घर बैठे कैसे करें ब्लड शुगर टेस्ट, जानिए जांच करने का सही समय

घर बैठे कैसे करें ब्लड शुगर टेस्ट, जानिए जांच करने का सही समय


How to Check Blood Sugar at Home: आज के समय में डायबिटीज की समस्या काफी लोगों को हो रही है. डायबिटीज को कंट्रोल में रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करना। लेकिन क्या हर बार डॉक्टर के पास जाना जरूरी है? क्योंकि अब आप घर पर ही आसानी से ब्लड शुगर टेस्ट कर सकते हैं, वो भी बिल्कुल सही तरीके से.

मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. माधव धर्मे बताते हैं कि ब्लड शुगर की नियमित जांच घर पर करना न सिर्फ सुविधाजनक है, बल्कि यह आपकी सेहत को बिगड़ने से बचाने का पहला कदम भी हो सकता है. आइए जानते हैं कि घर पर ब्लड शुगर चेक करने का सही तरीका क्या है, इसके लिए कौन-कौन से उपकरण चाहिए और यह कब करना सबसे ज्यादा असरदार होता है.

  • ब्लड शुगर जांच के लिए आप ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • एक डिजिटल ग्लूकोमीटर डिवाइस
  • टेस्ट स्ट्रिप्स (ग्लूकोमीटर के ब्रांड के अनुसार)
  • लैंसिंग डिवाइस (उंगली में सूई चुभोने के लिए)

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कॉटन या सैनिटाइजर

  • इन सभी चीजों का उपयोग करना बहुत आसान है और इनसे आप 5 मिनट में सटीक परिणाम पा सकते हैं
  • ब्लड शुगर टेस्ट करने का सही समय फास्टिंग ब्लड शुगर: सुबह खाली पेट
  • प्रांडियल टेस्ट: खाने के 2 घंटे बाद
  • रैंडम टेस्ट: किसी भी समय जब आपको कमजोरी, थकान, ज्यादा प्यास या पेशाब जैसी लक्षण महसूस हों
  • बेडटाइम शुगर: सोने से पहले भी शुगर जांची जा सकती है

ब्लड शुगर चेक करने की प्रक्रिया

  • सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धो लें और सुखा लें
  • लैंसिंग डिवाइस से अपनी किसी एक उंगली के साइड में हल्का सा चुभाएं
  • निकले हुए खून की एक बूंद टेस्ट स्ट्रिप पर लगाएं और उसे ग्लूकोमीटर में डालें
  • कुछ ही सेकंड्स में स्क्रीन पर आपकी ब्लड शुगर रीडिंग आ जाएगी
  • इस्तेमाल की गई सूई और स्ट्रिप को सुरक्षित तरीके से डिस्पोज करें

घर पर ब्लड शुगर जांचना अब कोई मुश्किल काम नहीं है. थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से आप अपने शुगर लेवल को समय पर ट्रैक कर सकते हैं और किसी भी तरह की जटिलता से बच सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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खीरा खाने के बाद तुरंत पानी पीना सही या गलत? जानिए सच्चाई

खीरा खाने के बाद तुरंत पानी पीना सही या गलत? जानिए सच्चाई


Water after eating Cucumber: गर्मियों का मौसम हो या बारिश की उमस, खीरा एक ऐसा फल-सब्ज़ी है जिसे लोग ठंडक पाने और हाइड्रेट रहने के लिए बड़े चाव से खाते हैं. सलाद में, रायते में या ऐसे ही नमक लगाकर, खीरा हर रूप में फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जब बात आती है इसके साथ पानी पीने की तो अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या खीरा खाने के तुरंत बाद पानी पीना सही है?

कुछ लोग मानते हैं कि इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता, जबकि अन्य का कहना है कि इससे पेट में गैस, दर्द या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी विषय पर डाइटिशियन प्रिया पालन का कहना है कि खीरा खाने के बाद तुरंत पानी पीना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. आइए जानें इसकी वजह क्या है और सही तरीका क्या है.

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खीरे और पानी एकसाथ पीना चाहिए या नहीं

खीरे में लगभग 95% पानी होता है, यानी ये खुद ही एक हाइड्रेटिंग फूड है. इसे खाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी और मिनरल्स मिलते हैं. ऐसे में अगर आप इसके तुरंत बाद पानी पीते हैं, तो शरीर में पानी की अधिकता हो सकती है, जिससे पेट भारी महसूस होता है और पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है.

खीरा खाने के बाद तुरंत पानी पीना

  • पेट में गैस और ब्लोटिंग
  • पाचन क्रिया धीमी होना
  • एसिडिटी या खट्टी डकारें आना
  • सर्दी-जुकाम की संभावना

क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद के अनुसार, खीरे जैसी जलयुक्त चीजें खाने के तुरंत बाद पानी पीना वात और कफ की असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती है. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से खीरे और पानी का एक साथ सेवन शरीर में ठंडक बढ़ा देता है, जिससे सर्दी और पाचन की समस्याएं हो सकती हैं.

खीरे खाने के बाद पानी कब पिएं?

अगर आपने खीरा खाया है, तो कम से कम 20 से 30 मिनट तक पानी पीने से बचें। इससे पाचन तंत्र को खीरे को ठीक से पचाने का समय मिलेगा और शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा. यदि प्यास लगे ही तो हल्का गुनगुना पानी या एक-एक घूंट सादा पानी पी सकते हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में ठंडा पानी पीना टालें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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गर्दन के दर्द से पाना है छुटकारा, रोज करें ये 6 काम

गर्दन के दर्द से पाना है छुटकारा, रोज करें ये 6 काम


सही मुद्रा में बैठें: जब भी आप बैठें तो पीठ सीधी रखें, कंधे ढीले हों और स्क्रीन आपकी आंखों के लेवल पर हो. गलत पोस्चर से होने वाला दबाव गर्दन की मांसपेशियों पर नहीं पड़ता और दर्द से बचाव होता है.

मोबाइल यूज करते समय गर्दन न झुकाएं: मोबाइल को आंखों की सीध में लाकर देखें और बार-बार गर्दन को स्ट्रेच करें.

मोबाइल यूज करते समय गर्दन न झुकाएं: मोबाइल को आंखों की सीध में लाकर देखें और बार-बार गर्दन को स्ट्रेच करें. “टेक नेक” जैसी स्थिति से बचा जा सकता है, जो मोबाइल की वजह से होने वाला सबसे आम दर्द है.

गर्म पानी से सेक करें: गर्दन पर हल्के गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड से 15 मिनट तक सेक करें.गर्माहट मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और जकड़न कम करती है.

गर्म पानी से सेक करें: गर्दन पर हल्के गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड से 15 मिनट तक सेक करें.गर्माहट मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और जकड़न कम करती है.

हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें: दिन में 2 बार गर्दन को दाएं-बाएं घुमाएं, ऊपर-नीचे झुकाएं और रोटेशन करें.ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों की लचीलापन बढ़ता है.

हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें: दिन में 2 बार गर्दन को दाएं-बाएं घुमाएं, ऊपर-नीचे झुकाएं और रोटेशन करें.ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों की लचीलापन बढ़ता है.

तकिया और सोने की पोजिशन पर ध्यान दें: ना बहुत ऊंचा तकिया लें, ना बहुत सख्त। पीठ के बल सोने की आदत डालें. सोते वक्त गर्दन को सही सपोर्ट मिलने से दर्द की आशंका कम होती है.

तकिया और सोने की पोजिशन पर ध्यान दें: ना बहुत ऊंचा तकिया लें, ना बहुत सख्त। पीठ के बल सोने की आदत डालें. सोते वक्त गर्दन को सही सपोर्ट मिलने से दर्द की आशंका कम होती है.

लंबे समय तक एक ही पोजिशन में न रहें: हर 30- मिनट में एक बार उठकर थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें.गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार दबाव नहीं पड़ता और दर्द से राहत मिलती है.

लंबे समय तक एक ही पोजिशन में न रहें: हर 30- मिनट में एक बार उठकर थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें.गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार दबाव नहीं पड़ता और दर्द से राहत मिलती है.

Published at : 10 Jul 2025 06:51 PM (IST)

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शवासन करने के 6 बड़े फायदे, जानें करने का सही तरीका

शवासन करने के 6 बड़े फायदे, जानें करने का सही तरीका


मानसिक तनाव से छुटकारा: शवासन शरीर को गहरी नींद जैसे विश्राम की स्थिति में ले जाता है, जिससे तनाव और चिंता में कमी आती है.

अच्छी नींद के लिए फायदेमंद:  शवासन से शरीर और मस्तिष्क रिलैक्स होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है. अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्रभावी उपाय है.

अच्छी नींद के लिए फायदेमंद: शवासन से शरीर और मस्तिष्क रिलैक्स होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है. अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्रभावी उपाय है.

उच्च रक्तचाप में राहत: यह आसन दिल की धड़कन को संतुलित करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है. हाई बीपी के मरीजों के लिए शवासन एक प्राकृतिक चिकित्सा की तरह काम करता है.

उच्च रक्तचाप में राहत: यह आसन दिल की धड़कन को संतुलित करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है. हाई बीपी के मरीजों के लिए शवासन एक प्राकृतिक चिकित्सा की तरह काम करता है.

ध्यान और एकाग्रता में सुधार: शवासन में गहरी सांसों पर ध्यान देना और शरीर को महसूस करना ध्यान केंद्रित करने की आदत को मजबूत करता है. स्टूडेंट्स के लिए यह एक शानदार मेडिटेशन प्रैक्टिस है.

ध्यान और एकाग्रता में सुधार: शवासन में गहरी सांसों पर ध्यान देना और शरीर को महसूस करना ध्यान केंद्रित करने की आदत को मजबूत करता है. स्टूडेंट्स के लिए यह एक शानदार मेडिटेशन प्रैक्टिस है.

मांसपेशियों को देता है पूरा आराम: शरीर के हर हिस्से को ढीला छोड़ना मांसपेशियों की थकान को दूर करता है. वर्कआउट के बाद या शरीर में दर्द होने पर यह आसन सबसे अधिक आराम देता है.

मांसपेशियों को देता है पूरा आराम: शरीर के हर हिस्से को ढीला छोड़ना मांसपेशियों की थकान को दूर करता है. वर्कआउट के बाद या शरीर में दर्द होने पर यह आसन सबसे अधिक आराम देता है.

शवासन करने का सही तरीका:  पीठ के बल सीधा लेट जाएं, दोनों हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर आंखें बंद करें और सांसों पर ध्यान दें. पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें, 10 मिनट तक इसी स्थिति में रहें.

शवासन करने का सही तरीका: पीठ के बल सीधा लेट जाएं, दोनों हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर आंखें बंद करें और सांसों पर ध्यान दें. पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें, 10 मिनट तक इसी स्थिति में रहें.

Published at : 10 Jul 2025 05:39 PM (IST)

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एंग्जायटी, डिप्रेशन और स्लीप मेडिसिन से बिगड़ रही मेंटल हेल्थ, इस स्टडी में हुआ खुलासा

एंग्जायटी, डिप्रेशन और स्लीप मेडिसिन से बिगड़ रही मेंटल हेल्थ, इस स्टडी में हुआ खुलासा


हाल ही में हाल ही में जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ( जामा/ JAMA) में प्रकाशित एक गंभीर अध्ययन ने हमारे सामने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है. यह शोध बताता है कि 2008 से 2017 के बीच जन्मे बच्चों में अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी है.

बचपन में सांसों पर संकट

स्टडी के अनुसार, पिछले कुछ साल के दौरान जन्मे बच्चों में अस्थमा की व्यापकता में वृद्धि देखी गई है. यह एक ऐसी पुरानी सांस संबंधी बीमारी है, जो बच्चों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है. हालांकि अध्ययन में सीधे 1.5 करोड़ बच्चों में अस्थमा की आशंका का सटीक आंकड़ा नहीं बताया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि अस्थमा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गई है और इसकी व्यापकता बढ़ रही है.

अस्थमा बढ़ने के संभावित कारण

  • बढ़ता वायु प्रदूषण: गाड़ियों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य प्रदूषक तत्व बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
  • एलर्जी और पर्यावरणीय ट्रिगर्स: धूल के कण, पालतू जानवरों की रूसी, पराग और फफूंद जैसे एलर्जेन अस्थमा के हमलों को ट्रिगर कर सकते हैं.
  • हेरिडिटी: अगर परिवार में अस्थमा या एलर्जी की हिस्ट्री रही है तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है.
  • बदलती लाइफस्टाइल: कम शारीरिक गतिविधि और घर के अंदर ज़्यादा समय बिताने से बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर पड़ सकता है.

मेंटल हेल्थ पर भी खतरा

जामा अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण पहलू बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ता बोझ है.

  • स्ट्रेस और डिप्रेशन: बच्चों और किशोरों में स्ट्रेस और डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आज के बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया का तनाव और बदलती सामाजिक परिस्थितियां उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं. यह मानसिक तनाव न केवल उनके मन को प्रभावित करता है, बल्कि उनके शारीरिक स्वास्थ्य को भी बिगाड़ सकता है.
  • स्लीप मेडिसिन: बच्चों में नींद से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं. कुछ मामलों में तो उन्हें नींद लाने वाली दवाओं का सहारा भी लेना पड़ रहा है. पर्याप्त और अच्छी नींद न मिलने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुकता है, उनकी एकाग्रता बिगड़ती है और वे चिड़चिड़े हो सकते हैं.

यह खतरे की घंटी

जामा स्टडी हमें एक गहरी चिंता की ओर धकेलती है. हमारे बच्चे, जो देश का भविष्य हैं, अगर बचपन से ही इतनी गंभीर बीमारियों से जूझेंगे, तो हम कैसे एक स्वस्थ और मजबूत पीढ़ी की उम्मीद कर सकते हैं? इस स्थिति को बदलने के लिए हमें तुरंत कदम उठाने होंगे.

  • बच्चों में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना: उन्हें खेलकूद के लिए प्रेरित करना और खेलने के लिए सुरक्षित जगहें उपलब्ध कराना.
  • मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: स्कूलों और घरों में मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना और ज़रूरत पड़ने पर मदद लेना सिखाना.
  • संतुलित आहार: बच्चों को पौष्टिक भोजन खाने की आदत डालना.
  • प्रदूषण कम करना: पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयास करना.

ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी के इन महीनों में बना सकते हैं शारीरिक संबंध, ज्यादातर लोग नहीं जानते ये बात

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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खांसी-जुकाम से परेशान हैं? ये घरेलू उपाय देंगे फौरन आराम

खांसी-जुकाम से परेशान हैं? ये घरेलू उपाय देंगे फौरन आराम


अदरक-शहद का जादू: एक छोटा चम्मच अदरक का रस लें और उसमें आधा चम्मच शहद मिलाएं. दिन में दो बार सेवन करें. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और शहद गले को कोमल बनाता है. यह मिश्रण सूखी और कफ वाली दोनों प्रकार की खांसी में राहत देता है.

भाप लेना: एक बड़े बर्तन में गर्म पानी लें, उसमें अजवाइन या नीलगिरी का तेल डालें और तौलिए से सिर ढककर भाप लें. नाक की जकड़न, गले की खराश और छाती में जमा बलगम को बाहर निकालने में बेहद असरदार है.

भाप लेना: एक बड़े बर्तन में गर्म पानी लें, उसमें अजवाइन या नीलगिरी का तेल डालें और तौलिए से सिर ढककर भाप लें. नाक की जकड़न, गले की खराश और छाती में जमा बलगम को बाहर निकालने में बेहद असरदार है.

तुलसी-काली मिर्च काढ़ा: तुलसी की 10 पत्तियों को पानी में उबालें, उसमें 3 काली मिर्च और थोड़ा सा अदरक डालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. यह काढ़ा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और वायरस से लड़ने में मदद करता है.

तुलसी-काली मिर्च काढ़ा: तुलसी की 10 पत्तियों को पानी में उबालें, उसमें 3 काली मिर्च और थोड़ा सा अदरक डालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. यह काढ़ा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और वायरस से लड़ने में मदद करता है.

नमक के पानी से गरारे: गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालें और दिन में 2 बार गरारे करें. गले की खराश, इन्फेक्शन और सूजन में तुरंत आराम देता है. बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक है.

नमक के पानी से गरारे: गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालें और दिन में 2 बार गरारे करें. गले की खराश, इन्फेक्शन और सूजन में तुरंत आराम देता है. बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक है.

हल्दी वाला दूध: रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं.हल्दी में मौजूद करक्यूमिन शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करता है और इम्युनिटी बढ़ाता है.

हल्दी वाला दूध: रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं.हल्दी में मौजूद करक्यूमिन शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करता है और इम्युनिटी बढ़ाता है.

पुदीना और शहद का मिश्रण: पुदीना के पत्तों को उबालकर उसका अर्क निकालें और उसमें शहद मिलाएं. दिन में एक बार पिएं. पुदीना नाक बंद होने पर खोलता है और गले को ठंडक देता है. शहद सूखी खांसी में राहत देता है.

पुदीना और शहद का मिश्रण: पुदीना के पत्तों को उबालकर उसका अर्क निकालें और उसमें शहद मिलाएं. दिन में एक बार पिएं. पुदीना नाक बंद होने पर खोलता है और गले को ठंडक देता है. शहद सूखी खांसी में राहत देता है.

Published at : 10 Jul 2025 05:00 PM (IST)

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