क्या पीसीओएस होने पर प्रेगनेंसी में आती है परेशानी, इसे ठीक कैसे किया जा सकता है

क्या पीसीओएस होने पर प्रेगनेंसी में आती है परेशानी, इसे ठीक कैसे किया जा सकता है


PCOS and Pregnancy Complications: जिन महिलाओं को पीसीओएस पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या होती है. उनके लिए मां बनना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो आजकल बड़ी संख्या में युवतियों और महिलाओं को प्रभावित कर रहा है. पीसीओएस होने पर शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और ओवुलेशन में दिक्कत आने लगती है. इससे गर्भधारण करना चुनौती बन जाता है. हालांकि, यह कोई असंभव स्थिति नहीं है. सही समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके पीसीओएस के साथ भी स्वस्थ प्रेगनेंसी संभव है. इसी पर डॉ. अर्शी इकबाल बताती हैं कि पीसीओएस में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ मुख्य परेशानियां आ सकती हैं. लेकिन इलाज के जरिए सबकुछ ठीक से हो सकता है.

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ओवुलेशन में बाधा

पीसीओएस में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे अंडाणु ठीक से परिपक्व नहीं हो पाते. इससे ओवुलेशन यानी एग रिलीज नहीं हो पाता, और गर्भधारण में रुकावट आती है.

अनियमित पीरियड्स

जब ओवुलेशन ही नियमित नहीं होगा, तो पीरियड्स का चक्र भी असंतुलित हो जाता है. इससे फर्टिलिटी पर असर पड़ता है और कंसीव करने में समय लग सकता है.

हाई ब्लड प्रेशर और प्रेगनेंसी डायबिटीज

डॉ. अर्शी बताती हैं कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक होता है. ये मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं.

मिसकैरेज का खतरा

पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन के कारण यूटरस का वातावरण स्थिर नहीं रहता, जिससे प्रेगनेंसी टिक पाने में मुश्किल आती है और मिसकैरेज की संभावना बढ़ जाती है.

पीसीओएस ठीक करने के लिए क्या करें

हेल्दी डाइट अपनाएं

फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट, प्रोसेस्ड फूड और शुगर से परहेज, पीसीओएस को कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे इंसुलिन लेवल और हार्मोन बैलेंस बेहतर होता है.

नियमित व्यायाम करें

दिन में कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करने से वजन नियंत्रित रहता है और फर्टिलिटी बेहतर होती है.

दवाओं का सही इस्तेमाल

डॉक्टर की सलाह से फर्टिलिटी बूस्टिंग दवाएं जैसे क्लोमिफेन, मेटफॉर्मिन आदि ली जा सकती हैं. कुछ मामलों में आईयूआई या आईवीएफ की जरूरत भी पड़ सकती है.

तनाव कम करें

मानसिक तनाव भी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाता है. मेडिटेशन, काउंसलिंग या संगीत जैसे तरीकों से स्ट्रेस को मैनेज करना जरूरी है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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लव बाइट सिर्फ प्यार का निशान नहीं, इसमें सांसें छीनने की भी ताकत!

लव बाइट सिर्फ प्यार का निशान नहीं, इसमें सांसें छीनने की भी ताकत!


लव बाइट, जिसे आमतौर पर ‘हिक्की’ कहा जाता है, प्यार और जुनून का एक छोटा सा निशान होता है. यह सिर्फ शरीर पर पड़ा एक निशान नहीं होता, बल्कि उस पल की याद भी होता है, जब भावनाएं शब्दों से आगे बढ़ जाती हैं. वैसे तो प्यार में अपने पार्टनर को हिक्की देना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह लव बाइट आपकी हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है? जी हां, लव बाइट में खून का थक्का जमना, त्वचा का नीला पड़ना और सूजन जैसी समस्याओं के अलावा भी आपको कुछ गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

क्या है लव बाइट और यह कैसे बनती है?

लव बाइट तब बनती है, जब स्किन पर बहुत तेजी से या जोर से चूसा या काटा जाता है. इससे त्वचा के नीचे की खून की छोटी धमनियां (खून की नसें) टूट जाती हैं और खून रिसकर स्किन के नीचे जमा हो जाता है. इससे लाल या बैंगनी रंग का निशान बन जाता है. यह निशान आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक या दो हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाता है.

लव बाइट से जुड़ीं हेल्थ प्रॉब्लम

हालांकि ज्यादातर लव बाइट्स हानिरहित होती हैं, लेकिन कुछ मामलों में इनसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.

  • खून का थक्का जमना: अगर हिक्की बहुत जोर से और लंबे समय तक दी गई हो, तो यह शरीर के उस हिस्से में, खासकर गर्दन के पास, खून का थक्का जमने का कारण बन सकती है. दुर्लभ मामलों में, यह खून का थक्का टूटकर दिमाग तक पहुच सकता है और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. ऐसा बहुत कम होता है, लेकिन यह एक गंभीर जोखिम है, खासकर उन लोगों में जिन्हें खून के थक्के जमने की पहले से कोई समस्या हो.
  • स्किन का नीला पड़ना और सूजन: यह लव बाइट का सबसे आम प्रभाव है. खून की नसें टूटने के कारण त्वचा नीली या बैंगनी पड़ जाती है और हल्की सूजन भी आ सकती है. यह आमतौर पर दर्दनाक नहीं होता, लेकिन दिख सकता है.
  • इंफेक्शन का खतरा: अगर स्किन कट जाए या टूट जाए तो बैक्टीरिया अंदर जा सकते हैं और इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं. ऐसा तब हो सकता है जब हिक्की देने वाला व्यक्ति दांतों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करें या उस जगह की साफ-सफाई ठीक न हो.
  • हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस का फैलाव: यदि हिक्की देने वाले व्यक्ति को मुंह में कोल्ड सोर (हर्पीस वायरस के कारण होने वाले छाले) हों, तो यह वायरस हिक्की के माध्यम से दूसरे व्यक्ति की त्वचा पर फैल सकता है. इससे उस जगह पर छाले या घाव हो सकते हैं.
  • दर्द और असुविधा: ज्यादातर लव बाइट्स दर्दनाक नहीं होतीं, लेकिन कुछ लोगों को उस जगह पर हल्का दर्द, खुजली या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है.

लव बाइट से जुड़े जोखिमों को कैसे कम करें?

  • ज्यादा जोर न लगाएं: हिक्की देते समय बहुत ज्यादा जोर या दबाव न डालें.
  • लंबी हिक्की न दें: एक ही जगह पर बहुत देर तक चूसे या काटे नहीं.
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें: त्वचा पर हिक्की वाली जगह को साफ रखें.
  • गर्दन के संवेदनशील हिस्सों से बचें: गर्दन के उन हिस्सों से बचें, जहां बड़ी रक्त वाहिकाएं होती हैं, जैसे कैरोटिड धमनी.
  • अगर समस्या हो तो डॉक्टर से मिलें: अगर हिक्की वाली जगह पर बहुत ज्यादा दर्द हो, सूजन हो, कोई गांठ महसूस हो, या लालिमा फैलने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

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क्या आपके पैर दे रहे हैं लिवर की बीमारी के संकेत, ये 6 लक्षण जरूर पहचानें

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पैरों में लगातार सूजन: लिवर जब ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में फ्लूइड जमा होने लगता है, जिससे पैरों और टखनों में सूजन आ जाती है. ये सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और सुबह से शाम तक बनी रहती है.

पैरों की त्वचा पर खुजली: लिवर डैमेज होने पर त्वचा में खुजली महसूस होती है. खासकर पैरों और हथेलियों पर. ये खुजली बिना किसी रैश के भी हो सकती है.

पैरों की त्वचा पर खुजली: लिवर डैमेज होने पर त्वचा में खुजली महसूस होती है. खासकर पैरों और हथेलियों पर. ये खुजली बिना किसी रैश के भी हो सकती है.

पैरों की नसों का उभरना: लिवर की बीमारी में खून का फ्लो प्रभावित होता है जिससे पैरों में नीली या बैंगनी नसें उभरने लगती हैं. ये दिखने में पतली जाल जैसी होती हैं और दर्द भी दे सकती हैं.

पैरों की नसों का उभरना: लिवर की बीमारी में खून का फ्लो प्रभावित होता है जिससे पैरों में नीली या बैंगनी नसें उभरने लगती हैं. ये दिखने में पतली जाल जैसी होती हैं और दर्द भी दे सकती हैं.

पैरों में थकान और भारीपन: लिवर फेलियर की स्थिति में शरीर में टॉक्सिन्स इकट्ठा होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. पैरों में भारीपन, कमजोरी और थकान सुबह से ही महसूस होती है.

पैरों में थकान और भारीपन: लिवर फेलियर की स्थिति में शरीर में टॉक्सिन्स इकट्ठा होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. पैरों में भारीपन, कमजोरी और थकान सुबह से ही महसूस होती है.

पैरों की त्वचा का पीलापन: अगर लिवर खराब हो रहा है तो शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है जिससे त्वचा पीली या गाढ़ी दिखने लगती है. पैर की स्किन में असामान्य रंगत इसका शुरुआती संकेत हो सकती है.

पैरों की त्वचा का पीलापन: अगर लिवर खराब हो रहा है तो शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है जिससे त्वचा पीली या गाढ़ी दिखने लगती है. पैर की स्किन में असामान्य रंगत इसका शुरुआती संकेत हो सकती है.

पैरों पर बार-बार घाव: कमजोर लिवर इम्यून सिस्टम को भी कमजोर कर देता है. इससे पैरों पर बार-बार फोड़े, घाव या इंफेक्शन हो सकते हैं जो जल्दी ठीक नहीं होते.

पैरों पर बार-बार घाव: कमजोर लिवर इम्यून सिस्टम को भी कमजोर कर देता है. इससे पैरों पर बार-बार फोड़े, घाव या इंफेक्शन हो सकते हैं जो जल्दी ठीक नहीं होते.

Published at : 11 Jul 2025 07:01 PM (IST)

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‘सुर कोकिला’ से ‘कर्कशा’ बना रहा कोरोना का यह वेरिएंट, इन देशों में मचा रहा तबाही

‘सुर कोकिला’ से ‘कर्कशा’ बना रहा कोरोना का यह वेरिएंट, इन देशों में मचा रहा तबाही


कोविड-19 का नया स्ट्रेन ‘स्ट्रेटस’ या वैज्ञानिक रूप से एक्सएफजी और एक्सएफजी.3  यूके सहित कई देशों में तेजी से फैल रहा है. विशेषज्ञों ने इसके एक अजीब लक्षण के बारे में चेतावनी दी है.  कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इन वैरिएंट्स की संक्रामकता दर ओमिक्रॉन के पिछले वेरिएंट्स की तुलना में ढाई गुना तक अधिक हो सकती है. इसका मतलब यह है कि अगर इस वेरिएंट का इंफेक्शन फैला तो काफी लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.

क्या है ‘स्ट्रेटस’?

‘स्ट्रेटस’ ओमिक्रॉन वैरिएंट का नया म्यूटेशन है और इसे ‘रिकॉम्बिनेंट’ या ‘फ्रैंकनस्टीन’ स्ट्रेन कहा जाता है. इसका मतलब है कि यह तब बना, जब एक व्यक्ति एक साथ दो कोविड वेरिएंट से संक्रमित था, जिससे नया हाइब्रिड वेरिएंट बन गया. यह अब इंग्लैंड में सबसे प्रभावी कोविड-19 स्ट्रेन बन गया है, जो मई में 10% से बढ़कर जून के मध्य तक लगभग 40% मामलों के लिए जिम्मेदार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ‘मॉनिटरिंग के तहत वेरिएंट’ के रूप में वर्गीकृत किया है. हालांकि, ग्लोबल लेवल पर यह कम खतरनाक बताया गया है.

ये हैं लक्षण और अन्य जानकारियां

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के नए स्ट्रेस का सबसे खास लक्षण आवाज का भारी या कर्कश होना है, जिसमें गला खुरदुरा या घिसी हुई आवाज जैसा महसूस हो सकता है. वहीं, स्ट्रेटस के अन्य लक्षण पिछले कोविड-19 वेरिएंट के समान हैं.

  • बुखार (तेज बुखार – 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक) – ठंड लगना भी शामिल है।
  • सूखी खांसी
  • थकान
  • सूंघने या स्वाद की क्षमता में कमी या बदलाव
  • नाक बंद होना (बहती या बंद नाक)
  • कंजंक्टिवाइटिस (आंखों का लाल होना या गुलाबी आंख)
  • गले में खराश
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द
  • विभिन्न प्रकार के त्वचा पर चकत्ते
  • मतली या उल्टी
  • दस्त
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • भूख न लगना
  • भ्रम

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्ट्रेटस अधिक संक्रामक हो सकता है, क्योंकि इसमें ऐसे म्यूटेशन हैं जो इसे इम्यून सिस्टम से बचने में मदद कर सकते हैं. अच्छी खबर यह है कि वर्तमान में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्ट्रेटस पिछले वेरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या टीके इसके खिलाफ कम प्रभावी होंगे.

इन बातों का रखें ध्यान

इस नए स्ट्रेन में खांसी कम होती है, जिससे कुछ लोगों को लग सकता है कि उन्हें कोविड नहीं है या उन्हें केवल गले में खराश है. एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि आबादी में घटती इम्युनिटी, बूस्टर डोज की कम स्वीकार्यता और हाल के संक्रमणों में कमी के कारण लोग स्ट्रेटस के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं, जिससे इंफेक्शन की एक नई लहर आ सकती है.

यदि आपमें कोई लक्षण हैं, भले ही वे हल्के या सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लगें तो भी कोविड-19 की आशंका को खत्म करने के लिए जांच कराना अहम है. यदि आप पॉजिटिव मिलते हैं तो घर पर रहना और अलग-थलग रहना महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्ट्रेटस अत्यधिक संक्रामक है.

बता दें कि नया कोविड स्ट्रेन ‘स्ट्रेटस’ तेजी से फैल रहा है और इसमें आवाज़ का कर्कश होना खास लक्षण है. हालांकि, यह अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता है, फिर भी इसकी संक्रामकता और प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता चिंता का विषय है. सतर्क रहना, लक्षणों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर जांच कराना अहम है.

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माता-पिता को है डायबिटीज? आपको भी रहना होगा सतर्क, जानिए क्यों

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Genetic Risk of Diabetes: क्या आपके घर में डायबिटीज की कहानी पीढ़ियों से चली आ रही है? अगर आपके दोनों माता-पिता को टाइप 2 डायबिटीज है तो यह सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि एक चेतावनी हो सकती है. ऐसे मामलों में आपको अपनी जीवनशैली, खानपान और फिटनेस को गंभीरता से लेना चाहिए, वरना ये बीमारी चुपचाप आपको भी अपना शिकार बना सकती है. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.

इस मसले पर हैदराबाद के ग्लेनेगल्स अस्पताल के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. हिरण एस. रेड्डी बताते हैं कि, इस तरह के केस में व्यक्ति को इंसुलिन रेजिस्टेंस या बीटा-सेल की गड़बड़ी विरासत में मिल सकती है, जिससे शरीर ब्लड शुगर को सही ढंग से कंट्रोल नहीं कर पाता. अगर दोनों माता-पिता को डायबिटीज है तो आपके जीवन में कभी न कभी यह बीमारी होने की संभावना 50% से भी ज्यादा हो जाती है.

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फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है

युवावस्था में इसके लक्षण भले न दिखें, लेकिन समय के साथ-साथ फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है या ग्लूकोज टॉलरेंस कमजोर हो जाता है. इसका मतलब यह नहीं कि अगर आपके माता-पिता को डायबिटीज है तो आपको भी जरूर होगी, लेकिन खतरे को हल्के में लेना सही नहीं होगा. हमेशा कहा जाता है कि जेनेटिक बीमारियां आपको भी हो सकती हैं. लेकिन अगर जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाए तो इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है.

डायबिटीज से बचाव मुमकिन है

टाइप 2 डायबिटीज से बचना पूरी तरह से संभव है, अगर आप सही समय पर जरूरी कदम उठाएं. डॉ. हिरण के मुताबिक, यदि आप अपने वजन में सिर्फ नियंत्रित रखते हैं तो डायबिटीज का खतरा बहुत हद तक कम हो सकता है. इसके अलावा आपका खानपान संतुलित होना चाहिए, सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें, अंडे और हेल्दी फैट जैसे नट्स, ऑलिव ऑयल को प्राथमिकता दें. साथ ही, मीठे और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना जरूरी है.

नियमित जांच है बहुत जरूरी

अगर आपकी उम्र 25 साल से ज्यादा है या आप मोटापे, थकान या सुस्ती से जूझ रहे हैं तो साल में कम से कम एक बार ब्लड शुगर टेस्ट और हेल्थ चेकअप जरूर कराएं. इससे शुरुआती संकेत मिल सकते हैं, जो आगे चलकर डायबिटीज बनने से रोक सकते हैं.

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चेहरे पर दिखने लगें ये 9 लक्षण तो समझ लें लिवर को मदद की जरूरत, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

चेहरे पर दिखने लगें ये 9 लक्षण तो समझ लें लिवर को मदद की जरूरत, तुरंत भागें डॉक्टर के पास


लिवर हमारे शरीर का एक बहुत ही अहम अंग है, जो हमारे सेहत को बनाए रखने में मदद करता है. यह न सिर्फ खून को साफ करता है, बल्कि खाना पचाने, खतरनाक जहरीले तत्वों को बाहर निकालने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचने में मदद करता है. हालांकि जब लिवर कमजोर हो जाता है वह ठीक से काम नहीं करता या उसमें कोई बीमारी घर कर जाती है, तो उसका असर हमारे शरीर पर दिखने लगते है, खासतौर पर चेहरे पर. चेहरा उस आईने की तरह होता है जो शरीर के अंदर छुपी गड़बड़ियों को सबसे पहले दिखाता है. आइए जानते हैं चेहरे पर दिखने वाले ऐसे 9 लक्षण, जो बताते हैं कि लिवर खतरे में है और उसे इलाज की बेहद जरूरत है.

1. चेहरे पर पीलापन

अगर आपके चेहरे की स्किन या आंखों की सफेदी में हल्का या धीरे धीरे गहरा पीला रंग नजर आने लगे, तो इसे हल्के में ना लें. यह एक सामान्य बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक पीलिया (जॉन्डिस) का लक्षण हो सकता है. यह तब होता है जब लिवर शरीर से बिलिरुबिन नामक पीले रंग के तत्व को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता. इसके वजह से वह खून में जमा होने लगता है और चेहरे, आंखों और त्वचा पर पीलापन दिखने लगता है. ऐसा लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है.

2. आंखों के नीचे सूजन या डार्क सर्कल

अक्सर हम देखते है कि आंखों के नीचे लगातार काले घेरे बने रहते हैं या हल्की-सी सूजन नजर आने लगती है, तो यह सिर्फ नींद की कमी का नतीजा नहीं हो सकता. कई बार यह लक्षण शरीर के अंदर छुपी किसी गंभीर समस्या, खासकर लिवर की गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं. जब लिवर शरीर से जहरीले तत्वों को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता, तो उनका असर चेहरे पर दिखने लगता है जैसे थकान, डार्क सर्कल और सूजन के रूप में. अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से तुरंत जांच कराना जरूरी है.

3. चेहरे पर पिंपल्स और फुंसियां

अगर चेहरे पर अचानक बार बार ज्यादा पिंपल्स या फुंसियां निकलने लगें और घरेलू इलाज या दवाओं के बावजूद ठीक न हों, तो यह सिर्फ स्किन प्रॉब्लम नहीं, बल्कि लिवर में जमा हो रहे जहरीले तत्वों का लक्षण हो सकता है. जब लिवर ठीक से डिटॉक्स नहीं कर पाता, तो उसका असर त्वचा पर साफ नजर आता है.

4. चेहरे पर खुजली या जलन

अगर आपके चेहरे की त्वचा पर बिना किसी एलर्जी या बाहरी कारण के बार-बार खुजली या जलन महसूस हो रही है, तो यह लिवर के कामकाज में गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है. जब लिवर पित्त को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता, तो यह त्वचा के नीचे जमा होकर जलन और खुजली की वजह बनता है. इसलिए इसे नजरअंदाज न करें.

5. मुंह का बदबूदार और कड़वापन 

अक्सर हम अपने आसपास कई लोगों को देखते हैं जिनके मुंह से लगातार बदबू आती है या वे हमेशा कड़वे स्वाद की शिकायत करते हैं. तो यह सिर्फ ओरल हाइजीन की वजह से नहीं, बल्कि लिवर की खराबी का लक्षण भी हो सकता है. जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, तो पाचन बिगड़ता है और इसका असर मुंह के स्वाद और गंध पर पड़ता है.

6. होंठ और आंखों के कोनों में सूखापन

अगर होंठों पर बार-बार सूखापन या फटने की परेशानी हो रही है और आंखों के कोनों में भी दरारें नजर आ रही हैं, तो यह सिर्फ मौसम का असर या स्किन प्रॉब्लम नहीं हो सकती. हालांकि हम अपने आसपास ऐसे लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लिवर में विटामिन को प्रोसेस करने की क्षमता में गड़बड़ी का नतीजा हो सकता है. इसलिए इसे समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है.

7. चेहरे पर सूजन

अगर आपके चेहरे पर, खासकर आंखों और गालों के पास बार-बार सूजन आ रही है, तो यह लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) या किसी गंभीर गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है. ऐसा लक्षण दिखे तो आपको तुरंत डॉक्टर से जांच कराना चाहिए.

8. जरूरत से ज्यादा चिपचिपी स्किन

अगर चेहरे की स्किन हमेशा चिपचिपी लगे और बार-बार धोने पर भी ऑयली महसूस हो, तो यह लिवर की खराबी का लक्षण हो सकता है. जब लिवर शरीर में फैट को ठीक से मेटाबोलाइज नहीं कर पाता, तो त्वचा पर इसका असर दिखने लगता है.

9. चेहरे की रंगत में बदलाव

अगर आपके चेहरे की त्वचा का रंग अचानक गहरा, मुरझाया हुआ या राख जैसा दिखने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह सिर्फ थकावट या धूप का असर नहीं, बल्कि लिवर की खराब सेहत का लक्षण हो सकता है. जब लिवर शरीर में जमा जहरीले तत्वों को सही ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता, तो उसका असर त्वचा की रंगत पर दिखने लगता है.

ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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