अगर खड़े होते ही आते हैं चक्कर तो इस समस्या को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये बीमारी

अगर खड़े होते ही आते हैं चक्कर तो इस समस्या को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये बीमारी


आमतौर पर कई बार देखा जाता है कि लोग लेटने या लंबे समय तक बैठने के बाद जैसे ही अचानक खड़े होते हैं उन्हें चक्कर आने लगता है. इसके अलावा आंखों के सामने धुंधलापन छा जाता है या कमजोरी महसूस होने लगती है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. एक्सपर्ट इसे एक प्रकार का लो ब्लड प्रेशर मानते हैं जिसे मेडिकल भाषा में ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन या पोस्चरल हाइपोटेंशन कहा जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताएंगे कि खड़े होते ही चक्कर क्यों आते हैं इसके लक्षण क्या है और इसके बचाव क्या हो सकते हैं.

खड़े होते ही क्यों गिरता है ब्लड प्रेशर

कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति अचानक खड़ा होता है तो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण शरीर का खून पैरों में जमा हो जाता है. जिससे दिल की ओर लौटने वाला ब्लड कम हो जाता है और अचानक ब्लड प्रेशर गिरने लगता है इससे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहते हैं. दिल और ब्लड सेल्स इस कमी की भरपाई के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं. जिसमें दिल तेजी से धड़कने लगता है और सेल्स सिकुड़ती है ताकि ब्लड सर्कुलेशन बना रहे लेकिन जिन लोगों में यह प्रतिक्रिया कमजोर होती है उन्हें चक्कर या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती है.

किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा

एकदम से उठने के बाद चक्कर या बेहोशी जैसी समस्याओं का खतरा आमतौर पर बुजुर्गों को ज्यादा होता है. इसके अलावा डिहाइड्रेशन की कमी से जूझ रहे या फिर कुछ खास दवाई लेने वाले लोगों को भी इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है.

क्या हैं इसके लक्षण

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षण में सबसे ज्यादा आम लक्षण चक्कर आना या सिर का घूमना होता है. इसके अलावा आंखों का धुंधलापन भी इसका लक्षण होता है. वहीं अचानक कमजोरी, थकावट, जी मिचलाना भी इसका लक्षण हो सकता है. इनके अलावा गंभीर स्थिति में बेहोश हो जाना भी इसका लक्षण होता है. ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन में यह सभी लक्षण खड़े होते ही शुरू हो जाते हैं और बैठने या लेटने के बाद थोड़ी देर में ठीक हो जाते हैं. लेकिन बार-बार ऐसा होना खतरे का संकेत हो सकता है.

जाने कब डॉक्टर को दिखाना हो सकता है जरूरी

डॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी को बार-बार बेहोशी आती है या बार-बार खड़े होते ही चक्कर आते हैं तो इसे हल्के में न लें. यह किसी गंभीर मेडिकल समस्या का संकेत हो सकता है. जैसे नर्वस सिस्टम की गड़बड़ी, हार्ट संबंधी बीमारियां या न्यूरोलॉजिकल दिक्कत की वजह से ऐसा हो सकता है. ऐसे में अगर आपके साथ भी यह समस्या बार-बार होती है तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

क्या है बचाव का तरीका

इस समस्या से बचने के लिए काफी देर बैठे या लेटे रहने के बाद खड़े होने से पहले धीरे-धीरे उठें, खासकर बिस्तर से. इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि आपको डिहाइड्रेशन न हो. इसके अलावा कॉम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहने जिससे पैरों में ब्लड पुलिंग ना हो. इस समस्या से बचने के लिए भारी भोजन न करें और छोटे-छोटे और हल्के कदम चलने की कोशिश करें. साथ ही नियमित एक्सरसाइज करते रहे ताकि शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहे.

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चुटकियों में दूर हो जाएगी बवासीर की दिक्कत, बाबा रामदेव ने बताए रामबाण नुस्खे

चुटकियों में दूर हो जाएगी बवासीर की दिक्कत, बाबा रामदेव ने बताए रामबाण नुस्खे


अनियमित डाइट और उल्टी-सीधी लाइफस्टाइल की वजह से कब्ज जैसी दिक्कत बेहद कॉमन हो चुकी है. इसकी वजह से बवासीर यानी पाइल्स जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने यूट्यूब चैनल पर हाल ही में बवासीर की दिक्कत को दूर करने के कुछ देसी नुस्खे बताए थे. आइए आपको उनके बारे में जानकारी देते हैं. 

कैसे होते हैं बवासीर के लक्षण?

बवासीर दो तरह की होती है. इनमें पहली खूनी बवासीर होती है, जिसमें दर्द कम होता है, लेकिन ब्लीडिंग होती है. दूसरी बादी बवासीर होती है, जिसमें ब्लीडिंग नहीं होती है. हालांकि, कब्ज, दर्द और सूजन की दिक्कत काफी ज्यादा होती है. Indian Journal of Medical Research (2024) के मुताबिक, कब्ज, कम फाइबर वाली डाइट, लंबे समय तक बैठने, और पानी की कमी से बवासीर की दिक्कत होती है.

  • मल त्याग के दौरान दर्द और जलन
  • गुदा के आसपास खुजली और सूजन
  • मल के साथ खून आना (खूनी बवासीर में)
  • गुदा के आसपास मस्से या गांठ
  • उठने-बैठने में कठिनाई

बिना सर्जरी कैसे ठीक करें बवासीर?

बाबा रामदेव के मुताबिक, आयुर्वेद और लाइफस्टाइल में बदलाव करके बवासीर को बिना सर्जरी ठीक किया जा सकता है. उनका दावा है कि नुस्खे नैचुरल जड़ी-बूटियों और योग पर आधारित हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और कब्ज से राहत दिलाते हैं.

दूध और नींबू का मिश्रण

बाबा रामदेव ने दूध और नींबू के कॉम्बिनेशन को बवासीर के लिए रामबाण बताया है. इसके लिए सुबह खाली पेट गाय के एक कप गुनगुने दूध में एक नींबू निचोड़कर तुरंत पी लें. दूध गाय का ही होना चाहिए, क्योंकि भैंस का दूध गर्म होता है और दिक्कत बढ़ सकती है. फ्रिज का ठंडा दूध भी इस्तेमाल न करें. दूध नैचुरल तरीके से ठंडा करें. नींबू में मौजूद विटामिन C और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करते हैं, जबकि दूध पाचन को बेहतर बनाता है. बाबा रामदेव का दावा है कि 3-7 दिनों तक इसका सेवन करने से खूनी और बादी बवासीर में राहत मिलती है.

केला और देसी कपूर

बाबा रामदेव के अनुसार, केला और देसी कपूर का कॉम्बिनेशन बवासीर, फिशर और फिस्टुला के लिए असरदार होता है. एक पके केले का छोटा टुकड़ा लें, उसमें चने के आकार का देसी कपूर (भीमसेनी) डालें. इसे बिना चबाए निगल लें. सुबह खाली पेट 3 दिन तक यह प्रक्रिया आजमाएं. कपूर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो एनल की सूजन और जलन को कम करते हैं. केला फाइबर देता है, जो कब्ज से राहत दिलाता है. बाबा रामदेव का दावा है कि यह नुस्खा 3 दिन में बवासीर को जड़ से खत्म करता है.

नागदोन के पत्ते

बाबा रामदेव ने नागदोन (नागदमनी) के पत्तों को बवासीर के लिए बेहतरीन बताया है. सुबह खाली पेट नागदोन के 3-5 पत्ते चबाएं. इन्हें 3-7 दिन तक नियमित रूप से लें. नागदोन के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर जैसे गुण होते हैं, जो पाचन को बेहतर करते हैं और मस्सों की सूजन को कम करते हैं. बाबा रामदेव का कहना है कि यह उपाय ब्लीडिंग को पहले दिन से रोक सकता है और एक सप्ताह में पूरी तरह राहत देता है.

त्रिफला चूर्ण

बाबा रामदेव त्रिफला चूर्ण को कब्ज और बवासीर के लिए बेहद असरदार मानते हैं. रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लें. इसे 40-45 दिनों तक नियमित रूप से करें. हरड़, बहेड़ा और आंवला से बना त्रिफला पाचन तंत्र को साफ करता है. इससे कब्ज से राहत मिलती है और आंतें मजबूत होती हैं. यह बवासीर के मस्सों को कम करने में भी मदद करता है.  गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादा त्रिफला लेने से दस्त हो सकते हैं.

अंजीर का सेवन

बाबा रामदेव ने अंजीर को बवासीर के लिए कारगर बताया है. इसके लिए 2-3 सूखे अंजीर रात में पानी में भिगो दें. सुबह खाली पेट और शाम को 4-5 बजे इन्हें खाएं. यह प्रोसेस 8-10 दिन तक लगातार करें. अंजीर में काफी ज्यादा फाइबर होता है, जो मल को नरम करता है और मल त्याग को आसान बनाता है. इससे बवासीर का दर्द और सूजन कम होती है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बच्चों की तरह क्या वयस्क भी पी सकते हैं ब्रेस्ट मिल्क? इससे सेहत को फायदा या नुकसान

बच्चों की तरह क्या वयस्क भी पी सकते हैं ब्रेस्ट मिल्क? इससे सेहत को फायदा या नुकसान


मां का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत समान होता है. यह शिशु के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन क्या वयस्कों के लिए भी यह उतना ही फायदेमंद है? आइए जानते हैं इस पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ.

ब्रेस्ट मिल्क क्या है?

ब्रेस्ट मिल्क में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट , विटामिन, खनिज और एंटीबॉडी जैसे तत्व होते हैं. यह शिशु की पाचन क्रिया के अनुरूप होता है और उसे बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है.

वयस्कों के लिए ब्रेस्ट मिल्क

कुछ लोगों का दावा है कि वयस्क भी ब्रेस्ट मिल्क पीकर कई फायदे उठा सकते हैं. आइए इसके बारे में जानते हैं.

  • मांसपेशियां बनाना: कुछ बॉडीबिल्डर मानते हैं कि ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद उच्च पोषक तत्व उन्हें मांसपेशियां बनाने में मदद कर सकते हैं.
  • इम्यूनिटी बूस्टर: एंटीबॉडी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों के कारण इसे वयस्कों में इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी देखा जाता है.
  • पाचन में सुधार: कुछ लोग इसे पाचन संबंधी समस्याओं में सहायक मानते हैं.
  • कैंसर से लड़ने में मदद: कुछ प्रारंभिक रिसर्च में यह सुझाव दिया गया है कि ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद कुछ घटक कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह रिसर्च मुख्य रूप से प्रयोगशाला में हुई है, मनुष्यों पर नहीं.

हालांकि, इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण या मानव पर बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययन नहीं हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि वयस्कों को ब्रेस्ट मिल्क से वही फायदे नहीं मिलते जो एक शिशु को मिलते हैं, क्योंकि उनके पोषण संबंधी आवश्यकताएं बिल्कुल अलग होती हैं.

ये हैं संभावित नुकसान और जोखिम

वयस्कों द्वारा ब्रेस्ट मिल्क का सेवन कुछ गंभीर जोखिमों से भरा हो सकता है. खासकर यदि दूध किसी अनजान स्रोत से प्राप्त किया गया हो.

  • संक्रमण का खतरा: ब्रेस्ट मिल्क शरीर का एक तरल पदार्थ है. यदि दूध देने वाली महिला किसी संक्रामक बीमारी (जैसे एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, साइटोमेगालोवायरस या सिफलिस) से संक्रमित है और उसे इस बारे में पता नहीं है, तो दूध पीने वाले व्यक्ति को भी ये बीमारियां हो सकती हैं.
  • बैक्टीरिया का इंफेक्शन: ऑनलाइन खरीदा गया या असुरक्षित तरीके से संग्रहीत किया गया कच्चा ब्रेस्ट मिल्क बैक्टीरिया से दूषित हो सकता है. अध्ययनों में पाया गया है कि ऑनलाइन बेचे गए ब्रेस्ट मिल्क के नमूनों में बड़ी मात्रा में बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो निमोनिया या डायरिया जैसी बीमारियां पैदा कर सकते हैं.
  • पोषक तत्वों का असंतुलन: ब्रेस्ट मिल्क शिशुओं की जरूरतों के हिसाब से बना होता है. वयस्कों के लिए, यह पोषक तत्वों का संतुलित स्रोत नहीं हो सकता है, जिससे कुछ पोषक तत्वों की कमी या अधिकता हो सकती है.
  • पाचन संबंधी समस्याएं: कुछ वयस्कों को ब्रेस्ट मिल्क के सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं या एलर्जी हो सकती है, क्योंकि उनका पाचन तंत्र लैक्टोज को पचाने में उतना सक्षम नहीं होता जितना शिशुओं का होता है.
  • कानूनी और नैतिक मुद्दे: ऑनलाइन ब्रेस्ट मिल्क खरीदना या बेचना कई जगहों पर कानूनी और नैतिक मुद्दों से जुड़ा हो सकता है, क्योंकि इसमें अक्सर उचित स्क्रीनिंग और विनियमन का अभाव होता है.

ऐसे में हम देख सकते हैं कि ब्रेस्ट मिल्क शिशुओं के लिए पोषण और प्रतिरक्षा का एक अद्भुत स्रोत है. वयस्कों के लिए इसके सिद्ध स्वास्थ्य लाभ न के बराबर हैं और जोखिम काफी अधिक हैं. यदि कोई वयस्क ब्रेस्ट मिल्क का सेवन करना चाहता है, तो उसे किसी भी जोखिम से बचने के लिए इसे केवल सुरक्षित और ज्ञात स्रोत से ही प्राप्त करना चाहिए. हालांकि वयस्कों के लिए वास्तव में इसकी कोई जरूरत नहीं है.

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सिर्फ HIV नहीं, बिना कंडोम संबंध बनाने से फैलती हैं ये खतरनाक बीमारियां, जान लीजिए आज

सिर्फ HIV नहीं, बिना कंडोम संबंध बनाने से फैलती हैं ये खतरनाक बीमारियां, जान लीजिए आज


एचआईवी जैसे इंफेक्शन से बचने के लिए कंडोम के बिना शारीरिक संबंध नहीं बनाने की सलाह दी जाती है. क्या आपको पता है कि बिना कंडोम शारीरिक संबंध बनाने से सिर्फ एचआईवी ही नहीं होता है, बल्कि इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं. साथ ही, जानते हैं कि इससे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?

एचआईवी और एड्स

HIV (Human Immunodeficiency Virus) को सेक्स ट्रांसमिटेड डिजीज में सबसे खतरनाक माना जाता है. अगर इसका इलाज नहीं हो तो यह AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) का कारण बनता है. दिल्ली के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. सूर्यकांत शर्मा कहते हैं कि HIV का खतरा पार्टनर्स की संख्या और कंडोम के इस्तेमाल पर निर्भर करता है. इस बीमारी से बचने से लिए नियमित टेस्टिंग और PrEP (प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस) कराना चाहिए, जिससे खतरा कम होता है. अगर कोई महिला या पुरुष एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ शारीरिक संबंध रखते हैं तो उन्हें हर 3-6 महीने में HIV टेस्ट करवाना चाहिए.

गोनोरिया (Gonorrhea)

गोनोरिया एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो Neisseria gonorrhoeae के कारण होता है. यह बीमारी भी कंडोम के बिना शारीरिक संबंध बनाने से होती है. WHO की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, गोनोरिया के मामले भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं. खासकर शहरी इलाकों में यह बीमारी काफी तेजी से फैल रही है. इस बीमारी में पुरुषों और महिलाओं के रीप्रोडक्टिव सिस्टम को नुकसान पहुंचता है, जिससे बांझपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

क्लैमाइडिया (Chlamydia)

क्लैमाइडिया (Chlamydia trachomatis) यह भी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो बिना लक्षणों के भी फैल सकता है. Lancet Infectious Diseases (2023) की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में असुरक्षित यौन संबंध बनाने वाले 20-30 पर्सेंट युवाओं में क्लैमाइडिया का खतरा हो सकता है. इसकी वजह से बांझपन और प्रेग्नेंसी से संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं. संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीकांत प्रसाद बताते हैं कि क्लैमाइडिया अक्सर साइलेंट होता है, क्योंकि इसके लक्षण नहीं दिखते हैं.

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)

HPV वायरल इंफेक्शन है, जो असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने की वजह से होता है. इस इंफेक्शन की वजह से सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर और जेनिटल वार्ट्स जैसी बीमारियां हो सकती हैं. बता दें कि कंडोम HPV के ट्रांसमिशन को पूरी तरह नहीं रोकता है, लेकिन यह खतरा 70 पर्सेंट तक कम कर सकता है. Indian Journal of Medical Research (2024) के मुताबिक, HPV से संबंधित सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है.

जेनिटल हर्पीस (Genital Herpes)

जेनिटल हर्पीस Herpes Simplex Virus (HSV) के कारण होता है और स्किन के संपर्क से फैलता है. WHO की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 10-15 पर्सेंट सेक्सुअली एक्टिव लोगों में HSV-2 का खतरा होता है. कंडोम का इस्तेमाल करने से हर्पीस का खतरा 50-60 पर्सेंट तक कम हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह कारगर नहीं है. दरअसल, यह वायरस स्किन के संपर्क से भी फैलता है. 

सिफलिस (Syphilis)

सिफलिस (Treponema pallidum के कारण) एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो असुरक्षित शारीरिक संबंधों से फैलता है. UNAIDS की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिफलिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अगर इलाज न हो तो यह हार्ट, ब्रेन और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है. 

हेपेटाइटिस B और C

हेपेटाइटिस B और C असुरक्षित शारीरिक संबंध और ब्लड के माध्यम से फैलने वाले वायरल इंफेक्शन हैं. Lancet (2024) के अनुसार, बिना कंडोम शारीरिक संबंध बनाने से हेपेटाइटिस B का खतरा बढ़ता है, जो लिवर कैंसर और सिरोसिस का कारण बन सकता है. हेपेटाइटिस B की वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन हेपेटाइटिस C का कोई टीका नहीं है. ऐसे में कंडोम और सावधानी बेहद जरूरी है.

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36 साल तक प्रेग्नेंट रहा यह शख्स, पेट से निकले जुड़वा बच्चे! जानें कैसे

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चिकित्सा विज्ञान में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जो डॉक्टरों को भी हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र के नागपुर से सामने आया था, जहां एक शख्स 36 सालों से ज़्यादा समय तक जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती रहा. इस दुर्लभ मेडिकल स्थिति को फीटस इन फीटू के नाम से जाना जाता है.

यह मामला नागपुर के संजू भगत से जुड़ा है, जिनका पेट बचपन से ही सामान्य बच्चों की तुलना में थोड़ा फूला हुआ था. परिवार ने शुरुआत में इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे-जैसे संजू बड़े होते गए, उनका पेट असामान्य रूप से बढ़ता गया. उनका पेट इतना फूल गया था कि लोग उन्हें प्रेग्नेंट आदमी कहकर बुलाने लगे थे.

लगभग 1999 के आसपास, संजू की हालत बिगड़ने लगी. उनके पेट का बढ़ता आकार उनके डायाफ्राम पर दबाव डालने लगा, जिससे उन्हें सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी. आखिरकार, उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.

डॉक्टर भी रह गए हैरान

शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि संजू के पेट में कोई बड़ा ट्यूमर है, जो तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने ऑपरेशन करने का फैसला किया. जब डॉ. अजय मेहता और उनकी टीम ने संजू का ऑपरेशन शुरू किया, तो वे अंदर का नजारा देखकर दंग रह गए. पेट के अंदर कोई ट्यूमर नहीं था, बल्कि एक आंशिक रूप से विकसित मानव भ्रूण था. डॉक्टरों ने बताया कि जब उन्होंने पेट में हाथ डाला, तो उन्हें हड्डियां महसूस हुईं. ऑपरेशन के दौरान, उन्होंने एक-एक करके मानव शरीर के कई अंग निकाले, जिनमें हड्डियां, बाल, जबड़े और शरीर के अन्य हिस्से शामिल थे. यह दृश्य इतना असामान्य था कि डॉक्टर भी चौंक गए.

क्या है फीटस इन फीटू?

फीटस इन फीटू एक बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति है. यह तब होता है जब एक मोनोजायगोटिक (एक ही भ्रूण से बने) जुड़वा गर्भावस्था में, एक भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा भ्रूण किसी कारणवश अविकसित रह जाता है और अपने ही विकसित होते जुड़वा बच्चे के शरीर के अंदर समा जाता है. यह अविकसित भ्रूण आमतौर पर जीवित बच्चे के पेट में या कभी-कभी शरीर के किसी अन्य हिस्से में पाया जाता है. यह अपने मेजबान भ्रूण (होस्ट फीटस) से रक्त की आपूर्ति प्राप्त करता है, लेकिन इसका अपना कोई कार्यात्मक मस्तिष्क, हृदय या अन्य महत्वपूर्ण अंग नहीं होते हैं.

संजू भगत का मामला 36 साल तक इस स्थिति के साथ जीवित रहने का एक असाधारण उदाहरण था, जिसने मेडिकल जगत में उत्सुकता पैदा की. यह घटना विज्ञान के उन रहस्यों में से एक है, जो हमें मानव शरीर और उसकी जटिलताओं के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं. संजू का सफल ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद वे स्वस्थ हो गए.

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एक-दो या 10… कितने पार्टनर्स के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर हो सकता है एड्स?

एक-दो या 10… कितने पार्टनर्स के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर हो सकता है एड्स?


टेक्सास में प्रैक्टिस कर रहे डॉ. हुसाम इसा के मुताबिक, शारीरिक संबंध बनाने के दौरान HIV का ट्रांसमिशन उस वक्त होता है, जब HIV से इंफेक्टेड व्यक्ति के फिजिकल फ्लूड जैसे ब्लड, स्पर्म, वजाइनल डिस्चार्ज या रेक्टल फ्लूड गैर-संक्रमित व्यक्ति के ब्लड फ्लो में एंट्री करते हैं.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि HIV या एड्स का खतरा सिर्फ पार्टनर्स की संख्या पर निर्भर नहीं करता है. इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जैसे कंडोम का इस्तेमाल, साथी का HIV स्टेटस और अन्य यौन संचारित रोगों (STIs) आदि.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि HIV या एड्स का खतरा सिर्फ पार्टनर्स की संख्या पर निर्भर नहीं करता है. इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जैसे कंडोम का इस्तेमाल, साथी का HIV स्टेटस और अन्य यौन संचारित रोगों (STIs) आदि.

Journal of Infectious Diseases में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, हर बार शारीरिक संबंध बनाने के दौरान HIV ट्रांसमिशन का खतरा अलग होता है. अगर बिना कंडोम के एनल सेक्स करते हैं तो हर बार संपर्क में आने पर 1.38 पर्सेंट प्रति कनेक्शन खतरा होता है. वहीं, वजाइनल सेक्स के दौरान यह खतरा 0.08% प्रति कनेक्शन होता है.

Journal of Infectious Diseases में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, हर बार शारीरिक संबंध बनाने के दौरान HIV ट्रांसमिशन का खतरा अलग होता है. अगर बिना कंडोम के एनल सेक्स करते हैं तो हर बार संपर्क में आने पर 1.38 पर्सेंट प्रति कनेक्शन खतरा होता है. वहीं, वजाइनल सेक्स के दौरान यह खतरा 0.08% प्रति कनेक्शन होता है.

एक्सपर्ट्स की मानें तो शारीरिक संबंध बनाने के दौरान एचआईवी और एड्स का खतरा पार्टनर्स की संख्या बढ़ने के साथ बढ़ता है, क्योंकि हर नया पार्टनर नया खतरा लेकर आता है. अगर वह एचआईवी पॉजिटिव है तो वह बीमारी को ट्रांसफर कर सकता है.

एक्सपर्ट्स की मानें तो शारीरिक संबंध बनाने के दौरान एचआईवी और एड्स का खतरा पार्टनर्स की संख्या बढ़ने के साथ बढ़ता है, क्योंकि हर नया पार्टनर नया खतरा लेकर आता है. अगर वह एचआईवी पॉजिटिव है तो वह बीमारी को ट्रांसफर कर सकता है.

दिल्ली के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिन आहूजा के मुताबिक, सिर्फ एक पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाना भी खतरनाक हो सकता है. अगर वह एचआईवी पॉजिटिव है तो यह दिक्कत दे सकता है. इसके बाद जैसे-जैसे पार्टनर्स की संख्या बढ़ती है, खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है.

दिल्ली के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिन आहूजा के मुताबिक, सिर्फ एक पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाना भी खतरनाक हो सकता है. अगर वह एचआईवी पॉजिटिव है तो यह दिक्कत दे सकता है. इसके बाद जैसे-जैसे पार्टनर्स की संख्या बढ़ती है, खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है.

अगर आपका एकमात्र पार्टनर HIV पॉजिटिव है और वह एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) पर नहीं है तो हर बार शारीरिक संबंध बनाने पर HIV ट्रांसमिशन का खतरा बना रहता है. The Lancet में पब्लिश मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, यदि HIV पॉजिटिव पार्टनर ART पर है और उसका वायरल लोड अनडिटेक्टेबल है तो ट्रांसमिशन का खतरा बेद कम हो जाता है.

अगर आपका एकमात्र पार्टनर HIV पॉजिटिव है और वह एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) पर नहीं है तो हर बार शारीरिक संबंध बनाने पर HIV ट्रांसमिशन का खतरा बना रहता है. The Lancet में पब्लिश मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, यदि HIV पॉजिटिव पार्टनर ART पर है और उसका वायरल लोड अनडिटेक्टेबल है तो ट्रांसमिशन का खतरा बेद कम हो जाता है.

Published at : 13 Jul 2025 09:15 AM (IST)

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