कहीं आपके एग्स का भी तो नहीं हो रहा है कारोबार? जानें IVF कराते समय किन बातों का रखें ख्याल

कहीं आपके एग्स का भी तो नहीं हो रहा है कारोबार? जानें IVF कराते समय किन बातों का रखें ख्याल


आज के दौर में इनफर्टिलिटीएक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिससे कई जोड़े माता-पिता बनने का सुख प्राप्त नहीं कर पाते. ऐसे में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी आधुनिक अस्सिटेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीस उनके लिए उम्मीद की किरण लेकर आती हैं. आईवीएफ ने हजारों परिवारों को पूरा किया है, लेकिन इस क्षेत्र के तेजी से बढ़ते विस्तार के साथ कुछ अनैतिक और व्यावसायिक प्रथाओं का भी उदय हुआ है, जो मरीजों के अधिकारों और उनके शरीर के अंगों, विशेषकर एग्स और शुक्राणु के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं आज हम इसी गंभीर विषय पर बात करेंगे और जानेंगे कि आईवीएफ कराते समय आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपके साथ कोई धोखाधड़ी या आपके जैविक सामग्री का दुरुपयोग न हो.

इन बातों का रखें खास ख्याल

विश्वसनीय क्लिनिक का चुनाव करें: सबसे पहले आप ये सुनिश्चित करें कि क्लिनिक भारत सरकार के असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी अधिनियम, 2021 के तहत पंजीकृत और मान्यता प्राप्त हो. यह अधिनियम आईवीएफ क्लिनिकों और डोनर सेंटरों के संचालन को नियंत्रित करता है. क्लिनिक की सफलता दर के बारे में पूरी जानकारी लें. साथ ही, इलाज की कुल लागत, छिपी हुई लागतें और भुगतान योजना के बारे में पूरी पारदर्शिता रखें. ये भी सुनिश्चित करें कि क्लिनिक में अनुभवी और बोर्ड-प्रमाणित प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञ हों.

डॉक्यूमेंटेशन और सहमति: आईवीएफ प्रक्रिया के हर चरण के लिए आपकी लिखित सहमति बहुत जरूरी है. खासकर यदि एग डोनर या स्पर्म डोनर का इस्तेमाल किया जा रहा हो. क्लिनिक से अपनी प्रक्रिया, दवाइयों और संभावित जोखिमों के बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी प्राप्त करें.  बता दें कि भारत में एग और स्पर्म डोनेशन एक गुमनाम प्रक्रिया है, लेकिन डोनर की आयु (23 से 35 वर्ष के बीच), स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी मानदंडों के बारे में क्लिनिक से पुष्टि करें.

धोखाधड़ी से कैसे बचें?

यदि कोई क्लिनिक या एजेंट बहुत कम लागत पर या बहुत ऊंची सफलता दर की गारंटी देता है, तो सतर्क रहें. आईवीएफ में 100% सफलता की गारंटी नहीं दी जा सकती. अवैध एग डोनर सेंटरों से बचें, जो बिना पंजीकरण के चल रहे हों या नाबालिगों को इस प्रक्रिया में शामिल कर रहे हों. कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में स्पर्म या एग के सैंपल बदलने की घटनाएं सामने आई हैं. विश्वसनीय और नैतिक रूप से काम करने वाले क्लिनिक का चुनाव बहुत जरूरी है. डीएनए टेस्ट के माध्यम से ऐसी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. यदि आपको अनावश्यक टेस्ट या महंगी दवाएं खरीदने के लिए कहा जाए, तो दूसरी राय लेने पर विचार करें.

ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में बुखार आने पर कौन सी दवा लेनी चाहिए? जान लीजिए जवाब

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: ये भी जरूरी है कि ताजे फल, हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार लें. प्रोसेस्ड फूड, शक्कर और ज्यादा फैटी खाद्य पदार्थों से बचें. पर्याप्त नींद लें और तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें, क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है. शराब, सिगरेट और कैफीन का सेवन कम से कम करें या पूरी तरह बंद कर दें. डॉक्टर द्वारा दी गई सभी सलाह और दवाओं का सख्ती से पालन करें. अपनी मर्जी से कोई दवा बंद न करें या खुराक न बदलें.

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कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का नेचुरल तरीका, ये 6 बीज जरूर खाएं

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का नेचुरल तरीका, ये 6 बीज जरूर खाएं


अलसी के बीज: अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं. इनमें मौजूद लिगनेन नामक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. रोजाना एक चम्मच पिसे हुए अलसी के बीज दही, दलिया या स्मूदी में मिलाकर लें.

चिया सीड्स: चिया सीड्स सॉल्युबल फाइबर और ओमेगा-3 फैट्स से भरपूर होते हैं. ये न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं, बल्कि ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखते हैं. इन्हें रातभर भिगोकर सुबह खाएं या पैनकेक्स और योगर्ट में डालें.

चिया सीड्स: चिया सीड्स सॉल्युबल फाइबर और ओमेगा-3 फैट्स से भरपूर होते हैं. ये न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं, बल्कि ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखते हैं. इन्हें रातभर भिगोकर सुबह खाएं या पैनकेक्स और योगर्ट में डालें.

सूरजमुखी के बीज: विटामिन E, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स से भरपूर सूरजमुखी के बीज एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत हैं, जो शरीर में सूजन को कम कर हृदय को सुरक्षित रखते हैं. नमक रहित रोस्टेड बीजों को स्नैक की तरह खाया जा सकता है.

सूरजमुखी के बीज: विटामिन E, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स से भरपूर सूरजमुखी के बीज एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत हैं, जो शरीर में सूजन को कम कर हृदय को सुरक्षित रखते हैं. नमक रहित रोस्टेड बीजों को स्नैक की तरह खाया जा सकता है.

तिल के बीज: तिल में लिगनेन और फाइटोस्टेरॉल होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं. काले और सफेद दोनों तरह के तिल फायदेमंद हैं. इन्हें चटनी, पराठे या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं.

तिल के बीज: तिल में लिगनेन और फाइटोस्टेरॉल होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं. काले और सफेद दोनों तरह के तिल फायदेमंद हैं. इन्हें चटनी, पराठे या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं.

कद्दू के बीज: कद्दू के बीज मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं, जो हार्ट हेल्थ में मदद करते हैं. इनमें पाए जाने वाले फाइटोस्टेरॉल खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. इन्हें स्नैक की तरह खाएं या ग्रेनोला में मिलाएं.

कद्दू के बीज: कद्दू के बीज मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं, जो हार्ट हेल्थ में मदद करते हैं. इनमें पाए जाने वाले फाइटोस्टेरॉल खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. इन्हें स्नैक की तरह खाएं या ग्रेनोला में मिलाएं.

मेथी के बीज: मेथी के बीज में सॉल्युबल फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रॉल को ब्लड में अवशोषित होने से रोकता है. रोज सुबह भिगोए हुए मेथी दानों को खाली पेट खाने से फायदा होता है. स्वाद भले कड़वा हो, लेकिन असर बहुत मीठा है.

मेथी के बीज: मेथी के बीज में सॉल्युबल फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रॉल को ब्लड में अवशोषित होने से रोकता है. रोज सुबह भिगोए हुए मेथी दानों को खाली पेट खाने से फायदा होता है. स्वाद भले कड़वा हो, लेकिन असर बहुत मीठा है.

Published at : 16 Jul 2025 05:47 PM (IST)

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चिया सीड्स से करें वजन कंट्रोल, जानिए खाने के 6 आसान और असरदार तरीके

चिया सीड्स से करें वजन कंट्रोल, जानिए खाने के 6 आसान और असरदार तरीके


सुबह खाली पेट चिया वाटर: 1 ग्लास पानी में 1 चम्मच चिया बीज रातभर भिगो दें. सुबह खाली पेट पिएं। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और पेट लंबे समय तक भरा रहता है.

स्मूदी में मिलाकर: फ्रूट स्मूदी या ग्रीन स्मूदी में 2 चम्मच चिया सीड्स डालें। यह न केवल स्मूदी को गाढ़ा बनाता है बल्कि फाइबर की मात्रा भी बढ़ाता है.

स्मूदी में मिलाकर: फ्रूट स्मूदी या ग्रीन स्मूदी में 2 चम्मच चिया सीड्स डालें। यह न केवल स्मूदी को गाढ़ा बनाता है बल्कि फाइबर की मात्रा भी बढ़ाता है.

चिया पुडिंग बनाकर: 1 कप दूध  में 2 चम्मच चिया बीज और थोड़ा शहद मिलाएं. रातभर फ्रिज में रखें. सुबह फलों से सजाकर खाएं, वजन घटाने का स्वादिष्ट तरीका.

चिया पुडिंग बनाकर: 1 कप दूध में 2 चम्मच चिया बीज और थोड़ा शहद मिलाएं. रातभर फ्रिज में रखें. सुबह फलों से सजाकर खाएं, वजन घटाने का स्वादिष्ट तरीका.

सलाद में डालें: अपने  फ्रूट सलाद में 1 चम्मच सूखे चिया बीज छिड़कें. यह बिना स्वाद बदले प्रोटीन और ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत बन जाता है.

सलाद में डालें: अपने फ्रूट सलाद में 1 चम्मच सूखे चिया बीज छिड़कें. यह बिना स्वाद बदले प्रोटीन और ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत बन जाता है.

सूप या दलिया में मिलाएं: गर्म सूप या ओट्स दलिया में परोसने से पहले चिया सीड्स डालें. यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ओवरईटिंग से बचाता है.

सूप या दलिया में मिलाएं: गर्म सूप या ओट्स दलिया में परोसने से पहले चिया सीड्स डालें. यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ओवरईटिंग से बचाता है.

हाइड्रेशन का रखें ध्यान: चिया बीज का रोज 1-2 चम्मच सेवन पर्याप्त होता है. इन्हें हमेशा पानी में भिगोकर खाएं और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, ताकि फाइबर पेट में फूलकर पाचन में मदद कर सके.

हाइड्रेशन का रखें ध्यान: चिया बीज का रोज 1-2 चम्मच सेवन पर्याप्त होता है. इन्हें हमेशा पानी में भिगोकर खाएं और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, ताकि फाइबर पेट में फूलकर पाचन में मदद कर सके.

Published at : 16 Jul 2025 04:49 PM (IST)

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स्कूलों में लगेंगे ऑयल बोर्ड, स्टूडेंट्स की सेहत को लेकर सीबीएसई ने दिया नया निर्देश

स्कूलों में लगेंगे ऑयल बोर्ड, स्टूडेंट्स की सेहत को लेकर सीबीएसई ने दिया नया निर्देश


सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने देशभर के स्कूलों के लिए नया और अहम फैसला लिया है. यह फैसला सीधे तौर पर छात्रों की सेहत और लाइफस्टाइल से जुड़ा है. दरअसल, आजकल के बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. इसका बड़ा कारण जंक फूड, तेल से भरपूर खाना और फिजिकल एक्टिविटीज में कमी है. इसे देखते हुए अब सीबीएसई ने सभी स्कूलों को कुछ जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

क्या हैं नए निर्देश?

सीबीएसई के अनुसार, अब हर स्कूल में ‘ऑयल बोर्ड’ लगाया जाएगा. इस बोर्ड का मकसद है कि बच्चों को यह बताया जाए कि वे कितना और किस तरह का तेल अपने खाने में इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे बच्चों में खाने को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और वे बेहतर ऑप्शन चुनना सीखेंगे. इसके अलावा अब स्कूलों के सभी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स में भी मोटापे से बचाव और हेल्दी लाइफस्टाइल से जुड़े मैसेज भी पब्लिश किए जाएंगे. इसका मकसद यह है कि हर लेवल पर बच्चों और अभिभावकों को सेहत के प्रति सजग किया जा सके.

इन चीजों पर भी रहेगा फोकस

सीबीएसई ने यह भी कहा है कि स्कूल कैंटीन में जंक फूड की जगह अब पौष्टिक और बैलेंस्ड फूड को प्रायॉरिटी दी जाए. बच्चों को रेगुलर एक्सरसाइज, योग, खेल और अन्य फिजिकल एक्टिविटीज के लिए प्रोत्साहित किया जाए. इसके अलावा स्टूडेंट्स को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने और छोटे-छोटे कामों के लिए पैदल चलने के लिए भी मोटिवेट किया जाएगा. इससे वे फिजिकल एक्टिव होंगे और मोटापे जैसे खतरे से बचाव होगा.

कैसा होगा ‘ऑयल बोर्ड’ का डिजाइन?

हर स्कूल ‘ऑयल बोर्ड’ का डिजाइन अपनी सुविधानुसार और रचनात्मक तरीके से बना सकता है. इसका उद्देश्य सूचनात्मक और बच्चों के लिए समझने योग्य होना चाहिए, ताकि वे आसानी से यह समझ सकें कि तेल से भरपूर खाना कैसे नुकसानदायक हो सकता है. 

कहां से मिलेगी मदद?

अगर स्कूल चाहे तो वे FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) की वेबसाइट या यूट्यूब चैनल से शैक्षिक पोस्टर्स और जानकारी ले सकते हैं. इसके लिए स्कूल eatright@fssai.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं. सीबीएसई ने सभी स्कूलों से अपील की है कि वे छात्रों की सेहत को उतनी ही गंभीरता से लें, जितना वे पढ़ाई पर फोकस करते हैं. एक हेल्दी स्टूडेंट ही बेहतर नागरिक बन सकता है और इस दिशा में यह कदम एक सराहनीय शुरुआत है.

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कियारा की तरह आप भी बनी हैं मां तो किन बातों का रखें ध्यान? हेल्दी और फिट रहेगा बेबी

कियारा की तरह आप भी बनी हैं मां तो किन बातों का रखें ध्यान? हेल्दी और फिट रहेगा बेबी


बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा के घर एक नई मेहमान आई है. दरअसल, कियारा आडवाणी शादी के दो साल बाद मां बनी हैं. उन्होंने प्यारी-सी बेटी को जन्म दिया है. अगर आप भी कियारा आडवाणी की तरह नई-नई मां बनी हैं तो आपको कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जिससे बेबी हेल्दी और फिट रहे. 

डिलीवरी के बाद ध्यान रखें ये बातें

डिलीवरी के बाद मां और नवजात दोनों के लिए देखभाल बेहद जरूरी होती है. दरअसल, इस दौरान मां और बच्चे की सेहत को सुनिश्चित करने के लिए बेहद सावधानी और जागरूकता की जरूरत होती है. इस दौरान न सिर्फ नवजात की देखभाल पर ध्यान देना होता है, बल्कि मां की रिकवरी पर भी फोकस करना बेहद जरूरी होता है.

ब्रेस्टफीडिंग पर रखें फोकस

डिलीवरी के बाद बच्चे की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम ब्रेस्टफीडिंग होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, जन्म के पहले घंटे में नवजात को मां का दूध (कोलोस्ट्रम) देना शुरू करना चाहिए. कोलोस्ट्रम में एंटीबॉडीज और पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे के इम्युनिटी को मजबूत करते हैं. 

बच्चे की साफ-सफाई कैसे करें?

नवजात की स्किन बेहद नाजुक होती है और इसकी देखभाल में खास ध्यान रखने की जरूरत होती है नवजात की स्किन को साबुन से बार-बार धोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्किन का नैचुरल ऑयल नष्ट हो सकता है.

टीकाकरण का भी रखें ध्यान

भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP) और WHO के मुताबिक, जन्म के बाद बच्चे का टीकाकरण समय पर करवाना बेहद जरूरी होता है. दरअसल, वैक्सीनेशन से ही बच्चे को गंभीर बीमारियों जैसे पोलियो, हेपेटाइटिस बी और डिप्थीरिया आदि से बचाया जा सकता है. 

बच्चे की नींद बेहद जरूरी

नवजात दिन में 16 से 18 घंटे तक सोते हैं, लेकिन उनकी नींद छोटे-छोटे गैप में होती है. पैरेंट्स के लिए यह जरूरी है कि वे बच्चे के लिए रेगुलर रूटीन बनाएं. बच्चे को शांत और अंधेरे कमरे में सुलाएं. रात में दूध पिलाने के बाद उसे हल्के हाथों से थपथपाएं, जिससे वह शांत होकर सो सके. नवजात को हमेशा पीठ के बल सुलाएं, ताकि सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) का खतरा कम हो.

पाचन और पेट की समस्याओं का रखें ख्याल

नवजात में पेट की समस्याएं जैसे गैस, कब्ज या मरोड़ बेहद कॉमन हैं. इन दिक्कतों को कम करने के लिए मां की डाइट और नवजात की देखभाल दोनों बेहद अहम हैं. मां को मसालेदार और तला हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे को गैस की प्रॉब्लम हो सकती है. फाइबर युक्त फूड आइटम्स जैसे साबुत अनाज, फल और सब्जियां मां के दूध की क्वालिटी को बेहतर बनाते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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वजन घटाने के चक्कर में न करें ये गलती, खाली पेट नींबू पानी पीने से हो सकता है नुकसान

वजन घटाने के चक्कर में न करें ये गलती, खाली पेट नींबू पानी पीने से हो सकता है नुकसान


Side Effects of Lemon Water: आजकल फिटनेस और वेट लॉस की चाह में हर कोई किसी न किसी घरेलू नुस्खे को आजमाता नजर आता है. इनमें से एक सबसे लोकप्रिय उपाय है, सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना. सोशल मीडिया, हेल्थ ब्लॉग्स और यहां तक कि जिम ट्रेनर्स भी इसे वजन घटाने का रामबाण उपाय बताते हैं. लेकिन यह हेल्दी आदत कही जाने वाली चीज़ आपके शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है?

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. सलीम जैदी, एक जाने-माने का कहना है कि, नींबू में साइट्रिक एसिड की अधिकता होती है, और इसे खाली पेट पीने से पाचन तंत्र, दांतों की सेहत और गैस्ट्रिक सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. आइए जानें कि ये आदत कितनी फायदेमंद और कहां-कहां नुकसानदेह हो सकती है.

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एसिडिटी और सीने में जलन

खाली पेट नींबू पानी पीने से बहुत से लोगों को सीने में जलन, डकार, या पेट फूलना जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

दांतों के इनेमल को नुकसान

नींबू का एसिड दांतों के ऊपरी सुरक्षा कवच को धीरे-धीरे घिस देता है, जिससे दांत संवेदनशील हो सकते हैं और जल्दी सड़ सकते हैं.

गैस्ट्रिक अल्सर का खतरा

बार-बार खाली पेट नींबू पानी पीना पेट की झिल्ली को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में अल्सर जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है.

डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस

नींबू पेशाब बढ़ाता है, जिससे डिहाइड्रेशन और शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी हो सकती है.

नींबू पानी पीना हो तो कैसे पिएं ?

  • नींबू पानी को हमेशा भोजन के 30 मिनट बाद या हल्का नाश्ता करने के बाद पिएं.
  • इसे गुनगुने पानी में मिलाएं और थोड़ा सा शहद या एक चुटकी काला नमक मिलाकर पिएं.
  • दांतों की सुरक्षा के लिए इसे स्ट्रॉ से पीना बेहतर होता है.

वजन घटाना अच्छी बात है, लेकिन सेहत के साथ कोई भी समझौता नहीं होना चाहिए. खाली पेट नींबू पानी पीना हर किसी के लिए सही नहीं होता. अगर आप इसे रोजाना पी रहे हैं और कोई असुविधा महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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