इन दवाओं के साथ कभी मत खाना Ibuprofen, वरना सड़ जाएगी किडनी

इन दवाओं के साथ कभी मत खाना Ibuprofen, वरना सड़ जाएगी किडनी


आइबुप्रोफेन दुनियाभर में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दर्द और बुखार की सस्ती व प्रभावी दवा है, जिसे अब तक सुरक्षित माना जाता था. हालांकि, बीते कुछ साल से इसके साइड इफेक्ट्स पर बहस तेज हुई है, जिसके बाद मेडिकल एक्पर्टस और डॉक्टर्स ने कुछ लोगों को इसे पूरी तरह से अवॉइड करने की चेतावनी दी है, क्योंकि यह उन्हें गंभीर नुकसान पहुचा सकती है.

वाटरलू यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च से भी ऐसी ही वॉर्निंग मिली है कि हाई ब्लड प्रेशर की कुछ मेडिसिन्स के साथ आइबुप्रोफेन का इस्तेमाल करने से किडनी को डैमेज पहुंच सकता है. यह उन लोगों के लिए खास इंफॉर्मेशन है, जो अपनी बीपी की मेडिसन के साथ पेनकिलर भी लेते हैं.

बढ़ जाता है ट्रिपल व्हैमी का रिस्क

रिसर्च के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे कई लोग दो तरह की मेडिसन लेते हैं. पहला है  ड्यूरेटिक्स, जो बॉडी से एक्स्ट्रा पानी निकालने में हेल्प करती हैं  और रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम इनहिबिटर्स, जो ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करती हैं. अक्सर इन दोनों मेडिसन का एक साथ यूज किया जाता है.

रिसर्चर्स ने कंप्यूटर सिमुलेशन का यूज कर पाया कि जब इन दोनों मेडिसन के साथ आइबुप्रोफेन भी ली जाती है, तो कुछ इंडिविजुअल्स में एक्यूट किडनी इंजरी हो सकती है. यह एक सीरियस कंडीशन है, जिसमें किडनी अचानक ठीक से वर्क करना बंद कर देती है और कुछ केसेस में यह डैमेज परमानेंट भी हो सकता है. इसे ट्रिपल व्हैमी इफेक्ट कहा जाता है, क्योंकि हर मेडिसन किडनी के फंक्शन को इफेक्ट करती है और उनका कॉम्बिनेशन किडनी पर बहुत ज्यादा प्रेशर डालता है. खासकर जब डिहाइड्रेशन भी हो.

इनको रहना चाहिए केयरफुल

हालांकि, यह प्रॉब्लम सभी को नहीं होगी, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है. खासकर जिन्हें पहले से ही किडनी प्रॉब्लम या दूसरी हेल्थ इश्यूज हैं, उन्हें ज्यादा केयरफुल रहना चाहिए.

एसिटामिनोफेन कर सकते हैं यूज

डॉ. अनीता लेटन की लीडरशिप में रिसर्च टीम लोगों को यह समझने के लिए मोटिवेट कर रही है कि ओवर-द-काउंटर मेडिसन भी डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन वाली मेडिसन के साथ रिएक्ट कर सकती हैं. अगर आप ब्लड प्रेशर की मेडिसन लेते हैं और पेन के लिए किसी मेडिसन की जरूरत है, तो आइबुप्रोफेन की जगह एसिटामिनोफेन यूज करने की एडवाइस दी जाती है, क्योंकि यह किडनी पर उतना हार्मफुल इफेक्ट नहीं डालती.

ऐसे में जरूरी है कि कोई भी नई मेडिसन लेने से पहले, यहां तक कि सिंपल पेनकिलर भी, अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से कंसल्ट करना हमेशा सबसे बेस्ट होता है. यह रिसर्च एक इम्पोर्टेंट रिमाइंडर है कि मेडिसन को मिक्स करना कभी-कभी हार्मफुल हो सकता है. केयरफुल रहने से आपकी किडनी सेफ रहेगी और आपका ट्रीटमेंट सेफ और इफेक्टिव बना रहेगा.

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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करवटें बदलते-बदलते बीत जाती रात, जानें यह किन-किन खतरों का संकेत?

करवटें बदलते-बदलते बीत जाती रात, जानें यह किन-किन खतरों का संकेत?


अक्सर कई लोगों की रातें करवट बदलते-बदलते बीत जाती हैं. वहीं कई लोगों सुबह उठते हैं और फिर भी थके हुए महसूस करते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये सिर्फ थकान या स्ट्रेस नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए एक गंभीर संकेत हो सकता है. इससे यह पता चलता है कि आपकी नींद ठीक से नहीं हो रही और अच्छी नींद का न होना आपके शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर डालता है. आज की बिजी लाइफ, काम का प्रेशर, लगातार बढ़ता स्ट्रेस और मोबाइल या लैपटॉप का ज्यादा यूज और खराब लाइफस्टाइल की वजह से नींद की समस्या और रात भर करवटें बदलने की आदत बहुत आम हो गई है. 

करवटें बदलने की आदत? किन खतरों का संकेत हो सकता है

अगर आपको रात के समय सोने में परेशानी होती है, बार-बार करवटें बदलनी पड़ती है, हार्ट बीट तेज हो जाती है और शरीर या मन में बेचैनी महसूस होती है  तो यह एक गंभीर हार्मोनल इंबैलेंस की ओर संकेत हो सकता है, जिसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है.हाइपोथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाना शुरु कर देती है. इसके अलावा कई रिसर्च में यह पाया गया है कि जो लोग लंबे समय तक सही नींद नहीं ले पाते या करवटें बदलने की आदत होती है तो उनमें गंभीर बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है. इनमें कैंसर और समय से पहले मौत का रिस्क भी शामिल है.

करवटें बदलने की आदत से भूलने की आदत, ध्यान न लगना और सोचने-समझने की ताकत पर असर पड़ने का खतरा भी हो सकता है. नींद पूरी न होने से दिमाग सही से काम नहीं करता है. इससे डिप्रेशन, एंजायटी, और चिड़चिड़ापन हो सकता है. करवटें बदलने की आदत और रात को बिस्तर पर जाने के बाद भी अगर नींद नहीं आती, तो इसकी एक बड़ी वजह स्लीप स्ट्रेस हो सकता है.

नींद पूरी न होने से शरीर पर क्या-क्या असर पड़ सकता है?

1. नींद पूरी न होने से वजन बढ़ने लगता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, और इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ सकता है.

2. नींद पूरी न होने से थकान और चिड़चिड़ापन के साथ छोटी-छोटी बातें भी परेशान करने लगती हैं और किसी काम में मन नहीं लगता है.

3.  वहीं नींद पूरी न होने से स्किन का ग्लो भी खत्म होता है. नींद के दौरान स्किन खुद को रिपेयर करती है. लेकिन जब नींद पूरी नहीं होती, तो डार्क सर्कल, डल स्किन, पिंपल्स और जल्दी झुर्रियां दिखने लगती है.

4. रात भर करवटें बदलने की आदत के कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. बार-बार नींद टूटने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाइपरटेंशन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

5. बार-बार नींद टूटने से पेट और गट हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है.हमारे पेट में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन और सेहत का ध्यान रखते हैं पर नींद कम होने से ये बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे पेट खराब, गैस, अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं.

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गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग


सीने में दर्द होने पर अक्सर लोगों को हार्ट अटैक का डर सताता है, लेकिन हर चेस्ट पेन हार्ट अटैक नहीं होता. पेट और इंटेस्टाइन में फंसी गैस भी चेस्ट में तेज, क्रैम्प जैसा या जलन वाला दर्द पैदा कर सकती है, जो कभी-कभी हार्ट अटैक जैसा लगता है. ये पेन अक्सर जल्दी-जल्दी खाने, स्पाइसी या फ्राइड फूड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीने से होता है.

डॉ. संजय द्विवेदी बताते हैं कि सीने में दर्द गैस या हार्ट अटैक दोनों का लक्षण हो सकता है और इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. लोग अक्सर हल्के दर्द को गैस समझकर लापरवाही करते हैं, जबकि इसका सही अंतर जानना गंभीर परिणामों से बचने में मदद करता है.

गैस का पेन या हार्ट अटैक?

  • गैस का पेन:  ये एक डाइजेस्टिव डिसऑर्डर है, जो पेट और इंटेस्टाइन में फंसी एयर की वजह से होता है. इसके लक्षण शार्प, क्रैम्पी या बर्निंग होते हैं, जो अपर एब्डोमेन और चेस्ट के बीच कहीं भी हो सकते हैं। इसके साथ ब्लोटिंग, बर्पिंग और बॉडी में हैवीनेस फील हो सकती है. सबसे इम्पोर्टेन्ट डिफरेंस ये है कि गैस रिलीज करने, डकार लेने या बॉडी पोजिशन चेंज करने से अक्सर पेन में रिलीफ मिलता है. ये पेन यूजुअली हैवी मील या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीने के बाद स्टार्ट होता है.
  • हार्ट अटैक: ये एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट में ब्लड फ्लो ब्लॉक हो जाता है. इसमें चेस्ट में प्रेशर, हैवीनेस या टाइटनेस फील होती है. ये डिस्कंफर्ट अक्सर लेफ्ट आर्म, जॉ, नेक, बैक और शोल्डर तक फैल सकता है. इसके साथ स्वेटिंग, शॉर्टनेस ऑफ ब्रेथ, डिजीनेस और नॉजिया जैसे सिम्पटम्स होते हैं. हार्ट अटैक का पेन रेस्ट करने या पोजिशन चेंज करने से ठीक नहीं होता, बल्कि लगातार बना रहता है. ये पेन 10 मिनट से ज्यादा टाइम तक गायब नहीं होता.

कब लें डॉक्टरी सलाह?

अगर आपको चेस्ट पेन के साथ आर्म, जॉ, नेक या बैक तक फैलने वाला प्रेशर या पेन, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, चक्कर आना, मतली या उल्टी, या बेचैनी फील हो और ये सिम्पटम्स जल्दी ठीक न हों, तो इमरजेंसी सर्विसे, से कांटेक्ट करें. हल्के पेन को इग्नोर न करें, क्योंकि हार्ट अटैक के वार्निंग साइन हर पर्सन में अलग-अलग हो सकते हैं.

गैस का पेन हार्ट अटैक जैसा क्यों लगता है?

डॉ. संजय के अनुसार, आपकी इंटेस्टाइन और हार्ट के बीच की नर्व्स एक ही एरिया में सिग्नल भेजती हैं. जब गैस लेफ्ट साइड में जमा होती है, तो ये डायाफ्राम पर प्रेशर डालती है. इससे चेस्ट में पेन फील होता है, जो हार्ट अटैक जैसा लग सकता है. हालांकि, अगर कोई संदेह हो, तो सावधानी बरतना और किसी डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है.

ये भी पढ़ें: महिलाओं की तरह पुरुषों में भी होता है मेनोपॉज, दिखते हैं ऐसे लक्षण

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महिलाओं की तरह पुरुषों में भी होता है मेनोपॉज, दिखते हैं ऐसे लक्षण

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जब हम मेनोपॉज शब्द सुनते हैं, तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या है क्योंकि महिलाओं में 45 से 55 साल की उम्र के बीच पीरियड्स बंद हो जाते हैं, जिसे मेनोपॉज कहा जाता है. यह हार्मोन एस्ट्रोजन की कमी के कारण होता है. मेनोपॉज में महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह से आने बंद हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरुषों में भी मेनोपॉज जैसा एक फेज आता है, जिसे मेडिकल भाषा में मेल मेनोपॉज या एंड्रोपॉज कहा जाता है चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मेनोपॉज क्या होता है और इसके लक्षण क्या है

महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मेनोपॉज क्या होता है?
जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर में भी हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं. जिसमें सबसे बड़ा बदलाव  टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी होता है. यह हार्मोन पुरुषों की यौन क्षमता, एनर्जी, मसल्स और मूड को प्रभावित करता है. वहीं 40 की उम्र के बाद, हर साल पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का लेवल लगभग 1 प्रतिशत घटने लगता है. ये बदलाव धीरे-धीरे होते हैं, इसलिए इसे साइलेंट मेनोपॉज भी कहते हैं यानी महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मेनोपॉज होता है, जिसे मेल मेनोपॉज या एंड्रोपॉज कहते हैं. यह उम्र बढ़ना, स्ट्रेस, खराब खानपान और लाइफस्टाइल, ज्यादा शराब या धूम्रपान का सेवन, कुछ पुरानी बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या एक्सरसाइज की कमी से होता है.

मेल मेनोपॉज के लक्षण क्या हैं?

मेल मेनोपॉज के दौरान पुरुषों को फिजिकल, मेंटल और यौन हेल्थ से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं. इसके कुछ आम लक्षण हैं जैसे –

1. हमेशा थकान महसूस होना, मूड स्विंग्स या डिप्रेशन

2. किसी भी काम में मन न लगना, कॉन्फिडेंस में कमी, नींद की कमी या बार-बार नींद टूटना

3. वजन बढ़ना, मसल्स की कमजोरी, ब्रेस्ट में सूजन या बढ़ना और हड्डियों का कमजोर होना

4. इरेक्टाइल डिसफंक्शन, प्रजनन क्षमता में कमी, बाल झड़ना या शरीर में गर्मी लगना भी मेल मेनोपॉज के लक्षण हैं

5. टेस्टिकल्स का साइज छोटा होना भी मेल मेनोपॉज का लक्षण है.

कैसे करें मेल मेनोपॉज को मैनेज?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, मेल मेनोपॉज को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए कुछ आसान बदलावों जैसे लाइफस्टाइल में चेंज करें सही डाइट लें.फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन को डाइट में शामिल करें. इसके साथ ही नियमित एक्सरसाइज करें. नियमित वर्कआउट से मसल्स स्ट्रांग होती हैं और मूड भी बेहतर रहता है. मेल मेनोपॉज को मैनेज करने के लिए पूरी नींद लें और स्ट्रेस से दूर रहें. मेडिटेशन और योग करें या माइंडफुलनेस अपनाएं. अगर टेस्टोस्टेरोन का स्तर बहुत कम है, तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले सकते हैं. मसल लॉस और  यौन हेल्थ से जुड़ी परेशानियों के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ली जा सकती है. 

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ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को चाय पीनी चाहिए या नहीं? जानें क्या है सच

ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को चाय पीनी चाहिए या नहीं? जानें क्या है सच


Tea for Blood Pressure Patients: भारत में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि एक आदत है, एक भावना है, जो दिन की शुरुआत से लेकर थकावट मिटाने तक हर मोड़ पर हमारे साथ रहती है. हालांकि, अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो क्या यह आदत आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है?

यह सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है, जो हाइपरटेंशन या दिल की बीमारियों से ग्रस्त हैं. कई बार हमें लगता है कि, “एक कप चाय से क्या होगा?”, लेकिन डॉक्टरों की नजर में यह मामूली बात नहीं है. इस पर डॉ. बिमल छाजेड़ की मानें तो चाय का शरीर पर असर हमारे ब्लड प्रेशर को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है. 

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कैफीन और ब्लड प्रेशर का कनेक्शन

चाय में पाया जाने वाला कैफीन एक स्टिमुलेंट (उत्तेजक) होता है, जो अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है. डॉ. बिमल छाजेड़ बताते हैं कि, कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका शरीर कैफीन के प्रति अधिक संवेदनशील होता है. ऐसे लोगों में चाय पीने के तुरंत बाद ब्लड प्रेशर में हल्की बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

क्या ब्लड प्रेशर वाले चाय पी सकते हैं?

  • डॉ. छाजेड़ के अनुसार, ब्लड प्रेशर के मरीज पूरी तरह से चाय छोड़ने की बजाय इसकी मात्रा और प्रकार पर ध्यान दें.
  • दिन में 1 कप चाय लेना सुरक्षित माना जा सकता है.
  • ब्लैक टी या ग्रीन टी कैफीन की मात्रा में हल्की होती हैं और ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स भी अधिक होते हैं, जिससे यह दिल के लिए अच्छी मानी जाती है.
  • हर्बल चाय जैसे तुलसी, अदरक या दालचीनी की चाय भी लाभकारी हो सकती है, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से बीपी नियंत्रित करने में मदद करती हैं.

किन बातों का रखें ध्यान?

  • भूखे पेट चाय न पिएं: इससे एसिडिटी और हार्टबीट में गड़बड़ी हो सकती है.
  • चाय के साथ नमकीन या तले हुए स्नैक्स न लें: इससे सोडियम का स्तर बढ़ता है और ब्लड प्रेशर बिगड़ सकता है.
  • रात को सोने से पहले चाय न पिएं: इससे नींद प्रभावित होती है और नींद की कमी भी बीपी को बढ़ा सकती है.
  • यदि आपका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है तो चाय पूरी तरह से बंद करना बेहतर होगा.

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पतंजलि में चिकित्सा क्रांति: एम्स, टाटा कैंसर और सर गंगा राम के सहयोग से नई शुरुआत

पतंजलि में चिकित्सा क्रांति: एम्स, टाटा कैंसर और सर गंगा राम के सहयोग से नई शुरुआत


पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि अनुसंधान संस्थान और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय अनामयम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया. सम्मेलन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण और समन्वय के उद्देश्य से एक वैश्विक मंच प्रदान करने को लेकर आयोजित किया गया था. सम्मेलन में 16 राज्यों के करीब 200 शैक्षणिक संस्थानों से 300 से ज्यादा प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफ लाइन माध्यम से प्रतिभाग किया.

सम्मेलन में देश के विभिन्न उच्च चिकित्सा और शिक्षण संस्थाओं के चिकित्सा विशेषज्ञ, शोधकर्ता, नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए. इस अवसर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पूज्य स्वामी रामदेव महाराज ने बड़ा एलान किया. उन्होंने कहा कि कि जल्द ही लोक कल्याण को देखते हुए एम्स, टाटा कैंसर चिकित्सालय और सर गंगा राम हॉस्पिटल के सहयोग से पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय में आधुनिक पद्धति से अल्प व्यय में विश्वस्तरीय उपचार किया जाएगा. 

शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

उद्घाटन सत्र में योग गुरु स्वामी रामदेव, पतंजलि विवि के कुलपति और आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण सहित अतिथियों ने तीन अहम पुस्तक आयुर्वेद अवतरण, इंटीग्रेटेड पैथी और सम्मेलन की सार पुस्तिका का विमोचन भी किया. इस दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड से पहुंचे डॉ श्रेया, डॉ राधिका और डॉ मुकेश और पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण के बीच शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने को परस्पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया. 

स्वामी रामदेव ने साक्ष्य आधारित चिकित्सा के साथ एकीकृत चिकित्सा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान लोक कल्याण के लिए होना चाहिए, धनोपार्जन के लिए नहीं. आचार्य बालकृष्ण ने विश्व भर में प्रख्यात 9 चिकित्सा पद्धतियों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि आयुर्वेद अपनी क्षमताओं के कारण जबकि अन्य पद्धतियां स्थान विशेष या परंपरा के कारण जानी जाती हैं. उन्होंने महर्षि चरक और आचार्य सुश्रुत के कालखंड के बारे में शास्त्रीय प्रमाण, भौगोलिक और ऑकियोलोजिकल प्रमाण के बारे में भी विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय में आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा अल्प व्यय में विश्वस्तरीय उपचार होगा और चिकित्सा के नाम पर षड्यंत्र ओर लूट को समाप्त करने का काम किया जाएगा. 

केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेडी, डॉ विपिन कुमार महासचिव एकीकृत आयुष परिषद, डॉ सुनील आहुजा, पदमश्री डॉ बीएन गंगाधर अध्यक्ष राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, डॉ विशाल मागो प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बर्न और प्लास्टिक सर्जरी एम्स ऋषिकेश ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया. कार्यक्रम के प्रथम सत्र आयुष का प्रारंभ डॉ बीएन गंगाधर अध्यक्ष राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और प्रोफेसर डी गोपाल सी नंदा अध्यक्ष सशक्त समिति आयुष मंत्रालय ओडिशा सरकार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. इसमें 5 वक्ताओं क्रमश: प्रोफेसर वैद्य राकेश शर्मा गुरु रविदास आयुर्वेद विवि होशियारपुर, पंजाब, डॉ मनु मल्होत्रा प्रोफेसर और विभागध्यक्ष ईएनटी विभाग एम्स ऋषिकेश, प्रोफेसर पुलक मुखर्जी प्रोफेसर फार्मास्यूटिकल टेक्नॉलजी विभाग जादवपुर विवि कोलकाता ने अपने शोध प्रस्तुत किए. 

पतंजिल आयुर्वेद ने प्रस्तुत किए शोध

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में समग्र नैदानिक प्रकरण चर्चा का प्रारंभ प्रोफेसर डॉ गोपाल सी नंदा और प्रोफेसर पुलक मुखर्जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. जिसमें तीन रोगों क्रमश: सीओपीडी के निदान पर दो वक्ताओं क्रमश: प्रोफेसर डॉ मीनाक्षी धर, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, जरा विज्ञान विभाग एम्स ऋषिकेश और डीसीबी धनराज अधिष्ठाता, स्नातकोत्तर शिक्षा, काया चिकित्सा विभाग, पतंजिल आयुर्वेद महाविद्यालय की ओर से अपने शोध प्रस्तुत किए गए. इसके बाद भगंदर के निदान पर प्रोफेसर पी हेमंता कुमार राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विवि जयपुर और प्रोफेसर सचिन गुप्ता शल्य चिकित्सा विभाग पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय द्वारा अपने शोध प्रस्तुत किए गए. इसी क्रम में रोग निवारण विधि डॉ रमण संतरा और डॉ धीरज कुमार त्यागी प्रोफेसर स्वास्थ्यवृत और योग विभाग पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय और डॉ मोनिका पठानिया चिकित्सा विभाग एम्स ऋषिकेश की ओर से अपने शोध प्रस्तुत किए गए.

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