कपिल शर्मा को देखकर हर कोई हैरान, जानिए उनकी ट्रांसफॉर्मेशन स्टोरी

कपिल शर्मा को देखकर हर कोई हैरान, जानिए उनकी ट्रांसफॉर्मेशन स्टोरी


Kapil Sharma Weight Loss Journey: टीवी और कॉमेडी की दुनिया में कपिल शर्मा का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. लेकिन हाल ही में वो सिर्फ अपनी कॉमे़ड़ी की वजह से नहीं, बल्कि अपने बदले हुए लुक और जबरदस्त वेट लॉस को लेकर भी चर्चा में हैं. ये वही कपिल हैं जो पतले होने के बाद स्मार्ट और फिट नजर आ रहे हैं. जिसको लेकर उनके फिटनेस ट्रेनर योगेश भाटेजा ने खुद इस ट्रांसफॉर्मेशन के पीछे की पूरी कहानी बताई है।

कैसे हुई कपिल की फिटनेस जर्नी की शुरुआत

योगेश भाटेजा बताते हैं कि, इस जर्नी की शुरुआत फिल्म हैप्पी न्यू ईयर के प्रमोशन्स के दौरान हुई थी. एक्टर सोनू सूद ने कपिल की मुलाकात योगेश से करवाई थी. इसके बाद कपिल के मैनेजर ने योगेश को कॉल किया कि, कपिल फिटनेस की जर्नी सीरियसली लेना चाहते हैं. योगेश ने कपिल के घर पर ट्रेनिंग शुरू की, एक योगा मैट, रेजिस्टेंस बैंड और पुराना ट्रेडमिल से लेकर धीरे-धीरे नए इक्विपमेंट भी जुड़ते गए.

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पहला दिन और कपिल की हालत

योगेश बताते हैं, “पहले दिन मैंने जब स्ट्रेचिंग करवाई, तो कपिल के चेहरे के एक्सप्रेशन्स देखकर मैं हंसते-हंसते लोटपोट हो गया. हाथ घुमाना, बॉडी ट्विस्ट, टो टच जैसी बेसिक चीजें भी उनके लिए मुश्किल हो रही थीं. उनकी बॉडी बेहद स्टिफ थी और डाइट पूरी तरह बिगड़ी हुई थी.

नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या

कपिल की सबसे बड़ी दिक्कत थी, नींद की कमी और बेहिसाब खानपान बतौर मेन लीड करना, यानी उनके ऊपर पूरी टीम की जिम्मेदारी थी. रात को शूटिंग, दिन में स्क्रिप्टिंग, न कोई टाइमिंग, न कोई रूटीन.

योगेश ने कहा, “काफी समय लगा कपिल की टीम के साथ मिलकर उनकी लाइफस्टाइल को ट्रैक पर लाने में. लेकिन जब उनकी फिल्म रिलीज हुई तो सबने उनका ट्रांसफॉर्मेशन स्क्रीन पर देखा और तारीफ की.

कपिल का डाइट प्लान

योगेश ने कपिल के डाइट में बदलाव किए. उन्हें फिश शामिल करने को कहा, जो प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और कैलोरी मैनेजमेंट में मदद करता है. इसके साथ ही भरपूर सब्जियां भी डाइट में जोड़ी गईं.

अब कपिल सोशल मीडिया पर अपनी स्टाइलिश और फिट तस्वीरों के लिए भी ट्रेंड कर रहे हैं. जहां पहले उनका वजन तेजी से घट-बढ़ जाता था, अब वे संतुलित और फिट नजर आते हैं. उनकी यह जर्नी बताती है कि, अगर दिल से ठान लिया जाए तो कोई भी बदलाव मुमकिन है.

कपिल शर्मा की यह फिटनेस जर्नी सिर्फ एक सेलिब्रिटी ट्रांसफॉर्मेशन नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो बिजी शेड्यूल और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के बीच खुद को बदलना चाहते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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क्या काली ब्रा पहनने से भी हो जाता है कैंसर? डॉक्टर से जानें इस बात में कितनी है हकीकत

क्या काली ब्रा पहनने से भी हो जाता है कैंसर? डॉक्टर से जानें इस बात में कितनी है हकीकत


सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर आजकल एक मैसेज काफी ज्यादा वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि काली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है. कई लोग इसे सच मानकर डर रहे हैं तो कुछ इसे मजाक में उड़ा रहे हैं. क्या वाकई काली ब्रा से कैंसर का खतरा होता है या यह सिर्फ अफवाह है? डॉक्टरों से जानते हैं कि इस बात में कितनी हकीकत है? 

काली ब्रा और कैंसर की अफवाह कहां से शुरू हुई?

पिछले कुछ साल के दौरान इंटरनेट पर बार-बार यह दावा किया जा चुका है कि काली ब्रा खासकर टाइट या अंडरवायर वाली ब्रा से ज्यादा गर्मी पैदा होती है और यह स्किन को नुकसान पहुंचाती है. ऐसे में कैंसर होने का खतरा बढ़ता है. कुछ लोग कहते हैं कि काले रंग की ब्रा सूरज की किरणें ज्यादा सोखती है, जिससे ब्रेस्ट टिश्यू में गर्मी बढ़ती है और कैंसर की आशंका बढ़ जाती है. 

क्या कहती है रिसर्च?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कैंसर रिसर्च यूके जैसे बड़े संगठनों की नई स्टडीज में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि ब्रा का रंग ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है. 2014 में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर सिएटल की एक स्टडी में 1500 महिलाओं पर रिसर्च की, जिसमें ब्रा पहनने की आदतों जैसे समय, टाइटनेस और रंग आदि का कनेक्शन ब्रेस्ट कैंसर के साथ नहीं पाया गया. 2023 में कैंसर रिसर्च यूके ने भी इस बात को दोहराया कि ब्रा का रंग या स्टाइल कैंसर से नहीं जुड़ा है. वहीं, 2024 में पब्लिश एक स्टडी में मैमोग्राम और बायोप्सी डेटा के आधार पर देखा गया कि ब्रेस्ट कैंसर के लिए रिस्क फैक्टर्स में जेनेटिक म्यूटेशन (BRCA1 और BRCA2 जीन), फैमिली हिस्ट्री, हार्मोनल चेंजेज, मोटापा, शराब, स्मोकिंग और रेडिएशन का खतरा शामिल है. हालांकि, ब्रा का रंग या उसका टाइट होना, इसमें कहीं नहीं आता.

इस मामले में क्या कहते हैं डॉक्टर?

20 साल से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे नई दिल्ली में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश शर्मा कहते हैं कि काली ब्रा और कैंसर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. यह एक मिथक है, जो सोशल मीडिया पर गलत जानकारी से फैला. ब्रेस्ट कैंसर का खतरा जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और उम्र जैसे कारणों से बढ़ता है. बहुत टाइट ब्रा पहनने से स्किन में जलन महसूस हो सकती है, लेकिन इसकी वजह से कैंसर नहीं होता है. उन्होंने सलाह दी कि महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राम और सेल्फ-चेकअप करवाना चाहिए. अगर आपको ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल से स्राव या स्किन में बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.

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सुबह उठते ही बिस्तर पर दिखें ये दाग, तो समझिए हो गई ये खतरनाक बीमारी

सुबह उठते ही बिस्तर पर दिखें ये दाग, तो समझिए हो गई ये खतरनाक बीमारी


अक्सर लोग सुबह उठकर अपना डेली रूटीन फॉलो करना शुरू कर देते हैं. वहीं कई बार आपने देखा हो कई बार सुबह उठने के बाद बिस्तर पर कई दाग दिखते हैं. अगर आप सुबह उठते ही अपने बिस्तर की चादर, तकिए या गद्दे पर अजीब से दाग देखते हैं. जैसे गीले पसीने के निशान, लाल धब्बे या छोटे काले-काले दाने तो इसे हल्के में मत लीजिए. ये आपके शरीर में चल रही किसी बीमारी या इंफेक्शन का संकेत हो सकते हैं.

सुबह बिस्तर पर दिखने वाले दाग सिर्फ गंदगी नहीं, शरीर की किसी गंभीर समस्या को भी बताते हैं. इसलिए इन लक्षणों को हल्के में न लें, क्योंकि समय पर पहचान और इलाज से बड़ी से बड़ी बीमारी को रोका जा सकता है, ऐसे में चलिए जानते हैं कि सुबह उठने ही बिस्तर दाग दिखने से कौन सी बीमारी हो सकती है? 

बिस्तर पर कौन से दाग बताते हैं बीमारी

1. पसीने के दाग – कुछ लोग रात में सोते समय इतना ज्यादा पसीना बहाते हैं कि सुबह उठते ही उनका तकिया और चादर पूरी तरह गीली हो जाती है. ये गर्मी या मौसम का असर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही गंभीर समस्या का इशारा हो सकता है. नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, रात में जरूरत से ज्यादा पसीना आना, खासतौर पर बिना किसी वजह के, कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है. हड्डी के कैंसर (Bone Cancer) या लिम्फोमा जैसे कैंसर में अक्सर मरीजों को रात में खूब पसीना आता है. जब शरीर में कैंसर का असर होता है तो इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और शरीर गर्म महसूस करने लगता है. शरीर खुद को ठंडा करने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है. कुछ मामलों में, कैंसर के इलाज से हार्मोन बदलते हैं, जिससे पसीना आ सकता है.

2. खटमल के काटने से भी हो सकते हैं दाग – अगर आपके बिस्तर पर लाल, भूरे या काले रंग के दाग नजर आते हैं तो ये खटमल यानी Bed Bugs का संकेत हो सकते हैं. खटमल रात को सोते समय खून चूसते हैं और काटने के बाद स्किन पर दाने, खुजली या जलन होती है. इनके मल से चादर पर लाल या जंग जैसे निशान बन जाते हैं. खटमल जब काटता है तो वह आपकी स्किन में एक ऐसा सब्सटांस छोड़ता है जिससे आपको दर्द या काटने का पता नहीं चल पाता है. इसलिए आप सोते रहते हैं और जब उठते हैं तो निशान दिखते हैं. ऐसे में अगर आपको तकिए या चादर पर लाल या जंग जैसे दाग दिखें तो ये खटमल के काटने वाले खून के निशान हो सकते हैं. वहीं अगर काले छोटे-छोटे धब्बे दिखे तो ये खटमल के मल के निशान होते हैं. इसके अलावा अगर पीले दाग दिखे तो ये खटमल के अंडे या पुरानी सिक्न हो सकती है. बिस्तर से एक अजीब सी बासी बदबू भी खटमल की मौजूदगी का संकेत देती है.

ऐसे में जरूरी है कि आप रोज सुबह उठते ही अपने बिस्तर को ध्यान से देखें. अगर अजीब दाग या गंध नजर आए तो बेड क्लीनिंग या पेस्ट कंट्रोल करवाएं और पसीने के दाग बार-बार दिखें तो डॉक्टर से जांच कराएं.

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मांसपेशियां मजबूत करने के लिए करें ये एक काम, पूरा शरीर फिट रहेगा

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Muscle strengthening at Home: शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए केवल वजन कम करना ही काफी नहीं होता, बल्कि मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी है. हम अक्सर सोचते हैं कि, मसल्स बनाना सिर्फ जिम जाने वालों या बॉडीबिल्डर्स का काम है, लेकिन सच्चाई यह है कि मजबूत मांसपेशियां हर उम्र और हर व्यक्ति के लिए जरूरी हैं. चाहे वह छात्र हो, गृहिणी हो या ऑफिस में बैठकर काम करने वाला प्रोफेशनल.

डॉ. सुधीर कुमार बताते हैं कि “कमजोर मांसपेशियां केवल थकान और कमजोरी ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि शरीर के बैलेंस, हड्डियों की सुरक्षा और बीमारियों से लड़ने की ताकत को भी प्रभावित करती हैं।” अच्छी खबर ये है कि, मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए आपको घंटों जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं, बल्कि सिर्फ एक सरल आदत को अपनाने से आप अपने शरीर को ताकतवर और फिट बना सकते हैं.

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स्क्वैट्स के फायदे

मांसपेशियों की मजबूती

स्क्वैट्स करने से निचले शरीर की प्रमुख मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे मसल्स ग्रोथ तेज होती है

मेटाबॉलिज्म बढ़ाए

यह व्यायाम शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे वजन नियंत्रण में रहता है

बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी सुधरे

स्क्वैट्स से शरीर का संतुलन और लचीलापन बेहतर होता है, जिससे गिरने या चोट लगने का खतरा कम होता है

पीठ दर्द में राहत

मजबूत मांसपेशियां शरीर को सही पोस्चर में रखती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी पर कम दबाव पड़ता है

कैसे करें स्क्वैट्स

  • सीधे खड़े हो जाएं, पैर कंधे की चौड़ाई पर फैलाएं
  • धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए पीछे की ओर बैठने जैसी मुद्रा बनाएं
  • पीठ सीधी रखें और हाथों को सामने फैलाएं
  • जितना हो सके नीचे जाएं, फिर धीरे-धीरे ऊपर आएं
  • शुरुआत में 10 बार करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं

मजबूत मांसपेशियां केवल शरीर को आकर्षक लुक ही नहीं देतीं, बल्कि यह आपकी लंबी उम्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जीवनशैली की गुणवत्ता को भी बढ़ाती हैं। स्क्वैट्स को अपनाकर आप बिना भारी उपकरणों और जिम खर्च के, घर पर ही शरीर को मजबूत और चुस्त बना सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या सुबह 3-5 बजे टूट जाती है आपकी भी नींद? इन दिक्कतों का सिग्नल देती है हमारी बॉडी

क्या सुबह 3-5 बजे टूट जाती है आपकी भी नींद? इन दिक्कतों का सिग्नल देती है हमारी बॉडी


वजह कोई भी हो, साइंस और पुरानी मान्यताएं दोनों ही बताती हैं कि 3 से 5 बजे के बीच के समय को कभी-कभी वुल्फ ऑवर (Wolf Hour) भी कहते हैं. ऐसा तब होता है, जब आपकी बॉडी इमोशनल ओवरलोड, हार्मोनल चेंजेस और सबकॉन्शियस बेचैनी के प्रति सबसे ज्यादा सेंसिटिव होती है. आइए जानते हैं आखिर इस जागने के क्या मायने हैं और इसे कैसे रोका जाए.

सीनियर कंसल्टेंट (रेस्पिरेट्री, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन) डॉ. प्रतिभा डोगरा (एमबीबीएस, एमडी) बताती हैं कि अगर आप हर दिन रात के 3-4 बजे के आसपास जाग रहे हैं और फिर से सो नहीं पा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए.

सीनियर कंसल्टेंट (रेस्पिरेट्री, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन) डॉ. प्रतिभा डोगरा (एमबीबीएस, एमडी) बताती हैं कि अगर आप हर दिन रात के 3-4 बजे के आसपास जाग रहे हैं और फिर से सो नहीं पा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए.

उन्होंने बताया कि रात में हमारा शरीर कई स्लीप साइकिल से गुजरता है. इसके तहत रात में कई बार आपकी नींद खुल सकती है, जिसके बाद आपको फौरन नींद आ भी जाती है. ऐसा होना नॉर्मल है.

उन्होंने बताया कि रात में हमारा शरीर कई स्लीप साइकिल से गुजरता है. इसके तहत रात में कई बार आपकी नींद खुल सकती है, जिसके बाद आपको फौरन नींद आ भी जाती है. ऐसा होना नॉर्मल है.

स्लीप साइकल के कई चरण होते हैं, जिसमें शुरुआत में नींद हल्की होती है. फिर आप गहरी नींद और उसके बाद रेपिड आई मूवमेंट स्लीप में चले जाते हैं, जिसमें आप सपना देख रहे होते हैं. नींद में खलल पड़ने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जो दूसरी सेहत से जुड़ी दिक्कतों की वजह बनती हैं.

स्लीप साइकल के कई चरण होते हैं, जिसमें शुरुआत में नींद हल्की होती है. फिर आप गहरी नींद और उसके बाद रेपिड आई मूवमेंट स्लीप में चले जाते हैं, जिसमें आप सपना देख रहे होते हैं. नींद में खलल पड़ने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जो दूसरी सेहत से जुड़ी दिक्कतों की वजह बनती हैं.

स्ट्रेस और एंजाइटी बॉडी को हाइपर विजिलेंट स्टेट में रख सकते हैं, जिससे नींद में खलल पड़ सकता है. रात के बीच में जागना अक्सर दिन के दौरान दबे हुए चिंताजनक थॉट्स या नकारात्मक विचारों के कारण होता है.

स्ट्रेस और एंजाइटी बॉडी को हाइपर विजिलेंट स्टेट में रख सकते हैं, जिससे नींद में खलल पड़ सकता है. रात के बीच में जागना अक्सर दिन के दौरान दबे हुए चिंताजनक थॉट्स या नकारात्मक विचारों के कारण होता है.

सर्कैडियन रिदम, जो बॉडी की इंटरनल क्लॉक है, स्लीप-वेक साइकिल को कंट्रोल करती है. इरेगुलर स्लीप शेड्यूल, जेट लैग या लाइट के एक्सपोजर में कमी इस रिदम को डिस्टर्ब कर सकती है, जिससे सुबह जल्दी जागना हो सकता है.

सर्कैडियन रिदम, जो बॉडी की इंटरनल क्लॉक है, स्लीप-वेक साइकिल को कंट्रोल करती है. इरेगुलर स्लीप शेड्यूल, जेट लैग या लाइट के एक्सपोजर में कमी इस रिदम को डिस्टर्ब कर सकती है, जिससे सुबह जल्दी जागना हो सकता है.

हार्मोनल चेंजेस जैसे कि कोर्टिसोल का बढ़ना, सुबह जल्दी जागने में कॉन्ट्रिब्यूट कर सकते हैं. यह उन लोगों में ज्यादा कॉमन है, जो स्ट्रेस्ड हैं या जिन्हें स्लीप प्रॉब्लम्स हैं.

हार्मोनल चेंजेस जैसे कि कोर्टिसोल का बढ़ना, सुबह जल्दी जागने में कॉन्ट्रिब्यूट कर सकते हैं. यह उन लोगों में ज्यादा कॉमन है, जो स्ट्रेस्ड हैं या जिन्हें स्लीप प्रॉब्लम्स हैं.

वुल्फ ऑवर को सबकॉन्शियस थॉट्स और इमोशंस के लिए एक टाइम के रूप में भी माना जाता है. यह वह टाइम हो सकता है, जब आपको डरावने सपने आ सकते हैं, जिससे जागना और फिर से सो जाना मुश्किल हो जाता है.

वुल्फ ऑवर को सबकॉन्शियस थॉट्स और इमोशंस के लिए एक टाइम के रूप में भी माना जाता है. यह वह टाइम हो सकता है, जब आपको डरावने सपने आ सकते हैं, जिससे जागना और फिर से सो जाना मुश्किल हो जाता है.

अगर आप भी सुबह 3 से 5 बजे के बीच नियमित रूप से जाग जाते हैं तो अपनी रात की रूटीन में बदलाव लाने और दिन भर के स्ट्रेस को ज्यादा सोच-समझकर मैनेज करने पर विचार करें. इसके अलावा इन बातों का विशेष ध्यान रखें, जो आपको इस प्रॉब्लम से डील करने में हेल्प कर सकती हैं.

अगर आप भी सुबह 3 से 5 बजे के बीच नियमित रूप से जाग जाते हैं तो अपनी रात की रूटीन में बदलाव लाने और दिन भर के स्ट्रेस को ज्यादा सोच-समझकर मैनेज करने पर विचार करें. इसके अलावा इन बातों का विशेष ध्यान रखें, जो आपको इस प्रॉब्लम से डील करने में हेल्प कर सकती हैं.

स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन, योगा, या डीप ब्रीदिंग जैसी टेक्निक्स की प्रैक्टिस करें. हर दिन एक ही टाइम पर सोने और जागने की कोशिश करें. यहां तक कि वीकेंड पर भी, ताकि सर्कैडियन रिदम को रेगुलेट किया जा सके.

स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन, योगा, या डीप ब्रीदिंग जैसी टेक्निक्स की प्रैक्टिस करें. हर दिन एक ही टाइम पर सोने और जागने की कोशिश करें. यहां तक कि वीकेंड पर भी, ताकि सर्कैडियन रिदम को रेगुलेट किया जा सके.

आप ये सुनिश्चित करें कि आपका बेडरूम डार्क, शांत और ठंडा हो. सोने से पहले स्क्रीन के एक्सपोजर से बचें, क्योंकि ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को इनहिबिट कर सकती है.

आप ये सुनिश्चित करें कि आपका बेडरूम डार्क, शांत और ठंडा हो. सोने से पहले स्क्रीन के एक्सपोजर से बचें, क्योंकि ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को इनहिबिट कर सकती है.

सोने से पहले कैफीन और अल्कोहल का कंजम्पशन नींद में खलल डाल सकता है. यदि सुबह जल्दी जागना लगातार जारी रहता है और लाइफ की क्वालिटी पर असर डालता है तो डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करें.

सोने से पहले कैफीन और अल्कोहल का कंजम्पशन नींद में खलल डाल सकता है. यदि सुबह जल्दी जागना लगातार जारी रहता है और लाइफ की क्वालिटी पर असर डालता है तो डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करें.

Published at : 23 Jul 2025 08:14 AM (IST)

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MRI टेस्ट कराते वक्त क्यों हो जाती है मौत, जानें जांच कराते समय कैसे बचाएं जान?

MRI टेस्ट कराते वक्त क्यों हो जाती है मौत, जानें जांच कराते समय कैसे बचाएं जान?


एमआरआई या मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों की डिटेल्ड इमेज निकालकर उस हिस्से में मौजूद बीमारी का पता लगाती है. कई बार हमारी बॉडी की बीमारी का सिंपल तरीके से पता लगाना डॉक्टर्स के लिए मुश्किल हो जाता है. ऐसे में सीटी स्कैन के जरिए भी बीमारी का ठीक से पता नहीं चल पाता.

सीटी स्कैन की तुलना में एमआरआई स्कैन शरीर के इन हिस्सों की बेहतर और डिटेल्ड पिक्चर निकालने की कैपेसिटी रखता है. इसके अलावा इसमें किसी तरह के रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जो बॉडी को नुकसान पहुंचाते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर्स एमआरआई स्कैन कराने की सलाह देते हैं.

सीटी स्कैन की तुलना में एमआरआई स्कैन शरीर के इन हिस्सों की बेहतर और डिटेल्ड पिक्चर निकालने की कैपेसिटी रखता है. इसके अलावा इसमें किसी तरह के रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जो बॉडी को नुकसान पहुंचाते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर्स एमआरआई स्कैन कराने की सलाह देते हैं.

एमआरआई स्कैन एक पावरफुल मेडिकल इमेजिंग टेक्नीक है, जो बॉडी की डिटेल्ड इमेज बनाने के लिए मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मशीन का मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से 30 हजार गुना ज्यादा पावरफुल होता है. यह रूम में मौजूद किसी भी मेटल की चीज को अपनी ओर तेज़ी से खींचने की कैपेसिटी रखता है.

एमआरआई स्कैन एक पावरफुल मेडिकल इमेजिंग टेक्नीक है, जो बॉडी की डिटेल्ड इमेज बनाने के लिए मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मशीन का मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से 30 हजार गुना ज्यादा पावरफुल होता है. यह रूम में मौजूद किसी भी मेटल की चीज को अपनी ओर तेज़ी से खींचने की कैपेसिटी रखता है.

एमआरआई मशीन रूम में रखी व्हीलचेयर या लोहे की अलमारी तक को अपनी ओर खींच सकती है, जिससे ये पेशेंट या उनके साथ आए लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इससे हमेशा आग लगने या किसी और तरह के हादसे का खतरा बना रहता है.

एमआरआई मशीन रूम में रखी व्हीलचेयर या लोहे की अलमारी तक को अपनी ओर खींच सकती है, जिससे ये पेशेंट या उनके साथ आए लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इससे हमेशा आग लगने या किसी और तरह के हादसे का खतरा बना रहता है.

हॉस्पिटल में एमआरआई स्कैन से पहले किसी भी पेशेंट की हेल्थ और मेडिकल इन्फॉर्मेशन मांगी जाती है, ताकि मेडिकल टीम ये पता कर सके कि स्कैन करना सेफ है या नहीं. इसके अलावा पेशेंट की परमिशन ली जाती है. स्कैनर के पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड के कारण पेशेंट के शरीर पर या भीतर कोई मेटल ऑब्जेक्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जान का खतरा रहता है.

हॉस्पिटल में एमआरआई स्कैन से पहले किसी भी पेशेंट की हेल्थ और मेडिकल इन्फॉर्मेशन मांगी जाती है, ताकि मेडिकल टीम ये पता कर सके कि स्कैन करना सेफ है या नहीं. इसके अलावा पेशेंट की परमिशन ली जाती है. स्कैनर के पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड के कारण पेशेंट के शरीर पर या भीतर कोई मेटल ऑब्जेक्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जान का खतरा रहता है.

यदि किसी व्यक्ति के शरीर में पेसमेकर, मेटल वाले नकली दांत, सुनने की मशीन या ऐसे ही दूसरे इम्प्लांट्स हों तो उनका एमआरआई नहीं किया जा सकता. इसके अलावा घड़ी, ज्वेलरी या कोई भी मेटल ऑब्जेक्ट रूम के अंदर ले जाने की परमिशन नहीं होती.

यदि किसी व्यक्ति के शरीर में पेसमेकर, मेटल वाले नकली दांत, सुनने की मशीन या ऐसे ही दूसरे इम्प्लांट्स हों तो उनका एमआरआई नहीं किया जा सकता. इसके अलावा घड़ी, ज्वेलरी या कोई भी मेटल ऑब्जेक्ट रूम के अंदर ले जाने की परमिशन नहीं होती.

इसके अलावा जो लोग बंद जगह से डरते हैं, उनके लिए भी ये मशीन खतरनाक हो सकती है, क्योंकि स्कैनिंग में कई बार लंबा टाइम लगता है. ऐसे में उन्हें पैनिक अटैक आ सकता है. प्रेग्नेंसी में डॉक्टर्स इससे बचने की सलाह देते हैं. एमआरआई मशीन की एक और कमी ये है कि स्कैनिंग के दौरान इससे बहुत तेज आवाज आती है. यह आवाज 100 से 120 डेसिबल तक जा सकती है, जो कानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.

इसके अलावा जो लोग बंद जगह से डरते हैं, उनके लिए भी ये मशीन खतरनाक हो सकती है, क्योंकि स्कैनिंग में कई बार लंबा टाइम लगता है. ऐसे में उन्हें पैनिक अटैक आ सकता है. प्रेग्नेंसी में डॉक्टर्स इससे बचने की सलाह देते हैं. एमआरआई मशीन की एक और कमी ये है कि स्कैनिंग के दौरान इससे बहुत तेज आवाज आती है. यह आवाज 100 से 120 डेसिबल तक जा सकती है, जो कानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.

Published at : 23 Jul 2025 06:48 AM (IST)

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