कुछ लड़कों में बढ़ने लगता है ब्रेस्ट साइज? जानिए कब टेंशन लेने की जरूरत

कुछ लड़कों में बढ़ने लगता है ब्रेस्ट साइज? जानिए कब टेंशन लेने की जरूरत


Breast Development in Boys Symptoms: किशोरावस्था में लड़कों के शरीर में कई परिवर्तन होते हैं. मांसपेशियों का विकास, आवाज का भारी होना, मूंछ-दाढ़ी आना आदि. लेकिन कभी-कभी एक ऐसा बदलाव देखने को मिलता है जो उन्हें शर्मिंदगी और मानसिक तनाव में डाल देता है.

ब्रेस्ट साइज का बढ़ना, कुछ लड़कों में अचानक छाती के आसपास फैट जमा होने लगता है और ब्रेस्ट का आकार लड़कियों की तरह बढ़ने लगता है. ये स्थितिकेवल उनकी आत्मछवि को प्रभावित करती है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी कमजोर कर देती है. कई बार तो वे इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉ. जे.सी. लाल बताते हैं कि यह एक मेडिकल कंडीशन हो सकती है, जिसे गाइनोकोमास्टिया कहा जाता है.

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गाइनोकोमास्टिया के कारण क्या हो सकते हैं?

  • हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन दो मुख्य हार्मोन हैं जो पुरुष और महिला शरीर के लक्षण तय करते हैं. यदि पुरुषों में एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक हो जाए, तो ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने लगता है.
  • किशोरावस्था के दौरान हार्मोनल फ्लक्चुएशन: यह सबसे सामान्य कारण है और अधिकतर मामलों में बिना इलाज के ठीक हो जाता है.
  • मोटापा: फैट के बढ़ने से भी छाती में स्तन जैसा आकार आ सकता है, जिसे गाइनोकोमास्टिया कहा जाता है.
  • दवाइयों या स्टेरॉइड्स का सेवन: कुछ दवाएं और बॉडी-बिल्डिंग स्टेरॉइड्स इस स्थिति को बढ़ावा दे सकते हैं.
  • लीवर या किडनी की बीमारी: कभी-कभी गंभीर अंग विकार भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं.

ब्रेस्ट साइज बढ़ने पर कब सतर्क होना चाहिए

  • बढ़ा हुआ ब्रेस्ट टिश्यू लंबे समय से बना हुआ है
  • दर्द, गांठ या तरल का रिसाव हो रहा है
  • एक साइड का साइज ज्यादा है से बढ़ रहा है
  • भावनात्मक रूप से यह समस्या आपको परेशान कर रही है

उपचार क्या है?

  • गाइनोकोमास्टिया का इलाज इसकी वजह पर निर्भर करता है
  • किशोरावस्था में मामूली मामलों में कोई इलाज की ज़रूरत नहीं होती
  • यदि हार्मोनल असंतुलन है, तो डॉक्टर इसकी जांच करके दवा दे सकते हैं
  • कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी (मासटेक्टॉमी या लिपोसक्शन) की सलाह दी जाती है
  • जीवनशैली में बदलाव, जैसे एक्सरसाइज और वजन कम करना, भी मददगार हो सकता है

गाइनोकोमास्टिया कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक सामान्य मेडिकल कंडीशन है जिसे समय रहते समझना और इलाज करवाना बेहद जरूरी है. अगर आप या आपका कोई परिचित इस स्थिति से गुजर रहा है, तो डरें नहीं, एक्सपर्ट की सलाह लें और जागरूकता बढ़ाएं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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घट रही पार्टनर संग संबंध बनाने की इच्छा, इसके पीछे एल्युमिनियम के बर्तन में बनी सब्जी तो नहीं?

घट रही पार्टनर संग संबंध बनाने की इच्छा, इसके पीछे एल्युमिनियम के बर्तन में बनी सब्जी तो नहीं?


Sexual Health: रिश्तों में नजदीकियां बनाए रखना जरूरी है, लेकिन लोग ऐसा कर नहीं रहे, क्योंकि भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान, ये सब हमारे निजी संबंधों पर गहरा असर डालते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, आपकी रसोई में रखे एक आम से दिखने वाले बर्तन की वजह से आपकी सेक्स ड्राइव घट सकती है?

आप हैरान जरूर होंगे, लेकिन एल्युमिनियम के बर्तन में बार-बार खाना पकाना आपके हार्मोनल बैलेंस पर असर डाल सकता है. सेक्स संबंधी इच्छाओं में कमी आजकल कई कपल्स की आम समस्या बन चुकी है और इसके पीछे केवल मानसिक या भावनात्मक कारण ही नहीं, बल्कि शारीरिक और पोषण संबंधी कारण भी अहम भूमिका निभाते हैं.

इस पर डॉ. नेहा मेहता बताती हैं कि किस तरह एल्युमिनियम के बर्तनों में पका खाना लंबे समय तक खाने से न केवल आपकी सेहत बिगड़ती है, बल्कि दांपत्य जीवन में भी दूरियां आने लगती हैं.

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सेक्स ड्राइव पर एल्युमिनियम का असर कैसे?

  • हार्मोनल डिसबैलेंस: पुरषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन यौन इच्छा के लिए जिम्मेदार होते हैं. एल्युमिनियम इन हार्मोनों की प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डालता है.
  • थकान और ऊर्जा की कमी: एल्युमिनियम शरीर में जमा होकर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है, जिससे थकान और सुस्ती महसूस होती है और यही संबंध बनाने की इच्छा को कम करता है.
  • तनाव और मूड स्विंग्स: एल्युमिनियम से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन होता है. मानसिक स्वास्थ्य यौन संबंधों में अहम भूमिका निभाता है.

बचाव के लिए क्या करें?

  • स्टेनलेस स्टील, आयरन के बर्तन खाना पकाने के लिए बेहतर विकल्प हैं.
  • एल्युमिनियम फॉयल का बार-बार उपयोग भी सीमित करें, खासकर गर्म खाना पैक करने में.
  • अपने खाने में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त चीजें (जैसे हल्दी, हरी सब्जियां) शामिल करें, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करें.

अगर आप भी महसूस कर रहे हैं कि, आपके रिश्ते में पहले जैसी नजदीकियां नहीं रहीं, तो सिर्फ भावनाओं पर नहीं, खानपान और किचन की आदतों पर भी नजर डालें. हो सकता है, इसका कारण आपकी थाली में परोसी गई सब्जी हो, जो एल्युमिनियम के बर्तन में पकी हो.

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रात को सोने से पहले पिएं घी वाला दूध, मिलेंगे ये 6 कमाल के फायदे

रात को सोने से पहले पिएं घी वाला दूध, मिलेंगे ये 6 कमाल के फायदे


गहरी और सुकून भरी नींद: घी वाला दूध नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और नींद बेहतर आती है. सोने से 30 मिनट पहले गर्म दूध में 1 छोटा चम्मच देसी घी मिलाकर पिएं.

कब्ज और पाचन की समस्या में राहत:  घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड आंतों की सफाई करता है और दूध के साथ मिलकर यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. रोज रात घी वाला दूध पीने से सुबह पेट साफ रहता है.

कब्ज और पाचन की समस्या में राहत: घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड आंतों की सफाई करता है और दूध के साथ मिलकर यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. रोज रात घी वाला दूध पीने से सुबह पेट साफ रहता है.

हड्डियों और जोड़ों के लिए वरदान:  घी कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है और दूध में पहले से ही कैल्शियम मौजूद होता है। यह जोड़ों के दर्द और हड्डियों की कमजोरी में फायदेमंद है. बुज़ुर्गों को रोजाना इसका सेवन ज़रूर कराना चाहिए.

हड्डियों और जोड़ों के लिए वरदान: घी कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है और दूध में पहले से ही कैल्शियम मौजूद होता है। यह जोड़ों के दर्द और हड्डियों की कमजोरी में फायदेमंद है. बुज़ुर्गों को रोजाना इसका सेवन ज़रूर कराना चाहिए.

त्वचा को बनाए ग्लोइंग और सॉफ्ट:  घी वाला दूध शरीर को अंदर से हाइड्रेट करता है और स्किन को नेचुरल ग्लो देता है. एक हफ्ते में फर्क महसूस होगा अगर रोज पिएंगे.

त्वचा को बनाए ग्लोइंग और सॉफ्ट: घी वाला दूध शरीर को अंदर से हाइड्रेट करता है और स्किन को नेचुरल ग्लो देता है. एक हफ्ते में फर्क महसूस होगा अगर रोज पिएंगे.

थकान और कमजोरी करे दूर: घी और दूध का कॉम्बिनेशन शरीर को गहरी ऊर्जा और पोषण देता है, जिससे दिनभर की थकान दूर होती है. इसे सोने से पहले पीने से नींद के दौरान शरीर अच्छे से रिकवर होता है.

थकान और कमजोरी करे दूर: घी और दूध का कॉम्बिनेशन शरीर को गहरी ऊर्जा और पोषण देता है, जिससे दिनभर की थकान दूर होती है. इसे सोने से पहले पीने से नींद के दौरान शरीर अच्छे से रिकवर होता है.

इम्यूनिटी और शरीर की गर्मी को बढ़ाए: घी वाला दूध शरीर को गर्मी और सुरक्षा दोनों देता है, जिससे मौसमी बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है. सर्दियों में ये ड्रिंक बेहद फायदेमंद है.

इम्यूनिटी और शरीर की गर्मी को बढ़ाए: घी वाला दूध शरीर को गर्मी और सुरक्षा दोनों देता है, जिससे मौसमी बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है. सर्दियों में ये ड्रिंक बेहद फायदेमंद है.

Published at : 24 Jul 2025 11:54 AM (IST)

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फ्लाइट में भूलकर भी नहीं खानी चाहिए ये चीजें, एयर होस्टेस ने खोला सैकड़ों साल पुराना राज!

फ्लाइट में भूलकर भी नहीं खानी चाहिए ये चीजें, एयर होस्टेस ने खोला सैकड़ों साल पुराना राज!


फ्लाइट से सफर करना हर इंसान का सपना होता है. 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना जितना रोमांचक लगता है, उतना ही आपका मिड-एयर मील आपके शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. एक्सपर्ट्स और पूर्व फ्लाइट अटेंडेंट्स का कहना है कि फ्लाइट में क्या खाना है और क्या नहीं, यह सिर्फ आराम के लिए नहीं बल्कि सेहत और सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है. चलिए आपको बताते हैं कि फ्लाइट में जाने से पहले आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.

सबसे पहले कॉफी और चाय को कहें ‘न’

पूर्व फ्लाइट अटेंडेंट एलेक्स क्विगली के मुताबिक, फ्लाइट में मिलने वाली चाय या कॉफी से बचना चाहिए. उन्होंने Delish को बताया कि इन्हें बनाने के लिए जो पानी इस्तेमाल होता है, वह फ्लाइट के पोटेबल वाटर टैंक से आता है, जिसकी सफाई कितनी बार होती है, यह निश्चित नहीं है. उनकी सलाह है कि फ्लाइट में बोतलबंद पेय चुनें.

ब्लॉटिंग से बचने के लिए इन चीजों से दूरी बनाएं

फ्लाइट के दौरान केबिन प्रेशर बदलने से गैस और पेट फूलने की समस्या आम है. सात साल तक फ्लाइट अटेंडेंट रहीं जोसफिन रेमो कहती हैं कि उड़ान से पहले और दौरान गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से बचना जरूरी है. उनकी नो-फ्लाई लिस्ट में प्याज, केल, बीन्स, लाल मांस, मसूर, ग्लूटेन और ब्रोकली शामिल हैं. इसके अलावा कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से भी दूरी बनाना बेहतर है, क्योंकि यह पेट में गैस और बढ़ा देते हैं.

स्मेल और खराब होने वाले खाने से सावधान

पूर्व एयर होस्टेस जैकलीन व्हिटमोर के अनुसार, ट्यूना सैंडविच, एग सलाद और फिश डिशेज जैसे तीखी गंध वाले फूड्स फ्लाइट में बिल्कुल नहीं लाने चाहिए. बंद स्पेस में इनकी स्मेल बाकी यात्रियों के लिए असहज हो सकती है. साथ ही ये फूड्स सही तापमान पर स्टोर न होने पर फूड पॉइजनिंग का खतरा भी बढ़ा देते हैं. क्रीमी डिशेज जैसे पास्ता, लसग्ना और मैकरोनी भी पेट खराब कर सकती हैं.

एलर्जी का रखें ध्यान 

व्हिटमोर बताती हैं कि फ्लाइट में ऐसे फूड्स न लाएं जो एलर्जी ट्रिगर कर सकते हैं, जैसे पीनट्स या पीनट बटर. क्योंकि एयरबॉर्न पार्टिकल्स भी संवेदनशील यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं.

तो खाएं क्या?

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि फ्लाइट में हल्के, आसान और न्यूट्रिशस स्नैक्स चुनें. जैसे फ्रूट्स, क्रैकर्स, चीज़ स्टिक, ह्यूमस के साथ वेज, मफिन, ग्रेनोला बार, चॉकलेट या इंस्टेंट ओट्स. हॉट वॉटर के लिए क्रू से मदद ले सकते हैं. स्मार्ट स्नैकिंग सिर्फ भूख मिटाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य, आसपास की हवा और साथी यात्रियों के आराम से भी जुड़ा है.

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हार्मोनल डिसबैलेंस या देर से शादी जिम्मेदार, आखिर क्यों घट रही महिलाओं की फर्टिलिटी?

हार्मोनल डिसबैलेंस या देर से शादी जिम्मेदार, आखिर क्यों घट रही महिलाओं की फर्टिलिटी?


जमाना भले ही 21वीं सदी में आ चुका है, लेकिन ‘बच्चा नहीं हो रहा’ कहना आज भी शर्म की बात मानी जाती है. आज भी इस पर खुलकर बात नहीं होती है, न घर में और न ही समाज में. हालांकि, हकीकत यह है कि महिलाओं में फर्टिलिटी यानी गर्भधारण करने की क्षमता में तेजी से गिरावट आ रही है और इसके पीछे कई वजह हैं.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में 18.6 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में बांझपन से जूझ रहे हैं. भारत में भी प्राइमरी इंफर्टिलिटी की दर 3.9% से लेकर 16.8% तक है. वहीं, कुछ राज्यों जैसे कश्मीर, आंध्र प्रदेश और केरल में यह दर और भी ज्यादा है. एक ओर टेक्नोलॉजी से प्रजनन के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन लाइफस्टाइल और मेंटल हेल्थ जैसे कारणों से महिलाओं की नैचुरल फर्टिलिटी एज प्रभावित हो रही है.

देर से शादी और मां बनने का फैसला टालना

आज की महिलाएं करियर, आत्मनिर्भरता और जीवन के दूसरे टारगेट्स को प्रायॉरिटी दे रही हैं, जो बिल्कुल सही है. हालांकि, सच्चाई यह है कि 35 की उम्र के बाद महिलाओं की अंडाणु क्वालिटी और संख्या में गिरावट आने लगती है. देहरादून स्थित इंदिरा आईवीएफ की क्लीनिकल डायरेक्टर डॉ. रीमा सिरकार के मुताबिक,  35 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना 25 पर्सेंट तक कम हो जाती है. वहीं, 40 की उम्र के बाद यह सिर्फ 5-10 पर्सेंट ही रह जाती है.

हार्मोनल डिसबैलेंस और बदलती लाइफस्टाइल

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, थायरॉइड, अनियमित पीरियड्स और मोटापा जैसी कंडीशन फर्टिलिटी को गहराई से प्रभावित करती हैं. आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या, जंक फूड, नींद की कमी और तनाव इन दिक्कतों को बढ़ावा दे रहे हैं. बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) अगर 25 से ऊपर या 19 से नीचे हो तो प्रेग्नेंसी में देरी की आशंका बढ़ जाती है.

तनाव और मानसिक दबाव का असर

आईवीएफ से गुजरने वाली महिलाओं में तनाव, डिप्रेशन और नींद से जुड़ी दिक्कतें कॉमन हैं. एक स्टडी में पाया गया कि जिन महिलाओं में रेजिलिएंस यानी मेंटल स्ट्रेंथ ज्यादा थी, उन्हें IVF के पहले प्रयास में कम तनाव और बेहतर मानसिक स्थिति का अनुभव हुआ. यदि पहला प्रयास असफल हो जाए तो तनाव और उदासी ज्यादा बढ़ जाती है.

सामाजिक अपेक्षाएं और अकेलापन

‘बच्चा कब होगा?’ यह सवाल आज भी हर शादीशुदा महिला को झेलना पड़ता है. समाज का यह दबाव और परिवार की चुप्पी महिलाओं को मानसिक रूप से बेहद थका देती है. एक स्टडी के अनुसार, जिन महिलाओं को सामाजिक और पारिवारिक सपोर्ट मिला, उनमें डिप्रेशन की आशंका 25 पर्सेंट तक कम हो गई.

मिथक और गलतफहमियां

कई लोग आज भी मानते हैं कि अगर एक बच्चा हो चुका है तो दूसरा अपने आप हो जाएगा, लेकिन सेकेंडरी इंफर्टिलिटी भी एक बड़ा मसला है. साथ ही, यह सोचना कि इंफर्टिलिटी सिर्फ महिलाओं की समस्या है बेहद खतरनाक मिथ है. आंकड़े बताते हैं कि 30–50% मामलों में पुरुषों की भी भूमिका होती है.

महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

हर महिला की फर्टिलिटी जर्नी अलग होती है. किसी के लिए यह राह आसान होती है तो किसी के लिए भावनात्मक और शारीरिक चुनौतियों से भरी. हालांकि, इन बातों को वक्त रहते जानना और समझना फायदेमंद हो सकता है.

30 की उम्र के बाद फर्टिलिटी पर निगरानी रखना समझदारी भरा कदम हो सकता है.
यदि पीरियड्स अनियमित हैं या थायरॉइड, पीसीओएस जैसी दिक्कतों हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें.
हेल्दी डाइट, रेगुलर नींद और तनाव से बचाव जैसी बेसिक बातें भी शरीर पर बड़ा असर डालती हैं.
आईवीएफ या एग फ्रीजिंग जैसे ऑप्शंस के बारे में समय रहते जानकारी लेना कोई हड़बड़ी नहीं, सिर्फ समझ है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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