शरीर में दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, हो सकता है HIV! तुरंत कराएं टेस्ट

शरीर में दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, हो सकता है HIV! तुरंत कराएं टेस्ट


ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एआईवी) एक गंभीर वायरस है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को धीरे-धीरे कमजोर करता है. यह वायरस शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को खत्म कर देता है, जिससे व्यक्ति अन्य संक्रमणों और बीमारियों का शिकार आसानी से बन जाता है. एचआईवी का समय पर पता लगाना और इलाज शुरू करना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर इसे बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो यह एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) में बदल सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है.

गाजियाबाद स्थित यशोदा अस्पताल में मेडिसिन एंड जनरल फिजिशियन डॉ. एपी सिंह के मुताबिक, एचआईवी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं. इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. अगर आपने कभी असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं, संक्रमित सुई का इस्तेमाल किया है या आपको लगता है कि आप किसी भी तरह से एचआईवी के संपर्क में आए हैं, और आपको ये लक्षण दिखें, तो बिना देर किए टेस्ट कराएं.

एचआईवी के शुरुआती लक्षण

एचआईवी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और ये वायरस के शरीर में जाने के कुछ हफ्तों से लेकर कई सालों बाद तक दिख सकते हैं. हालांकि, कुछ शुरुआती लक्षण जो संक्रमण के 2-4 हफ्ते बाद दिख सकते हैं, वे इस प्रकार हैं.

  • तेज बुखार और ठंड लगना: यह एचआईवी के शुरुआती और सबसे आम लक्षणों में से एक है. यह फ्लू जैसा बुखार हो सकता है, जो ठीक न हो.
  • थकान और कमजोरी: लगातार बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, भले ही आपने पर्याप्त आराम किया हो. शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना.
  • सूजी हुई लिम्फ नोड्स: गर्दन, बगल या कमर में ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में सूजन महसूस होना. ये ग्रंथियां शरीर की संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं और संक्रमण होने पर सूज जाती हैं.
  • त्वचा पर दाने: शरीर पर लाल, खुजली वाले दाने निकलना, जो आमतौर पर छाती, पीठ या चेहरे पर दिख सकते हैं.
  • गले में खराश और मुंह के छाले: बिना किसी स्पष्ट कारण के गले में लगातार खराश रहना या मुंह के अंदर दर्दनाक छाले (अल्सर) निकलना.
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: शरीर में मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द या अकड़न महसूस होना, जो फ्लू के लक्षणों जैसा लग सकता है.
  • रात को पसीना आना: सोते समय बहुत ज़्यादा पसीना आना, भले ही कमरा ठंडा हो.
  • तेजी से वजन कम होना: बिना किसी वजह के अचानक और तेजी से वजन कम होना.

कब कराएं टेस्ट?

अगर आपने कभी भी एचआईवी के जोखिम भरे काम किए हैं, जैसे असुरक्षित यौन संबंध, साझा सुई का उपयोग और आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिख रहे हैं, तो बिना घबराए और बिना देर किए तुरंत एचआईवी टेस्ट करवाएं. यह जानना बेहद जरूरी है कि,
शुरुआत में पता लगना महत्वपूर्ण है: एचआईवी का जितनी जल्दी पता चलेगा, इलाज उतनी ही जल्दी शुरू हो पाएगा. एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) जैसी दवाएं वायरस को कंट्रोल करने में मदद करती हैं, जिससे व्यक्ति एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है.

  • रोकथाम और सुरक्षा: टेस्ट से आपको अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने में भी मदद मिलेगी.
  • एचआईवी कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक वायरस है जिसे सही इलाज से मैनेज किया जा सकता है. लक्षण दिखने पर डरने के बजाय, जागरूक बनें और सही जानकारी प्राप्त करें. किसी भी तरह की शंका होने पर योग्य डॉक्टर से सलाह लें और तुरंत टेस्ट कराएं.

ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सुबह उठते ही थकान क्यों लगती है? जानिए इसके पीछे छिपे 6 कारण

सुबह उठते ही थकान क्यों लगती है? जानिए इसके पीछे छिपे 6 कारण


खराब नींद की क्वालिटी: नींद पूरी करने से ज्यादा जरूरी है उसकी गुणवत्ता. अगर आप रात को बार-बार जागते हैं, गहरी नींद नहीं आती या बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं तो नींद का कोई फायदा नहीं होता.

स्क्रीन टाइम और ब्लू लाइट का असर: सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का ज्यादा इस्तेमाल ब्रेन को अलर्ट रखता है और मेलाटोनिन हार्मोन के रिलीज को रोकता है. इससे नींद की साइकल गड़बड़ हो जाती है.

स्क्रीन टाइम और ब्लू लाइट का असर: सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का ज्यादा इस्तेमाल ब्रेन को अलर्ट रखता है और मेलाटोनिन हार्मोन के रिलीज को रोकता है. इससे नींद की साइकल गड़बड़ हो जाती है.

लो आयरन या विटामिन डी की कमी: अगर शरीर में आयरन या विटामिन D की कमी है, तो थकान सुबह से ही आपको घेर लेती है. शरीर को एनर्जी ट्रांसफर करने के लिए ये दोनों पोषक तत्व जरूरी हैं.

लो आयरन या विटामिन डी की कमी: अगर शरीर में आयरन या विटामिन D की कमी है, तो थकान सुबह से ही आपको घेर लेती है. शरीर को एनर्जी ट्रांसफर करने के लिए ये दोनों पोषक तत्व जरूरी हैं.

डिहाइड्रेशन: रातभर शरीर बिना पानी के रहता है. अगर आप सुबह उठकर पानी नहीं पीते, तो थकान और सुस्ती तय है. डिहाइड्रेशन मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है.

डिहाइड्रेशन: रातभर शरीर बिना पानी के रहता है. अगर आप सुबह उठकर पानी नहीं पीते, तो थकान और सुस्ती तय है. डिहाइड्रेशन मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है.

स्ट्रेस और ओवरथिंकिंग: अगर आपका दिमाग रात को भी एक्टिव रहता है, तो शरीर आराम नहीं कर पाता. जिसकी वजह से हार्मोनल डिसबैलेंस होता है, जो सुबह की एनर्जी को खत्म कर देता है.

स्ट्रेस और ओवरथिंकिंग: अगर आपका दिमाग रात को भी एक्टिव रहता है, तो शरीर आराम नहीं कर पाता. जिसकी वजह से हार्मोनल डिसबैलेंस होता है, जो सुबह की एनर्जी को खत्म कर देता है.

भारी या अनहेल्दी डिनर: रात को ज्यादा तेल, मसाले या लेट डिनर लेने से पाचन ठीक से नहीं होता. इससे नींद बाधित होती है और सुबह शरीर थका हुआ लगता है.

भारी या अनहेल्दी डिनर: रात को ज्यादा तेल, मसाले या लेट डिनर लेने से पाचन ठीक से नहीं होता. इससे नींद बाधित होती है और सुबह शरीर थका हुआ लगता है.

Published at : 11 Jul 2025 04:56 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

हेल्थ वेब स्टोरीज



Source link

छींकने से कैसे हो सकती है इंसान की मौत, जानें किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान

छींकने से कैसे हो सकती है इंसान की मौत, जानें किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान


छींकना एक सामान्य शारीरिक क्रिया है जो धूल, पोलेन या किसी बाहरी कण के नाक में जाने पर उसे बाहर निकालने के लिए होती है. यह आमतौर पर हानिरहित होती है, लेकिन कुछ दुर्लभ परिस्थितियों में बहुत जोर से या गलत तरीके से छींकने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जो जानलेवा भी साबित हो सकती हैं. हालांकि, छींकने से सीधे मौत होना बेहद असामान्य है, लेकिन इससे जुड़ी जटिलताएं खतरनाक हो सकती हैं.

किन स्थितियों में छींकना हो सकता है खतरनाक?

  • दिमाग में ब्लीडिंग: बहुत ज़ोर से छींकने पर दिमाग की रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) पर अचानक दबाव बढ़ सकता है. यदि किसी व्यक्ति के दिमाग में पहले से कोई कमजोर रक्त वाहिका या एन्यूरिज्म (खून की नली में गुब्बारा जैसा फूलना) हो, तो छींकने से वह फट सकता है. इससे दिमाग में खून बहने लगता है, जिसे सेरेब्रल हेमरेज कहते हैं. यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत होती है.
  • पसलियों का टूटना: अत्यधिक ज़ोर से या बार-बार छींकने से पसलियों पर इतना दबाव पड़ सकता है कि वे टूट सकती हैं. यह खासकर उन लोगों में हो सकता है जिनकी हड्डियां कमजोर होती हैं, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज या बुजुर्ग. टूटी हुई पसली फेफड़ों या आस-पास के अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं.
  • फेफड़े का फटना: बहुत जोर से छींकने से फेफड़ों में हवा के दबाव में अचानक वृद्धि होती है. दुर्लभ मामलों में, इससे फेफड़े का एक छोटा सा हिस्सा फट सकता है, जिससे हवा फेफड़े और छाती की दीवार के बीच जमा हो जाती है. इसे न्यूमोथोरैक्स कहते हैं. यह स्थिति सांस लेने में गंभीर समस्या पैदा कर सकती है और जानलेवा हो सकती है, अगर तुरंत इलाज न मिले.
  • गले या छाती में चोट: अगर कोई व्यक्ति छींक को रोकने की कोशिश करता है, तो गले और छाती में हवा का दबाव खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है. इससे गले में रक्त वाहिकाएं या वायुमार्ग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं. कुछ मामलों में, इससे अन्नप्रणाली (एसोफैगस) या वायु नली (ट्रेकिआ) को नुकसान पहुंच सकता है.
  • गर्दन में चोट: अचानक और तेज़ छींकने पर गर्दन की मांसपेशियों या लिगामेंट्स में खिंचाव या चोट लग सकती है. हालांकि यह जानलेवा नहीं होता, पर इससे गंभीर दर्द और असुविधा हो सकती है.

छींकने से जुड़े खतरों को कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

  • छींक को रोकने की कोशिश न करें. जब आपको छींक आए, तो उसे स्वाभाविक रूप से निकलने दें. अपनी नाक और मुंह को कसकर बंद करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर के अंदर दबाव बढ़ सकता है, जो खतरनाक हो सकता है.
  • ठीक से छींकें. छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिश्यू या अपनी कोहनी से ढंकें. यह न केवल दूसरों तक कीटाणुओं को फैलने से रोकता है, बल्कि दबाव को भी थोड़ा कम कर सकता है.
  • धूल और एलर्जी से बचें. अगर आपको एलर्जी है, तो उन चीजों से दूर रहें जो आपको छींकने पर मजबूर करती हैं. एलर्जी की दवाएं लेने पर भी विचार करें.
  • स्वस्थ रहें. अपनी हड्डियों और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें.
  • लक्षणों पर ध्यान दें. अगर आपको छींकने के बाद अचानक तेज सिरदर्द, छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • छींकना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इससे डरने की ज़रूरत नहीं है. हालांकि, ऊपर बताई गई दुर्लभ जटिलताओं के बारे में जानकारी रखना और सावधानी बरतना बुद्धिमानी है. खासकर यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है. अपनी सेहत को लेकर कोई भी
  • असामान्य लक्षण दिखने पर हमेशा डॉक्टर की सलाह लें.

ये भी पढ़ें: जरा-सा कुछ लगते ही निकल जाती है चीख, जानें किस बीमारी से पैरों में होती है यह तकलीफ

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

ब्लॉटिंग को कहें बाय-बाय, आजमाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे

ब्लॉटिंग को कहें बाय-बाय, आजमाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे


Home remedies for Bloating: क्या आपको अक्सर ऐसा महसूस होता है कि पेट गुब्बारे जैसा फूल गया है? खाने के कुछ घंटों बाद ही जी भारी लगने लगता है, कपड़े टाइट लगते हैं और मूड भी खराब हो जाता है? अगर हां तो आप अकेली नहीं हैं, यह समस्या है ब्लॉटिंग की, जो आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी खानपान की एक आम समस्या बन चुकी है.

डॉ. लोकेन्द्र गौड़ बताते हैं कि, हर बार दवा की ज़रूरत नहीं पड़ती. हमारे रसोईघर में ही ऐसे कई घरेलू नुस्खे छिपे हैं जो इस परेशानी से राहत दिला सकते हैं. ब्लॉटिंग यानी पेट का फुल जाना, गैस बनना और पेट में भारीपन महसूस होना, ये न केवल शारीरिक असहजता लाता है, बल्कि आत्मविश्वास और एनर्जी को भी गिरा देता है.

ये भी पढ़े- पीरियड्स में ब्लड के कलर से पता करें अपनी सेहत, ये है तरीका

सौंफ और अजवाइन का चूर्ण

सौंफ और अजवाइन दोनों ही पेट की गैस और ब्लॉटिंग के लिए बेहद कारगर हैं. बराबर मात्रा में दोनों को भूनकर पीस लें और भोजन के बाद आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें. इससे पाचन सुधरता है और गैस नहीं बनती.

अदरक का पानी या चाय

अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पेट की सूजन और गैस को कम करते हैं. एक छोटा टुकड़ा अदरक उबालकर उसका पानी पिएं या अदरक की चाय लें, दिन में एक या दो बार.

हिंग वाला गर्म पानी

हींग गैस की समस्या के लिए सबसे पुराना आयुर्वेदिक उपाय है. एक चुटकी हींग को गुनगुने पानी में मिलाकर पिएं. चाहें तो इसे नाभि के आसपास भी लगा सकते हैं, यह तुरंत राहत देगा.

पुदीना और नींबू का रस

पुदीना और नींबू दोनों ही पेट को ठंडक पहुंचाते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं. पुदीने के पत्तों का रस निकालें, उसमें नींबू और थोड़ा सा नमक मिलाएं और भोजन के बाद लें.

गुनगुना नींबू पानी

सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू मिलाकर पीने से न सिर्फ पाचन सुधरता है, बल्कि शरीर डिटॉक्स भी होता है। यह आदत ब्लॉटिंग को दूर करने में काफी मददगार है.

ब्लॉटिंग भले ही आम समस्या हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. हर बार दवा लेना भी सही उपाय नहीं है, इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपने पेट को राहत दे सकते हैं और हर दिन हल्कापन महसूस कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: किस बीमारी से जूझ रहीं पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की दोनों बेटियां, जानें ये कितनी खतरनाक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

पेट में कभी नहीं होगी कैंसर की एंट्री, इन सुपरफूड्स को खाने की डाल लें आदत

पेट में कभी नहीं होगी कैंसर की एंट्री, इन सुपरफूड्स को खाने की डाल लें आदत


हम जो खाते हैं, वह हमारे पाचन तंत्र पर सीधा असर डालता है. कुछ फूड आइटम्स पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सूजन और सेल्स डैमेज हो सकती हैं. यही दिक्कत धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले सकती है. वहीं, कुछ फूड आइटम्स में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी यौगिक और अन्य फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं और कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकते हैं.

संतरे, नींबू, अंगूर और अन्य खट्टे फल विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. ये कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है. इनमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स कैंसर कोशिकाओं को फैलने से भी रोकते हैं. इन्हें नियमित रूप से खाने से आपके पेट की परत यानि अंदरूनी लेयर की रक्षा होती है और कैंसर का खतरा कम होता है.

संतरे, नींबू, अंगूर और अन्य खट्टे फल विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. ये कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है. इनमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स कैंसर कोशिकाओं को फैलने से भी रोकते हैं. इन्हें नियमित रूप से खाने से आपके पेट की परत यानि अंदरूनी लेयर की रक्षा होती है और कैंसर का खतरा कम होता है.

पालक, केल, ब्रोकोली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां विटामिन, खनिज और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं, जो अपने शक्तिशाली कैंसर-रोधी गुणों के लिए जानी जाती हैं. इनमें ग्लूकोसिनोलेट्स नामक कम्पोनेंट होते हैं, जो शरीर में इंडोल-3-कार्बिनोल और सल्फोराफेन में परिवर्तित होते हैं. ये कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं. ये शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी हैं, जो डीएनए को नुकसान से बचाते हैं.

पालक, केल, ब्रोकोली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां विटामिन, खनिज और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं, जो अपने शक्तिशाली कैंसर-रोधी गुणों के लिए जानी जाती हैं. इनमें ग्लूकोसिनोलेट्स नामक कम्पोनेंट होते हैं, जो शरीर में इंडोल-3-कार्बिनोल और सल्फोराफेन में परिवर्तित होते हैं. ये कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं. ये शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी हैं, जो डीएनए को नुकसान से बचाते हैं.

इन सब्जियों में बेहतरीन एलिल सल्फाइड कम्पोनेंट होते हैं, जिनका काम कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकना होता है. सबसे अहम यह है कि ये ट्यूमर बनने की प्रक्रिया में भी रुकावट डालते हैं. कई स्टडी में बताया गया है कि इन्हें लगातार खाने से पेट के कैंसर का खतरा कम होता है.

इन सब्जियों में बेहतरीन एलिल सल्फाइड कम्पोनेंट होते हैं, जिनका काम कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकना होता है. सबसे अहम यह है कि ये ट्यूमर बनने की प्रक्रिया में भी रुकावट डालते हैं. कई स्टडी में बताया गया है कि इन्हें लगातार खाने से पेट के कैंसर का खतरा कम होता है.

जई, ब्राउन राइस, साबुत गेहूं की रोटी, बीन्स और दाल जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं. हेल्दी पाचन तंत्र के लिए फाइबर महत्वपूर्ण होता है और पेट के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो ये फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन तंत्र को सुचारू रखते हैं और मल त्याग को नियमित करते हैं.

जई, ब्राउन राइस, साबुत गेहूं की रोटी, बीन्स और दाल जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं. हेल्दी पाचन तंत्र के लिए फाइबर महत्वपूर्ण होता है और पेट के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो ये फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन तंत्र को सुचारू रखते हैं और मल त्याग को नियमित करते हैं.

ग्रीन टी में कैटेचिन काफी ज्यादा होता है. इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट कैंसर की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है. यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्हें खत्म करने में मदद कर सकती है.

ग्रीन टी में कैटेचिन काफी ज्यादा होता है. इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट कैंसर की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है. यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्हें खत्म करने में मदद कर सकती है.

हल्दी में करक्यूमिन नामक एक्टिव कम्पोनेंट होता है, जिसमें ताकतवर एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. करक्यूमिन को कैंसर कोशिकाओं के विकास और उन्हें फैलने से रोकने में फायदेमंद माना जाता है.

हल्दी में करक्यूमिन नामक एक्टिव कम्पोनेंट होता है, जिसमें ताकतवर एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. करक्यूमिन को कैंसर कोशिकाओं के विकास और उन्हें फैलने से रोकने में फायदेमंद माना जाता है.

Published at : 11 Jul 2025 03:08 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

हेल्थ वेब स्टोरीज



Source link

पीरियड्स में ब्लड के कलर से पता करें अपनी सेहत, ये है तरीका

पीरियड्स में ब्लड के कलर से पता करें अपनी सेहत, ये है तरीका


Period Blood Health Indicators: हर महीने जब एक महिला को पीरियड्स होते हैं, तो यह केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं होती, यह शरीर का एक ख़ास तरीका होता है यह बताने का कि अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं। लेकिन सवाल यह उठता है कि, क्या हम उस संकेत को समझ पाते हैं? हम में से अधिकतर महिलाएं पीरियड्स के समय सिर्फ दर्द, मूड स्विंग्स या ब्लीडिंग की मात्रा पर ध्यान देती हैं, लेकिन एक बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, ब्लड का रंग. यह रंग हल्का गुलाबी भी हो सकता है, गहरा लाल, भूरा या काला तक भी हो सकता है.

इस पर डॉ. तान्या कहती हैं कि “पीरियड ब्लड का कलर महिलाओं की सेहत का सबसे सटीक इंडिकेटर है. अगर महिलाएं इसे समझना सीख जाएं, तो बहुत-सी बीमारियों और हार्मोनल समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है. तो आइए जानें, पीरियड ब्लड के रंगों का मतलब क्या होता है और वो आपकी सेहत के बारे में क्या बताते हैं.

ये भी पढ़े- बरसात में बैंगन खाना क्या वाकई होता है खतरनाक? जान लीजिए जवाब

चमकदार या गहरा लाल रंग

अगर पीरियड ब्लड चमकदार या गहरा लाल है, तो यह सामान्य और हेल्दी संकेत है. इसका मतलब है कि ब्लड फ्लो रेगुलर है और आपके हार्मोन संतुलित हैं. यह रंग पीरियड्स के पहले दो दिनों में आमतौर पर देखने को मिलता है.

हल्का गुलाबी या पतला ब्लड

अगर ब्लड बहुत हल्का या गुलाबी रंग का है, तो यह आयरन की कमी, हार्मोनल असंतुलन या पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है. कई बार बहुत एक्सरसाइज़ करने वाली महिलाओं को भी ऐसा ब्लड दिखता है.

गाढ़ा भूरा या काला ब्लड

पीरियड की शुरुआत या अंत में यह रंग आम है, क्योंकि यह ‘पुराना ब्लड’ होता है जो शरीर से धीरे-धीरे बाहर निकलता है. लेकिन अगर ये रंग पूरे पीरियड्स में बना रहे, तो ये इन्फेक्शन या किसी अन्य गड़बड़ी का संकेत हो सकता है.

नारंगी या ग्रे रंग का ब्लड

अगर ब्लड नारंगी या ग्रे दिखे और उसमें बदबू हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है, जैसे बैक्टीरियल वैजिनोसिस या एसटीडी. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है.

थक्कों के साथ ब्लड

थोड़े-बहुत थक्के आना सामान्य है, लेकिन अगर वे बड़े और बार-बार आएं, तो यह यूटेराइन फाइब्रॉइड्स या हार्मोनल इम्बैलेंस की ओर इशारा कर सकता है.

ये भी पढ़ें: किस बीमारी से जूझ रहीं पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की दोनों बेटियां, जानें ये कितनी खतरनाक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp