30 के बाद महिलाओं को बदल देनी चाहिए अपनी डाइट, जानिए क्य-क्या करें शामिल

30 के बाद महिलाओं को बदल देनी चाहिए अपनी डाइट, जानिए क्य-क्या करें शामिल


Women Diet After 30: 30 की उम्र पार करना एक नई शुरुआत की तरह होता है, जहां महिलाएं अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच खुद को अक्सर पीछे छोड़ देती हैं. इस उम्र के बाद शरीर में कई आंतरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं. हॉर्मोनल असंतुलन, मेटाबॉलिज्म धीमा होना, हड्डियों की कमजोरी, थकान और त्वचा की रौनक कम होना. ऐसे में सिर्फ स्किनकेयर या एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि सही डाइट लेना भी बेहद जरूरी हो जाता है.

डॉ. मंगला डोगरा बताती हैं कि 30 के बाद महिलाओं को अपनी डाइट में कुछ खास बदलाव करने चाहिए, ताकि वे लंबे समय तक स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट रह सकें.

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कैल्शियम और विटामिन D को बनाएं डाइट का हिस्सा

30 के बाद हड्डियां कमजोर होने लगत है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया प्रोडक्ट्स और धूप लेना जरूरी है. साथ ही डॉक्टर की सलाह से विटामिन D सप्लीमेंट लिया जा सकता है.

आयरन युक्त भोजन लें 

महिलाओं में आयरन की कमी आम है, जो 30 के बाद और अधिक हो सकती है. इससे कमजोरी, बाल झड़ना और थकावट महसूस होती है. पालक, चुकंदर, अनार, दालें, गुड़ और सूखे मेवे जैसे खजूर और किशमिश को डाइट में शामिल करें.

फाइबर रिच फूड को दें प्राथमिकता

30 के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है जिससे वजन बढ़ सकता है. ऐसे में फाइबर युक्त चीजें जैसे साबुत अनाज, फल, हरी सब्जियां, ओट्स और ब्राउन राइस पाचन को बेहतर बनाते हैं और वजन कंट्रोल में रखते हैं.

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार लें

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा की चमक कम हो सकती है. इसके लिए आंवला, नींबू, बेरीज़, ग्रीन टी, टमाटर और ड्राई फ्रूट्स में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और त्वचा को जवां बनाए रखते हैं.

हेल्दी फैट्स को न कहें ना

बिना फैट के डाइट नुकसानदेह हो सकती है। अवोकाडो, नट्स, बीज (चिया, फ्लैक्स सीड्स), ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट्स हार्मोन बैलेंस और दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं.

पानी और डिटॉक्स ड्रिंक्स का बढ़ाएं सेवन

शरीर को डिटॉक्स रखने और त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए भरपूर पानी पीना चाहिए. नींबू पानी, नारियल पानी और हर्बल टी भी लाभकारी होती हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पिस्ता इस विटामिन की कमी को करेगा दूर, जानिए खाने का सही समय

पिस्ता इस विटामिन की कमी को करेगा दूर, जानिए खाने का सही समय


Pista Benefits: हर दिन एनर्जी से भरपूर रहना और शरीर को अंदर से मज़बूत बनाना चाहते हैं तो अपने आहार में सूखे मेवे जरूर शामिल करें. खासकर पिस्ता, जो स्वाद में तो लाजवाब है, साथ ही यह कई जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पिस्ता शरीर में एक बेहद जरूरी विटामिन की कमी को दूर करने में भी मदद करता है?

डॉ. शालिनी सिंह बताती हैं कि, पिस्ता न केवल हेल्दी स्नैकिंग का बढ़िया विकल्प है, बल्कि यह विटामिन बी6 जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है, जो शरीर के लिए जरूरी है. अगर सही समय पर और सही मात्रा में पिस्ता खाया जाए, तो यह थकान, कमजोर इम्यूनिटी और यहां तक कि मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं को भी दूर करने में मदद कर सकता है. 

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पिस्ता में मौजूद जरूरी पोषक तत्व

पिस्ता विटामिन बी6, पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है. विशेष रूप से विटामिन बी6 नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है, हार्मोन बैलेंस करता है और हीमोग्लोबिन के निर्माण में मदद करता है.

विटामिन बी6 की कमी के लक्षण

  • थकान महसूस होना
  • चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स
  • इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ना
  • त्वचा में सूखापन या जलन
  • नींद न आना

पिस्ता खाने का सही समय

  • सुबह खाली पेट: अगर आप पाचन शक्ति बढ़ाना चाहते हैं और दिनभर एनर्जेटिक रहना चाहते हैं, तो सुबह 5 भिगोए हुए पिस्ता खाना फायदेमंद है.
  • वर्कआउट के बाद: शरीर को रिकवरी में मदद मिलती है और मांसपेशियों की थकावट कम होती है.
  • शाम के नाश्ते में: अनहेल्दी स्नैक्स की जगह 10–12 पिस्ता खाने से वजन नियंत्रण में मदद मिलती है.

पिस्ता खाने का तरीका

  • भिगोकर खाएं: पिस्ता को रातभर भिगोकर सुबह खाना अधिक लाभकारी होता है.
  • छिलका निकालकर खाएं: इससे पाचन में आसानी होती है और शरीर पोषक तत्व अच्छे से अवशोषित कर पाता है.
  • दूध के साथ लें: रात में गर्म दूध में 3–4 पिस्ता डालकर पीने से नींद अच्छी आती है और दिमाग को आराम मिलता है.
  • पिस्ता सिर्फ स्वाद का खजाना नहीं है, बल्कि यह पोषण का भी पावरहाउस है. अगर आप विटामिन बी6 की कमी से जूझ रहे हैं, तो अपनी डाइट में पिस्ता जरूर शामिल करें.

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रात के वक्त नहीं खाना चाहिए दही, क्या सेहत को हो सकता है नुकसान?

रात के वक्त नहीं खाना चाहिए दही, क्या सेहत को हो सकता है नुकसान?


Eating Curd at Night Side Effects: दही भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है जो स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी फायदेमंद माना जाता है. गर्मियों में ठंडक देने से लेकर पाचन सुधारने तक दही के कई फायदे हैं. लेकिनअगर रात में खाया जाए तो नुकसान भी पहुंचा सकता है? डॉ. रुपाली जैन बताती हैं कि, किस तरह रात में दही खाना आपकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है.

दही को प्राचीन काल से ही स्वास्थ्यवर्धक भोजन माना गया है.यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर होता है और पाचन में सहायक होता है. लेकिन हर चीज का एक सही समय होता है और दही के मामले में यह बात खास तौर पर लागू होती है. 

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पाचन तंत्र पर असर

रात को शरीर की मेटाबॉलिक क्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में दही जैसा भारी और ठंडक देने वाला खाद्य पदार्थ पाचन में रुकावट पैदा कर सकता है.

कफ और बलगम बढ़ाता है

आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही का सेवन कफ दोष को बढ़ाता है, जिससे सुबह उठते समय गले में खराश, नाक बंद रहना या भारीपन महसूस हो सकता है.

सर्दी-खांसी की संभावना

ठंडी प्रकृति होने के कारण रात में दही खाने से सर्दी, जुकाम और खांसी की संभावना बढ़ जाती है, खासकर बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को दिक्कत देता है. 

त्वचा पर असर

कुछ लोगों में रात के समय दही खाने से स्किन एलर्जी, मुहांसे या खुजली जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं, जो आंतरिक सूजन का संकेत हो सकती हैं.

जोड़ों के दर्द में बढ़ोतरी

कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को रात में दही खाना उनके दर्द को और बढ़ा सकता है.

रात में दही खाना जरूरी हो तो?

डॉ. रुपाली जैन का सुझाव है कि, अगर आपको रात में दही खाने की आदत है तो उसमें थोड़ी मात्रा में काली मिलाकर खाएं. इससे उसका ठंडा प्रभाव थोड़ा संतुलित हो जाता है.

दही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सही समय पर होना चाहिए. रात में दही खाने से होने वाले नुकसान को नज़रअंदाज न करें. बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी डाइट में संतुलन बनाए रखें और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इस टेस्ट से पक्का हो जाता है मुंह का कैंसर, जानें किस स्टेज तक बच सकती है जान

इस टेस्ट से पक्का हो जाता है मुंह का कैंसर, जानें किस स्टेज तक बच सकती है जान


मुंह का कैंसर बाहर से नजर आने वाला कैंसर है, इसलिए इसे शुरुआती चरण में पहचानना आसान है. अगर समय रहते पता चल जाए तो इलाज आसान हो जाता है और जान बचने की संभावना बढ़ जाती है.

अब ऐसे टेस्ट भी आ गए हैं, जिनसे बिना ज्यादा दर्द या परेशानी के जांच हो सकती है. फ्लोरोसेंस इमेजिंग और AI तकनीक मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण जल्दी पकड़ सकती हैं. ये सुविधा खासकर उन जगहों के लिए उपयोगी है, जहां डॉक्टरों की पहुंच कम होती है.

अब ऐसे टेस्ट भी आ गए हैं, जिनसे बिना ज्यादा दर्द या परेशानी के जांच हो सकती है. फ्लोरोसेंस इमेजिंग और AI तकनीक मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण जल्दी पकड़ सकती हैं. ये सुविधा खासकर उन जगहों के लिए उपयोगी है, जहां डॉक्टरों की पहुंच कम होती है.

नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं, एक नया टेस्ट ‘लॉलीपॉप टेस्ट’ या ‘स्वाब टेस्ट’ लार के जरिए कैंसर के संकेत जल्दी पकड़ता है. यह तरीका आसान, तेज और सटीक है, इसलिए शुरुआती पहचान के लिए इसे बहुत उपयोगी माना जा रहा है.

नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं, एक नया टेस्ट ‘लॉलीपॉप टेस्ट’ या ‘स्वाब टेस्ट’ लार के जरिए कैंसर के संकेत जल्दी पकड़ता है. यह तरीका आसान, तेज और सटीक है, इसलिए शुरुआती पहचान के लिए इसे बहुत उपयोगी माना जा रहा है.

अगर कैंसर पहले चरण में पता चल जाए, तो मरीज के 5 साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 80-90 प्रतिशत होती है. लेकिन अगर कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल गया है, तो यह संभावना बहुत कम यानी 10 प्रतिशत से भी कम रह जाती है.

अगर कैंसर पहले चरण में पता चल जाए, तो मरीज के 5 साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 80-90 प्रतिशत होती है. लेकिन अगर कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल गया है, तो यह संभावना बहुत कम यानी 10 प्रतिशत से भी कम रह जाती है.

अगर आप हर 6 महीने या साल में एक बार दांत और मुंह की जांच करवाते हैं, तो कैंसर के शुरुआती लक्षण समय रहते पकड़े जा सकते हैं. रिसर्च के अनुसार, ऐसा करने वाले मरीजों की जान बचने की संभावना ज्यादा होती है.

अगर आप हर 6 महीने या साल में एक बार दांत और मुंह की जांच करवाते हैं, तो कैंसर के शुरुआती लक्षण समय रहते पकड़े जा सकते हैं. रिसर्च के अनुसार, ऐसा करने वाले मरीजों की जान बचने की संभावना ज्यादा होती है.

अगर कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पता चलता है, तो इलाज मुश्किल और लंबा हो जाता है. कई बार सर्जरी के साथ रेडिएशन और कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है.

अगर कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पता चलता है, तो इलाज मुश्किल और लंबा हो जाता है. कई बार सर्जरी के साथ रेडिएशन और कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है.

अगर मुंह में कोई घाव, सफेद या लाल दाग, गांठ या आवाज में बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. शुरुआती चरण में पहचान से इलाज आसान हो जाता है और जान बचाना भी.

अगर मुंह में कोई घाव, सफेद या लाल दाग, गांठ या आवाज में बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. शुरुआती चरण में पहचान से इलाज आसान हो जाता है और जान बचाना भी.

Published at : 01 Aug 2025 07:48 PM (IST)

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पूरा दिन जूते पहने रहते हैं आप? दाद-खाज या खुजली ही नहीं…हो सकती है ये बीमारी

पूरा दिन जूते पहने रहते हैं आप? दाद-खाज या खुजली ही नहीं…हो सकती है ये बीमारी


लंबे समय तक जूते पहनने से पैर एक ही पोजीशन में बंद रहते हैं. इससे मांसपेशियों में जकड़न और कमजोरी आने लगती है, जिससे पैरों की लचक कम हो जाती है.

जो जूते सही फिट के नहीं होते या जिन्हें बहुत कसकर बांधा जाता है, वे पैरों के लिए नुकसानदायक हैं. इससे न सिर्फ दर्द होता है, बल्कि स्किन भी डैमेज होने लगती है.

जो जूते सही फिट के नहीं होते या जिन्हें बहुत कसकर बांधा जाता है, वे पैरों के लिए नुकसानदायक हैं. इससे न सिर्फ दर्द होता है, बल्कि स्किन भी डैमेज होने लगती है.

जूते और स्किन के बीच लगातार रगड़ होने से त्वचा पर लाल चकत्ते, जलन और छाले हो सकते हैं. समय रहते ध्यान न देने पर ये और भी गंभीर हो सकते हैं.

जूते और स्किन के बीच लगातार रगड़ होने से त्वचा पर लाल चकत्ते, जलन और छाले हो सकते हैं. समय रहते ध्यान न देने पर ये और भी गंभीर हो सकते हैं.

लंबे समय तक बंद जूते पहनने से पसीना ज्यादा होता है. इससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं, जो दाद-खाज जैसी स्किन प्रॉब्लम का कारण बनते हैं.

लंबे समय तक बंद जूते पहनने से पसीना ज्यादा होता है. इससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं, जो दाद-खाज जैसी स्किन प्रॉब्लम का कारण बनते हैं.

अगर पैर जूते के अंदर लंबे समय तक बंद रहते हैं, तो उनमें हवा नहीं पहुंचती. इससे बदबू बढ़ जाती है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी.

अगर पैर जूते के अंदर लंबे समय तक बंद रहते हैं, तो उनमें हवा नहीं पहुंचती. इससे बदबू बढ़ जाती है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी.

मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल के कंसल्टेंट पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विकास बासा ने इसको लेकर मीडिया से बात की थी, वे बताते हैं कि लंबे समय तक जूते पहनने से पैर एक निश्चित पोजीशन में बंद रहते हैं, जिससे पैरों की मांसपेशियां सख्त और कमजोर होने लगती हैं. यह लगातार जकड़न पैरों की स्वाभाविक मूवमेंट को कम कर देती है और समय के साथ दर्द, कमजोरी और कई अन्य समस्याएं पैदा कर सकती है. वह कहते हैं कि जो जूते फिट नहीं होते या जिन्हें बहुत कसकर बांधा जाता है, वे पैरों के लिए और ज्यादा हानिकारक साबित होते हैं क्योंकि इससे पैरों को हिलने-डुलने की जगह नहीं मिलती और स्किन रगड़ने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है.

मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल के कंसल्टेंट पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विकास बासा ने इसको लेकर मीडिया से बात की थी, वे बताते हैं कि लंबे समय तक जूते पहनने से पैर एक निश्चित पोजीशन में बंद रहते हैं, जिससे पैरों की मांसपेशियां सख्त और कमजोर होने लगती हैं. यह लगातार जकड़न पैरों की स्वाभाविक मूवमेंट को कम कर देती है और समय के साथ दर्द, कमजोरी और कई अन्य समस्याएं पैदा कर सकती है. वह कहते हैं कि जो जूते फिट नहीं होते या जिन्हें बहुत कसकर बांधा जाता है, वे पैरों के लिए और ज्यादा हानिकारक साबित होते हैं क्योंकि इससे पैरों को हिलने-डुलने की जगह नहीं मिलती और स्किन रगड़ने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है.

आरामदायक और सही साइज के जूते पहनें. पैरों को समय-समय पर खुला छोड़ें ताकि हवा लग सके. पैरों की साफ-सफाई पर ध्यान दें और अगर किसी तरह की परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

आरामदायक और सही साइज के जूते पहनें. पैरों को समय-समय पर खुला छोड़ें ताकि हवा लग सके. पैरों की साफ-सफाई पर ध्यान दें और अगर किसी तरह की परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

Published at : 01 Aug 2025 05:52 PM (IST)

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