नींद खुलते ही दिखें ये 5 लक्षण तो समझ जाएं पेट में हो गई कैंसर की एंट्री, डॉक्टर से तुरंत करें बात
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Frequent Urination Causes: क्या आप दिनभर में बार-बार पेशाब जाने से परेशान हैं? क्या रात को भी नींद बार-बार इसलिए टूटती है क्योंकि बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है? अगर हां, तो यह समस्या सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि आपके शरीर में चल रही किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है. अक्सर लोग इसे पानी ज्यादा पीने या ठंड लग जाने की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लक्षण कई बार डायबिटीज, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), या प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारी हो सकती है. आइए विस्तार से समझते हैं कि बार-बार पेशाब आने के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है.
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डायबिटीज
बार-बार पेशाब आने की सबसे आम और गंभीर वजहों में से एक है डायबिटीज. जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है, तो किडनी उसे फिल्टर करने की कोशिश करती है और शरीर अधिक मात्रा में यूरिन बनाता है. यह स्थिति दिन और रात दोनों समय बार-बार पेशाब जाने का कारण बनती है.
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
महिलाओं में ये समस्या आम है. जब मूत्र मार्ग में संक्रमण हो जाता है, तो पेशाब करने की तीव्र इच्छा होती है, भले ही मूत्र की मात्रा बहुत कम हो. पेशाब के दौरान जलन और पेट के निचले हिस्से में दर्द इसके अन्य लक्षण हो सकते हैं.
ज्यादा पानी या डाईयूरेटिक चीजों का सेवन
अगर आप बहुत अधिक मात्रा में पानी, चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स लेते हैं, तो शरीर बार-बार यूरिन बनाता है. कैफीन और शराब जैसे पदार्थ डाईयूरेटिक होते हैं जो पेशाब की मात्रा बढ़ाते हैं.
ओवरऐक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम
इस स्थिति में ब्लैडर की मांसपेशियां सामान्य से ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे पेशाब की बार-बार इच्छा होती है, भले ही ब्लैडर पूरा न भरा हो. यह स्थिति उम्र बढ़ने के साथ ज़्यादा देखने को मिलती है.
प्रोस्टेट ग्रंथि की समस्या
मध्यम उम्र से बड़े पुरुषों में बार-बार पेशाब आने का कारण प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना हो सकता है. बढ़ी हुई ग्रंथि मूत्रमार्ग पर दबाव डालती है, जिससे पूरी तरह पेशाब नहीं निकल पाता और बार-बार पेशाब महसूस होती है.
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
पेशाब में जलन, खून या बदबू आए
रात में बार-बार पेशाब की वजह से नींद न पूरी हो
बहुत कम मात्रा में बार-बार पेशाब आए
कमजोरी या अचानक वजन घटना लगे
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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भीगे बादाम है ताकत का पहला सोर्स: देसी शेक बनाने के लिए रात में आप चार बादाम भिगोकर रख दें और सुबह इनका छिलका उतारकर शेक में डालें. भीगे बादाम में मौजूद हेल्दी फैट्स विटामिन ए और प्रोटीन आपके मसल्स को रिकवरी और दिमाग की शक्ति को बेहतरीन बनाने में मदद करेंगे.

मूंगफली सस्ती, लेकिन सुपरफूड: देसी शेक बनाने के लिए आप 100 ग्राम मूंगफली ले सकते हैं. 100 ग्राम मूंगफली में लगभग 25 ग्राम तक प्रोटीन होता है. कहने को तो मूंगफली सस्ती होती है, लेकिन यह एक प्रकार का सुपर फूड भी माना जाता है. मूंगफली बॉडी बिल्डिंग के लिए शानदार विकल्प है, जो आपके शरीर को जरूरी फैट्स और कैलोरी भी देती है.

दो केले इंस्टेंट एनर्जी के सोर्स: केला हमारे शरीर को एनर्जी देने वाला नैचुरल कार्बोहाइड्रेट होता है. रोजाना केला खाने से भी हमारे शरीर को ताकत मिलती है. वहीं, केला पाचन में भी हल्का होता है. साथ ही, यह वर्कआउट के पहले या वर्कआउट के बाद में खाने के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन भी माना जाता है.

गुड़ थोड़ा अच्छा स्वाद भी और सेहत भी: गुड़ न सिर्फ हमारी जीभ का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि यह आयरन और मिनरल्स का अच्छा सोर्स भी माना जाता है. यह हमारे शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है. इसके साथ ही यह हमारे शरीर में ब्लड को भी साफ करता है.

ये है शेक बनाने की रेसिपी: भीगे बादाम, मूंगफली, केले और थोड़ा गुड़ इन चार चीजों से देसी शेक बनाने के लिए आप सबसे पहले मूंगफली बादाम केला और गुड़ को एक साथ ब्लेंडर में डालें. इसके बाद इसमें जरूरत होने पर थोड़ा सा दूध और पानी मिला लें. इसके बाद जब तक यह शेक स्मूद न हो जाए, तब तक इसे ब्लेंड करते रहे. अच्छी तरह ब्लेंड होने पर आपका शेक तैयार हो जाएगा. बिना किसी प्रोटीन पाउडर या केमिकल के तैयार यह शेक आपकी मांसपेशियों को ताकत देगा और वजन बढ़ाने में भी मदद करेगा. यह सस्ता, असरदार और स्वादिष्ट शेक आपके लिए एक प्रकार के प्रोटीन की तरह काम करेगा.
Published at : 25 Jun 2025 04:10 PM (IST)
Singhasan is Effective in Many Problems: सिंहासन एक प्रभावी और सरल आसन है. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद यह आसन न केवल चेहरे और गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है, बल्कि आत्मविश्वास और तनावमुक्ति में भी मदद करता है. सिंहासन चेहरे, गले और थायराइड ग्रंथि के लिए विशेष रूप से लाभकारी है. यह गले की मांसपेशियों को सक्रिय करके थायराइड और पैराथायराइड ग्रंथियों के काम को संतुलित करता है, जो हार्मोनल के लिए महत्वपूर्ण हैं. यह आसन चेहरे की झुर्रियों को कम करने, जबड़े की जकड़न को दूर करने और आवाज को स्पष्ट करने में भी मदद करता है.
तनाव कम करने में असरदार
गायकों, शिक्षकों और वक्ताओं के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह गले की समस्याओं जैसे टॉन्सिलाइटिस और खराश को कम करता है. छत्तीसगढ़ योग आयोग के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर किए गए पोस्ट के मुताबिक, सिंहासन से शरीर के विभिन्न भागों जैसे चेहरा, आंख, कान, जीभ, गले, छाती और अंगुलियों को लाभ मिलता है. तनाव कम होता है. यह मुद्रा एक एंटी-एजिंग थेरेपी के रूप में कार्य करती है. चेहरे पर रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और झुर्रियों को भी कम करता है.
सिंहासन की प्रक्रिया में नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है. यह आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक स्पष्टता प्रदान करने में भी मदद करता है. इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है.
सिंहासन करने की सही विधि बताते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट सिंहासन करने की सही विधि बताते हैं, जिसके मुताबिक शांत स्थान पर योग मैट बिछाकर वज्रासन या सुखासन की मुद्रा में बैठना चाहिए. इसके बाद घुटनों पर बैठें, हथेलियों को घुटनों के सामने जमीन पर रखकर उंगलियों को पीछे की ओर रखना चाहिए. गहरी सांस लेने के साथ जीभ को पूरी तरह बाहर निकालकर आंखों को ऊपर की ओर करना चाहिए.
यही नहीं, सिंहासन के दौरान चेहरे को सिंह की तरह बनाकर आंखें खुली रखनी चाहिए और गले से गर्जना सी आवाज निकालनी चाहिए. इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराने के साथ प्रत्येक को 10-15 सेकंड तक बनाए रखना चाहिए.
मन और आत्मा को भी सशक्त बनाता है सिंहासन
एक्सपर्ट बताते हैं कि सिंहासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है बल्कि मन और आत्मा को भी सशक्त बनाता है. इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए. इसे करने में कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए. गले या घुटने में दर्द होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को भी एक्सपर्टों की सलाह के बाद ही करना चाहिए.
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Benefits of Haritaki: भारत भूमि पर कुछ औषधियां ऐसी भी हैं, जिन्हें ‘संजीवनी’ कहा जा सकता है. इन्हीं में से एक है हरीतकी, जिसे संस्कृत में “अभया” कहा गया है. आयुर्वेद में हरीतकी को औषधीय गुणों का खजाना माना गया है; इसे हरण या हर्र भी कहते हैं.
विटामिन-सी, विटामिन-के मैग्नीशियम से भरपूर
इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, मैग्नीशियम, अमीनो एसिड, फ्लेवेनॉएड और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने, पाचन सुधारने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यह फल भारत और दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में पाया जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम टर्मिनलिया चेबुला है. जिसका उपयोग आयुर्वेद में हजारों वर्षों से किया जा रहा है. इसके फल सूखे होते हैं और इन्हें चूर्ण, काढ़ा और गोली के रूप में प्रयोग किया जाता है.
चरक संहिता में इसे “कषाय” (कसैला) माना गया है, जबकि सुश्रुत संहिता में इसे “त्रिफला” में शामिल किया गया है. सुश्रुत संहिता के मुताबिक, हरीतकी का उपयोग मुख्य रूप से पाचन, श्वसन, त्वचा और मूत्र संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए किया जाता है. इसके चूर्ण का उपयोग बवासीर के लक्षणों को कम करने में मदद करता है; सूजन कम होती है और दर्द में भी राहत मिलती है.
सेहत के लिए लाभदायक है हरीतकी
चरक संहिता में इसे त्रिदोषनाशक बताया गया है. चिकित्सा ग्रंथ के मुताबिक हरीतकी के फूल को सूखाकर चूर्ण तैयार किया जाता है. पाउडर के सेवन से मुंह के छाले, खांसी और गले की खराश जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. अगर आप झड़ते हुए बालों से परेशान हैं तो हरीतकी चूर्ण को आंवला और रीठा के साथ मिलाकर पानी में उबालें, छानकर इस पानी से बाल धोएं. इससे बालों का झड़ना भी कम होगा और बाल मजबूत रहते हैं.
हरीतकी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और चयापचय को बढ़ावा देने में मदद करती है, जिससे वजन प्रबंधन में सहायता मिलती है. हालांकि किसी भी चिकित्सीय सलाह के बगैर इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
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Ideal Diet will be Beneficial for Health: जब शरीर को स्वस्थ रखने की बात आती है, तो हमारे खानपान की आदतें इसमें अहम भूमिका निभाती हैं, वहीं भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के मुताबिक, जीवन को स्वस्थ और संतुलित रखने के लिए संतुलित आहार अत्यधिक महत्वपूर्ण है.
भोजन को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आधारभूत तत्व माना गया है. चरक संहिता में बताया गया है कि भोजन ही प्राण है और एक आदर्श आहार से ही संतोष, पोषण, बल और मेधा की प्राप्ति होती है. यह केवल बीमारियों का इलाज नहीं करता, बल्कि जीवनशैली, आहार, दिनचर्या और मानसिक व्यवहार पर भी गहन ध्यान देता है. इसमें कुछ चीजें और आदतें ऐसी मानी गई हैं जो शरीर के लिए हानिकारक होती हैं, इसलिए उन्हें “निषेध” कहा गया है.
इन चीजों का सेवन करना शरीर के लिए फायदेमंद
चरक संहिता में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के संयोजन बताए गए हैं जो विपरीत गुणों वाले होते हैं और जिनका सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए. उदाहरण के लिए, दूध और मछली का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए, क्योंकि दूध ठंडा होता है और मछली गर्म होती है. वहीं, भोजन को धीरे-धीरे और चबा-चबाकर खाना चाहिए; जल्दी-जल्दी खाने से पाचन ठीक से नहीं होता है. भोजन को बार-बार गर्म करके नहीं खाना चाहिए. इससे भोजन के पोषक तत्व कम हो जाते हैं और साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.
सुश्रुत संहिता के मुताबिक, अत्यधिक भोजन करना, दिन में सोना, देर रात तक जागना जैसी चीजें वर्जित मानी गई हैं. यह कफ को बढ़ाता है, जिससे मोटापा और एलर्जी होती है. वहीं, रात में जागने से फैट, मानसिक तनाव, अनिद्रा और थकावट जैसी समस्याएं होने लगती हैं. खाने के बाद तुरंत बाद भी नहीं सोना चाहिए, इससे पाचन शक्ति कमजोर होती है.
इन चीजों से पड़ता है शरीर पर बुरा प्रभाव
आयुर्वेद के मुताबिक आपको क्रोध, चिंता, ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं को अनुभव करने से शरीर और मन पर बुरा असर पड़ता है. यह शरीर में विष की तरह फैलकर वात-पित्त-कफ को बढ़ाने में मदद करते हैं. सुश्रुत संहिता में कहा गया है कि अत्यधिक काम, नींद की कमी और मानसिक तनाव से बचना चाहिए, क्योंकि ये मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को बढ़ा सकते हैं.
13 प्रकार के प्राकृतिक वेग जैसे मल, मूत्र, छींक, जम्हाई, आंसू जैसी चीजें बताई गई हैं, जिनका रोका जाना निषेध माना गया है. इन्हें रोकने से शरीर में गंभीर रोग हो सकते हैं जैसे कि सिरदर्द, हृदय रोग, त्वचा रोग आदि.
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