पैरों की त्वचा पर अचानक क्यों दिखते हैं निशान? फैटी लीवर के हो सकते हैं संकेत
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पैरों की त्वचा पर अचानक क्यों दिखते हैं निशान? फैटी लीवर के हो सकते हैं संकेत
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Amazing Benefits of Drinking Turmeric Milk: हर रात सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीना शरीर के लिए बेहद लाभकारी है. यह आयुर्वेद का ऐसा तोहफा है जो आपके शरीर और मन दोनों को फायदा पहुंचाता है. इम्यून सिस्टम के लिए वरदान से कम नहीं है हल्दी वाला दूध! चरक संहिता में हल्दी अपने आप में बेहतरीन औषधि मानी गई है. इसे आयुर्वेद में ‘हरिद्र’ कहा गया है. हल्दी त्वचा रोग, सूजन और विषैले तत्वों को दूर करने के लिए जानी जाती है.
इसमें करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो शरीर में सूजन कम करता है, रोगों से लड़ने में मदद करता है और एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है. वहीं दूसरी तरफ, दूध को आयुर्वेद में शरीर की बुनियादी ताकत को बढ़ाने वाला माना गया है. जब ये दोनों मिलते हैं, तो ये त्रिदोष यानी वात, पित्त, कफ को संतुलन में लाते हैं.
हल्दी वाला दूध आपके लिए हो सकता है रामबाण
अगर आप नींद नहीं आने की शिकायत से परेशान रहते हैं, तो हल्दी वाला दूध आपके लिए रामबाण हो सकता है. इसमें मौजूद ट्रिप्टोफान नामक अमीनो एसिड मस्तिष्क को शांत करता है और गहरी नींद लाने में मदद करता है. यह इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है. यही नहीं, हल्दी वाला दूध सर्दी-जुकाम, खांसी, गले की खराश जैसी आम बीमारियों में राहत देता है.
दूध से मिलने वाला कैल्शियम और हल्दी का सूजन कम करने वाला गुण मिलकर हड्डियों और जोड़ों को ताकत देते हैं, खासतौर पर गठिया या कमर दर्द में. इसके अलावा, स्किन की परेशानियों जैसे मुंहासे, खुजली या फोड़े-फुंसियों में भी यह काफी लाभकारी है क्योंकि हल्दी खून को शुद्ध करती है.
सेहत के लिए लाभदायक है हल्दी दूध
पाचन की बात करें तो हल्दी लिवर को साफ करती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है, जिससे गैस, कब्ज या एसिडिटी से राहत मिलती है. मानसिक तनाव, चिंता या अवसाद से लड़ने में भी यह मददगार है क्योंकि यह सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन को संतुलित करती है.
महिलाओं के लिए भी यह बेहद खास फायदेमंद है. पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन, मूड स्विंग और हार्मोनल असंतुलन को यह संतुलित करता है. साथ ही, अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं, तो हल्दी वाला दूध आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और चर्बी घटाने में मदद करता है.
अब सवाल आता है कि इसे कब पिएं?
चरक संहिता में इसे पीने का सबसे सही वक्त रात को सोने से करीब 30 मिनट पहले का है. ध्यान रखें कि खाली पेट हल्दी वाला दूध न पिएं. भोजन कर लेने के बाद इसका सेवन करें. योग या प्राणायाम के बाद हल्दी वाला दूध पीना बेहद फायदेमंद होता है.
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Benefits of Bhramari Pranayam: अगर आप अपने दिमाग और शरीर को एक संतुलन में लाना चाहते हैं, तो प्राणायाम सबसे असरदार तरीका माना जाता है. खासतौर पर भ्रामरी प्राणायाम बहुत फायदेमंद होता है. भ्रामरी प्राणायाम का नाम भ्रामर शब्द से आया है, जिसका मतलब होता है भ्रमर यानि भंवरा. जब हम सांस छोड़ते हैं, तो जो आवाज निकलती है वो भंवरे के भिनभिनाने जैसी लगती है, इसलिए इस प्राणायाम को ‘मधुमक्खी श्वास’ भी कहा जा सकता है.
इस दौरान आपके गले, चेहरे और जबड़ों में एक हल्का कंपन सा महसूस होता है, जो काफी सुकून देने वाला होता है. इसका अभ्यास रोजाना करने से मन शांत रहता है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है.
भ्रामरी प्राणायाम दिमाग शांत करने में मदद करता है- आयुष मंत्रालय
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम दिमाग शांत करने में मदद करता है. तनाव कम होता है, गुस्सा कंट्रोल में रहता है और मन की बेचैनी भी धीरे-धीरे दूर होने लगती है. इसके नियमित अभ्यास से दिमाग और नसों को आराम मिलता है, जिससे सोचने-समझने की ताकत भी बढ़ती है.
जो लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए भ्रामरी प्राणायाम काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. यह अभ्यास दिमाग को ठंडक पहुंचाता है और नसों के तनाव को कम करता है, जिससे ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे संतुलित होने लगता है. जब मन शांत होता है तो शरीर बेहतर काम करने लगता है.
माइग्रेन की समस्या के लिए लाभदायक
अगर आपको माइग्रेन की शिकायत रहती है, तो भ्रामरी प्राणायाम इसमें काफी राहत दे सकता है. यह अभ्यास दिमाग की नसों को शांत करता है और सिर में होने वाले तेज दर्द को कम करने में मदद करता है. जब आप मधुमक्खी जैसी आवाज के साथ सांस छोड़ते हैं, तो उसका असर सीधा दिमाग पर होता है और माइग्रेन का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है. रोजाना कुछ मिनट का अभ्यास आपके सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल में ला सकता है.
अगर आपका मन पढ़ाई या किसी काम में जल्दी भटक जाता है, तो प्राणायाम का अभ्यास आपके बहुत काम आ सकता है. इसे करने से ध्यान केंद्रित करने की ताकत बढ़ती है. खासतौर पर बच्चों और छात्रों के लिए यह बहुत फायदेमंद है. इससे याद रखने की शक्ति भी बेहतर होती है.
कैसे करते है भ्रामरी प्राणायाम?
भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले किसी शांति वाली जगह पर आराम से बैठ जाएं. फिर आंखें बंद कर लें और दोनों हाथों की उंगलियों से हल्के से कान और आंखों को ढक लें. अब मुंह बंद रखते हुए नाक से धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें. जब सांस छोड़ें तो हल्की मधुमक्खी की तरह एक भनभनाहट की आवाज करें. ऐसा करने से दिमाग में एक हल्का सा कंपन महसूस होता है, जो मानसिक शांति और ध्यान बढ़ाने में मदद करता है.
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Vitamin B12 Deficiency Symptoms: क्या आपने कभी महसूस किया है कि थकान दिनभर पीछा नहीं छोड़ती? या फिर छोटी सी बात याद रखने में भी दिक्कत होती है? कभी पैरों में झुनझुनी सी महसूस होती है तो कभी मूड अचानक से चिड़चिड़ा हो जाता है. अक्सर हम इन लक्षणों को तनाव, नींद की कमी या उम्र का असर मानकर छोड़ी देते हैं. लेकिन असल वजह कुछ और भी हो सकती है, कहीं विटामिन b12 की कमी तो नहीं है?
दरअसल, हमारा शरीर रोज़मर्रा की गतिविधियों के लिए जिस एनर्जी और मानसिक संतुलन की जरूरत रखता है, उसमें B12 का अहम योगदान होता है. ये विटामिन न केवल खून में रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है, बल्कि नर्वस सिस्टम को भी ठीक तरह से चलाने में जरूरी होता है.
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विटामिन B12 की कमी के मुख्य कारण
बढ़ती उम्र या पाचन तंत्र की गड़बड़ी
एंटीएसिड या कुछ दवाइयों का लगातार सेवन
शरीर द्वारा इस विटामिन का सही तरह से अवशोषित न कर पाना
विटामिन B12 की पूर्ति के लिए कौन-सी चीजें खाएं?
दूध और डेयरी उत्पाद
गाय का दूध, दही, पनीर और चीज B12 के अच्छे स्रोत हैं. यदि आप अंडा या मांस नहीं खाते हैं, तो इनसे काफी हद तक आपकी जरूरत पूरी हो सकती है.
अंडा
अंडे की जर्दी B12 से भरपूर होती है. अगर आप एगिटेरियन हैं, तो हफ्ते में 3 अंडों का सेवन करें
मछली और चिकन
नॉन-वेज खाने वालों के लिए मछली (जैसे टूना, सैल्मन), चिकन और रेड मीट अच्छे स्रोत हैं
फोर्टिफाइड फूड्स
सोया मिल्क या टोफू, जिनमें विटामिन B12 मिलाया जाता है. शाकाहारी लोग इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
सप्लिमेंट्स या डॉक्टर की सलाह से इंजेक्शन
अगर कमी बहुत अधिक है और खान-पान से पूरी नहीं हो पा रही, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट्स या B12 इंजेक्शन लिया जा सकता है.
सावधानी भी है जरूरी
कभी भी खुद से सप्लिमेंट लेना शुरू न करें. पहले ब्लड टेस्ट करवा कर डॉक्टर से सलाह लें. जरूरत से ज्यादा B12 भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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<p style="text-align: justify;">गर्मी के माैसम में उमस बेहाल कर देती है. पसीने से तर-बतर होना सामान्य बात है. लेकिन क्या इस माैसम में भी आपको पसीना नहीं आता. ऐसे में ये हेल्थ प्राॅब्लम का संकेत हो सकता है. इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आखिर ऐसा क्याें होता है? और ये स्थिति शरीर के लिए किस कदर खतरनाक हो सकती है? आइए इस बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह कंडीशन कितनी खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पसीना ह्यूमन बाॅडी के लिए बेहद जरूरी होता है. पसीने के जरिए न सिर्फ शरीर की गंदगी बाहर निकलती है, बल्कि टेम्प्रेचर भी काफी हद तक कंट्रोल में रहता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पसीना न आने की स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है. इस स्थिति को एनहाइड्रोसिस कहा जाता है. पसीना नहीं आने से शरीर का टेम्प्रेचर कंट्रोल नहीं हो पाता. इसके चलते शरीर के कई ऑर्गन को नुकसान पहुंच सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एनहाइड्रोसिस के कारण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>नर्व से जुड़ी दिक्कत: </strong>शरीर में पसीना लाने का काम ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम करता है. अगर इस नर्व सिस्टम में कोई गड़बड़ी होती है, तो पसीना आना रुक सकता है. यह नर्व सिस्टम से जुड़ी बीमारियों जैसे डायबिटिक न्यूरोपैथी, पार्किंसन डिजीज या मल्टीपल स्क्लेरोसिस के कारण हो सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डिहाइड्रेशन:</strong> जब शरीर में पानी की कमी बहुत ज्यादा होने लगती है, तो पसीना आना कम हो जाता है या बिल्कुल पसीना नहीं आता. पसीना आमतौर पर पानी और नमक से बनता है, इसलिए शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर ग्रंथियां एक्टिव नहीं हो पातीं हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्किन प्राॅब्लम:</strong> स्किन की बाहरी परत डैमेज हो जाती है या किसी इंफेक्शन के कारण बंद हो जाती है तो पसीने की ग्रंथियां ठीक तरह से काम नहीं कर पाती हैं. जैसे स्किन पर जलन, झुलसना, स्किन रैश या गंभीर स्किन से जुड़ी बीमारियां जैसे स्क्लेरोडर्मा या इच्थियोसिस पसीने को निकलने से रोक सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>दवा का असर:</strong> कुछ दवाइयां जैसे कि एंटीहिस्टामिन, डिप्रेशन, ब्लड प्रेशर की दवाइयां या मूड स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करने से शरीर के पसीना निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>जेनेटिक:</strong> कुछ जेनेटिक स्थितियों जैसे हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिसप्लेसिया में पसीने की ग्रंथियां जन्म के समय से ही कम या न के बराबर होती है, जिससे गर्मी में भी पसीना न आने की समस्या होती है.</li>
<li style="text-align: justify;">एज फैक्टर: उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों में पसीना कम आना या न आना एक सामान्य बात हो सकती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ स्किन की पसीने की ग्रंथियां इनएक्टिव हो जाती हैं.</li>
</ul>
<p><strong>पसीना न आने से दिक्कत</strong></p>
<ul>
<li>नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है</li>
<li>हीट स्ट्रोक का खतरा</li>
<li>हार्ट अटैक का रिस्क</li>
<li>बेहोशी और चक्कर आने की प्राॅब्लम</li>
<li>थकान महसूस होना</li>
<li>शरीर का गर्म होना</li>
<li>सिरदर्द, मतली या उल्टी होना</li>
<li>शरीर के कई ऑर्गन को नुकसान पहुंचने का रिस्क</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/fatty-liver-can-cause-of-liver-cirrhosis-to-cancer-2967688">फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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Cardamom is Beneficial for Health: शरीर हो या मन हर समस्या का समाधान भारतीय रसोई में मौजूद है. कभी लौंग के रूप में तो कभी सौंफ या अन्य मसालों के रूप में. ऐसे में बात ‘मसालों की रानी’ की हो तो इसे कैसे इग्नोर किया जा सकता है. जी हां! बात हो रही है इलायची की, जो न केवल स्वाद और सुगंध को बढ़ाती है बल्कि सेहत के लिए भी वरदान है.
कई समस्याओं से समाधान दिलाती है इलायची
इलायची में कई समस्याओं का समाधान छिपा है. साइंटिफिक और मेडिकल रिसर्च प्रकाशित करने वाली वेबसाइट ‘साइंस डायरेक्ट’ के मुताबिक, प्राचीन भारतीय आयुर्वेद, यूनानी और रोमन चिकित्सा में चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से इसका उपयोग सांस की बीमारियों ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, कब्ज, सर्दी-खांसी, दांत-मसूड़ों के रोग, किडनी से संबंधित समस्याओं, फेफड़ों में जकड़न से संबंधित या टीबी, आंखों की जलन समेत अन्य समस्याओं के इलाज में होता रहा है.
आयुर्वेद में इलायची को त्रिदोषनाशक माना जाता है, जो वात, पित्त और कफ को संतुलित करती है. यह पाचन शक्ति को मजबूत करने के साथ मन को शांत करती है और हृदय के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. इसका वैज्ञानिक नाम एलेटेरिया कार्डमम है, जिसमें विटामिन सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. यह माउथ फ्रेशनर भी है.
भोजन के बाद एक इलायची खाना फायदेमंद
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि भोजन के बाद एक इलायची चबाने या इसके पाउडर को सेंधा नमक, मिश्री के साथ लेने से वात, अपच और एसिडिटी में राहत मिलती है. रोज सुबह इलायची चबाने या इसके पानी से कुल्ला करने से मुंह की बदबू और संक्रमण कम होती है. यही नहीं, गर्म दूध में इलायची पाउडर मिलाकर पीने से मानसिक तनाव कम हो सकता है और नींद में भी सुधार होता है.
प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक इलायची पानी के साथ लेने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है. गुनगुने पानी में इलायची पाउडर मिलाकर पीने से ब्लड शुगर नियंत्रित होता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.
सौंफ-गुड़ के साथ इलायची का सेवन पीरियड्स की तकलीफ में राहत दे सकता है. एक रिसर्च के मुताबिक, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से इसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है.
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