बदलें.
  • टूथब्रश इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह धोकर सुखाएं.
  • टूथब्रश को ढककर रखें ताकि धूल और कीटाणु न लगें.
  • फ्लू या सर्दी-जुकाम होने पर नया टूथब्रश इस्तेमाल करें.
  • बच्चे के टूथब्रश को नियमित समय पर बदलना बेहद जरूरी है.

ओरल हेल्थ केवल दांत साफ करने तक सीमित नहीं है. टूथब्रश का समय पर बदलाव, सही ब्रशिंग तकनीक और संतुलित डाइट भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. पुराना टूथब्रश आपके दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज न करें. अपने और परिवार की मुस्कान को स्वस्थ रखने के लिए नियमित टूथब्रश बदलना जरूरी है.

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क्या एक फैलोपियन ट्यूब से नैचुरली कंसीव करना है मुश्किल? जानिए क्या कहते हैं गायोक्लॉजिस्ट

क्या एक फैलोपियन ट्यूब से नैचुरली कंसीव करना है मुश्किल? जानिए क्या कहते हैं गायोक्लॉजिस्ट


Pregnancy with One fallopian tube: प्राकृतिक रूप से मां बनना हर महिला के लिए एक खास अनुभव होता है. लेकिन क्या होगा जब आपका शरीर पूरी तरह स्वस्थ होने के बावजूद सिर्फ एक फैलोपियन ट्यूब के कारण गर्भधारण करने में मुश्किलें आएं? अक्सर महिलाएं इस सवाल से परेशान रहती हैं कि क्या एक ही फैलोपियन ट्यूब के साथ नैचुरली प्रेग्नेंट होना संभव है या नहीं।

इस मामले पर गायनोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रिया पुराणिक बताती हैं कि, यह समस्या अधिक सामान्य है जितना हम सोचते हैं और सही जानकारी और मेडिकल गाइडेंस के साथ इसे संभाला जा सकता है. यानी कंसीव किया जा सकता है.

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एक फैलोपियन ट्यूब के साथ प्रेग्नेंसी कैसी होगी

फैलोपियन ट्यूब वह मार्ग है जिसके जरिए अंडाणु अंडाशय से गर्भाशय तक पहुंचता है. जब किसी महिला की केवल एक फैलोपियन ट्यूब कार्यशील होती है, तो सवाल उठता है कि क्या अंडाणु गर्भाशय तक पहुंच पाएगा या नहीं. हालांकि डॉक्टर के मुताबिक, अगर एक ट्यूब पूरी तरह स्वस्थ है तो गर्भधारण की संभावन रहती है। हालांकि, कभी-कभी उम्र, हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है.

नैचुरली प्रेग्नेंट होने की संभावना

एक फैलोपियन ट्यूब के साथ भी महिलाएं नैचुरली कंसीव कर सकती हैं. लेकिन सही समय पर ओव्यूलेशन का पता लगाना और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखना सबसे अहम है. उदाहरण के लिए, महिला की उम्र, पीरियडिक चक्र की नियमितता और जीवनशैली जैसे फैक्टर गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करते हैं.

डॉक्टर की सलाह और मेडिकल चेकअप

अगर महिला को लंबे समय तक गर्भधारण में मुश्किल हो रही है तो डॉक्टर यूटी, फैलोपियन ट्यूब की जांच और हार्मोनल टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि, एक ट्यूब सही तरीके से काम कर रही है और अंडाणु के निषेचन में कोई रुकावट नहीं है.

जीवनशैली कैसी होनी चाहिए

  • जीवनशैली में छोटे बदलाव भी गर्भधारण की संभावना बढ़ा सकते हैं.
  • नियमित व्यायाम और योग
  • संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन और विटामिन शामिल हों
  • तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना
  • धूम्रपान और शराब से बचना

एक फैलोपियन ट्यूब होने के बावजूद नैचुरली गर्भधारण करना मुश्किल नहीं है. सही समय पर डॉक्टर से परामर्श, नियमित चेकअप और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए महिलाएं अपने सपने को पूरा कर सकती हैं.

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हर रोज पीने से शरीर को मिलते हैं ये 6 फायदे, शहद और नींबू का इस तरह करें सेवन

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शरीर को डिटॉक्स करना: गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से शरीर के अंदर जमा टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं. यह ड्रिंक नैचुरल डिटॉक्स वॉटर की तरह काम करता है और पाचन तंत्र को भी साफ रखता है.

वजन घटाने में मददगार: अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट शहद-नींबू का सेवन जरूर करें. यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और फैट बर्न करने में मदद करता है.

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इम्यूनिटी बढ़ाने में असरदार: शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और नींबू में विटामिन C शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव होता है.

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स्किन को बनाएं ग्लोइंग: नींबू और शहद का कॉम्बिनेशन स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं. यह चेहरे की डलनेस, पिंपल और दाग-धब्बे कम करता है और त्वचा को नेचुरल ग्लो देता है.

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दिल की सेहत के लिए लाभकारी: शहद-नींबू का पानी कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है. इससे हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है और हृदय स्वस्थ रहता है.

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एनर्जी बूस्टर और थकान दूर करे: दिन की शुरुआत शहद-नींबू पानी से करने पर शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है. यह थकान और कमजोरी को दूर कर आपको पूरे दिन एक्टिव रखता है.

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Published at : 19 Aug 2025 09:52 AM (IST)


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