वजन घटाने के चक्कर में न करें ये गलती, खाली पेट नींबू पानी पीने से हो सकता है नुकसान

वजन घटाने के चक्कर में न करें ये गलती, खाली पेट नींबू पानी पीने से हो सकता है नुकसान


Side Effects of Lemon Water: आजकल फिटनेस और वेट लॉस की चाह में हर कोई किसी न किसी घरेलू नुस्खे को आजमाता नजर आता है. इनमें से एक सबसे लोकप्रिय उपाय है, सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना. सोशल मीडिया, हेल्थ ब्लॉग्स और यहां तक कि जिम ट्रेनर्स भी इसे वजन घटाने का रामबाण उपाय बताते हैं. लेकिन यह हेल्दी आदत कही जाने वाली चीज़ आपके शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है?

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. सलीम जैदी, एक जाने-माने का कहना है कि, नींबू में साइट्रिक एसिड की अधिकता होती है, और इसे खाली पेट पीने से पाचन तंत्र, दांतों की सेहत और गैस्ट्रिक सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. आइए जानें कि ये आदत कितनी फायदेमंद और कहां-कहां नुकसानदेह हो सकती है.

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एसिडिटी और सीने में जलन

खाली पेट नींबू पानी पीने से बहुत से लोगों को सीने में जलन, डकार, या पेट फूलना जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

दांतों के इनेमल को नुकसान

नींबू का एसिड दांतों के ऊपरी सुरक्षा कवच को धीरे-धीरे घिस देता है, जिससे दांत संवेदनशील हो सकते हैं और जल्दी सड़ सकते हैं.

गैस्ट्रिक अल्सर का खतरा

बार-बार खाली पेट नींबू पानी पीना पेट की झिल्ली को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में अल्सर जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है.

डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस

नींबू पेशाब बढ़ाता है, जिससे डिहाइड्रेशन और शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी हो सकती है.

नींबू पानी पीना हो तो कैसे पिएं ?

  • नींबू पानी को हमेशा भोजन के 30 मिनट बाद या हल्का नाश्ता करने के बाद पिएं.
  • इसे गुनगुने पानी में मिलाएं और थोड़ा सा शहद या एक चुटकी काला नमक मिलाकर पिएं.
  • दांतों की सुरक्षा के लिए इसे स्ट्रॉ से पीना बेहतर होता है.

वजन घटाना अच्छी बात है, लेकिन सेहत के साथ कोई भी समझौता नहीं होना चाहिए. खाली पेट नींबू पानी पीना हर किसी के लिए सही नहीं होता. अगर आप इसे रोजाना पी रहे हैं और कोई असुविधा महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कुत्ते के पंजा मारने से भी हो सकता है रेबीज? ये रहा जवाब

क्या कुत्ते के पंजा मारने से भी हो सकता है रेबीज? ये रहा जवाब


Dog Scratch Cause Rabies: कुत्तों से जुड़ी घटनाएं, जैसे काटना या पंजा मारना, कई बार लोगों को मानसिक रूप से डर और तनाव में डाल देती हैं. खासकर जब सवाल हो रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का तो डर और भी बढ़ जाता है. अधिकतर लोग जानते हैं कि कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, लेकिन क्या कुत्ते के पंजा मारनेसे भी रेबीज हो सकता है? यह सवाल बहुत आम है, लेकिन जवाब उतना ही ज़रूरी और वैज्ञानिक है।

क्या कुत्ते के पंजा मारने से रेबीज हो सकता है?

डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार, केवल पंजा मारने से तब तक रेबीज नहीं होता जब तक…

  • कुत्ते के नाखूनों पर लार न लगी हो
  • खरोंच से त्वचा में गहरा घाव न हुआ हो
  • पंजे में कोई संक्रमित खून या लार का संपर्क न हुआ हो
  • अगर कुत्ते ने पंजा मारते समय अपने नाखून चाटे हों या पंजा मारने से पहले काटा हो, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है

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किन परिस्थितियों में खतरा बढ़ जाता है?

  • अगर खरोंच गहरी हो और खून निकल रहा हो
  • कुत्ता आवारा या बिना वैक्सीन वाला हो
  • कुत्ता आक्रामक व्यवहार वाला हो या रेबीज के लक्षण दिखा रहा हो
  • खरोंच के तुरंत बाद घाव को साफ न किया गया हो

कुत्ते ने पंजा मार दिया हो तो क्या करें

  • घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोएं
  • एंटीसेप्टिक (जैसे बिटाडीन) लगाएं
  • अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लें
  • यदि जरूरत हो तो एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाएं

बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है

  • पालतू कुत्तों को नियमित टीकाकरण करवाएं
  • बच्चों को सिखाएं कि जानवरों से सावधानीपूर्वक पेश आएं
  • किसी भी खरोंच, खासकर आवारा जानवरों से होने पर, मामूली समझकर नजरअंदाज न करें

केवल पंजा मारने से रेबीज होने की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता. यदि खरोंच गहरी हो या लार के संपर्क में आई हो, तो सावधानी बरतना जरूरी है. जैसा कि डॉ. मुकेश कुमार कहते हैं कि,रेबीज होने पर समय रहते सावधानी रखी जाए तो ये पूरी तरह रोका जा सकता है.

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महाराष्ट्र में कुष्ठ रोग के खात्मे की नई मुहिम, सरकार उठाएगी ठोस कदम

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Leprosy Eradication Symptoms: कभी एक समय था जब कुष्ठ रोग को सामाजिक कलंक समझा जाता था. लोग इससे पीड़ित मरीजों से दूर भागते थे, उन्हें समाज से अलग कर दिया जाता था. लेकिन आज मेडिकल साइंस ने इतना विकास कर लिया है कि, ये बीमारी अब पूरी तरह से ठीक हो सकती है. बस जरूरत है समय पर पहचान और इलाज की. इसी दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में लेप्रसी यानी कुष्ठ रोग को खत्म करने के लिए पहल की है.

सरकार बनाएगी राज्य स्तरीय समिति

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि, लेप्रसी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक राज्य-स्तरीय समिति बनाई जाएगी. इस समिति में विशेषज्ञ, डॉक्टर, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और कुष्ठ रोग के क्षेत्र में काम कर रहे लोग शामिल होंगे. इस समिति का काम हर तीन महीने में रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपना होगा. इन रिपोर्ट्स के आधार पर नई योजनाएं बनेंगी और लेप्रसी उन्मूलन कार्यक्रम को जमीन पर लागू किया जाएगा.

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सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें अस्पतालों और कुछ केंद्रों के लिए सब्सिडीे जरिए 6,000 रुपये का एक बेड करने की मांग की गई है. यह प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है और जल्द ही राज्य कैबिनेट से मंजूरी ली जाएगी.

कुष्ठ रोग के लक्षण

  • त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, जिनमें संवेदना कम हो जाती ह
  • हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • आंखों की समस्या, जिससे दृष्टि कमजोर हो सकती है
  • पैरों और हाथों में घाव, जो जल्दी ठीक नहीं होते

तीन चीजों पर होगा फोकस

  • हर विभाग को लेप्रसी उन्मूलन के लिए तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान देना होगा
  • बीमारी की समय पर पहचान करना
  • प्रभावी इलाज की सुविधा जल्द से जल्द देना
  • समाज में पुनर्वास और बीमारी का खात्मा करना

महाराष्ट्र सरकार की यह पहल कुष्ठ रोग के मरीजों को समाज की मुख्यधारा में लाने का एक सशक्त प्रयास है. इलाज, जागरूकता और पुनर्वास के ज़रिए यह बीमारी न सिर्फ जड़ से खत्म की जा सकती है, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक भेदभाव को भी समाप्त किया जा सकता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि, यह कदम देशभर के लिए एक मिसाल बनेगा.

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दुनियाभर में ज्यादा नमक खाने से इतने लाख लोगों की हो जाती है मौत, हैरान रह जाएंगे आप

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Excess Salt Consumption: हमारे खाने का स्वाद बढ़ाने वाला एक ऐसा तत्व, जिसके बिना हर व्यंजन अधूरा लगता है. दाल हो या सब्ज़ी, नमक न हो तो सब फीका लगता है. लेकिन यही नमक अगर जरूरत से ज़्यादा खाया जाए तो यह आपकी जान भी ले सकता है? जी हां, ये कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट में सामने आई एक चौंकाने वाली सच्चाई है.

WHO के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल करीब 18 लाख 90 हजार लोगों की मौत सिर्फ अधिक नमक खाने की वजह से होती है. ये आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि आखिर नमक कैसे बन सकता है जानलेवा और इससे कैसे इससे बचा जा सकता है.

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ब्लड प्रेशर बढ़ाता है

अधिक नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

दिल की बीमारियों का खतरा

लंबे समय तक ज्यादा नमक खाना दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.

किडनी पर असर

ज्यादा नमक किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंचा सकता है.

हड्डियां होती हैं कमजोर

ज्यादा नमक पेशाब के ज़रिए कैल्शियम को बाहर निकालता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है.

कितनी मात्रा में खाएं नमक?

एक व्यक्ति को दिन में 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए. लेकिन आज की जीवनशैली और फास्ट फूड की आदतों के चलते हम रोजाना औसतन 12 ग्राम तक नमक खा रहे हैं.

कहां छिपा होता है अतिरिक्त नमक?

  • प्रोसेस्ड फूड (नूडल्स, चिप्स, सॉस, स्नैक्स)
  • पैकेज्ड फूड
  • बेकरी आइटम्स
  • बाहर का खाना (रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड)

कैसे करें कम सेवन?

  • खाने में ऊपर से नमक डालने की आदत छोड़ें
  • फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं
  • घर के खाने में नमक का उपयोग सीमित करें
  • नमक की जगह मसालों का इस्तेमाल करें

नमक स्वाद के लिए ज़रूरी है, लेकिन सीमित मात्रा में खाना चाहिए. WHO की चेतावनी को हल्के में लेना हमारी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. जितनी जल्दी हम अपनी आदतों में सुधार लाएंगे, उतना ही बेहतर होगा हमारी सेहत के लिए होगा.

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मानसून में आंखों में होने वाले बैक्टेरियां से कैसे बचें, इस तरह करें देखभाल

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Monsoon Eye Care Tips: बरसात का मौसम अपने साथ कई खुशियां लाता है. ठंडी हवाएं, हरियाली, और भीगी धरती की खुशबू. लेकिन यही मौसम संक्रमणों और बैक्टीरिया के फैलने का सबसे अनुकूल समय भी होता है. खासतौर पर आंखों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील माना जाता है. मानसून में आंखों की साफ-सफाई और देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है, क्योंकि ये आई सिंड्रोम और वायरल इंफेक्शन जैसी कई परेशानियों का कारण बन सकता है.

डॉ. आशीष पटेल बताते हैं कि, मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और गंदगी से आंखों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो ये संक्रमण आपकी दृष्टि को भी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए हम जानेंगे कि कैसे आप मानसून में अपनी आंखों को बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचा सकते हैं.

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आंखों को बार-बार न छुएं

  • आंखों को बिना धोए हाथों से बार-बार छूना संक्रमण को न्योता देने जैसा है
  • बाहर से आने के बाद हाथ धोए बिना आंखें न छुएं
  • बच्चों को भी समझाएं कि आंखों में हाथ न लगाएं
  • अगर आंख में खुजली हो रही है तो साफ रूमाल या टिशू से हल्के हाथ से पोंछें
  • साफ तौलिया और रुमाल का ही इस्तेमाल करें
  • मानसून में गीले तौलिए या साझा किए गए रुमाल से संक्रमण तेजी से फैलता है
  • हर व्यक्ति को अपना अलग तौलिया/रुमाल इस्तेमाल करना चाहिए
  • रोजाना तौलिया धोकर सुखाएं
  • गंदे और नम कपड़े बैक्टीरिया के लिए सबसे अच्छा माहौल बनाते हैं
  • आंखों को दिन में दो बार साफ पानी से धोएं
  • नमी और पसीने से आंखों में गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं
  • सुबह और रात को आंखों को साफ, ठंडे पानी से धोना चाहिए
  • अगर बाहर से लौटे हैं या धूल में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धोएं

कॉंटैक्ट लेंस का इस्तेमाल सावधानी से करें

  • मानसून में कॉंटैक्ट लेंस पहनने से पहले अच्छे से हाथ धोएं
  • पुराने या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें
  • संक्रमण होने पर तुरंत लेंस पहनना बंद करें और डॉक्टर से मिलें

मानसून में थोड़ी-सी लापरवाही आंखों की बड़ी समस्या बन सकती है. साफ-सफाई, सावधानी और जागरूकता ही इस मौसम में आंखों को सुरक्षित रखने की कुंजी है. बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है, इसलिए इस मानसून, अपनी आंखों का रखें खास ख्याल.

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