आंखें बताती हैं इन खतरनाक बीमारियों का पता, गलती से भी न करें नजरअंदाज

आंखें बताती हैं इन खतरनाक बीमारियों का पता, गलती से भी न करें नजरअंदाज



<p style="text-align: justify;">क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखें आपकी सेहत के बारे में कितनी कुछ बता सकती हैं? यह सिर्फ आंखों की बीमारियों से कहीं बढ़कर है. दरअसल, आपके ऑप्टोमेट्रिस्ट आपकी आंखों की जांच करके कुछ बहुत ही गंभीर बीमारियां भी पकड़ सकते हैं. इनमें डायबिटीज और कुछ तरह के कैंसर तक शामिल हैं. आंखों में इन बीमारियों के लक्षण समझकर, उन्हें जल्दी पहचाना जा सकता है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है, जिससे आप अपनी सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर को कम कर सकें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आंखें हैं सेहत का आईना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कहते हैं आंखें आत्मा की खिड़की होती हैं, लेकिन सच तो यह है कि वे आपकी सेहत का भी आईना होती हैं. भले ही आप खुद अपनी आंखों में सेहत से जुड़े बदलावों को न देख पाएं, लेकिन आपके आंखों के डॉक्टर उन्हें ज़रूर पहचान सकते हैं. आंखों से जुड़ी समस्याओं को देखने के अलावा, आंखों की पूरी जांच कई बीमारियों के संकेत भी दिखा सकती है. इनमें दिमाग के ट्यूमर और कुछ दूसरे तरह के कैंसर, साथ ही डायबिटीज भी शामिल हैं. इसलिए, अपनी आंखों की जांच हर दो साल में, या हो सके तो हर साल ज़रूर करवाएं, ताकि बीमारियों के लक्षण छूट न जाएं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आंखों की जांच से डायबिटीज का पता कैसे चलता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज के लक्षणों में से एक है डायबिटिक रेटिनोपैथी. यह डायबिटीज से जुड़ी एक समस्या है जो आंखों को प्रभावित करती है. यह आंख के पिछले हिस्से में मौजूद रेटिना की खून की नसों को नुकसान पहुंचने के कारण होती है. इससे देखने में दिक्कत हो सकती है और अगर इसका इलाज न किया जाए, तो अंधापन भी हो सकता है. यह समस्या टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज, दोनों में हो सकती है. खून में शुगर का स्तर ठीक से कंट्रोल न होने पर और समय के साथ इसके होने की संभावना बढ़ जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण:</strong> शुरुआती स्टेज में डायबिटिक रेटिनोपैथी के कोई खास लक्षण दिखते नहीं हैं. लेकिन, जैसे-जैसे यह बढ़ती है, तो कुछ निशान दिखने लगते हैं, जैसे:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">देखने में काले धब्बे या धागे दिखना.</li>
<li style="text-align: justify;">धुंधला या बदलता हुआ दिखना.</li>
<li style="text-align: justify;">देखने में काले या खाली हिस्से दिखना.</li>
<li style="text-align: justify;">नज़र कम होना.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>पहचान और जांच:</strong> आपके आंखों के डॉक्टर नियमित आंखों की जांच के दौरान, जिसमें पुतलियों को फैलाना भी शामिल है, इसका पता लगा सकते हैं. अगर आपको डायबिटीज है, तो आपका ऑप्टोमेट्रिस्ट हर चेक-अप में इसे ज़रूर देखेगा. आंखों की पूरी जांच के ज़रिए, डॉक्टर रेटिना की सेहत का अंदाज़ा लगा सकते हैं, डायबिटिक रेटिनोपैथी के संकेतों को पहचान सकते हैं और नज़र के स्थायी नुकसान को रोकने के लिए जल्दी इलाज कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आंखों की सेहत और कैंसर का संबंध</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आपके आंखों के डॉक्टर एक सामान्य जांच में आंखों से जुड़े कैंसर के लक्षणों को पहचान सकते हैं. यह ओकुलर मेलानोमा (एक प्रकार का आंखों का कैंसर) या आंखों से संबंधित दूसरे कैंसर हो सकते हैं. इसके अलावा, वे दिमाग के ट्यूमर के लक्षणों को भी पहचान सकते हैं, यहां तक कि आपके नियमित डॉक्टर से भी पहले. दिमाग के ट्यूमर से दिमाग में दबाव बढ़ सकता है, जिससे ऑप्टिक नर्व में बदलाव या नुकसान हो सकता है. ऑप्टोमेट्रिस्ट आँखों में इन बदलावों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, जो दिमाग के ट्यूमर का संकेत हो सकते हैं. वे एन्यूरिज्म (खून की नसों में सूजन) और दूसरी समस्याओं का भी पता लगा सकते हैं, जो आंखों को प्रभावित करती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैंसर से जुड़े आंखों के लक्षण:</strong> आपकी आंखों में कुछ बदलाव दिख सकते हैं, जो कैंसर का संकेत हो सकते हैं. इनमें शामिल हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">आंखों में गहरे धब्बे, उभार, या असामान्य खून की नसें दिखना. ये ओकुलर मेलानोमा के लक्षण हो सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">आंखों के अंदर असामान्य वृद्धि या घाव होना. ये इंट्राओकुलर कैंसर (आंख के अंदर का कैंसर) का संकेत हो सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">अगर आपके ऑप्टोमेट्रिस्ट को इनमें से कुछ भी दिखता है और उन्हें कैंसर का शक होता है, तो वे शायद आपको आगे की जांच के लिए किसी दूसरे विशेषज्ञ के पास भेजेंगे.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>दूसरी बीमारियों के भी मिल सकते हैं संकेत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज और कैंसर के अलावा, ऑप्टोमेट्रिस्ट दूसरे स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत भी पहचान सकते हैं. इनमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ल्यूपस और रुमेटॉयड आर्थराइटिस जैसी बीमारियां शामिल हैं. इनमें से ज़्यादातर बीमारियां रेटिना की खून की नसों में अनियमितताओं के ज़रिए पहचानी जा सकती हैं. आप खुद इन बदलावों को शायद न देख पाएं, लेकिन आपका आंखों का डॉक्टर आंखों की जांच के दौरान उन्हें देख सकता है. ये जांचें न केवल आपकी नज़र को बचाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं, बल्कि सेहत से जुड़ी संभावित समस्याओं का पता लगाने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जल्दी पहचान क्यों जरूरी है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ओकुलर मेलानोमा और दूसरे इंट्राओकुलर कैंसर का जल्दी पता चलना सही इलाज शुरू करने और ठीक होने की संभावना को बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी है. आंखों में इन बीमारियों के संकेतों को पहचानकर, डॉक्टर मरीजों को तुरंत आगे की जांच और सही इलाज के लिए भेज सकते हैं. इसीलिए, हर छह महीने या साल में एक बार डॉक्टर के पास जाना आपकी सेहत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/former-cji-chandrachud-daughter-priyanka-mahi-disease-nemaline-myopathy-symptoms-treatment-2975611">किस बीमारी से जूझ रहीं पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की दोनों बेटियां, जानें ये कितनी खतरनाक?</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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दिन में एक गिलास पी लें औषधीय गुणों वाला यह जूस, कभी नहीं होगी विटामिन बी12 की कमी

दिन में एक गिलास पी लें औषधीय गुणों वाला यह जूस, कभी नहीं होगी विटामिन बी12 की कमी



<p style="text-align: justify;">कोबालामिन के नाम से मशहूर विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह रेड ब्लड सेल्स के निर्माण से लेकर डीएनए संश्लेषण और नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स जैसी गंभीर सेहत संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. आइए आपको ऐसे देसी जूस के बारे में बताते हैं, जिसे पीने के बाद विटामिन बी12 की कमी कभी नहीं होगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विटामिन बी12 की कमी कितनी खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विटामिन बी12 की कमी आजकल बेहद कॉमन प्रॉब्लम बनती जा रही है. खासकर वेजिटेरियन और वीगन डाइट फॉलो करने वालों में विटामिन बी12 अक्सर कम होता है. दरअसल, यह विटामिन मुख्य रूप से पशु-आधारित फूड प्रॉडक्ट्स जैसे मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है. हालांकि, कुछ सब्जियों, फल आदि से भी इसकी पूर्ति हो सकती है. दिल्ली की डायटीशियन डॉ. गीतांजलि सिंह (M.Sc Food and Nutrition) के मुताबिक, विटामिन बी12 की कमी से बचने के लिए नियमित रूप से बैलेंस्ड डाइट लेना जरूरी है. वहीं, शाकाहारी लोगों के लिए कुछ खास जूस इस कमी को पूरा करने में मददगार हो सकते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विटामिन बी12 की कमी के लक्षण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विटामिन बी12 की कमी के लक्षणों में थकान, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, मूड स्विंग्स और मेमोरी लॉस आदि शामिल हैं. गंभीर मामलों में यह नर्व डैमेज और दिमाग संबंधित दिक्कतों का कारण बन सकता है. नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) की स्टडी में सामने आया कि शिटेक मशरूम जैसे कुछ वेज फूड आइटम में विटामिन बी12 काफी ज्यादा होता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह जूस भी बनाता है काम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कई रिसर्च में सामने आया है कि देसी चीजों से तैयार एक जूस भी विटामिन बी12 की कमी को पूरा कर सकता है. यह जूस न केवल पौष्टिक होता है, बल्कि आसानी से बनाया भी जा सकता है. यह जूस चुकंदर, पालक, सेब और सूरजमुखी के बीजों से तैयार किया जाता है, जो विटामिन बी12 के साथ-साथ अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर है.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>चुकंदर:</strong> चुकंदर विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड का अच्छा सोर्स है. यह रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है और एनीमिया को रोकने में कारगर है. चुकंदर का जूस नियमित रूप से पीने से ब्लड में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है, जो थकान और कमजोरी को कम करता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पालक:</strong> पालक में विटामिन बी12 की थोड़ी मात्रा के साथ-साथ मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं। यह नर्वस सिस्टम को मजबूत करने और एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद करता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>सेब:</strong> सेब में विटामिन बी12 के साथ-साथ एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं. साथ ही, हार्ट हेल्थ भी बेहतर रखते हैं. सेब का नियमित सेवन विटामिन बी12 की कमी को पूरा करने के साथ-साथ हार्ट डिजीज का खतरा भी कम करता है.&nbsp;</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>सूरजमुखी के बीज:</strong> सूरजमुखी के बीज विटामिन बी12 और विटामिन ई के अहम सोर्स हैं. ये बीज न केवल पोषक तत्व देते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम भी मजबूत करते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>तुलसी और धनिया:</strong> इन जड़ी-बूटियों में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो जूस को औषधीय बनाते हैं और शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं. तुलसी और धनिया जैसे हर्ब्स जूस में शामिल करने से इसका स्वाद और पोषक वैल्यू दोनों बढ़ते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/former-cji-chandrachud-daughter-priyanka-mahi-disease-nemaline-myopathy-symptoms-treatment-2975611">किस बीमारी से जूझ रहीं पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की दोनों बेटियां, जानें ये कितनी खतरनाक?</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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बिना देर किए पहचानें लिवर सिरोसिस के संकेत, ये लक्षण कर सकते हैं परेशान

बिना देर किए पहचानें लिवर सिरोसिस के संकेत, ये लक्षण कर सकते हैं परेशान


Symptoms of Liver Cirrhosis: हमारा लिवर शरीर की सफाई, पाचन और ऊर्जा बनाए रखने का सबसे बड़ा सहारा होता है. लेकिन जब यही लिवर धीरे-धीरे खराब होने लगे और हमें पता भी न चले तो बात गंभीर हो जाती है. सर्जन डॉ. ए.एस. सोइन के मुताबिक, 50 प्रतिशत तक लिवर सिरोसिस हो जाए तब भी व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते, यह खामोशी से बढ़ने वाली बीमारी है जो अगर समय रहते न पहचानी जाए, तो जानलेवा भी बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें.

ये भी पढ़े- तेजी से वजन घटाता है ये सुपरफूड, भूख को भी करता है कंट्रोल

पीलिया

लिवर जब सही से काम नहीं करता, तो बिलीरुबिन नामक पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा व आंखें पीली पड़ जाती हैं. ये लिवर सिरोसिस का पहला और सबसे आम लक्षण है.

लगातार थकान रहना

अगर आप बिना किसी भारी काम के भी थका हुआ महसूस करते हैं, तो ये लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकता है. लिवर जब टॉक्सिन्स नहीं निकाल पाता, तो शरीर सुस्त हो जाता है.

एनीमिया

लिवर सिरोसिस की वजह से शरीर में आयरन और अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता, जिससे खून की कमी हो सकती है. इसके कारण चक्कर आना, कमजोरी और सांस फूलना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

वजन तेजी से कम होना

अगर बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के वजन कम हो रहा है, तो सतर्क हो जाइए. लिवर सिरोसिस के कारण भूख कम लगती है और शरीर पोषण नहीं ले पाता, जिससे वजन घटने लगता है.

उल्टी में खून आना

यह एक गंभीर लक्षण है। सिरोसिस के कारण लिवर में रक्त संचार बाधित होता है, जिससे पेट की नसें फूल जाती हैं और उनसे खून निकल सकता है. अगर उल्टी में खून दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

लिवर सिरोसिस एक साइलेंट किलर है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है. इसलिए अगर इन लक्षणों में से कोई भी लगातार नजर आए, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. समय पर की गई पहचान ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार है.

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दुनिया के सबसे बड़े आयुर्वेदिक टेलीमेडिसिन सेंटर का उद्घाटन, जानिए बाबा रामदेव ने क्या कहा?

दुनिया के सबसे बड़े आयुर्वेदिक टेलीमेडिसिन सेंटर का उद्घाटन, जानिए बाबा रामदेव ने क्या कहा?


Ayurvedic Telemedicine Center: पतंजलि ने कहा है कि कंपनी ने वैश्विक आयुर्वेद के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है. पतंजलि आयुर्वेद ने आज अपने उन्नत टेलीमेडिसिन सेंटर का उद्घाटन किया है. दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रामाणिक आयुर्वेदिक टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म है. इस केंद्र का औपचारिक शुभारंभ योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने वैदिक मंत्रों और यज्ञ के साथ किया.

टेलीमेडिसिन सेंटर मानव सेवा की उत्कृष्टम पहल- बाबा रामदेव

इस मौके पर स्वामी रामदेव ने कहा, ”हरिद्वार से हर द्वार तक, यह टेलीमेडिसिन केंद्र भारत की ऋषि-परंपरा के ज्ञान को हर घर तक पहुंचाने का एक दिव्य साधन बनेगा. अब चिकित्सा सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी, जिसका लाभ रोगी मानवता को मिलेगा. पतंजलि का टेलीमेडिसिन सेंटर मानव सेवा की उत्कृष्टम पहल है.”

वहीं, कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण ने कहा, ”जैसे पूरा विश्व आज योग के लिए भारत की तरफ देखता है, वैसे ही अब आयुर्वेद और इसकी सेवाओं के लिए भी विश्व भारत की तरफ से आशा से देख रहा है. यह टेलीमेडिसिन केंद्र उसी दिशा में एक बेहतरीन कदम है. आचार्य ने कहा कि पतंजलि टेलीमेडिसिन सेंटर पूर्ण विकसित एक सुव्यवस्थित मॉडल है.”

क्या हैं आयुर्वेदिक टेलीमेडिसिन सेंटर की विशेषताएं?

  • निःशुल्क ऑनलाइन आयुर्वेदिक परामर्श
  • पतंजलि के उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम
  • प्राचीन शास्त्रों में निहित व्यक्तिगत हर्बल नुस्खे
  • डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और व्यवस्थित अनुवर्ती (Follow-ups)
  • व्हाट्सएप, फोन और वेब-आधारित प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से आसान पहुंच

पतंजलि आयुर्वेद का दावा है, ”यह पहल हर घर में प्रामाणिक, शास्त्र-आधारित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य समाधान का आधार बनेगी. विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों और विदेश में रहने वाले वे लोग इससे लाभान्वित होंगे, जो केंद्र पर नहीं जा सकते.”

आयुर्वेदिक चिकित्सकों से घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं परामर्श

बड़ी बात यह है कि टेलीमेडिसिन सेंटर के माध्यम से लोग घर बैठे आयुर्वेदिक चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं. यह विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए फायदेमंद है, जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी हो सकती है.

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किन बीमारियों से हुआ केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, ये कितनी खतरनाक?

किन बीमारियों से हुआ केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, ये कितनी खतरनाक?


केंद्रीय रेल अश्विनी वैष्णव के पिता दाऊलाल वैष्णव का निधन मंगलवार (08 जुलाई) सुबह 11:52 बजे जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हो गया. वह 81 साल के थे और काफी समय से फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. इसके अलावा उम्र से संबंधित अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स ने भी उन्हें घेर रखा था. आइए जानते हैं कि दाऊलाल वैष्णव कितनी खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे थे? 

दाऊलाल वैष्णव को थीं ये बीमारियां

AIIMS जोधपुर के डॉक्टरों ने मीडिया को बताया कि दाऊलाल वैष्णव कई महीनों से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और  पल्मोनरी फाइब्रोसिस जैसी फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे. उनके फेफड़े गंभीर रूप से डैमेज हो चुके थे, जिसकी वजह से ऑक्सीजन का लेवल लगातार कम हो रहा था. उन्हें ऑक्सीजन थेरेपी, स्टेरॉयड समेत कई एडवांस्ड दवाएं दी गईं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ.

कितनी खतरनाक हैं ये बीमारियां?

COPD फेफड़ों की खतरनाक बीमारी है, जिसमें वायु मार्ग में रुकावट होने लगती है और सांस लेने में दिक्कत होती है. वहीं, पल्मोनरी फाइब्रोसिस ऐसी कंडीशन है, जिसमें फेफड़ों के टिशूज कठोर और जख्मी हो जाते हैं, जिससे ऑक्सीजन का रक्त में अवशोषण मुश्किल हो जाता है. दोनों बीमारियां अपने आप में गंभीर हैं. जब ये एक साथ होती हैं तो मरीज की हालत बेहद सीरियस हो जाती है. 

निमोनिया ने बिगाड़ी तबीयत

बता दें कि दाऊलाल वैष्णव को हाल ही में निमोनिया भी हो गया था, जिससे उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई. दरअसल, निमोनिया ने उनके फेफड़ों पर एक्स्ट्रा प्रेशर डाला, जिससे उनकी सांस लेने की क्षमता और कम हो गई. एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि दाऊलाल वैष्णव की हालत पिछले कुछ दिनों से काफी गंभीर थी. सोमवार को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. 24 घंटे उनकी देखभाल की गई, लेकिन बीमारियों की गंभीरता और उम्र के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका.

COPD पर क्या कहता है WHO?

फेफड़ों की गंभीर बीमारियां जैसे COPD और पल्मोनरी फाइब्रोसिस ग्लोबल लेवल पर मौत के प्रमुख कारणों में से हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक, COPD दुनिया भर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है. एयर पॉल्यूशन, धूल और स्मोकिंग आदि की वजह से इस बीमारी का खतरा बढ़ता है. वहीं, पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी कॉमन नहीं है, लेकिन इसका सटीक इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है. यह बीमारी धीरे-धीरे मरीज की सांस लेने की क्षमता को नष्ट कर देती है. वहीं, लास्ट स्टेज में मरीज पूरी तरह ऑक्सीजन पर निर्भर हो जाता है.

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तेजी से वजन घटाता है ये सुपरफूड, भूख को भी करता है कंट्रोल

तेजी से वजन घटाता है ये सुपरफूड, भूख को भी करता है कंट्रोल


Superfood for Weight Loss: जब बात वजन घटाने की होती है, तो सबसे पहले हम आलू जैसी चीजों को डाइट से बाहर कर देते हैं. क्योंकि आलू को अक्सर मोटापा बढ़ाने वाली चीज माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आलू को सही तरीके से पकाया और खाया जाए, तो यही आलू तेजी से वजन घटाने में आपकी मदद कर सकता है?

डायटीशियन भावेश बताते हैं कि अगर आलू को उबालकर खाया जाए और उसमें कोई तला-भुना मसाला न हो, तो यह न सिर्फ आपकी भूख को कंट्रोल करता है, बल्कि वजन घटाने की प्रक्रिया को भी तेज कर सकता है. आलू में मौजूद रेजिस्टेंट स्टार्च पाचन को बेहतर बनाता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है.

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भूख को करता है कंट्रोल

उबले आलू में रेजिस्टेंट स्टार्च होता है जो पेट में जाकर धीरे-धीरे पचता है. इससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं.

लो कैलोरी हाई फाइबर फूड

उबले आलू में बहुत कम कैलोरी होती है और इसमें फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो वजन घटाने में सहायक है.

डाइजेशन करता है बेहतर

आलू में मौजूद स्टार्च पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है.

सस्ता और आसानी से मिलने वाला सुपरफूड

बाजार में उपलब्ध महंगे डाइट फूड्स की तुलना में उबला आलू एक किफायती और प्रभावी विकल्प है.

कैसे करें उबले आलू का सेवन

2 उबले आलू को छिलकर हल्का नमक और नींबू डालकर खाएं

प्रोटीन के साथ उबला आलू खाने से शरीर को जल्दी रिकवरी मिलती है और एनर्जी भी बनी रहती है.

टमाटर, प्याज, धनिया और काली मिर्च के साथ मिलाकर उबले आलू से चाट बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी.

किन बातों का रखें ध्यान

कभी भी आलू को फ्राई करके न खाएं, इससे उसकी न्यूट्रीशनल वैल्यू खत्म हो जाती है और वजन बढ़ने लगता है.

उबले आलू में ज्यादा बटर या चीज न मिलाएं.

डायटीशियन भावेश के अनुसार, अगर आप वजन घटाने के लिए नेचुरल और सस्ता उपाय ढूंढ रहे हैं, तो उबला आलू आपकी डाइट में शामिल होना चाहिए. यह न सिर्फ भूख को कंट्रोल करता है बल्कि शरीर को जरूरी ऊर्जा भी देता है. फर्क बस इतना है कि आलू को कैसे और कब खाया जाए.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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