अचानक चक्कर आए तो करें ये 6 काम, संकेत मिलते ही हो जाएं सावधान

अचानक चक्कर आए तो करें ये 6 काम, संकेत मिलते ही हो जाएं सावधान


तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं: चक्कर आते ही खड़े रहने की बजाय तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं. इससे गिरने से बचाव होता है और दिमाग में रक्त प्रवाह सामान्य रहता है.

गहरी सांस लें और आंखें बंद करें: गहरी सांस लेने से ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ता है और दिमाग को राहत मिलती है. आंखें बंद कर कुछ मिनट तक शांति से बैठें या लेटें.

गहरी सांस लें और आंखें बंद करें: गहरी सांस लेने से ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ता है और दिमाग को राहत मिलती है. आंखें बंद कर कुछ मिनट तक शांति से बैठें या लेटें.

ग्लूकोज पिएं: चक्कर आने की एक वजह डिहाइड्रेशन या ब्लड शुगर का गिरना हो सकता है. ऐसे में एक गिलास पानी या ग्लूकोज़ का सेवन तुरंत राहत दे सकता है.

ग्लूकोज पिएं: चक्कर आने की एक वजह डिहाइड्रेशन या ब्लड शुगर का गिरना हो सकता है. ऐसे में एक गिलास पानी या ग्लूकोज़ का सेवन तुरंत राहत दे सकता है.

सिर को ऊंचा करके लेटें: अगर आप लेट रहे हैं तो कोशिश करें कि सिर थोड़ा ऊंचा रहे. इससे ब्लड प्रेशर और ब्रेन की स्थिति में संतुलन बना रहता है.

सिर को ऊंचा करके लेटें: अगर आप लेट रहे हैं तो कोशिश करें कि सिर थोड़ा ऊंचा रहे. इससे ब्लड प्रेशर और ब्रेन की स्थिति में संतुलन बना रहता है.

मोबाइल या स्क्रीन से दूरी बनाएं: चक्कर की स्थिति में मोबाइल, टीवी या लैपटॉप की स्क्रीन से तुरंत दूरी बना लें क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है.

मोबाइल या स्क्रीन से दूरी बनाएं: चक्कर की स्थिति में मोबाइल, टीवी या लैपटॉप की स्क्रीन से तुरंत दूरी बना लें क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है.

बार-बार होने पर डॉक्टर से मिलें: अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं तो यह विटामिन की कमी, ब्लड प्रेशर या कान की समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

बार-बार होने पर डॉक्टर से मिलें: अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं तो यह विटामिन की कमी, ब्लड प्रेशर या कान की समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

Published at : 02 Aug 2025 06:29 PM (IST)

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बिना नुकसान कान का मैल कैसे करें साफ, घर पर अपनाएं ये तरीके

बिना नुकसान कान का मैल कैसे करें साफ, घर पर अपनाएं ये तरीके


गुनगुना पानी: गुनगुना पानी कान का मैल ढीला करने में मदद करता है. एक ड्रॉपर की मदद से कुछ बूंदें कान में डालें, थोड़ी देर रुकें और फिर सिर को झुकाकर पानी बाहर निकालें। यह तरीका बेहद सरल और सुरक्षित है.

नारियल तेल: नारियल तेल कान के अंदर जमा सूखा मैल नरम करने में सहायक होते हैं. रात को सोने से पहले 2-3 बूंदें डालें और अगली सुबह हल्के से साफ करें.

नारियल तेल: नारियल तेल कान के अंदर जमा सूखा मैल नरम करने में सहायक होते हैं. रात को सोने से पहले 2-3 बूंदें डालें और अगली सुबह हल्के से साफ करें.

हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का घोल: हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल करें. इससे मैल झाग बनाकर निकलने लगता है. लेकिन इस उपाय को सप्ताह में सिर्फ 1 बार ही करें.

हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का घोल: हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल करें. इससे मैल झाग बनाकर निकलने लगता है. लेकिन इस उपाय को सप्ताह में सिर्फ 1 बार ही करें.

बेकिंग सोडा: 1 चम्मच बेकिंग सोडा को 2 चम्मच पानी में घोलकर कान में 2-3 बूंदें डालें. 10 मिनट बाद सिर झुकाकर कान साफ करें. यह तरीका जिद्दी मैल हटाने में मददगार है.

बेकिंग सोडा: 1 चम्मच बेकिंग सोडा को 2 चम्मच पानी में घोलकर कान में 2-3 बूंदें डालें. 10 मिनट बाद सिर झुकाकर कान साफ करें. यह तरीका जिद्दी मैल हटाने में मददगार है.

नमक के पानी का प्रयोग करें: नमक मिलाकर तैयार किया गया सॉल्यूशन कान की सफाई के लिए कारगर होता है. कॉटन बॉल को सॉल्यूशन में भिगोकर कान के अंदर कुछ बूंदें डालें और थोड़ी देर बाद सिर झुका लें.

नमक के पानी का प्रयोग करें: नमक मिलाकर तैयार किया गया सॉल्यूशन कान की सफाई के लिए कारगर होता है. कॉटन बॉल को सॉल्यूशन में भिगोकर कान के अंदर कुछ बूंदें डालें और थोड़ी देर बाद सिर झुका लें.

भाप लेना फायदेमंद: गरम पानी से भाप लेने से कान के अंदर की गंदगी और मैल नरम होकर बाहर आने लगता है. खासतौर पर सर्दियों में यह उपाय काफी राहत देता है.

भाप लेना फायदेमंद: गरम पानी से भाप लेने से कान के अंदर की गंदगी और मैल नरम होकर बाहर आने लगता है. खासतौर पर सर्दियों में यह उपाय काफी राहत देता है.

Published at : 02 Aug 2025 04:35 PM (IST)

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क्या आप भी खाते हैं ज्यादा नमक? जानिए कैसे यह आदत बढ़ा सकती है हार्ट अटैक का खतरा

क्या आप भी खाते हैं ज्यादा नमक? जानिए कैसे यह आदत बढ़ा सकती है हार्ट अटैक का खतरा


Excess Salt and Heart Risk: हम भारतीय खाने का स्वाद नमक के बिना अधूरा मानते हैं. चाहे दाल हो या सब्ज़ी, चटनी हो या नमकीन स्नैक्स, हर चीज़ में नमक जरूरी है. लेकिन जो नमक आपके खाने को स्वाद देता है, वही आपकी सेहत के लिए खतरनाक भी बन सकता है? अगर नमक का सेवन ज्यादा हो जाए, तो यह दिल पर सीधा असर डाल सकता है.

डॉ. बिमल छाजेड़ बताते हैं कि, अधिक नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है, जो कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा कारण बन सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि, कैसे अधिक नमक खाने की ये छोटी-सी आदत बड़े खतरे का कारण बन सकती है. 

ये भी पढ़े- शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझ लो हो गया प्रोस्टेट कैंसर, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

अधिक नमक से बढ़ता है ब्लड प्रेशर

नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी को रोक कर रखता है. इससे खून का वॉल्यूम बढ़ता है, और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. हाई बीपी से दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और धीरे-धीरे यह हृदय की कार्यक्षमता को कमजोर कर देता है. यही स्थिति आगे जाकर हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर तक पहुंच सकती है.

दिल को बीमार करता है 

ज्यादा नमक के सेवन से धमनियों की दीवारें कठोर होने लगती हैं. जब धमनियों में फ्लेक्सिबिलिटी नहीं रहती, तो खून का प्रवाह बाधित होता है. यह स्थिति एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का संकुचित होना) कहलाती है, जो दिल के दौरे का बड़ा कारण बनती है.

छिपे हुए नमक से सतर्क रहें

बहुत से लोग सोचते हैं कि वे तो खाना कम नमक वाला ही खाते हैं. लेकिन नमक केवल टेबल पर रखे नमकदानी से नहीं आता, यह प्रोसेस्ड फूड, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, पापड़, अचार और केचअप में छिपा होता है. इन ‘छुपे नमक’ के स्रोतों से हमारी डेली सोडियम इनटेक बहुत ज़्यादा हो जाती है.

कैसे करें सेवन को कंट्रोल?

  • खाने में ऊपर से नमक डालने की आदत छोड़ें
  • प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं
  • फलों और उबली सब्ज़ियों का सेवन बढ़ाएं
  • लेबल पढ़कर कम-सोडियम वाले विकल्प चुनें
  • घर में लो-सोडियम नमक या सेंधा नमक का इस्तेमाल करें

स्वाद के लिए थोड़ा नमक जरूरी है, लेकिन लापरवाही से किया गया अत्यधिक सेवन आपके दिल की सेहत के लिए जानलेवा बन सकता है. एक छोटा-सा बदलाव आज आपकी जिंदगी को कल बड़ी बीमारी से बचा सकता है. इसलिए अब से नमक का सेवन समझदारी से करें.

इसे भी पढ़ें: आंखों में दिखें ये 5 चीजें तो समझ जाएं खतरे में आ गई आपकी किडनी, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती है या नहीं, डॉक्टर से समझें पूरी बात

डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती है या नहीं, डॉक्टर से समझें पूरी बात


प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज  हो जाती है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्रेगनेंसी के दौरान शुगर लेवल बढ़ जाता है. रिसर्च के अनुसार, करीब 14 प्रतिशत महिलाएं इस समस्या से जूझती हैं. कुछ महिलाओं में यह डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ को प्रेग्नेंसी के बाद भी डायबिटीज बनी रहती है. प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं. इसी वजह से कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज हो जाती है. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या डायबिटीज वाली मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है या क्या इससे बच्चे को कोई नुकसान हो सकता है तो चलिए जानते हैं कि आखिर डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती है या नहीं.

डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती है या नहीं?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महिलाएं डायबिटीज या जेस्टेशनल डायबिटीज में भी अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती हैं क्योंकि इससे न सिर्फ बच्चे को , बल्कि मां को भी फायदा होता है. डायबिटीज में ब्रेस्ट फीडिंग से मां के शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बेहतर तरीके से कंट्रोल रहता है और टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी कम हो जाता है. इसके साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग से डायबिटीज बच्चे में ट्रांसफर नहीं होती है और मां का दूध बच्चे की इम्यूनिटी को बढ़ाता है और उसे कई बीमारियों से बचाता है,जिनमें डायबिटीज भी शामिल है. इसलिए डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा सकती है.

ब्रेस्टफीडिंग के फायदे

1. ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद फायदेमंद होती है. 
2. ब्रेस्टफीडिंग से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है, हार्ट डिजीज और मोटापे का खतरा कम होता है. 
3. ब्रेस्टफीडिंग से ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर का खतरा भी कम होता है. 
4. वहीं ब्रेस्टफीडिंग से हड्डियां मजबूत होती हैं, साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है. 
5. बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराने से इम्युनिटी स्ट्रांग होती है
6. इससे डायबिटीज, मोटापा, इंफेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है
7. ब्रेस्टफीडिंग से मेंटल और फिजिकल ग्रोथ बेहतर होती है.

डायबिटिक मां को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
1. ब्रेस्टफीडिंग से पहले ब्लड शुगर चेक करना चाहिए , इससे अगर लेवल कम हो तो तुरंत कुछ खा सकें.
2. डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग के वक्तसाथ में स्नैक्स जरूर रखने चाहिए, खासकर अगर आप बार-बार फीडिंग करती हैं.
3. डायबिटिक मां स्ट्रेस कम करना चाहिए, अच्छी मेंटल हेल्थ ब्रेस्ट फीडिंग और ब्लड शुगर दोनों के लिए जरूरी है.
4. डायबिटिक मां ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए, हाइड्रेटेड रहना शरीर के लिए जरूरी है.
5. डायबिटिक मां बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग के साथ ब्रेस्ट इंफेक्शन का चेकअप करते रहना चाहिए.

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शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझ लो हो गया प्रोस्टेट कैंसर, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

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Signs of Prostate Cancer: एक ऐसा रोग जो चुपचाप आपके शरीर में घर कर जाए और जब तक आप समझें तब तक बहुत देर हो चुकी हो. प्रोस्टेट कैंसर कुछ ऐसा ही है. पुरुषों से जुड़ा यह कैंसर शुरुआत में बहुत सामान्य और नजरअंदाज किए जाने वाले लक्षणों के साथ आता है, लेकिन समय रहते इसे पहचानना बेहद जरूरी है.

डॉ. संतोष कुमार बताते हैं कि, प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम लेकिन गंभीर कैंसर है, जो 50 वर्ष की उम्र के बाद अधिक देखने को मिलता है. हालांकि आजकल यह युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है. इसकी पहचान जल्दी हो जाए तो इलाज संभव है.

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पेशाब करने में दिक्कत

प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त होने पर मूत्र मार्ग पर दबाव बनता है. इससे पेशाब करते समय रुक-रुक कर आना, जलन होना या बहुत बार पेशाब आना जैसी समस्याएं होती हैं.

रात में बार-बार पेशाब आना

अगर आपको रात में 2 बार से ज्यादा पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, और यह आदत लगातार बनी हुई है, तो यह प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या हो सकती है.

पेशाब या वीर्य में खून आना

यह लक्षण बेहद गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. पेशाब या स्पर्म में खून दिखना प्रोस्टेट कैंसर का संकेत हो सकता है.

पीठ, जांघ या कूल्हे में लगातार दर्द

प्रोस्टेट कैंसर जब बढ़ने लगता है, तो यह आसपास की हड्डियों में फैल सकता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से, जांघों और कूल्हे में लगातार दर्द बना रहता है.

वजन घटना और भूख में कमी

अगर बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के अचानक वजन घट रहा है, और साथ ही भूख भी कम हो गई है, तो यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है,  जिसमें प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है.

प्रोस्टेट कैंसर से बचाव के उपाय

साल में एक बार PSA टेस्ट जरूर करवाएं, खासकर 50 की उम्र के बाद

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें

अधिक वसा वाला भोजन कम करें और हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं

नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज तभी संभव है जब उसकी पहचान समय रहते हो जाए. इसलिए अगर ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी लंबे समय तक दिखाई दे, तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें.

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पनीर खाकर तो नहीं सोते हैं आप? रात को आ सकते हैं डरावने सपने; चौंका देगी स्टडी

पनीर खाकर तो नहीं सोते हैं आप? रात को आ सकते हैं डरावने सपने; चौंका देगी स्टडी


Paneer Cause Bad Dreams: आपने रात के खाने में स्वादिष्ट शाही पनीर खाया, रोटी के साथ पेटभर भोजन किया और फिर चैन की नींद लेने बिस्तर पर चले गए. लेकिन जैसे ही गहरी नींद आई, अजीब और डरावने सपनों ने आपको परेशान करना शुरू कर दिया. कभी आप ऊंचाई से गिर रहे हैं, कभी कोई आपका पीछा कर रहा है, तो कभी सब कुछ अंधकार में डूबा हुआ है. अगर ऐसा आपके साथ भी होता है, तो हो सकता है कि वजह आपकी डिनर प्लेट में रखा पनीर हो. 

क्या कहती है रिसर्च?

एक स्टडी में, वैज्ञानिकों ने 1,000 से ज्यादा छात्रों पर सर्वे किया और उनकी नींद से जुड़ी आदतों का विश्लेषण किया. चौंकाने वाली बात यह थी कि जो लोग सोने से पहले पनीर या अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन करते थे, उनमें डरावने और बेचैन करने वाले सपनों की संभावना कहीं ज्यादा देखी गई. 

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क्यों आते हैं बुरे सपने?

पनीर एक हाई-प्रोटीन और हाई-फैट वाला डेयरी प्रोडक्ट है. इसमें ट्रिप्टोफेन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन नामक हार्मोन को प्रभावित करता है. यह दोनों हार्मोन नींद और मूड को नियंत्रित करते हैं. हालांकि ट्रिप्टोफेन आमतौर पर नींद में सहायक माना जाता है, लेकिन जब यह भारी मात्रा में फैट और प्रोटीन के साथ होता है तो यह पाचन को धीमा कर सकता है. 

क्या सभी पर होता है ऐसा असर?

यह जरूरी नहीं कि हर किसी को पनीर खाने के बाद बुरे सपने आएं. यह पूरी तरह से व्यक्ति की पाचन शक्ति, नींद की आदतों और मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है. लेकिन अगर आप अकसर रात में पनीर खाकर सोते हैं और आपको बुरे सपने आते हैं तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपका शरीर इस आदत से खुश नहीं है. 

कैसे बचें डरावने सपनों से?

  • सोने से 1 घंटे पहले भारी भोजन करने से बचें
  • खासकर डेयरी उत्पाद जैसे पनीर, दूध, आइसक्रीम आदि का सेवन रात में सीमित करें
  • हल्का और सुपाच्य डिनर लें, जिसमें सब्जियां, दाल और सलाद शामिल हों
  • नींद से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और रिलैक्सिंग एक्टिविटी अपनाएं

पनीर हमारे खाने का एक स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर हिस्सा है, लेकिन हर चीज का समय और मात्रा सही होनी चाहिए. अगर आप भी रात को डरावने सपनों से परेशान हैं तो एक बार अपनी डिनर की थाली पर नजर डालिए.

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