मॉनसून में कैसे रखें आंखों का ख्याल? बढ़ जाता है आई इन्फेक्शन का खतरा

मॉनसून में कैसे रखें आंखों का ख्याल? बढ़ जाता है आई इन्फेक्शन का खतरा


चलिए, आपको बताते हैं कि मॉनसून के मौसम में अपनी आंखों की सुरक्षा कैसे करें, ताकि गरमा-गरम चाय, पकौड़े और मूवी का मजा लेने में कोई रुकावट न आए. क्योंकि अगर आंखों में किसी तरह की दिक्कत हो गई, तो बरसात का मजा लेने का सपना अगले साल तक के लिए टल सकता है.

डॉ. आशीष पटेल के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी और वातावरण में गंदगी बढ़ने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं. यह बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं. शुरुआत में यह लालिमा, खुजली या पानी आने जैसे हल्के लक्षण दिखाते हैं, लेकिन अगर इन्हें अनदेखा किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है और दृष्टि पर भी असर डाल सकती है.

डॉ. आशीष पटेल के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी और वातावरण में गंदगी बढ़ने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं. यह बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं. शुरुआत में यह लालिमा, खुजली या पानी आने जैसे हल्के लक्षण दिखाते हैं, लेकिन अगर इन्हें अनदेखा किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है और दृष्टि पर भी असर डाल सकती है.

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस मौसम में आंखों की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोएं और गंदे हाथों से आंखों को न छुएं.

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस मौसम में आंखों की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोएं और गंदे हाथों से आंखों को न छुएं.

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग हमेशा उन्हें डिसइंफेक्ट करें और पुराने आई मेकअप का इस्तेमाल न करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबैक्टीरियल ड्रॉप्स का उपयोग करें.

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग हमेशा उन्हें डिसइंफेक्ट करें और पुराने आई मेकअप का इस्तेमाल न करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबैक्टीरियल ड्रॉप्स का उपयोग करें.

मॉनसून में बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आंखों की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. हमेशा अपना तौलिया रोजाना धोकर सुखाएं, क्योंकि गंदे और गीले कपड़े बैक्टीरिया के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं.

मॉनसून में बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आंखों की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. हमेशा अपना तौलिया रोजाना धोकर सुखाएं, क्योंकि गंदे और गीले कपड़े बैक्टीरिया के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं.

दिन में कम से कम दो बार आंखों को साफ पानी से धोएं. सुबह और रात को ठंडे पानी से आंख धोना आदत बनाएं. अगर आप बाहर से लौटे हैं या धूल-मिट्टी में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धो लें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया जमा न हों.

दिन में कम से कम दो बार आंखों को साफ पानी से धोएं. सुबह और रात को ठंडे पानी से आंख धोना आदत बनाएं. अगर आप बाहर से लौटे हैं या धूल-मिट्टी में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धो लें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया जमा न हों.

इस मौसम में कॉंटैक्ट लेंस पहनते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें. लेंस लगाने से पहले हमेशा हाथों को अच्छी तरह धोएं. पुराने लेंस या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

इस मौसम में कॉंटैक्ट लेंस पहनते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें. लेंस लगाने से पहले हमेशा हाथों को अच्छी तरह धोएं. पुराने लेंस या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

Published at : 24 Jul 2025 03:15 PM (IST)

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डायबिटीज के मरीज क्या खाएं और क्या नहीं? जानिए परफेक्ट डाइट प्लान

डायबिटीज के मरीज क्या खाएं और क्या नहीं? जानिए परफेक्ट डाइट प्लान


Diabetes Patient Diet Plan: डायबिटीज यानी मधुमेह, एक ऐसी बीमारी जो आज के समय में हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है. अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और तनाव भरी जिंदगी ने इस बीमारी को और भी आम बना दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, डायबिटीज को दवाओं के साथ-साथ सही खानपान के जरिए भी कंट्रोल में रखा जा सकता है?

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. बिपाशा दास बताती हैं कि, डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर का बढ़ जाना नहीं है, बल्कि ये पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है. इसलिए डायबिटिक मरीजों के लिए यह जानना जरूरी है कि, उन्हें क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए.

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डायबिटीज के मरीज क्या खाएं?

फल और सब्जियां

डायबिटिक मरीजों के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, गाजर, टमाटर और लो-ग्लाइसेमिक फल जैसे सेब, अमरूद और जामुन फायदेमंद होते हैं. ये फाइबर से भरपूर होते हैं और ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं.

ओट्स

ओट्स एक लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला अनाज है, जो धीरे-धीरे पचता है और शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखता है. सुबह के नाश्ते में ओट्स शामिल करना एक बेहतर विकल्प है.

दूध और दूध से बनी चीजें

दूध, दही और पनीर डायबिटिक मरीजों के लिए सुरक्षित होते हैं. ये शरीर को जरूरी कैल्शियम और प्रोटीन प्रदान करते हैं.

अखरोट

अखरोट में हेल्दी फैट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो हार्ट को स्वस्थ रखने के साथ-साथ शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है.

मूंगफली

मूंगफली प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और ब्लड शुगर को तुरंत नहीं बढ़ाती. इसे सीमित मात्रा में स्नैक्स के रूप में लिया जा सकता है.

डायबिटीज के मरीज क्या न खाएं?

कोल्ड ड्रिंक

इनमें अत्यधिक मात्रा में शक्कर और प्रिज़र्वेटिव्स होते हैं, जो शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकते हैं. इसलिए इनसे पूरी तरह बचें.

मीठे और खट्टे फल

केले, अंगूर, आम जैसे मीठे फल और खट्टे फल जैसे संतरा, अनानास में प्राकृतिक शक्कर अधिक होती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है.

जंक फूड

बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज़ जैसे जंक फूड में ट्रांस फैट और रिफाइंड कार्ब्स की अधिकता होती है, जो डायबिटीज के लिए बेहद खतरनाक हैं.

बेकरी की चीजें

कुकीज, केक, पेस्ट्री जैसी चीजों में शक्कर और मैदा भरपूर होता है. ये न केवल शुगर लेवल बढ़ाते हैं बल्कि वजन भी बढ़ाते हैं.

शराब

शराब लीवर को प्रभावित करती है और इंसुलिन की क्रिया को बाधित कर सकती है. इसके अधिक सेवन से शुगर लेवल में असंतुलन आ सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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UTI से लेकर किडनी डैमेज तक…देर तक पेशाब रोकना क्यों है खतरनाक?

UTI से लेकर किडनी डैमेज तक…देर तक पेशाब रोकना क्यों है खतरनाक?


लंबी मीटिंग्स में फंसे रहने के कारण या आसपास साफ टॉयलेट न मिलने के कारण कई बार लोग घंटों तक पेशाब रोक कर रखते हैं. यह आदत आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. बार-बार पेशाब को देर तक रोकना शरीर के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. ऐसे आज हम आपको बताते हैं कि यूआईटी से लेकर किडनी डैमेज तक देर तक पेशाब रोकना क्यों खतरनाक हो जाता है.

बार-बार पेशाब रोकना बन सकता है यूआईटी का कारण

पेशाब लंबे समय तक रोकने से यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया पर पनपने लगते हैं. इससे यूआईटी का खतरा बढ़ जाता है. वहीं समय पर इलाज न होने से यह संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है. जिससे गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती है.

ब्लैडर की मसल्स हो सकती है कमजोर

बार-बार ज्यादा मात्रा में पेशाब रोकने से ब्लैडर मसल्स खिंच जाती है. लंबे समय तक ऐसा होने से मसल्स कमजोर हो जाती है और पूरी तरह से पेशाब निकलना मुश्किल हो सकता है. इससे पेशाब रुकना, टपकना या बार-बार कैथटर की जरूरत जैसी दिखते सामने आ सकती है.

दर्द, बेचैनी और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं

एक सामान्य इंसान के ब्लैडर में लगभग 300 से 500 मिलीमीटर पेशाब स्टोर हो सकता है. इससे ज्यादा भराब होने पर पेट के निचले हिस्से में दर्द, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे समस्याएं हो सकती है.

यूरिनरी स्टोन का खतरा

अगर पेशाब लंबे समय तक ब्लैडर में रुका है तो उसमें मौजूद मिनरल्स धीरे-धीरे जमने लगते हैं जो आगे चलकर पथरी का रूप ले सकते हैं. यह आपकी सेहत के लिए और ज्यादा खतरनाक हो सकता है.

हो सकता है किडनी को स्थाई नुकसान

बार-बार पेशाब न निकलने से यूरिन वापस किडनी की ओर जा सकता है. जिससे लंबे समय में किडनी को स्थायी नुकसान हो सकता है. ऐसे में कुछ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि हर तीन से चार घंटे में जब भी नेचुरल रूप से यूरिन आए तो उसे रोके बिना तुरंत पेशाब जाएं. हालांकि व्यक्ति की उम्र, पानी पीने की मात्रा और ब्लैडर कैपेसिटी के हिसाब से यह समय थोड़ा ऊपर नीचे हो सकता है.

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बारिश में बढ़ जाता है करंट लगने का खतरा, ऐसी स्थिति में कैसे दें फर्स्ट एड?

बारिश में बढ़ जाता है करंट लगने का खतरा, ऐसी स्थिति में कैसे दें फर्स्ट एड?


दिल्ली स्थित BLK-Max Super Speciality Hospital के एक्सपर्ट के अनुसार, अगर किसी इंसान को इलेक्ट्रिक शॉक लगता है तो सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि क्या उसे सांस लेने में किसी तरह की कोई दिक्कत या परेशानी हो रही है? कलाई पर 5 सेकंड के लिए नब्ज की जांच करें. स्किन में जलन/बर्न की जांच करें. देखें वह व्यक्ति होश में है या नहीं. इसके अलावा यह देखें कि कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक की स्थिति तो नहीं है. साथ ही, यह ध्यान रखें कि उसको छूते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसका करंट के साथ कोई संपर्क तो नहीं है.

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. राकेश गुप्ता, सीनियर कंसलटेंट एंड एकैडमिक एडवाइजरी इंटरनल मेडिसिन बताते हैं कि एक बार उसका संपर्क करंट से टूट जाए तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए, ताकि समय पर इलाज किया जा सके.

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. राकेश गुप्ता, सीनियर कंसलटेंट एंड एकैडमिक एडवाइजरी इंटरनल मेडिसिन बताते हैं कि एक बार उसका संपर्क करंट से टूट जाए तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए, ताकि समय पर इलाज किया जा सके.

कई बार बिजली का झटका लगने के तुरंत बाद शरीर में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता. लेकिन शॉक के कुछ घंटों बाद भी समस्या उभर सकती है. मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द, सांस लेने में दिक्कत, या दिल की धड़कन का असामान्य होना जैसी परेशानी सामने आ सकती है. ऐसे में अगर व्यक्ति को बेहोशी, थकावट, तेज धड़कन या सीने में दर्द जैसा अनुभव हो तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना और ECG करवाना जरूरी है.

कई बार बिजली का झटका लगने के तुरंत बाद शरीर में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता. लेकिन शॉक के कुछ घंटों बाद भी समस्या उभर सकती है. मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द, सांस लेने में दिक्कत, या दिल की धड़कन का असामान्य होना जैसी परेशानी सामने आ सकती है. ऐसे में अगर व्यक्ति को बेहोशी, थकावट, तेज धड़कन या सीने में दर्द जैसा अनुभव हो तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना और ECG करवाना जरूरी है.

इलेक्ट्रिक शॉक के बाद डॉक्टर अक्सर ECG और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. इसके अलावा त्वचा पर जलन या जलने की गहराई जांचने के लिए स्किन एसेसमेंट किया जा सकता है. अगर आशंका हो कि करंट का असर दिमाग, नसों या आंतरिक अंगों पर पड़ा है तो CT स्कैन या MRI भी करवाना पड़ सकता है.

इलेक्ट्रिक शॉक के बाद डॉक्टर अक्सर ECG और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. इसके अलावा त्वचा पर जलन या जलने की गहराई जांचने के लिए स्किन एसेसमेंट किया जा सकता है. अगर आशंका हो कि करंट का असर दिमाग, नसों या आंतरिक अंगों पर पड़ा है तो CT स्कैन या MRI भी करवाना पड़ सकता है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि करंट लगने के बाद सबसे जरूरी है तुरंत फर्स्ट एड देना. सबसे पहले प्रभावित जगह को साफ पानी से धोएं, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके. इसके बाद सूजन और जलन को रोकने के लिए ठंडे पानी या बर्फ की सिकाई करें.साथ ही, व्यक्ति की सांस और नब्ज की जांच करें.अगर सांस रुक गई है या नब्ज नहीं मिल रही है तो तुरंत CPR देना जरूरी है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि करंट लगने के बाद सबसे जरूरी है तुरंत फर्स्ट एड देना. सबसे पहले प्रभावित जगह को साफ पानी से धोएं, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके. इसके बाद सूजन और जलन को रोकने के लिए ठंडे पानी या बर्फ की सिकाई करें.साथ ही, व्यक्ति की सांस और नब्ज की जांच करें.अगर सांस रुक गई है या नब्ज नहीं मिल रही है तो तुरंत CPR देना जरूरी है.

अगर करंट लगने से स्किन पर जलन हो गई है तो कम से कम 20 मिनट तक प्रभावित हिस्से को खुले नल के ठंडे पानी के नीचे रखें. इससे जलन कम होगी और त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकेगा. इसके बाद जली हुई जगह को साफ और स्टेराइल गौज-बैंडेज से ढंकें, ताकि इंफेक्शन न हो.

अगर करंट लगने से स्किन पर जलन हो गई है तो कम से कम 20 मिनट तक प्रभावित हिस्से को खुले नल के ठंडे पानी के नीचे रखें. इससे जलन कम होगी और त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकेगा. इसके बाद जली हुई जगह को साफ और स्टेराइल गौज-बैंडेज से ढंकें, ताकि इंफेक्शन न हो.

इन शुरुआती स्टेप्स के बाद समय बर्बाद न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. सही समय पर इलाज शुरू होने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है और मरीज की रिकवरी तेज हो सकती है. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ECG, ब्लड टेस्ट, या स्कैन जैसी जांच कर सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि करंट का असर शरीर के अंदरूनी अंगों तक न गया हो.

इन शुरुआती स्टेप्स के बाद समय बर्बाद न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. सही समय पर इलाज शुरू होने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है और मरीज की रिकवरी तेज हो सकती है. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ECG, ब्लड टेस्ट, या स्कैन जैसी जांच कर सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि करंट का असर शरीर के अंदरूनी अंगों तक न गया हो.

Published at : 24 Jul 2025 02:15 PM (IST)

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कुछ लड़कों में बढ़ने लगता है ब्रेस्ट साइज? जानिए कब टेंशन लेने की जरूरत

कुछ लड़कों में बढ़ने लगता है ब्रेस्ट साइज? जानिए कब टेंशन लेने की जरूरत


Breast Development in Boys Symptoms: किशोरावस्था में लड़कों के शरीर में कई परिवर्तन होते हैं. मांसपेशियों का विकास, आवाज का भारी होना, मूंछ-दाढ़ी आना आदि. लेकिन कभी-कभी एक ऐसा बदलाव देखने को मिलता है जो उन्हें शर्मिंदगी और मानसिक तनाव में डाल देता है.

ब्रेस्ट साइज का बढ़ना, कुछ लड़कों में अचानक छाती के आसपास फैट जमा होने लगता है और ब्रेस्ट का आकार लड़कियों की तरह बढ़ने लगता है. ये स्थितिकेवल उनकी आत्मछवि को प्रभावित करती है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी कमजोर कर देती है. कई बार तो वे इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉ. जे.सी. लाल बताते हैं कि यह एक मेडिकल कंडीशन हो सकती है, जिसे गाइनोकोमास्टिया कहा जाता है.

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गाइनोकोमास्टिया के कारण क्या हो सकते हैं?

  • हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन दो मुख्य हार्मोन हैं जो पुरुष और महिला शरीर के लक्षण तय करते हैं. यदि पुरुषों में एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक हो जाए, तो ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने लगता है.
  • किशोरावस्था के दौरान हार्मोनल फ्लक्चुएशन: यह सबसे सामान्य कारण है और अधिकतर मामलों में बिना इलाज के ठीक हो जाता है.
  • मोटापा: फैट के बढ़ने से भी छाती में स्तन जैसा आकार आ सकता है, जिसे गाइनोकोमास्टिया कहा जाता है.
  • दवाइयों या स्टेरॉइड्स का सेवन: कुछ दवाएं और बॉडी-बिल्डिंग स्टेरॉइड्स इस स्थिति को बढ़ावा दे सकते हैं.
  • लीवर या किडनी की बीमारी: कभी-कभी गंभीर अंग विकार भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं.

ब्रेस्ट साइज बढ़ने पर कब सतर्क होना चाहिए

  • बढ़ा हुआ ब्रेस्ट टिश्यू लंबे समय से बना हुआ है
  • दर्द, गांठ या तरल का रिसाव हो रहा है
  • एक साइड का साइज ज्यादा है से बढ़ रहा है
  • भावनात्मक रूप से यह समस्या आपको परेशान कर रही है

उपचार क्या है?

  • गाइनोकोमास्टिया का इलाज इसकी वजह पर निर्भर करता है
  • किशोरावस्था में मामूली मामलों में कोई इलाज की ज़रूरत नहीं होती
  • यदि हार्मोनल असंतुलन है, तो डॉक्टर इसकी जांच करके दवा दे सकते हैं
  • कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी (मासटेक्टॉमी या लिपोसक्शन) की सलाह दी जाती है
  • जीवनशैली में बदलाव, जैसे एक्सरसाइज और वजन कम करना, भी मददगार हो सकता है

गाइनोकोमास्टिया कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक सामान्य मेडिकल कंडीशन है जिसे समय रहते समझना और इलाज करवाना बेहद जरूरी है. अगर आप या आपका कोई परिचित इस स्थिति से गुजर रहा है, तो डरें नहीं, एक्सपर्ट की सलाह लें और जागरूकता बढ़ाएं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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