लो ब्लड प्रेशर से कैसे हो सकती है एक झटके में मौत? शेफाली जरीवाला मामले में भी यही था कारण

लो ब्लड प्रेशर से कैसे हो सकती है एक झटके में मौत? शेफाली जरीवाला मामले में भी यही था कारण


एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला की माैत न हर किसी को झकझोर दिया. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से लेकर उनके प्रशंसक तक शोक में डूब गए. कम उम्र में एक्ट्रेस की माैत से हर कोई हैरान था. माैत की आशंका कार्डियक अरेस्ट से जताई गई, लेकिन अब जो रिपोर्ट्र्स सामने आ रहीं हैं, उन्होंने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. आशंका जताई जा रही है कि एक्ट्रेस के सा​थ ये जानलेवा ​स्थिति ब्लड प्रेशर लो होने से हुई है. क्या बाॅडी में ब्लड प्रेशर लो होना इतना खतरनाक हो सकता है, आइए इस बारे में जानते हैं…

कितना खतरनाक होता है ब्लड प्रेशर?

ब्लड प्रेशर की समस्या का जिक्र होते ही जेहन में हाई बीपी, हाइपरटेंशन आदि आ जाते हैं. इसके चलते स्ट्रोक से लेकर हार्ट अटैक तक का रिस्क रहता है. लेकिन ब्लड प्रेशर का बढ़ना ही नहीं, ब​ल्कि इसका कम होना भी खतरनाक होता है. एक्ट्रेस के केस में आशंका जताई जा रही है ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था. जिससे चलते हार्ट ने ब्लड पंप करना बंद कर दिया. इसके चलते एक्ट्रेस को कार्डियक अरेस्ट हुआ. यानी सिर्फ हाई बीपी ही नहीं, ब​ल्कि लो बीपी भी माैत की वजह बन सकता है. 

ऐसे में सवाल उठता है कि आ​खिर बाॅडी का बीपी कितना रहना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ब्लड प्रेशर को सिस्टोलिक (टाॅप नंबर) और डायस्टोलिक (बाॅटम नंबर) में नापा जाता है. अगर बाॅडी का ब्लड प्रेशर 90/60 से कम है तो इसे लो माना जाता है. नाॅर्मल बीपी 120/80 एमएम एचजी के आसपास रहता है. इसमें थोड़ा बहुत फ्लक्चुएशन होने पर घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन अ​धिक ऊपर नीचे होने पर डाॅक्टर से कंसल्ट करना उचित रहता है.

किस तरह सामने आते हैं लक्षण?

अक्सर कम उम्र वालों में ब्लड प्रेशर के लक्षण इतने सामान्य नजर आते हैं कि इन्हें इग्नोर कर दिया जाता है. ऐसा करना खतरनाक साबित होता है. ​आइए जानते हैं कि किस तरह दिखते हैं लक्षण…

  • अचानक से चक्कर आने लगना
  • बेहोश हो जाना
  • उल्टी आना या जी मचलने लगना
  • आंखों से धुंधला नजर आने लगना
  • सांसों का तेज हो जाना
  • बिना कुछ किए थकान या कमजोरी महसूस होना
  • दिमाग में कंफ्यूजन बने रहना
  • चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव
  • हार्ट रेट बढ़ जाना
  • ​स्किन सफेद पड़ जाना
  • यूरिन कम होना

रिसर्च में भी सामने आए चाैंकाने वाले आंकड़े

अक्सर हाई बीपी से स्ट्रोक को माैत का बड़ा कारण माना जाता है. लेकिन एक स्टडीज में सामने आया है कि लो ब्लड प्रेशर स्ट्रोक और उससे होने वाली माैत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है. स्मोकिंग और दिल या कैंसर जैसी बीमारियों से जूझने वालों में ये ​स्थिति और खतरनाक हो सकती है. ऐसे में बीपी को लगातार माॅनिटर करते रहना चाहिए.

ये भी पढ़ें: सेल्फ मेडिकेशन की वजह से हुई शेफाली जरीवाला की मौत? जानें खुद से दवाएं लेना कितना खतरनाक

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बियर के बाद ले रहे हैं व्हिस्की या वाइन, डॉक्टर से जानिए कितना खतरनाक है ये कॉकटेल?

बियर के बाद ले रहे हैं व्हिस्की या वाइन, डॉक्टर से जानिए कितना खतरनाक है ये कॉकटेल?



<p style="text-align: justify;">नशे के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते हैं. बियर के बाद ​व्हिस्की या वाइन पी लेते हैं. इससे नशे का सुरूर तो चढ़ता है, लेकिन इसके बाद की ​स्थिति मु​श्किल में डाल सकती है. शराब का सेवन किसी भी मात्रा में हेल्थ के लिए उचित नहीं माना जाता. ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स के हिसाब से जानते हैं कि सेहत के लिए काॅकटेल कितना खतरनाक हो सकता है&zwnj;?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस तरह होता है खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो शराब को मिक्स करना आम बात है, मगर ऐसा सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता. दरअसल, हर तरह की शराब में अल्कोहल की मात्रा अलग होती है. ऐसे में इनका असर भी अलग-अलग होता है. जैसे बियर में एल्कोहल की मात्रा कम होती है. जबकि व्हिस्की या वाइन में एल्कोहल ज्यादा होता है. अगर कोई व्यक्ति पहले बियर पीता है तो नशे का धीरे-धीरे असर होता है. इसके बाद व्हिस्की पीता है तो तेजी से नशा होता है. इस ​स्थिति में शरीर पर से कंट्रोल खत्म हो सकता है. कदम डगमगाने के साथ सोचने-समझने की ​स्थिति नहीं रहती. शरीर पर कई तरह से असर देखने को मिलता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>काॅकटेल से ये समस्याएं आती हैं सामने</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>हैंगओवर:</strong> एक से अ​धिक शराब को मिक्स करके पीने से अगले दिन सिर में तेज दर्द हो सकता है. ऐसा लगता है कि सिर फटा जा रहा है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइजेशन प्राॅब्लम:</strong> शराब बाॅडी के डाइजेशन सिस्टम पर असर करती है. ऐसे में एक से अ​धिक शराब को मिक्स करके पीने से गैस, डायरिया जैसी प्राॅब्लम का सामना करना पड़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>शरीर कंट्रोल में नहीं रहता:</strong> अगर कोई सिर्फ बियर पीता है. ऐसे में उसे बियर के बाद शराब पिला दी जाए तो नशे का अंदाजा नहीं रहता. इससे व्य​क्ति शरीर पर कंट्रोल खो देता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>लिवर पर असर:</strong> शराब को मिक्स करके पीने से इसका असर लिवर पर भी पड़ता है. लिवर को अलग-अलग तरह के टॉक्सिंस को एक साथ प्रोसेस करना पड़ता है. इससे लिवर पर दबाव बढ़ जाता है. लगातार ऐसी ​स्थिति बनी रहने से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>अल्कोहल से नुकसान</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>बातों को भूलने लगते हैं:</strong> शराब के सेवन से डिप्रेशन, एंग्जाइटी और नींद की समस्या हो सकती है. इसका असर याददाश्त पर भी पड़ने लगता है. निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है. लंबे समय तक ऐसा रहने से ​स्थिति गंभीर हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हार्ट पर असर:</strong> शराब पीने से बाॅडी में ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल्ड हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है. हार्ट रेट अनियमित होने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>लिवर खराब हो जाता है:</strong> शराब का लिवर पर प्रभाव पड़ता है. फैटी लिवर की प्राॅब्लम से जूझना पड़ता है. ध्यान नहीं देने पर ये हेपेटाइटिस और सिरोसिस के रूप में सीवियर हेल्थ प्राॅब्लम बन जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कैंसर का खतरा:</strong> डब्ल्यूएचओ ने शराब को ग्रुप 1 कार्सिनोजेन में रखा है. इससे ब्रेस्ट, बाउल, मुंह, खाने की नली, अपर थ्रोट, स्वरयंत्र (वाॅयस बाॅक्स) और लिवर में कैंसर होने का जो​खिम रहता है.</li>
</ul>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-untreated-cancer-spread-in-body-without-treatment-2970971">इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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सेल्फ मेडिकेशन की वजह से हुई शेफाली जरीवाला की मौत? जानें खुद से दवाएं लेना कितना खतरनाक

सेल्फ मेडिकेशन की वजह से हुई शेफाली जरीवाला की मौत? जानें खुद से दवाएं लेना कितना खतरनाक



<p style="text-align: justify;">’कांटा लगा’ गर्ल शेफाली जरीवाला की मौत के बाद चल रही जांच में चौंकाने वाली तमाम बातें सामने आ रही हैं. मुंबई पुलिस को उनके घर से ग्लूटाथियोन, विटामिन सी और गैस्ट्रिक से संबंधित दवाएं मिली हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि शेफाली बिना डॉक्टर से सलाह लिए इन दवाओं का सेवन कर रही थीं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सेल्फ मेडिकेशन कितना खतरनाक हो सकता है? जानते हैं कि इस बारे में क्या है डॉक्टरों की राय?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे हुई शेफाली जरीवाला की मौत?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">27 जून 2025 की रात शेफाली जरीवाला का अचानक निधन हो गया. शुरुआती जांच में उनकी मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई. पुलिस के मुताबिक, उस दिन शेफाली के घर में सत्यनारायण पूजा थी, जिसकी वजह से वह पूरे दिन उपवास पर थीं. इसके बावजूद उन्होंने दोपहर के वक्त एंटी-एजिंग इंजेक्शन लिया. रात करीब 10-11 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. उनका शरीर कांपने लगा और वह बेहोश हो गईं. परिवार के सदस्य उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस को उनके घर से कई दवाएं और इंजेक्शन मिले, जिनमें ग्लूटाथियोन, विटामिन सी और एसिडिटी से संबंधित दवाएं शामिल थीं. कुछ सूत्रों का दावा है कि शेफाली ने उस दिन बासी फ्राइड राइस भी खाया था, जिससे फूड पॉइजनिंग की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉक्टर से सलाह लिए बिना एंटी-एजिंग और अन्य सप्लीमेंट्स का सेवन करना मौत का मुख्य कारण हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या होता है सेल्फ मेडिकेशन?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेल्फ मेडिकेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई भी शख्स डॉक्टर से सलाह लिए बिना दवाएं लेता है. इसमें नॉर्मल हेल्थ प्रॉब्लम जैसे सिरदर्द, बुखार, खांसी या गैस्ट्रिक समस्याओं के लिए दवाएं खरीदना, पुराने पर्चे का बार-बार इस्तेमाल या इंटरनेट और दोस्तों की सलाह से दवाएं लेना शामिल है. भारत में यह प्रक्रिया बेहद कॉमन है, क्योंकि ये दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से मिल जाती हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना खतरनाक होता है सेल्फ मेडिकेशन?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि सेल्फ मेडिकेशन आज की सबसे बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स में से एक है. लोग अक्सर सस्ते और तुरंत इलाज के चक्कर में डॉक्टर से सलाह लिए बिना दवाएं लेते हैं, जिनसे शुरुआत में राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. गलत दवाओं का इस्तेमाल किडनी, लिवर और हार्ट पर दबाव डाल सकता है. वहीं, कैलाश अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. अजय शर्मा का कहना है कि एंटी-एजिंग सप्लीमेंट्स जैसे ग्लूटाथियोन और विटामिन सी का अनियंत्रित उपयोग हार्मोनल डिसबैलेंस, हाई ब्लड प्रेशर और गैस्ट्रिक से संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं. व्रत के दौरान ऐसी दवाएं लेना ज्यादा खतरनाक हो सकता है, क्योंकि शरीर पहले से ही कमजोर कंडीशन में होता है.</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-untreated-cancer-spread-in-body-without-treatment-2970971">इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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शेफाली किन दवाओं का कर रही थी सेवन? जानें ये सेहत पर क्यों पड़ती है भारी

शेफाली किन दवाओं का कर रही थी सेवन? जानें ये सेहत पर क्यों पड़ती है भारी


Medicines Taken by Saefal Jariwala: सुंदर दिखना किसे अच्छा नहीं लगता? खासकर जब आप ग्लैमर इंडस्ट्री में हों, तो हर समय फिट और यंग दिखना एक जरूरत बन जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस खूबसूरती की कीमत कोई अंदर ही अंदर अपनी सेहत से चुका रहा हो? हाल ही में एक्ट्रेस शिफाली जरीवाला को अचाकक कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी मौत हो गई। इसके बाद से जानकारी मिल रही है कि, वे लंबे समय से एंटी-एजिंग वायल्स, विटामिन इंजेक्शन और गैस्ट्रिक की दवाएं ले रही थीं। ये जानकर भले ही आपको लगे कि वो अपनी सेहत का ध्यान रख रही थीं, लेकिन इन दवाओं के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। आइए जानते हैं कि इन दवाओं को लेने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है।

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एंटी-एजिंग वायल्स

एंटी-एजिंग वायल्स यानी ऐसी दवाएं या इंजेक्शन जो त्वचा को जवान दिखाने, झुर्रियां कम करने और चेहरे पर ग्लो लाने का ली जाती है. इन वायल्स में अक्सर हॉर्मोनल कंपाउंड्स, कोलेजन बूस्टर्स या अन्य केमिकल्स होते हैं. 

हार्मोनल असंतुलन: ये वायल्स शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं. 

लिवर पर प्रभाव: लंबे समय तक इनका उपयोग लिवर को डैमेज कर सकता है. 

त्वचा की प्राकृतिक बनावट बदल सकती है, जिससे समय के साथ स्किन पतली, संवेदनशील और डल हो जाती है. 

विटामिन इंजेक्शन

विटामिन इंजेक्शन्स आजकल फैशन बन गए हैं. थकावट दूर करने, एनर्जी पाने या इम्यून सिस्टम मजबूत करने के नाम पर लोग इन्हें नियमित रूप से लेने लगे हैं. लेकिन हर चीज़की एक लिमिट होती है. 

हाइपरविटामिनोसिस: यानी शरीर में किसी विशेष विटामिन की अधिकता. खासकर विटामिन A और D की अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक है. 

किडनी और लिवर पर दबाव: इंजेक्शन से विटामिन जल्दी शरीर में पहुंचता है, लेकिन उसकी प्रोसेसिंग और फिल्ट्रेशन किडनी व लिवर पर ज़ोर डालती है. 

इंजेक्शन से एलर्जी या रिएक्शन की संभावना भी बनी रहती है. 

गैस्ट्रिक की दवाएं

गैस की समस्या से राहत पाने के लिए लोग अकसर एंटासिड्स या प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स  जैसी दवाएं लेते हैं. लेकिन जब इनका नियमित इस्तेमाल होता है, तो फायदे कम और नुकसान ज्यादा करती है. 

पाचन तंत्र कमजोर होना: गैस्ट्रिक दवाएं पेट की एसिड को कम करती हैं, जिससे खाना सही से नहीं पचता. 

विटामिन बी12 की कमी: लंबे समय तक PPI दवाएं लेने से शरीर में विटामिन बी12 की कमी हो सकती है, जिससे थकान, कमज़ोरी और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. 

हड्डियों की कमजोरी: पेट की एसिडिटी कम होने से कैल्शियम का अवशोषण घट जाता है, जिससे हड्डियां कमजोर होती हैं. 

ये भी पढ़ें: किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?

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पुरुष या महिला, किसे पहले होता है लंग कैंसर?

पुरुष या महिला, किसे पहले होता है लंग कैंसर?


Lung Cancer in Women or Men: अक्सर हम सोचते हैं कि लंग कैंसर सिर्फ पुरुषों को ही होता है, वो भी उन लोगों को जो धूम्रपान करते हैं. लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है? क्या महिलाओं को इससे खतरा नहीं है? या फिर विज्ञान कुछ और कहता है? आइए जानते हैं कि पुरुष और महिला, इन दोनों में लंग कैंसर का खतरा किसे ज्यादा होता है और क्यों।

क्या पुरुषों को ज्यादा खतरा है?

आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में पुरुषों में लंग कैंसर के मामले महिलाओं की तुलना में अधिक सामने आते हैं। खासकर विकासशील देशों में जहां पुरुषों में तंबाकू सेवन का प्रतिशत अधिक है. धूम्रपान, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, ये सभी लंग कैंसर के प्रमुख कारण माने जाते हैं.

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महिलाओं को भी कम खतरा नहीं

महिलाएं अक्सर धूम्रपान नहीं करतीं, फिर भी उन्हें लंग कैंसर हो सकता है.  पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं के संपर्क में आना, इनडोर एयर पॉल्यूशन, किचन में लकड़ी या कोयले से जलने वाला धुआं और जेनेटिक कारण भी हो सकता है. कई शोध बताते हैं कि कुछ महिलाओं में ऐसे जीन होते हैं, जो उन्हें लंग कैंसर के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, भले ही उन्होंने कभी धूम्रपान न किया हो.

पुरुष बनाम महिला-  कौन ज्यादा रिस्क में है

धूम्रपान करने वाले पुरुषों में लंग कैंसर का रिस्क अधिक होता है

धूम्रपान न करने वाली महिलाओं में भी रिस्क मौजूद है, लेकिन यह धीरे-धीरे बढ़ रहा है, क्योंकि शहरी जीवनशैली और प्रदूषण ने महिलाओं को प्रभावित किया है

कुछ अध्ययनों के अनुसार, महिलाएं लंग कैंसर के कुछ खास प्रकारों के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं

बचाव के लिए क्या करना चाहिए 

धूम्रपान बंद करें – सबसे पहला और जरूरी कदम

पैसिव स्मोकिंग से बचें– बच्चों और महिलाओं को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है

रसोई में वेंटिलेशन रखें– खाना बनाते समय धुएं से बचें

प्रदूषण से बचाव करें– मास्क पहनें, एयर प्यूरिफायर का प्रयोग करें

लंग कैंसर किसी एक लिंग का रोग नहीं है. यह किसी को भी हो सकता है, पुरुष या महिला.फर्क सिर्फ इतना है कि खतरे के कारण और शरीर की प्रतिक्रिया दोनों में अंतर होता है. जरूरी है कि हम जागरूक हों, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच कराएं. क्योंकि जिंदगी की कीमत सबसे ऊपर है. 

ये भी पढ़ें: किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?

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रात में जल्दी खाना खाने से होता है मोटापा कम, जानिए क्या है सच

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Eating Early for Weight Loss: रोजमर्रा की भागदौड़ में हममें से बहुत से लोग रात का खाना कभी 9 बजे तो कभी 10 बजे के बाद ही खाते हैं. जब वजन बढ़ता है तो हम सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर गलती कहां हो रही है? क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने की दिशा में आपकी सबसे पहली आदत होनी चाहिए, रात में जल्दी खाना खाना. ये सिर्फ एक “डायट टिप” नहीं है, बल्कि इसके पीछे है वैज्ञानिक आधार और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह। कुछ लोगों को लगता है कि समय से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. तो आइए जानते हैं कि रात का खाना जल्दी खाने से वजन कैसे घट सकता है और इसके पीछे का सही कारण क्या है. 

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शरीर की बायोलॉजिकल घड़ी को समझिए

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे “सर्केडियन रिदम” कहते हैं. यह घड़ी हमारे खाने, सोने और जागने के समय को नियंत्रित करती है. अगर हम इस घड़ी के अनुसार रात का खाना जल्दी खाएं, यानी 8 बजे तक खा लें तो हमारा पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और फैट स्टोर नहीं होता, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. 

देर रात खाना 

अगर आप रात 10 या 11 बजे खाना खाते हैं, तो शरीर को खाना पचाने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. सोने के तुरंत बाद पाचन धीमा हो जाता है और खाना शरीर में चर्बी के रूप में जमा होने लगता है. इससे वजन धीरे-धीरे बढ़ता है और मोटापा एक बड़ी समस्या बन सकता है. 

जल्दी खाने से नींद होती है बेहतर

जब आप खाना समय पर खाते हैं तो आपका शरीर सोते समय हल्का महसूस करता है. इससे नींद गहरी आती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है. अच्छी नींद वजन कम करने में बहुत सहायक होती है, क्योंकि यह हार्मोन बैलेंस बनाए रखती है. 

पेट को मिलता है आराम

जल्दी खाना खाने से आपका पेट भी आपसे खुश रहता है. अपच, गैस और भारीपन जैसी समस्याएं नहीं होतीं, जिससे अगला दिन भी तरोताजा शुरू होता है. इसके साथ ही आप सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज या योग कर पाते हैं, जो वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है. 

रिसर्च क्या कहती है?

कई स्टडीज़ में यह पाया गया है कि जो लोग रात 7 से पहले खाना खा लेते हैं, उनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वे दूसरों की तुलना में तेज़ी से वजन घटाते हैं. इसके अलावा इंसुलिन लेवल कंट्रोल में रहता है, जिससे डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होता है. 

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