क्या आप भी घर में बार-बार चेक करते हैं ब्लड प्रेशर, जान लें ऐसा कितनी बार करना सही?

क्या आप भी घर में बार-बार चेक करते हैं ब्लड प्रेशर, जान लें ऐसा कितनी बार करना सही?


Blood Pressure Check at Home: क्या आपको लगता है कि ब्लड प्रेशर सिर्फ डॉक्टर के क्लिनिक में चेक कराना ही काफी है? अगर आप हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं या इसकी दवाएं ले रहे हैं तो घर पर नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की निगरानी करना आपकी सेहत का सबसे मजबूत हथियार बन सकता है. यह न केवल आपके इलाज की प्रभावशीलता को दिखाता है, बल्कि अचानक होने वाले जोखिमों से भी आपको समय रहते बचा सकता है. आइए जानें कि घर पर ब्लड प्रेशर चेक करना क्यों जरूरी है और इसे सही तरीके से कैसे करें. 

हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो दुनियाभर में करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है. इसकी सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह अक्सर बिना किसी लक्षण के बढ़ता है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है. अगर समय रहते इसका इलाज या निगरानी न की जाए, तो यह दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. 

ये भी पढ़े- बड़े काम का होता है लाल प्याज की स्किन का अर्क, इस बीमारी के लिए है रामबाण इलाज

घर पर ब्लड प्रेशर चेक करना क्यों जरूरी है?

पहले के समय में ब्लड प्रेशर केवल डॉक्टर के क्लिनिक में ही चेक किया जाता था. लेकिन वहां जाने पर कुछ लोगों को हाइपरटेंशन हो जाता है. यानी डॉक्टर के सामने ब्लड प्रेशर अधिक आना, जो वास्तव में उनकी सामान्य स्थिति को सही से नहीं दर्शाता. घर पर ब्लड प्रेशर नापने से न केवल आपकी वास्तविक स्थिति का पता चलता है, बल्कि दवाओं का असर कैसा हो रहा है, यह भी समझा जा सकता है. 

कब और कितनी बार मापें ब्लड प्रेशर?

अगर आपको हाल ही में हाई ब्लड प्रेशर हुआ है या आपने नई दवा शुरू की है, तो डॉक्टर दिन में एक या दो बार BP नापने की सलाह दे सकते हैं. जब आपका ब्लड प्रेशर स्थिर हो जाए, तो सप्ताह में दो बार या इसे मापना पर्याप्त हो सकता है. 

ब्लड प्रेशर नापने का सही समय और तरीका

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, BP रोजाना एक ही समय पर नापें, जैसे सुबह नाश्ते से पहले और रात को सोने से पहले. इससे अधिक सटीक और एक जैसा रहता है. 

सही रीडिंग के लिए इन बातों का ध्यान रखें

मापने से पहले 5 मिनट आराम करें

पीठ को सहारा दें और पैरों को जमीन पर सीधा रखें

मापने से 30 मिनट पहले कैफीन या एक्सरसाइज से बचें

ये भी पढ़ें: बरसात में इन 5 बीमारियों का रहता है खतरा, कहीं आप तो नहीं है इसके शिकार

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

जिंदगी बचाने की जगह सांसें छीन लेगी डोनर की किडनी, अगर ट्रांसप्लांट से पहले नहीं रखा इसका ख्याल

जिंदगी बचाने की जगह सांसें छीन लेगी डोनर की किडनी, अगर ट्रांसप्लांट से पहले नहीं रखा इसका ख्याल



जिंदगी बचाने की जगह सांसें छीन लेगी डोनर की किडनी, अगर ट्रांसप्लांट से पहले नहीं रखा इसका ख्याल



Source link

बिस्तर पर जाते ही दिखें ये लक्षण तो खतरे में दिल-जिगर और गुर्दा, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल

बिस्तर पर जाते ही दिखें ये लक्षण तो खतरे में दिल-जिगर और गुर्दा, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल



बिस्तर पर जाते ही दिखें ये लक्षण तो खतरे में दिल-जिगर और गुर्दा, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल



Source link

पेट में उभरी गांठ, जानिए कब बन सकती है खतरे की घंटी?

पेट में उभरी गांठ, जानिए कब बन सकती है खतरे की घंटी?


Lumps in Stomach: कल्पना कीजिए कि आप रोज की तरह अपने कपड़े पहन रहे हों और अचानक पेट पर हल्की-सी उभरी हुई गांठ महसूस होती है. कोई दर्द नहीं, न ही जलन, लेकिन कुछ “अलग” सा जरूर लगता है. आप इसे नज़रअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन शरीर का ये छोटा-सा बदलाव कभी-कभी किसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है. हमारा शरीर समय-समय पर संकेत देता है.  जरूरत बस इन्हें पहचानने और समझने की है. पेट में उभरी गांठ कई बार सामान्य हो सकती है, हालांकि कुछ मामलों में यह खतरे की घंटी भी साबित हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि पेट में गांठ क्यों बनती है, इसके क्या कारण हो सकते हैं और किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

ये भी पढ़े- शरीर मांगे विटामिन b12, जानिए किन चीजों से करें इसकी भरपाई

पेट में गांठ बनने के संभावित कारण

हर्निया 

यह सबसे आम कारणों में से एक है। जब पेट की भीतरी दीवार कमजोर हो जाती है और आंत का कुछ हिस्सा बाहर की ओर उभर आता है, तो उसे हर्निया कहा जाता है. हर्निया की गांठ खड़े होने पर या खांसते समय ज्यादा उभरती है.

लिपोमा 

यह वसा फैट से बनी एक सॉफ्ट गांठ होती है जो आमतौर पर बिना दर्द की होती है। यह कैंसरस नहीं होती, लेकिन आकार में बढ़ सकती है।

सिस्ट 

सिस्ट तरल या अर्ध-ठोस पदार्थ से भरी गांठ होती है. यह स्किन के नीचे बनती है और कभी-कभी दर्द या सूजन पैदा कर सकती है.

इंफेक्शन या सूजन

पेट की त्वचा के नीचे बैक्टीरियल इंफेक्शन या लिम्फ नोड्स की सूजन के कारण भी गांठ बन सकती है. यह स्पर्श में गर्म और दर्दनाक हो सकती है.

ट्यूमर या कैंसर

यह कम ही होता है, लेकिन पेट में गांठ अगर धीरे-धीरे बढ़ रही है, कठोर है और उसमें दर्द नहीं हो रहा, तो यह किसी ट्यूमर या कैंसर का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

गंभीर संकेत कब दिखते हैं 

गांठ का आकार धीरे-धीरे बढ़ना

दर्द रहित लेकिन कठोर गांठ

गांठ के पास त्वचा का रंग बदलना

बुखार या वजन कम होना

गांठ में जलन, मरोड़ या पस बनना

पेट में उभरी गांठ एक आम लेकिन अनदेखी जाने वाली समस्या है. कई बार ये बिल्कुल सामान्य होती है, तो कभी यह किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत भी बन सकती है. इसलिए बेहतर यही है कि शरीर की हर छोटी-बड़ी बात को समझें और समय रहते सही कदम उठाएं.

ये भी पढ़ें: बरसात में इन 5 बीमारियों का रहता है खतरा, कहीं आप तो नहीं है इसके शिकार

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सुबह उठते ही क्यों बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर? वजह जान लें तो मौत को दे सकेंगे मात

सुबह उठते ही क्यों बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर? वजह जान लें तो मौत को दे सकेंगे मात



<p style="text-align: justify;">हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर के रूप में माना जाता है. शरीर कई बार इससे जूझ रहा होता है, लेकिन अक्सर लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. अगर सुबह उठने के दाैरान ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है तो ये किसी हेल्थ प्राॅब्लम की चेतावनी भी सकता है. इसे आमताैर पर माॅर्निंग हाइपरटेंशन के रूप में जाना जाता है. आ​खिर ये समस्या के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, इस बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रेस और एंग्जाइटी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">क्राॅनिक स्ट्रेस और एंग्जाइटी से जूझने वाले लोगों में सुबह जागने के दाैरान ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिल सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्ट्रेस और एंग्जाइटी से बाॅडी में कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे माॅर्निंग में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्लीप एपनिया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्दी बाॅडी के लिए अच्छी नींद जरूरी होती है. ये बाॅडी को रीस्टोर करने का काम करती है. डाॅक्टर भी इसकी सलाह देते हैं. लेकिन कई बार रात में बार-बार जागना हेल्थ प्राॅब्लम का इंडिकेट हो सकता है. स्लीप एपनिया के चलते ऐसा हो सकता है. जिससे नींद में खलल पड़ता है. बाॅडी में ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है. इससे माॅर्निंग में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटीज</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज में ब्लड प्रेशर का रिस्क बढ़ जाता है. डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से ब्लड वेसल्स और किडनी को नुकसान पहुंचता है. ​इससे सुबह बाॅडी में ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिलता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नमक का अ​धिक सेवन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रात में सोने से पहले खाने में नमक का अ​धिक सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है. इससे सुबह ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अत्यधिक शराब का सेवन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शराब का सेवन किसी भी मात्रा में शरीर के लिए उचित नहीं माना जाता. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रात में शराब अ​धिक पीने से बाॅडी में फ्लूड बैलेंस गड़बड़ा जाता है. इससे रात में सोने के दाैरान नींद में खलल पड़ता है. जिससे बाॅडी का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह कितना खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर हमेशा शुरुआती संकेत नहीं देता. यह चुपचाप बाॅडी में बढ़ सकता है. शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. जब इसके बारे पता लगता है तो हालत चिंताजनक हो चुकी होती है जैसे स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज की प्राॅब्लम. हाई ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे ब्लड वेसल्स &nbsp;(रक्त वाहिकाओं) की वाॅल पर दबाव डालता है, जिसमें ब्रेन की नाजुक ब्लड वेसल्स भी होती हैं. लगातार प्रेशर से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है. जिससे हेमरेज या क्लाॅट होने का खतरा बन जाता है. इस खतरनाक ​स्थिति से पहले दर्द, चक्कर आना या शरीर में कुछ भी असामान्य महसूस नहीं होता. ऐसे में अगर शरीर गुड फील भी कर रहा हो तो इस ‘साइलेंट किलर’ पर नजर रखना जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/fatty-liver-can-cause-of-liver-cirrhosis-to-cancer-2967688">फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

गर्मी में सिर्फ पानी से नहीं चलेगा काम, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें

गर्मी में सिर्फ पानी से नहीं चलेगा काम, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें



<p style="text-align: justify;">गर्मी ने बेहाल कर रखा है. ऐसे में हम डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी का सेवन बढ़ा देते हैं. लेकिन सिर्फ पानी के भरोसे रहना खतरनाक साबित हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कुछ अन्य कदम भी उठाने चाहिए. डिहाइड्रेशन से बचाव के ये तरीके क्या हैं? आइए इस बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ पानी के भरोसे रहना खतरनाक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाव में सिर्फ पानी का सेवन पर्याप्त नहीं है. डिहाइड्रेशन की ​स्थिति में शरीर में न सिर्फ पानी ब​ल्कि, सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और बाइकार्बोनेट जैसे अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा भी कम हो जाती है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर में मैग्नीशियम और कैल्शियम की मात्रा भी कम हो जाती है. एक व्य​क्ति के शरीर में 60 से 70 प्रतिशत पानी होता है. इसमें अ​धिक अंतर आने पर मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. बाॅडी में डाइजेशन सिस्टम पर इसका असर पड़ता है. ​स्किन ड्राई होने लगती है. लंबे समय तक ऐसी ​स्थिति रहने से दौरे पड़ने के साथ सांस लेने और दिमाग पर असर पड़ सकता है. ये​ ​स्थिति खतरनाक हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ये करें</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>हल्की डाइट लें:</strong> गर्मी में तले-भुने और मसालेदार फूड्स से दूरी बनाएं. इनसे शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ती है, जिससे पसीना ज्यादा आता है. शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है. हरी सब्जियां, दाल, छाछ और दही जैसी चीजें फायदेमंद रहती हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>नींबू पानी और नारियल पानी:</strong> गर्मी में नींबू पानी और नारियल पानी शरीर को न केवल ठंडक देते हैं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति भी करते हैं. इनमें मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और अन्य मिनरल्स शरीर को एनर्जी देते हैं. दिन में एक-दो बार इनका सेवन बेहद फायदेमंद होता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>फलों का सेवन:</strong> तरबूज, खीरा, ककड़ी, संतरा, अनानास जैसे फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है. इन्हें अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. फलों का फ्रेश जूस भी शरीर को हाइड्रेट करता है और एनर्जी देता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर:</strong> पसीना अ​धिक आता है या कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तो ओरआरएस या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर वाला पानी पी सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कैफीन और शराब से बचें:</strong> चाय, कॉफी और शराब शरीर से पानी की मात्रा को कम करते हैं. इनका अधिक सेवन डिहाइड्रेशन को बढ़ावा देता है. अगर कैफीन लेते भी हैं, तो उसके बाद दो गिलास पानी जरूर पीएं ताकि नुकसान की भरपाई हो सके.</li>
</ul>
<p><strong>इस ​स्थिति में होता है डिहाइड्रेशन</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">लंबे समय तक तेज धूप में रहना.</li>
<li style="text-align: justify;">दस्त या कोई बीमारी होने पर शरीर में पानी की कमी हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;">अधिक शराब या कैफीनयुक्त पेय पीने से शरीर में पानी कम हो जाता है.</li>
<li style="text-align: justify;">पेशाब की दवा ज्यादा खाने से भी शरीर में पानी कम हो सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिहाइड्रेशन के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">अ​धिक प्यास लगना</li>
<li style="text-align: justify;">पेशाब गहरा पीला और तेज गंध वाला हो</li>
<li style="text-align: justify;">सामान्य से कम पेशाब आना</li>
<li style="text-align: justify;">चक्कर आना</li>
<li style="text-align: justify;">थकान महसूस होना</li>
<li style="text-align: justify;">मुंह, होंठ, जीभ सूखना</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/fatty-liver-can-cause-of-liver-cirrhosis-to-cancer-2967688">फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp