इस छोटे से फल में होता है हर बीमारी का इलाज, जान लें रोज खाने के फायदे

इस छोटे से फल में होता है हर बीमारी का इलाज, जान लें रोज खाने के फायदे



<p style="text-align: justify;">फल सेहत के लिए फायदेमंद बताए जाते हैं. लेकिन हम आपको एक ऐसे फल से रूबरू कराएंगे, जिसका असर दिमाग से लेकर पेट और दिल से लेकर किडनी तक पर देखने को मिलता है. ये फल है सेब. सेब आपने कई बार खाया होगा, लेकिन इसके गुणों से आप परिचित नहीं होंगे. ये फल हेल्थ के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. आइए जानते हैं कि रोज एक सेब किस तरह बाॅडी को हेल्दी रखने में हेल्पफुल साबित हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वजन कम करने में मदद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शरीर का बढ़ा वजन सबसे बड़ी चुनाैती बन जाता है. ये कई तरह की बीमारियों की वजह बन सकता है. ऐसे में सेब से बाॅडी का वेट कंट्रोल करने में मदद​ मिलती है. सेब में कैलोरी की मात्रा कम होती है. यह जल्दी से पेट भर देता है. पेट भरा महसूस होने से ओवरइटिंग से बचते हैं. जिससे बाॅडी का वेट नहीं बढ़ता.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डाइजेशन की प्राॅब्लम दूर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हे​क्टिक लाइफस्टाइल के बीच लोगों का खानपान बिगड़ गया है. इसके चलते सबसे बड़ी समस्या डाइजेशन की सामने आती है. गैस और कब्ज की दिक्कत सामान्य हो गई है. ऐसे में इस समस्या से छुटकारा दिलाने में सेब रामबाण साबित हो सकता है. सेब में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. खासकर पेक्टिन (एक प्रकार का घुलनशील फाइबर) प्रमुख रूप से पाया जाता है. यह डाइजेशन सिस्टम को स्वस्थ रखता है. कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. अगर रोज एक सेब खाते हैं, तो डाइजेशन सिस्टम इंप्रूव होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>​स्किन पर आता है निखार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेब में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो ​स्किन को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखते हैं. रोज सेब खाने से चेहरे पर ग्लो आता है और उम्र बढ़ने के संकेत भी धीमे होते हैं. यह शरीर को फ्री रैडिकल्स से बचाता है, जो ​स्किन प्राॅब्लम की वजह बन सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हार्ट हेल्थ के लिए भी अच्छा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेब में फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो हार्ट के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं. रोज एक सेब खाने से बाॅडी में ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है. हार्ट डिजीज का जोखिम कम करने में मदद मिलती है. सेब में फ्लेवोनॉइड्स भी होते हैं, जो दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किडनी रहती है दुरुस्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेब में पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी फंक्शन को सपोर्ट करते हैं. सेब के सेवन से किडनी को हेल्दी रखने में मदद मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेंटल हेल्थ रखता है बेहतर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेब में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉइड्स ब्रेन हेल्थ को इंप्रूव करते हैं. ये स्ट्रेस और डिप्रेशन से लड़ने में मदद करते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डा​​यबिटीज में खा सकते हैं सेब</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) कम होता है. इसका मतलब है कि ये ब्लड शुगर के स्तर को जल्दी से नहीं बढ़ाता. ऐसे में ये बाॅडी में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/fatty-liver-can-cause-of-liver-cirrhosis-to-cancer-2967688">फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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लिवर और किडनी को डैमेज तो नहीं कर रहीं पेन किलर्स, बात-बात पर खा लेते हैं तो हो जाएं सावधान

लिवर और किडनी को डैमेज तो नहीं कर रहीं पेन किलर्स, बात-बात पर खा लेते हैं तो हो जाएं सावधान


Painkiller Side Effect: आजकल की तेज जिंदगी में हर कोई चाहता है कि दर्द मिनटों में गायब हो जाए. सिर दर्द हो, पीरियड्स की ऐंठन हो या फिर थकावट से आई मांसपेशियों की जकड़न. बिना सोचे-समझे बस एक पेन किलर की गोली निगल लेना जैसे आदत बन चुकी है और शायद आपको भी ये लगता हो कि एक छोटी-सी गोली से क्या फर्क पड़ता है? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये छोटी-सी राहत की गोली धीरे-धीरे आपकी लिवर और किडनी की सेहत पर भारी पड़ सकती है? कई लोग तो दिन में दो-तीन बार भी पेन किलर ले लेते हैं, बिना यह जाने कि इसका प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है.

पेन किलर्स कैसे काम करते हैं?

पेन किलर्स जैसे कि Paracetamol, Ibuprofen, Diclofenac आदि दर्द और सूजन को कम करने के लिए शरीर में मौजूद प्रोस्टाग्लैंडिन नामक केमिकल के निर्माण को रोकते हैं. ये केमिकल दर्द का अहसास कराते हैं, इसलिए जब इनका स्तर घटता है तो हमें राहत मिलती है.

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क्यों होनी चाहिए सावधानी?

लिवर पर असर 

Paracetamol का अधिक मात्रा में सेवन लिवर के लिए जहरीला साबित हो सकता है. यह लिवर सेल्स को डैमेज कर सकता है और लंबे समय तक सेवन करने से हेपेटाइटिस या लिवर फेलियर की नौबत आ सकती है.

किडनी पर असर 

NSAIDs (जैसे Ibuprofen, Diclofenac) किडनी की रक्त आपूर्ति को प्रभावित करते हैं. यह धीरे-धीरे किडनी फंक्शन को कमजोर कर सकते हैं और क्रॉनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकते हैं.

ब्लड प्रेशर और हार्ट प्रॉब्लम्स

लगातार NSAIDs लेने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ता है, खासकर बुजुर्गों में.

कब हो जाएं सतर्क?

अगर आप हर छोटी परेशानी पर गोली खा रहे हैं

लंबे समय से पेन किलर का लगातार सेवन कर रहे हैं

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ले रहे हैं

दर्द से राहत के सुरक्षित उपाय

गुनगुनी सिकाई या हॉट वॉटर बैग

हल्का व्यायाम या योग

पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन

पेन किलर एक जरूरी और फायदेमंद दवा है. लेकिन जरूरत से ज्यादा या बार-बार सेवन करने से यह राहत नहीं, बल्कि शरीर के लिए धीमा ज़हर बन सकता है. इसलिए अगली बार जब दर्द हो, तो सबसे पहले खुद से पूछिए, क्या वाकई मुझे अभी ये दवा चाहिए?

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क

फैटी लिवर… एक साइलेंट किलर, सिरोसिस से लेकर कैंसर तक का खतरा; जानें कब हो जाएं सतर्क



<p style="text-align: justify;">उदासीन लाइफस्टाइल, खराब खानपान और मोटापे के चलते फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. मेडिकल भाषा में इसे हेपेटिक स्टेटोसिस कहा जाता है. इसकी अनदेखी ​गंभीर ​स्थिति पैदा कर सकती है. जिससे लिवर डैमेज, फ्राइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर फेल्योर का रिस्क बढ़ सकता है. आइए जानते हैं कि ये बीमारी किस तरह खतरनाक है. कब इसको लेकर सतर्क हो जाना चाहिए…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पहले ये समझिए फैटी लिवर क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फैटी लिवर वह ​​स्थिति होती है, जब शराब के सेवन के बिना अन्य कारणों से लिवर में एक्स्ट्रा फैट जमा होना शुरू हो जाता है. इसे भी दो तरह से बांटा जाता है. पहला नाॅन एल्कोहलिक फैटी लिवर. इस ​स्थिति में लिवर फैटी हो जाता है. इस दाैरान अ​धिक इंफ्लेमेशन और लिवर सेल डैमेज की प्राॅब्लम नहीं देखने को मिलती. वहीं दूसरी ​स्थिति को नाॅन एल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (एनएएसएच) कहा जाता है. इसमें फैटी लिवर में इंफ्लेमेशन और लिवर सेल्स डैमेज होना शुरू हो जाते हैं. ये सि​रोसिस और लिवर कैंसर की वजह भी बन सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>​खतरा कितना बड़ा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">​एक रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में करीब एक बिलियन लोग इस प्राॅब्लम से प्रभावित हैं. वहीं भारत में 18-20 परसेंट की आबादी अ​धिक वजह से पीड़ित है. सामान्य आबादी का 9 से 32 परसेंट फैटी लिवर की प्राॅब्लम से जूझ रही है. शुरुआत में इस प्राॅब्लम के कोई सिम्पटम्स बाॅडी में नजर नहीं आते. ऐसे में लोग इस दिक्कत को लेकर अवेयर नहीं रहते. लेकिन लगातार फैटी लिवर की ​स्थिति इंफ्लेमेशन और फाइब्रोसिस की ओर ले जाती है. जिससे लिवर फंक्शन भी प्रभावित होता है. कई केसेज में लक्षण तब सामने आते हैं जब लिवर फंक्शन 20 परसेंट या उससे कम हो जाता है. सिम्पटम्स के ताैर पर थकान, &nbsp;शरीर के हिस्सों पर सूजन, पी​लिया, पेट में सूजन आदि की दिक्कत देखने को मिल सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फैटी लिवर कब खतरनाक हो जाता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फैटी लीवर की ​स्थिति जब एनएएसएच की ओर बढ़ती है, तो खतरनाक हो जाती है. इस ​स्थिति में इंफ्लेमेशन के साथ लिवर को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है. इसके चलते फाइब्रोसिस और सिरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है. डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों में ये ​स्थिति और गंभीर हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस तरह करें बचाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फैटी लिवर डिजीज शुरुआती स्टेज में रिवर्सिबल की जा सकती है. इसके लिए लाइफस्टाइल में चेंज कर ऐसा किया जा सकता है. आइए जानते ऐसे ही कुछ उपाय:-</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>वेट लाॅस:</strong> शरीर का वेट 10 परसेंट कम करने से भी बाॅडी के हेपेटिक फैट और इंफ्लेमेशन में काफी कमी आ सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइट चेंज:</strong> खाने में फल, सब्जी, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन का सेवन करें. जबकि सैचुरेटेड फैट और शुगर से दूरी बनाएं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>रेगुलर एक्सरसाइज:</strong> हेपेटिक फैट कम करने के साथ मोटाबाॅलिक फंक्शन इंप्रूव करने में मदद मिलती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>को-माॅर्बि​डिटी:</strong> डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हाइपरलिपिडिमिया जैसी ​स्थिति को कंट्रोल कर डिजीज के बढ़ने के रिस्क को कम किया जा सकता है.</li>
</ul>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/covid-19-new-variant-nimbus-cuts-the-throat-such-as-razer-blade-2966984">ब्लेड की तरह गला काट देता है कोरोना का नया वेरिएंट, इस देश में मचा रहा तबाही</a><br /></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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पानी में क्यों सिकुड़ती है हाथों और पैरों की स्किन, हमारी सेहत के बारे में क्या पता चलता है?

पानी में क्यों सिकुड़ती है हाथों और पैरों की स्किन, हमारी सेहत के बारे में क्या पता चलता है?


Skin Shrinking in Water: जब भी हम लंबे समय तक पानी में हाथ या पैर डालकर बैठते हैं. जैसे नहाते समय या स्विमिंग करते हुए तो अक्सर देखा गया है कि उंगलियों की स्किन सिकुड़कर झुर्रियों जैसी हो जाती है. बचपन में हमने इसे मजेदार समझा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि हमारी नसों और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ एक अहम संकेत भी हो सकता है?

पानी में क्यों सिकुड़ती है स्किन ?

हमारी उंगलियों की त्वचा पर एक पतली परत होती है जिसे एपिडर्मिस कहते हैं. जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं तो यह परत पानी को सोख लेती है और फूल जाती है. लेकिन खास बात ये है कि ये झुर्रियां सिर्फ पानी के कारण नहीं बनतीं. वैज्ञानिक रिसर्च बताती हैं कि यह प्रक्रिया हमारी नर्व सिस्टम से जुड़ी होती है.स्किन का सिकुड़ना एक न्यूरोलॉजिकल रिफ्लेक्स है. जिसे हमारे शरीर के ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम द्वारा कंट्रोल किया जाता है. यह प्रक्रिया तब होती है जब नर्व्स पानी में आने के बाद खून की नलियों को थोड़ा सिकोड़ देती हैं, जिससे स्किन सिकुड़ जाती है. 

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किन बीमारियों से हो सकता है संबंध?

टाइप 2 मधुमेह 

मधुमेह शरीर की नर्व्स को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे त्वचा का यह रिफ्लेक्स कमज़ोर या असामान्य हो जाता है. अगर पानी में लंबे समय तक रहने के बावजूद आपकी स्किन में झुर्रियां नहीं आतीं, तो यह डायबिटिक न्यूरोपैथी का लक्षण हो सकता है.

सिस्टिक फाइब्रोसिस

यह एक जेनेटिक बीमारी है जो शरीर में म्यूकस और पसीने की ग्रंथियों को प्रभावित करती है. रिसर्च में पाया गया है कि सिस्टिक फाइब्रोसिस से ग्रसित लोगों की उंगलियां सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा जल्दी और गहराई तक सिकुड़ जाती हैं.

नर्व इंजरी 

किसी हादसे या बीमारी के कारण अगर आपकी हाथ या पैर की नसों को नुकसान हुआ है तो पानी में स्किन का सिकुड़ना सामान्य नहीं होगा. 

हृदय संबंधी समस्याएं 

दिल से जुड़ी बीमारियां भी रक्त संचार को प्रभावित करती हैं. रक्त प्रवाह में रुकावट होने से भी त्वचा का यह रिफ्लेक्स असामान्य हो सकता है. 

जिसे हम बचपन से खेल समझते रहे, वो दरअसल हमारे शरीर की गहराई से जुड़ी एक चेतावनी हो सकती है. पानी में स्किन का सिकुड़ना सिर्फ एक रिफ्लेक्स नहीं, बल्कि आपके स्वास्थ्य का आईना है. इसे हल्के में न लें, क्योंकि शरीर हर चीज का संकेत देता है, बस हमें उसे समझना आना चाहिए.

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