कोविड वैक्सीन नहीं तो क्या है कार्डियक अरेस्ट का कारण? जान लीजिए असली वजह

कोविड वैक्सीन नहीं तो क्या है कार्डियक अरेस्ट का कारण? जान लीजिए असली वजह


Cardiac Arrest in Young Adults: जैसे ही किसी युवा व्यक्ति की अचानक मृत्यु की खबर सामने आती है, लोग तुरंत इसे कोविड वैक्सीन से जोड़ने लगते हैं. सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें और डर फैलाए जाते हैं, लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है. ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की स्टडी में यह साफ किया गया है कि कोविड वैक्सीन का सीधा संबंध कार्डियक अरेस्ट से नहीं हैअसल में इसके पीछे कुछ और ही गंभीर कारण हैं, जो हमारी रोजमर्रा की िदगी से जुड़े हैंअगर समय रहते इन पर ध्यानदिया जाए, तो जानलेवा बन सकते हैंआइए जानते हैं कार्डियक अरेस्ट के असली कारण, जो वैक्सीन नहीं, बल्कि हमारी लाइफस्टाइल से जुड़े हैं.

ICMR की स्टडी क्या कहती है?

ICMR द्वारा की गई स्टडी में यह स्पष्ट किया गया कि जिन लोगों की कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हुई, उनमें से अधिकतर मामलों में कोविड वैक्सीन का कोई लेना-देना नहीं था। इसके बजाय, उनकी जीवनशैली और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां ही प्रमुख कारण थीं।

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कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख कारण

गलत लाइफस्टाइल

अनियमित खानपान, जंक फूड की अधिकता, व्यायाम की कमी, नींद की अनदेखी और अत्यधिक तनाव.

जेनेटिक फैक्टर 

अगर आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी रही है, तो यह आपके लिए भी जोखिम का कारण बन सकती है। ऐसे में समय-समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल

उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे दिल की नसों में ब्लॉकेज पैदा करते हैं, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

डायबिटीज और मोटापा

मधुमेह और अधिक वजन भी दिल की सेहत को बिगाड़ते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को कमजोर करता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

धूम्रपान और शराब का सेवन

ये आदतें हृदय को नुकसान पहुंचाती हैं और धमनियों को संकुचित कर कार्डियक अरेस्ट का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।

कोविड वैक्सीन को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह गलतफहमी पर आधारित है. असली खतरा हमारी बिगड़ती दिनचर्या और लाइफस्टाइल से है. सही खानपान, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से हम इस खतरे को काफी हद तक टाल सकते हैं. जरूरी है कि अफवाहों से दूर रहकर सही तथ्यों पर भरोसा करें और अपने दिल की सेहत का खुद ख्याल रखें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इस खास ‘नुस्खे’ से कम किया 125 किलो वजन, जिम तक नहीं गया यह शख्स

इस खास ‘नुस्खे’ से कम किया 125 किलो वजन, जिम तक नहीं गया यह शख्स



<p>मोटापा, एक ऐसी समस्या जिससे हर कोई छुटकारा चाहता है. मगर सोचिए अगर बाॅडी वेट करीब 220 किलो से अ​धिक हो तो इसे कम करने के लिए क्या करना चाहिए. जेहन में पहला जवाब आएगा कि डाॅक्टर के पास जाएं या फिर वर्कआउट और डाइट कंट्रोल जैसे टिप्स अपनाने चाहिए. लेकिन अमेरिका के 34 साल के शख्स ने कमाल कर दिखाया है. बिना किसी डाॅक्टर से कंसल्ट किए एक खास ‘नुस्खे’ से उन्होंने 125 किलो तक वजन कम कर लिया है. ओहियो के रहने वाले इस शख्स का ये खास नुस्खा क्या है और आप भी इसे आसानी से किस तरह अपनाकर वजन कम कर सकते हैं, आइए जानते हैं…</p>
<p><strong>वो खास नुस्खा, जिससे 125 किलो वजन कम हुआ</strong></p>
<p>अमेरिकी राज्य ओहियो के रहने वाले रयान ग्रेवल का वजन &nbsp;490 पाउंड (करीब 222 किलो) हो चुका था. ऐसे में लाइफ का हर पल गुजरते समय के साथ उनके लिए चुनाैतीपूर्ण होता जा रहा था. लोग उन्हें वाॅक करने की सलाह देते थे. लेकिन बाॅडी वेट अ​धिक होने के चलते घुटने दर्द से कराहने लगते. उनके सामने ऑप्शन था कि वह डाॅक्टर के पास जाकर सर्जरी करा सकते थे. लेकिन उन्होंने हाॅ​स्पिटल के बेड की बजाय चुनाैतीपूर्ण रास्ता चुना. इसके लिए उन्होंने एक सामान्य नाॅन गियर साइकिल खरीदी और अपनी वेट लाॅस जर्नरी की शुरुआत पर निकल पड़े. वाॅक करने की अपेक्षा ये उनके घुटनों के लिए थोड़ा आरायदायक था, लेकिन उनका रास्ता चैलेंजिंग था. कुछ दूरी तक साइकिल चलाने से शुरू हुआ सफर 100 मील तक पहुंच गया. रयान का वेट 275 पाउंड, यानी करीब 125 किलो तक कम हो गया.</p>
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<p><strong>समय की नहीं होती प्राॅब्लम</strong></p>
<p>अगर कोई वर्कआउट करना चाहते हैं तो समय देना होगा. जिम, पार्क का रुख करना होगा. लेकिन साइकिल के साथ ऐसा नहीं है. इसे आप अपनी डेली लाइफ में शामिल कर सकते हैं. जाॅब पर जाना हो, बाजार में शाॅपिंग या फिर किसी अन्य काम से जाना हो, आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.</p>
<p><strong>10 किलो वजन कम करना हो कितनी साइकिल चलाएं?</strong></p>
<p>लोगों के मन में एक्सरसाइज करने से पहले उसके रिजल्ट के बारे में जानने की उत्सकुता रहती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका सीधा जवाब रेग्यूलर एक्सरसाइज पर निर्भर करता है. साइकिल चलाने की शुरुआत पांच किमी से की जा सकती है, जिसमें 20-30 मिनट लग सकते हैं. धीरे इसको बढ़ाया जा सकता है. एक रिसर्च के अनुसार एक घंटे तक साइकिल चलाने से औसतन 500 कैलोरी बर्न होती है, जो कि सुबह खाली पेट करने पर 20 परसेंट ज्यादा तेजी से बर्न होती है. डाइट में कैलोरी को कम करने और डेली एक से दो घंटे तक साइकिलिंग करने से छह से 12 महीनों में 10 किलोग्राम तक वजन कम करने में मदद मिल सकती है. इसके लिए गियर और नाॅन गियर साइकिल में से किसी का भी यूज किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cold-feet-know-symptoms-and-preventions-2974377">बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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इस ब्लड ग्रुप के लोगों को ज्यादा होता है पेट के कैंसर का खतरा, कहीं लिस्ट में आप तो नहीं?

इस ब्लड ग्रुप के लोगों को ज्यादा होता है पेट के कैंसर का खतरा, कहीं लिस्ट में आप तो नहीं?


मॉडर्न लाइफस्टाइल में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां लोगों को काफी तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं. यही वजह है कि लोग अपनी जिंदगी को लेकर काफी अलर्ट मोड में रहते हैं. वे बार-बार अपनी जांच कराते हैं, जिससे वे किसी गंभीर बीमारी की चपेट में न आ जाएं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका ब्लड टाइप की वजह से ही आपको पेट का कैंसर होने खतरा बढ़ जाता है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कैसे तय होता है ब्लड ग्रुप?

जब तक लोग ब्लड डोनेट नहीं करते हैं या कोई सर्जरी नहीं कराते हैं, तब तक उन्हें अपने ब्लड ग्रुप के बारे में जानकारी नहीं होती. दरअसल, हर किसी को ब्लड ग्रुप उसके पैरेंट्स से विरासत में मिलता है. दुनिया के अधिकतर लोग चार ब्लड ग्रुप ए, बी, एबी या ओ के दायरे में ही आते हैं. ये अक्षर आपकी रेड ब्लड सेल्स की सतह पर शुगर और प्रोटीन (एंटीजन) के कॉम्बिनेशन को दिखाते हैं. इनका कनेक्शन एंटीबॉडीज से भी होता है, जो हमारे ब्लड प्लाज्मा में मौजूद होती हैं. इसके अलावा पॉजिटिव और नेगेटिव ब्लड टाइप से पता चलता है कि आपके ब्लड कौन-सा आरएच फैक्टर एंटीजन है. 

ब्लड ग्रुप से पता लग सकता है बीमारी का खतरा?

सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन आपके ब्लड ग्रुप से यह पता चलता है कि कौन-सी बीमारियां आपको प्रभावित कर सकती हैं और कौन-सी नहीं. दरअसल, एंटीजन और एंटीबॉडीज आपके इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. 2019 के दौरान पब्लिश बीएमसी कैंसर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ए या एबी होता है, उन्हें पेट का कैंसर होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है. 

स्टडी में सामने आई डराने वाली बात

स्टडी में सामने आया कि ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों की तुलना में ए ब्लड ग्रुप के लोगों को पेट के कैंसर का खतरा 13 पर्सेंट ज्यादा था. वहीं, एबी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में यह खतरा 18 पर्सेंट ज्यादा पाया गया. रिसर्चर्स ने 40 अन्य स्टडी के रिजल्ट्स भी चेक किए, जिनमें एक जैसा पैटर्न मिला. टाइप ए वाले लोगों में कैंसर का खतरा 19 पर्सेंट ज्यादा था, जबकि टाइप एबी वाले लोगों में पेट के कैंसर का खरा 9 पर्सेंट ज्यादा पाया गया.

ब्लड ग्रुप और पेट के कैंसर में क्या कनेक्शन?

साफतौर पर कहा जाए तो स्टडी में यह नहीं कहा गया कि ब्लड ग्रुप ए या एबी होने से सीधे तौर पर कैंसर हो सकता है. गौर करने वाली बात यह है कि अन्य ब्लड ग्रुप के लोगों को भी पेट का कैंसर होता है, लेकिन ब्लड ग्रुप्स के बीच कुछ बायोलॉजिकल डिफरेंसेज होते हैं, जिनकी वजह से पेट के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इन डिफरेंसेज में सूजन को संभालने का शरीर का तरीका, सेल्स के कम्युनिकेशन और इम्यून सिस्टम के कैंसर सेल्स का पता लगाना आदि शामिल होता है. उदाहरण के लिए, ब्लड ग्रुप ए वाले लोगों में ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों की तुलना में पेट में एसिड का प्रॉडक्शन कम कर सकते हैं.

रिसर्च में बताई कैंसर होने की वजह

रिसर्च में पुरानी रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया गया, जिसमें बताया गया कि ए ब्लड ग्रुप वाले लोग हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से इंफेक्टेड होने की आशंका ज्यादा होती है. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक तरह का बैक्टीरिया है, जिसका कनेक्शन पेट के कैंसर से होता है. यह बैक्टीरिया बेहद खतरनाक होता है. स्टडी में देखा गया कि ए ब्लड ग्रुप के लोगों में पेट के कैंसर का खतरा ज्यादा था, भले ही वे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से इंफेक्टेड हैं या नहीं. वहीं, एबी ब्लड ग्रुप के लोगों में पेट के कैंसर की आशंका उस वक्त ज्यादा होती है, जब वे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से संक्रमित होते हैं.

किन लोगों को जल्दी होता है पेट का कैंसर?

नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के मुताबिक, अमेरिका में पेट का कैंसर ज्यादा कॉमन नहीं है, लेकिन दुनियाभर में यह पांचवां सबसे कॉमन कैंसर है. पेट के कैंसर के मामले एशिया, पूर्वी यूरोप और साउथ अमेरिका के कुछ हिस्सों में ज्यादा मिलते हैं. वहीं, पुरुषों में इस खतरनाक बीमारी के होने की आशंका करीब दोगुनी होती है. उम्र के साथ पेट का कैंसर होने का खतरा बढ़ता है, लेकन गौर करने वाली बात यह है कि युवा हिस्पैनिक महिलाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आपकी डाइट, फैमिली हिस्ट्री और मोटापा जैसी हेल्थ कंडीशन के कारण भी पेट के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

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महिलाओं में पुरुषों से अलग क्यों होते हैं हार्ट अटैक के लक्षण? जानें इनका फर्क

महिलाओं में पुरुषों से अलग क्यों होते हैं हार्ट अटैक के लक्षण? जानें इनका फर्क


भारतीय महिलाओं में दिल की बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं. जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, 3 से 13 पर्सेंट भारतीय महिलाएं कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जूझ रही हैं. यह आंकड़ा उम्र के आधार पर जारी किया गया है. सबसे खतरनाक बात यह है कि पिछले दो दशक में यह आंकड़ा 300 पर्सेंट बढ़ गया है.

महिलाओं को किस उम्र में आ रहा हार्ट अटैक?

रिसर्च के मुताबिक, भारतीय महिलाओं को हार्ट अटैक आने की औसत उम्र करीब 59 साल है, जो विकासशील देशों के मुकाबले काफी कम है. हालांकि, हार्ट फेल्योर के मामले दोगुने से हो चुके हैं. दरअसल, साल 2000 में हार्ट फेल्योर के मामले 1.1 पर्सेंट थे, जो 2015 तक बढ़कर 3.6 पर्सेंट हो गए. इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि भारतीय महिलाओं को हार्ट हेल्थ के प्रति ज्यादा जागरूक होने, समय पर जांच कराने और जेंडर स्पेसिफिक अप्रोच की जरूरत है. 

पुरुषों से अलग क्यों महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण?

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण बेहद हल्के होते हैं और पुरुषों में नजर आने वाले आम लक्षणों से अलग नजर आते हैं. पुरुषों में अक्सर सीने में तेज दर्द की शिकायत करते हैं, जबकि महिलाओं को कमर, जबड़े और पेट में ज्यादा दर्द महसूस होता है. इसके अलावा उन्हें सांस न आने, असामान्य थकान, मतली और चक्कर आने जैसी दिक्कतें होती हैं. इन लक्षणों को अक्सर एसिडिटी, कमजोरी या एंग्जायटी समझ लिया जाता है. दरअसल, भारत में महिलाएं अपनी सेहत को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं रहती हैं. इसकी वजह से बीमारी का पता देर से चलता है और इलाज में भी देरी हो जाती है. इससे कम उम्र की युवतियों और मेनोपॉज के बाद की महिलाओं के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.

महिलाओं में क्यों नजरअंदाज किए जाते हैं लक्षण?

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, क्योंकि उनके लक्षण पुरुषों में नजर आने वाले पैटर्न से काफी अलग होते हैं. सांस न आने, थकान और अपच जैसे लक्षणों को महिलाएं रोजाना का स्ट्रे या घर की जिम्मेदारियों का दबाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिसकी वजह से उन्हें इलाज मिलने में देरी होती है. उदाहरण के लिए, 40 साल से ज्यादा उम्र की महिला को लगातार थकान और छाती या पेट के ऊपरी हिस्से में जलन की दिक्कत हो सकती है. इसे गलती से एसिडिटी समझ लिया जाता है. इसी तरह अगर कोई महिला हाउसवाइफ है और उसके जबड़े में दर्द हो रहा है या चक्कर आ रहे हैं तो इसे थकावट समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. भारत के शहरी और सेमी-अर्बन इलाकों में ऐसे हालात लगातार बढ़ रहे हैं. जागरूकता कम होने के कारण हार्ट अटैक की शिकार बनने वाली महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिलता है.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

महिलाओं के हार्ट अटैक के कुछ लक्षण एकदम अलग होते हैं, जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. वक्त से पहले मेनोपॉज के कारण होने वाले हार्मोनल चेंज, प्रेग्नेंसी से संबंधित कंडीशंस जैसे हाई ब्लड प्रेशर, प्रेग्नेंसी की वजह से होने वाली डायबिटीज और पीसीओएस जैसी कंडीशन के कारण फ्यूचर में हार्ट प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा शहरी इलाकों में ऑफिस और परविार से जूझ रही महिलाओं में मेंटल हेल्थ इश्यूज और क्रॉनिक स्ट्रेस रहता है, जिसकी वजह से भी खतरा बढ़ता है. अगर आपको अचानक थकान, रोजमर्रा के कामकाज के दौरान सांस लेने में दिक्कत, सीने में तकलीफ और नींद पूरी न होने जैसे लक्षण दिखते हैं तो इसे हल्के में न लें. अगर किसी महिला के परिवार में हार्ट डिजीज या लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियों की हिस्ट्री रही है तो उन्हें अपना खास ध्यान रखना चाहिए.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कितना खतरनाक है लो बीपी, इन मरीजों की कैसी होनी चाहिए डाइट?

कितना खतरनाक है लो बीपी, इन मरीजों की कैसी होनी चाहिए डाइट?



<p style="text-align: justify;">लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) को लेकर लोग अक्सर सीरियस नहीं होते हैं, लेकिन कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह कंडीशन सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. आइए जानते हैं कि लो बीपी कितना खतरनाक हो सकता है और इससे जूझ रहे मरीजों की डाइट कैसी होनी चाहिए?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना खतरनाक होता है लो बीपी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लो ब्लड प्रेशर को हल्के में लेना गलत हो सकता है. जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन (2025) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, लगातार लो बीपी से दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे चक्कर आने, बेहोशी और ब्रेन डैमेज का खतरा बढ़ता है. खासकर बुजुर्गों और प्रेग्नेंट महिलाओं में यह कंडीशन ज्यादा खतरनाक हो सकती है. अगर ज्यादा ब्लीडिंग या डिहाइड्रेशन हो रहा है तो ब्लड प्रेशर बेहद कम हो सकता है, जिससे मौत तक हो सकती है. दिल्ली स्थित मैक्सर सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रजत शर्मा का कहना है कि अगर लो बीपी के साथ बार-बार चक्कर आना या बेहोशी जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो यह हार्ट या नर्वस सिस्टम के लिए गंभीर खतरा हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों होता है लो बीपी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लो बीपी के कारण कई हो सकते हैं, जिनमें डिहाइड्रेशन, हार्ट डिजीज, डायबिटीज की दवाओं का ओवरडोज या पोस्टुरल हाइपोटेंशन (खड़े होने पर ब्लड प्रेशर में अचानक कमी) आदि शामिल हैं. इंडियन जर्नल ऑफ मेडिसिन (2024) के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लो बीपी की शिकायत 20 पर्सेंट ज्यादा देखी गई. दरअसल, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में यह दिक्कत ज्यादा होती है. &nbsp;इसके लक्षणों में चक्कर आना, थकान, धुंधला दिखाई देना और गंभीर मामलों में बेहोशी आदि शामिल है. "</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसी हो लो बीपी के मरीजों की डाइट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लो बीपी को कंट्रोल करने में डाइट अहम भूमिका निभाती है. जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन (2025) के मुताबिक, नमक (सोडियम) और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट से ब्लड प्रेशर को बैलेंस करने में मदद मिलती है. आइए आपको बताते हैं कि लो बीपी के मरीजों की डाइट कैसी होनी चाहिए.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>नमक ज्यादा खाएं:</strong> सोडियम ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में मदद करता है, क्योंकि यह शरीर में पानी बरकरार रखता है। नमकीन स्नैक्स जैसे नमकीन बिस्किट, अचार या सूप लो बीपी होने पर काफी फायदेमंद हो सकते हैं. &nbsp;दिन में 3-5 ग्राम एक्स्ट्रा नमक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन हार्ट पेशेंट्स को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. हद से ज्यादा नमक खाना नुकसानदायक हो सकता है.&nbsp;</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पोटैशियम और मैग्नीशियम युक्त भोजन:</strong> केला, संतरा, पालक, और बादाम जैसे पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ ब्लड प्रेशर को स्थिर करने में मदद करते हैं. पोटैशियम सोडियम के डिसबैलेंस को ठीक करता है. &nbsp;मैग्नीशियम से भरपूर फूड आइटम जैसे काजू और दालें भी फायदेमंद होती हैं.&nbsp;</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>प्रोटीन और हेल्दी फैट:</strong> अंडे, चिकन और मछली जैसे प्रोटीन फूड खाने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. बादाम, अखरोट और घी जैसे हेल्दी फैट भी एनर्जी और ब्लड प्रेशर को स्थिर रखते हैं. हेल्दी फैट से हार्ट हेल्थ में सुधार होता है.</li>
<li style="text-align: justify;">हाइड्रेशन: पानी की कमी लो बीपी का प्रमुख कारण है. दिन में 2-3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए. वहीं, नारियल पानी और छाछ जैसे इलेक्ट्रोलाइट युक्त ड्रिंक्स भी ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में मदद करते हैं. बता दें कि डिहाइड्रेशन से लो बीपी की दिक्कत 25 फीसदी तक बढ़ सकती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>भूलकर भी न खाएं ये चीजें</strong></p>
<ul style="list-style-type: square;">
<li style="text-align: justify;"><strong>नमक-रहित फूड:</strong> लो बीपी से जूझ रहे मरीजों को बिना नमक वाले फू नहीं खाने चाहिए. इससे उनका ब्लड प्रेशर और कम हो सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>शराब और कैफीन का ज्यादा सेवन:</strong> इसकी वजह से भी ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>प्रोसेस्ड फूड:</strong> पैक्ड स्नैक्स और जंक फूड खाने से भी बचना चाहिए. इनके कारण बीपी लो होने का खतरा बढ़ जाता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cold-feet-know-symptoms-and-preventions-2974377">बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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