सरसों का तेल मिलावटी सेहत के लिए कितना खतरनाक? इतनी बीमारियों को देता है दावत
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दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों का जिक्र हो तो कैंसर का नाम जरूर लिया जाता है. क्या आपको पता है कि कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जहां रहने वाले लोग कैंसर की चपेट में जल्दी आते हैं. आइए आपको ऐसे राज्यों से रूबरू कराते हैं, जिससे आप भी जान सकें कि इस लिस्ट में आपका राज्य तो नहीं?
कैंसर के मामले सिर्फ भारत में ही सामने नहीं आते हैं, बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश यानी अमेरिका में भी मौत की प्रमुख वजहों में से कैंसर एक है. साल 2024 के दौरान ही अमेरिका में 20 लाख से ज्यादा कैंसर के नए मामले रिपोर्ट किए गए. इस खतरनाक बीमारी के फैलने के पीछे कई चीजें जिम्मेदार होती हैं, जिनमें हेरेडिटी से लेकर लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजें जैसे डाइट, एक्सरसाइज और स्मोकिंग आदि शामिल हैं. इन सभी चीजों का असर ओवरऑल सेहत पर पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जहां रहते हैं, उसकी वजह से भी यह बीमारी आपको अपनी चपेट में ले सकती है.
नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के मुताबिक, अमेरिका में कैंसर के मामले मिलने की दर अलग-अलग हैं. वहीं, कुछ इलाकों में तो कैंसर के केसेज अन्य इलाकों के मुकाबले काफी ज्यादा मिलते हैं. यहां कैंसर के मामले ज्यादा मिलने के पीछे कई वजह हैं, जिनमें हेल्थ सर्विसेज के बेसिक एक्सेस से लेकर एयर पॉल्यूशन और केमिकल जैसे एनवायरनमेंट स्ट्रेस आदि शामिल हैं. कुछ राज्यों में बेहद खास इंडस्ट्रीज हैं, जिनसे कैंसर फैलाने वाले तत्वों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, कुछ राज्यों में ऐसी आबादी रहती है, जो बेहतर लाइफस्टाइल के लिए जद्दोजहद कर रही है.
इस राज्य में कैंसर से होती हैं सबसे ज्यादा मौतें
अमेरिका के केंटकी राज्य में कैंसर से सबसे मौतें होती हैं. यहां स्मोकिंग की वजह से कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं, जो पूरे अमेरिका में सबसे ज्यादा है. कैंसर की वजह से जान गंवाने वाले 50 पर्सेंट से ज्यादा लोग इसी राज्य से ताल्लुक रखते हैं. वहीं, इस राज्य के लोगों को कैंसर होने की दूसरी वजह मोटापा है. यहां 36 पर्सेंट पुरुष और 32 पर्सेंट महिलाएं मोटापे से पीड़ित हैं.
इस राज्य में ब्रेस्ट-लंग, प्रोस्टेट और स्किन कैंसर के केस ज्यादा
अमेरिका के लोवा राज्य में लंग कैंसर की वजह से मौत के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं. इसके अलावा ब्रेस्ट, स्किन और प्रोस्टेट कैंसर के मामलों की भी कमी नहीं है. यहां स्मोकिंग रेट के अलावा केमिकल और एग्रीकल्चर पेस्टिसाइड्स भी कैंसर होने की प्रमुख वजहों में से एक है.
लुसियाना में कैंसर केसेज दूसरे राज्यों के मुकाबले 40 पर्सेंट से भी ज्यादा
पूरे अमेरिका में कैंसर केसेज की बात करें तो 40 फीसदी से ज्यादा मामले लुसियाना में सामने आते हैं. यहां कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी दूसरे राज्यों से ज्यादा है. यहां प्रोस्टेट, लंग, कोलोरेक्टल और ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा मिलते हैं.
इन राज्यों में भी हालत बेहद खराब
अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया राज्य में भी हालात बेहद खराब हैं. यहां आठ में से एक शख्स कैंसर से लड़कर जान बचा चुका है, जबकि 25 पर्सेंट बुजुर्ग कभी न कभी कैंसर की चपेट में आ चुके हैं. वहीं, अर्कांसस राज्य में भी मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह कैंसर है. 2017 और 2020 के दौरान कैंसर के मामलों में यह राज्य सबसे आगे था. उधर, दूसरे राज्यों के मुकाबले नेब्रास्का में कैंसर से मौत सबसे ज्यादा होती हैं तो न्यू जर्सी में भी हालात बेहद खराब हैं. वहीं, अन्य राज्यों जैसे मेन, न्यूयॉर्क और मिसीसिपी में कैंसर के मामले काफी ज्यादा सामने आते हैं.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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<p style="text-align: justify;">आपके सिर में लगातार झुनझुनी महसूस होना एक आम बात लग सकती है, लेकिन इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह सिर्फ एक मामूली समस्या नहीं, बल्कि कभी-कभी किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। अगर आपको यह लगातार महसूस हो रही है, तो तुरंत सावधान हो जाएं और डॉक्टर से सलाह लें।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर में झुनझुनी की क्या हो सकती हैं वजह?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गाजियाबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल में मेडिसिन और जनरल फिजिशियन डॉ. एपी सिंह के मुताबिक, सिर में झुनझुनी महसूस होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ सामान्य होते हैं तो कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>तनाव और चिंता:</strong> बहुत ज़्यादा स्ट्रेस या चिंता होने पर मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है, जिससे सिर या गर्दन में झुनझुनी महसूस हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>माइग्रेन या सिरदर्द:</strong> कुछ लोगों को माइग्रेन के हमले से पहले या उसके दौरान सिर में झुनझुनी महसूस होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कमजोर रक्त संचार:</strong> अगर सिर तक खून का बहाव ठीक से नहीं हो पा रहा है, तो झुनझुनी हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>गर्दन की समस्या:</strong> गर्दन की नस पर दबाव पड़ने से भी सिर में झुनझुनी महसूस हो सकती है. खासकर अगर आप गलत पोजीशन में सोए हों या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे हों.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>विटामिन की कमी:</strong> शरीर में कुछ विटामिन (जैसे विटामिन बी12) की कमी से नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे झुनझुनी महसूस होती है.</li>
</ul>
<p><strong>इन गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत</strong></p>
<ul>
<li><strong>मल्टीपल स्क्लेरोसिस:</strong> यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) नसों के ऊपर की सुरक्षात्मक परत (माइलिन शीथ) को नुकसान पहुंचाती है. इससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संकेतों का आदान-प्रदान बाधित होता है और झुनझुनी, सुन्नता, कमज़ोरी या संतुलन की समस्या जैसे लक्षण दिख सकते हैं. सिर में लगातार झुनझुनी एमएस का एक शुरुआती लक्षण हो सकती है.</li>
<li><strong>स्ट्रोक:</strong> दुर्लभ मामलों में, सिर में अचानक और गंभीर झुनझुनी स्ट्रोक का संकेत हो सकती है. स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह रुक जाता है. इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान होता है. इसके साथ चेहरे या शरीर के एक तरफ सुन्नता, कमजोरी, बोलने में दिक्कत या देखने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।</li>
<li><strong>ट्यूमर:</strong> मस्तिष्क में ट्यूमर भी आसपास की नसों पर दबाव डाल सकता है, जिससे सिर में झुनझुनी या सुन्नता महसूस हो सकती है.</li>
<li><strong>डायबिटिक न्यूरोपैथी:</strong> अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज का रोगी है तो लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ने से नसों को नुकसान हो सकता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं. यह आमतौर पर पैरों और हाथों को प्रभावित करती है, लेकिन कभी-कभी सिर में भी झुनझुनी का कारण बन सकती है.</li>
<li><strong>नर्व डैमेज:</strong> किसी चोट, संक्रमण या अन्य स्थिति के कारण सिर या गर्दन की नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे लगातार झुनझुनी महसूस हो सकती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब हों सावधान और डॉक्टर को दिखाएं</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आपको सिर में लगातार झुनझुनी महसूस हो रही है, खासकर अगर इसके साथ ये लक्षण भी दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं,</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">झुनझुनी के साथ कमजोरी या सुन्नता महसूस हो.</li>
<li style="text-align: justify;">चलने में संतुलन बिगड़ने लगे.</li>
<li style="text-align: justify;">बोलने में दिक्कत हो.</li>
<li style="text-align: justify;">देखने में परेशानी हो.</li>
<li style="text-align: justify;">झुनझुनी अचानक और बहुत तेज हो.</li>
<li style="text-align: justify;">यह लक्षण लगातार बने रहें या बिगड़ते जाएं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">सिर में लगातार झुनझुनी सिर्फ एक हल्की-फुल्की सनसनी नहीं हो सकती. यह आपके शरीर का एक संकेत हो सकता है कि अंदर कुछ ठीक नहीं है. घबराएं नहीं, लेकिन लापरवाही भी न करें. सही समय पर डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताएं, ताकि सही निदान हो सके और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू किया जा सके. आपकी सेहत सबसे ज्यादा जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/eyes-detect-diabetes-or-cancer-do-not-ignore-these-signs-2976157">आंखें बताती हैं इन खतरनाक बीमारियों का पता, गलती से भी न करें नजरअंदाज</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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<p style="text-align: justify;">बच्चों को स्विमिंग करवाने से क्या उनकी हाइट सच में बढ़ती है? यह सवाल कई पैरेंट्स के मन में आता है, और इसके बारे में कई बातें भी सुनने को मिलती हैं. स्विमिंग सीधे तौर पर बच्चों की हाइट नहीं बढ़ाती है. बच्चों की हाइट मुख्य रूप से उनके जेनेटिक्स पर निर्भर करती है. हालांकि, स्विमिंग को जीवनशैली का हिस्सा बनकर बच्चों को उनकी निर्धारित अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचने में मदद की जा सकती है. आइए जानते हैं, क्या है सच्चाई?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्विमिंग से बढ़ती है बच्चों की हाइट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सीधे शब्दों में कहें तो स्विमिंग सीधे तौर पर बच्चों की हाइट नहीं बढ़ाती है. बच्चों की लंबाई मुख्य रूप से उनके जीन्स पर निर्भर करती है. यानी उन्हें अपने माता-पिता से जो जीन्स मिलते हैं. वही, उनकी अधिकतम लंबाई तय करते हैं. हालांकि, स्विमिंग एक बहुत ही बेहतरीन व्यायाम है, जो बच्चों को उनकी आनुवंशिक रूप से निर्धारित अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचने में मदद कर सकती है। आइए समझते हैं कैसे….</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरीर में खिंचाव और लचीलापन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्विमिंग करते समय बच्चों के पूरे शरीर का इस्तेमाल होता है. हाथ और पैर पानी में लगातार फैलते और सिकुड़ते हैं, जिससे मांसपेशियों और जोड़ों में खिंचाव आता है. यह खिंचाव शरीर को लचीला बनाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है. एक स्वस्थ और लचीला शरीर बेहतर विकास के लिए जरूरी होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रीढ़ की हड्डी पर कम दबाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पानी में शरीर का वजन कम महसूस होता है. इससे रीढ़ की हड्डी पर ग्रेविटी या गुरुत्वाकर्षण का दबाव कम हो जाता है. जब रीढ़ पर दबाव कम होता है, तो डिस्क (रीढ़ की हड्डियों के बीच की गद्दियां) थोड़ी फैल सकती हैं, जिससे बच्चा अस्थायी रूप से थोड़ा लंबा दिख सकता है. हालांकि, यह असर स्थायी नहीं होता है और पानी से बाहर आने पर रीढ़ सामान्य स्थिति में आ जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ग्रोथ हार्मोन का बढ़ना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किसी भी तरह की नियमित कसरत, और स्विमिंग भी इसमें शामिल है, शरीर में ग्रोथ हार्मोन (वृद्धि हार्मोन) के स्राव को बढ़ाती है. ये हार्मोन हड्डियों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए, जो बच्चे सक्रिय रहते हैं, उनमें अपनी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार अधिकतम लंबाई पाने की संभावना ज्यादा होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बेहतर पोस्चर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्विमिंग से पेट और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. ये मांसपेशियां शरीर की मुद्रा (पोस्चर) को ठीक रखने में मदद करती हैं. अच्छी मुद्रा वाला बच्चा सीधा खड़ा होता है और इससे वह अपनी वास्तविक लंबाई से ज़्यादा लंबा और आत्मविश्वासी दिख सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>होलिस्टिक ग्रोथ और न्यूट्रीशियन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्विमिंग एक ऐसा व्यायाम है, जो बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ाता है. यह उनकी हड्डियों को मजबूत करती है, मांसपेशियों का विकास करती है, दिल को स्वस्थ रखती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है. एक स्वस्थ शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बेहद ज़रूरी हैं. स्विमिंग से बच्चों को अच्छी भूख भी लगती है, जिससे वे पर्याप्त पोषक तत्व ले पाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में हम समझ सकते हैं कि बच्चों की हाइट उनके जीन्स पर ही निर्भर करती है. स्विमिंग सीधे तौर पर हड्डियों की लंबाई नहीं बढ़ाती, लेकिन यह एक शानदार व्यायाम है, जो बच्चों के संपूर्ण शारीरिक विकास, बेहतर मुद्रा, मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती और सही हार्मोन स्राव में मदद करता है. ये सभी मिलकर बच्चों को उनकी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार अधिकतम ऊंचाई प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं. तो अपने बच्चों को स्विमिंग ज़रूर करवाएं, क्योंकि यह उनके समग्र स्वास्थ्य और विकास के लिए बहुत फायदेमंद है, भले ही यह सीधे तौर पर उनकी हाइट न बढ़ाए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/eyes-detect-diabetes-or-cancer-do-not-ignore-these-signs-2976157">आंखें बताती हैं इन खतरनाक बीमारियों का पता, गलती से भी न करें नजरअंदाज</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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<p style="text-align: justify;">नींद से अचानक जागने के बाद क्या हार्ट अटैक आ सकता है? यह सवाल कई लोगों के मन में होता है. सीधे शब्दों में कहें तो नींद से अचानक उठना खुद हार्ट अटैक का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जो नींद से जुड़ी समस्याओं और दिल के दौरे के खतरे को आपस में जोड़ती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्लीप और हार्ट अटैक में क्या है संबंध?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गाजियाबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल में मेडिसिन और जनरल फिजिशियन डॉ. एपी सिंह ने बताया कि नींद या स्लीप हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है और इसकी कमी या खराब गुणवत्ता हमारे दिल पर बुरा असर डाल सकती है. आइए समझते हैं कैसे:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्लीप एपनिया बड़ी वजह:</strong> स्लीप एपनिया एक गंभीर नींद की समस्या है, जहां सोते समय आपकी सांस बार-बार रुकती और चलती है. जब सांस रुकती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है. इससे दिल और खून की नसों पर बहुत दबाव पड़ता है. स्लीप एपनिया वाले लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित दिल की धड़कन, हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक का खतरा काफी ज़्यादा होता है. जब सांस रुकने के कारण अचानक नींद खुलती है, तो यह शरीर पर तनाव पैदा करता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रेस हार्मोन का बढ़ना:</strong> अगर आपको ठीक से नींद नहीं आती या आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन जैसे तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं. ये हार्मोन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकते हैं, जिससे दिल पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>सुबह के समय ज्यादा खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कुछ रिसर्च बताती हैं कि हार्ट अटैक सुबह के समय, खासकर सुबह 4 बजे से 10 बजे के बीच, ज़्यादा आते हैं. ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि इस समय हमारे शरीर की प्राकृतिक लय (सर्कैडियन रिदम) के कारण ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बढ़ जाती है, और स्ट्रेस हार्मोन का स्तर भी ऊपर होता है. अगर किसी को पहले से ही दिल की बीमारी का खतरा है और वह इस समय अचानक जागता है, तो जोखिम बढ़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खराब नींद की गुणवत्ता</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सिर्फ नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी अहम है. अगर आपको गहरी और आरामदायक नींद नहीं मिलती, या आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो यह दिल की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या करें?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आपको अक्सर रात में अचानक नींद खुल जाती है. सांस लेने में दिक्कत होती है या दिन में बहुत ज़्यादा थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें. वे आपकी समस्या की सही वजह पता लगा सकते हैं और आपको सही इलाज या लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दे सकते हैं. बता दें कि अपनी नींद की आदतों पर ध्यान देना और अगर कोई समस्या है, तो उसका इलाज करवाना आपके दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/eyes-detect-diabetes-or-cancer-do-not-ignore-these-signs-2976157">आंखें बताती हैं इन खतरनाक बीमारियों का पता, गलती से भी न करें नजरअंदाज</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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