स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल क्यों बढ़ता है? जानें इसे प्राकृतिक रूप से कम करने के तरीके

स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल क्यों बढ़ता है? जानें इसे प्राकृतिक रूप से कम करने के तरीके


कॉर्टिसोल डिटॉक्स का मतलब किसी खास डाइट या दवा से नहीं है, बल्कि ऐसे डेली लाइफस्टाइल के बदलावों से है जो धीरे-धीरे तनाव को कम करके शरीर को संतुलन में लाते हैं. यह तरीका तेज़ नतीजों का वादा नहीं करता, लेकिन लंबे समय में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है.

NIH के स्टडी में पाया गया है कि हमारा लाइफस्टाइल, जैसे नींद, कैफीन, मूड, एक्सरसाइज और इमोशनल स्थिति कॉर्टिसोल पर सीधा असर डालता है. इसलिए छोटी आदतों में सुधार करना ही कॉर्टिसोल को स्वाभाविक रूप से कम करने का सबसे सरल रास्ता है.

NIH के स्टडी में पाया गया है कि हमारा लाइफस्टाइल, जैसे नींद, कैफीन, मूड, एक्सरसाइज और इमोशनल स्थिति कॉर्टिसोल पर सीधा असर डालता है. इसलिए छोटी आदतों में सुधार करना ही कॉर्टिसोल को स्वाभाविक रूप से कम करने का सबसे सरल रास्ता है.

सबसे पहले बात कैफीन की. ज्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक शरीर को तनाव की स्थिति में धकेलते हैं और कॉर्टिसोल बढ़ाते हैं. इसलिए इसे सीमित करना, खासकर सुबह के बाद, शरीर के हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाए रखता है.

सबसे पहले बात कैफीन की. ज्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक शरीर को तनाव की स्थिति में धकेलते हैं और कॉर्टिसोल बढ़ाते हैं. इसलिए इसे सीमित करना, खासकर सुबह के बाद, शरीर के हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाए रखता है.

हंसी कॉर्टिसोल कम करने का सबसे आसान तरीका है. दोस्तों के साथ समय बिताना, हल्की-फुल्की बातचीत या कुछ मजेदार देखना दिमाग में ऐसे केमिकल्स पैदा करता है जो तनाव को काफी घटा देते हैं और मूड को तुरंत हल्का कर देते हैं.

हंसी कॉर्टिसोल कम करने का सबसे आसान तरीका है. दोस्तों के साथ समय बिताना, हल्की-फुल्की बातचीत या कुछ मजेदार देखना दिमाग में ऐसे केमिकल्स पैदा करता है जो तनाव को काफी घटा देते हैं और मूड को तुरंत हल्का कर देते हैं.

माइंडफुलनेस जैसे ध्यान, गहरी सांसें या कुछ मिनट योग नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं. साइंटफिक रिसर्च बताते हैं कि रोजाना सिर्फ 10 से 15 मिनट का माइंडफुलनेस अभ्यास कॉर्टिसोल कम कर सकता है और भावनात्मक स्थिरता बढ़ा सकता है.

माइंडफुलनेस जैसे ध्यान, गहरी सांसें या कुछ मिनट योग नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं. साइंटफिक रिसर्च बताते हैं कि रोजाना सिर्फ 10 से 15 मिनट का माइंडफुलनेस अभ्यास कॉर्टिसोल कम कर सकता है और भावनात्मक स्थिरता बढ़ा सकता है.

नियमित व्यायाम भी कॉर्टिसोल नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाता है. हल्की वॉक, साइक्लिंग, तैराकी या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर में जमी टेंशन को कम कर देती है. इसके साथ 7से 8 घंटे की अच्छी और लगातार नींद जरूरी है, क्योंकि खराब नींद कॉर्टिसोल को रातभर बढ़ाए रखती है.

नियमित व्यायाम भी कॉर्टिसोल नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाता है. हल्की वॉक, साइक्लिंग, तैराकी या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर में जमी टेंशन को कम कर देती है. इसके साथ 7से 8 घंटे की अच्छी और लगातार नींद जरूरी है, क्योंकि खराब नींद कॉर्टिसोल को रातभर बढ़ाए रखती है.

Psychoneuroendocrinology जैसी जर्नल्स में छपे स्टडी के मुताबिक, लगातार तनाव कम करने वाली आदतें कॉर्टिसोल को 30 प्रतिशत तक घटा सकती हैं. इससे दिल की बीमारी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और डिप्रेशन बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है. यानी ये साधारण बदलाव ही लंबे समय में मानसिक और शारीरिक सेहत को मजबूत बनाते हैं.

Psychoneuroendocrinology जैसी जर्नल्स में छपे स्टडी के मुताबिक, लगातार तनाव कम करने वाली आदतें कॉर्टिसोल को 30 प्रतिशत तक घटा सकती हैं. इससे दिल की बीमारी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और डिप्रेशन बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है. यानी ये साधारण बदलाव ही लंबे समय में मानसिक और शारीरिक सेहत को मजबूत बनाते हैं.

Published at : 21 Nov 2025 10:28 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

क्या अदरक वाली चाय सच में घटाती है वजन, जानें इस दावे को लेकर क्या कहती है रिसर्च?

क्या अदरक वाली चाय सच में घटाती है वजन, जानें इस दावे को लेकर क्या कहती है रिसर्च?



Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

प्रोटीन की कमी के ये 5 संकेत न करें नजरअंदाज, वरना बढ़ सकती है दिक्कत

प्रोटीन की कमी के ये 5 संकेत न करें नजरअंदाज, वरना बढ़ सकती है दिक्कत


महिलाओं को रोज लगभग 46 ग्राम और पुरुषों को करीब 56 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है, या फिर शरीर के हर किलो वजन पर लगभग 0.8 ग्राम. जब यह जरूरत पूरी नहीं होती तो शुरुआत में हल्के-फुल्के बदलाव दिखते हैं, लेकिन वक्त रहते ध्यान न दिया जाए तो यह कमी गंभीर रूप ले सकती है.

सबसे पहला संकेत होता है शरीर में सूजन.  इसे एडिमा कहा जाता है. यह सूजन पैरों, पंजों, हाथों या पेट पर दिखाई दे सकती है. वजह यह है कि शरीर में मौजूद एल्ब्यूमिन नाम का प्रोटीन तरल को संतुलित रखने में मदद करता है. जब इसकी कमी होती है तो फ्लूइड बाहर निकलकर आसपास के टिश्यू में जमा होने लगता है. यह संकेत लिवर जैसी बीमारियों से भी जुड़ा हो सकता है, इसलिए जांच कराना जरूरी है.

सबसे पहला संकेत होता है शरीर में सूजन. इसे एडिमा कहा जाता है. यह सूजन पैरों, पंजों, हाथों या पेट पर दिखाई दे सकती है. वजह यह है कि शरीर में मौजूद एल्ब्यूमिन नाम का प्रोटीन तरल को संतुलित रखने में मदद करता है. जब इसकी कमी होती है तो फ्लूइड बाहर निकलकर आसपास के टिश्यू में जमा होने लगता है. यह संकेत लिवर जैसी बीमारियों से भी जुड़ा हो सकता है, इसलिए जांच कराना जरूरी है.

प्रोटीन की कमी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी प्रभावित करती है. मूड अचानक खराब होना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और ध्यान न लग पाना, ये सब संकेत हैं. प्रोटीन से बनने वाले अमीनो एसिड ही दिमाग के वे केमिकल बनाते हैं जो मूड और मोटिवेशन को कंट्रोल करते हैं. इनकी कमी होने पर मानसिक संतुलन पर असर दिखना स्वाभाविक है.

प्रोटीन की कमी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी प्रभावित करती है. मूड अचानक खराब होना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और ध्यान न लग पाना, ये सब संकेत हैं. प्रोटीन से बनने वाले अमीनो एसिड ही दिमाग के वे केमिकल बनाते हैं जो मूड और मोटिवेशन को कंट्रोल करते हैं. इनकी कमी होने पर मानसिक संतुलन पर असर दिखना स्वाभाविक है.

एक और आम लक्षण है लगातार थकान रहना. अगर अच्छी नींद के बाद भी शरीर बोझिल लगे या एनर्जी जल्दी खत्म हो जाए, तो यह प्रोटीन की कमी की ओर इशारा करता है. प्रोटीन खून में शुगर को स्थिर रखने, हार्मोन बनाने और शरीर को एनर्जी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कमी होने पर हमेशा थकान महसूस हो सकती है.

एक और आम लक्षण है लगातार थकान रहना. अगर अच्छी नींद के बाद भी शरीर बोझिल लगे या एनर्जी जल्दी खत्म हो जाए, तो यह प्रोटीन की कमी की ओर इशारा करता है. प्रोटीन खून में शुगर को स्थिर रखने, हार्मोन बनाने और शरीर को एनर्जी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कमी होने पर हमेशा थकान महसूस हो सकती है.

प्रोटीन की कमी का असर बाहरी रूप पर भी दिखता है. बाल झड़ना, बाल पतले होना, नाखून टूटना या त्वचा का रूखी और बेजान होना, ये सब संकेत हैं कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल रहा. क्योंकि बाल, त्वचा और नाखून बनाने वाले प्रोटीन. केराटिन, कोलेजन और इलास्टिन सही मात्रा में नहीं बन पाते.

प्रोटीन की कमी का असर बाहरी रूप पर भी दिखता है. बाल झड़ना, बाल पतले होना, नाखून टूटना या त्वचा का रूखी और बेजान होना, ये सब संकेत हैं कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल रहा. क्योंकि बाल, त्वचा और नाखून बनाने वाले प्रोटीन. केराटिन, कोलेजन और इलास्टिन सही मात्रा में नहीं बन पाते.

ऐसे लोग बहुत जल्दी भूख महसूस करते हैं. वजह सीधी है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और एनर्जी की स्थिरता बनाए रखता है. जब यह कम हो जाता है तो भूख जल्दी-जल्दी लगती है, क्रेविंग बढ़ती है और एनर्जी लगातार गिरती रहती है.

ऐसे लोग बहुत जल्दी भूख महसूस करते हैं. वजह सीधी है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और एनर्जी की स्थिरता बनाए रखता है. जब यह कम हो जाता है तो भूख जल्दी-जल्दी लगती है, क्रेविंग बढ़ती है और एनर्जी लगातार गिरती रहती है.

कुल मिलाकर, प्रोटीन की कमी पहली नजर में बड़ी समस्या नहीं लगती, लेकिन शरीर इसके छोटे-छोटे संकेत देकर हमें आगाह करता रहता है. इन लक्षणों को हल्के में न लेकर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

कुल मिलाकर, प्रोटीन की कमी पहली नजर में बड़ी समस्या नहीं लगती, लेकिन शरीर इसके छोटे-छोटे संकेत देकर हमें आगाह करता रहता है. इन लक्षणों को हल्के में न लेकर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

Published at : 21 Nov 2025 08:16 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

हार्ट फेल होने से पहले दिखते हैं ये 5 छिपे हुए संकेत, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं हम

हार्ट फेल होने से पहले दिखते हैं ये 5 छिपे हुए संकेत, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं हम


हार्ट फेल का सबसे छिपा हुआ संकेत अचानक वजन बढ़ाना है. यह शरीर में पानी जमा होने के कारण होता है. जब दिल ठीक से पंप नहीं कर पाता तो पैर, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन आने लगती है.और कुछ दिनों में वजन तेजी से बढ़ जाता है. हालांकि समय रहते पहचान पर इलाज जल्दी शुरू हो सकता है.

वहीं लेटते समय खांसी आना या सीने में घरघराहट होना दिल की परेशानियों का संकेत हो सकता है. यह इसलिए होता है क्योंकि शरीर में जमा पानी लेटते ही फेफड़ों की ओर बढ़ जाता है. जिससे सांस की नली में जलन होती है और खांसी शुरू हो जाती है. इसे हल्की खांसी समझ कर अनदेखा नहीं करना चाहिए.

वहीं लेटते समय खांसी आना या सीने में घरघराहट होना दिल की परेशानियों का संकेत हो सकता है. यह इसलिए होता है क्योंकि शरीर में जमा पानी लेटते ही फेफड़ों की ओर बढ़ जाता है. जिससे सांस की नली में जलन होती है और खांसी शुरू हो जाती है. इसे हल्की खांसी समझ कर अनदेखा नहीं करना चाहिए.

दिल की कार्य क्षमता कम होने पर पाचन तंत्र पर भी असर पड़ता है. कई लोगों को भूख न लगना, थोड़ा सा खाने पर ही पेट भर जाना या जी मिचलाना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती है. यह संकेत भी बताते हैं कि दिल शरीर में सही तरीके से खून नहीं पहुंचा पा रहा है. ऐसी समस्याओं भी आप हल्के में न लें.

दिल की कार्य क्षमता कम होने पर पाचन तंत्र पर भी असर पड़ता है. कई लोगों को भूख न लगना, थोड़ा सा खाने पर ही पेट भर जाना या जी मिचलाना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती है. यह संकेत भी बताते हैं कि दिल शरीर में सही तरीके से खून नहीं पहुंचा पा रहा है. ऐसी समस्याओं भी आप हल्के में न लें.

वहीं जब दिल शरीर को पर्याप्त खून नहीं पहुंचा पाता है तो दिमाग पर इसका सीधा असर पड़ता है. ऐसे में भ्रम होना, छोटी-छोटी बातें भूलना या ध्यान न लगना जैसे संकेत दिखाई देने लगते हैं. इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

वहीं जब दिल शरीर को पर्याप्त खून नहीं पहुंचा पाता है तो दिमाग पर इसका सीधा असर पड़ता है. ऐसे में भ्रम होना, छोटी-छोटी बातें भूलना या ध्यान न लगना जैसे संकेत दिखाई देने लगते हैं. इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

रात में बार-बार नींद खुलना, लेटते ही ही सांस फूलना या फिर ऊंचा करके तकिया लगाकर सोने की जरूरत महसूस होना यह सभी शुरुआती संकेत होते हैं कि दिल पर दबाव बढ़ रहा है. यह समस्या शरीर में जमा पानी के कारण सांस लेने में होने वाली दिक्कत से जुड़ी होती है. ऐसे में इस समस्या को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, नहीं तो हार्ट फेल होने जैसी दिक्कत भी हो सकती है.

रात में बार-बार नींद खुलना, लेटते ही ही सांस फूलना या फिर ऊंचा करके तकिया लगाकर सोने की जरूरत महसूस होना यह सभी शुरुआती संकेत होते हैं कि दिल पर दबाव बढ़ रहा है. यह समस्या शरीर में जमा पानी के कारण सांस लेने में होने वाली दिक्कत से जुड़ी होती है. ऐसे में इस समस्या को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, नहीं तो हार्ट फेल होने जैसी दिक्कत भी हो सकती है.

Published at : 21 Nov 2025 06:40 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

तिहाड़ की गौशाला में चल रही काऊ थैरेपी, यह क्या है और कैदियों के लिए कितनी फायदेमंद?

तिहाड़ की गौशाला में चल रही काऊ थैरेपी, यह क्या है और कैदियों के लिए कितनी फायदेमंद?



Prison Cow Shelter: तिहाड़ जेल में कैदियों की मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए एक नया कदम उठाया गया है. अब यहां बंदियों को अकेलापन और इमोशनल तनाव से उबरने में मदद करने के लिए काऊ थैरेपी दी जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार 19 नवंबर को उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना और दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने जेल परिसर में बनी नई गौशाला का उद्घाटन किया

तिहाड़ की गौशाला में अभी कितनी गायें?

फिलहाल तिहाड़ जेल में 10 गायों को रखा गया है. कुछ खरीदी गईं और कुछ दान में मिली हैं. गौशाला की क्षमता और 10 गायों को रखने की भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण बैकग्राउंड से आने वाले कुछ कैदियों को गायों को चारा खिलाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. दिल्ली के गृह मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी से 19 जनवरी के बीच दिल्ली पुलिस को आवारा और छोड़ दी गई गायों से जुड़े 25,000 से अधिक मामले मिले हैं. उन्होंने कहा कि राजधानी में गायों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन गौशालाएं कम हैं.

उन्होंने कहा कि “हमारी मौजूदा गौशालाओं की क्षमता 19,800 है, लेकिन इनमें 21,800 से ज्यादा पशु ठहरे हुए हैं. ऐसे में तिहाड़ जेल की पहल छोटी जरूर दिख सकती है, लेकिन यह दूर की सोच वाला कदम है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे आवारा पशुओं की देखभाल, संरक्षण और सेवा का दायरा बढ़ेगा.

कैसे मदद करेगी काऊ थैरेपी?

अब जान लेते हैं कि यह थैरेपी कैसे मदद करेगी. इसको लेकर गृह मंत्री आशीष सूद  ने इसे काऊ थैरेपी का नाम देते हुए कहा कि यह कदम उन कैदियों के लिए उम्मीद की नई किरण है जो अकेलेपन से जूझते हैं. उनके मुताबिक, गायों के साथ समय बिताने से अकेलेपन की भावना कम होती है. साथ ही, यह थैरेपी कैदियों को भावनात्मक तनाव से उबरने, झगड़ों को कम करने और आपसी करुणा बढ़ाने में भी मदद कर सकती है.

जेल महानिदेशक एस. बी. के. सिंह ने बताया कि इस विचार की प्रेरणा देश और विदेश के ऐसे कार्यक्रमों से मिली है, जहां पशुओं की मदद से कैदियों की मानसिक हालत सुधारने की कोशिश की गई.

तिहाड़ में भी कई कैदी ऐसे हैं जिन्हें परिवार से न फोन आते हैं और न मुलाकात, जिससे वे तनाव और अकेलेपन में चले जाते हैं. आपको बता दें कि 2018 में हरियाणा की जेलों में भी इसी तरह का प्रयोग किया गया था और स्वीडन जैसे देशों की कुछ कम सुरक्षा वाली जेलों में पशु-सहायता कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं.

इसे भी पढ़ें- Cat Ownership: घर में पाल रखी है बिल्ली तो हो जाएं सावधान, आपको हो सकता है सीरियस मेंटल डिसऑर्डर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp