गट हेल्थ का दुश्मन हैं आपकी ये 6 आदतें, क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां?
गट हेल्थ का दुश्मन हैं आपकी ये 6 आदतें, क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां?
Source link
गट हेल्थ का दुश्मन हैं आपकी ये 6 आदतें, क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां?
Source link
Sprem Count for Fertility: किसी भी दंपत्ति के जीवन में संतान सुख एक खास और महत्वपूर्ण अनुभव होता है. लेकिन जब गर्भधारण में देरी होती है या बार-बार असफल प्रयास होते हैं तो अक्सर महिलाएं ही डॉक्टर के पास पहले जाती हैं. हालांकि, प्रजनन क्षमता केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, पुरुषों में स्पर्म काउंट और गुणवत्ता भी संतान प्राप्ति में अहम भूमिका निभाते हैं. अक्सर यह सवाल सामने आता है कि, एक पुरुष में कितना स्पर्म काउंट होना चाहिए ताकि बच्चा पैदा हो सके और अगर इसकी कमी हो तो इसे कैसे जांचा और सुधारा जा सकता है?
स्पर्म काउंट क्या होता है?
स्पर्म काउंट का मतलब होता है एक पुरुष के ejaculation में मौजूद शुक्राणुओं की संख्या. यह आमतौर पर प्रति मिलीलीटर सीमेन में मापा जाता है. अधिक स्पर्म काउंट होने से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है, जबकि कम स्पर्म काउंट प्रजनन में रुकावट पैदा कर सकता है.
ये भी पढ़े- प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में संबंध बनाने से क्या वाकई डिलीवरी में मिलती है मदद? ये रहा जवाब
न्यूनतम कितना स्पर्म काउंट होना चाहिए?
डॉ. सुनील जिंदल बताते हैं कि, एक स्वस्थ पुरुष में प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से अधिक और कुल मिलाकर 39 मिलियन से कम नहीं स्पर्म होने चाहिए. इससे कम होने पर बच्चा पैदा करने में दिक्कत हो सकती है. लेकिन सिर्फ संख्या ही नहीं, स्पर्म की गति आकार और गुणवत्ता भी गर्भधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
स्पर्म काउंट की जांच कैसे करें?
स्पर्म काउंट बढ़ाने के उपाय
अगर आप संतान प्राप्ति की योजना बना रहे हैं तो पुरुष की प्रजनन क्षमता की जांच उतनी ही जरूरी है जितनी महिला की. स्पर्म काउंट कम होना एक सामान्य समस्या है, लेकिन सही जांच, जीवनशैली में सुधार और डॉक्टर की सलाह से इसे बेहतर किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Sex in Last Month of Pregnancy: गर्भावस्था का आखिरी महीना, जब इंतजार अपने चरम पर होता है और हर महिला चाहती है कि अब डिलीवरी बिना किसी जटिलता के जल्द और सामान्य रूप से हो जाए. इसी समय अक्सर घर की बुजुर्ग महिलाएं या आसपास की सलाहें यह सुझाव देने लगती हैं कि “अंतिम महीने में पति-पत्नी का संबंध बनाना डिलीवरी को आसान बनाता है. कुछ लोग इसे परंपरागत मानते हैं, तो कुछ इसे लेकर झिझकते हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या वाकई गर्भावस्था के आखिरी महीने में शारीरिक संबंध डिलीवरी में मदद करता है या ये सिर्फ एक मिथ है?
इस विषय को बेहतर समझने के लिए गायनोलॉजिस्ट डॉ. सोनल परिहार बताती हैं कि, इस समय Prostaglandins नामक तत्व सर्विक्स को नरम करने में सहायक हो सकते हैं, जिससे डिलीवरी की प्रक्रिया सहज हो सकती है. इसके अलावा, ऑर्गेज़्म से गर्भाशय में हल्के संकुचनआ सकते हैं, जो प्राकृतिक लेबर की शुरुआत में मदद कर सकते हैं. भावनात्मक रूप से महिला को रिलैक्स महसूस होता है, जिससे हार्मोनल संतुलन बना रहता है.
ये भी पढ़े- क्या सच में गंदे जुराब सुंघाने से खत्म हो जाता है मिर्गी का दौरा? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
किन परिस्थितियों में संबंध बनाने से बचना चाहिए?
यह तरीका कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन हर गर्भवती महिला के लिए यह सुरक्षित नहीं होता. डॉक्टर सोनल बताती हैं कि यदि नीचे दिए गए में से कोई स्थिति हो, तो संबंध बनाने से बचना चाहिए.
क्या यह एक भरोसेमंद उपाय है?
डॉ. सोनल परिहार के अनुसार, यह तरीका कुछ महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे डिलेवरी टेक्निक के तौर पर 100% कारगर नहीं माना जा सकता. यह हर महिला के शरीर और गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करता है. गर्भावस्था के आखिरी महीने में संबंध बनाना डिलीवरी में मदद कर सकता है. लेकिन सिर्फ तभी, जब महिला और बच्चे की सेहत पूरी तरह से सामान्य हो और डॉक्टर की सलाह से यह किया जाए. बिना विशेषज्ञ की अनुमति के इसे आजमाना कभी-कभी जोखिम भरा हो सकता है.
ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Dirty Socks Stop Epileptic Attack: कोई व्यक्ति मिर्गी के दौरे से जूझ रहा है और लोग उसे अस्पताल ले जाने की बजाय उसके नाक के पास गंदे जुराब ले जाकर सुंघा देते हैं. यह सुनने में जितना अजीब लगता है, हाल ही में सोशल मीडिया पर यह उतना ही वायरल भी हो गया है. कई लोगों का मानना है कि गंदे जुराब की तीखी बदबू मिर्गी के दौरे को रोक सकती है. लेकिन क्या इस दावे में कोई सच्चाई है? क्या यह कोई परंपरागत देसी तरीका है या फिर सिर्फ एक अफवाह?
इस अजीबो-गरीब सलाह को लेकर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आराधना चौहान से ने बताया कि, वास्तव में इस तरह की मान्यताओं में कितनी सच्चाई है. आइए जानते हैं कि मिर्गी के दौरे के पीछे क्या कारण होते हैं और क्या वाकई गंदे जुराब सुंघाना कोई असर करता है या नहीं.
ये भी पढ़े- क्या पीसीओएस होने पर प्रेगनेंसी में आती है परेशानी, इसे ठीक कैसे किया जा सकता है
क्या गंदे जुराब सुंघाने से मिर्गी का दौरा रुकता है?
“मिर्गी के दौरे के दौरान व्यक्ति का मस्तिष्क असामान्य तरंगें उत्पन्न करता है. गंदे जुराब की बदबू से व्यक्ति के होश में आने की संभावना हो सकती है, लेकिन यह इलाज नहीं है. यह तरीका चिकित्सा की दृष्टि से न तो सुरक्षित है और न ही विश्वसनीय है. अधिकतर एक मिथक या घरेलू ट्रिक जैसा है, जो कुछ लोगों द्वारा आजमाया गया होगा, लेकिन इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
क्यों यह तरीका खतरनाक हो सकता है?
मिर्गी के दौरे के समय क्या करना चाहिए?
गंदे जुराब सुंघाकर मिर्गी का दौरा रोकना एक मिथक है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. यह तरीका लोगों की अज्ञानता का प्रतीक हो सकता है, लेकिन इसके पीछे कोई वास्तविक इलाज नहीं छिपा. ऐसे में बेहतर होगा कि मिर्गी को गंभीरता से लें और चिकित्सकीय सलाह वपर ही भरोसा करें.
ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
बिजली का झटका या करंट लगना एक गंभीर दुर्घटना है, जो जानलेवा हो सकती है. ऐसे में सही समय पर और सही तरीके से कदम उठाना बहुत जरूरी है ,ताकि पीड़ित की जान बचाई जा सके. घबराने की बजाय, शांत रहें और तुरंत ये कदम उठाएं.
सबसे पहले करें ये काम
बिजली का स्रोत बंद करने के बाद क्या करें?
पीड़ित की जांच कैसे करें?
जले हुए हिस्से का इलाज
बचाव के लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां
ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
PCOS and Pregnancy Complications: जिन महिलाओं को पीसीओएस पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या होती है. उनके लिए मां बनना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो आजकल बड़ी संख्या में युवतियों और महिलाओं को प्रभावित कर रहा है. पीसीओएस होने पर शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और ओवुलेशन में दिक्कत आने लगती है. इससे गर्भधारण करना चुनौती बन जाता है. हालांकि, यह कोई असंभव स्थिति नहीं है. सही समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके पीसीओएस के साथ भी स्वस्थ प्रेगनेंसी संभव है. इसी पर डॉ. अर्शी इकबाल बताती हैं कि पीसीओएस में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ मुख्य परेशानियां आ सकती हैं. लेकिन इलाज के जरिए सबकुछ ठीक से हो सकता है.
ये भी पढ़े- चेहरे पर दिखने लगें ये 9 लक्षण तो समझ लें लिवर को मदद की जरूरत, तुरंत भागें डॉक्टर के पास
ओवुलेशन में बाधा
पीसीओएस में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे अंडाणु ठीक से परिपक्व नहीं हो पाते. इससे ओवुलेशन यानी एग रिलीज नहीं हो पाता, और गर्भधारण में रुकावट आती है.
अनियमित पीरियड्स
जब ओवुलेशन ही नियमित नहीं होगा, तो पीरियड्स का चक्र भी असंतुलित हो जाता है. इससे फर्टिलिटी पर असर पड़ता है और कंसीव करने में समय लग सकता है.
हाई ब्लड प्रेशर और प्रेगनेंसी डायबिटीज
डॉ. अर्शी बताती हैं कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक होता है. ये मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं.
मिसकैरेज का खतरा
पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन के कारण यूटरस का वातावरण स्थिर नहीं रहता, जिससे प्रेगनेंसी टिक पाने में मुश्किल आती है और मिसकैरेज की संभावना बढ़ जाती है.
पीसीओएस ठीक करने के लिए क्या करें
हेल्दी डाइट अपनाएं
फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट, प्रोसेस्ड फूड और शुगर से परहेज, पीसीओएस को कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे इंसुलिन लेवल और हार्मोन बैलेंस बेहतर होता है.
नियमित व्यायाम करें
दिन में कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करने से वजन नियंत्रित रहता है और फर्टिलिटी बेहतर होती है.
दवाओं का सही इस्तेमाल
डॉक्टर की सलाह से फर्टिलिटी बूस्टिंग दवाएं जैसे क्लोमिफेन, मेटफॉर्मिन आदि ली जा सकती हैं. कुछ मामलों में आईयूआई या आईवीएफ की जरूरत भी पड़ सकती है.
तनाव कम करें
मानसिक तनाव भी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाता है. मेडिटेशन, काउंसलिंग या संगीत जैसे तरीकों से स्ट्रेस को मैनेज करना जरूरी है.
ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator