नमक से लेकर चीनी तक, ये सफेद चीजें आपके लिए हो सकती हैं जहर

नमक से लेकर चीनी तक, ये सफेद चीजें आपके लिए हो सकती हैं जहर


आपको शायद अंदाजा भी न हो कि हमारी रोजमर्रा की डाइट में शामिल कुछ सफेद खाद्य पदार्थ, जैसे कि मैदा, चीनी और नमक, आपकी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनका जरूरत से ज्यादा सेवन, तो आपकी मौत का कारण भी बन सकता है.

किस वजह से हो रही दिक्कत?

आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और खराब फूड हैबिट्स के कारण भोजन में पोषक तत्वों की कमी आने लगी है. हम अनचाहे ही फास्ट फूड, चाइनीज और प्रोसेस्ड फूड का बहुत ज्यादा सेवन कर रहे हैं. इन सभी फूड आइटम्स को बनाने के लिए ज्यादातर सफेद चीजों जैसे नमक, चीनी, मैदा, अजीनोमोटो, चावल और आलू का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है.

इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा

खास बात यह है कि प्रोसेस्ड फूड में इन सभी चीजों की मात्रा बहुत ही खतरनाक स्तर तक होती है. इनका सेवन न केवल कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है, बल्कि यह व्यक्ति की उम्र को कम से कम 10 साल तक घटा सकता है. हम आपको इस लेख में, उन सफेद खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी आपकी सेहत को नुकसान पहुचा सकते हैं.

चीनी: सफेद चीनी को एम्प्टी कैलोरी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होते. यह शरीर में जाकर तुरंत ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में टूट जाती है, जो लोग कम शारीरिक मेहनत करते हैं. उनके शरीर में यह फैट के रूप में जमा होकर डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है. इसके अलावा, यह लिवर की समस्या, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डेंटल प्रॉब्लम और कैंसर जैसी बीमारियों से भी जुड़ी है.

चावल: भारतीय घरों में सफेद चावल का खूब सेवन होता है. हालांकि, रिफाइनिंग प्रक्रिया में चावल से उसकी भूसी और रोगाणु हटा दिए जाते हैं, जिससे इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व कम हो जाते हैं. कई अध्ययनों में सफेद चावल का ज्यादा सेवन टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ पाया गया है. अगर आप चावल के शौकीन हैं, तो सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या रेड राइस बेहतर विकल्प हैं.

नमक: नमक शरीर के लिए जरूरी है, क्योंकि यह सोडियम और क्लोराइड की आपूर्ति करता है. लेकिन बहुत ज़्यादा नमक खाने से शरीर में पानी की मात्रा प्रभावित होती है और ब्लड वेसेल्स डैमेज हो सकती हैं. यह ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, हड्डियों को कमजोर कर सकता है और पेट के अल्सर व कैंसर का कारण भी बन सकता है। 

मैदा: सफेद आटे से बने सभी खाद्य पदार्थ जैसे व्हाइट ब्रेड, केक, बिस्कुट और पेस्ट्री मैदे में आते हैं. गेहूं के आटे को रिफाइन करने की प्रक्रिया में उसके फाइबर, अच्छे फैट, विटामिन, मिनरल और फाइटोन्यूट्रिएंट्स निकल जाते हैं. यानी, गेहूं से मैदा बनने तक इसमें मौजूद सभी पोषक तत्व लगभग खत्म हो जाते हैं। मैदे से भरपूर आहार ट्राइग्लिसराइड में वृद्धि और गुड कोलेस्ट्रॉल की कमी का कारण बन सकता है. यह गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ाता है.

सफेद आलू: आलू कई लोगों की पसंदीदा सब्जी है, वह भी अगर सही तरीके से न खाया जाए तो नुकसानदेह हो सकता है. सफेद आलू स्टार्च और कार्ब्स से भरपूर होते हैं. समस्या तब आती है जब इन्हें डीप फ्राई करके या मक्खन और क्रीम के साथ मैश करके खाया जाता है. ये दोनों ही स्थितियां खतरा पैदा कर सकती हैं. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बुजुर्गों के लिए फिटनेस बनाएं रखने का आसान तरीका, कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं व्यायाम

बुजुर्गों के लिए फिटनेस बनाएं रखने का आसान तरीका, कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं व्यायाम


Chair Exercises for Seniors: उम्र चाहे कितनी भी हो, स्वस्थ और सक्रिय रहना हर किसी की जरूरत है. लेकिन जैसे-जैसे शरीर बुजुर्ग अवस्था की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों की ताकत और शरीर की लचीलापन धीरे-धीरे कम होने लगती है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि अब व्यायाम करना उनके बस की बात नहीं रही. लेकिन आप इसे कुर्सी पर बैठकर आसानी से कर सकते हैं.

डॉ. रामेश्वर कुमार बताते हैं कि, यह तरीका खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए बेहद उपयोगी है जो घुटनों के दर्द, कमर की कमजोरी या बैलेंस की समस्या के कारण खड़े होकर व्यायाम नहीं कर सकते. चलिए जानते हैं कि बुजुर्गों के लिए कुर्सी पर बैठकर किए जाने वाले कौन-कौन से व्यायाम असरदार हैं और इन्हें करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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शुरू करने से पहले ध्यान रखने बातें

  • मजबूत और बिना पहियों वाली कुर्सी का चुनाव करें
  • व्यायाम के दौरान पैरों को फर्श पर टिकाकर रखें
  • कोई भी मूवमेंट करते समय गहरी सांस लें और आराम से करें
  • दर्द महसूस हो तो व्यायाम तुरंत रोक दें

आर्म रेज

दोनों हाथों को धीरे-धीरे सिर के ऊपर उठाएं और फिर नीचे लाएं. यह कंधों की ताकत और मूवमेंट बढ़ाने में सहायक है.

लेग लिफ्ट

एक पैर को सीधा करके धीरे-धीरे ऊपर उठाएं, कुछ सेकेंड होल्ड करें और फिर नीचे रखें. यह पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है.

नेक रोटेशन

गर्दन को धीरे-धीरे दाएं और बाएं घुमाएं. इससे गर्दन की जकड़न और तनाव में राहत मिलती है.

एंकल रोटेशन

टखनों को घड़ी की सुई की दिशा और विपरीत दिशा में घुमाएं. इससे पैरों का रक्त संचार बेहतर होता है.

डीप ब्रीदिंग

गहरी सांस लें, कुछ सेकेंड रोकें और फिर छोड़ें. यह मन को शांत रखने और ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में मदद करता है.

बुजुर्गों के लिए फिट रहना अब मुश्किल नहीं रहा. कुर्सी पर बैठकर किया जाने वाला यह व्यायाम न केवल आसान है बल्कि नियमित रूप से अपनाने पर यह जीवन में नई ऊर्जा भर देता है. उम्र चाहे कोई भी हो, फिट रहना हर किसी का हक है.

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30 दिन तक शराब को नहीं लगाया हाथ तो क्या होगा, शरीर पर कितना पड़ेगा फर्क?

30 दिन तक शराब को नहीं लगाया हाथ तो क्या होगा, शरीर पर कितना पड़ेगा फर्क?


कुछ लोगों को शराब पीना बेहद पसंद होता है. उन्हें शराब की लत इस कदर लगी होती है कि वे इसे छोड़ने तो दूर, इसे कम पीने के बारे में भी नहीं सोच पाते हैं. कुछ लोग शराब छोड़ने की कसम भी खाते हैं, लेकिन अपने वादे पर कायम नहीं रह पाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई 30 दिन तक शराब को हाथ भी न लगाए तो क्या होगा? उसके शरीर पर क्या फर्क पड़ जाएगा? 

एक्सपर्ट्स की मानें तो 30 दिन तक शराब छोड़ने के फायदे अलग-अलग लोगों के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं. दरअसल, यह मसला शराब पीने की मात्रा पर निर्भर करता है. जो लोग काफी ज्यादा शराब पीते हैं, उनकी साइकोलॉजिकल और मेंटल हेल्थ पर ज्यादा खराब असर पड़ता है. इसकी वजह से मेंटल क्लियरिटी, अधूरी नींद, खराब एनर्जी लेवल और वजन में कमी जैसी दिक्कतें होना आम बात है. 

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दिन में एक बार शराब पीना भी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. हालांकि, कई डॉक्टर सीमित मात्रा में शराब पीने की सलाह भी देते हैं. वह महिलाओं के लिए एक ड्रिंक और पुरुषों के लिए दो ड्रिंक रोजाना की लिमिट बताते हैं. कई स्टडीज में सामने आया है कि ज्यादा शराब पीने से दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इससे वजन बढ़ने से लेकर साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम, दिल का दौरा और स्ट्रोक आदि की दिक्कतों का डर भी बढ़ता है. 

30 दिन तक शराब नहीं पिएंगे तो क्या होगा?

अगर कोई शख्स 30 दिन तक शराब नहीं पीता है तो उन्हें कई दिक्कतों से छुटकारा मिल सकता है. आइए आपको इनके बारे में बताते हैं.

लिवर होगा दुरुस्त

एक्सपर्ट्स के मुताबिक,  जो लोग काफी ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें लिवर सिरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है. इसकी वजह से लिवर डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर आप शराब पीना बंद कर देते हैं तो लिवर खुद-ब-खुद ठीक होने लगता है. वहीं, आप काफी समय तक शराब नहीं पीते हैं तो लिवर नॉर्मल हो जाता है.

हार्ट हेल्थ होती है बेहतर

अल्कोहल की वजह से बैड कोलेस्ट्रोल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है. इसकी वजह से खून की धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं, जिससे हार्ट डिजीज होती हैं. अगर आप शराब छोड़ देते हैं तो गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है, जिससे हार्ट हेल्थ में भी सुधार होता है.

कैंसर का खतरा होता है कम

कई स्टडी में सामने आया है कि शराब पीने की वजह से कैंसर होने का खतरा भी बढ़ता है. अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक, अमेरिका में कैंसर से होने वाली 3.5 पर्सेंट मौतों की वजह शराब होती है. शराब पीने की वजह से हेड कैंसर, नेक कैंसर, लिवर कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ता है. अगर आप शराब छोड़ते हैं तो इन दिक्कतों से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ती है.

वजन घटाने में मिलती है मदद

सभी तरह की शराब में काफी ज्यादा कैलोरी होती हैं. अगर आप शराब पीना बंद करते हैं तो वजन घटाने में मदद मिलती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो शराब छोड़ने से पेट की चर्बी कम होती है, जिससे वजन घटता है.

ब्रेन पावर में होता है इजाफा

ज्यादा शराब पीने से याददाश्त गुम होने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में आप शराब छोड़ते हैं तो ब्रेन पावर बढ़ती है. हालांकि, यह बात गौर करने लायक है कि शराब छोड़ने के तुरंत बाद दिमाग में डोपामाइन की कमी आती है, जिसके चलते उदासी और निराशा महसूस होती है.

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बादल जैसा दिखने वाला यूरीन हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए कारण

बादल जैसा दिखने वाला यूरीन हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए कारण


Cloudy Urine Causes: क्या आपने कभी गौर किया है कि आपका यूरीन साफ और हल्के पीले रंग का नहीं होकर सफेद या बादलदार दिख रहा है? ऐसा होने पर हम अक्सर मानते हैं कि, यूरीन का रंग पानी की मात्रा पर निर्भर करता है, लेकिन जब पेशाब में धुंधलापन या सफेदी लगातार बनी रहती है तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है.

डॉ. राजेश कुमार तिवारी के अनुसार, जब यूरीन बादल जैसा दिखाई दे तो यह इंफेक्शन, डिहाइड्रेशन या किसी अन्य बीमारी का संकेत हो सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि, आखिर क्यों बादलदार यूरीन खतरे की घंटी बन सकता है.

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यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

डॉ. तिवारी बताते हैं कि बादल जैसा यूरीन सबसे आम तौर पर UTI के कारण होता है. बैक्टीरिया के कारण यूरिन में पस, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्रोटीन आ जाते हैं, जिससे यूरीन का रंग सफेद और धुंधला हो सकता है. इसके साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब लगना और पेट के निचले हिस्से में दर्द भी महसूस हो सकता है.

डिहाइड्रेशन

शरीर में पानी की कमी होने पर यूरीन गाढ़ा और कभी-कभी बादलदार नजर आ सकता है. यदि आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो शरीर विषैले तत्वों को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता और इसका असर यूरीन के रंग व बनावट पर पड़ता है.

सेमेन

कभी-कभी पुरुषों में सेमेन का कुछ हिस्सा यूरीन के साथ बाहर निकलता है, जिससे यूरीन में दूधिया सफेदी दिखाई देती है. यह स्थिति आमतौर पर सुबह के समय होती है और गंभीर नहीं मानी जाती, लेकिन बार-बार होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

किडनी स्टोन या किडनी डिजीज

किडनी में पथरी होने पर यूरीन में ब्लड या मिनरल्स मिलकर उसे बादलदार बना सकते हैं. साथ ही अगर किसी को किडनी डिजीज है तो यूरीन में प्रोटीन का लीकेज बढ़ जाता है, जिससे यूरीन सफेद और झागदार दिखता है.

एसटीडी

गोनोरिया और क्लेमाइडिया जैसी यौन संचारित बीमारियों के कारण भी यूरीन में सूजन, सफेदी या बादल जैसी स्थिति आ सकती है. इन बीमारियों का तुरंत इलाज जरूरी होता है.

यूरीन का बादलदार दिखना एक सामान्य बात लग सकती है, लेकिन यह आपके शरीर में छिपी कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है. इसलिए इसे नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है. साफ यूरीन स्वस्थ शरीर की निशानी है और अगर इसमें बदलाव दिखे तो जांच करवाना ही बेहतर विकल्प है.

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पसीने के बदबू से भी पता लगा सकते हैं बीमारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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Body Odor Health Warning: पसीना आना हमारे शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है. लेकिन पसीने से अजीब या तेज बदबू आ रही हो तो उसका संबंध सिर्फ हाइजीन से नहीं, बल्कि किसी बीमारी से भी हो सकता है? इसलिए आइए जानते हैं कि, इस बारे में एक्सपर्ट की क्या राय है.

स्किन केयर स्पेशिलिस्ट डॉ. विजय लक्ष्मी कहती हैं कि, पसीने की गंध कई बार शरीर में हो रही अंदरूनी गड़बड़ियों की ओर इशारा करती है. यह सिर्फ डियो या साबुन से छुपाई नहीं जा सकती, बल्कि इसका सही कारण जानना और इलाज करना बेहद जरूरी होता है. तो आइए जानते हैं कि पसीने की बदबू किन बीमारियों का संकेत हो सकती है.

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डायबिटीज का संकेत हो सकता है

अगर पसीने से मीठी या फल जैसी गंध आ रही है, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है. शरीर में ब्लड शुगर के असंतुलन के कारण यह गंध उत्पन्न होती है. इसे किटोन ब्रीथ भी कहा जाता है, जो शरीर में इंसुलिन की कमी का नतीजा हो सकता है.

लिवर या किडनी की समस्या

अगर पसीने से अमोनिया या यूरिन जैसी तीखी गंध आती है, तो यह लिवर या किडनी की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. जब शरीर अपशिष्ट पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता, तो वे पसीने के माध्यम से बाहर आते हैं, जिससे गंध पैदा होती है.

थायरॉइड असंतुलन और हार्मोनल बदलाव

अत्यधिक पसीना और उसमें बदबू आना थायरॉइड की समस्या या हार्मोनल बदलाव का भी संकेत हो सकता है. विशेषकर हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रसित लोगों को अधिक पसीना आता है, और शरीर में रासायनिक बदलाव के कारण गंध भी तेज हो सकती है.

बैक्टीरियल इंफेक्शन या फंगल संक्रमण

अक्सर बदबूदार पसीने के पीछे बैक्टीरिया या फंगस का हाथ होता है. जब शरीर का पसीना स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया से रिएक्ट करता है, तो दुर्गंध पैदा होती है. यदि यह बदबू सामान्य से अधिक हो और लंबे समय तक बनी रहे, तो यह किसी स्किन इंफेक्शन का लक्षण हो सकता है.

क्या है समाधान?

  • नियमित स्नान और साफ-सफाई रखें
  • संतुलित आहार और भरपूर पानी पीना जरूरी
  • डियो या परफ्यूम से गंध छुपाने के बजाय कारण जानें
  • अगर पसीने की गंध असामान्य हो तो डॉक्टर से जांच कराएं
  • तनाव को कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं

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कैंसर के मरीजों को नहीं देनी चाहिए ये चीजें, सेहत पर पड़ सकता है असर

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Foods to Aviod Cancer Patients: आजकल कम उम्र के लोगों को भी कैंसर की बीमारी हो रही है. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है. डॉक्टर्स की माने तो खराब जीवनशैली और खानपान की वजह से ऐसा हो रहा है. इसी बीच अहम बात यह है कि, जिन लोगों को कैंसर हो जाता है. उनका खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना होगा. लेकिन प्यार और देखभाल की वजह से परिजन ऐसा करना भूल जाते हैं. जिसकी वजह से मरीज परेशान होता है. 

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रेखा आर्या कहती हैं कि. हर चीज जो आमतौर पर सेहतमंद मानी जाती है, वह कैंसर के मरीज के लिए फायदेमंद नहीं होती. कुछ खाद्य पदार्थ और आदतें ऐसी होती हैं, जो इम्यून सिस्टम को और कमजोर बना सकती हैं या इलाज के असर को कम कर सकती है.

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प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से करें परहेज

चिप्स, नमकीन, बिस्किट या इंस्टेंट नूडल्स जैसी चीजें कैंसर मरीज के लिए बिल्कुल सही नहीं होती, इनमें प्रिज़रवेटिव्स और कृत्रिम स्वाद होते हैं, जो शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाते हैं. डॉ. रेखा आर्या बताती हैं कि ये चीजें मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती हैं.

शुगर से रहें दूर

अधिक चीनी वाली चीजें जैसे मिठाइयाँ, केक, मीठे जूस आदि कैंसर सेल्स को बढ़ावा दे सकते हैं. रिसर्च से यह बात सामने आई है कि कैंसर सेल्स शुगर से तेजी से पनपते हैं. इसलिए कैंसर मरीज के खानपान से रिफाइंड शुगर को पूरी तरह हटा देना चाहिए.

दूध और डेयरी उत्पाद

दूध को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ कैंसर प्रकारों में डेयरी उत्पाद सूजन बढ़ा सकते हैं. विशेष रूप से जिन मरीजों को हार्मोन-सेंसिटिव कैंसर (जैसे ब्रेस्ट या प्रोस्टेट कैंसर) है, उन्हें डेयरी से परहेज करना चाहिए.

बहुत ज्यादा फाइबर वाला भोजन

कीमोथेरेपी या रेडिएशन के बाद जब मरीज का पाचन तंत्र कमजोर होता है, तब बहुत ज्यादा फाइबर (जैसे छिलके वाले फल, साबुत अनाज) पचाना मुश्किल हो सकता है. इस समय हल्का, सुपाच्य भोजन देना बेहतर होता है.

हर्बल सप्लीमेंट बिना सलाह के न दें

आयुर्वेदिक या घरेलू सप्लीमेंट्स भले ही नेचुरल हों, लेकिन हर चीज हर स्थिति में सही नहीं होती. कई हर्बल दवाएं कीमोथेरेपी या अन्य कैंसर दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकती हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है.

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