शराब पीने से होते हैं ये 7 कैंसर, होश उड़ा देगी एम्स के डॉक्टरों की यह स्टडी

शराब पीने से होते हैं ये 7 कैंसर, होश उड़ा देगी एम्स के डॉक्टरों की यह स्टडी


Alcohol and Cancer Risk: आप किसी पार्टी में हैं और दोस्तों के बीच हंसी-मजाक चल रहा है और हाथ में है एक शराब की बोटल है. सब कुछ सामान्य लग रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, यह शराब का प्याला धीरे-धीरे आपकी ज़िंदगी को किस तरफ ले जा सकता है? एम्स के डॉक्टरों की स्टडी एक झटका देने वाली सच्चाई लेकर आई है. शराब का सेवन न सिर्फ आपके लीवर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह 7 तरह के घातक कैंसर का कारण भी बन सकता है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली की स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि, शराब का सेवन सात तरह के कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है. जिसपर कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शंकर ने चेताया है कि, लोग शराब की बोतल पर लिखी चेतावनी को नजरअंदाज कर रहे हैं और इसका खामियाजा उन्हें गंभीर बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ सकता है.

दरअसल, शराब पीना समाज में आज एक सामान्य आदत बनती जा रही है. कभी पार्टी में, कभी तनाव के नाम पर तो कभी दोस्तों के साथ मस्ती के बहाने, शराब की बोतलें खुलती हैं, लेकिन इसके नतीजे कितने गंभीर हो सकते हैं.

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7 प्रकार के कैंसर कौन-कौन से हैं

  • कोलन कैंसर (मलाशय का कैंसर)
  • लिवर कैंसर
  • स्तन कैंसर
  • ईसोफेगस कैंसर (आहारनली का कैंसर)
  • लैरिंक्स कैंसर (कंठ का कैंसर)
  • फैरिंक्स कैंसर (गले का कैंसर)
  • ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर)

किस लोगों के लिए दिक्कत हो सकती है

  • जो व्यक्ति नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं
  • शराब के साथ धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए खतरनाक
  • महिलाओं में स्तन कैंसर का जोखिम कहीं अधिक होता है
  • जिनकी जीवनशैली में व्यायाम, पौष्टिक आहार और नींद की कमी है

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है

  • अगर कैंसर से बचना है, तो शराब से दूरी बनाना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है.
  • सिर्फ शराब छोड़ना ही काफी नहीं, साथ में सही आहार, नियमित व्यायाम, और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है.

शराब पीना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक धीमा जहर है जो शरीर को भीतर से खोखला कर रहा है. एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की यह स्टडी हमें चेतावनी दे रही है कि, अब भी वक्त है संभलने का. आज अगर हम अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाए, तो कल पछताना पड़ सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किस ब्लड ग्रुप के लोगों को दिमाग चलता है सबसे तेज? इस स्टडी में सामने आ गई हकीकत

किस ब्लड ग्रुप के लोगों को दिमाग चलता है सबसे तेज? इस स्टडी में सामने आ गई हकीकत


अक्सर हम लोगों की पर्सनैलिटी से उनकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा लगाते हैं और हर कोई चाहता है कि उसका दिमाग तेज हो. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक, आपके ब्लड ग्रुप से भी दिमाग की तेजी का पता लग सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंसान की पसंद-नापसंद के साथ-साथ ब्लड ग्रुप भी उसके व्यवहार और मानसिक क्षमता से जुड़ा हो सकता है.

कुछ ब्लड ग्रुप वाले लोग दूसरों से ज्यादा तेज दिमाग वाले होते हैं, जो अपने काम में बेहद माहिर होते हैं. अगर आप जानना चाहते हैं कि क्या आपका दिमाग कंप्यूटर से भी शार्प है, तो सबसे पहले अपना ब्लड ग्रुप चेक करवा लें. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च से सामने आई सच्चाई आपको हैरान कर सकती है. आइए जानते हैं इन ब्लड ग्रुप के बारे में.

इन ब्लड ग्रुप वालों का दिमाग है सबसे तेज

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में 69 लोगों पर हुई रिसर्च से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. ब्लड ग्रुप B+ और O+ वाले लोगों का दिमाग दूसरों से ज्यादा तेज होता है. इन लोगों का सोचने-समझने का तरीका काफी अलग होता है और ये अपनी समझदारी व तेज सोच के लिए जाने जाते हैं. ये कोई भी बात बहुत आसानी से समझ लेते हैं.

ऐसा होता है ब्लड ग्रुप B+

रिसर्च के मुताबिक, B+ ब्लड ग्रुप वालों के दिमाग़ में पेरिटोनियल और टेम्पोरल लोब के सेरीब्रम ज्यादा एक्टिव होते हैं, जिससे इनका दिमाग काफी मजबूत होता है. इनकी याददाश्त दूसरों से बेहतर होती है और ये बड़ी से बड़ी चुनौतियों का भी आसानी से सामना करते हैं. इनकी एकाग्रता और फोकस करने की क्षमता इन्हें खास बनाती है.

ब्लड ग्रुप O+ में की ये है खासियत

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पाया गया कि O+ ब्लड ग्रुप वाले लोगों का ब्लड सर्कुलेशन बहुत बेहतर होता है. इनके दिमाग में ऑक्सीजन का फ्लो भी काफी अच्छा रहता है, जिससे इनकी याददाश्त तेज होती है. ये लोग मुश्किल से मुश्किल काम भी आसानी से निपटाने में माहिर होते हैं.

अन्य ब्लड ग्रुप्स के लोगों की इंटेलिजेंस

जरूरी नहीं कि केवल B+ और O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग ही इंटेलिजेंट होते हैं. यह तो सिर्फ एक रिसर्च का निष्कर्ष है. हमने ऐसे कई लोग देखे हैं, जिनके ब्लड ग्रुप अलग होते हैं, लेकिन वे इंटेलिजेंस के मामले में किसी से कम नहीं होते. इसलिए, यह धारणा बिल्कुल न बनाएं कि दूसरे ब्लड ग्रुप के लोगों में समझदारी की कमी होती है. इंटेलिजेंस एक जटिल गुण है, जो कई चीजों पर निर्भर करती है, न कि सिर्फ ब्लड ग्रुप पर.

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हड्डियों में दर्द से राहत और सेहत में मजबूती , ये चीजें करेंगी कमाल, रोज खाएं और पाएं आराम

हड्डियों में दर्द से राहत और सेहत में मजबूती , ये चीजें करेंगी कमाल, रोज खाएं और पाएं आराम


हड्डियों में दर्द से राहत और सेहत में मजबूती पाने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं. पालक, बथुआ, ब्रोकली, सरसों, केल जैसी हरी सब्जियां सिर्फ आयरन ही नहीं, बल्कि कैल्शियम, विटामिन K, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर होती हैं. इन्हें उबालकर, सूप या सब्जी के रूप में नियमित खाएं.

हड्डियों में दर्द से राहत पाने और  मजबूती बनाने के लिए सूरज की रोशनी लें और मशरूम खाएं. कुछ प्रकार के मशरूम, खासकर वे जो सूरज की रोशनी में उगते हैं, वे शरीर में विटामिन D की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं. विटामिन D, कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने का काम करता है.

हड्डियों में दर्द से राहत पाने और मजबूती बनाने के लिए सूरज की रोशनी लें और मशरूम खाएं. कुछ प्रकार के मशरूम, खासकर वे जो सूरज की रोशनी में उगते हैं, वे शरीर में विटामिन D की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं. विटामिन D, कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने का काम करता है.

हड्डियों की ताकत बढ़ाने के लिए दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स भी बेस्ट हैं. दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, पनीर और छाछ में भरपूर कैल्शियम होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए सबसे जरूरी है. रोजाना एक या दो बार इनको खाने से हड्डियां मजबूत बनती है और दर्द से राहत मिलती है.

हड्डियों की ताकत बढ़ाने के लिए दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स भी बेस्ट हैं. दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, पनीर और छाछ में भरपूर कैल्शियम होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए सबसे जरूरी है. रोजाना एक या दो बार इनको खाने से हड्डियां मजबूत बनती है और दर्द से राहत मिलती है.

इसके साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए टोफू भी बेस्ट है. टोफू, जो सोया से बनता है, कैल्शियम का अच्छा वेजिटेरियन सोर्स है. खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो दूध नहीं पीते या लैक्टोज से एलर्जिक हैं.

इसके साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए टोफू भी बेस्ट है. टोफू, जो सोया से बनता है, कैल्शियम का अच्छा वेजिटेरियन सोर्स है. खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो दूध नहीं पीते या लैक्टोज से एलर्जिक हैं.

हड्डियों में दर्द से राहत और सेहत में मजबूती पाने के लिए सार्डिन और साल्मन मछली खाएं. अगर आप मछली खाते हैं, तो सार्डिन और साल्मन जैसे फैटी फिश को अपनी डाइट में शामिल करें. इनमें कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो हड्डियों और जोड़ों के लिए बेहद फायदेमंद होता है.

हड्डियों में दर्द से राहत और सेहत में मजबूती पाने के लिए सार्डिन और साल्मन मछली खाएं. अगर आप मछली खाते हैं, तो सार्डिन और साल्मन जैसे फैटी फिश को अपनी डाइट में शामिल करें. इनमें कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो हड्डियों और जोड़ों के लिए बेहद फायदेमंद होता है.

हड्डियों में मजबूती पाने के लिए खट्टे फल खाएं और कोलेजन को बढ़ाएं. संतरा, कीनू, नींबू जैसे खट्टे फलों में विटामिन C होता है, जो कोलेजन तत्व को बनाने में मदद करता है. कोलेजन हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करता है और लचीलापन भी देता है.

हड्डियों में मजबूती पाने के लिए खट्टे फल खाएं और कोलेजन को बढ़ाएं. संतरा, कीनू, नींबू जैसे खट्टे फलों में विटामिन C होता है, जो कोलेजन तत्व को बनाने में मदद करता है. कोलेजन हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करता है और लचीलापन भी देता है.

Published at : 28 Jul 2025 09:15 AM (IST)

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क्या हेपेटाइटिस से हो सकती है मौत, जान लें यह कितनी खतरनाक बीमारी?

क्या हेपेटाइटिस से हो सकती है मौत, जान लें यह कितनी खतरनाक बीमारी?


हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है और कई बार यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. ये सूजन आमतौर पर वायरस की वजह से होती है, लेकिन इसके पीछे शराब, खराब खानपान, कुछ दवाएं या गंदगी भी कारण हो सकते हैं. ऐसे में हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे  मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस खतरनाक बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके और इससे बचने के उपाय सिखाए जा सके.

यह दिन नोबेल विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी और इसकी वैक्सीन भी बनाई थी. लोग अक्सर इस बीमारी को लेकर काफी कंफ्यूज रहते और कई तरह के सवाल भी करते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या हेपेटाइटिस मौत से हो सकती है और यह बीमारी कितनी खतरनाक है. 

हेपेटाइटिस होता क्या है और यह कितना खतरनाक?

हेपेटाइटिस का मतलब लिवर में सूजन होता है. यह सूजन वायरस की वजह से होती है और समय पर इलाज न मिलने पर यह लिवर फेलियर, लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. हेपेटाइटिस के 5 मुख्य प्रकार होते हैं जिसमें A, B, C, D और E शामिल है. लेकिन इनमें से हेपेटाइटिस B और C सबसे खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रहते हैं और लिवर को धीरे-धीरे खराब कर सकते हैं. हेपेटाइटिस हर किसी को हो सकती है, लेकिन यह कुछ कारणों से तेजी से फैलती है, जैसे गंदा और खाना, इंफेक्टेड खून या निडल का यूज, संक्रमित मां से बच्चे में या गंदगी. 

हेपेटाइटिस के लक्षण शुरू में बहुत नॉर्मल हो सकते हैं, लेकिन जब यह गंभीर हो जाए तो लक्षण कुछ इस तरह नजर आते हैं, जैसे थकान और कमजोरी, भूख न लगना, पेट दर्द या सूजन, उल्टी या दस्त, गहरे रंग का यूरिन, पीलिया और बुखार. कई बार यह बीमारी बिना किसी लक्षण के भी हो सकती है और धीरे-धीरे लिवर को खराब करती रहती है. इसलिए समय-समय पर चेकअप कराना जरूरी है. 

हेपेटाइटिस से मौत कैसे हो सकती है?

हेपेटाइटिस लंबे समय तक शरीर में मौजूद रहे और इलाज न किया जाए, तो यह लिवर को पूरी तरह खराब कर सकता है, लिवर सिरोसिस कर सकता है या लिवर कैंसर का कारण बन सकता है, जिससे यह इंसान की मौत भी हो सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाले हेपेटाइटिस C और B के क्रोनिक मामलों में मौत का खतरा सबसे ज्यादा होता है. 

WHO के मुताबिक हर साल 13 लाख लोग हेपेटाइटिस से मरते हैं. वहीं दुनिया में 25 करोड़ लोग हेपेटाइटिस B और 5 करोड़ लोग हेपेटाइटिस C से पीड़ित हैं. अकेले भारत में करीब 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस B और 1 करोड़ लोग हेपेटाइटिस C से प्रभावित हैं. 

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स्किन पर दिखें ये 12 लक्षण तो समझ लें दिल पर मंडरा रहा खतरा, तुरंत डॉक्टर के पास भागें

स्किन पर दिखें ये 12 लक्षण तो समझ लें दिल पर मंडरा रहा खतरा, तुरंत डॉक्टर के पास भागें


आजकल की फास्ट लाइफ और अनहेल्दी खाने की वजह से हाई कोलेस्ट्रॉल एक कॉमन प्रॉब्लम बन गई है. अक्सर लोग सोचते हैं कि इसका असर सिर्फ हार्ट पर होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी स्किन पर भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के निशान दिख सकते हैं? अगर इन सिग्नल्स को वक्त पर नहीं पहचाना गया, तो ये सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह बन सकते हैं. अगर आपकी स्किन में कुछ अजीब चेंज दिख रहे हैं, तो उन्हें हल्के में न लें. ये इंडिकेट कर सकते हैं कि आपकी बॉडी में कोलेस्ट्रॉल लेवल डेंजर मार्क से ऊपर जा चुका है. आइए जानते हैं वो सिम्टम्स, जो आपकी स्किन पर बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का इशारा करते हैं.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

कार्डियो एक्सपर्ट डॉ. संजय सरकार बताते हैं कि आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं, जिनके लक्षण अक्सर देर से दिखते हैं. हमारा शरीर भले ही संकेत देता है, लेकिन जानकारी की कमी से हम इन्हें समझ नहीं पाते, जिससे दिल की सही देखभाल नहीं हो पाती. वह कहते हैं कि आपकी स्किन पर भी ये लक्षण नजर आते हैं. अगर आपको अपनी त्वचा में बदलाव नजर आ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

इन लक्षणों को पहचानना जरूरी

  • जैंथोमास या स्किन पर पीले धब्बे: ये छोटे, पीले या ऑरेंज वैक्सी बम्प्स होते हैं, जो अक्सर आंखों के आसपास, पलकों पर या कोहनी, घुटनों और टेंडन्स पर दिख सकते हैं. ये असल में कोलेस्ट्रॉल और फैट के डिपॉजिट होते हैं.
  • जैथेलाज्मा या पलकों पर पीले पैच: ये जैंथोमास का ही एक टाइप हैं, जो स्पेसिफिकली पलकों के ऊपर या नीचे छोटे, पीले, स्मूथ पैचेज के रूप में दिखाई देते हैं. ये अक्सर हाई कोलेस्ट्रॉल का एक क्लियर साइन होते हैं.
  • आर्कस सेनिलिस: आंखों की पुतली (आइरिस) के चारों ओर एक व्हाइट, ब्लू या ग्रे कलर का रिंग दिखना, खासकर यंगस्टर्स में, हाई कोलेस्ट्रॉल का इंडिकेशन हो सकता है. एज के साथ ये रिंग नॉर्मल हो सकता है, लेकिन कम एज में इसका दिखना एक रेड फ्लैग है.
  • स्किन पर छोटी गांठें या उभार: ये अचानक स्किन पर उभरने वाली छोटी, रेडिश-येलो बम्प्स होती हैं, जो यूजुअली हिप्स, शोल्डर्स या लिम्ब्स पर दिखाई देती हैं. इनमें इचिंग हो सकती है और ये बहुत ज्यादा हाई ट्राइग्लिसराइड्स (एक तरह का फैट) का सिग्नल देते हैं, जो हाई कोलेस्ट्रॉल से जुड़ा है.
  • पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के स्किन रिलेटेड सिम्टम्स: हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से ब्लड वेसेल्स नैरो हो सकती हैं, जिससे लेग्स और फ़ीट में ब्लड सर्कुलेशन अफेक्ट होता है. इसके सिम्टम्स में लेग्स की स्किन का थिन होना, शाइनी होना, कलर चेंज होना, लेग्स पर हेयर ग्रोथ कम होना और लेग्स या फीट में ऐसे सोर या अल्सर होना जो हील न हों, शामिल हैं.

ऐसे करें अपना बचाव

अगर आपकी स्किन पर हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई भी संकेत दिख रहे हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें. अच्छी बात यह है कि कुछ बेहद जरूरी आदतें अपनाकर आप इस समस्या से खुद को बचा सकते हैं. सबसे पहले, अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें. अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां, नट्स और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें. नियमित रूप से व्यायाम करें और धूम्रपान और शराब से दूर रहें. अंत में, नियमित रूप से अपने ब्लड टेस्ट करवाएं.  इन स्वस्थ आदतों को अपनाकर आप न केवल हाई कोलेस्ट्रॉल से खुद को बचा सकते हैं, बल्कि अपने दिल और ओवरऑल हेल्थ का भी बेहतर तरीके से ख्याल रख सकते हैं.

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क्या नॉर्मल देसी घी से ज्यादा हेल्दी होता है A2 घी, इसे क्यों बताया जा रहा सुपरफूड?

क्या नॉर्मल देसी घी से ज्यादा हेल्दी होता है A2 घी, इसे क्यों बताया जा रहा सुपरफूड?


भारतीय बाजारों में इन दिनों A2 घी और A2 लेबल वाले डेयरी प्रोडक्ट्स की जबरदस्त डिमांड है. खासकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसे एक सुपरफूड के तौर पर प्रमोट किया जा रहा है. कंपनियां दावा करती हैं कि A2 घी देसी गायों के दूध से बनता है, जो A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन से भरपूर होता है. उनका कहना है कि यह प्रोटीन A1 प्रोटीन की तुलना में पचाने में आसान है और शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम करता है.

कंपनियां यह भी कहती हैं कि A2 घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड (CLA), विटामिन A, D, E और K पाए जाते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं, पाचन को बेहतर करते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और स्किन ग्लो लाते हैं. इतना ही नहीं, इसे घाव भरने में मददगार भी बताया जाता है. लेकिन क्या ये सारे दावे सच हैं?

A1 और A2 प्रोटीन में क्या फर्क है?

दूध में पाया जाने वाला एक प्रमुख प्रोटीन है बीटा-कैसीन. इसके दो प्रकार होते हैं:-

  • A1 बीटा-कैसीन, जो मुख्य रूप से यूरोपीय नस्ल की गायों के दूध में पाया जाता है.
  • A2 बीटा-कैसीन, जो भारतीय देसी गायों के दूध में प्राकृतिक रूप से मिलता है.

कंपनियों का दावा है कि A2 दूध या घी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है. हालांकि, नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (NAAS) के रिसर्च के अनुसार, इस दावे को लेकर अभी कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है. कुछ स्टडीज में A2 दूध को पचाने में आसान बताया गया है, लेकिन बड़े स्तर पर ऐसी रिसर्च नहीं हुई है, जिससे यह साबित हो सके कि A2 घी वास्तव में आम घी से ज्यादा हेल्दी है.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

अमूल के पूर्व MD और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.एस. सोढी का कहना है, “मैं इसे सिर्फ़ मार्केटिंग का तमाशा मानता हूं. आज नामी कोऑपरेटिव्स और कंपनियां अच्छा देसी घी 600 से 1000 रुपये किलो बेच रही हैं, जबकि A2 लेबल लगाकर वही घी 2000 से 3000 रुपये किलो बेचा जा रहा है. असल में, A1 और A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन के दो प्रकार हैं. इनमें अंतर सिर्फ़ एक अमीनो एसिड का है. इससे हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.”

वह आगे कहते हैं, “घी में 99.5 प्रतिशत वसा (Fat) होता है. प्रोटीन नाममात्र का भी नहीं होता. ऐसे में यह कहना कि मेरे घी में A2 प्रोटीन है और यह ज्यादा फायदेमंद है, यह गलत है. यह सिर्फ़ लोगों को भ्रमित करने का तरीका है.”

डॉ. विभूति रस्तोगी, सीनियर डाइटिशियन, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली का कहना है कि “A2 घी को आम घी से ज्यादा हेल्दी बताने का दावा जब तक वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं होता, तब तक इसे सच नहीं माना जा सकता. घी प्रोटीन का स्रोत नहीं है. अगर कोई कंपनी यह कहती है कि इसमें A2 प्रोटीन है और यह आपको प्रोटीन देगा, तो यह भ्रामक है.”

वह यह भी बताती हैं कि आयुर्वेद में A2 घी को लेकर कोई विशेष उल्लेख नहीं है. उनका कहना है कि कंपनियां यह कहकर फायदा उठा रही हैं कि घी मशीन से नहीं निकाला गया या पारंपरिक तरीके से बनाया गया है, लेकिन यह साबित करने के लिए उनके पास ठोस आधार नहीं है.

FSSAI की चेतावनी

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने भी कंपनियों को A1 और A2 लेबलिंग करने से मना किया था. FSSAI का कहना था कि यह लेबलिंग भ्रामक है और फूड सेफ्टी एक्ट, 2006 का उल्लंघन करती है. हालांकि, बाद में यह एडवाइजरी हटा ली गई, लेकिन सवाल अब भी वही है. A2 घी ज्यादा हेल्दी है या सिर्फ़ महंगा होने का कारण उसका ब्रांडिंग गेम है?

हकीकत क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि घी किसी भी रूप में चाहे A1 हो या A2 वसा (Fat) का स्रोत है. यह शरीर को एनर्जी देता है और फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (A, D, E, K) का स्रोत है. लेकिन ज्यादा मात्रा में घी खाने से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है.

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