वजन कम करने के लिए खजूर खाने के 6 तरीके, आज से ही करें शुरूआत

वजन कम करने के लिए खजूर खाने के 6 तरीके, आज से ही करें शुरूआत


सुबह खाली पेट खजूर खाना: सुबह-सुबह खजूर खाना मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और शरीर को एनर्जी देता है. खाली पेट 3 खजूर खाएं और उसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीएं.

वर्कआउट से पहले खजूर खाना: खजूर में नेचुरल ग्लूकोज़ होता है, जो वर्कआउट के दौरान ताजगी और स्टैमिना देता है. जिम या योगा से 30 मिनट पहले 2 खजूर खा लें.

वर्कआउट से पहले खजूर खाना: खजूर में नेचुरल ग्लूकोज़ होता है, जो वर्कआउट के दौरान ताजगी और स्टैमिना देता है. जिम या योगा से 30 मिनट पहले 2 खजूर खा लें.

शाम के स्नैक टाइम पर खजूर: जब भूख लगे और आप कुछ हेल्दी खाना चाहें, तो खजूर आजमाएं. 2 खजूर वजन बढ़ाए बिना पेट भरने वाला स्नैक है.

शाम के स्नैक टाइम पर खजूर: जब भूख लगे और आप कुछ हेल्दी खाना चाहें, तो खजूर आजमाएं. 2 खजूर वजन बढ़ाए बिना पेट भरने वाला स्नैक है.

खजूर को दूध में उबालकर पीना: खजूर को रात में दूध में उबालकर पीना लंबे समय तक पेट भरा रखता है. इसे डिनर के रूप में भी लिया जा सकता है जब हल्का खाना हो.

खजूर को दूध में उबालकर पीना: खजूर को रात में दूध में उबालकर पीना लंबे समय तक पेट भरा रखता है. इसे डिनर के रूप में भी लिया जा सकता है जब हल्का खाना हो.

खजूर की स्मूदी: 3 खजूर, थोड़ा दूध, ओट्स और एक केला मिलाकर बनाएं टेस्टी स्मूदी. यह ब्रेकफास्ट वजन घटाने वालों के लिए परफेक्ट है.

खजूर की स्मूदी: 3 खजूर, थोड़ा दूध, ओट्स और एक केला मिलाकर बनाएं टेस्टी स्मूदी. यह ब्रेकफास्ट वजन घटाने वालों के लिए परफेक्ट है.

डेजर्ट की जगह खाएं खजूर:  मीठा खाने का मन हो तो चॉकलेट या मिठाई की जगह खजूर खाएं. इसमें नेचुरल मिठास होती है, जो शुगर क्रेविंग को कंट्रोल करती है.

डेजर्ट की जगह खाएं खजूर: मीठा खाने का मन हो तो चॉकलेट या मिठाई की जगह खजूर खाएं. इसमें नेचुरल मिठास होती है, जो शुगर क्रेविंग को कंट्रोल करती है.

Published at : 04 Jul 2025 06:42 PM (IST)

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फास्टिंग शुगर हाई होने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें, कहीं आप तो नहीं कर रहे ये गलती

फास्टिंग शुगर हाई होने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें, कहीं आप तो नहीं कर रहे ये गलती


रात में देर से खाना खाना: देर रात खाना खाने से शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता और ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. कोशिश करें कि सोने से कम से कम 2 घंटे पहले हल्का भोजन कर लें.

नींद की कमी: नींद की कमी शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ा सकती है, जिससे फास्टिंग शुगर हाई हो जाती है. रोजाना कम से कम 7 घंटे की अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है.

नींद की कमी: नींद की कमी शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ा सकती है, जिससे फास्टिंग शुगर हाई हो जाती है. रोजाना कम से कम 7 घंटे की अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है.

स्ट्रेस लेवल ज़्यादा होना: मानसिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जिससे सुबह के समय ब्लड शुगर बढ़ सकता है. ध्यान, योग, या हल्की एक्सरसाइज तनाव को कम करने में मददगार हो सकते हैं.

स्ट्रेस लेवल ज़्यादा होना: मानसिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जिससे सुबह के समय ब्लड शुगर बढ़ सकता है. ध्यान, योग, या हल्की एक्सरसाइज तनाव को कम करने में मददगार हो सकते हैं.

देर रात स्नैकिंग करना: कुछ लोग रात को लेट नाइट स्नैक्स खाते हैं, जिससे फास्टिंग शुगर बढ़ जाती है. अगर भूख लगे तो लो-कार्ब, हाई-प्रोटीन स्नैक जैसे नट्स या ग्रीक योगर्ट लें.

देर रात स्नैकिंग करना: कुछ लोग रात को लेट नाइट स्नैक्स खाते हैं, जिससे फास्टिंग शुगर बढ़ जाती है. अगर भूख लगे तो लो-कार्ब, हाई-प्रोटीन स्नैक जैसे नट्स या ग्रीक योगर्ट लें.

सोने से पहले बहुत कम खाना: कई बार लोग वजन घटाने के चक्कर में रात का खाना स्किप कर देते हैं, जो कम मात्रा में खाना खाते हैं.

सोने से पहले बहुत कम खाना: कई बार लोग वजन घटाने के चक्कर में रात का खाना स्किप कर देते हैं, जो कम मात्रा में खाना खाते हैं.

दवाइयों का टाइम मिस करना: यदि आप डायबिटीज की दवा समय पर नहीं लेते हैं तो इसका असर सीधे फास्टिंग शुगर पर पड़ता है.

दवाइयों का टाइम मिस करना: यदि आप डायबिटीज की दवा समय पर नहीं लेते हैं तो इसका असर सीधे फास्टिंग शुगर पर पड़ता है.

Published at : 04 Jul 2025 05:00 PM (IST)

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ICMR की रिपोर्ट ने किया खुलासा, 2030 तक रेबीज मुक्त भारत का लक्ष्य

ICMR की रिपोर्ट ने किया खुलासा, 2030 तक रेबीज मुक्त भारत का लक्ष्य


Rabies Free India: हमारे देश में कई बीमारियां ऐसी हैं जो वर्षों से जान लेती आ रही हैं, लेकिन चर्चा में कम ही रहती हैं. ऐसी ही एक बीमारी है, रेबीज सड़क पर घूमते पागल कुत्ते, एक छोटी सी खरोंच या काटने का निशान और फिर धीरे-धीरे बढ़ती लक्षणों की गंभीरता, यही है रेबीज का असली डर.

हाल ही में ICMR (Indian Council of Medical Research) की एक रिपोर्ट ने रेबीज से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल भारत में करीब 5700 लोग रेबीज की वजह से अपनी जान गंवाते हैं. इसलिए सरकार ने 2030 तक इसका ‘जीरो डेथ‘ लक्ष्य तय किया है.

ये भी पढ़े- प्रेग्नेंसी के दौरान जी क्यों मचलाने लगता है, जानें क्या है ये केमिकल लोचा

रेबीज क्या है और क्यों है यह खतरनाक?

रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों, विशेषकर कुत्तों के काटने से फैलती है. यह वायरस मस्तिष्क पर हमला करता है और एक बार लक्षण उभरने के बाद यह बीमारी लगभग 100% घातक हो जाती है. इसी संदर्भ में चेन्नई के डॉ. मनोज मुरहेकर का कहना है कि, रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जो यदि समय रहते पहचान ली जाए और सही टीकाकरण किया जाए, तो 100% रोकी जा सकती है. लेकिन जागरूकता की कमी और चिकित्सा सुविधा तक देर से पहुंच के कारण यह जानलेवा साबित होती है.

ICMR रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु क्या हैं

भारत में हर साल औसतन 5700 मौतें रेबीज से होती हैं

कुत्तों के काटने की घटनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से चिंता का विषय हैं

बहुत से मरीज इलाज की सही जानकारी और समय पर वैक्सीन नहीं मिलने के कारण जान गंवा बैठते हैं

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल स्तर पर जागरूकता, वैक्सीनेशन और पेट एनिमल्स की निगरानी बेहद जरूरी है

2030 तक ‘जीरो डेथ’ लक्ष्य- क्या संभव है?

भारत सरकार ने WHO के सहयोग से 2030 तक देश को रेबीज-मुक्त करने का संकल्प लिया है.

निःशुल्क एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराना

डॉग्स की नसबंदी और वैक्सीनेशन प्रोग्राम

जनता में जागरूकता अभियान, खासकर ग्रामीण इलाकों में जागरूक करना है

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपातकालीन उपचार की व्यवस्था

रेबीज कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन आज भी इसके कारण सैकड़ों जानें चली जाती हैं. ICMR की रिपोर्ट एक चेतावनी है कि, अगर हम जागरूक नहीं हुए तो 2030 का ‘जीरो डेथ‘ सपना अधूरा रह जाएगा. आइए, मिलकर जागरूकता फैलाएं और इस ‘मौत की खामोश बीमारी’ को जड़ से मिटाएं.

ये भी पढ़ें: फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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प्रेग्नेंसी के दौरान जी क्यों मचलाने लगता है, जानें क्या है ये केमिकल लोचा

प्रेग्नेंसी के दौरान जी क्यों मचलाने लगता है, जानें क्या है ये केमिकल लोचा


Nausea During Pregnancy: जब किसी महिला को पता चलता है कि वह मां बनने वाली है, तो वह पल उसके जीवन का सबसे खास होता है. लेकिन इसी खुशी के साथ शुरू होती है कुछ असहज चुनौतियां, जिनमें सबसे आम है जी मचलाना.सुबह-सुबह मुंह का स्वाद कड़वा लगना, पेट में उलझन होना, खाना देखकर घबराहट होना, ये लक्षण प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में ज्यादातर महिलाओं को परेशान करते हैं. कई बार तो ये लक्षण पूरे दिन बने रहते हैं. तो सवाल उठता है कि आखिर ये जी मचलाने वाला ‘केमिकल लोचा’ होता क्या है और इसका समाधान क्या है?

इस पर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति जैन  बताती हैं कि ऐसा होना बिलकुल सामान्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. करीब 70 प्रतिशत महिलाओं को प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में जी मचलाने या उल्टी की समस्या होती है. यह हार्मोनल बदलाव के कारण होता है, खासकर एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन जब तेजी से बढ़ते हैं. तब ऐसा होने लगता है. ये हार्मोन शरीर को गर्भावस्था के लिए तैयार करते हैं, लेकिन इनके अचानक बढ़ने से पाचन तंत्र पर असर पड़ता है, जिससे जी मचलाता है. 

ये भी पढे़- घोड़े का पेशाब पीने से क्या वाकई छूट जाती है शराब की लत? जान लीजिए क्या है सच

एकसाथ भारी खाना न खाएं 

पूरा पेट भरकर खाना मतली को और बढ़ा सकता है दिनभर में 5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. सुबह उठते ही कुछ हल्का और ड्राय खाना जैसे बिस्किट लें.

मिर्च-मसाले और तले-भुने खाने से परहेज करें

तेल और मसालों वाला खाना पेट में एसिडिटी और गैस बढ़ा सकता है. उबली हुई या हल्की-फुल्की चीजें खाएं, जैसे मूंग दाल, खिचड़ी या सूप.

अदरक और नींबू का सेवन करें

ये दोनों घरेलू नुस्खे जी मचलाने में बहुत असरदार हैं. अदरक वाली चाय या गुनगुने पानी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर पिएं.

पर्याप्त आराम और नींद लें

थकावट भी जी मचलाने को बढ़ा सकती है. इसलिए 7 घंटे की नींद और दिन में थोड़ी देर आराम जरूरी है.

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर मतली इतनी ज्यादा हो जाए कि खाना-पीना मुश्किल हो जाए, या शरीर में पानी की कमी महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. यह हाइपरएमेसिस ग्रेविडेरम नामक कंडीशन हो सकती है जो इलाज की मांग करती है.

प्रेग्नेंसी में जी मचलाना एक आम लेकिन असहज अनुभव है।. यह शरीर में चल रहे हार्मोनल बदलाव का हिस्सा है, जिसे सही खानपान, आराम और घरेलू उपायों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.घबराने की बजाय सावधानी अपनाएं और डॉक्टर की राय से सुरक्षित गर्भावस्था का आनंद लें.

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घोड़े का पेशाब पीने से क्या वाकई छूट जाती है शराब की लत? जान लीजिए क्या है सच

घोड़े का पेशाब पीने से क्या वाकई छूट जाती है शराब की लत? जान लीजिए क्या है सच


Horse Urine Cure Alcohol Addiction: सोशल मीडिया की दुनिया में एक नया ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. घोड़े का पेशाब पीजिए और शराब की लत से छुटकारा पाइए. इस दावे के साथ कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग यह कहते दिखते हैं कि घोड़े का मूत्र पीने से सालों पुरानी शराब की लत भी छूट जाती है. कुछ लोग इसे आयुर्वेदिक चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ इसे अंधविश्वास का नाम दे रहे हैं.

सवाल यह उठता है कि क्या इस दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है या यह केवल एक भ्रम है, जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर सकता है? इस भ्रम को दूर करने के लिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने बताया कि, घोड़े का पेशाब पीने से शराब की लत छूटने का कोई मेडिकल या साइंटिफिक प्रमाण नहीं है. उल्टा यह सेहत के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है.

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इस अफवाह के पीछे क्या है मनोविज्ञान?

जो लोग वर्षों से नशे की गिरफ्त में हैं, वे अक्सर किसी “झटपट इलाज” की तलाश में रहते हैं. ऐसे में जब कोई घरेलू या देसी उपाय वायरल होता है, तो लोग उम्मीद के सहारे बिना सोचे-समझे उसे आज़माते हैं. कई बार नशे से जुड़ी समस्याएं मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी होती हैं. केवल कोई एक चीज पी लेने से मानसिक और शारीरिक लत नहीं जाती, इसके लिए साइकोथेरैपी, काउंसलिंग, मेडिकल ट्रीटमेंट और फैमिली सपोर्ट की जरूरत होती है.

घोड़े का मूत्र पीने से क्या हो सकते हैं साइड इफेक्ट्स?

फूड प्वॉइजनिंग और इंफेक्शन का खतरा

पेट दर्द, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन

किडनी और लिवर पर गंभीर प्रभाव

इम्यून सिस्टम कमजोर होना

नशा एक गंभीर बीमारी है, जिसका इलाज केवल वैज्ञानिक पद्धति से ही संभव है. अफवाहों या इंटरनेट के अंधे भरोसे से दूर रहना चाहिए और विशेषज्ञों से परामर्श लेना ही सही रास्ता है.

घोड़े का पेशाब पीना शराब की लत छुड़ाने का उपाय नहीं, बल्कि एक खतरनाक भ्रम है. अगर आप या आपके आसपास कोई इस लत से परेशान है, तो डॉक्टर से संपर्क करें, काउंसलिंग लें और संयम से इलाज कराएं. सेहत के साथ कोई भी प्रयोग करने से पहले सोचें, कहीं इलाज के चक्कर में आप और बीमार न हो जाएं.

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लड़कियों को जिम में टाइट कपड़े पहनने चाहिए या नहीं? ये गलती पड़ सकती है भारी

लड़कियों को जिम में टाइट कपड़े पहनने चाहिए या नहीं? ये गलती पड़ सकती है भारी


Gym Wear for Women: आज के दौर में फिट और फाइन दिखना हर लड़की की चाहत होती है. यही वजह है कि महिलाएं भी अब बड़ी संख्या में जिम जॉइन कर रही हैं और अपनी फिटनेस को लेकर पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक हो गई हैं. जिम जाते समय स्टाइलिश दिखना भी उनके लिए एक तरह का मोटिवेशन बन गया है. ऐसे में टाइट फिटिंग वर्कआउट आउटफिट्स यानी बॉडी-हगिंग लेगिंग्स, टॉप्स और स्पोर्ट्स ब्रा पहनना एक ट्रेंड बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये फैशन कहीं आपकी सेहत पर भारी तो नहीं पड़ रहा? इस पर एक फिटनेस एक्सपर्ट ज्योती ने बताया कि जिम में टाइट कपड़े पहनना आपकी स्किन और हेल्थ दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. 

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स्किन इंफेक्शन का खतरा

जिम में शरीर से बहुत ज़्यादा पसीना निकलता है. अगर आपने बहुत टाइट कपड़े पहने हैं तो वह पसीना त्वचा पर लंबे समय तक बना रहता है. इससे बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर अंडरआर्म्स, कमर और थाई एरिया में दिक्कत होती है. 

ब्लड सर्कुलेशन पर असर

टाइट कपड़े शरीर की नसों को दबाते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है. लंबे समय तक ऐसे कपड़े पहनने से पैरों में सुन्नपन, ऐंठन या थकान जैसी समस्या हो सकती है. 

पसीना सूखने में दिक्कत

टाइट कपड़े पसीने को सोखने में सक्षम नहीं होते या हवा को पास नहीं होने देते. इससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता और ओवरहीटिंग की समस्या हो सकती है, जो वर्कआउट के दौरान थकान या चक्कर आने का कारण बन सकती है. 

त्वचा पर रैशेज और एलर्जी

कुछ सिंथेटिक और टाइट फिटिंग कपड़े पसीने के साथ मिलकर त्वचा पर रैशेज और एलर्जी का कारण बन सकते हैं. कई बार इससे पिगमेंटेशन भी हो सकता है. 

फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह

फिटनेस एक्सपर्ट ज्योती बताती हैं कि वर्कआउट के लिए ऐसे कपड़े चुनने चाहिए जो स्किन-फ्रेंडली, थोड़े लूज फिटिंग हों, ताकि शरीर को आराम मिले और त्वचा खुलकर सांस ले सके. 

क्या पहनना है सही?

कॉटन और ड्राई-फिट फैब्रिक वाले कपड़े चुनें

थोड़े लूज़ फिटिंग कपड़े पहनें जो मूवमेंट में बाधा न डालें

पसीना सोखने वाले और हवा पास करने वाले फैब्रिक का चुनाव करें

वर्कआउट के बाद कपड़े तुरंत बदलें

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