तारक मेहता के जेठालाल की तरह आप भी कम कर सकते हैं कई किलो वजन, ये है आसान तरीका

तारक मेहता के जेठालाल की तरह आप भी कम कर सकते हैं कई किलो वजन, ये है आसान तरीका


Jethalal weight loss Journey: जेठालाल” यानी दिलीप जोशी को आपने हमेशा कॉमिक अंदाज और हल्के-फुल्के लुक में देखा होगा, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसने उनके फैन्स को हैरान कर दिया. जी हां, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के प्यारे जेठालाल ने मात्र 45 दिनों में 16 किलो वजन कम करके सभी को चौंका दिया है.

वजन घटाना जहां कई लोगों के लिए एक मुश्किल और थकाऊ सफर लगता है, वहीं दिलीप जोशी ने दिखा दिया कि अगर सही तरीके और शुरुआत की जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है. खास बात ये है कि उन्होंने कोई डाइट प्लान या महंगे सप्लीमेंट्स नहीं अपनाए, बल्कि एक सिंपल और नेचुरल रूटीन के जरिए ये बदलाव हासिल किया है.

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रोजाना 45 मिनट की दौड़

दिलीप जोशी ने अपने वेट लॉस प्लान की नींव रखी कार्डियो एक्सरसाइज से. उन्होंने हर दिन कम से कम 45 मिनट तक दौड़ने का नियम अपनाया. दौड़ने से न सिर्फ कैलोरी बर्न होती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म भी तेज होता है, जिससे शरीर की चर्बी तेजी से घटने लगती है. अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो तेज वॉक या जॉगिंग से शुरुआत करें और धीरे-धीरे दौड़ने की आदत बनाएं.

खानपान में सादगी और संयम

  • उन्होंने जंक फूड, तली-भुनी चीजें और चीनी से दूरी बना ली
  • उबली सब्जियां
  • सलाद खाना
  • कम तेल वाला खाना
  • ज्यादा पानी और हेल्दी स्नैक्स जैसे ड्राई फ्रूट्स और फल
  • खास बात ये रही कि उन्होंने भूखा रहना नहीं चुना, बल्कि हेल्दी खाकर वजन घटाया
  • मेंटल फिटनेस का रखा खास ख्याल

वजन कम करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी होता है. दिलीप जोशी ने स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए ध्यान और पॉजिटिव सोच को अपनी दिनचर्या में शामिल किया. तनाव से दूर रहकर और लक्ष्य पर फोकस करके उन्होंने पूरे सफर को आसान बना दिया.

लगातार और अनुशासित दिनचर्या

वजन घटाने के इस सफर में सबसे अहम रहा, डिसिप्लिन. कोई भी बदलाव एक दिन में नहीं होता. उन्होंने हर दिन एक रूटीन को फॉलो किया है. दिलीप जोशी की यह फिटनेस जर्नी हम सभी के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने दिखा दिया कि अगर सच्ची लगन, नियमित एक्सरसाइज और संयमित खानपान हो, तो वजन घटाना नामुमकिन नहीं. अगर आप भी अपने पुराने कपड़े फिर से पहनना चाहते हैं, खुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करना चाहते हैं, तो आज से ही इस आसान व फिटनेस-फ्रेंडली रूटीन की शुरुआत करें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इस मशहूर यूट्यूबर ने जमकर खाए गुलाब जामुन, फिर भी घटा लिया 40 किलो वजन!

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कॉमेडी वीडियो से घर-घर में पहचान बनाने वाले मशहूर यूट्यूबर आशीष चंचलानी ने हाल ही में अपने जबरदस्त वेट लॉस ट्रांसफॉर्मेशन से सबको चौंका दिया है. उन्होंने केवल 6 महीने में 40 किलो वजन कम किया है और सबसे खास बात यह है कि इस दौरान उन्होंने अपनी पसंदीदा मिठाई गुलाब जामुन को भी नहीं छोड़ा! तो आखिर क्या है आशीष चंचलानी के इस अनोखे वेट लॉस का राज? आइए जानते हैं.

आशीष चंचलानी का वजन पहले 130 किलो था और वह अपनी खराब सेहत को लेकर चिंतित थे. उन्होंने 30 साल की उम्र से पहले खुद को फिट करने का लक्ष्य रखा था. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि वे अपने मोटापे से निराश थे और खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे थे. इसी के बाद उन्होंने अपनी फिटनेस जर्नी शुरू करने का फैसला किया.

पसंद की चीजें नहीं छोड़ीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से खाईं

आमतौर पर लोग वजन घटाने के लिए अपनी पसंदीदा चीजों को पूरी तरह से छोड़ देते हैं, खासकर मिठाइयों को. लेकिन आशीष चंचलानी ने इस मिथक को तोड़ दिया. उन्होंने खुलासा किया कि वह हर हफ्ते गुलाब जामुन और रस मलाई जैसी अपनी पसंदीदा मिठाइयां खाते थे, और अभी भी खाते हैं. उनका कहना है कि वजन घटाने के लिए किसी भी चीज को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती, बल्कि पोर्शन कंट्रोल और कैलोरी मैनेजमेंट महत्वपूर्ण है.

कैलोरी डेफिसिट और संतुलित डाइट का कमाल

आशीष चंचलानी ने बताया कि उनके वजन घटाने का मुख्य कारण खाना नहीं, बल्कि ओवरईटिंग था. उन्होंने कैलोरी डेफिसिट (जितनी कैलोरी आप बर्न करते हैं, उससे कम कैलोरी खाना) के सिद्धांत पर काम किया. उनकी डाइट प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट्स और कार्बोहाइड्रेट का संतुलित मिश्रण थी.

  • नाश्ता: छह उबले अंडे या एक ऑमलेट के साथ अंकुरित दालें (स्प्राउट्स).
  • दोपहर का भोजन (लंच): 1 रोटी के साथ 200 ग्राम चिकन, और साथ में खीरे व अजवाइन का जूस.
  • शाम (लगभग 6 बजे): व्हे प्रोटीन शेक.
  • रात का खाना (लगभग 8 बजे): केवल प्रोटीन रिच चिकन (बिना किसी कार्ब्स के).

डाइट में किया यह बदलाव

आशीष ने अपनी डाइट से तले हुए और हाई-कार्ब फूड्स को हटा दिया. उन्होंने बताया कि वे हर चीज को तौलकर खाते थे, ताकि कैलोरी का सही हिसाब रख सकें. अगर वे गुलाब जामुन खाते थे, तो वे अपनी दैनिक कैलोरी मेंटेनेंस से कम खाते थे, ताकि कुल कैलोरी डेफिसिट में रहें. उदाहरण के लिए, दो गुलाब जामुन में लगभग 350 कैलोरी होती हैं और अगर उनकी दैनिक खपत 1800 कैलोरी थी (जो उनके शरीर की ज़रूरत से 1000 कैलोरी कम थी), तो भी वे कैलोरी डेफिसिट में रहते थे.

वर्कआउट रूटीन

डाइट के साथ-साथ आशीष ने अपने वर्कआउट रूटीन पर भी पूरा ध्यान दिया. वह हर दिन करीब 4 घंटे जिम करते थे, जिसमें कार्डियो से लेकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग तक सब कुछ शामिल था. बॉक्सिंग, बैटलिंग रोप्स, साइकलिंग और रनिंग भी उनके वर्कआउट का हिस्सा थे.

आशीष चंचलानी का मानना है कि वजन घटाना सिर्फ एक फिजिकल प्रोसेस नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक और भावनात्मक यात्रा भी है. उन्होंने अपने फैंस को यह संदेश दिया कि वजन कम करने का मकसद सिर्फ पतला होना नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी जीना होना चाहिए. उनका कहना है कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आप वजन कम क्यों करना चाहते हैं, और यह फैसला अपने लिए होना चाहिए, न कि दूसरों के कहने पर.

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Nipah Virus: केरल में दूसरी मौत से मचा हड़कंप, मंडरा रहा निपाह वायरस का खतरा

Nipah Virus: केरल में दूसरी मौत से मचा हड़कंप, मंडरा रहा निपाह वायरस का खतरा


Nipah Virus Death: केरल एक बार फिर निपाह वायरस के खतरे की चपेट में है. एक ऐसा वायरस जो ना केवल जानलेवा है, बल्कि इसकी पहचान और नियंत्रण भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. आमतौर पर मानसून के समय जब संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है, तब निपाह जैसी गंभीर बीमारी का सामने आना सभी के लिए चेतावनी से कम नहीं है. हाल ही में केरल के पलक्कड़ जिले से एक 58 साल के व्यक्ति की मौत हो गई है. हालांकि सरकार ने तुरंत कांटैक्ट ट्रेसिंग और फील्ड लेवल सर्विलांस को तेज कर दिया है. कुछ दिन पहले इस बीमारी के चलते मलप्पुरम जिले में एक 18 साल के बच्चे की मौत हुई थी

बता दें, केरल के पलक्कड़ जिले के रहने वाले 57 वर्षीय व्यक्ति की 12 जुलाई को मृत्यु हुई थी. उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां इलाज के दौरान निपाह वायरस से संक्रमित होने का संदेह बताया गया था. वहीं स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के अनुसार, मरीज के सैंपल मंजेरी मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए भेजे गए थे, जहां निपाह पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई. लेकिन सरकार अब भी पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से अंतिम पुष्टि का इंतजार कर रही है. इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि, कई टीमें मजबूत की गई हैं और डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है. पुणे से रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.

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सरकार ने लोगों से की अपील

मलप्पुरम और पलक्कड़ जिले के लोगों से बिना आवश्यकता अस्पताल न जाने की अपील की गई है. साथ ही अस्पताल जाने वाले मरीजों और हेल्थ वर्कर्स के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग ने पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर, वायनाड और त्रिशूर जिलों में स्थित अस्पतालों को विशेष निपाह अलर्ट जारी किया है। सभी मेडिकल संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि, तेज बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षणों वाले मरीजों की तुरंत सूचना दी जाए.

निपाह वायरस क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है जो जानवरों से इंसानों में फैलती है. यह संक्रमित भोजन, जानवरों या सीधा मानव-से-मानव संपर्क से भी फैल सकता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल हैं.

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विटामिन B12 की कमी क्यों मानी जाती है इतनी खतरनाक? जानिए शरीर को कैसे होता है नुकसान

विटामिन B12 की कमी क्यों मानी जाती है इतनी खतरनाक? जानिए शरीर को कैसे होता है नुकसान


विटामिन बी 12 को कोबालामिन भी कहा जाता है, यह हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, डीएनए सिंथेसाइसिस और नर्वस सिस्टम के समुचित कार्य के लिए महत्वपूर्ण है. इसकी कमी को खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है.

हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है, और उनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण विटामिन बी12 है. यह विटामिन मुख्य रूप से पशु उत्पादों में पाया जाता है, इसलिए शाकाहारियों और वीगन लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक होता है. लेकिन यह सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं है; कई बार शरीर इसे ठीक से अर्ब्जाव भी नहीं कर पाता.

विटामिन बी12 की कमी क्यों है खतरनाक?

विटामिन बी12 की कमी को खतरनाक मानने के कई कारण हैं, क्योंकि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करती है.

  • नर्व डैमेज: विटामिन बी12 तंत्रिकाओं को घेरने वाली सुरक्षात्मक परत, माइलिन के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक है. इसकी कमी से माइलिन क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे तंत्रिका क्षति होती है.
  • लक्षण: हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी जलन, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, चलने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना (अटैक्सिया), और शरीर के अंगों की स्थिति का सही अनुमान न लगा पाना.
  • खतरा: यदि लंबे समय तक इसका इलाज न किया जाए तो यह तंत्रिका क्षति अपरिवर्तनीय हो सकती है.

मेगालोब्लास्टिक एनीमिया

विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. इसकी कमी होने पर शरीर में बड़ी, असामान्य और अपरिपक्व लाल रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं, जो ऑक्सीजन को कुशलता से नहीं ले जा पातीं.

  • लक्षण: अत्यधिक थकान, कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना या पीलिया होना, दिल की धड़कन का तेज होना.
  • खतरा: गंभीर एनीमिया हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, जिससे हृदय रोग या हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ जाता है.

कॉग्निटिव और मेंटल समस्याएं

विटामिन बी12 मस्तिष्क के स्वास्थ्य और कार्य के लिए महत्वपूर्ण है. इसकी कमी से न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन में बाधा आ सकती है.

  • लक्षण: याददाश्त कमजोर होना, सोचने-समझने में कठिनाई (मेंटल फॉग), भ्रम, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, और गंभीर मामलों में डिमेंशिया और पैरानोइया जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं.
  • खतरा: यदि लंबे समय तक अनुपचारित रहे तो ये संज्ञानात्मक गिरावट भी अपरिवर्तनीय हो सकती है.

पाचन संबंधी समस्याएं

  • विटामिन बी12 की कमी से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी दिक्कतें जैसे दस्त, कब्ज, पेट दर्द, भूख न लगना, मतली (उबकाई) और उल्टी हो सकती है.
  • खतरा: ये समस्याएं पोषण संबंधी अन्य कमियों को जन्म दे सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं.
  • अन्य शारीरिक लक्षण: जीभ में सूजन और दर्द (ग्लोसाइटिस), मुंह के छाले, बाल झड़ना, त्वचा का सूखापन, और नाखूनों का भंगुर होना भी इसकी कमी के संकेत हो सकते हैं.

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

  • शाकाहारी और वीगन: चूंकि विटामिन बी12 मुख्य रूप से मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है. इसलिए इन आहारों का सेवन न करने वालों में कमी का खतरा अधिक होता है.
  • बुजुर्ग व्यक्ति: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में विटामिन बी12 को अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है.
  • पाचन संबंधी विकार वाले लोग: क्रोहन रोग, सीलिएक रोग, या गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी करा चुके लोगों में अवशोषण की समस्या हो सकती है.
  • कुछ दवाएं लेने वाले लोग: कुछ दवाएं, जैसे प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (एसिडिटी की दवाएं) और मेटफॉर्मिन (मधुमेह की दवा), विटामिन बी12 के अर्ब्जाब्शन को प्रभावित कर सकती हैं.
  • पर्निशियस एनीमिया: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर इंट्रिन्सिक फैक्टर नहीं बना पाता.

ये हैं बचाव और उपचार

विटामिन बी12 की कमी का निदान ब्लड टेस्ट से किया जा सकता है. इसका उपचार आमतौर पर विटामिन बी12 सप्लीमेंट्स के माध्यम से किया जाता है. आहार में बी12 से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, मांस और फोर्टिफाइड अनाज को शामिल करना भी महत्वपूर्ण है.
विटामिन बी12 की कमी एक गंभीर स्थिति है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. इसके लक्षणों को पहचानना और समय पर उपचार कराना महत्वपूर्ण है, ताकि नुकसान से बचा जा सके.

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मानसून में गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ, डाइट और सुरक्षा, जानिए कैसे करें

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Monsoon Pregnancy Care Tips: बरसात की पहली फुहारें जहां आम लोगों के लिए सुकून और ठंडक लाती हैं, वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए यह मौसम थोड़ा ज़्यादा सतर्कता मांगता है. चाय और पकौड़ों की खुशबू तो अच्छी लगती है, लेकिन नमी, कीचड़, बैक्टीरिया और वायरल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में एक मां बनने वाली महिला के लिए अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य का ख्याल रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो जाता है. इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी इंफेक्शन, डिहाइड्रेशन या पोषण की कमी जैसी समस्याएं खड़ी कर सकती है.

डॉ. रूबी सिद्दीकी बताती हैं कि, मानसून के मौसम में गर्भवती महिलाओं को खास एहतियात बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मौसम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को चुनौती देता है. बारिश की नमी, वातावरण में बढ़ी हुई गंदगी और बैक्टीरिया और मौसम में अचानक बदलाव गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं.

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स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान

  • स्वच्छता सबसे ज़रूरी है. बारिश के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हाथ धोने, कपड़े बदलने और शरीर को साफ-सुथरा रखने की आदत जरूर बनाए रखें.
  • भीगने से बचें, बारिश में भीगने से सर्दी-जुकाम या वायरल हो सकता है, जिससे गर्भवती महिला और भ्रूण दोनों पर असर पड़ सकता है.
  • मच्छरों से बचाव करें, मानसून में मलेरिया और डेंगू जैसे मच्छरजनित रोग आम हो जाते हैं. पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें.

पोषण से भरपूर चीजें खाएं

  • हाइजीनिक खाना खाएं. बाहर का या लंबे समय से रखा हुआ भोजन खाने से बचें. ताजा, घर पर बना हुआ और गर्म खाना खाएं.
  • फलों और सब्ज़ियों को अच्छे से धोएं. मिट्टी और कीड़े बारिश में सब्ज़ियों पर ज़्यादा होते हैं, जो पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
  • पानी उबालकर पिएं. साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं या फ़िल्टर का प्रयोग करें.
  • इम्युनिटी बूस्ट करने वाले फूड लें. जैसे तुलसी, हल्दी, दालचीनी, नींबू, विटामिन C युक्त फल और सूखे मेवे.
  • कैफीन और तली चीजों से परहेज करें. ये शरीर में जलन, एसिडिटी और थकावट बढ़ा सकती हैं.

सुरक्षा के आसान उपाय

  • फिसलन से सावधान रहें. घर और बाहर दोनों जगह फर्श या रास्तों पर फिसलने का खतरा रहता है. ऐसे में ग्रिप वाले जूते पहनें और सावधानी से चलें.
  • भरपूर आराम करें. मौसम चाहे कैसा भी हो, नींद और मानसिक शांति गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद ज़रूरी होती है.
  • डॉक्टर से संपर्क में रहें. अगर सर्दी, खांसी, बुखार या उल्टी जैसा कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

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