आपके अंडरआर्म्स हो गए हैं काले? इन आसान तरीकों से लौटा सकते हैं रंगत

आपके अंडरआर्म्स हो गए हैं काले? इन आसान तरीकों से लौटा सकते हैं रंगत



<p style="text-align: justify;">अंडरआर्म्स के काले पड़ने की समस्या से काफी लोग परेशान रहते हैं. इसकी वजह शेविंग, पसीना या प्रॉडक्ट्स में मौजूद केमिकल हो सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि अंडरआर्म्स काले क्यों पड़ जाते हैं और इनकी रंगत लौटाने के आसान तरीके क्या हैं?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों काले पड़ जाते हैं अंडरआर्म्स?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेलेनिन के एक्स्ट्रा प्रॉडक्शन और स्किन की मोटाई बढ़ने की वजह से अंडरआर्म्स काले पड़ जाते हैं. जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी (2025) की एक स्टडी के मुताबिक, करीब 40 पर्सेंट लोग शेविंग, वैक्सिंग, डियोड्रेंट्स में मौजूद एल्यूमीनियम क्लोराइड और टाइट कपड़ों के कारण इस समस्या से जूझते हैं. हालांकि, हार्मोनल चेंज, डायबिटीज या मोटापे की वजह से भी मेलेनिन प्रॉडक्शन बढ़ सकता है, जिससे स्किन का रंग गहरा हो जाता है. पसीने और बैक्टीरिया के जमाव से स्किन की सूजन बढ़ती है, जो अंडरआर्म्स के कालेपन की एक और वजह है. दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल की स्किन एक्सपर्ट डॉ. प्रिया शर्मा के मुताबिक, अंडरआर्म्स के काले पड़ने का कनेक्शन ज्यादातर बाहरी कारणों से होता है, लेकिन इंटरनल हेल्थ जैसे हार्मोनल डिसबैलेंस भी इसका जिम्मेदार हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब परेशानी की वजह हो सकते हैं काले अंडरआर्म्स?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अंडरआर्म्स में कालापन शुरू में हल्का भूरा होता है, जो समय के साथ गहरा हो सकता है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कॉस्मेटोलॉजी (2024) के मुताबिक, अगर इसके साथ खुजली, जलन या बदबू हो तो यह स्किन इंफेक्शन या फंगल ग्रोथ का सिग्नल हो सकता है. अगर कालापन अचानक बढ़े या वजन बढ़ने जैसे शारीरिक बदलाव नजर आएं तो यह डायबिटीज या हार्मोनल दिक्कत का लक्षण हो सकता है. अगर अंडरआर्म्स में कालेपन के साथ स्किन में रूखापन या दर्द हो तो तुरंत स्किन एक्सपर्ट से मिलना चाहिए. यह सिर्फ कॉस्मेटिक प्रॉब्लम नहीं हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन तरीकों से लौट सकती है रंगत</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>नींबू और शहद:</strong> नींबू का रस और शहद का मिक्सचर एक्सफोलिएटिंग और मॉइस्चराइजिंग करता है. नींबू में मौजूद विटामिन सी से मेलेनिन प्रॉडक्शन कम होता है. इसे 10 मिनट लगाकर धो लेना चाहिए, जिससे अच्छे रिजल्ट मिलते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>एलोवेरा:</strong> एलोवेरा जेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन की रंगत सुधारते हैं. इसे रात भर लगाकर सुबह धोएं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हल्दी और दही:</strong> हल्दी का पेस्ट और दही स्किन को निखारता है. इसे 15 मिनट लगाएं और गुनगुने पानी से धोएं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाइजीन में सुधार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शेविंग और वैक्सिंग से बचें, क्योंकि ये स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं. हेयर रिमूवल क्रीम या लेजर हेयर रिमूवल से स्किन को कम नुकसान पहुंचता है. ऐसे में ढीले सूती कपड़े पहनें और डियोड्रेंट्स की जगह नैचुरल टैल्कम पाउडर इस्तेमाल करें.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मॉइस्चराइजेशन और सनस्क्रीन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अंडरआर्म्स को मॉइस्चराइज करने से स्किन की मोटाई कम होती है. शिया बटर या कोको बटर क्रीम स्किन को नरम बनाती हैं. सनस्क्रीन (SPF 30+) का इस्तेमाल भी यूवी रेज से बचाव करता है, जो कालेपन को बढ़ा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cold-feet-know-symptoms-and-preventions-2974377">बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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क्या पानी के छींटे मारने से बेहोश इंसान को आ जाता है होश, जानें क्या करें या क्या नहीं?

क्या पानी के छींटे मारने से बेहोश इंसान को आ जाता है होश, जानें क्या करें या क्या नहीं?



<p style="text-align: justify;">भीषण गर्मी या चोट लगने पर काफी लोग बेहोश हो जाते हैं, जिन्हें होश में लाने के लिए पानी के छींटे मारे जाते हैं. क्या यह तरीका वाकई काम करता है? अगर कोई बेहोश हो गया है तो क्या करना चाहिए? आइए डॉक्टरों के हवाले से जानते हैं हर बात.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितने कारगर होते हैं पानी के छींटे?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पानी के छींटे मारने का तरीका पारंपरिक रूप से बेहोशी को दूर करने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके असर को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. जर्नल ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन (2025) की एक स्टडी के मुताबिक, ठंडे पानी के छींटे चेहरे पर मारने से नर्वस सिस्टम एक्टिव हो सकता है, जिससे कुछ मामलों में हल्की बेहोशी से पीड़ित व्यक्ति को होश आ सकता है. यह असर स्किन पर ठंडक और ब्लड सर्कुलेशन में अचानक इजाफा होने के कारण होता है. हालांकि, यह तब कारगर है, जब गर्मी या थकान की वजह से हल्की बेहोश हो. गंभीर मामलों में जैसे हार्ट फेल्योर या सिर में चोट लगने पर इससे फायदा नहीं मिलता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रजत शर्मा कहते हैं कि पानी के छींटे केवल हल्की बेहोशी में काम कर सकते हैं, लेकिन यह कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है. गंभीर स्थिति में इससे सिर्फ वक्त बर्बाद हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों आती है बेहोशी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किसी भी शख्स को बेहोशी आने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट संबंधित दिक्कतें और सिर में चोट आदि दिक्कतें शामिल हैं. लैंसेट ग्लोबल हेल्थ (2024) के मुताबिक, भारत में गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बेहोशी के 15-20 पर्सेंट मामले सामने आते हैं. मुंबई स्थित लीलावती हॉस्पिटल की इमरजेंसी मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. अनीता मेहता के मुताबिक, बेहोशी का कारण जानना जरूरी है. अगर यह दिक्कत गर्मी से हुई है तो पानी मददगार हो सकता है. हालांकि, हार्ट या दिमाग से जुड़ी दिक्कतों में यह खतरनाक साबित हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब मारने चाहिए पानी के छींटे?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गर्मी की वजह से चक्कर आने पर हल्की बेहोशी हो सकती है, जिसमें ठंडे पानी के हल्के छींटे मारने से नर्वस सिस्टम एक्टिव हो सकते हैं. इससे होश में आने में मदद मिलती है. जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी (2024) के अनुसार, यह तरीका तभी कारगर है, जब व्यक्ति पूरी तरह बेहोश न हो और प्रतिक्रिया दे सके. छींटे बहुत जोर से या अधिक मात्रा में नहीं मारने चाहिए, क्योंकि इससे सांस लेने में रुकावट हो सकती है. दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि अगर व्यक्ति हल्के होश में है और आपकी आवाज सुन रहा है तो चेहरे पर पानी के हल्के छींटे मारें. अगर कोई प्रतिक्रिया न मिल रही है तो तुरंत आपातकालीन सहायता लें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cold-feet-know-symptoms-and-preventions-2974377">बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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क्या आपकी भी सांसों से आती है बदबू? इन तरीकों से कर सकते हैं दूर

क्या आपकी भी सांसों से आती है बदबू? इन तरीकों से कर सकते हैं दूर



<p style="text-align: justify;">बदबूदार सांस (हैलिटोसिस) बेहद कॉमन प्रॉब्लम है, जिससे लाखों लोग परेशान रहते हैं. कई बार यह दिक्कत शर्मिंदगी और आत्मविश्वास की कमी का कारण भी बन सकती है. इस समस्या को नजरअंदाज करना सेहत के लिए भी खतरनाक होता है. आइए आपको बताते हैं कि सांसों से आने वाली बदबू से छुटकारा कैसे पा सकते हैं?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों बदबूदार हो जाती हैं सांस?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बदबूदार सांस के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से ज्यादातर का कनेक्शन ओरल हेल्थ से होता है. लैंसेट ग्लोबल हेल्थ (2025) की एक स्टडी के मुताबिक, करीब 31.8 पर्सेंट लोग कभी न कभी इस समस्या से जूझते हैं. इसकी वजह खराब ओरल क्लीनिंग, जीभ पर बैक्टीरिया का जमाव, सूखा मुंह आदि होती हैं. लहसुन, प्याज और मसालेदार खाने की वजह से भी सांस में बदबू की दिक्कत हो सकती है. जब यह परेशानी लगातार बनी रहती है तो दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारी जैसे पायरिया, या सेहत संबंधित अन्य समस्याओं जैसे डायबिटीज और डाइजेशन डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है. दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के डेंटिस्ट डॉ. रजत शर्मा कहते हैं कि बदबूदार सांस का सबसे आम कारण जीभ और दांतों पर बैक्टीरिया का जमाव है. अगर ओरल क्लीनिंग पर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह समस्या बढ़ सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे होते हैं बदबूदार सांस के लक्षण?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बदबूदार सांस के लक्षणों में मुंह से खराब गंध, सुबह उठने पर सांस की बदबू या दूसरों के साथ बातचीत के दौरान असहजता शामिल है. जर्नल ऑफ ओरल हेल्थ (2024) के मुताबिक, अगर यह समस्या दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे तो यह मसूड़ों की बीमारी, साइनस इंफेक्शन या पेट संबंधी दिक्कतों का संकेत हो सकता है. कुछ मामलों में लोग खुद अपनी सांस की गंध को नोटिस नहीं कर पाते हैं. उन्हें परिवार या दोस्तों की शिकायत से इसकी जानकारी होती है. मुंबई स्थित लीलावती हॉस्पिटल की डेंटल सर्जन डॉ. अनीता मेहता के मुताबिक, अगर सांस की बदबू के साथ मुंह में सूखापन, दांतों में दर्द या गले में खराश हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन तरीकों से दूर कर सकते हैं सांसों की बदबू</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>ओरल क्लीनिंग पर ध्यान:</strong> बदबूदार सांस की समस्या को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका सही ओरल क्लीनिंग है. दिन में दो बार दो मिनट तक ब्रश करना, फ्लॉसिंग और जीभ को साफ करना जरूरी है. जीभ पर बैक्टीरिया का जमाव सांस की 80% बदबू का कारण होता है, इसलिए टंग स्क्रैपर का इस्तेमाल करना चाहिए. अल्कोहल-फ्री एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश का इस्तेमाल भी बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है. ब्रश करने के बाद जीभ को साफ करना न भूलें. माउथवॉश का इस्तेमाल दिन में एक बार करें, लेकिन इसकी ओवरडोज न करें.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हाइड्रेशन और सूखे मुंह से बचाव:</strong> सूखा मुंह (ड्राई माउथ) की वजह से बैक्टीरिया काफी तेजी से बढ़ते हैं, जो सांस की बदबू का कारण बनते हैं. दिन में 8-10 गिलास पानी पीने और चीनी-रहित च्युइंग गम चबाने से लार का प्रॉडक्शन बढ़ता है, जिससे मुंह साफ रहता है. जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च (2024) के मुताबिक, हाइड्रेशन से सांस की बदबू 30 पर्सेंट तक बढ़ सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइट में बदलाव:</strong> लहसुन, प्याज और मसालेदार भोजन की वजह से सांसों में बदबू की दिक्कत बढ़ सकती है. न्यूट्रीशन जर्नल (2024) के मुताबिक, ज्यादा शुगर वाला खाना और प्रोसेस्ड फूड खाने से मुंह में बैक्टीरिया बढ़ते हैं. वहीं, सेब, गाजर और हरी सब्जियां चबाने से मुंह की नैचुरल क्लीनिंग होती है और सांस तरोताजा रहती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>तंबाकू और शराब से परहेज:</strong> तंबाकू और शराब का सेवन करने से मुंह के सूखने की दिक्कत बढ़ती है, जिससे बैक्टीरिया में इजाफा होता है. अमेरिकन डेंटल असोसिएशन (2025) के अनुसार, धूम्रपान करने वालों में मसूड़ों की बीमारी और सांस की बदबू की दिक्कत 50 पर्सेंट ज्यादा होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डॉक्टर से लें सलाह:</strong> अगर आप मुंह की बदबू से परेशान हैं और घरेलू नुस्खों से फायदा नहीं मिल रहा है तो डेंटिस्ट से संपर्क करना चाहिए. डीप क्लीनिंग (स्केलिंग) या मसूड़ों की बीमारी का इलाज जरूरी हो सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cold-feet-know-symptoms-and-preventions-2974377">बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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ये 7 लक्षण दिखें तो समझ लें किडनी में कैंसर ने मार ली एंट्री, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

ये 7 लक्षण दिखें तो समझ लें किडनी में कैंसर ने मार ली एंट्री, तुरंत भागें डॉक्टर के पास


जब किडनी में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, उस वक्त किडनी कैंसर की शुरुआत होती है. ज्यादातर मामलों में यह दिक्कत एक ही किडनी में होती है, लेकिन कुछ रेयर केसेज में दोनों किडनी में यह खतरनाक बीमारी हो सकती है. आइए आपको उन 7 लक्षणों से रूबरू कराते हैं, जिनसे पता लगता है कि किडनी में कैंसर की एंट्री हो चुकी है और ऐसे मरीजों को डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए. 

किडनी कैंसर के शुरुआती संकेत

किडनी कैंसर की शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं. हालांकि, कई बार अन्य हेल्थ टेस्ट जैसे CT स्कैन या अल्ट्रासाउंड से इस बीमारी का पता चल जाता है. हालांकि, जैसे-जैसे किडनी में ट्यूमर बढ़ता है, कुछ संकेत सामने आने लगते हैं. आपको ऐसे ही 7 लक्षणों के बारे में हम बता रहे हैं. 

यूरिन में खून (हीमेच्यूरिया)

यूरिन में खून आना किडनी कैंसर का सबसे कॉमन और शुरुआती लक्षण है. इस खून की वजह से पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या भूरा हो सकता है. हालांकि, कभी-कभी खून की मात्रा इतनी कम होती है कि इसे डायरेक्ट आंखों से नहीं देखा जा सकता है. किडनी कैंसर के 50-60 पर्सेंट मरीजों में यह लक्षण देखा जाता है. यह लक्षण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या किडनी स्टोन के कारण भी हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

पसली और कूल्हे के बीच दर्द

किडनी कैंसर के मरीजों को अक्सर पसली और कूल्हे के बीच (फ्लैंक) या पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द महसूस होता है. यह दर्द चोट या मांसपेशियों की दिक्कत से अलग होता है और बिना किसी खास वजह के हर वक्त होता है. कई रिसर्च में सामने आया है कि यह लक्षण ट्यूमर के बढ़ने और किडनी पर प्रेशर बढ़ने के कारण होता है. 

पेट या पीठ में गांठ

कभी-कभी किडनी में ट्यूमर इतना बड़ा हो जाता है कि इसे पेट या पीठ में गांठ या सूजन के रूप में महसूस होने लगती है. हालांकि, ज्यादातर मामलों में ट्यूमर इतना छोटा होता है कि इसे छूकर नहीं पकड़ा जा सकता है. अगर आपको पेट या पीठ में कोई असामान्य गांठ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

अनजाने में वजन कम होना

बिना किसी वजह के अचानक वजन कम होना किडनी कैंसर का प्रमुख सिग्नल हो सकता है. दरअसल, कैंसर सेल्स से शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है, जिससे भूख कम लगती है और वजन घटने लगता है. अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा है तो इस लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए.

लगातार थकान

लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना भी किडनी कैंसर का अस्पष्ट, लेकिन अहम लक्षण है. यह थकान सामान्य थकान से अलग होती है, क्योंकि यह आराम करने के बाद भी बनी रहती है. बता दें कि कैंसर के कारण शरीर में सूजन बढ़ती है और एनर्जी की कमी महसूस होती है. 

बुखार या रात में पसीना

बिना किसी वजह बार-बार हल्का बुखार या रात में ज्यादा पसीना आना किडनी कैंसर का संकेत हो सकता है. ये लक्षण कैंसर कोशिकाओं से निकलने वाले केमिकल्स के कारण नजर आते हैं. इनसे शरीर का तापमान प्रभावित होता है. 

हाई ब्लड प्रेशर या एनीमिया

किडनी कैंसर की वजह से किडनी द्वारा बनाए जाने वाले हार्मोन्स डिसबैलेंस हो सकते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर या एनीमिया हो सकता है. किडनी कैंसर के मरीजों में ये लक्षण सामान्य हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण

बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं आपके भी पैर? जानें किस बीमारी के हैं ये लक्षण


Cold Feet Symptoms: क्या आपके पैर अक्सर इतने ठंडे हो जाते हैं कि ऐसा लगे जैसे बर्फ ने छू लिए हों? चाहे मौसम गर्मी का हो या ठंडी का, अगर पैरों में हमेशा ठंडक बनी रहती है तो इसे नज़रअंदाज करना गलती हो सकती है. अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर चलते रहते हैंशायद ब्लड सर्कुलेशन धीमा है” या “हवा लग गई होगी” सोचने लगते हैं. लेकिन असल में यह शरीर में किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत भी हो सकता है.

डॉक्टरों के अनुसार, अगर आपके पैर लंबे समय तक ठंडे बने रहते हैं, तो यह नर्व संबंधी समस्या, ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट या थायराइड जैसी हार्मोनल असंतुलन का लक्षण हो सकता है. आइए जानते हैं ठंडे पैरों के पीछे छिपे कारण और कब आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए.

ये भी पढ़े- ICMR की रिपोर्ट ने किया खुलासा, 2030 तक रेबीज मुक्त भारत का लक्ष्य

पैरों का लगातार ठंडा रहना

जब पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता, तो वे ठंडे महसूस होते हैं. यह स्थिति आमतौर पर हृदय से जुड़ी बीमारियों, उच्च कोलेस्ट्रॉल या धमनियों में ब्लॉकेज के कारण होती है.

पैरों में झनझनाहट

पैरों का सुन्न पड़ जाना

चलने में थकान या दर्द

पेरीफेरल न्यूरोपैथी

यह स्थिति मुख्य रूप से डायबिटीज से जुड़ी होती है. इसमें पैरों की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और पैरों में ठंडक, जलन या सुन्नता महसूस होती है.

पैरों में चुभन जैसा अहसास

हल्का दर्द या जलन

संतुलन में परेशानी

हाइपोथायरॉइडिज्म

अगर थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना रही, तो शरीर का तापमान नियंत्रण प्रभावित होता है. इससे हाथ और पैर ठंडे रहने लगते हैं.

बार-बार ठंड लगना

थकान, वजन बढ़ना

बाल झड़ना, ड्राई स्किन

रेनॉड सिंड्रोम

यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है, जिसमें ठंड या तनाव के समय उंगलियों और पैरों की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं. इससे पैर बर्फ जैसे ठंडे हो जाते हैं.

पैर का रंग नीला या पीला पड़ना

झुनझुनी या सुन्नता

ठंड लगने पर तेज असर

ठंडे पैर सिर्फ एक मौसम से जुड़ी परेशानी नहीं, बल्कि यह आपके शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकते हैं. अगर यह समस्या अक्सर बनी रहती है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. समय रहते सही जांच और इलाज से आप न सिर्फ अपने पैरों को गर्म रख सकते हैं, बल्कि किसी बड़ी बीमारी से भी बच सकते हैं.

ये भी पढ़ें: फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क

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