मानसून में आंखों में होने वाले बैक्टेरियां से कैसे बचें, इस तरह करें देखभाल

मानसून में आंखों में होने वाले बैक्टेरियां से कैसे बचें, इस तरह करें देखभाल


Monsoon Eye Care Tips: बरसात का मौसम अपने साथ कई खुशियां लाता है. ठंडी हवाएं, हरियाली, और भीगी धरती की खुशबू. लेकिन यही मौसम संक्रमणों और बैक्टीरिया के फैलने का सबसे अनुकूल समय भी होता है. खासतौर पर आंखों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील माना जाता है. मानसून में आंखों की साफ-सफाई और देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है, क्योंकि ये आई सिंड्रोम और वायरल इंफेक्शन जैसी कई परेशानियों का कारण बन सकता है.

डॉ. आशीष पटेल बताते हैं कि, मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और गंदगी से आंखों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो ये संक्रमण आपकी दृष्टि को भी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए हम जानेंगे कि कैसे आप मानसून में अपनी आंखों को बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचा सकते हैं.

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आंखों को बार-बार न छुएं

  • आंखों को बिना धोए हाथों से बार-बार छूना संक्रमण को न्योता देने जैसा है
  • बाहर से आने के बाद हाथ धोए बिना आंखें न छुएं
  • बच्चों को भी समझाएं कि आंखों में हाथ न लगाएं
  • अगर आंख में खुजली हो रही है तो साफ रूमाल या टिशू से हल्के हाथ से पोंछें
  • साफ तौलिया और रुमाल का ही इस्तेमाल करें
  • मानसून में गीले तौलिए या साझा किए गए रुमाल से संक्रमण तेजी से फैलता है
  • हर व्यक्ति को अपना अलग तौलिया/रुमाल इस्तेमाल करना चाहिए
  • रोजाना तौलिया धोकर सुखाएं
  • गंदे और नम कपड़े बैक्टीरिया के लिए सबसे अच्छा माहौल बनाते हैं
  • आंखों को दिन में दो बार साफ पानी से धोएं
  • नमी और पसीने से आंखों में गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं
  • सुबह और रात को आंखों को साफ, ठंडे पानी से धोना चाहिए
  • अगर बाहर से लौटे हैं या धूल में रहे हैं, तो तुरंत आंखें धोएं

कॉंटैक्ट लेंस का इस्तेमाल सावधानी से करें

  • मानसून में कॉंटैक्ट लेंस पहनने से पहले अच्छे से हाथ धोएं
  • पुराने या बिना सॉल्यूशन वाले लेंस का इस्तेमाल न करें
  • संक्रमण होने पर तुरंत लेंस पहनना बंद करें और डॉक्टर से मिलें

मानसून में थोड़ी-सी लापरवाही आंखों की बड़ी समस्या बन सकती है. साफ-सफाई, सावधानी और जागरूकता ही इस मौसम में आंखों को सुरक्षित रखने की कुंजी है. बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है, इसलिए इस मानसून, अपनी आंखों का रखें खास ख्याल.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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प्रेग्नेंसी में बुखार आने पर कौन सी दवा लेनी चाहिए? जान लीजिए जवाब

प्रेग्नेंसी में बुखार आने पर कौन सी दवा लेनी चाहिए? जान लीजिए जवाब


प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला को अपनी और अपने होने वाले बच्चे की हेल्थ का खास ध्यान रखना होता है. इस दौरान अगर बुखार आ जाए, तो अक्सर महिलाएं पैनिक कर जाती हैं कि कौन सी दवा लें और कौन सी नहीं. बिना सोचे-समझे कोई भी दवा लेना आपके और आपके बच्चे के लिए रिस्की हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में बुखार आने पर आपको क्या करना चाहिए और कौन सी दवा लेनी चाहिए.

प्रेग्नेंसी में बुखार होने पर क्या करें?

जब आप प्रेग्नेंट होती हैं तो आपका इम्यूनिटी सिस्टम थोड़ा कमजोर हो सकता है, जिससे आपको सर्दी और बुखार होने की आशंका बढ़ जाती है. जानते हैं बुखार होने पर सबसे पहले क्या करें.

  • डॉक्टर से सलाह लें: बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें. यह सबसे जरूरी स्टेप है.
  • हाइड्रेटेड रहें: खूब सारा पानी, जूस या सूप  पिएं ताकि आपकी बॉडी हाइड्रेटेड रहे.
  • आराम करें: जितना हो सके रेस्ट करें. बॉडी को रिकवर होने के लिए आराम की जरूरत होती है.
  • ठंडी पट्टी: अगर बुखार ज्यादा है, तो माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखें या गुनगुने पानी से स्पंज करें.

प्रेग्नेंसी में बुखार के लिए कौन सी दवा है सेफ?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान बुखार कम करने के लिए सबसे सेफ दवा एसिटामिनोफेन है, जिसे आमतौर पर पैरासिटामोल के नाम से जाना जाता है. यह दवा आपके शरीर का तापमान कम करने में मदद करती है और बच्चे के लिए भी सेफ मानी जाती है. यह प्रेग्नेंसी में बुखार और दर्द के लिए सबसे ज्यादा रेकमेंड की जाने वाली दवा है. आपको डॉक्टर द्वारा बताई गई डोज और टाइमिंग के हिसाब से ही पैरासिटामोल लेनी चाहिए. खुद से डोज बढ़ाने की गलती न करें.

कुछ बातें जिन पर ध्यान दें.

  • एंटीबायोटिक्स: बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स कभी न लें. एंटीबायोटिक्स केवल सही जांच के बाद और डॉक्टर की देखरेख में ही लेनी चाहिए.
  • अन्य दवाएं: आइबुप्रोफेन, एस्पिरिन या दूसरी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स जैसी दवाएं प्रेग्नेंसी में सेफ नहीं मानी जाती हैं और इन्हें लेने से बचना चाहिए.

डॉक्टर से कब मिलना है जरूरी?

  • अगर आपको प्रेग्नेंसी में बुखार आता है तो कुछ स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी है.
  • अगर आपका बुखार 100.4°F (38°C) से ज्यादा हो.
  • अगर बुखार के साथ शरीर में दर्द, चकत्ते (रैशेस), सांस लेने में दिक्कत, उल्टी या दस्त) जैसे लक्षण भी हों.
  • अगर बुखार 24 घंटे से ज्यादा समय तक बना रहे, भले ही आपने पैरासिटामोल ली हो.
  • अगर आप अपनी हेल्थ को लेकर कंसर्न हैं या आपको कोई असामान्य लक्षण दिखें.

प्रेग्नेंसी के दौरान बुखार को नजरअंदाज न करें. सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लें और अपना ख्याल रखें. आपकी सेहत ही आपके बच्चे की सेहत है.

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धीरज कुमार ही नहीं, इतने सेलेब्स की सांसें छीन चुका निमोनिया, जानें यह कितनी खतरनाक बीमारी?

धीरज कुमार ही नहीं, इतने सेलेब्स की सांसें छीन चुका निमोनिया, जानें यह कितनी खतरनाक बीमारी?


ओम नम: शिवाय सीरियल के डायरेक्टर धीरज कुमार ने मंगलवार (15 जुलाई) को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वह 80 साल के थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह निमोनिया से जूझ रहे थे. क्या आप जानते हैं कि धीरज कुमार ही नहीं, बल्कि कई सेलेब्स निमोनिया की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं. जानते हैं कि बेहद आम समझी जाने वाली यह बीमारी कितनी खतरनाक है? 

क्या होता है निमोनिया?

बता दें कि फेफड़ों में होने वाले गंभीर इंफेक्शन को निमोनिया कहते हैं, जिससे हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत होती है. भारत में यह बीमारी बच्चों और बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा मानी जाती है. धीरज कुमार जैसे कई सेलिब्रिटी इस बीमारी की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं.

ये सेलेब्स निमोनिया से गंवा चुके जान

धीरज कुमार से पहले भी बॉलीवुड के कई सेलेब्स निमोनिया के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं. इनमें मशहूर फिल्ममेकर यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा, बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार, प्राण और समीर खाखर के नाम भी शामिल हैं.  

कितना खतरनाक होता है निमोनिया?

निमोनिया एक फेफड़ों का इंफेक्शन होता है, जो आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. इस बीमारी में फेफड़ों की वायु कोशिकाएं (Alveoli) सूज जाती हैं और उनमें फ्लूड या मवाद भर जाता है. इससे ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है. यह बीमारी बच्चों, बुजुर्गों, डायबिटीज, अस्थमा या अन्य क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित लोगों में ज्यादा देखी जाती है. कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्तियों के लिए निमोनिया जानलेवा हो सकता है.

कैसे होते हैं निमोनिया के लक्षण?

निमोनिया के लक्षण शुरुआत में सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं, लेकिन यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है. 

  • तेज बुखार और कंपकंपी
  • खांसी, जो बलगम के साथ हो सकती है
  • सांस लेने में कठिनाई या तेजी से सांस आना
  • सीने में दर्द, खासकर खांसने या सांस लेने पर
  • भूख में कमी
  • ज्यादा थकान और कमजोरी
  • बुजुर्गों में भ्रम या अचानक व्यवहार में बदलाव

दुनिया में निमोनिया का हाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का प्रमुख कारण है. अकेले भारत में हर साल 1.27 लाख से अधिक बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है. बुजुर्गों में यह बीमारी अक्सर अन्य बीमारियों के साथ मिलकर जानलेवा बन जाती है.

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