टहलते वक्त ही दिखते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल के ये 5 लक्षण, नजर आते ही भागें डॉक्टर के पास

टहलते वक्त ही दिखते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल के ये 5 लक्षण, नजर आते ही भागें डॉक्टर के पास


हेल्दी हार्ट के लिए कोलेस्ट्रॉल का बैलेंस बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसका बढ़ा हुआ स्तर नुकसानदायक हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल तब बढ़ता है, जब आपके खून में बहुत ज्यादा लिपिड या फैट होता है. भले ही इसका पता जल्दी न चले, लेकिन हाई कोलेस्ट्रॉल ऐसे तरीकों से सामने आता है, जो आपके डेली रूटीन पर असर डाल सकता है. दरअसल, हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके ज्यादा लक्षण नजर नहीं आते हैं. जब आप वॉक करते है, तब हाई कोलेस्ट्रॉल के ये 5 लक्षण नजर आते हैं. 

सांस फूलना

गाजियाबाद स्थित शांति गोपाल अस्पताल के डॉ. संजय गर्ग के मुताबिक, नियमित रूप से टहलना अच्छा है, लेकिन अगर आपको टहलते समय सांस फूलने की दिक्कत हो रही है, तो यह एक समस्या हो सकती है. टहलते समय सांस फूलना हाई एलडीएल, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन या खराब कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता है, जो आपके दिल और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है. डॉक्टरों का कहना है कि बढ़े हुए एलडीएल स्तर से धमनियों में प्लाक (वसा का जमाव) बनने लगता है, जिससे वे संकरी हो जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित होता है. इसका मतलब है कि आपके दिल को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. खासकर शारीरिक गतिविधि के दौरान, जिससे आपको सांस लेने में कठिनाई होती है.

हाथों और पैरों का असामान्य रूप से ठंडा रहना

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके हाथ और पैर कभी-कभी असामान्य रूप से ठंडे रहते हैं. खासकर शारीरिक गतिविधि के बाद? इसका मतलब यह हो सकता है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर के कारण रक्त परिसंचरण (ब्लड सर्कुलेशन) पर्याप्त नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार, जब धमनियां संकरी हो जाती हैं, तो शरीर के छोरों (हाथों और पैरों) तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे ठंडक महसूस होती है. यदि आप इस लक्षण को बार-बार महसूस करते हैं, तो अपने कोलेस्ट्रॉल और रक्त वाहिका स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करना जरूरी है.

पैरों, घुटनों या टखनों में ऐंठन और दर्द

हाई कोलेस्ट्रॉल के अन्य संकेतों की तरह, आपके पैरों, घुटनों या टखनों में खराब ऐंठन और दर्द पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (पीएडी) का लक्षण हो सकता है, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर से जुड़ा है. पैरों को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में प्लाक जमने से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे पैरों में दर्द, भारीपन और ऐंठन होती है. यह दर्द अक्सर आराम करने पर कम हो जाता है, जिसे क्लॉडिकेशन भी कहते हैं.

ज्यादा थकान

थकान हाई कोलेस्ट्रॉल का एक ऐसा लक्षण है जिसे आप शायद मानते भी नहीं होंगे, क्योंकि यह एक सामान्य समस्या है, जो ज्यादातर लोगों को होती है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि हाई कोलेस्ट्रॉल आपके शरीर को ज़्यादा एलडीएल बनाने का कारण बनता है. जैसे-जैसे यह जमा होता है, यह कठोर और चिपचिपा हो सकता है, जिससे आपके दिल को रक्त पंप करने में कठिनाई होती है. थकान दिल की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में प्लाक जमने के कारण भी होती है. यदि ऐसा होता है, तो रक्त प्रवाह कम हो जाता है और दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति भी कम हो जाती है, जिससे थोड़ी सी भी मेहनत पर अत्यधिक थकान महसूस होती है.

सीने में दर्द

सीने में दर्द हमेशा आपके शरीर, खासकर आपके दिल के स्वास्थ्य में किसी गड़बड़ी का एक खतरनाक संकेत है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, हाई एलडीएल कोलेस्ट्रॉल एथेरोस्क्लेरोसिस में योगदान देता है. यह एक ऐसी स्थिति हैं, जहां धमनियां प्लाक जमने के कारण संकरी हो जाती हैं, जिससे एनजाइना नामक एक प्रकार का सीने में दर्द होता है जो तब होता है जब दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है. यदि आपको टहलते समय सीने में दबाव, जकड़न या दर्द महसूस होता है तो गंभीर स्थितियों से बचने के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है.

ये भी पढ़ें: सुबह-सुबह पिएं पपीते का जूस, सेहत को मिलेगा फायदा और स्किन होगी चमकदार

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह-सुबह पिएं पपीते का जूस, सेहत को मिलेगा फायदा और स्किन होगी चमकदार

सुबह-सुबह पिएं पपीते का जूस, सेहत को मिलेगा फायदा और स्किन होगी चमकदार


Papaya Juice for Health and Skin: हर दिन की एक अच्छी शुरुआत आपकी पूरी सेहत पर असर डाल सकती है और जब बात हो सुबह की हेल्दी आदतों की तो नेचुरल जूस का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन क्या आपने कभी पपीते के जूस को अपनी मॉर्निंग रूटीन का हिस्सा बनाया है? अगर नहीं, तो अब करने का समय है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. रॉबिन शर्मा के अनुसार, सुबह-सुबह पपीते का जूस पीना न केवल आपकी सेहत को कई स्तरों पर फायदा पहुंचाता है, बल्कि आपकी स्किन को भी अंदर से ग्लोइंग बनाता है. आइए जानते हैं, यह फल आपके शरीर में कैसे लाता है चमत्कारी बदलाव.

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क्यों फायदेमंद है पपीते का जूस?

कब्ज को करे दूर

पपीता में मौजूद एंजाइम पेपेन और फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. सुबह खाली पेट इसका जूस पीने से कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है.

स्किन को दे नैचुरल ग्लो

पपीता एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन C और विटामिन A से भरपूर होता है, जो स्किन की गहराई से सफाई करता है और उसे नेचुरल ग्लो देता है. डेली सेवन से डार्क स्पॉट्स और पिंपल्स भी कम हो सकते हैं.

इम्यूनिटी को बनाए मजबूत

पपीता में विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम में बीमार पड़ने का खतरा भी कम होता है.

वजन घटाने में मददगार

पपीते का जूस लो कैलोरी लेकिन हाई न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और ओवरईटिंग से बचाव होता है.

डिटॉक्स करता है शरीर

सुबह पपीते का जूस पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे किडनी और लिवर भी हेल्दी रहते हैं.

कैसे बनाएं पपीते का जूस

  • 1 कप कटे हुए पके पपीते के टुकड़े
  • आधा ग्लास ठंडा पानी या नारियल पानी
  • 1 चम्मच नींबू रस
  • थोड़ी सी पिसी हुई काली मिर्च या अदरक
  • सभी सामग्री को मिक्सर में डालकर अच्छी तरह ब्लेंड करें. बिना छाने सीधे पिएं ताकि फाइबर का पूरा लाभ मिले

अगर आप दिन की शुरुआत हेल्दी, एनर्जेटिक और नेचुरल तरीके से करना चाहते हैं तो पपीते के जूस को अपनी मॉर्निंग हैबिट में जरूर शामिल करें. यह छोटा-सा कदम आपकी स्किन, पाचन और इम्यूनिटी को बड़ा फायदा दे सकता है.

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ब्रेन डेड डोनर के पैर टेंडन का सफल प्रत्यारोपण, AIIMS गोरखपुर ने रचा इतिहास

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गोरखपुर AIIMS ने ब्रेन डेड व्यक्ति के Achilles Tendon (पैर में पाई जाने वाली एक तरह की मांसपेशी) का एक महिला में सफल ट्रांसप्लांट करने में सफलता हासिल की है. यह पहली बार है जब एक ऐसे मरीज की सर्जरी की गई, जिसमें ब्रेन डेड डोनर से मिली मांसपेशी (Achilles tendon) को प्रत्यारोपित किया गया है. 

दरअसल, गोरखपुर के गौरी बाजार की रहने वाली 40 साल की महिला को कई सालों से दोनों पैरों की पिंडलियों में सूजन और दर्द की समस्या थी. जांच में पता चला कि टेंडन में एक तरह का ट्यूमर हो गया है. ट्यूमर को निकालने के लिए पहले ऑपरेशन में बाएं पैर का टेंडन पूरी तरह हटाना पड़ा, जिससे मरीज ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.

ब्रेन डेड व्यक्ति की मांसपेशियों का हुआ ट्रांसप्लांट

महिला की तकलीफ बढ़ने पर गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों ने महिला की सर्जरी करने की ठानी. इसके बाद एम्स के डॉक्टरों ने मरीज के लिए ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त Achilles tendon को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया. जानकारी के मुताबिक, यह मांसपेशी मुंबई के नोवो टिशू बैंक से लाई गई थी और इस तरह से तैयार की गई थी कि मरीज को शरीर की प्रतिरोधक क्षमता दबाने वाली दवाइयाँ (Immunosuppressants) देने की जरूरत नहीं पड़ी.

छह महीने में चलने लगेगी महिला

डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल होने के बाद महिला के शरीर में यह मांसपेशी धीरे-धीरे जुड़ जाएगी. लगभग 3 महीने में मरीज आंशिक रूप से चलने भी लगेगी और छह महीने में उसके पूरे ठीक होने की उम्मीद है. डॉक्टरों की टीम में डॉ. विवेक कुमार, डॉ. आशुतोष, डॉ. दिलीप, डॉ. प्रियंका द्विवेदी और डॉ. अभिषेक भी शामिल थे.

यह भी पढ़ें: महिला की सांस की नली में फंस गया काजू, AIIMS के चिकित्सकों ने ऐसे बचाई जान

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महिला की सांस की नली में फंस गया काजू, AIIMS के डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

महिला की सांस की नली में फंस गया काजू, AIIMS के डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), गोरखपुर ने एक ऐसी महिला की जान बचाई है, जिसकी सांस की नली में गलती से काजू फंस गया था. यह महिला पिछले चार दिनों से खांसी, सांस फूलने और भारी बेचैनी जैसी समस्याओं से जूझ रही थी, जिसके बाद 53 वर्षीय महिला को उसके परिजन इलाज के लिए AIIMS में इलाज के लिए लेकर आए थे.

महिला को बीते कुछ दिनों से खांसी आने और सांस लेने में तकलीफ थी, जिसके बाद परिजन उसे स्थानीय अस्पताल लेकर गए. जब महिला का सीटी स्कैन और एक्स-रे में हुआ तो उसकी सांस की नली में काजू का एक टुकड़ा फंसा पाया गया. स्थानीय अस्पताल में एंडोस्कोपी की मदद से उसे निकालने की कोशिश की गई, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं रहा. ऐसे में महिला को AIIMS गोरखपुर में भर्ती किया गया.

ऐसे किया महिला का इलाज

AIIMS के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. सुबोध के नेतृत्व में डॉ. कनुप्रिया और डॉ. राघव की टीम ने यह जटिल ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया अंजाम दी. इस प्रक्रिया के लिए वीडियो-ब्रोंकोस्कोप, क्रायो मशीन और डॉर्मिया बास्केट जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया. यह ऑपरेशन ओटी में अत्यंत सतर्कता और तकनीकी सटीकता के साथ किया गया. इस दौरान एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. विजेता बाजपेई और डॉ. प्रियंका द्विवेदी ने संपूर्ण प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया. दोनों विभागों की इस संयुक्त कार्यप्रणाली ने महिला को एक नई ज़िंदगी दी. ऑपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह सामान्य रूप से स्वस्थ हो रही हैं. AIIMS गोरखपुर की कार्यपालक निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता की देखरेख और मार्गदर्शन इस ऑपरेशन को किया गया. उनकी प्रेरणा और संगठनात्मक दक्षता ने चिकित्सा दल को सटीक और समर्पित ढंग से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया.

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किडनी स्टोन की घंटी बजने से पहले जान लें जरूरी बातें, डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा

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Kidney Stone Prevention Tips: किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी, जब तक दर्द की शुरुआत नहीं होती, तब तक लोग इसे हल्के में लेते हैं. लेकिन अगर सही समय पर सावधानी न बरती जाए तो मामूली-सी दिखने वाली यह परेशानी डॉक्टर के चक्कर और सर्जरी तक पहुंचा सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ जरूरी बातों और आसान आदतों को अपनाकर किडनी स्टोन सेकेवल बचा जा सकता है, बल्कि शुरुआती चरणों में इसे खुद संभालना भी संभव है. यूरोलॉजिस्ट डॉ. शलभ अग्रवाल के अनुसार, यदि आप इन बुनियादी बातों का ध्यान रखें, तो अस्पताल जाने की नौबत ही नहीं आएगी.

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किडनी स्टोन के प्रमुख कारण

पानी की कमी

शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से यूरिन कंसन्ट्रेट हो जाता है, जिससे मिनरल्स क्रिस्टल्स में बदलने लगते हैं और स्टोन बनने लगते हैं.

बहुत ज्यादा नमक का सेवन

डाइट में हाई-सोडियम फूड और एक्स्ट्रा एनिमल प्रोटीन (जैसे रेड मीट) किडनी पर दबाव डालते हैं और स्टोन बनने का खतरा बढ़ाते हैं.

फैमिली हिस्ट्री और जेनेटिक्स

यदि परिवार में किसी को किडनी स्टोन की शिकायत रही है, तो आपके लिए यह रिस्क और बढ़ सकता है.

लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें

ज्यादा बैठना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन भी स्टोन बनने में योगदान करते हैं.

बचाव के आसान तरीके

  • दिनभर में कम से कम 8 ग्लास पानी पीना जरूरी है
  • ऑक्सलेट-रिच फूड्स जैसे चाय और चॉकलेट और नट्स का संतुलित सेवन करें.
  • नमक और रेड मीट की मात्रा को कम करें.
  • खासतौर पर जंक फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स से बचें.
  • फिटनेस रूटीन में थोड़ा बहुत चलना और एक्सरसाइज जरूर शामिल करें.
  • अगर पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या कमर के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो, तो लक्षणों को नजरअंदाज न करें.

सही जानकारी और खानपान में सुधार से किडनी स्टोन को काफी हद तक रोका जा सकता है. कई बार शुरुआती स्टेज की पथरी बिना किसी इलाज के सिर्फ लाइफस्टाइल चेंज से खुद ही निकल जाती है. किडनी स्टोन एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है, लेकिन जागरूकता और सतर्कता से इसे आसानी से टाला जा सकता है. अगर आप आज से ही अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाते हैं, तो कल डॉक्टर के पास जाने की जरूरत शायद न पड़े.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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