क्या लिवर भी होता है ट्रांसप्लांट, जानिए इसमें कितना आता है खर्चा और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

क्या लिवर भी होता है ट्रांसप्लांट, जानिए इसमें कितना आता है खर्चा और कब पड़ती है इसकी जरूरत?


Cost of Liver Transplant in India: हम सबने किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट सर्जरी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बारे में सुना है. लेकिन जब कोई यह कहता है कि “मुझे लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है”, तो लोगों के चेहरे पर हैरानी और डर झलकने लगता है. ऐसा क्यों? क्योंकि लिवर को लेकर हमारी जानकारी अब भी काफी सीमित है. लिवर हमारे शरीर का वह खामोश सिपाही है, जो हर दिन टॉक्सिन्स से लड़ता है, पाचन में मदद करता है और शरीर को एनर्जी देता है. लेकिन जब यही लिवर कमजोर हो जाए या काम करना बंद कर दे, तो उसका एक ही इलाज बचता है, लिवर ट्रांसप्लांट.

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कब पड़ती है लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत?

लिवर ट्रांसप्लांट तब किया जाता है जब लिवर इतनी बुरी तरह से खराब हो जाए कि वह शरीर के लिए खतरा बन जाए

क्रॉनिक लीवर सिरोसिस होने पर किया जाता है

एक्यूट लिवर फेल्योर (अचानक लिवर का काम बंद कर देना)

लिवर कैंसर (जब कैंसर फैलने लगे और अन्य इलाज काम न आए)

अगर मरीज को भूख नहीं लगती, बार-बार उल्टी होती है, त्वचा या आंखें पीली हो जाती हैं, पेट में पानी भरने लगता है, तो ये संकेत हो सकते हैं कि लिवर फेल हो रहा है और ट्रांसप्लांट पर विचार किया जाना चाहिए

लिवर ट्रांसप्लांट का खर्चा कितना आता है?

लिवर ट्रांसप्लांट एक जटिल और महंगी प्रक्रिया है. भारत में इसका खर्च अस्पताल, शहर और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है

लिवर ट्रांसप्लांट कराने में 20 लाख से 30 लाख तक का खर्च हो सकता है

इसमें सर्जरी, ICU स्टे, दवाएं, टेस्ट और डॉक्टर फीस शामिल होती है

सर्जरी के बाद 6 महीने से 1 साल तक की दवाएं और नियमित जांच की भी जरूरत होती है, जिन पर हर महीने 10,000 से 20,000 तक का खर्च आ सकता है

क्या लिवर डोनेट किया जा सकता है?

एक स्वस्थ व्यक्ति भी अपने लिवर का हिस्सा डोनेट कर सकता है. क्योंकि लिवर का एक हिस्सा भी शरीर में नया लिवर बनने में सक्षम होता है, इसलिए “लिविंग डोनर” ट्रांसप्लांट संभव है. आमतौर पर परिवार के सदस्य ही डोनर बनते हैं.

लिवर ट्रांसप्लांट भले ही डरावना लगे, लेकिन यह आज की आधुनिक चिकित्सा का एक चमत्कार है, जो हजारों जिदगियों को नया जीवन दे रहा है. ज़रूरत है समय पर जांच कराने की, लक्षणों को नजरअंदाज न करने की और अगर कभी जरूरत पड़े तो डरे नहीं, क्योंकि अब लिवर ट्रांसप्लांट संभव है.

ये भी पढ़ें: फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बेड पर लेटते ही दिमाग में घूमने लगते हैं हजारों ख्याल, जानिए किस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं आप?

बेड पर लेटते ही दिमाग में घूमने लगते हैं हजारों ख्याल, जानिए किस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं आप?



<p style="text-align: justify;">दिनभर की भागदाैड़ के बाद आराम की तलाश में बेड पर पहुंचते हैं. लेकिन यहां नींद के इंतजार में करवटें बदलते रहते हैं. घंटों बेड पर लेटने के बाद भी नींद नहीं आती. ऐसे में ये ​स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है. अक्सर लोग इस प्राॅब्लम को दिन की थकान और चिंता से जोड़कर अनदेखा कर देते हैं. आइए जानते हैं कि ये ​स्लीप डिसऑर्डर क्या होते हैं और किस तरह शरीर पर असर डालते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;">पहले समझिए ​स्लीप डिसऑर्डर क्या है?</p>
<p style="text-align: justify;">हेल्दी बाॅडी के लिए अच्छी नींद जरूरी होती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि अच्छी नींद बाॅडी को रीस्टोर करने में मदद करती है. लेकिन जब ये नींद आपकी दुश्मन बन जाती है, तो मु​श्किल खड़ी हो जाती है. बेड पर घंटों पड़े रहने के बाद भी पलकें झपकने का नाम नहीं लेतीं. अगर आंखें बंद हो भी जाती हैं तो कुछ ही देर बार खुल जाती हैं. नींद उचटने की ये वजह स्लीप डिसऑर्डर के चलते हो सकती है. ​स्लीप डिसऑर्डर कई तरह के होते हैं. इन समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई बार आपको अपनी लाइफस्टाइल में चेंजेस करने पड़ते हैं तो कई केसेज में हेल्थ एक्सपर्ट्स दवा लेने की सलाह देते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये स्लीप डिसऑर्डर उड़ा सकते हैं रात की नींद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंसोमनिया: रात की नींद गायब करने के लिए ये प्रमुख स्लीप डिसऑर्डर है. इसमें दो तरह के केस सामने आते हैं. पहला क्राॅनिक इंसोमनिया में महीने भर या उससे अ​धिक समय से नींद की समस्या से जूझने की दिक्कत सामने आती है. रात में बेड पर करवटें बदलते रहते हैं. दिन में थका हुआ महसूस करते हैं. इस तरह के लक्षण क्राॅनिक इंसोमनिया में सामने आ सकते हैं. वहीं एक्यूट इंसोमनिया की ​स्थिति कुछ दिनों या हफ्तों तक रह सकती है. इसके पीछ हे​क्टिक लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, एंक्जाइटी आदि वजह हो सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">स्लीप एपनिया: स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है. इसके चलते अचानक से आंखें खुल जाती हैं. इससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती. नींद उचटती रहती है. ये दिक्कत सांस रोगियों को प्रमुख रूप से परेशान करती है. ऐसे में दिन में अत्यधिक नींद, थकान, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">रेस्टलेस लेग सिंड्रोम: रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में पैर में जलन या झनझनाहट महसूस होने लगती है. इस दाैरान पैर हिलाने पर आराम मिलने लगता है. ये समस्या इंसान को सोते समय ज्यादा होती है. ऐसे में रात की नींद में खलल पड़ जाता है. इस समस्या से परमानेंट निजात नहीं पाया जा सकता, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है. जिससे नींद की समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है. ट्रीटमेंट के बाद रात में भी प्राॅपर नींद ले सकते हैं.</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-untreated-cancer-spread-in-body-without-treatment-2970971">इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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लिवर का बॉडीगार्ड है ये छोटा-सा फल, नाम जान लेंगे तो सुधर जाएगी सेहत

लिवर का बॉडीगार्ड है ये छोटा-सा फल, नाम जान लेंगे तो सुधर जाएगी सेहत


Liver Detox Fruit: आपके शरीर में एक ऐसा साइलेंट वॉरियर है, जो दिन-रात बिना रुके शरीर को डिटॉक्स करता रहे, वो है लिवर, लेकिन क्या आप उसकी सुरक्षा के लिए कुछ करते हैं? आज के दौर में जंक फूड, दवाइयों का ओवरडोज और तनाव, सबसे पहले असर डालते हैं हमारे लिवर पर. ऐसे में अगर आपको कोई ऐसा प्राकृतिक इलाज मिल जाए, जो इस अनमोल अंग का ख्याल बिना साइड इफेक्ट के रख सके, तो कैसा रहेगा? हम बात कर रहे हैं एक बेहद छोटा-सा लेकिन असरदार फल की, जिसे भूमि आंवला कहा जाता है. हो सकता है आपने इसका नाम पहले न सुना हो, लेकिन इसके फायदे इतने जबरदस्त हैं कि इसे लिवर का ‘बॉडीगार्ड’ कहा जाता है.

ये भी पढ़े- शेफाली किन दवाओं का कर रही थी सेवन? जानें ये सेहत पर क्यों पड़ती है भारी

भूमि आंवला क्या है?

भूमि आंवला एक छोटा-सा पौधा होता है, जो जमीन के पास उगता है और उसके छोटे-छोटे हरे फलों की बनावट आम आंवले जैसी होती है. इसीलिए इसे “भूमि आंवला” कहा जाता है. यानी जमीन पर उगने वाला आंवला. आयुर्वेद में “झरफुका” भी कहा जाता है और यह लिवर, किडनी और पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में बेहद लाभकारी माना गया है.

लिवर डिटॉक्स करता है

भूमि आंवला में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. यह लिवर की कार्यक्षमता को सुधारता है और उसे रीजनरेट करने में मदद करता है.

हेपेटाइटिस में लाभकारी

आयुर्वेद में भूमि आंवला का उपयोग हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों में किया जाता रहा है. यह लिवर की सूजन को कम करता है और वायरस से लड़ने में सहायक होता है.

फैटी लिवर से राहत

फैटी लिवर आजकल एक आम समस्या है. भूमि आंवला फैट को लिवर में जमने से रोकता है और पहले से मौजूद फैट को भी धीरे-धीरे घटाता है.

अन्य स्वास्थ्य लाभ

ब्लड शुगर कंट्रोल: डायबिटीज रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकता है

इम्यूनिटी बूस्ट करता है: रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है

किडनी स्टोन में राहत: भूमि आंवला पेशाब के रास्ते पथरी के छोटे कणों को बाहर निकालने में मदद करता है

सेवन कैसे करें?

भूमि आंवला का रस, पाउडर, या काढ़ा रूप में सेवन किया जा सकता है

सुबह खाली पेट एक चम्मच रस पानी के साथ लें

ये भी पढ़ें: किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?

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लिवर का बॉडीगार्ड है ये छोटा-सा फल, नाम जान लेंगे तो सुधर जाएगी सेहत

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भूमि आंवला क्या है?

भूमि आंवला एक छोटा-सा पौधा होता है, जो जमीन के पास उगता है और उसके छोटे-छोटे हरे फलों की बनावट आम आंवले जैसी होती है. इसीलिए इसे “भूमि आंवला” कहा जाता है. यानी जमीन पर उगने वाला आंवला. आयुर्वेद में “झरफुका” भी कहा जाता है और यह लिवर, किडनी और पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में बेहद लाभकारी माना गया है.

लिवर डिटॉक्स करता है

भूमि आंवला में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. यह लिवर की कार्यक्षमता को सुधारता है और उसे रीजनरेट करने में मदद करता है.

हेपेटाइटिस में लाभकारी

आयुर्वेद में भूमि आंवला का उपयोग हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों में किया जाता रहा है. यह लिवर की सूजन को कम करता है और वायरस से लड़ने में सहायक होता है.

फैटी लिवर से राहत

फैटी लिवर आजकल एक आम समस्या है. भूमि आंवला फैट को लिवर में जमने से रोकता है और पहले से मौजूद फैट को भी धीरे-धीरे घटाता है.

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इम्यूनिटी बूस्ट करता है: रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है

किडनी स्टोन में राहत: भूमि आंवला पेशाब के रास्ते पथरी के छोटे कणों को बाहर निकालने में मदद करता है

सेवन कैसे करें?

भूमि आंवला का रस, पाउडर, या काढ़ा रूप में सेवन किया जा सकता है

सुबह खाली पेट एक चम्मच रस पानी के साथ लें

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