हाथ और पैर में नजर आ रहे हैं ये लक्षण तो समझ जाएं बढ़ गया है कोलेस्ट्रॉल

हाथ और पैर में नजर आ रहे हैं ये लक्षण तो समझ जाएं बढ़ गया है कोलेस्ट्रॉल


आजकल की लाइफस्टाइल में कोलेस्ट्रॉल एक कॉमन प्रॉब्लम बन गई है. इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है. अक्सर लोग इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं, क्योंकि इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते. हां, मगर आपके हाथों और पैरों पर ऐसे संकेत मिल सकते हैं, जो बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की ओर इशारा करते हैं.

इनमें पैरों में दर्द या ऐंठन, सुन्नपन या झुनझुनी, नाखूनों का पीला होना आदि शामिल हैं. इन संकेतों को पहचानकर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके. आइए जानते हैं हाथ और पैरों में दिखने वाले ऐसे कौन से लक्षण हैं, जो हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकते हैं.

  • हाथों-पैरों में झुनझुनाहट: जब आर्टरीज में कोलेस्ट्रॉल जमा होता है, तो हाथ-पैरों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता. इससे अक्सर उनमें झुनझुनाहट या पिन और सुइयां चुभने जैसा एहसास होता है. यह खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से होता है.
  • पैरों में ऐंठन: ब्लॉक हुई आर्टरीज के कारण पैरों की मांसपेशियों को सही ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इसी वजह से चलते समय या थोड़ी सी भी शारीरिक गतिविधि के दौरान पैरों में  ऐंठन आ सकती है. अगर आपको बार-बार ऐंठन महसूस हो रही है तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल का एक गंभीर वॉर्निंग साइन है.
  • हाथ-पैरों का ठंडा होना: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है. इस वजह से आपके हाथ-पैर अक्सर ठंडे महसूस हो सकते हैं, भले ही मौसम सामान्य हो. यह पैरों तक पर्याप्त खून न पहुंचने का सीधा संकेत है.
  • हाथ-पैरों में लगातार दर्द: आर्टरीज के ब्लॉक या संकरा होने के कारण ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत आती है, जिससे हाथ-पैरों में अक्सर दर्द होता है. खासकर पैरों में दर्द इस बात का संकेत हो सकता है कि उन्हें पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा.
  • पैरों में घाव जो ठीक न हों: अगर आपके पैरों में कोई छोटा कट या घाव है और वह बहुत धीरे ठीक हो रहा है या बिल्कुल ठीक नहीं हो रहा, तो इसे हल्के में न लें. खराब ब्लड सर्केुलेशन के कारण शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता धीमी पड़ जाती है.
  • स्किन कलर बदलाव: ब्लड सर्कुलेशन ठीक से न हो पाने के कारण पैरों की स्किन का कलर बदल सकता है. ऑक्सीजन की कमी की वजह से अक्सर स्किन में नीले या बैंगनी रंग के धब्बे नजर आते हैं.

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण अपने हाथ या पैरों में नजर आ रहा है, तो इसे बिल्कुल भी इग्नोर न करें. तुरंत अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें और अपना कोलेस्ट्रॉल लेवल चेक करवाएं. सही समय पर पहचान और ट्रीटमेंट से आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं. अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके और डॉक्टर की सलाह मानकर आप अपने कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कैसे पता लगता है कि किसी को हो गया ब्रेन ट्यूमर? 99 पर्सेंट लोग अक्सर इग्नोर कर देते हैं ये 5 लक्षण

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ब्रेन ट्यूमर में अक्सर सिरदर्द होता रहता है. कई बार यह दर्द लगातार कायम रहता है और धीरे-धीरे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है. ब्रेन ट्यूमर की वजह से होने वाला सिरदर्द कॉमन सिरदर्द से अलग होता है. ब्रेन ट्यूमर में सुबह के वक्त तेज सिरदर्द होता है, जिससे नींद खराब हो जाती है. इस तरह के सिरदर्द में बेचैनी, दिमाग में हद से ज्यादा दबाव महसूस होता है. कई बार यह सिरदर्द धड़कन वाले अंदाज में महसूस होता है.

जब मरीज खांसता, झुकता या कोई काम करता है तो ब्रेन ट्यूमर की वजह से सिर में तेज दर्द होने लगता है. इस दौरान एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं को बार-बार खाने से भी फायदा नहीं मिलता है. अगर आप ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे हैं तो अक्सर उल्टी महसूस होती है. दरअसल, ब्रेन में ट्यूमर बढ़ने पर ब्रेन के सेंसेटिव टिशूज पर प्रेशर पड़ता है या कई बार स्कल में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से तेज दर्द होता है.

जब मरीज खांसता, झुकता या कोई काम करता है तो ब्रेन ट्यूमर की वजह से सिर में तेज दर्द होने लगता है. इस दौरान एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं को बार-बार खाने से भी फायदा नहीं मिलता है. अगर आप ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे हैं तो अक्सर उल्टी महसूस होती है. दरअसल, ब्रेन में ट्यूमर बढ़ने पर ब्रेन के सेंसेटिव टिशूज पर प्रेशर पड़ता है या कई बार स्कल में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से तेज दर्द होता है.

जब ट्यूमर देखने और सुनने के नर्व सेंटर्स के पास होता है तो इससे देखने और सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ता है. ऐसे में चीजें धुंधली, ब्लर या डबल दिखाई पड़ सकती हैं. इस कंडीशन से जूझ रहे लोगों को सुनने में भी दिक्कत हो सकती है. दरअसल, ट्यूमर से देखने और सुनने के नर्व सेंटर्स पर प्रेशर पड़ता है, जिसकी वजह से ऐसी दिक्कतें होती हैं.

जब ट्यूमर देखने और सुनने के नर्व सेंटर्स के पास होता है तो इससे देखने और सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ता है. ऐसे में चीजें धुंधली, ब्लर या डबल दिखाई पड़ सकती हैं. इस कंडीशन से जूझ रहे लोगों को सुनने में भी दिक्कत हो सकती है. दरअसल, ट्यूमर से देखने और सुनने के नर्व सेंटर्स पर प्रेशर पड़ता है, जिसकी वजह से ऐसी दिक्कतें होती हैं.

अगर किसी को अचानक कमजोरी, हाथ-पैरों और चेहरे पर सुन्नपन महसूस होता है तो ये भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं. अगर लोगों को टहलने में भी दिक्कत हो रही है और चलते वक्त वे बार-बार लड़खड़ा जाते हैं तो उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. ब्रेन ट्यूमर होने पर कपड़ों के बटन लगाने से लेकर लिखने जैसे छोटे-छोटे काम करने में भी काफी परेशानी होती है. दरअसल, ब्रेन ट्यूमर की वजह से मसल मूवमेंट और बैलेंस को कंट्रोल करने वाले एरिया पर भी असर पड़ता है.

अगर किसी को अचानक कमजोरी, हाथ-पैरों और चेहरे पर सुन्नपन महसूस होता है तो ये भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं. अगर लोगों को टहलने में भी दिक्कत हो रही है और चलते वक्त वे बार-बार लड़खड़ा जाते हैं तो उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. ब्रेन ट्यूमर होने पर कपड़ों के बटन लगाने से लेकर लिखने जैसे छोटे-छोटे काम करने में भी काफी परेशानी होती है. दरअसल, ब्रेन ट्यूमर की वजह से मसल मूवमेंट और बैलेंस को कंट्रोल करने वाले एरिया पर भी असर पड़ता है.

ब्रेन ट्यूमर होने पर दिमाग में अनियंत्रित इलेक्ट्रिकल रुकावटें आती हैं, जिसकी वजह से अचानक दौरे पड़ते हैं. अगर किसी शख्स को अचानक दौरा पड़ा है तो उसे ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. इस तरह के दौरे पड़ने पर मसल्स में ऐंठन, शरीर में झटके या घूरने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इस तरह के दौरे से शरीर का कोई खास हिस्सा प्रभावित हो सकता है तो कई मामलों में पूरे शरीर पर असर नजर आ सकता है.

ब्रेन ट्यूमर होने पर दिमाग में अनियंत्रित इलेक्ट्रिकल रुकावटें आती हैं, जिसकी वजह से अचानक दौरे पड़ते हैं. अगर किसी शख्स को अचानक दौरा पड़ा है तो उसे ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. इस तरह के दौरे पड़ने पर मसल्स में ऐंठन, शरीर में झटके या घूरने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इस तरह के दौरे से शरीर का कोई खास हिस्सा प्रभावित हो सकता है तो कई मामलों में पूरे शरीर पर असर नजर आ सकता है.

ब्रेन ट्यूमर होने पर याददाश्त पर भी असर पड़ता है. इसकी वजह से लोग छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं. मरीज में चिड़चिड़ापन से लेकर डिप्रेशन जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. कई मामलों में मरीज को बोलने में भी दिक्कत होने लगती है. अगर आपको भी ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

ब्रेन ट्यूमर होने पर याददाश्त पर भी असर पड़ता है. इसकी वजह से लोग छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं. मरीज में चिड़चिड़ापन से लेकर डिप्रेशन जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. कई मामलों में मरीज को बोलने में भी दिक्कत होने लगती है. अगर आपको भी ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

Published at : 18 Jul 2025 12:10 PM (IST)

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प्रेग्नेंसी में गलत तरीके से सोने पर बच्चे को हो सकता है खतरा? जान लीजिए जवाब

प्रेग्नेंसी में गलत तरीके से सोने पर बच्चे को हो सकता है खतरा? जान लीजिए जवाब


Sleeping Position During Pregnancy: प्रेग्नेंसी एक ऐसा समय होता है जब हर छोटी-बड़ी बात का सीधा असर न केवल मां के शरीर पर, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है. खान-पान, चलना-फिरना, आराम करना, सब कुछ बेहद सोच-समझकर करना होता है. लेकिन एक चीज जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वह है सोने का तरीका. क्या आप जानती हैं कि प्रेग्नेंसी में गलत पोजिशन में सोना आपके बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है?

गायनोलॉजिस्ट डॉ. गौरी राय बताती हैं कि, प्रेग्नेंसी के दौरान सोने की गलत मुद्रा से बच्चे को ऑक्सीजन और पोषण की कमी हो सकती है. इसलिए सही जानकारी और सावधानी बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में किस तरह की नींद की आदतें सही हैं और कौन-सी पोजिशन से बचना चाहिए.

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पीठ के बल सोना हो सकता है खतरनाक?

गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे तिमाही में पीठ के बल सोना मना किया जाता है. इस पोजिशन में पेट का वजन शरीर की मुख्य नसों और रक्त धमनियों पर दबाव डालता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है. इसका असर बच्चे पर पड़ सकता है, जिससे ऑक्सीजन की कम हो जाती है.

पेट के बल सोना पूरी तरह से अवॉइड करें

गर्भ के शुरुआती महीनों में कुछ महिलाएं पेट के बल सोती हैं, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, यह पोजिशन बेहद असुविधाजनक और खतरनाक हो सकती है. इससे पेट पर सीधा दबाव पड़ता है, जो बच्चे के विकास में रुकावट डाल सकता है.

बाईं करवट सोना क्यों है सबसे बेहतर?

गर्भावस्था में सबसे सुरक्षित और फायदेमंद नींद की मुद्रा बाईं करवट मानी जाती है. इससे गर्भाशय को भरपूर खून और पोषक तत्व मिलते हैं और किडनी भी बेहतर तरीके से काम करती है. यह मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है.

तकिये और सपोर्ट का करें सही इस्तेमाल

अगर बाईं करवट में लगातार सोना मुश्किल लगता है तो तकियों की मदद ली जा सकती है. पैरों के बीच और पेट के नीचे तकिया लगाकर नींद को आरामदायक बनाया जा सकता है. मार्केट में प्रेग्नेंसी सपोर्ट पिलो भी उपलब्ध हैं जो सही पोजिशन बनाए रखने में मदद करते हैं.

नींद में बार-बार करवट बदलना सामान्य है

गर्भवती महिलाओं के लिए यह जरूरी नहीं कि वे पूरी रात एक ही पोजिशन में सो सकें. अगर नींद में करवट बदल भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कोशिश करें कि सोते समय बाईं ओर करवट लेकर ही लेटें.

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मुंह के छालों से मिलेगा छुटकारा,  ये 5 घरेलू नुस्खे देंगे झटपट आराम

मुंह के छालों से मिलेगा छुटकारा, ये 5 घरेलू नुस्खे देंगे झटपट आराम


Home Remedies for Mouth Ulcer: क्या आपको खाने में जलन हो रही है? क्या पानी पीने पर भी मुंह में चुभन महसूस होती है? अगर हां, तो हो सकता है आप मुंह के छालों से परेशान हों. ये छोटे-छोटे सफेद घाव दिखने में भले ही मामूली लगें, लेकिन तकलीफ ऐसी कि बोलना, खाना और पीना, तीनों मुश्किल हो जाते हैं. खास बात ये है कि ये छाले अचानक आते हैं और कई बार बिना किसी दवा के भी ठीक हो सकते हैं, बस जरूरत है सही देखभाल और थोड़े से घरेलू उपायों की.

डेंटिस्ट डॉ. सोनिया बताती हैं कि, अक्सर ये छाले हमारी लाइफस्टाइल, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, तनाव या मुंह की सफाई में लापरवाही के कारण हो सकते हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप इस समस्या से जल्दी छुटकारा पा सकते हैं.

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गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करें

यह सबसे पुराना और भरोसेमंद उपाय है. एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएं और दिन में 2 बार कुल्ला करें. नमक में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण छालों में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करता है और सूजन को कम करता है.

एलोवेरा जेल का करें उपयोग

एलोवेरा को स्किन की देखभाल के लिए जाना जाता है, लेकिन मुंह के छालों में भी यह बेहद लाभकारी होता है. ताजे एलोवेरा की पत्ती से जेल निकालकर छाले पर लगाएं. इससे छाले की जलन कम होगी और यह जल्दी भरने में मदद करेगा.

शहद लगाएं

शहद को रुई की सहायता से सीधे छाले पर लगाएं. दिन में 2 बार ऐसा करें. शहद छाले को नमी भी देता है, जिससे जलन कम होती है और घाव भरता है. इससे आपको किसी तरह का साइड इफेक्ट भी नहीं होता.

मसालेदार खाना न खाएं

जब तक छाले ठीक न हों, मसालेदार, तला हुआ और बहुत गर्म खाना न खाएं. ये छालों की जलन को और बढ़ा सकते हैं. इस दौरान नरम, ठंडा और तरल आहार लेना बेहतर रहता है.

नारियल तेल का इस्तेमाल करें

नारियल तेल में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण छालों से लड़ने में मदद करते हैं. एक साफ ऊंगली या रुई से छाले पर हल्का-सा नारियल तेल लगाएं. यह छाले पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है, जिससे दर्द में राहत मिलती.

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चीनी कम नहीं की तो पछताओगे! जानिए एक दिन में कितनी मात्रा रखनी चाहिए

चीनी कम नहीं की तो पछताओगे! जानिए एक दिन में कितनी मात्रा रखनी चाहिए


Sugar Consumption Risk: सुबह की चाय में एक चम्मच चीनी, दोपहर की मिठाई, ऑफिस में बिस्किट और शाम को शरबत या कोल्ड ड्रिंक, कब कितनी चीनी शरीर में जा रही है, इसका अंदाजा हमें खुद नहीं रहता. मीठा खाने से मन तो खुश होता है, लेकिन ये मीठास धीरे-धीरे हमारे शरीर के लिए जहर भी बन सकती है.

डॉ. ऋषभ शर्मा बताते हैं कि रोजमर्रा की जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवनकेवल मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों को न्योता देता है, बल्कि त्वचा पर झुर्रियां और समय से पहले बुढ़ापा भी ला सकता है. इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि, एक दिन में कितनी चीनी सेहत के लिए सही है और उससे अधिक सेवन किन खतरों को बढ़ावा दे सकता है.

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एक दिन में कितनी चीनी खाना है सही?

  • व्यक्ति को रोज अधिकतम 25 ग्राम लगभग 6 चम्मच से अधिक शक्कर नहीं लेनी चाहिए
  • बच्चों के लिए यह सीमा लगभग 4 चम्मच तक होनी चाहिए
  • यह सीमा ऐडेड शुगर यानी जो चीनी आप चाय, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक्स, कुकीज आदि में लेते हैं, उस पर लागू होती है.

ज्यादा चीनी खाने के होने वाले नुकसान

मोटापा बढ़ना शक्कर में कैलोरी तो होती है, पोषण नहींअधिक मात्रा वजन तेजी से बढ़ा सकती है.

डायबिटीज का खतरा लगातार हाई शुगर लेवल पैंक्रियास पर दबाव डालता है जिससे इंसुलिन रेसिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है.

दिल की बीमारियांरिसर्च के मुताबिक ज्यादा चीनी ब्लड प्रेशर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाती है, जिससे दिल की समस्याएं हो सकती हैं

त्वचा की उम्र बढ़नाअधिक चीनी कोलेजन प्रोटीन को नुकसान पहुंचाती है, जिससे चेहरे पर जल्दी झुर्रियां आती हैं.

दांतों की सड़नमीठे पदार्थ दांतों पर बैक्टीरिया को आकर्षित करते हैं, जिससे कैविटी हो सकती है.

कैसे करें चीनी की मात्रा को कंट्रोल?

  • शुगर की जगह गुड़, शहद जैसे नेचुरल विकल्प अपनाएं
  • कोल्ड ड्रिंक, मिठाई, कुकीज और बेकरी आइटम्स से दूरी बनाएं
  • पैक्ड फूड खरीदते वक्त लेबल जरूर पढ़ें, छिपी हुई चीनी का ध्यान रखें
  • ताजे फल खा सकते हैं या फिर कम शक्कर वाले जूस पी सकते हैं

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इस बीमारी में होता है मल्टीपल ऑर्गन फेल होने का खतरा, ऐसे दिखते हैं संकेत

इस बीमारी में होता है मल्टीपल ऑर्गन फेल होने का खतरा, ऐसे दिखते हैं संकेत


मल्टीपल ऑर्गन फेलियर, जिसे मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम भी कहा जाता है. एक अत्यंत गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के दो या दो से अधिक अंग एक साथ कार्य करना बंद कर देते हैं. यह जानलेवा हो सकता है और अक्सर किसी गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), ट्रॉमा या किसी पुरानी बीमारी की जटिलता के रूप में प्रकट होता है. इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम (कभी-कभी अत्यधिक प्रतिक्रिया करता है, जिससे संपूर्ण शरीर में सूजन फैल जाती है और अंगों को नुकसान पहुंचता है.

मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम कई कारणों से हो सकता है. इनमें गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), बड़ी चोट (ट्रॉमा) और पुरानी गंभीर बीमारियां प्रमुख हैं. इसके अलावा कारणों में ये हैं शामिल.

  • गंभीर संक्रमण: यह सबसे आम कारण है. जब कोई संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है, तो यह अत्यधिक सूजन पैदा करता है, जो अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है.
  • बड़ी चोट या ट्रॉमा: गंभीर दुर्घटनाएं, जलने या आंतरिक चोटें भी अंगों को सीधा नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे एमओडीए का जोखिम बढ़ जाता है.
  • गंभीर बीमारियां: जैसे कि हार्ट अटैक, लीवर फेलियर, पैंक्रियाटाइटिस या गंभीर डायबिटीज.
  • विषैले पदार्थ या जहर: किसी जहर या हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आने से भी अंगों को नुकसान हो सकता है.
  • शरीर में खून के प्रवाह में कमी या शॉक: जैसे कि गंभीर रक्तस्राव, हार्ट फेलियर या डीहाइड्रेशन से अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे वे फेल हो सकते हैं.

ये हैं मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के संकेत

एमओडीएम के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर के कौन-कौन से अंग प्रभावित हुए हैं. हालांकि, कुछ सामान्य संकेत जो आपको तुरंत सचेत कर सकते हैं. इनमें प्रमुख रूप से सांस लेने में दिक्कत, मानसिक स्थिति में बदलाव,  पेशाब का कम होना, शरीर में सूजन, पेट में दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं,  त्वचा या आंखों का पीला पड़ना (पीलिया),  लगातार कमजोरी और थकान,  सीने में दर्द या दबाव, ब्लड प्रेशर का कम होना,  त्वचा का रंग बदलना आदि शामिल हैं. 
 
यदि आपको या आपके किसी जानने वाले को ऊपर बताए गए गंभीर लक्षण जैसे सांस लेने में अचानक अत्यधिक कठिनाई, भ्रम, लगातार सीने में दर्द या शॉक के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. मल्टीपल ऑर्गन फेलियर एक इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है. सही समय पर पहचान और इलाज ही जान बचाने में सहायक होता है.

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