किन बीमारियों से जूझ रहे बॉलीवुड के ‘भाईजान, जानें ये बीमारियां कितनी खतरनाक?

किन बीमारियों से जूझ रहे बॉलीवुड के ‘भाईजान, जानें ये बीमारियां कितनी खतरनाक?



<p style="text-align: justify;">बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने हाल ही में अपनी सेहत को लेकर बड़ा खुलासा किया. एक टीवी शो में उन्होंने बताया कि वह मल्टीपल सीरियस कंडीशन से जूझ रहे हैं. ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, ब्रेन एन्यूरिज्म और एवी मालफॉर्मेशन जैसी बीमारियों का सामना कर रहे हैं. एक्टर की हेल्थ को लेकर उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ना लाजिमी है. ऐसे में आ​खिर एक्टर की ये बीमारियां क्या हैं और ये कितनी खतरनाक हैं? आइए इस बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ब्रेन एन्यूरिज्म</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ब्रेन की नसों में गुब्बारे की तरह के उभार की समस्या को ब्रेन एन्यूरिज्म, सेरेब्रल एन्यूरिज्म या इंट्राक्रानियल एन्यूरिज्म कहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्रेन एन्यूरिज्म के कारण ब्रेन की नसों के कमजोर हिस्से पर पड़ने वाले ब्लड के दबाव से ऐसा होता है. कभी-कभी ब्रेन एन्यूरिज्म का आकार बढ़ जाता है. ऐसे में कई बार इनसे ब्लड रिसने लगता है, जिसके कारण ब्रेन में इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है. इस ​स्थिति ब्रेन हेमरेज कहते हैं. आमतौर पर ब्रेन एन्यूरिज्म का पता किसी अन्य सेहत संबंधी जांच के दौरान लगता है. ब्रेन एन्यूरिज्म के दाैरान तेज सिर दर्द, चक्कर, उल्टी, गर्दन में अकड़न, लाइट सहने की क्षमता में कमी, आंखों से धुंधला दिखना, मिर्गी के दौरे, आंखों की पलकों का लटकना, बेहोशी आदि की समस्या देखने को मिल सकती है. ऐसे में डाॅक्टर से कंसल्ट करना उचित होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस बीमारी को जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि ट्राइजेमिनल नर्व क्या होती है? ये नर्व ह्यूमन बाॅडी में चेहरे और दिगाम के बीच संदेश वाहक के रूप में काम करती है. यानी चेहरे से लेकर दिमाग तक में दर्द, किसी के स्पर्श और टेंपरेचर से संबंधित संवेदनाओं को भेजती है. ट्राइजेमिनल नर्व पर प्रेशर पड़ता है या &nbsp;फिर ये डैमेज होना शुरू होती है तो ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की ​स्थिति बनती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस बीमारी की वजह से काफी ज्यादा दर्द होता है. दर्द इस कदर असहनीय होता है कि दांत तक साफ करने में तकलीफ होती है. चेहरे की स्किन इतनी ज्यादा सेंसटिव हो जाती है कि छूने से भी करंट जैसा झटका लगने लगता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया एक तरह की क्राॅनिक पेन डिजीज है. आ​खिर में बीमारी इंसान के शरीर में क्या होती है? इसकी वजह फिलहाल पता नहीं लग पाई है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एवी मालफॉर्मेशन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ब्रेन आर्टियोवीनस मालफॉर्मेशन (एवीएम) असामान्य रक्त वाहिकाओं का एक समूह है. इस ​स्थिति में आर्टरीज सीधे नसों से जुड़ जाती हैं. सामान्य छोटी को​शिकाओं (कैपिलरीज) के नेटवर्क को छोड़ देती हैं. इससे ब्रेन में ब्लड और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन प्रभावित होता है. ब्रेन आर्टियोवीनस मालफॉर्मेशन (एवीएम) की ​स्थिति में दिमाग में ब्लीडिंग होने का रिस्क रहता है. सिर में तेज दर्द हो सकता है. एवीएम के इलाज के लिए कई बार सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ती है.</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/covid-19-new-variant-nimbus-cuts-the-throat-such-as-razer-blade-2966984">ब्लेड की तरह गला काट देता है कोरोना का नया वेरिएंट, इस देश में मचा रहा तबाही</a><br /></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

ब्लेड की तरह गला काट देता है कोरोना का नया वेरिएंट, इस देश में मचा रहा तबाही

ब्लेड की तरह गला काट देता है कोरोना का नया वेरिएंट, इस देश में मचा रहा तबाही


कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. देश में संक्रमित मिलने के साथ कोविड 19 से माैतें भी हो रही हैं. वहीं, अब अमेरिका में सामने आए कोरोना के नए वेरिएंट ने चिंता और बढ़ा दी है. ये वेरिएंट तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. एनबी.1.8.1 नाम के इस वायरस को निम्बस कहा जा रहा है. ये वेरिएंट सीधे गले पर अटैक करता है, जिससे इसकी तुलना रेजर ब्लेड से की जा रही है. आइए जानते हैं कि ये वायरस किस तरह खतरनाक है?

कितना खतरनाक है यह वेरिएंट?

कोरोना वायरस लगातार म्यूटेट कर रहा है. इसके नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं. अब नया वेरिएंट निम्बस है. अमेरिका में तेजी से इसके मामले सामने आ रहे हैं. जून के पहले दो सप्ताह में कोरोना संक्रमण के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें से करीब 37 प्रतिशत केस इसी वेरिएंट के हैं. यूएस के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक कोविड के नए वेरिएंट निम्बस को रेजर ब्लेड थ्रोट कहा जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि संक्रमित होने पर गले का बुरा हाल हो जाता है. गले में तेज दर्द होता है. ऐसा महसूस होता है जैसे रेजर का ब्लेड गले में फंस गया हो. 

निंबस के लक्षण

  • गले में तेज दर्द होना
  • खाना निगलने या पानी पीने में भी ​कठिनाई
  • बोलने में भी परेशानी महसूस होना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • बुखार
  • सीने में जकड़न 

कब बिगड़ सकती है ​स्थिति?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अधिकतर मामलों में निम्बस वेरिएंट के हल्के लक्षण ही दिखते हैं. लेकिन ​अगर ये ​स्थिति बनी रहती है तो ध्यान देने की जरूरत है. गले में दर्द के साथ सांस लेने में दिक्कत हो या सीने में जकड़न, तेज बुखार हो तो डाॅक्टर से कंसल्ट करना उचित होता है.

ऐसे मिल सकती है राहत

  • असहनीय दर्द होने पर पैरासिटामोल या आइबूप्रोफेन जैसी दवाएं ले सकते हैं. इससे सूजन और दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है.
  • गर्म नमक के पानी से गरारे करें. इससे गले में राहत मिलती है.
  • मेंथॉल या बेंजोकैन वाले चूसने वाले प्रोडक्ट्स गले को सुन्न कर देते हैं और थोड़ी देर के लिए राहत मिलती है.
  • चाय, सूप या गर्म पानी पीने से भी गले में राहत मिल सकती है.
  • ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करने से कमरे में नमी रहती है और गला ड्राई नहीं होता है.

ऐसे करें बचाव

  • बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग विशेष ध्यान रखें.
  • भीड़भाड़ या बंद जगहों में मास्क जरूर पहनें.
  • हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं.
  • कोई भी लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी न करें.

ये भी पढ़ें: बरसात में इन 5 बीमारियों का रहता है खतरा, कहीं आप तो नहीं है इसके शिकार

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बरसात में इन 5 बीमारियों का रहता है खतरा, कहीं आप तो नहीं है इसके शिकार

बरसात में इन 5 बीमारियों का रहता है खतरा, कहीं आप तो नहीं है इसके शिकार


Common Monsoon Diseases : मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है. बरसात के मौसम में नमी, गंदगी, और जलजमाव की वजह से वायरस, बैक्टीरिया और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. इन कारणों से कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. अगर समय रहते सतर्क न हुआ जाए, तो ये बीमारियाँ गंभीर रूप भी ले सकती हैं. आइए जानें बरसात में होने वाली 5 आम बीमारियों के बारे में और जांचें कहीं आप तो इसके शिकार नहीं हो रहे-

डेंगू होने का खतरा

बरसात में पानी जमा होने से मच्छर तेजी से पनपते हैं, खासकर एडीज एजिप्टी मच्छर जो डेंगू फैलाता है. डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, स्किन पर लाल चकत्ते और डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, इसलिए इसे हल्के में न लें. इससे बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें. मच्छरदानी का प्रयोग करें और फुल बाजू के कपड़े पहनें.

मलेरिया की बीमारी

यह रोग एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है, जो संक्रमित पानी में पैदा होता है. मलेरिया से ग्रसित लोगों को तेज  बुखार के साथ कंपकंपी,  पसीना आना, सिरदर्द और थकान और उल्टी या मितली जैसे लक्षण दिखते हैं. इससे बचाव के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें. घर में मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं. शाम को बाहर न निकलें या सुरक्षा के साथ निकलें.

ये भी पढ़ें – रोजाना सुबह 1 चम्मच शहद के साथ खाएं काली मिर्च, इन 5 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी

टाइफाइड की परेशानी

यह दूषित पानी और भोजन से होने वाला संक्रमण है, जो Salmonella Typhi बैक्टीरिया से होता है. इस स्थिति में लंबे समय तक हल्का या तेज बुखार, कमजोरी और भूख न लगना, पेट दर्द और दस्त या कब्ज की परेशानी हो सकती है. इससे बचाव के लिए उबला हुआ पानी पिएं, बाहर का खाना खाने से बचें और हाथों की सफाई का ध्यान रखें.

वायरल फीवर

मानसून में तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से वायरल इंफेक्शन आम हो जाता है. हल्का या तेज बुखार, गले में खराश, सिरदर्द और बदन दर्द, थकावट जैसे लक्षण दिखते हैं. भीगने से बचें और अगर भीग जाएं तो तुरंत कपड़े बदलें, गर्म खाना और हल्का सुपाच्य भोजन लें और  पर्याप्त आराम करें.

फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection)

बरसात में शरीर में नमी बनी रहती है जिससे त्वचा संबंधी फंगल संक्रमण बढ़ जाते हैं.  त्वचा पर लाल चकत्ते या खुजली,  दाद, खाज, खुजली, पैरों की उंगलियों में फंगल ग्रोथ इत्यादि लक्षण दिखते हैं. शरीर को सूखा रखें, ढीले और सूती कपड़े पहनें और एंटीफंगल पाउडर या क्रीम का उपयोग करें.

बरसात का मौसम सुहावना जरूर होता है, लेकिन यह सेहत के लिए कई चुनौतियां भी लाता है. यदि आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण से पीड़ित हैं, तो लापरवाही न बरतें और डॉक्टर से संपर्क करें. सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता बरतकर आप इन बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं. 

ये भी पढ़ें – चेहरे पर सर्जरी को लेकर ट्रोल हो रहीं मौनी रॉय, जानें ऐसा करने पर क्या हो सकते हैं नुकसान

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

रोजाना सुबह 1 चम्मच शहद के साथ खाएं काली मिर्च, इन 5 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी

रोजाना सुबह 1 चम्मच शहद के साथ खाएं काली मिर्च, इन 5 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी


Honey and Black Pepper : शहद और काली मिर्च, दोनों ही आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. यदि इन्हें रोज़ सुबह खाली पेट एक साथ सेवन किया जाए, तो ये शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं. यह घरेलू नुस्खा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पाचन, सर्दी-जुकाम, वजन घटाने और अन्य समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है. आइए जानते हैं शहद और काली मिर्च के फायदे क्या हैं?

सर्दी-जुकाम और खांसी से राहत

शहद एक नेचुरल एंटीबैक्टीरियल और सूदिंग एजेंट है, जबकि काली मिर्च में पाइपरिन नामक तत्व होता है जो श्वसन तंत्र को खोलता है और संक्रमण से लड़ता है. सुबह-सुबह इसका सेवन करने से गले की खराश, बलगम और खांसी में राहत मिलती है. यह सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक होता है और बार-बार होने वाली समस्या कम हो जाती है. यह मिश्रण बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए फायदेमंद होता है.

पाचन होगा दुरुस्त

काली मिर्च पेट में एंजाइम का स्राव बढ़ाकर पाचन क्रिया को तेज करती है और शहद आंतों की सफाई में मदद करता है. यह कॉम्बिनेशन खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा है जो गैस, अपच, कब्ज या एसिडिटी से परेशान रहते हैं. इसके साथ ही यह पेट को हल्का बनाए रखता है और भूख भी नियंत्रित करता है.

वजन घटाने में है सहायक

काली मिर्च मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और फैट को बर्न करने में मदद करती है. शहद में प्राकृतिक शुगर होती है, जो शरीर को ऊर्जा देती है. रोजाना सुबह इसका सेवन करने से शरीर में जमा चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. पेट की चर्बी घटाने में यह खासतौर पर असरदार है.

इम्युनिटी को करता है मजबूत

शहद और काली मिर्च दोनों ही एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे मौसमी बीमारियां, संक्रमण और एलर्जी से बचाव हो सकता है. यह शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा मिलती है.

जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत

काली मिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन और दर्द को कम करते हैं. शहद के साथ इसका सेवन करने से गठिया, जोड़ों की अकड़न और दर्द में राहत दि सकता है. यह शरीर को अंदर से गर्मी मिलती है जो दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है.

कैसे करें सेवन?

सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद में एक चुटकी ताज़ी पिसी काली मिर्च मिलाएं. इसे बिना पानी के धीरे-धीरे चाटें. नियमित सेवन से 1-2 हफ्तों में ही फर्क महसूस होने लगेगा.

ये भी पढ़ें – चेहरे पर सर्जरी को लेकर ट्रोल हो रहीं मौनी रॉय, जानें ऐसा करने पर क्या हो सकते हैं नुकसान

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

चिलचिलाती गर्मी से हैं परेशान? इन 6 स्वादिष्ट ड्रिंक से तुरंत खुद को करें शांत

चिलचिलाती गर्मी से हैं परेशान? इन 6 स्वादिष्ट ड्रिंक से तुरंत खुद को करें शांत


बेल का शरबत: सुबह खाली पेट या दोपहर के खाने से पहले बेल का शरबत पिया जा सकता है. लेकिन इसे सिर्फ 1 गिलास पीना चाहिए. ये पेट की जलन, एसिडिटी और कब्ज में राहत देता है.

आम का जूस: आम का जूस गर्मियों में काफी राहत देता है. ये सभी को स्वादिष्ट भी लगता है. लेकिन इसे 1 गिलास से ज्यादा नहीं पीना चाहिए और दिन के वक्त इसे पी सकते हैं.

आम का जूस: आम का जूस गर्मियों में काफी राहत देता है. ये सभी को स्वादिष्ट भी लगता है. लेकिन इसे 1 गिलास से ज्यादा नहीं पीना चाहिए और दिन के वक्त इसे पी सकते हैं.

नारियल पानी: सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच नारियल पानी पी सकते हैं. 1 नारियल का पानी आपके लिए काफी है. ये शरीर को हीट स्ट्रोक से बचाता है.

नारियल पानी: सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच नारियल पानी पी सकते हैं. 1 नारियल का पानी आपके लिए काफी है. ये शरीर को हीट स्ट्रोक से बचाता है.

खीरे का जूस: जैसे AC ठंडक देता है, वैसे ही खीरे का जूस शरीर को ठंडा करता है. दिन का खाना खाने से 30 मिनट पहले 1 ग्लास पी सकते हैं. ये त्वचा की चमक बढ़ाता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता.

खीरे का जूस: जैसे AC ठंडक देता है, वैसे ही खीरे का जूस शरीर को ठंडा करता है. दिन का खाना खाने से 30 मिनट पहले 1 ग्लास पी सकते हैं. ये त्वचा की चमक बढ़ाता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता.

तरबूज का जूस: इसे आप दोपहर 12 से 3 बजे के बीच पी सकते हैं. इसका 1 ग्लास आपको तरोताजा कर देगा. साथ ही शरीर को ठंडा रखेगा और डिहाइड्रेशन से बचाएगा.

तरबूज का जूस: इसे आप दोपहर 12 से 3 बजे के बीच पी सकते हैं. इसका 1 ग्लास आपको तरोताजा कर देगा. साथ ही शरीर को ठंडा रखेगा और डिहाइड्रेशन से बचाएगा.

आम पन्ना: झुलसती गर्मी में स्वाद और सेहत का मसाला आम पन्ना शरीर को ठंडा करेगा. दोपहर के खाने से 30 मिनट पहले इसे पी सकते हैं. इसे 1  छोटा गिलास पी सकते हैं. ये आपको लू से बचाता है और पाचन ठीक रखता है.

आम पन्ना: झुलसती गर्मी में स्वाद और सेहत का मसाला आम पन्ना शरीर को ठंडा करेगा. दोपहर के खाने से 30 मिनट पहले इसे पी सकते हैं. इसे 1 छोटा गिलास पी सकते हैं. ये आपको लू से बचाता है और पाचन ठीक रखता है.

Published at : 22 Jun 2025 03:34 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

हेल्थ वेब स्टोरीज



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp