सावधान! इस देश में कोरोना जैसे हालात, खतरनाक बीमारी की चपेट में आए 10 हजार से ज्यादा लोग

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Mongolia Confirmed Measles Cases: मंगोलिया में खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NCCD) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में खसरे के 232 नए मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कुल मामले 10,065 हो गए हैं.

कुल रिकवरी की संख्या 8,405 पहुंची

वहीं, 260 और मरीज ठीक हुए हैं, जिससे कुल रिकवरी की संख्या 8,405 पहुंच गई है. एनसीसीडी ने बताया कि नए मामलों में अधिकांश स्कूल जाने वाले बच्चे हैं, जिन्हें खसरे के टीके की केवल एक खुराक मिली थी. इस स्थिति को देखते हुए, एनसीसीडी ने परिजनों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए खसरे के वैक्सीन की दोनों खुराक जरूर दिलवाएं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, खसरा संक्रामक वायरल बीमारी है, जो सांस, खांसी या छींक के जरिए आसानी से फैलती है. यहां तक कि इससे मृत्यु भी हो सकती है.

क्या होते है इसके लक्षण?

खसरा मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति जो वैक्सीन नहीं लेता या जिसकी इम्यून सिस्टम कमजोर है, वह इस बीमारी की चपेट में आ सकता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और पूरे शरीर पर चकत्ते शामिल हैं.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, वैक्सीनेशन खसरे से बचाव और इसके प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है. यह न केवल सुरक्षित है बल्कि वायरस से लड़ने में भी मदद करता है.

खसरे से लगभग 1,07,500 लोगों की मृत्यु हुई

साल 1963 में खसरे के टीके की शुरुआत से पहले, हर 2 से 3 साल में बड़े पैमाने पर महामारी फैलती थी, जिससे हर साल लगभग 26 लाख लोगों की मौत हो जाती थी. साल 2023 में सुरक्षित और किफायती वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद, खसरे से लगभग 1,07,500 लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चे थे.

मंगोलिया में खसरे के मामले खासकर उन क्षेत्रों में ज्यादा हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर हैं. एनसीसीडी ने चेतावनी दी है कि जिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं ने इस बीमारी से बचाव में कारगर वैक्सीन नहीं लगवाई है, उनको इसकी चपेट में आने के सबसे ज्यादा चांस हैं. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वैक्सीनेशन कैंपेन का प्रसार तेजी से करना होगा.

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Weight Loss Tips: चर्बी घटाने में कारगर, एब्स बनाने में मदद करता है चतुरंग दंडासन

Weight Loss Tips: चर्बी घटाने में कारगर, एब्स बनाने में मदद करता है चतुरंग दंडासन


Chaturanga Dandasana: चतुरंग दंडासन एक ऐसा योगासन है, जो पूरे शरीर को संतुलन देने के साथ-साथ मन को भी स्थिर करने का काम करता है. अगर इसे सरल भाषा में कहें तो यह देसी पुशअप जैसा है. इस आसन में शरीर एक सीधी रेखा में होता है. हाथ, कंधे और पेट के आसपास की मांसपेशियों पर इसका जबरदस्त असर पड़ता है. रोजाना इस आसन का अभ्यास करने से पेट की चर्बी भी धीरे-धीरे कम होने लगती है.

शरीर के लिए चतुरंग दंडासन बेहद लाभदायक

ये आधुनिक योग में शामिल आसन है. बीकेएस अयंगर की ‘लाइट ऑन योगा’ किताब में इसका जिक्र है. इसके मुताबिक जिन लोगों को पीठ दर्द, कंधे में अकड़न या पोश्चर से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, उनके लिए चतुरंग दंडासन बेहद लाभदायक है. इससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है.

चतुरंग दंडासन को करते वक्त जब आप इस आसन में सांसों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो तनाव और बेचैनी धीरे-धीरे कम होने लगती है. इससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है. साथ ही चिंता और अवसाद दूर होने लगते हैं. यही वजह है कि इसे सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग की कसरत भी कहा जा सकता है.

पेट से जुड़ी समस्याओं में भी कारगर

पेट से जुड़ी समस्याओं में भी यह आसन कारगर है. जिन लोगों को कब्ज, गैस या अपच की समस्या रहती है, उन्हें इसका नियमित अभ्यास आराम दे सकता है. युवाओं के लिए यह आसन काफी फायदेमंद है, यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करने में मदद करता है, जिससे एब्स भी बेहतर दिखने लगते हैं.

चतुरंग दंडासन मोटापा घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी काफी मददगार है. यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करता है. ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में भी चतुरंग दंडासन एक बेहतरीन विकल्प है. खासकर पैरों और शरीर के निचले हिस्से में खून का बहाव बेहतर होता है, जिससे सुस्ती और थकावट कम होती है.

कैसे करते है चतुरंग दंडासन?

चतुरंग दंडासन करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं या फिर अधोमुख श्वानासन से इसकी शुरुआत करें. अब अपने दोनों हाथों को जमीन पर कंधों से थोड़ा आगे रखें और उंगलियां सामने की तरफ फैला लें, ताकि पकड़ मजबूत रहे. दोनों पैरों की उंगलियों को जमीन पर टिकाएं और धीरे-धीरे घुटनों को ऊपर उठाएं.

अब सांस अंदर लेते हुए शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं और दोनों हाथों पर वजन डालें. इस वक्त ध्यान रखें कि आपकी कोहनियों पर 90 डिग्री का कोण बने और आपका पूरा शरीर एक सीधी रेखा में आ जाए. शरीर का पूरा भार अब सिर्फ हाथों और पैरों की उंगलियों पर रहेगा. शुरुआत में आप इस पोज में 10 से 20 सेकंड तक रहें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने से इसे ज्यादा देर तक भी किया जा सकता है.

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कई बीमारियों को दूर भगाती है नीम की पत्ती, सुबह बासी मुंह खाने से मिलेगा फायदा

कई बीमारियों को दूर भगाती है नीम की पत्ती, सुबह बासी मुंह खाने से मिलेगा फायदा


Benefits of Eating Neem Leaves: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सेहत को नजरअंदाज करते हैं, जिसका सीधा असर हमारी इम्यूनिटी, पाचन और स्किन पर देखने को मिलता है. ऐसे में आयुर्वेद में बासी मुंह (खाली पेट) नीम की पत्ती खाने के कई स्वास्थ्य बताए गए हैं.

बासी मुंह नीम की पत्ती चबाकर खाना लाभदायक

चरक और सुश्रुत संहिता के मुताबिक, बासी मुंह नीम की पत्ती चबाकर खाना बहुत लाभदायक है. यह मुंह को साफ करने, दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है. साथ ही रक्त शोधन और त्वचा के स्वास्थ्य में भी काफी मददगार है.

आयुर्वेद के मुताबिक, नीम एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर है, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है. अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट 3-4 कोमल नीम की पत्तियां चबाकर खाते हैं, तो यह शरीर को पेट से जुड़ी समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता हैं. अगर आपको गैस, कॉन्स्टिपेशन और ब्‍लोटिंग जैसी समस्या है तो आप नीम की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं. इसको खाने से पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती.

ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद

चिकित्सकों के मुताबिक, नीम के पत्तों में पाया जाने वाला रस ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. नीम के पत्तों में फ्लावोनोइड्स, ग्लायकोसाइड्स, टेरपेनोंइड्स और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व मौजूद रहते हैं, नीम के पत्ते शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनाते हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है.

नीम की पत्ती स्किन को अंदर से डिटॉक्स करती है, जिससे शरीर में मौजूद सारे टॉक्सिन्स निकल जाते हैं और स्किन भी हेल्दी हो जाती है. वहीं, जिनको पिंपल है वह डेली रूटीन में नीम की पत्ती को शामिल कर सकते हैं.

नीम लिवर को डिटॉक्स करने में मददगार

नीम खाने से मेटाबॉलिज्‍म बेहतर होता है जिसकी वजह से वजन कम करने में मदद मिल सकती है. सुबह खाली पेट नीम की पत्तियां चबाने से लिवर को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है. नीम, लिवर को डिटॉक्स करने में मददगार है.

सुबह खाली पेट नीम की पत्तियां चबाने से दांतों की कैविटी से राहत मिल सकती है, ये मुंह की स्वच्छता में भी मददगार हैं. नीम की पत्तियां चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है, मसूड़ों की सूजन कम होती है और दांत मजबूत होते हैं.

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केवल आदतों से नहीं, बल्कि वातावरण से भी प्रभावित होती है नींद, ‘स्लीप रिसर्च’ से बड़े खुलासे

केवल आदतों से नहीं, बल्कि वातावरण से भी प्रभावित होती है नींद, ‘स्लीप रिसर्च’ से बड़े खुलासे


The Impact of Climate on Sleep: एक रिसर्च के मुताबिक, हमारा सोने का तरीका हफ्ते के दिन, मौसम और जगह के हिसाब से काफी बदलता है. दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च की. इसमें 1 लाख 16 हजार से ज्यादा वयस्कों और 73 मिलियन से ज्यादा सोने की रातों का डेटा लिया गया. सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने 3.5 साल में नींद की अवधि और समय को निष्पक्ष रूप से ट्रैक करने के लिए एक अंडर-मैट्रेस डिवाइस का उपयोग किया. यानी शोधकर्ताओं ने तीन साल से ज्यादा समय तक एक खास उपकरण से उनके सोने का समय और अवधि को नापा.

इंसानों की नींद में मौसम का बड़ा असर

रिसर्च में पाया गया कि हमारी नींद केवल हमारी आदतों से नहीं, बल्कि दिन की रोशनी, तापमान और हफ्ते भर की दिनचर्या जैसे माहौल के कारण भी बदलती है. फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी की नींद संबंधी मामलों की विशेषज्ञ हन्ना स्कॉट ने बताया कि इंसानों की नींद में मौसम का भी बड़ा असर पड़ता है. लोगों का सोने का समय उनकी उम्र, इलाके और भौगोलिक स्थिति से जुड़ा होता है.

उदाहरण के लिए, उत्तरी गोलार्ध (जैसे यूरोप, अमेरिका) में लोग सर्दियों में 15–20 मिनट ज्यादा सोते हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध (जैसे ऑस्ट्रेलिया) में लोग गर्मियों में कम सोते हैं.

स्लीप रिसर्च में क्या निकला?

स्कॉट ने कहा कि जो लोग भूमध्य रेखा से दूर रहते हैं, उनकी नींद में मौसम के हिसाब से ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है. इसके अलावा, लोग वीकेंड (शनिवार-रविवार) को देर से सोते हैं और ज्यादा देर तक सोकर अपनी नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं, खासकर मध्यम आयु वर्ग के वो लोग जो काम और परिवार के बीच संतुलन बनाते हैं.

स्लीप में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, ये अनियमित पैटर्न तेजी से नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़े हुए हैं. यानी ऐसी अनियमित नींद का सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. रिसर्च में पाया गया कि नींद में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है. 2020 से 2023 तक हर साल लोगों की औसत नींद में करीब 2.5 मिनट की कमी आई है और संभवत इसका कारण कोविड-19 महामारी का असर है.

सेहत के लिए खतरा बन सकती है ज्यादा नींद

फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के डैनी एकर्ट ने कहा कि अनियमित नींद सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी खतरा बन सकती है. इसलिए हमें यह समझना जरूरी है कि हमारा माहौल और दिनचर्या हमारी नींद को कैसे प्रभावित करते हैं, ताकि उसे बेहतर किया जा सके.

हालांकि यह रिसर्च उन लोगों पर की गई जो तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, फिर भी यह बताता है कि बेहतर नींद के लिए मौसम और समय को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

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Health Tips: रोज करें ये चार प्राणायाम, रहेंगे स्वस्थ और चुस्त दुरुस्त

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Pranayama is Good for Health: आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में खुद को सेहतमंद रखना किसी चुनौती से कम नहीं. भारतीय योग पद्धति के पास तन-मन को स्वस्थ रखने के सभी गुण हैं. योगासन और प्राणायाम इसी श्रेणी में आते हैं. चार अति लोकप्रिय प्राणायाम हैं जिनका अभ्यास रोज किया तो फर्क जरूर महसूस करेंगे.

मन को शांत करने, चिंता को कम करने में मददगार

नाड़ी शोधन, जिसे अनुलोम-विलोम प्राणायाम भी कहते हैं, आयुष मंत्रालय के मुताबिक, यह मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और चिंता को कम करने में मददगार है. तरीका बेहद सरल है. इसके लिए आप शांत होकर पद्मासन में बैठें और पीठ को सीधा रखें. इसके बाद आंखें बंद कर लें और बायीं नासिका से श्वास लें, दाहिनी नासिका से श्वास छोड़ें, फिर दाहिनी से सांस लें और बाईं से छोड़ें. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराएं.

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि रोजाना 5-10 मिनट अनुलोम-विलोम करने से रक्तचाप कंट्रोल होता है, साथ ही चेहरे पर निखार आता है. अगर आपको नींद अच्छे से नहीं आती है, शरीर में थकान बनी रहती है और दिमाग भी शांत नहीं रहता है, तो यह आपके लिए बेहद फायदेमंद है. इसे करने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और फेफड़े भी स्वस्थ रहते हैं.

डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है कपालभाति

ऐसा ही है कपालभाति प्राणायाम. कपालभाति प्राणायाम डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है. इससे दिमाग और नर्वस सिस्टम को भी ऊर्जा मिलती है. हालांकि कपालभाति अधिकतर लोगों के लिए अच्छा है, पर कुछ लोगों को इसे करने से बचना चाहिए.

जिन लोगों को कपालभाति न करने की सलाह दी जाती है, उनमें गर्भवती महिलाएं, मासिक धर्म के समय, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, स्लिप डिस्क या पेट दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोग शामिल हैं. यही नहीं, अगर आपको चक्कर या बेचैनी जैसी समस्या है, तो भी विशेषज्ञ कपालभाति न करने की सलाह देते हैं.

भ्रामरी के अनगिनत फायदे

बात भ्रामरी की. तो भ्रामरी के अनगिनत फायदे हैं. यह न केवल मेंटल हेल्थ में भी फायदेमंद है, बल्कि भ्रामरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कोई भी व्यक्ति, चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग, कभी भी कर सकता है. भ्रामरी के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं.

उज्जायी प्राणायाम, जिसे ‘विजयी श्वास’ या ‘समुद्री श्वास’ भी कहते हैं, इसमें श्वास को गले से धीरे-धीरे लिया जाता है और छोड़ा जाता है, जिससे एक हल्की सी घरघराहट या सीटी की आवाज होती है. यह शरीर में गर्मी पैदा करता है, जो मानसून के मौसम में सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए उपयोगी हो सकता है.

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