ये सिग्नल बताते हैं बॉडी में हो गई नमक की कमी, इससे बढ़ता है इन बीमारियों का खतरा

ये सिग्नल बताते हैं बॉडी में हो गई नमक की कमी, इससे बढ़ता है इन बीमारियों का खतरा


शरीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए हर तरह के पोषक तत्व की जरूरत होती है. इन्हीं में से एक नमक भी है. ये शरीर में सोडियम की जरूरत को पूरा करता है. अक्सर सुना होगा कि नमक कम खाना चाहिए. इससे हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क होता है. लेकिन इसकी कमी भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है.आइए जानते हैं कि नमक की कमी होने पर बाॅडी किस तरह संकेत देती है और किन बीमारियों का रिस्क रहता है.

नमक की कमी के संकेत

  • सिरदर्द:  शरीर में नमक की कमी होने पर सिरदर्द हो सकता है. नमक में सोडियम होता है. जब शरीर में सोडियम की मात्रा कम होने लगती है, तो बॉडी डिहाइड्रेट हो जाती है. ऐसे में सिरदर्द महसूस हो सकता है.
  • मतली और उल्टी: बाॅडी में सोडियम की मात्रा असंतुलित होने से फ्लूड का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे सिर घूमना, चक्कर आना या मतली की समस्या हो सकती है.
  • थकान और कमजोरी: सोडियम की कमी से मसल्स और नर्व फंक्शन सही तरह से काम नहीं कर पाते हैं. ऐसे शरीर थका हुआ महसूस करता है. एनर्जी की कमी भी महसूस होती है.
  • चक्कर आना: सोडियम की कमी का असर ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है. ब्लड प्रेशर कम होने से कमजोरी, थकान के साथ-साथ चक्कर आने की शिकायत भी देखी जा सकती है.
  • भूख कम लगना: हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सोडियम की कमी वजह से भूख में कमी आने लगती है. ऐसे में शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, जिससे अन्य समस्याएं होने लगती हैं. इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है.

कितनी नमक की जरूरत?

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में नमक का सेवन प्रति दिन लगभग 11 ग्राम है. ये विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रिकमंड नमक की अधिकतम मात्रा 5 ग्राम प्रतिदिन से अधिक है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार एक दिन में 2300 मिलीग्राम से अधिक सोडियम की आवश्यकता नहीं होती है.

ये हो सकती है दिक्कत

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: एक्सपर्ट्स की मानें तो सोडियम की कमी से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या देखने को मिल सकती है. जो अनियंत्रित ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर का कारण बन सकती है. इससे टाइप 2 डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियां होने का रिस्क बढ़ जाता है.
  • हार्ट डिजीज: सोडियम की कमी से बाॅडी में हार्ट को भी नुकसान पहुंच सकता है. हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है.
  • कोलेस्ट्रॉल: कुछ स्टडीज में सामने आया कि कम सोडियम वाले आहार एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों स्तरों को बढ़ा सकते हैं. इससे हार्ट को नुकसान पहुंचने के साथ अन्य बीमारियों का रिस्क भी बढ़ जाता है.
  • डायबिटीज: डायबिटीज मरीजों को सोडियम की मात्रा को लेकर विशेष ध्यान रखना चाहिए. सोडियम की कमी उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

ये भी पढ़ें: इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या बेहद तेजी से घट रहा है आपका वजन, जानें कब होता है यह कैंसर का सबसे बड़ा लक्षण?

क्या बेहद तेजी से घट रहा है आपका वजन, जानें कब होता है यह कैंसर का सबसे बड़ा लक्षण?


शरीर का वजन सीधा हमारी हेल्थ को इंडिकेट करता है. वजन का बढ़ना कई हेल्थ प्राॅब्लम का रिस्क पैदा करता है. वहीं इसका कम होना और भी चिंताजनक साबित होता है. अचानक से अगर वजन गिरने लगे तो ये कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का भी संकेत हो सकता है. वजन कम होने पर कब सतर्क हो जाना चाहिए, आइए इस बारे में जानते हैं…

कब हो जाना चाहिए सतर्क?

बिना कुछ किए ही वजन कम होना शरीर में गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो छह से 12 महीनों के अंदर पांच परसेंट से अ​धिक वजन कम होता है तो ये हेल्थ को लेकर एक रेड फ्लैग है. एक स्टडी के अनुसार इस तरह का वजन कम होना अक्सर कैंसर के शुरुआती लक्षणों से पहले दिखाई देता है. इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इस बारे में डाॅक्टर से कंसल्ट करना चाहिए.

कैंसर में क्यों घटता है वजन?

कैंसर से शरीर का मेटाबाॅ​लिज्म बिगड़ जाता है, जिसे ‘कैंसर कैचेक्सिया’ कहा जाता है. इस ​स्थिति में बाॅडी फैट और मसल्स को ब्रेकडाउन करना शुरू कर देती है. जिससे शरीर का वजन कम होने लगता है. कमजोरी महसूस होने लगती है. सामान्य डाइट लेने के दाैरान भी ​स्थिति बिगड़ती जाती है. एक स्टडी के अनुसार कैंसर से पीड़ित 40 परसेंट मरीजों में बिना किसी कारण के वजन कम होना एक लक्षण पाया गया. ये ​स्थिति खासताैर पर पै​न्कि्रयाज, पेट, फेफड़े और अन्नप्रणाली के कैंसर में देखने को मिलती है.

भूख पर भी पड़ता है असर

अगर बिना किसी वजह खाना खाने का मन न करे, भूख लगना कम हो जाए तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कैंसर शरीर में फूड प्रोसेस्ड करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, पेट, पै​न्कि्रयाज, आंतों के कैंसर में ये दिक्कत देखने को​ मिल सकती है. जिससे लोग अंजाने में खाना कम कर देते हैं.  हार्मोन से संबंधित कैंसर जैसे कि कुछ प्रकार के ल्यूकेमिया या लिम्फोमा शरीर में व्यापक सूजन भी पैदा कर सकते हैं. यह सूजन बाॅडी में मेटाबाॅलिज्म को तेज कर सकती है और भूख को दबा सकती है. जिससे शरीर का वजन कम होने लगता है. शुरुआत में व्य​क्ति इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देता है.

ऐसी कंडीशन कितनी खतरनाक?

एक स्टडी के अनुसार ब्लड कैंसर के मरीजों में अक्सर काफी पहले से वजन कम होने की ​स्थिति देखी गई. हालांकि वजन कम होने के दाैरान उनमें किसी भी तरह के दर्द या फिर कोई अन्य लक्षण नजर नहीं आए. ऐसे में वजन कम होना कैंसर के कुछ शुरुआती संकेतों में से एक बन जाता है. कई स्टडीज में सामने आया कि वजन कम होने के साथ थकान, कम भूख या लगातार बेचैनी जैसे अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो ये कैंसर के रिस्क का इशारा हो सकते हैं. एक स्टडी में पाया गया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में बिना किसी कारण के वजन कम होना आने वाले वर्षों में कैंसर का रिस्क बढ़ा सकता है.

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कितनी गंदी है आपकी तौलिया, कितने दिनों में करना चाहिए साफ? समझिए पूरी बात

कितनी गंदी है आपकी तौलिया, कितने दिनों में करना चाहिए साफ? समझिए पूरी बात


Towel Wash Hygiene Tips: आप रोज नहाते हैं, साबुन लगाते हैं, शैम्पू करते हैं और खुद को तरोताजा महसूस करते हैं. लेकिन जरा सोचिए, जिस तौलिये से आप अपने साफ शरीर को पोछते हैं, क्या वो तौलिया खुद कितना साफ है? क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि वो तौलिया कितनी बार इस्तेमाल हो चुका है बिना धोए? कई बार हम साफ-सफाई के नाम पर बड़े-बड़े प्रोडक्ट्स तो इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जिस चीज का सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, उसे नज़रअंदाज कर देते हैं. आइए जानते हैं कि तौलिया कितनी जल्दी गंदा हो सकती है और कितने दिनों में इसे धोना जरूरी है.

बता दें, अगर आप तौलिया को बाथरूम में टांगते हैं जहां वेंटिलेशन कम है, तो यह और भी जल्दी गंदा हो सकता है. इसलिए इसे जितना जल्दी धोना देंगे आपके शरीर के लिए बेहतर रहेगा। 

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कितने दिनों में तौलिया धोना चाहिए?

बॉडी टॉवेल हर 2 से 3 दिन में धो लेना चाहिए

फेस टॉवेल को हर दिन या कम से कम एक दिन छोड़ कर जरूर धोएं

जिम टॉवेल या पसीने वाली टॉवेल को हर यूज के बाद तुरंत धोना सबसे बेहतर है

हाथ पोंछने वाली तौलिया को भी 2 दिन में धो देना चाहिए

तौलिया को समय पर न धोएं तो क्या हो सकता है?

स्किन इंफेक्शन – गंदे तौलिये में मौजूद बैक्टीरिया स्किन पर रैशेज़ या फंगल इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं

पिंपल्स और एक्ने – खासकर चेहरे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तौलिया अगर गंदी हो, तो यह चेहरे पर ब्रेकआउट्स ला सकती है

बदबू – गंदे और नमी वाले तौलिए से कपड़ों और शरीर में भी अजीब गंध आ सकती है

हाइजीन की गिरावट – आपकी साफ-सफाई की पूरी मेहनत उस गंदे तौलिये की वजह से बेकार हो सकती है

तौलिया को साफ और हाइजीनिक कैसे रखें?

हर दो-तीन दिन में धोने की आदत बनाएं

तौलिए को अच्छे से सूखने दें, कोशिश करें कि धूप में सुखाएं

तौलिये के लिए वॉशिंग मशीन में गर्म पानी और एंटी-बैक्टीरियल डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें

हर 6 महीने में पुरानी तौलियों को बदलने पर भी ध्यान दें

तौलिया जितना छोटा और सिंपल सा हिस्सा है हमारी दिनचर्या का, उतना ही बड़ा असर डालता है हमारी हेल्थ और हाइजीन पर. अगली बार जब नहाएं और तौलिया उठाएं, तो एक बार ये जरूर सोचें, क्या यह तौलिया भी उतना ही साफ है जितना आप खुद को मान रहे हैं? 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या घर में ही डायग्नोस कर सकते हैं डिमेंशिया? जान लें ऐसे तरीके, जो करेंगे मरीज की मदद

क्या घर में ही डायग्नोस कर सकते हैं डिमेंशिया? जान लें ऐसे तरीके, जो करेंगे मरीज की मदद



<p style="text-align: justify;">भूलने की आदत, सोचने में दिक्कत…यानी ब्रेन डिमें​शिया की चपेट में है. अक्सर इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. कई बार ​दिक्कतों को उम्र बढ़ने से जोड़कर देख लिया जाता है. पर गुजरते समय के साथ समस्या बढ़ने लगती है. अल्जमाइमर भी इसका एक प्रकार है. ऐसे में कुछ तरीके हैं, जिससे आप घर पर ही इस समस्या का पता लगा सकते हैं. समय से इसका डायग्नोज न सिर्फ ट्रीटमेंट में हेल्पफुल साबित हो सकता है, ब​ल्कि मरीज को भी राहत दे सकता है. आइए जानते हैं कि इस दिक्कत का घर पर ही कैसे पता लगाया जा सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब हो जाना चाहिए सतर्क?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ब्रेन में चेंजेस होने पर कई लक्षण सामने आते हैं. अक्सर मरीज का इस ओर ध्यान नहीं जाता. लेकिन परिवार के अन्य लोग इस लक्षणों को नोटिस कर सकते हैं. जैसे अगर अपॉइंटमेंट भूल जाते हैं, किसी सवाल को बार-बार पूछते हैं या पहचान वाली जगहों को लेकर कंफ्यूजन रहता है, बात करने के दाैरान शब्दों का चयन करने में ​कठिनाई होती है तो सतर्क होने की जरूरत है. ये संकेत धीरे-धीरे दिखाई दे सकते हैं. अक्सर शुरुआत में इन्हें आमताैर पर उम्र बढ़ने के रूप में देखा जाता है. लेकिन जब याददाश्त और सोचने की समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती हैं, तो उन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है. समय पर इसका पता लगने से इलाज ​जल्द शुरू होने पर मरीज को राहत मिल सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन तरीकों से पता लगा सकते हैं दिक्कत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">घर पर भी डिमें​शिया का पता लगाया जा सकता है. ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने डिमें​शिया का पता लगाने के लिए सेज टेस्ट(सेल्फ एडमिनि​स्ट्रेड जिरोकॉग्निटिव एग्जामिनेशन) डेवलप किया है. पेपर और पेंसिल की मदद से इस टेस्ट को 10 से 15 मिनट में पूरा किया जा सकता है. इसमें मेमोरी, लैंग्वेज और प्राॅब्लम साॅ​ल्विंग से संबं​धित सवाल पूछे जाते हैं. इसी तरह घर पर ही डिमें​शिया के लक्षण का पता लगाने के लिए दूसरा तरीका मिनी काॅग टेस्ट है. इसमें क्लाॅक ड्राइंग एक्सरसाइज के साथ सिंपल मेमोरी टास्क को पूरा करना होता है. इसके साथ ही कई ऑनलाइन एप भी डिमें​शिया के शुरुआती लक्षण का पता लगाने में मदद कर सकत हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">याददाश्त कमजोर होना</li>
<li style="text-align: justify;">निर्णय लेने की क्षमता कम होना</li>
<li style="text-align: justify;">व्यवहार बदलना</li>
<li style="text-align: justify;">रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी</li>
<li style="text-align: justify;">कुछ भी बोलने-समझने में दिक्कत होना</li>
<li style="text-align: justify;">आसपास के लोगों, रास्तों को पहचानने में दिक्कत होना</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया का कारण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">विटामिन डी की कमी</li>
<li style="text-align: justify;">डिप्रेशन</li>
<li style="text-align: justify;">एंग्जायटी</li>
<li style="text-align: justify;">दवाओं का असर</li>
<li style="text-align: justify;">स्ट्रोक</li>
<li style="text-align: justify;">डायबिटीज</li>
<li style="text-align: justify;">सामाजिक रूप से अलग रहना</li>
<li style="text-align: justify;">शराब पीना</li>
<li style="text-align: justify;">ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन</li>
<li style="text-align: justify;">दिल की बीमारियां</li>
<li style="text-align: justify;">सुनने की क्षमता कम होना</li>
<li style="text-align: justify;">सी-रिएक्टिव प्रोटीन का बढ़ना</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए क्या करें?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">वजन बढ़ने न दें</li>
<li style="text-align: justify;">धूम्रपान न करें, शराब न पिएं</li>
<li style="text-align: justify;">एक्सरसाइज करें</li>
<li style="text-align: justify;">सोशली एक्टिव रहें</li>
<li style="text-align: justify;">अकेले रहने से बचें</li>
<li style="text-align: justify;">एयर पॉल्यूशन से बचें</li>
<li style="text-align: justify;">दिमाग के एक्टिव रखें</li>
<li style="text-align: justify;">क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करें</li>
</ul>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-untreated-cancer-spread-in-body-without-treatment-2970971">इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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