महिलाओं में क्यों हो जाती है आयरन की कमी? जान लीजिए वजह

महिलाओं में क्यों हो जाती है आयरन की कमी? जान लीजिए वजह


Iron Deficiency in Women: अक्सर महिलाएं अपने परिवार, बच्चों और काम के बीच खुद की सेहत को भूल जाती हैं. “थोड़ी कमजोरी है”, “आजकल थकान ज्यादा हो रही है” जैसी चीजें महसूस करने को मिलती है. लेकिन ये बातें मामूली नहीं होतीं. शरीर में आयरन की कमी एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है और एनीमिया जैसी स्थितियों को जन्म देती है. भारत में हर दूसरी महिला आयरन की कमी से जूझ रही है. लेकिन क्यों होती है ये कमी? चलिए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह क्या है. 

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महिलाओं में आयरन की कमी के प्रमुख कारण

मासिक धर्म 

हर महीने होने वाला ब्लड लॉस शरीर से आयरन को घटा देता है. जिन महिलाओं की माहवारी भारी होती है, उनमें आयरन की कमी की संभावना और भी अधिक होती है.

गर्भावस्था और स्तनपान 

गर्भावस्था में मां का शरीर न केवल अपने लिए बल्कि बच्चे के लिए भी आयरन की जरूरत पूरी करता है. यदि इस दौरान सही पोषण न मिले, तो शरीर में भारी कमी हो सकती है.

संतुलित आहार की कमी

आयरन से भरपूर चीजें जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, बीन्स, गुड़, ड्राई फ्रूट्स आदि महिलाएं कम खाती हैं. साथ ही विटामिन C की कमी के कारण आयरन का अवशोषण भी घटता है.

वजन घटाने की डाइट या उपवास 

फैशन या स्वास्थ्य के नाम पर महिलाएं कभी-कभी ऐसी डाइट फॉलो करती हैं जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं देतीं. इससे भी आयरन की कमी हो सकती है.

बार-बार प्रेग्नेंसी होना

लगातार गर्भधारण से शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं मिलता, जिससे आयरन स्टोर खत्म हो जाते हैं.

कैसे पूरी करें आयरन की कमी

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे पालक, बथुआ, सरसों

गुड़, चना, किशमिश, खजूर जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थ

विटामिन C वाले फल जैसे आंवला, नींबू, संतरा, जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं

महिलाओं की दिनचर्या चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, अपनी सेहत की अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है. आयरन की कमी केवल कमजोरी नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की शुरुआत हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि महिलाएं समय रहते अपने खानपान और जीवनशैली पर ध्यान दें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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भरपूर नींद के बाद भी अगले दिन छाई रहती है सुस्ती? कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं

भरपूर नींद के बाद भी अगले दिन छाई रहती है सुस्ती? कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं


रात में भरपूर ​नींद लेने के बाद भी दिन में सुस्ती छाई रहती है. वर्कप्लेस पर नींद आने लगती है. शरीर थका हुआ सा महसूस करता है. अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये गंभीर समस्या का संकेत होती है. आ​खिर ये दिक्कत क्यों होती है और कैसे इसे बचा जा सकता है, आइए जानते हैं…

हाइपरसोम्निया के चलते होती है दिक्कत

रात में जागने के बाद दिन में नींद आना सामान्य बात है. लेकिन अगर रात में प्राॅपर नींद ले रहे हैं, उसके बाद भी दिन में बार-बार आंखें बंद हो रहीं हैं तो इसे नजरअंदाज न करें. ये हाइपरसोम्निया के चलते हो सकता है. इस कंडीशन में व्य​क्ति को जरूरत से ज्‍यादा नींद आती है. हाइपरसोम्निया का कारण गंदी आदतें व बीमारियां हो सकती हैं.

ये हो सकते हैं कारण

  • शराब: अ​धिक शराब पीने से नींद पर असर पड़ता है. इसके चलते दिन में बार-बार नींद आने की समस्‍या हो सकती है.
  • मसल्स कमजोर: अगर बाॅडी में मसल्स कमजोर हैं तो बार-बार नींद आने की समस्या देखने को मिल सकती है.
  • रात में प्राॅपर नींद न लेना: रात में पर्याप्‍त नींद नहीं लेने से भी ये समस्या हो सकती है. इससे हाइपरसोम्निया का रिस्क  खतरा बढ़ सकता है.
  • दवा के साइड इफेक्ट: कई बार दवा के असर के चलते भी हाइपरसोम्निया की दिक्कत हो सकती है. इस दाैरान नींद अ​धिक आती है.
  • डायबिटीज: बाॅडी में ब्लड शुगर का बढ़ा लेवल हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है. डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होता है, जिससे थकान और नींद की समस्या होती है. बार-बार प्यास, पेशाब और वजन कम होना इसके अन्य लक्षण हैं.
  • थायराइड: हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्लैंड प्रभावित होती है. इसका असर मेटाबाॅलिज्म पर पड़ता है. इससे सुस्ती, थकान और अत्यधिक नींद की समस्या बढ़ जाती है. वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना इसके लक्षण हो सकते हैं.
  • एनीमिया: एनीमिया में हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है, जिससे थकान और नींद की समस्या बढ़ जाती है. यह आयरन, विटामिन बी 12 या फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है.
  • स्लीप एपनिया: स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती. इस कारण दिन में अत्यधिक नींद, थकान, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

क्‍या हैं इसके लक्षण?

  • एंग्जायटी और स्ट्रेस
  • च‍िड़च‍िड़ापन
  • दिन में बार-बार नींद आना
  • शरीर थका हुआ महसूस करना
  • गुस्‍से में रहना
  • सुबह उठने में द‍िक्‍कत हाेना
  • सिरदर्द
  • भूख न लगना
  • बातों को भूल जाना
  • बेचैनी होना
  • फोकस करने में दि‍क्‍कत होना

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ऑफिस में करते हैं लंबी शिफ्ट तो बिगड़ रहा है बॉडी का पॉश्चर, घर जाते ही करें ये पांच एक्सरसाइज

ऑफिस में करते हैं लंबी शिफ्ट तो बिगड़ रहा है बॉडी का पॉश्चर, घर जाते ही करें ये पांच एक्सरसाइज


Exercises for Office Workers: सुबह 9 से शाम 6 या फिर उससे भी ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठे-बैठे कंप्यूटर स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहना अब हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि इस दिनचर्या का असर सिर्फ आपकी आंखों या दिमाग पर नहीं, बल्कि आपके शरीर के पोश्चर पर भी पड़ रहा है? झुकी हुई गर्दन, आगे निकला कंधा और दर्द करता कमर का निचला हिस्सा, ये सब संकेत हैं कि अब वक्त आ गया है कुछ बदलने का. इसलिए घर पर ये 5 आसान एक्सरसाइज जरूर करें, जो आपकी बॉडी पोश्चर को सुधार सकें.  

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कैट-काउ स्ट्रेच 

इस योग मुद्रा से रीढ़ की हड्डी को लचीलापन मिलता है और झुकी हुई पीठ धीरे-धीरे सीधी होने लगती है. घुटनों और हथेलियों के बल आकर पहले पीठ को ऊपर की ओर गोल करें, फिर पेट को नीचे झुकाकर सिर ऊपर उठाएं. इसे 10 बार जरूर करें. 

चेस्ट ओपनर स्ट्रेच 

लंबे समय तक कंप्यूटर पर झुके रहने से छाती सिकुड़ जाती है. यह एक्सरसाइज छाती को खोलने और कंधों को पीछे लाने में मदद करती है. दोनों हाथ पीठ के पीछे ले जाकर उंगलियां आपस में फंसाएं और छाती को आगे की ओर खोलें. 30 सेकंड तक होल्ड करें. 

ब्रिज पोज

ये पेल्विक और पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करता है. पीठ के बल लेट जाएं, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें. अब धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं. इसे 15 बार करें.

वॉल एंजेल्स 

यह एक्सरसाइज कंधों को पीछे खींचने और रीढ़ को सीधा करने में कारगर है. पीठ को दीवार से लगाकर खड़े हों और हाथों को दीवार पर स्लाइड करते हुए ऊपर-नीचे करें, जैसे एंजेल विंग्स बना रहे हों. 

चाइल्ड पोज

दिनभर की थकान और तनाव को कम करने वाली यह योग मुद्रा रीढ़ और गर्दन को आराम देती है. घुटनों के बल बैठकर शरीर को आगे झुकाएं, माथा जमीन से लगाएं और हाथ आगे की ओर फैलाएं. 

ऑफिस में घंटों तक काम करना जरूरी हो सकता है, लेकिन अपने शरीर की कीमत पर नहीं. अगर आप भी महसूस कर रहे हैं कि आपका बॉडी पॉश्चर बिगड़ रहा है, तो इन 5 आसान एक्सरसाइजेस को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. रोजाना सिर्फ 15 मिनट का समय देकर आप खुद को कुछ दिक्कतों से बचा सकते हैं. साथ ही पूरा दिन एक्टिव रह सकते हैं.

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दूध के साथ खाते ही शरीर में जहर बन जाते हैं ये फल, कहीं आप भी तो नहीं करते ऐसा?

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Milk and Fruits Bad Combination: सुबह-सुबह हेल्दी ब्रेकफास्ट की तलाश में आप भी एक गिलास दूध के साथ कुछ फल खा लेते होंगे, यह सोचकर कि इससे शरीर को एनर्जी मिलेगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ फल ऐसे हैं, जिन्हें दूध के साथ खाने से शरीर में जहर फैलने लगता है? सेहत को सुधारने की कोशिश में कहीं हम अनजाने में उसे बिगाड़ तो नहीं रहे? आइए जानें कौन से फल दूध के साथ खाने पर शरीर के लिए ज़हर बन जाते हैं और क्यों.

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केला 

बच्चों से लेकर बड़ों तक, दूध और केले का शेक बहुत पॉपुलर है. लेकिन आयुर्वेद के अनुसार केला और दूध का कॉम्बिनेशन शरीर में टॉक्सिन्स पैदा करता है. इससे एलर्जी, साइनस, कफ और पाचन की समस्याएं हो सकती हैं.

संतरा, नींबू, मौसंबी 

खट्टे फलों में विटामिन C की मात्रा अधिक होती है और जब इन्हें दूध के साथ खाया जाता है तो दूध फट सकता है. इससे पेट में गैस, अपच और सूजन की शिकायत हो सकती है.

स्ट्रॉबेरी और कीवी 

ये फल स्वाद में अच्छे और हेल्दी लगते हैं, लेकिन दूध के साथ इनका सेवन पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है. इनसे शरीर में एसिडिटी और एलर्जी की आशंका बढ़ जाती है.

अनानास 

अनानास में ब्रोमेलिन नामक एंजाइम होता है, जो दूध के प्रोटीन केसिन के साथ मिलकर शरीर में टॉक्सिन बना सकता है. इससे त्वचा पर चकत्ते, पेट दर्द या उल्टी हो सकती है.

आखिर ऐसा क्यों होता है- इस उदाहरण के जरिए जानिए 

रीना एक 28 वर्षीय वर्किंग वुमन है, फिटनेस के लिए रोज सुबह केला और दूध का शेक लेती थीं. कुछ दिनों बाद उन्हें पेट में भारीपन, सिरदर्द और एलर्जी जैसी शिकायतें होने लगीं. जब डॉक्टर से सलाह ली तो पता चला कि ये सब गलत फूड कॉम्बिनेशन की वजह से हुआ है. तब जाकर उन्हें समझ आया कि हेल्दी चीजें भी एक साथ खाने पर नुकसानदेह हो सकती हैं.

सही तरीके से दूध का सेवन

दूध के साथ केवल सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट या खजूर लें

फल खाने और दूध पीने के बीच कम से कम 1 घंटे का अंतर रखें

खट्टे फल कभी भी दूध के साथ न खाएं

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जहरीली फंगस से बनी कैंसर को हराने वाली दवा, पीड़ितों को मिली नई उम्मीद

जहरीली फंगस से बनी कैंसर को हराने वाली दवा, पीड़ितों को मिली नई उम्मीद


Poisonous Fungus Cancer Treatment: कभी खेतों की फसल को बर्बाद करने वाली एक जहरीली फंगस अब इंसानी जिंदगियों को नया जीवन देने की उम्मीद बन गई है. विज्ञान की दुनिया में यह एक चमत्कार से कम नहीं कि वही एस्परगिलस फ्लेवस (Aspergillus Flavus) फंगस, जो जहर के समान मानी जाती थी, अब कैंसर के इलाज में कारगर साबित होगी. अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस फंगस से एक खास तत्व निकालकर ऐसा इलाज तैयार किया है, जो कैंसर के खिलाफ युद्ध में बड़ी सफलता साबित हो सकता है.

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एस्परगिलस फ्लेवस क्या है 

एस्परगिलस फ्लेवस एक ऐसा फंगस है जो फसलों में पाया जाता है और ‘अफ्लाटॉक्सिन’ नाम का जहर बनाता है. यह जहर मनुष्यों के लीवर और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसी फंगस से एक ऐसा रासायनिक तत्व खोजा है जो कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता रखता है, वो भी बिना स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए.

कैसे काम करती है ये दवा?

वैज्ञानिकों ने इस फंगस से एक प्राकृतिक यौगिक को अलग किया है, जो ट्यूमर सेल्स के DNA में बदलाव कर उन्हें नष्ट कर देता है. खास बात यह है कि ये प्रक्रिया शरीर की सामान्य कोशिकाओं को प्रभावित नहीं करती, जिससे साइड इफेक्ट्स की संभावना भी कम हो जाती है. ये दवा फिलहाल प्री-क्लिनिकल ट्रायल के चरण में है, लेकिन शुरुआती नतीजे बेहद आशाजनक हैं.

विज्ञान की एक बड़ी छलांग

कैंसर के इलाज में अभी तक कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी जैसे उपाय प्रमुख रहे हैं. लेकिन इन सभी का शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है. अगर यह नई दवा सफल होती है, तो यह कैंसर के इलाज को कम दर्दनाक और अधिक प्रभावी बना सकती है.

भविष्य की उम्मीदें

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दो से तीन सालों में इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो सकते हैं. अगर यह दवा मानव शरीर पर भी उतनी ही असरदार साबित होती है, जितनी लैब में हुई रिसर्च में दिखी है, तो कैंसर पीड़ितों के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव होगा.

कभी जो फंगस जानलेवा मानी जाती थी, वही अब जीवनदायिनी बनकर उभरी है. यह शोध न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी साबित करता है कि प्रकृति के हर तत्व में दो चेहरे होते हैं. एक विनाश का और दूसरा जीवन का. जरूरत है तो उसे समझने, सुधारने और सही दिशा में इस्तेमाल करने की. कैंसर से जूझते लाखों मरीजों के लिए यह एक नई रौशनी की किरण है.

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