क्रिकेटर आकाशदीप की बहन को कैंसर, जानें कितना खतरनाक होता है इसका थर्ड स्टेज

क्रिकेटर आकाशदीप की बहन को कैंसर, जानें कितना खतरनाक होता है इसका थर्ड स्टेज


Akash Deep Sister Cancer: कभी-कभी िदगी का सबसे कठिन मैच मैदान पर नहीं, बल्कि घर के अंदर लड़ा जाता है. क्रिकेट के मैदान पर तेज गेंदों से बल्लेबाजों की कमर तोड़ने वाले आकाशदीप आज खुद एक लड़ाई का सामना कर रहे हैं. अपनी बहन की जान बचाने की लड़ाई. हाल ही में खबर सामने आई है कि भारतीय क्रिकेटर आकाशदीप की बहन को कैंसर का थर्ड स्टेज हुआ है. यह खबर न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि उनके फैंस और पूरे क्रिकेट जगत के लिए एक झटका है. कैंसर का नाम सुनते ही दिल दहल उठता है और जब मामला थर्ड स्टेज का हो, तब चिंता और भी बढ़ जाती है. आइए समझते हैं कि थर्ड स्टेज कैंसर क्या होता है, इसके लक्षण क्या हैं और यह कितना खतरनाक हो सकता है.

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थर्ड स्टेज कैंसर क्या होता है?

कैंसर को आमतौर पर चार चरणों में बांटा जाता है. स्टेज 1 से लेकर स्टेज 4 तक. थर्ड स्टेज कैंसर का मतलब होता है कि कैंसर अब सिर्फ मूल अंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास तक फैल चुका है. इसका अर्थ है कि यह बीमारी अब अपने शुरुआती दौर को पार कर चुकी है और शरीर में स्थायी नुकसान करने की स्थिति में पहुंच गई है.

थर्ड स्टेज कैंसर के लक्षण

लगातार थकान

भूख कम लगना और वज़न घटना

बुखार या बार-बार इंफेक्शन

खून की कमी

जिस अंग में कैंसर है, वहां तेज दर्द या गांठ

सांस लेने में तकलीफ होना

कितना खतरनाक होता है थर्ड स्टेज?

थर्ड स्टेज को एडवांस्ड लोकल स्टेज भी कहा जाता है. इसका मतलब है कि कैंसर अब जड़ें जमा चुका है और इसे हटाना या कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, यह अंतिम स्टे नहीं होती, इसलिए अगर सही समय पर इलाज शुरू हो जाए, तो मरीज के बचने की उम्मीदें अभी भी रहती हैं. इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन या इन सभी का मिश्रण शामिल हो सकता है. इस स्टेज में इलाज लंबा और थकाऊ हो सकता है, लेकिन सही देखभाल और मानसिक हौसले से लड़ाई लड़ी जा सकती है. दरअसल, कैंसर की बीमारी सिर्फ शरीर नहीं तोड़ती, बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति और उसके परिवार को झकझोर देती है. आकाशदीप जैसे खिलाड़ी, जो मैदान पर शांत और फोकस्ड रहते हैं, अब एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां उन्हें एक अलग तरह की हिम्मत दिखानी होगी.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कॉफी आपके लिवर को रखती है फिट? जानिए फायदे और पीने का सही समय

क्या कॉफी आपके लिवर को रखती है फिट? जानिए फायदे और पीने का सही समय


Coffee for Liver Health: कॉफी सिर्फ सुबह की नींद भगाने वाली ड्रिंक नहीं है, बल्कि यह आपकी सेहत का भी खजाना हो सकती है. जहां एक ओर लोग इसे सिर्फ एक कैफीन बूस्टर मानते हैं, वहीं हालिया स्टडीज़ और डॉक्टर्स की राय बताती है कि सही मात्रा में कॉफी का सेवन आपके लिवर के लिए फायदेमंद हो सकता है. खासकर गैस्ट्रो और लिवर एक्सपर्ट डॉ. वी.के. मिश्रा के अनुसार, कॉफी लिवर को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकती है, बशर्ते इसे सही तरीके और समय पर लिया जाए. आइए जानते हैं कि कॉफी आपके लिवर को कैसे हेल्दी रखती है और इसे पीने का सही तरीका क्या है.

कॉफी और लिवर का रिश्ता क्या है?

डॉक्टर वी.के. मिश्रा के अनुसार, कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट तत्व लिवर के सेल्स को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. ये तत्व लिवर को फैटी लिवर, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से भी बचाने में कारगर साबित हो सकते हैं.

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लिवर के लिए कॉफी के 5 प्रमुख फायदे

फैटी लिवर की समस्या में राहत

नियमित और सीमित मात्रा में कॉफी पीने से नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की संभावना कम हो सकती है.

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण

कॉफी में मौजूद यौगिक लिवर में सूजन और सूक्ष्म जलन को कम करने में मदद करते हैं.

लिवर एंजाइम को करता है नियंत्रित

कॉफी का सेवन लिवर एंजाइम को सामान्य रखने में मदद करता है, जो लिवर हेल्थ के लिए जरूरी हैं.

सिरोसिस के जोखिम को करता है कम

कुछ स्टडीज के अनुसार, दिन में 2 कप कॉफी पीने से लिवर सिरोसिस का खतरा 40–50% तक घट सकता है.

डिटॉक्सिफिकेशन में मदद

कॉफी शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की प्रक्रिया में सहायक हो सकती है.

कॉफी पीने का सही समय और तरीका

सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच कॉफी पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब शरीर का कोर्टिसोल लेवल संतुलन में होता है.

खाली पेट कॉफी पीने से एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है, इसलिए नाश्ते के बाद पीना बेहतर है.

कॉफी को बहुत ज्यादा मीठा या हैवी बनाना उसके स्वास्थ्य लाभ को कम कर सकता है. ब्लैक कॉफी या कम शुगर वाली कॉफी बेहतर विकल्प है.

ज्यादा कैफीन से नींद, दिल की धड़कन और डाइजेशन पर असर पड़ सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है.

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हिचकी क्यों आती है? क्या आप भी हैं परेशान तो ये 7 फूड्स तुरंत देंगे राहत

हिचकी क्यों आती है? क्या आप भी हैं परेशान तो ये 7 फूड्स तुरंत देंगे राहत


How to Stop Hiccups: आप किसी मीटिंग में हों, कोई जरूरी बात कर रहे हों या खाना खा रहे हों और तभी अचानक हिचकी आनी शुरू हो जाए. यह छोटी-सी परेशानी उस समय बड़ी असहज स्थिति पैदा कर देती है. कभी-कभी हिचकी अपने आप रुक जाती है, लेकिन कई बार यह लगातार आती रहती है औरतो पानी पीने से रुकती है, न ही सांस रोकने से. लोग तरह-तरह के घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खास फूड्स भी हैं जो हिचकी को तुरंत रोकने में मदद कर सकते हैं? इससे पहले कि जानें वो 7 असरदार चीजें, समझते हैं कि हिचकी आती क्यों है

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हिचकी क्यों आती है?

डॉ. अभिषेक रंजन बताते हैं कि, हिचकी तब आती है जब हमारे छाती और पेट के बीच की मांसपेशी में अचानक संकुचन होता है. यह संकुचन फेफड़ों से हवा को तेजी से बाहर निकालता है और गले के पास स्थित वोकल कॉर्ड बंद हो जाते हैं, जिससे ये आवाज आती है. यह आमतौर पर बेवजह हो सकती है, लेकिन कई बार इसके पीछे कुछ कारण भी हो सकते हैं.

बहुत तेजी से खाना खाना

अत्यधिक मसालेदार भोजन

गैस्ट्रिक प्रॉब्लम

ठंडी चीजें खाना या पीना

अचानक तापमान में बदलाव

अत्यधिक हंसी या रोना

हिचकी रोकने वाली 7 असरदार चीजें

शहद

शहद में मौजूद एंजाइम्स गले और डायाफ्राम को शांत करने में मदद करते हैं. एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर पिएं, हिचकी जल्दी बंद हो सकती है.

नींबू

नींबू का खट्टापन गले की नसों को झटका देता है जिससे हिचकी रुक सकती है. एक स्लाइस नींबू को चूसें या उसका रस पिएं.

चीनी

एक चुटकी चीनी को जीभ पर रखकर धीरे-धीरे चूसें. यह नर्व सिग्नल को डाइवर्ट कर देती है और हिचकी रुकने में मदद मिलती है.

गोलगप्पे का पानी या इमली पानी

खट्टे और तीखे स्वाद वाली चीजें तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती हैं जिससे हिचकी रुकने लगती है.

दही

ठंडी और क्रीमी टेक्सचर वाली दही गले की नसों को ठंडक देती है और हिचकी पर असर डालती है.

पीनट बटर

इसकी गाढ़ी बनावट चबाने और निगलने की प्रक्रिया को बदलती है, जिससे हिचकी रुक सकती है.

ठंडा पानी

एक ग्लास ठंडा पानी धीरे-धीरे पीने से डायाफ्राम शांत होता है और हिचकी रुक सकती है.

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केरल में लगातार फैल रहा है निपाह वायरस, जानें क्या हैं लक्षण और बचाव का तरीका

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Nipha Virus in Kerala: केरल में र निपाह वायरस का संक्रमण फैलने लगा है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था सतर्क हो गई. जहां एक ओर कोरोना के बाद लोग वायरस से जुड़ी हर खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगे हैं, वहीं निपाह वायरस की गंभीरता इसे और भी खतरनाक बना देती है. यह वायरसकेवल तेज से फैलता है, बल्कि इसका मृत्यु दर भी काफी अधिक होता है. इस बार मलप्पुरम, पलक्कड़ और कोझिकोड जिलों में सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं और 425 से अधिक लोगों को निगरानी में रखा गया है. सरकार ने आइसोलेशन, ट्रैकिंग और टेस्टिंग की प्रक्रिया तेकर दी है. आइए जानें क्या है निपाह वायरस, इसके लक्षण क्या होते हैं और इससे बचाव के क्या उपाय अपनाए जाएं

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया है कि अब तक 425 से ज्यादा लोगों को निगरानी में रखा गया है. इनमें सबसे ज्यादा मलप्पुरम (228), पलक्कड़ (110) और कोझिकोड (87) के लोग शामिल हैं. हालांकि मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है और सभी का सैंपल लेकर टेस्ट किया जा रहा है. राज्य सरकार ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और मेडिकल टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है.

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क्या है निपाह वायरस?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है और इंसानों में सांस लेने की समस्या, तेज बुखार और मस्तिष्क में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है

निपाह वायरस के प्रमुख लक्षण

तेज बुखार

सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द

थकान और कमजोरी

सांस लेने में परेशानी

उल्टी या जी मिचलाना

मानसिक भ्रम या बेहोशी

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

संक्रमित चमगादड़ों द्वारा खाए गए फल या उनके थूक से संक्रमित वस्तु को छूने या खाने से

संक्रमित इंसानों के सीधे संपर्क में आने से

संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से

बचाव के तरीके

गिरते हुए फलों या चमगादड़ों द्वारा खाए गए फलों का सेवन न करें

बीमार व्यक्तियों से दूरी बनाए रखें और मास्क पहनें

हाथों को बार-बार साबुन से धोएं या सैनिटाइज़ करें

शरीर में कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

जानवरों से दूरी बनाकर रखें, खासकर खेतों में

सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन करें

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पानी पीते ही लगने लगती है टॉयलेट, जानिए किस बीमारी के हैं लक्षण

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Urination after Drinking Water: अगर हर बार पानी पीते ही तुरंत पेशाब जाने की इच्छा हो रही है, तो यह केवल हाइड्रेशन का मामला नहीं हो सकता. यह लक्षण किसी गंभीर बीमारी की चेतावनी भी हो सकता है? बार-बार टॉयलेट जानासिर्फ आपके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर में हो रहे संभावित असंतुलन की ओर भी इशारा करता है. डॉक्टर्स के अनुसार, अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं कि पानी पीते ही पेशाब लगने की आदत किन-किन बीमारियों से जुड़ी हो सकती है और इसका समाधान क्या है.

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अत्यधिक पानी पीना

अगर आप दिनभर में 3 लीटर से ज्यादा पानी पी रहे हैं, तो शरीर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए पेशाब के रूप में बाहर करता है. यदि थोड़ी मात्रा में पानी पीते ही पेशाब लगे, तो यह जांच का विषय बन जाता है.

कैफीन का सेवन

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों में डाइयूरेटिक तत्व होते हैं, जो मूत्र बनने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं. इसके कारण भी बार-बार टॉयलेट जाने की समस्या हो सकती है.

डॉक्टर्स के मुताबिक बीमारियां

ओवरएक्टिव ब्लैडर

यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें ब्लैडर की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं. इसका परिणाम यह होता है कि थोड़ी-सी मात्रा में मूत्र बनते ही व्यक्ति को टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होती है.

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

महिलाओं में यह अधिक आम है. इसमें पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब लगना और कभी-कभी दर्द भी होता है. यदि पानी पीते ही टॉयलेट जाना बार-बार हो रहा है, तो UTI की जांच कराना जरूरी है.

डायबिटीज

हाई ब्लड शुगर लेवल शरीर से अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है. बार-बार प्यास लगना और थकान भी महसूस हो, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है.

प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने पर मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे व्यक्ति को बार-बार और कम मात्रा में पेशाब आता है.

पानी पीते ही बार-बार टॉयलेट जाना अगर कभी-कभार हो, तो घबराने की बात नहीं, लेकिन अगर यह रोज की परेशानी बन गई है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

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