दिल का दौरा पड़ने से पहले दिखते हैं ये 6 लक्षण, नजरअंदाज न करें

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रोजाना खाते हैं चिकन तो यह कैंसर होना पक्का! सर्वे में सामने आया डराने वाला सच

रोजाना खाते हैं चिकन तो यह कैंसर होना पक्का! सर्वे में सामने आया डराने वाला सच


अगर आप नॉन वेज खाने के शौकीन हैं तो आपकी थाली में चिकन जरूर शामिल होता होगा. अगर इसका जवाब हां है तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है. यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि इटली में हुई एक नई स्टडी में चौंकाने वाला दावा हुआ है. रिसर्च के मुताबिक, हफ्ते में चार बार या उससे ज्यादा चिकन खाने से पेट के कैंसर (गैस्ट्रिक कैंसर) का खतरा बढ़ सकता है. यह स्टडी न्यूट्रिएंट्स नामक जर्नल में पब्लिश हुई है. इसमें 4000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था. प्रतिभागियों से उनकी डेमोग्राफिक डिटेल्स, हेल्थ कंडीशन, लाइफस्टाइल आदतें और पर्सनल हिस्ट्री से जुड़ी जानकारी ली गईं. इसके अलावा उन्हें डिटेल फूड क्वेश्चनर दिया गया, जिसमें खास तौर पर यह पूछा गया कि वे कितनी मात्रा में मांस खाते हैं. मांस को रेड मीट, पोल्ट्री और टोटल मीट में बांटा गया था.

स्टडी में सामने आई यह बात

स्टडी के दौरान कई प्रतिभागियों की मौत भी हुई. जिन लोगों की मौत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुई, वे औसतन ज्यादा मांस खाने वाले थे.

चिकन खाने से कैंसर का खतरा क्यों?

रिसर्च के मुताबिक, जो लोग हफ्ते में 300 ग्राम से ज्यादा पोल्ट्री खाते हैं, उनमें मरने का खतरा 27 प्रतिशत ज्यादा पाया गया, उनकी तुलना में जो 100 ग्राम से कम खाते हैं. खास बात यह है कि जितनी ज्यादा मात्रा में चिकन खाया गया, खतरा उतना बढ़ा. पुरुषों में यह जोखिम और भी ज्यादा निकला. जो पुरुष हफ्ते में 300 ग्राम से ज्यादा चिकन खाते थे, उनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर से मौत का खतरा दोगुना पाया गया.

क्या हो सकते हैं कारण?

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसका सटीक कारण अभी साफ नहीं है, लेकिन उनके कुछ अनुमान हैं.

  • ओवरकुकिंग का खतरा: चिकन को ज्यादा पकाने पर म्यूटेजन्स नामक केमिकल बनते हैं, जो डीएनए में बदलाव (म्यूटेशन) कर सकते हैं. ये बदलाव कई बार खतरनाक साबित होते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं.
  • फीड में मौजूद केमिकल: मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले हार्मोन और कीटनाशक भी इंसानों में कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

पुरुषों में ज्यादा खतरे को लेकर शोधकर्ता भी असमंजस में हैं. उनका मानना है कि हार्मोनल डिफरेंस भी इसमें भूमिका निभा सकता है. उन्होंने चूहों पर हुई एक स्टडी का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हार्मोन मेटाबॉलिज्म और बीमारी के रिस्क को प्रभावित करता है. हालांकि, रिसर्चर्स का कहना है कि इन सभी पहलुओं पर और गहन स्टडी की जरूरत है. साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुरुषों और महिलाओं के डाइट पैटर्न में भी बड़ा अंतर होता है. आमतौर पर महिलाएं छोटे हिस्से में भोजन करती हैं, जो उनके लिए सुरक्षित हो सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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IVF की पहली कोशिश में सफलता पाना चाहते हैं? इन बातों का रखें खास ध्यान

IVF की पहली कोशिश में सफलता पाना चाहते हैं? इन बातों का रखें खास ध्यान


First IVF Attempt Success Tip: IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, उन कपल्स के लिए एक उम्मीद की किरण है जो नेचुरली कंसीव नहीं कर पा रहे हैं. लेकिन IVF की प्रक्रिया जितनी वैज्ञानिक है, उतनी ही भावनात्मक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी होती है. हर कपल यही चाहता है कि पहली कोशिश में ही सफलता मिले, लेकिन इसके लिए सिर्फ मेडिकल प्रोसेस ही नहीं, आपकी लाइफस्टाइल, डाइट, स्ट्रेस लेवल और माइंडसेट भी बड़ा रोल निभाते हैं.

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा का कहना है कि, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) उन दंपतियों के लिए आशा की किरण है जो संतान-संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. IVF की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाकर आप पहली कोशिश में सफलता की संभावना बढ़ा सकते हैं.

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सही क्लिनिक को खोजना जरूरी है

सबसे पहला और अहम कदम है किसी अच्छे और विश्वसनीय फर्टिलिटी क्लिनिक का चयन करना. ऐसा केंद्र चुनें जहा सफलता दर अच्छी हो, विशेषज्ञ डॉक्टर हों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो. पुराने मरीज़ों की राय जानने और रिव्यू पढ़ने से भी मदद मिल सकती है.

अपनी सेहत का ध्यान रखें

आपकी संपूर्ण सेहत IVF की सफलता में बड़ी भूमिका निभाती है. संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, पर्याप्त नींद लें और स्वस्थ वजन बनाए रखें. धूम्रपान, शराब और अधिक कैफीन से दूर रहें, ये प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुँचा सकते हैं.

तनाव को नियंत्रित करें

अधिक तनाव हार्मोन संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. योग, मेडिटेशन या गहरी सांस लेने जैसे उपायों से तनाव कम किया जा सकता है. परिवार, दोस्तों या काउंसलर का सहयोग लेना भी लाभदायक होता है.

डॉक्टर की सलाह का पालन करें

अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट की सलाह का पूरी तरह पालन करें. दवाइयाँ समय पर लें, सभी अपॉइंटमेंट पर जाएं और किसी भी परेशानी की जानकारी तुरंत दें. हार्मोन इंजेक्शन और एग रिट्रीवल का सही समय IVF की सफलता में बहुत जरूरी होता है.

जरूरी सप्लीमेंट्सेना न भूलें

कुछ सप्लीमेंट्स जैसे फॉलिक एसिड, CoQ10 और ओमेगा-3 फैटी एसिड अंडाणु और शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं. कोई भी नया सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

विकल्पों को समझें

अपने डॉक्टर से IVF के सभी विकल्पों पर बात करें, जैसे प्रीइंप्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT)। इससे स्वस्थ भ्रूण की पहचान हो सकती है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है.

IVF की सफलता की 100% गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन अच्छी तैयारी और सही फैसले लेने से पहली कोशिश में सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है. अपने शरीर, मन और भावनाओं का ध्यान रखते हुए यह प्रक्रिया अपनाएं, यही सफलता की मजबूत नींव बनाता है.

ये भी पढ़ें: क्या काली ब्रा पहनने से भी हो जाता है कैंसर? डॉक्टर से जानें इस बात में कितनी है हकीकत

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मॉनसून में कैसे रखें आंखों का ख्याल? बढ़ जाता है आई इन्फेक्शन का खतरा

मॉनसून में कैसे रखें आंखों का ख्याल? बढ़ जाता है आई इन्फेक्शन का खतरा


चलिए, आपको बताते हैं कि मॉनसून के मौसम में अपनी आंखों की सुरक्षा कैसे करें, ताकि गरमा-गरम चाय, पकौड़े और मूवी का मजा लेने में कोई रुकावट न आए. क्योंकि अगर आंखों में किसी तरह की दिक्कत हो गई, तो बरसात का मजा लेने का सपना अगले साल तक के लिए टल सकता है.

डॉ. आशीष पटेल के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी और वातावरण में गंदगी बढ़ने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं. यह बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं. शुरुआत में यह लालिमा, खुजली या पानी आने जैसे हल्के लक्षण दिखाते हैं, लेकिन अगर इन्हें अनदेखा किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है और दृष्टि पर भी असर डाल सकती है.

डॉ. आशीष पटेल के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी और वातावरण में गंदगी बढ़ने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं. यह बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं. शुरुआत में यह लालिमा, खुजली या पानी आने जैसे हल्के लक्षण दिखाते हैं, लेकिन अगर इन्हें अनदेखा किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है और दृष्टि पर भी असर डाल सकती है.

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस मौसम में आंखों की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोएं और गंदे हाथों से आंखों को न छुएं.

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस मौसम में आंखों की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोएं और गंदे हाथों से आंखों को न छुएं.

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग हमेशा उन्हें डिसइंफेक्ट करें और पुराने आई मेकअप का इस्तेमाल न करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबैक्टीरियल ड्रॉप्स का उपयोग करें.

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग हमेशा उन्हें डिसइंफेक्ट करें और पुराने आई मेकअप का इस्तेमाल न करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबैक्टीरियल ड्रॉप्स का उपयोग करें.

मॉनसून में बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आंखों की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. हमेशा अपना तौलिया रोजाना धोकर सुखाएं, क्योंकि गंदे और गीले कपड़े बैक्टीरिया के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं.

मॉनसून में बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आंखों की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. हमेशा अपना तौलिया रोजाना धोकर सुखाएं, क्योंकि गंदे और गीले कपड़े बैक्टीरिया के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं.

दिन में कम से कम दो बार आंखों को साफ पानी से धोएं. सुबह और रात को ठंडे पानी से आंख धोना आदत बनाएं. अगर आप बाहर से लौटे हैं या धूल-मिट्टी में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धो लें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया जमा न हों.

दिन में कम से कम दो बार आंखों को साफ पानी से धोएं. सुबह और रात को ठंडे पानी से आंख धोना आदत बनाएं. अगर आप बाहर से लौटे हैं या धूल-मिट्टी में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धो लें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया जमा न हों.

इस मौसम में कॉंटैक्ट लेंस पहनते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें. लेंस लगाने से पहले हमेशा हाथों को अच्छी तरह धोएं. पुराने लेंस या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

इस मौसम में कॉंटैक्ट लेंस पहनते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें. लेंस लगाने से पहले हमेशा हाथों को अच्छी तरह धोएं. पुराने लेंस या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

Published at : 24 Jul 2025 03:15 PM (IST)

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