इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह

इलाज नहीं कराया तो कितनी तेजी से फैल सकता है कैंसर? हकीकत जान लेंगे तो कांप जाएगी रूह


कैंसर, एक ऐसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही में मन में खाैफ घर कर लेता है. जिंदगी बिखरती हुई नजर आती है. समय से इस बीमारी का पता लग जाने पर कई केसेज में इलाज भी संभव होता है. लेकिन अगर इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाए तो ये और भी खतरनाक हो सकती है. तेजी से शरीर के महत्वपूर्ण ऑर्गन को प्रभावित कर सकती है. उपचार नहीं कराने पर कैंसर किस तरह शरीर में फैलता है, आइए जानते हैं…

शरीर में कितनी तेजी से फैलता है कैंसर?

बाॅडी में कैंसर की ग्रोथ के लिए कई फैक्टर जिम्मेदार होते हैं. जैसे किस तरह का कैंसर है, कैंसर के डायग्नोज की स्टेज, जेनेटिक रीजन, मरीज की एज, हेल्थ और इम्यून सिस्टम आदि. रिसर्चर्स की मानें तो कुछ कैंसर तेजी से शरीर में फैलते हैं. जैसे पैंक्रियाटिक कैंसर, स्माॅल सेल लंग कैंसर, कुछ ब्रेन ट्यूमर इलाज नहीं कराने पर हफ्ते या महीनों में तेजी से ग्रो करते हुए दिख सकते हैं. जल्द ही शरीर के अन्य हिस्सों को चपेट में ले सकते हैं. एक स्टडी के अनुसार पैंक्रियाटिक कैंसर के शुरुआत में कोई लक्षण सामने नहीं आते. ये चुपचाप शरीर में घर करता है. जब लक्षण सामने आते हैं तो ये एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है. 

इन कैंसर की गति होती है धीमी

हालांकि कुछ कैंसर धीमी गति से ग्रोथ करते हैं. ऐसा ही प्रोस्टेट कैंसर में देखने को मिलता है. इस कैंसर को ग्रो होने में कई वर्षों का समय लग सकता है. बुजुर्गों में इस कैंसर के कई बार कोई लक्षण या कोई गंभीर दिक्कत भी सामने नहीं आती. इसी तरह कुछ ब्रेस्ट कैंसर भी धीमी गति से फैलते हैं. इनमें हार्मोन के चलते होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की गति धीमी होती है. अगर इनको जल्दी डायग्नोज कर लिया जाए तो इलाज भी संभव है.

क्या धीमी गति का कैंसर खतरनाक नहीं?

अगर कैंसर शरीर में धीमी गति से बढ़ रहा है तो वह खतरनाक नहीं है. ऐसी सोच भारी पड़ सकती है. धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर भी समय के साथ खतरनाक हो सकता है. शरीर में कैंसर सेल्स तेजी से बढ़ने से पास के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाने के साथ वह ब्लडस्ट्रीम में एंटर हो जाते हैं. ​जिससे शरीर के अन्य ऑर्गन को चपेट में ले सकते हैं. स्टडी के अनुसार कैंसर का इलाज नहीं कराने पर ये लिम्फ नोड्स के साथ लिवर, लंग्स और ब्रेन तक पहुंच सकता है. इस प्रोसेस को मेटास्टेसिस कहा जाता है. एक बार कैंसर शरीर में फैल जाने के बाद इसका इलाज और कंट्राेल करना मु​श्किल हो जाता है. 

इलाज नहीं कराने पर ​​स्थिति

इलाज नहीं कराने पर कैंसर मरीज की ​स्थिति गंभीर हो जाती है. गुजरते समय के साथ ​स्थिति बिगड़ती चली जाती है. असहनीय दर्द होता है, जिसे कंट्रोल कर पाना मु​श्किल होता है. इंफेक्शन, ब्ली​डिंग के साथ ऑर्गन फेल्योर की​ ​स्थिति बन जाती है.

ये भी पढ़ें: किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पीली-पीली हल्दी कसकर मल दी तो मोती जैसे चमकेंगे दांत, जानें ये तरीका कितना कारगर?

पीली-पीली हल्दी कसकर मल दी तो मोती जैसे चमकेंगे दांत, जानें ये तरीका कितना कारगर?


हल्दी भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है. इसका चमकीला पीला रंग और औषधीय गुण इसे न केवल खाने में, बल्कि स्किन और सेहत के लिए भी उपयोगी बनाते हैं. हल्दी में मौजूद एक्टिव यौगिक, करक्यूमिन (curcumin), एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से भरपूर होता है, जो दांतों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. ये गुण इसे दंत स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बनाते हैं।

कानपुर के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. एसके कटियार का कहना है कि हल्दी न केवल सूजन कम करती है, बल्कि इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों पर जमा होने वाले प्लाक को हटाने में मदद करते हैं. हल्दी का उपयोग सही तरीके से करने पर दांतों की चमक बढ़ाई जा सकती है.

कानपुर के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. एसके कटियार का कहना है कि हल्दी न केवल सूजन कम करती है, बल्कि इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों पर जमा होने वाले प्लाक को हटाने में मदद करते हैं. हल्दी का उपयोग सही तरीके से करने पर दांतों की चमक बढ़ाई जा सकती है.

Molecular Nutrition and Food Research में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मसूड़ों की सूजन को कम करने और मुंह के बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में कारगर है. हालांकि, इस स्टडी में दांतों को सफेद करने के लिए हल्दी की प्रभावशीलता पर सीधे तौर पर कोई ठोस सबूत नहीं मिले.

Molecular Nutrition and Food Research में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मसूड़ों की सूजन को कम करने और मुंह के बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में कारगर है. हालांकि, इस स्टडी में दांतों को सफेद करने के लिए हल्दी की प्रभावशीलता पर सीधे तौर पर कोई ठोस सबूत नहीं मिले.

Whitening Efficacy of Popular Natural Products on Dental Enamel नाम की स्टडी में हल्दी, चारकोल और केले के छिलके जैसे नैचुरल प्रॉडक्ट का दांतों की सतह पर असर की रिसर्च की गई. रिसर्च में पाया गया कि हल्दी से ब्रश करने पर दांतों की सतह पर मामूली चमक बढ़ी, लेकिन यह प्रभाव 16% कार्बामाइड पेरोक्साइड जैसे पारंपरिक व्हाइटनिंग एजेंट्स की तुलना में कम था.

Whitening Efficacy of Popular Natural Products on Dental Enamel नाम की स्टडी में हल्दी, चारकोल और केले के छिलके जैसे नैचुरल प्रॉडक्ट का दांतों की सतह पर असर की रिसर्च की गई. रिसर्च में पाया गया कि हल्दी से ब्रश करने पर दांतों की सतह पर मामूली चमक बढ़ी, लेकिन यह प्रभाव 16% कार्बामाइड पेरोक्साइड जैसे पारंपरिक व्हाइटनिंग एजेंट्स की तुलना में कम था.

वहीं, पुणे स्थित नेक्स्टकेयर डेंटल क्लिनिक के डेंटिस्ट डॉ. माहेश माली के मुताबिक, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो दांतों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं. हालांकि, इसे दांतों को सफेद करने के लिए एकमात्र उपाय मानना ठीक नहीं है. यह सतही दागों को हल्का कर सकता है, लेकिन गहरे दागों के लिए डॉक्टर से इलाज कराना बेहतर है.

वहीं, पुणे स्थित नेक्स्टकेयर डेंटल क्लिनिक के डेंटिस्ट डॉ. माहेश माली के मुताबिक, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो दांतों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं. हालांकि, इसे दांतों को सफेद करने के लिए एकमात्र उपाय मानना ठीक नहीं है. यह सतही दागों को हल्का कर सकता है, लेकिन गहरे दागों के लिए डॉक्टर से इलाज कराना बेहतर है.

हल्दी के एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों पर जमा होने वाले बैक्टीरिया को कम करते हैं, जो प्लाक और टार्टर का कारण बनते हैं. वहीं, करक्यूमिन मसूड़ों की सूजन और पीरियडॉन्टाइटिस जैसी दिक्कतों को कम करने में असरदार होता है. इसके अलावा हल्दी को दांत दर्द और सूजन के लिए आयुर्वेद में काफी वक्त से इस्तेमाल किया जाता है. इसे भुनी हुई हल्दी के रूप में दांतों पर मलने से दर्द से राहत मिल सकती है.

हल्दी के एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों पर जमा होने वाले बैक्टीरिया को कम करते हैं, जो प्लाक और टार्टर का कारण बनते हैं. वहीं, करक्यूमिन मसूड़ों की सूजन और पीरियडॉन्टाइटिस जैसी दिक्कतों को कम करने में असरदार होता है. इसके अलावा हल्दी को दांत दर्द और सूजन के लिए आयुर्वेद में काफी वक्त से इस्तेमाल किया जाता है. इसे भुनी हुई हल्दी के रूप में दांतों पर मलने से दर्द से राहत मिल सकती है.

Published at : 29 Jun 2025 03:26 PM (IST)

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मॉनसून में बारिश के बाद चटक धूप से हो जाती है स्किन एलर्जी, ऐसे रख सकते हैं अपनी त्वचा का ख्याल

मॉनसून में बारिश के बाद चटक धूप से हो जाती है स्किन एलर्जी, ऐसे रख सकते हैं अपनी त्वचा का ख्याल


मॉनसून में बारिश हर किसी को अच्छी लगती है, क्योंकि सुहाना मौसम ठंडक और ताजगी लाता है. हालांकि, इस मौसम में स्किन के लिए कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. काफी लोग तो ऐसे होते हैं, जिन्हें बारिश के बाद चटक धूप के कारण स्किन एलर्जी होने लगती है. आइए बताते हैं कि इस मौसम में अपनी स्किन का ख्याल कैसे रखा जाए?

मॉनसून में स्किन एलर्जी के कारण

मॉनसून में बारिश और नमी के कारण स्किन संबंधित दिक्कतें बढ़ जाती हैं. दरअसल, बारिश के बाद चटक धूप और उमस से स्किन के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं. दिल्ली स्थित पीएसआरआई अस्पताल के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भावुक धीर के मुताबिक, मॉनसून में नमी, पसीना, और गंदगी स्किन पर जमा हो जाते हैं, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं. बारिश के बाद की धूप में यूवी रेज स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

इन वजहों से भी होती है दिक्कत

  • नमी और उमस: मॉनसून में हवा में नमी का लेवल बढ़ जाता है, जिससे स्किन चिपचिपी हो जाती है. यह फंगल इन्फेक्शन जैसे दाद और एथलीट फुट का कारण बनता है.
  • गीले कपड़े और जूते: बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े या जूते लंबे समय तक पहनने से स्किन पर नमी बनी रहती है, जो फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
  • धूप का असर: बारिश के बाद चटक धूप में मौजूद यूवी रेज से स्किन को नुकसान होता है.  दरअसल, धूप से स्किन को होने वाला नुकसान कई घंटों तक रह सकता है, जिससे एलर्जी और कैंसर का खतरा बढ़ता है.
  • गंदे पानी का संपर्क: बारिश का पानी गंदगी और प्रदूषकों के साथ मिलकर स्किन पर जलन और रैशेज पैदा कर सकता है.
  • डाइट में लापरवाही: तला-भुना भोजन और पोषक तत्वों की कमी से स्किन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है.

ऐसे होते हैं स्किन एलर्जी के लक्षण

  • खुजली और जलन: स्किन पर लगातार खुजली होना स्किन एलर्जी का लक्षण है. इसकी वजह से खासकर अंडरआर्म्स, पैरों की उंगलियों और गर्दन के आसपास लगातार खुजली होती है.
  • रैशेज और चकत्ते: अगर स्किन पर लाल चकत्ते या छोटे-छोटे दाने हो रहे हैं तो आपको इलाज की जरूरत है. यह भी स्किन एलर्जी का लक्षण होता है.
  • पपड़ी और रूखापन: कुछ लोगों की स्किन सूख जाती है और उस पर पपड़ी जम जाती है. यह भी स्किन एलर्जी का सिग्नल होता है.
  • फोड़े-फुंसी: छोटे-छोटे फोड़े या मुंहासे भी दर्दनाक हो सकते हैं. वहीं, गंभीर इंफेक्शन होने पर स्किन से बदबू भी आ सकती है.

ये भी पढ़ें: किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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लिवर खराब होने से पहले दिखते हैं ये लक्षण, शरीर में दिखें ये बदलाव तो भागें डॉक्टर के पास

लिवर खराब होने से पहले दिखते हैं ये लक्षण, शरीर में दिखें ये बदलाव तो भागें डॉक्टर के पास



<p style="text-align: justify;">हमारे शरीर के जरूरी अंगों में लिवर एक है. यह हमारी बॉडी में पाचन से लेकर डिटॉक्सिफिकेशन जैसे 500 से ज्यादा काम करता है, जिनमें शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने, पित्त (bile) का प्रॉडक्शन करने और ब्लड को साफ करने में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि, मॉडर्न लाइफस्टाइल और खराब डाइट और ज्यादा शराब पीने से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. आइए जानते हैं कि लिवर खराब होने से पहले कैसे लक्षण नजर आते हैं?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लिवर खराब होने के शुरुआती लक्षण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर की बीमारियों को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बेहद हल्के होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. जयपुर स्थित नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट &nbsp;डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक, लिवर रोग के शुरुआती लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ये सामान्य थकान या पेट में गड़बड़ी जैसे दिखते हैं. अगर ये दिक्कत लगातार बरकरार हैं तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>थकान और कमजोरी:</strong> लिवर खराब होने का शुरुआती लक्षण लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना है, जो बेहद कॉमन है. जब लिवर ठीक से काम नहीं करता है तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. इससे बिना वजह ज्यादा थकान महसूस होती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीलिया (Jaundice):</strong> स्किन और आंखों में पीलापन आने को पीलिया कहा जाता है. यह लिवर खराब होने का सबसे अहम लाण है. दरअसल, जब लिवर बिलीरुबिन (एक तरह का पीला पदार्थ) को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता है तो यह खून में जमा हो जाता है. पीलिया अक्सर हेपेटाइटिस या सिरोसिस का संकेत हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेट में दर्द और भारीपन:</strong> पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस होना लिवर की समस्या का सिग्नल हो सकता है. यह दर्द लिवर में सूजन या फैट जमा होने के कारण हो सकता है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के अनुसार, यह लक्षण फैटी लिवर या हेपेटाइटिस के शुरुआती चरण में दिखाई दे सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जी मिचलाना और उल्टी:</strong> लिवर खराब होने पर शरीर से विषाक्त पदार्थ पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसके कारण बार-बार जी मिचलाना और उल्टी की समस्या हो सकती है. यह लक्षण विशेष रूप से रात में ज्यादा दिखाई दे सकता है. अगर रात में बार-बार जी मिचलाने की दिक्कत होती है तो यह लिवर डैमेज का संकेत हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्किन में खुजली:</strong> लिवर में पित्त नमक (bile salts) का लेवल बढ़ने पर स्किन में खुजली हो सकती है. यह खुजली रात में ज्यादा होती है, जो ऑब्सट्रक्टिव पीलिया, प्राइमरी बाइलरी सिरोसिस या बाइल डक्ट में रुकावट का सिग्नल हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेशाब और मल का रंग बदलना:</strong> लिवर खराब होने पर पेशाब का रंग गहरा पीला या भूरा हो सकता है और मल का रंग मटमैला या हल्का हो सकता है. यह बिलीरुबिन के असामान्य लेवल के कारण होता है. वहीं, भूख कम लगना और बिना वजह वजन घटना भी लिवर में गड़बड़ी के लक्षण हैं. इसके अलावा लिवर की खराबी के कारण शरीर में फ्लूड जमा हो सकता है, जिससे पैरों और टखनों में सूजन (edema) हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/which-vitamin-deficiency-causes-depression-and-how-to-cure-2970194">किस विटामिन की कमी से होता है डिप्रेशन, कैसे करें इसे ठीक?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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