हल्दी का पानी ही नहीं इसे भूनकर खाना भी सेहत के लिए फायदेमंद, दूर होती हैं ये 6 परेशानियां
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Yogasanas are Effective for Health: आयुर्वेद के मुताबिक, शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. कफ, जो पृथ्वी और जल तत्वों से जुड़ा है, शरीर में स्थिरता और चिकनाई प्रदान करता है. लेकिन, असंतुलन होने पर यह कई समस्याओं की वजह भी बन सकता है. इससे आलस्य, बलगम और सर्दी-खांसी के साथ वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में कई योगासन कफ दोष को संतुलित करने में कारगर है.
नियमित योगासन करने से संतुलित होता है कफ दोष
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, ये योगासन नियमित करने से कफ दोष संतुलित होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. इन्हें खाली पेट और योग एक्सपर्ट की सलाह से करना चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि कफ दोष असंतुलन कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे दूर न किया जा सके. इस समस्या से पार पाने में कई योगासन प्रभावी हैं. इनमें सूर्य नमस्कार, उत्कटासन, उष्ट्रासन, धनुरासन, त्रिकोणासन, नौकासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी-वत्सला, अधोमुख श्वानासन समेत अन्य योग शामिल हैं.
सूर्य नमस्कार 8 आसनों का समूह है, जो पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है. यह रक्त संचार को बेहतर करता है, बल्कि आलस्य कम करता है और फेफड़ों को मजबूत कर बलगम की समस्या को दूर करता है. उत्कटासन, जांघों और कूल्हों को मजबूती देता है. यह मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है, जिससे कफ के कारण होने वाली सुस्ती और भारीपन कम होता है.
उष्ट्रासन छाती को फैलाता है, जिससे श्वसन तंत्र मजबूत होता है. यह बलगम को कम करने और सांस लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मददगार है. इसके साथ ही त्रिकोणासन शरीर से कफ को निकालने में सहायक है. यह तनाव और चिंता को कम करता है, साथ ही पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है.
पेट की चर्बी घटाने और पाचन सुधारने में मददगार
धनुरासन छाती को फैलाता है और फेफड़ों को खोलता है, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएं कम होती हैं. यह पेट की चर्बी घटाने और पाचन सुधारने में भी मदद करता है. वहीं, नौकासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय कर गैस और कब्ज की समस्या को दूर करता है. वहीं, पवनमुक्तासन शरीर में जमी गैस को निकालता है और कफ के कारण होने वाली पाचन समस्याओं को ठीक करता है.
वहीं, मार्जरी-वत्सला रीढ़ को लचीलापन देता है और श्वसन तंत्र को बेहतर बनाकर कफ को नियंत्रित करता है. अधोमुख श्वानासन रक्त संचार को बढ़ाता है, तनाव कम करता है और फेफड़ों को मजबूत कर कफ से राहत दिलाता है.
इसके अलावा, दिनचर्या में व्यायाम, सुबह-शाम वॉक करना, डांस जैसी गतिविधियों को शामिल कर रक्त संचार, गर्मी और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाकर कफ दोष को संतुलित करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही एक्सपर्ट सही खानपान की भी सलाह देते हैं.
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Ginger and Carrot Juice Benefits: हर सुबह की शुरुआत अगर ऊर्जा से भरी हो तो पूरा दिन तरोताजा और हेल्दी महसूस होता है. हम अक्सर हेल्थ ड्रिंक्स की तलाश में महंगे और मिलावटी विकल्पों की ओर भागते हैं, लेकिन क्या आपने कभी अपने किचन में रखे गाजर और अदरक को एक साथ मिलाकर पीने का सोचा है. ये दोनों ही सामग्री न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन हैं, बल्कि जब इनका रस मिलाया जाए, तो ये आपकी सेहत के लिए किसी आयुर्वेदिक टॉनिक से कम नहीं है. एक कप गाजर और अदरक का रस, रोज सुबह पीने से शरीर को न सिर्फ अंदर से पोषण मिलता है, बल्कि ये कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है.
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आंखों की रौशनी के लिए वरदान
गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन A में बदलता है, जो आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों की सूजन और थकान को कम करने में मदद करते हैं.
रोग प्रतिरोधक क्षमता को करे मजबूत
गाजर और अदरक दोनों ही इम्युनिटी बूस्ट करने वाले तत्वों से भरपूर हैं. अदरक का एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है, जबकि गाजर शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है.
दिल की सेहत का रखे ख्याल
इस रस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. अदरक खून के थक्के जमने से रोकता है, जबकि गाजर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है, जो दोनों ही दिल के लिए फायदेमंद हैं.
स्किन ग्लो और बालों में सुधार
गाजर और अदरक का रस स्किन के डिटॉक्स में मदद करता है. इससे पिंपल्स, दाग-धब्बे कम होते हैं और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. इसमें मौजूद विटामिन C और A बालों की जड़ों को मजबूती देते हैं और हेयर फॉल कम करने में सहायक हैं.
वजन घटाने में भी असरदार
अगर आप वजन घटाने की कोशिश में हैं तो ये ड्रिंक आपके लिए मददगार हो सकता है. गाजर कम कैलोरी वाला होता है और अदरक मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है.
पाचन तंत्र को करे बेहतर
अदरक जहां गैस, अपच और सूजन में राहत देता है, वहीं गाजर फाइबर से भरपूर होता है जो मल को साफ और पाचन को दुरुस्त करता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन पेट के लिए वरदान है.
कैसे बनाएं गाजर-अदरक का रस?
2 मीडियम गाजर
1 इंच अदरक का टुकड़ा
1 कप पानी
नींबू और शहद (स्वाद अनुसार)
गाजर और अदरक को अच्छी तरह धोकर काट लें.
मिक्सी में थोड़ा पानी डालकर ब्लेंड करें.
छानकर रस निकालें और ऊपर से थोड़ा नींबू और शहद मिलाकर सेवन करें.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Green Cardamom Benefits: आपने अक्सर हरी इलायची को मिठाई, चाय या बिरयानी का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला समझा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी-सी चीज आपकी सेहत के लिए किसी आयुर्वेदिक चमत्कार से कम नहीं? रोजाना सिर्फ एक या दो इलायची खाना, वो भी खाली पेट, आपके शरीर में ऐसे फायदे ला सकता है, जिनके बारे में आपने शायद ही सोचा हो. खासकर अगर आप इसे सात दिनों तक लगातार खाते हैं, तो इसका असर आपके पाचन से लेकर सांसों की बदबू, ब्लड प्रेशर और यहां तक कि स्किन ग्लो तक पर नजर आने लगता है.
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पाचन तंत्र होगा मजबूत
हरी इलायची में फाइबर और आवश्यक तेल पाए जाते हैं, जो आपके पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं. 7 दिन तक इसका सेवन गैस, अपच और एसिडिटी की समस्या को काफी हद तक दूर कर सकता है.
सांसों की बदबू से राहत
अगर आपको मुंह से दुर्गंध आने की समस्या है, तो हरी इलायची एक नेचुरल माउथ फ्रेशनर का काम करती है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल तत्व मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और सांसों को ताजगी देते हैं.
ब्लड प्रेशर को करे कंट्रोल
इलायची पोटैशियम से भरपूर होती है, जो शरीर में सोडियम के स्तर को बैलेंस करने में मदद करता है. रोजाना इलायची खाने से हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.
स्किन को दे नेचुरल ग्लो
इलायची में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. सात दिन लगातार सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आ सकती है और पिंपल्स जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं.
स्ट्रेस और टेंशन कम करे
हरी इलायची की खुशबू नर्वस सिस्टम को शांत करती है. इसके सेवन से मूड अच्छा रहता है, नींद बेहतर आती है और मानसिक तनाव कम होता है.
दिल को रखे हेल्दी
इलायची हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यह कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस करने में मदद करती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है.
कैसे करें सेवन?
सुबह खाली पेट एक या दो हरी इलायची चबाएं
इसे गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं
ज्यादा मात्रा से बचें, एक दिन में 2 से ज्यादा न खाएं
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Baby Bump During Pregnancy: कल्पना कीजिए कि आपकी सहेली अचानक एक दिन आपको ये कहे कि वह 8 महीने की प्रेग्नेंट है और आप चौंक जाएं क्योंकि उसके शरीर पर इसका कोई निशान तक नहीं दिखा. न बेबी बंप, न बदला हुआ शरीर, क्या ऐसा मुमकिन है? हां, यह सुनकर अजीब लग सकता है. लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं है. कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान बेबी बंप बहुत हल्का दिखाई देता है या कभी-कभी बिल्कुल भी नहीं दिखाई देता. लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह स्थिति सामान्य है या इसके पीछे कोई जोखिम छिपा होता है?
बता दें, हर महिला की प्रेग्नेंसी यात्रा अलग होती है. किसी का बेबी बंप चौथे महीने से ही उभर आता है, तो किसी का आठवें महीने तक भी बमुश्किल दिखता है. यह अंतर सिर्फ शारीरिक बनावट तक सीमित नहीं, बल्कि कई मेडिकल कारणों पर भी निर्भर करता है.
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क्यों नहीं दिखता कुछ महिलाओं का बेबी बंप?
बॉडी टाइप: जिन महिलाओं की हाइट ज्यादा होती है या जिनके पेट की मसल्स मज़बूत होती हैं, उनमें बंप कम दिखाई देता है क्योंकि भ्रूण अंदर की ओर विकसित होता है.
पहली या दूसरी प्रेग्नेंसी: पहली प्रेग्नेंसी में पेट की मसल्स अधिक टाइट होती हैं, जिससे बंप कम नजर आता है. दूसरी या तीसरी बार प्रेग्नेंट महिलाओं में बंप जल्दी और स्पष्ट दिखता है.
बच्चे की पोज़िशन: अगर बेबी पीठ की तरफ यानी रीढ़ की ओर स्थित हो तो बाहर की ओर उभार नहीं बनता.
ओवरवेट या प्लस-साइज: ज्यादा वजन होने पर बंप उतना स्पष्ट नहीं दिखाई देता क्योंकि फैट लेयर बेबी बंप को ढंक देती है.
क्या यह स्थिति खतरनाक हो सकती है?
सामान्य रूप से, बेबी बंप का न दिखना अपने-आप में खतरनाक नहीं है जब तक अल्ट्रासाउंड और अन्य चेकअप में सब कुछ सामान्य हो. लेकिन कुछ मामलों में यह स्थिति स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकती है.
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अम्नियोटिक फ्लूइड की कमी: अगर पेट में पानी की मात्रा कम हो जाए तो बंप छोटा लगता है
हार्मोनल इम्बैलेंस: प्रोजेस्टेरोन या अन्य हार्मोन्स का असंतुलन भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर 5वें महीने के बाद भी कोई बंप दिखाई न दे
अगर मूवमेंट कम महसूस हो या उल्टी, थकावट जैसी सामान्य प्रेग्नेंसी सिम्पटम्स भी न हों
अगर पहले की तुलना में पेट सिकुड़ा-सिकुड़ा लगे
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