ये 5 फूड खा लिए तो लोहा लाट हो जाएगी किडनी, जानें बॉडी को कितने मिलेंगे फायदे?

ये 5 फूड खा लिए तो लोहा लाट हो जाएगी किडनी, जानें बॉडी को कितने मिलेंगे फायदे?


‘हमने यमन के शेख से बात की वह तो…’, भारतीय नर्स की फांसी रुकवाने के लिए क्या-क्या किया, सरकार ने SC को बताया



Source link

सिगरेट जितने खतरनाक हैं जलेबी, समोसा और लड्डू… हेल्थ मिनिस्ट्री ने जारी की डराने वाली एडवाइजर

सिगरेट जितने खतरनाक हैं जलेबी, समोसा और लड्डू… हेल्थ मिनिस्ट्री ने जारी की डराने वाली एडवाइजर


समोसा-जलेबी और लड्डू खाने के शौकीनों को अब अलर्ट मोड में आने की जरूरत है. दरअसल, अब खाने-पीने के हर आइटम पर एक वॉर्निंग स्लिप लगी होगी, जिस पर उस आइटम में मौजूद शुगर और ऑयल की जानकारी दी जाएगी. दरअसल, हेल्थ मिनिस्ट्री ने देशभर के सभी केंद्रीय संस्थानों को अहम निर्देश दिया है. इसमें कहा गया है कि वे फूड आइटम्स पर ऑयल और शुगर बोर्ड लगाएं, जिससे आपको नाश्ते में छिपे फैट और शुगर की सही जानकारी मिल सके. 

क्यों लिया गया यह फैसला?

जानकारी के मुताबिक, हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार की है. इसमें सामने आया है कि साल 2050 तक देश में 44.9 करोड़ लोग मोटापे या ज्यादा वजन की दिक्कत से पीड़ित होंगे. ऐसे में भारत अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश बन जाएगा, जो मोटापे की समस्या से जूझ रहा है. वर्तमान हालात की बात करें तो भारत में इस वक्त हर पांच में से एक शख्स ओवरवेट की दिक्कत से जूझ रहा है. ऐसे में लोगों को जंक फूड के प्रति जागरूक करने के मकसद से यह कदम उठाने का फैसला लिया गया है, जिसे शुरुआत में सरकारी संस्थानों में लागू किया गया है. फूड आइटम्स पर ऑयल और शुगर के इन बोर्ड्स से लोगों को चेतावनी मिलेगी कि वह कितना अनहेल्दी फूड खा रहे हैं.

भारत में कितने लोग मोटापे के शिकार?

World Health Organization (WHO) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 60 पर्सेंट से ज्यादा लोग मोटापे या अधिक वजन से प्रभावित हैं. वहीं, डायबिटीज के मामले 2030 तक 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर सकते हैं. यही वजह है कि हेल्थ मिनिस्ट्री ने खाद्य और औषधि प्रशासन (FSSAI) के साथ मिलकर नई नीति तैयार की है, जिसके तहत इन फूड आइटम्स की पैकेजिंग पर वॉर्निंग लेबल लगाना अनिवार्य किया गया है. 

सिगरेट जितने खतरनाक हैं लड्डू-जलेबी और समोसा?

एम्स नागपुर के अधिकारियों ने बताया है कि हेल्थ मिनिस्ट्री से इस संबंध में आदेश मिला है. इसके बाद कैफेटेरिया और पब्लिश प्लेसेज पर वॉर्निंग बोर्ड्स लगाए जाएंगे. इसके अलावा जांच के दायरे में सिर्फ समोसा-जलेबी और लड्डू ही नहीं रहेंगे, बल्कि वड़ा पाव और पकौड़ों को भी इस लिस्ट में जोड़ा जाएगा. वहीं, कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की नागपुर ब्रांच के चीफ डॉ. अमर आमले ने इस मसले पर चीजें क्लियर कीं. उन्होंने कहा कि शुगर और ट्रांस फैट नए जमाने की सिगरेट और तंबाकू हैं. शुगर और ऑयल की वजह से ये फूड आइटम्स स्मोकिंग और टोबैको जितने ही खतरनाक साबित हो रहे हैं. अब जो फूड आइटम्स जितना नुकसानदायक होगा, उस पर उतनी ही खतरनाक लेबलिंग की जाएगी. लोगों को यह पता होना चाहिए कि वे क्या खा रहे हैं.

ये भी पढ़ें: महिलाओं के लिए खतरे की घंटी, हार्ट और लिवर में जहर घोल सकते हैं ये 5 फेमस सप्लीमेंट्स!

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

नींद में भी दिमाग में चलता रहता है कुछ ना कुछ, डॉक्टर से समझिए क्या है प्रॉब्लम?

नींद में भी दिमाग में चलता रहता है कुछ ना कुछ, डॉक्टर से समझिए क्या है प्रॉब्लम?


How to Relax Mind During Sleep: रात का वक्त था, चारों ओर सन्नाटा पसरा था. पंखा घूम रहा था, मोबाइल साइलेंट था, सब कुछ ठीक था, बस मेरा दिमाग नहीं. नींद तो आई थी पर ऐसा लग रहा था जैसे मन के अंदर कोई फिल्म चल रही हो, कभी बीती बातें, कभी आने वाली परेशानियां और कभी बेवजह की सोच. सुबह उठते ही थकान महसूस हुई जैसे पूरी रात कोई मैराथन दौड़ ली हो. क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? अगर नींद के दौरान भी दिमाग शांत नहीं रहता, तो यह सिर्फ थकान या तनाव की बात नहीं, बल्कि यह एक मानसिक और शारीरिक संकेत है.

नींद के दौरान दिमाग क्यों रहता है एक्टिव?

डॉ. कन्हैया लाल बताते हैं कि, नींद में भी दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता, लेकिन अगर विचारों की रेलगाड़ी लगातार चलती रहे, तो यह रेस्टफुल स्लीप नहीं कहलाती. इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य, हार्मोनल बैलेंस और अगली सुबह की ऊर्जा पर पड़ता है.

ये भी पढ़े- अगर खड़े होते ही आते हैं चक्कर तो इस समस्या को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये बीमारी

क्या हो सकते हैं कारण?

अनकंट्रोल्ड स्ट्रेस

दिनभर का तनाव और जिम्मेदारियां अगर मन में दबी रह जाती हैं, तो रात को ये सिर उठाने लगती हैं.

ओवरथिंकिंग हैबिट

जो लोग हर बात को गहराई से सोचते हैं, उन्हें सोते समय भी विचारों से छुटकारा नहीं मिल पाता.

डिजिटल ओवरलोड

मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया से दिनभर भरा हुआ दिमाग रात को भी एक्टिव रहता है.

अनसुलझे इमोशन्स

कभी-कभी हमारे दिल की बातें भी नींद में चैन नहीं लेने देतीं, जैसे कोई पुरानी याद या अधूरी चाह.

क्या है इसका असर?

  • नींद अधूरी रह जाती है
  • सुबह सिर भारी महसूस होता है
  • मूड चिड़चिड़ा रहता है
  • याददाश्त और एकाग्रता में कमी आती है

कैसे मिलेगी राहत

  • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएं
  • गर्म दूध या हर्बल चाय पीकर आराम करें
  • दिनभर की टेंशन को एक डायरी में लिख दें
  • 5 मिनट मेडिटेशन करें
  • एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें

दिमाग का एक्टिव रहना बुरा नहीं, लेकिन अगर वह हमें नींद में भी चैन नहीं लेने दे तो वक्त है संभलने का. याद रखें, अच्छी नींद सिर्फ आराम नहीं देती, बल्कि यह आपकी मानसिक सेहत की असली चाबी है.

ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

कहीं शुगर-फ्री के नाम पर सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे आप, जानिए कैसे पहुंचा रही नुकसान

कहीं शुगर-फ्री के नाम पर सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे आप, जानिए कैसे पहुंचा रही नुकसान


आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए चीनी छोड़कर शुगर-फ्री टैबलेट्स या शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स का यूज करने लगे हैं. खासकर जो लोग डायबिटीज या वजन बढ़ने समस्या से रहते हैं, वे अक्सर इन नकली  शुगर-फ्री चीजों पर भरोसा कर लेते हैं. वहीं एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नेचुरल चीजें हमेशा बेहतर होती हैं. आजकल शुगर-फ्री डाइट को बहुत बढ़ावा मिल रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये चीजें आपकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान भी पहुंचा सकती हैं.

 

अगर आप शुगर-फ्री चीजों का यूज कर रहे हैं तो थोड़ा ध्यान रखें. इनका ज्यादा और बिना जानकारी के यूज आपकी सेहत को फायदा देने की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि कहीं आप शुगर-फ्री के नाम पर सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे और ये आपको नुकसान कैसे पहुंचा रही है.

शुगर-फ्री से होने वाले नुकसान

पाचन तंत्र पर असर – रिसर्च में पाया गया है कि शुगर-फ्री चीजें हमारे पाचन पर बुरा असर डालती हैं. इससे भूख कम लगती है और शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता है.

 

कमजोरी और एनर्जी की कमी – शुगर-फ्री चीजों के कारण भूख कम लगती है, जब भूख नहीं लगती और शरीर को सही कैलोरी नहीं मिलती, तो थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है.

 

ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारी – डायबिटीज के साथ अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर भी है, तो शुगर-फ्री का यूज खतरनाक हो सकता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हार्ट की बीमारियों का खतरा भी रहता है. 

 

कैंसर का खतरा – कई शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में सैक्रिन नाम का केमिकल होता है, जो शरीर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. 

 

आंखों पर बुरा असर – ज्यादातर जो लोग लंबे समय तक शुगर-फ्री चीजें खाते हैं तो उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है. 

 

क्या शुगर-फ्री डाइट फायदेमंद हो सकती है?

आजकल शुगर-फ्री डाइट काफी ज्यादा ट्रेंड में है और लोग इस सबसे ज्यादा फॉलो कर रहे हैं. लोग सोचते हैं कि इससे वजन घटेगा, ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगा और हार्ट हेल्दी रहेगा. इस डाइट में चीनी वाली चीजों जैसे मिठाइयां, सॉफ्ट ड्रिंक, बिस्किट्स सभी को हटा दिया जाता है और मिठास बनाए रखने के लिए शुगर सब्स्टिट्यूट्स जैसे आर्टिफिशियल या नैचुरल स्वीटनर्स का यूज किया जाता है. कुछ मामलों में, शुगर-फ्री डाइट फायदेमंद 

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

महिलाओं के लिए खतरे की घंटी, हार्ट और लिवर में जहर घोल सकते हैं ये 5 फेमस सप्लीमेंट्स!

महिलाओं के लिए खतरे की घंटी, हार्ट और लिवर में जहर घोल सकते हैं ये 5 फेमस सप्लीमेंट्स!


एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने सोशल मीडिया पर एक फिटनेस इन्फ्लुएंसर की सलाह पर हर दिन 2,250 मिलीग्राम हल्दी लेना शुरू किया. कुछ ही दिनों में उसकी हालत बिगड़ गई और उसे गंभीर लिवर इंजरी के कारण अस्पताल में एडमिट कराना पड़ गया.

डॉक्टरों का कहना है कि उसके लिवर एंजाइम नॉर्मल से 60 गुना ज्यादा थे. उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी थी कि अगर थोड़ी और देर हो जाती तो लिवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ता. हालांकि, एक्सपर्ट कहते हैं कि खाने में हल्दी का इस्तेमाल सुरक्षित है, लेकिन जब इसे सप्लीमेंट के रूप में ज्यादा मात्रा में लिया जाता है तो यह लिवर के लिए खतरनाक हो सकता है.

डॉक्टरों का कहना है कि उसके लिवर एंजाइम नॉर्मल से 60 गुना ज्यादा थे. उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी थी कि अगर थोड़ी और देर हो जाती तो लिवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ता. हालांकि, एक्सपर्ट कहते हैं कि खाने में हल्दी का इस्तेमाल सुरक्षित है, लेकिन जब इसे सप्लीमेंट के रूप में ज्यादा मात्रा में लिया जाता है तो यह लिवर के लिए खतरनाक हो सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 150 पाउंड वजन वाले व्यक्ति के लिए रोजाना 200 मिलीग्राम हल्दी सेफ है, लेकिन कई सप्लीमेंट्स इससे 10 गुना ज्यादा डोज देते हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया ज्यादा मात्रा में हल्दी लेना लिवर को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है और खून पतला करने वाली दवाओं के साथ मिलकर ब्लीडिंग या स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 150 पाउंड वजन वाले व्यक्ति के लिए रोजाना 200 मिलीग्राम हल्दी सेफ है, लेकिन कई सप्लीमेंट्स इससे 10 गुना ज्यादा डोज देते हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया ज्यादा मात्रा में हल्दी लेना लिवर को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है और खून पतला करने वाली दवाओं के साथ मिलकर ब्लीडिंग या स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकता है.

ग्रीन टी एक्सट्रेक्ट वजन घटाने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए काफी पसंद किया जाता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा से लिवर डैमेज, हेपेटाइटिस और कभी-कभी लिवर ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है. खासतौर पर 800 मिलीग्राम से ज्यादा ईजीसीजी लेना नुकसानदायक हो सकता है. इसमें मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर और हार्टबीट बढ़ा सकता है.

ग्रीन टी एक्सट्रेक्ट वजन घटाने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए काफी पसंद किया जाता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा से लिवर डैमेज, हेपेटाइटिस और कभी-कभी लिवर ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है. खासतौर पर 800 मिलीग्राम से ज्यादा ईजीसीजी लेना नुकसानदायक हो सकता है. इसमें मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर और हार्टबीट बढ़ा सकता है.

कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए ली जाने वाली हाई डोज की नियासिन दवाएं लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है. खासकर वे दवाएं जो जो धीरे-धीरे असर करती है. इससे लिवर एंजाइम बढ़ सकते हैं और कुछ मामलों में लिवर फेल भी हो सकता है. यह गुड कोलेस्ट्रॉल तो बढ़ाती है, लेकिन ज्यादा लेने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए ली जाने वाली हाई डोज की नियासिन दवाएं लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है. खासकर वे दवाएं जो जो धीरे-धीरे असर करती है. इससे लिवर एंजाइम बढ़ सकते हैं और कुछ मामलों में लिवर फेल भी हो सकता है. यह गुड कोलेस्ट्रॉल तो बढ़ाती है, लेकिन ज्यादा लेने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

योहिम्बाइन योहिम्बे की छाल से बनता है. आमतौर पर इसका इस्तेमाल वजन घटाने के लिए होता है, लेकिन यह नर्वस सिस्टम और हार्ट पर गंभीर असर डाल सकता है. इसके ओवरडोज लेने से दिल तेजी से धड़कने लगता है. चक्कर महसूस होना, दौरे पड़ना या यहां तक कि जानलेवा कंडीशन भी बन सकती है. अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है तो इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

योहिम्बाइन योहिम्बे की छाल से बनता है. आमतौर पर इसका इस्तेमाल वजन घटाने के लिए होता है, लेकिन यह नर्वस सिस्टम और हार्ट पर गंभीर असर डाल सकता है. इसके ओवरडोज लेने से दिल तेजी से धड़कने लगता है. चक्कर महसूस होना, दौरे पड़ना या यहां तक कि जानलेवा कंडीशन भी बन सकती है. अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है तो इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

लाल खमीरी चावल कोलेस्ट्रॉल घटाने में फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसमें मौजूद कुछ तत्व जैसे मोनाकोलिन्स और सिट्रिनिन लिवर और किडनी को  नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना और कभी-कभी लिवर फेल्योर जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो सकती हैं.

लाल खमीरी चावल कोलेस्ट्रॉल घटाने में फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसमें मौजूद कुछ तत्व जैसे मोनाकोलिन्स और सिट्रिनिन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना और कभी-कभी लिवर फेल्योर जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो सकती हैं.

Published at : 14 Jul 2025 08:22 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

हेल्थ वेब स्टोरीज



Source link

क्या सच में जहर बन जाता है अंकुरित आलू या प्याज? जानिए शरीर को कैसे कर सकता है नुकसान

क्या सच में जहर बन जाता है अंकुरित आलू या प्याज? जानिए शरीर को कैसे कर सकता है नुकसान


सोलनिन की अधिक मात्रा से पेट में दर्द, ऐंठन, मतली (उबकाई), उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, सोलनिन का अत्यधिक सेवन सिरदर्द, चक्कर आना, बुखार, लो ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण पैदा कर सकता है. बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत भी पैदा कर सकता है और रेयर केसेज में कोमा तक की कंडीशन भी बन सकती है.

आलू अपने पोषक तत्वों का उपयोग अंकुरों को विकसित करने में कर देता है, जिससे उसकी पोषण गुणवत्ता जैसे विटामिन और मिनरल्स कम हो जाते हैं. इसके अलावा अंकुरित आलू में स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ जाता है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ा सकता है.

आलू अपने पोषक तत्वों का उपयोग अंकुरों को विकसित करने में कर देता है, जिससे उसकी पोषण गुणवत्ता जैसे विटामिन और मिनरल्स कम हो जाते हैं. इसके अलावा अंकुरित आलू में स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ जाता है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ा सकता है.

अगर आलू में छोटे और हल्के अंकुर निकले हैं और आलू ज्यादा नरम या हरा नहीं हुआ है तो आप अंकुरों और हरे हिस्से को काटकर हटा सकते हैं. छिलका उतारकर और अच्छी तरह पकाकर इसके हानिकारक यौगिकों का लेवल कुछ हद तक कम किया जा सकता है. यदि आलू बहुत ज्यादा अंकुरित और नरम हो गया है या उसमें हरापन ज्यादा है तो उसे फेंक देना ही सही ऑप्शन है.

अगर आलू में छोटे और हल्के अंकुर निकले हैं और आलू ज्यादा नरम या हरा नहीं हुआ है तो आप अंकुरों और हरे हिस्से को काटकर हटा सकते हैं. छिलका उतारकर और अच्छी तरह पकाकर इसके हानिकारक यौगिकों का लेवल कुछ हद तक कम किया जा सकता है. यदि आलू बहुत ज्यादा अंकुरित और नरम हो गया है या उसमें हरापन ज्यादा है तो उसे फेंक देना ही सही ऑप्शन है.

अंकुरित प्याज आलू जितना जहरीला नहीं होता. प्याज में सोलनिन नहीं होता, लेकिन इसमें सल्फर यौगिक होते हैं. ज्यादा अंकुरित प्याज खाने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी हल्की दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे गैस या पेट में हल्की गड़बड़ी हो सकती है.

अंकुरित प्याज आलू जितना जहरीला नहीं होता. प्याज में सोलनिन नहीं होता, लेकिन इसमें सल्फर यौगिक होते हैं. ज्यादा अंकुरित प्याज खाने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी हल्की दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे गैस या पेट में हल्की गड़बड़ी हो सकती है.

अंकुरित होने पर प्याज का स्वाद थोड़ा कड़वा हो सकता है और इसकी बनावट नरम या रबर जैसी हो सकती है. यदि प्याज ज्यादा समय से रखा है और उसमें अंकुर निकल आए हैं तो उस पर फफूंदी लगने या सड़ने की आशंका बढ़ जाती है. फफूंदी लगा या सड़ा हुआ प्याज खाना फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है.

अंकुरित होने पर प्याज का स्वाद थोड़ा कड़वा हो सकता है और इसकी बनावट नरम या रबर जैसी हो सकती है. यदि प्याज ज्यादा समय से रखा है और उसमें अंकुर निकल आए हैं तो उस पर फफूंदी लगने या सड़ने की आशंका बढ़ जाती है. फफूंदी लगा या सड़ा हुआ प्याज खाना फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है.

अगर प्याज में छोटे अंकुर निकले हैं और प्याज बाकी हिस्सों से ठोस और साफ है तो आप अंकुरों को काटकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, यदि प्याज बहुत नरम हो गया है, सड़ा हुआ है या उस पर फफूंदी लगी है तो उसे फेंक देना चाहिए.

अगर प्याज में छोटे अंकुर निकले हैं और प्याज बाकी हिस्सों से ठोस और साफ है तो आप अंकुरों को काटकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, यदि प्याज बहुत नरम हो गया है, सड़ा हुआ है या उस पर फफूंदी लगी है तो उसे फेंक देना चाहिए.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आलू और प्याज को कभी एक साथ नहीं रखना चाहिए. प्याज से निकलने वाली एथिलीन गैस आलू के अंकुरण की प्रक्रिया को तेज कर देती है, जिससे आलू जल्दी खराब हो जाते हैं. इन्हें ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर अलग-अलग स्टोर करना चाहिए.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आलू और प्याज को कभी एक साथ नहीं रखना चाहिए. प्याज से निकलने वाली एथिलीन गैस आलू के अंकुरण की प्रक्रिया को तेज कर देती है, जिससे आलू जल्दी खराब हो जाते हैं. इन्हें ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर अलग-अलग स्टोर करना चाहिए.

image 1

image 1

Published at : 14 Jul 2025 07:34 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

हेल्थ वेब स्टोरीज



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp