घर पर ब्लड प्रेशर जांचना हुआ आसान, जानिए 6 असरदार तरीके
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पैरों में लगातार सूजन आना यानि एडिमा एक आम बात लग सकती है, लेकिन इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह सिर्फ थकान या देर तक खड़े रहने का नतीजा नहीं होता, बल्कि कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. अगर आपके पैरों में अक्सर सूजन रहती है, खासकर जब आप आराम कर रहे हों या सुबह उठने पर भी सूजन कम न हो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए.
पैरों में सूजन के सामान्य कारण
किन बीमारियों का संकेत हो सकती है पैरों की सूजन?
अगर पैरों में सूजन लगातार बनी रहती है या उसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखते हैं, तो यह कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है:
कब डॉक्टर को दिखाएं?
अगर आपको पैरों में सूजन के साथ इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, आजकल महिलाओं में एक आम हार्मोनल समस्या बन गई है. यह मासिक धर्म की अनियमितता, शरीर पर ज़्यादा बाल, मुहांसे और गर्भवती होने में परेशानी जैसी कई दिक्कतें पैदा कर सकती है. जब पीसीओडी से पीड़ित महिलाएं गर्भवती होती हैं, तो उनमें कुछ खास तरह की परेशानी आने की संभावना बढ़ जाती है, जिनमें डिलीवरी का समय से कुछ दिन लेट होना भी शामिल हो सकता है. आइए जानते हैं कि पीसीओडी होने पर डिलीवरी में देरी क्यों हो सकती है.
पीसीओडी और डिलीवरी में देरी का क्या संबंध है?
पीसीओडी सीधे तौर पर डिलीवरी में देरी का कारण नहीं बनती, बल्कि यह प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ ऐसी दिक्कतें पैदा कर सकती है, जिनके कारण डॉक्टरों को डिलीवरी के समय के बारे में सोच-समझकर फैसला लेना पड़ता है. ये दिक्कतें अक्सर पीसीओडी से जुड़े हार्मोन में गड़बड़ी और इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से होती हैं.
डिलीवरी में देरी के मुख्य कारण
क्या डिलीवरी में देरी हमेशा होती है?
नहीं, पीसीओडी होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी डिलीवरी हमेशा देर से होगी. कई पीसीओडी वाली महिलाएं स्वस्थ प्रेग्नेंसी और समय पर डिलीवरी का अनुभव करती हैं. यह पूरी तरह से पीसीओडी की गंभीरता, प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली मुश्किलों और उन्हें कैसे संभाला जाता है, इस पर निर्भर करता है. अगर आपको पीसीओडी है और आप गर्भवती हैं, तो डॉक्टर के साथ नियमित जांच और उनकी सलाह का पालन करना बहुत ज़रूरी है. डॉक्टर आपकी स्थिति की बारीकी से निगरानी करेंगे और किसी भी दिक्कत को समय पर पहचानने और उसका इलाज करने में मदद करेंगे. लाइफस्टाइल में बदलाव, जैसे स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम, प्रेग्नेंसी के दौरान पीसीओडी से जुड़ी मुश्किलों को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं. सही देखभाल और मैनेजमेंट के साथ, पीसीओडी के बावजूद एक स्वस्थ प्रेग्नेंसी और सफल डिलीवरी संभव है.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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TB Death Tracking in Tamil Nadu: जब बात टीबी जैसी गंभीर बीमारी की हो तो समय पर इलाज और सही आंकड़ों की भूमिका बहुत अहम हो जाती है. भारत जैसे देश में टीबी से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि अब तक इससे होने वाली मौतों की सही जानकारी और आंकड़ों की काफी कमी रही है. इसी कमी को दूर करने के लिए तमिलनाडु ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है.
तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन गया है जिसने टीबी से होने वाली अनुमानित मौतों की निगरानी को अपने स्वास्थ्य सिस्टम में औपचारिक रूप से एकीकृत किया है. यानी अब टीबी से मौत होने पर केवल यह दर्ज नहीं होगा कि मृत्यु हुई, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि मौत का सटीक कारण क्या था और क्या इसे टाला जा सकता था.
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पोस्टमार्टम से क्या-क्या पता चलेगा?
टीबी से मौत होने के बाद आमतौर पर कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं होता कि असल में मरीज की मृत्यु टीबी से ही हुई है या किसी अन्य जटिलता से.
मरीज को कितने समय से टीबी थी?
इलाज चल रहा था या बीच में बंद कर दिया गया था?
मौत किस स्तर की टीबी (फेफड़ों, ब्रेन, बोन आदि) से हुई?
समय पर जांच और इलाज मिला या नहीं?
इन सवालों का जवाब न केवल एक मौत का कारण बताएगा, बल्कि भविष्य में टीबी से होने वाली मौतों को रोकने की रणनीति बनाने में भी मदद करेगा।
कैसे बदलेगा यह सिस्टम
सटीक डेटा: अब हर मौत की गहराई से जांच होगी, जिससे कोई भी केस छूटेगा नहीं.
रोकथाम की रणनीति: किन क्षेत्रों या समुदायों में ज्यादा टीबी से मौत हो रही है, यह जानकारी नीतिगत निर्णयों में सहायक होगी.
इलाज में सुधार: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार यह पता चलेगा कि किस चरण में मरीज की स्थिति बिगड़ी, जिससे समय पर इलाज की योजना बनाना आसान होगा.
टीबी कंट्रोल को मिलेगी रफ्तार: ICMR के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी सहयोग से राज्य टीबी नियंत्रण कार्यक्रम और भी मजबूत होगा.
तमिलनाडु ने यह दिखा दिया है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक सहयोग साथ आते हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव संभव है. टीबी से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में यह एक अभूतपूर्व और प्रेरणादायक कदम है, जिसे अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए. अब तमिलनाडु सिर्फ टीबी का इलाज नहीं करेगा, बल्कि उसकी जड़ों तक पहुंच कर उसे खत्म करने की रणनीति भी बनाएगा.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Patanjali Ayurved: पतंजलि आयुर्वेद ने भारत में आयुर्वेदिक उत्पादों और उपचारों को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. पतंजलि का कहना है कि हाल के सालों में लोग रासायनिक उत्पादों के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं. कंपनी का दावा है कि पतंजलि के उत्पाद जैसे केश कांति शैंपू, दंत कांति टूथपेस्ट, और आंवला जूस अपनी प्रभावशीलता और किफायती कीमत के लिए जाने जाते हैं.
पतंजलि की ओर से दावा किया गया है कि राजधानी दिल्ली में रहने वाली 54 साल की हीरा शर्मा ने केश कांति शैंपू इस्तेमाल किया, जिसने उनके तैलीय बालों की समस्या को कम किया और अब वे हर 3-5 दिन में बाल धोती हैं, जो पहले हर दो दिन में करना पड़ता था.
दंत कांति से दूर हो गई मसूड़ों की समस्या- ग्राहक
पतंजलि ने कहा है, ”कंपनी के गुलाब शरबत को भी लोग खूब पसंद करते हैं. मुंबई के रिषिकेश सिंह बताते हैं कि वे इसे नींबू और साबजा बीज के साथ मिलाकर पीते हैं, जो उन्हें ताजगी देता है. इसी तरह दिल्ली के रमेश जुएल ने दंत कांति टूथपेस्ट की तारीफ की, जिसने उनके मसूड़ों की समस्या और दांतों की संवेदनशीलता को कम किया.”
पतंजलि का दावा है कि उनके उत्पाद डायबिटीज, किडनी समस्याओं और दर्द जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रभावी हैं. एक मुंबई के ग्राहक ने बताया कि पतंजलि की आयुर्वेदिक दवाओं ने उनकी डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद की. पतंजलि ने बताया, ”योगपीठ हरिद्वार में आयुर्वेदिक उपचार जैसे पंचकर्मा और प्राकृतिक चिकित्सा की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. लोगों ने इन उपचारों से ऊर्जा में सुधार और स्वास्थ्य लाभ की बात कही है.”
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान देना जरूरी- पतंजलि
कंपनी का दावा है, ”पतंजलि ने आयुर्वेद को मुख्यधारा में लाने में सफलता पाई है, लेकिन गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान देना जरूरी है. लोगों की मिश्रित राय यह दर्शाती है कि जहां कई लोग इसके लाभों से संतुष्ट हैं.”
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