10500 साल पहले मर चुकी महिला का चेहरा बनाया, वैज्ञानिकों ने कैसे किया यह ‘जादू’?

10500 साल पहले मर चुकी महिला का चेहरा बनाया, वैज्ञानिकों ने कैसे किया यह ‘जादू’?


क्या हजारों साल पहले मृत किसी व्य​क्ति का चेहरा दोबारा बनाया जा सकता है? आपको ये अजीब लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने ये कमाल कर दिखाया है. गेन्ट विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स ने एक ऐसी ही महिला का चेहरा बनाया है, जिसकी माैत करीब 10500 साल पहले हो चुकी है. वैज्ञानिकों को इस महिला के अवशेष मिले. इससे डीएनए हासिल कर वैज्ञानिकों ने ये कारनामा कर दिखाया. आ​खिर किस तरह ये चेहरा बनाया गया, आइए जानते हैं…

जिसका चेहरा बनाया, वह महिला काैन थी?

ऐसे सवाल उठता है कि जिस महिला का चेहरा बनाया गया है, वह काैन थी. बे​ल्जियम की ये महिला करीब 10500 साल पहले मीयूज घाटी में रहती थी. 1988 में इस मेसोलिथिक महिला के अवशेष मार्गोक्स गुफा में पाए गए, जो डिनैंट के करीब है. वह पश्चिमी यूरोप के ​एक ​शिकारी समूह से ताल्लुक रखती थी. इसी तरह का समूह ग्रेट ब्रिटेन में चेडर मैन के रूप में लोकप्रिय था. वैज्ञानिकों ने न सिर्फ महिला का चेहरा बनाया, ब​ल्कि प्राचीन समय में महिला की लाइफस्टाइल किस तरह की थी, किस तरह के आभूषण पहनती ​थी, इस पर भी प्रकाश डाला है.

डीएनए स्टडी से सामने आई जानकारी

डीएनए स्टडी से पता चला है कि मार्गो महिला की आंखें नीली थीं, बिल्कुल चेडर मैन की तरह. हालांकि, पश्चिमी यूरोप में अब तक जांचे गए अधिकांश अन्य मेसोलिथिक व्यक्तियों की तुलना में उसका रंग कुछ हल्का था. रिसर्चर्स की मानें तो ये छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी थी. रिसर्चर्स की मानें तो महिला के चेहरे और रहने की स्थितियों का पुनर्निर्माण शारीरिक, आनुवंशिक और पुरातात्विक डेटा के मिश्रण से संभव हुआ.

इस तरह नजर आया महिला का चेहरा

रिसर्चर्स ने बताया कि महिला की खोपड़ी से अच्छी गुणवत्ता का डीएनए निकाला गया, जिससे विस्तृत पुनर्निर्माण संभव हो सका. रिसर्चर्स की मानें तो महिला की उम्र करीब 35 से 60 वर्ष की थी. इससे प्राचीन समय में महिला के रहन-सहन के साथ महिला के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकी. महिला के आभूषण और टैटू जैसी कुछ विशेषताएं रिवर मीयूज बेसिन में पिछली खुदाई से इकट्ठा किए गए पुरातात्विक डेटा पर आधारित हैं. इससे रिसर्चर्स को महिला के दैनिक जीवन की तस्वीर बनाने में मदद मिली. रिसर्चर्स ने जो महिला का चेहरा बनाया है, उसमें उसका रंग, बाल और आंखें सभी प्राचीन डीएनए पर आधारित हैं.

हर पल को किया पुनर्जीवित

इसके बाद रिसर्चर्स की क्रिएटिम टीम ने महिला के चेहरे को लास्ट टच दिया. क्रि​एटिव टीम ने पुरातात्विक साक्ष्य जैसे उपकरण, शेल्स, पेंट और शिविर के अवशेष का भी उपयोग किया. इससे महिला का चेहरा और उसकी दुनिया पूरी तरह से जीवंत हो गई. शिकार के तरीकों से लेकर परिवहन तक, पौधों से लेकर जानवरों तक, हर छोटी-छोटी जानकारी का इसमें ध्यान रखा गया. जिससे महिला का चेहरा एकदम जीवंत होता नजर आया.

ये भी पढ़ें: कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अलार्म लगाने के बाद क्या आप भी करते हैं यह गलती? माधुरी दीक्षित के पति ने बताए साइड इफेक्ट्स

अलार्म लगाने के बाद क्या आप भी करते हैं यह गलती? माधुरी दीक्षित के पति ने बताए साइड इफेक्ट्स


ज्यादातर लोग सुबह अलार्म बजते ही उठने की जगह स्नूज बटन दबाकर कुछ और मिनट सोने की कोशिश करते हैं. यह आदत बहुत आम है और शुरू में ये कुछ पल के लिए सुकून देने वाला लग सकता है, लेकिन शायद आप नहीं जानते कि इसका असर आपके शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ सकता है. नतीजतन आप दिनभर थकान महसूस करते हैं और चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है. ऐसे में जरूरी है कि इस आदत को हल्के में न लिया जाए और नींद के प्रति गंभीरता से सोचा जाए. आपको बता दें कि इसके पीछे छिपे नुकसान के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. श्रीराम नेने की चेतावनी

बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के पति और मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट (हार्ट स्पेशलिस्ट) डॉ. श्रीराम नेने ने इस आम आदत को लेकर बड़ा खुलासा किया. इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके उन्होंने बताया कि अलार्म को बार-बार स्नूज करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. यह न केवल आपकी नींद के नियमित चक्र को बिगाड़ता है, बल्कि दिमाग पर बार-बार झटका जैसा असर डालता है. इससे मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ सकती है.

स्लीप इनर्शिया हो सकती है और भी गहरी

डॉ. श्रीराम नेने के मुताबिक, सुबह अलार्म को बार-बार स्नूज करने की आदत हमारी नींद को कई बार बीच में तोड़ देती है. इसका नतीजा यह होता है कि ‘स्लीप इनर्शिया’ यानी नींद खुलने के बाद जो थकावट और सुस्ती महसूस होती है, वह और भी ज्यादा गहरी हो जाती है. ऐसे में न सिर्फ उठने में परेशानी होती है, बल्कि दिनभर शरीर भारी लगता है और किसी भी काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है.

स्नूज बटन है दिमाग के लिए झटका

डॉ. नेने ने बताया कि जब आप अलार्म बंद करने के बाद दोबारा सोने की कोशिश करते हैं तो शरीर दोबारा गहरी नींद में जाने लगता है. हालांकि, कुछ ही मिनटों में जब अलार्म फिर से बजता है तो आपकी नींद एक झटके में टूट जाती है. ये बार-बार होने वाली रुकावटें दिमाग पर दबाव डालती हैं और लंबे समय तक चलने पर दिल की सेहत पर भी बुरा असर डाल सकती हैं.

डॉ. नेने दी यह सलाह

डॉ. श्रीराम नेने का कहना है कि अच्छी नींद और सही समय पर जागना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. बार-बार स्नूज करने से नींद का चक्र टूटता है, जिससे दिमाग और दिल पर बुरा असर पड़ता है. उनकी सलाह है कि एक ही अलार्म लगाएं. उसे स्नूज न करें. समय पर सोएं और सुबह उठकर हल्का व्यायाम करें. अलार्म को दूर रखें, जिससे उसे बंद करने के लिए आपको बिस्तर से उठना ही पड़े. इससे बार-बार स्नूज करने की आदत भी टूटेगी और सुबह जागने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी. 

ये भी पढ़ें: कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अब दो इंजेक्शन से खत्म हो जाएगा HIV? 99.9 पर्सेंट कामयाब होने का दावा

अब दो इंजेक्शन से खत्म हो जाएगा HIV? 99.9 पर्सेंट कामयाब होने का दावा



<p style="text-align: justify;">एचआईवी की रोकथाम में मेडिकल साइंस को बड़ी कामयाबी मिली है. अमेरिकी में एक ऐसे इंजेक्शन को मंजूरी दी गई, जिसे साल में दो बार लगवाने से इस वायरस से बचाव किया जा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एचआईवी के ​​खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं. आइए जानते हैं ये इंजेक्शन क्या है और एचआईवी के ​खिलाफ लड़ाई में कितना कारगर है…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका में दी गई अनुमति</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिका के एफडीए विभाग ने गिलियड साइंसेज के इंजेक्शन लेनाकापाविर को अनुमति दी है. एचआईवी की रोकथाम के लिए ये इंजेक्शन साल में दोबार लगाया जाएगा. ये प्रि‑एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस या प्रेप की ​स्थिति में दिया जाता है. ये पहला ऐसा इंजेक्शन है, जिसकी हर छह महीने में एक डोज से एचआईवी संक्रमण से बचाव किया जा सकता है. ट्रायल के दाैरान संक्रमण से बचाने में ये इंजेक्शन 99.9 परसेंट तक असरदार साबित हुआ था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस तरह किए गए ट्रायल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी की ओर से दो बार क्लीनिकल ट्रायल की गईं. इसमें पहले ट्रायल में दो हजार से अ​​धिक महिलाओं को शामिल किया गया. महिलाओं पर इस दवा के क्लीनिक ट्रायल के 100 परसेंट असरदार नतीजे सामने आए. वहीं दूसरे ट्रायल में पुरुषों को शामिल किया गया. इनमें सिर्फ दो में इंफेक्शन पाया गया. 99.9 परसेंट ये दवा एचआईवी से बचाव में कारगर साबित हुई.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब तक क्या ​स्थिति थी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एचआईवी से बचाव के लिए क्या अब तक कोई दवा नहीं थी? ऐसा नहीं है, दवा थी. लेकिन वर्तमान में एचआईवी से बचने के लिए रोजाना गोलियां या हर दूसरे महीने इंजेक्शन लेने की आवश्यकता होती थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कीमत हो सकती हैं पहुंच से बाहर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एचआईवी की रोकथाम की नई दवा इंजेक्शन लेनाकापाविर काफी महंगी है. रिपोर्ट की मानें तो इसकी साल की डोज 28 हजार डाॅलर से अ​धिक की है. ऐसे में ये एक आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो लेनाकापाविर मेडिकल फील्ड में मील का पत्थर साबित हो सकती है. इसकी अत्यधिक प्रभावशीलता से एचआईवी रोकथाम के तरीके में क्रांति आ सकती है. लेकिन ये जरूरी है कि यह सस्ती दर में लोगों को उपलब्ध हो. तभी इसका सही फायदा मिल सकेगा.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एचआईवी से इस तरह भी करें बचाव</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">नियमित तौर पर एचआईवी टेस्ट करवाएं</li>
<li style="text-align: justify;">फिजिकल रिलेशन से पहले लेटेक्स कंडोम का यूज करें</li>
<li style="text-align: justify;">सेक्शुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों का टेस्ट और इलाज करवाएं</li>
<li style="text-align: justify;">सैलून में नया ब्लेड ही इस्तेमाल करने को कहें</li>
<li style="text-align: justify;">इंजेक्शन लगवाते या ब्लड टेस्ट सैंपल देते समय ध्यान दें कि नया पैकेट खोलकर ही सीरिंज निकाली जाए. स्टेरेलाइज्ड सिरिंज इस्तेमाल करने से बचें.</li>
<li style="text-align: justify;">टैटू करवाते समय न्यू नीडल ही यूज करवाएं</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>एचआईवी कैसे फैलता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित खून या इंजेक्शन से एचआईवी की चपेट में आ सकते हैं. एचआईवी संक्रमित मां से गर्भ में और ब्रेस्ट फीडिंग के दाैरान बच्चे को संक्रमण हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/people-feel-electric-shocks-because-of-vitamin-b12-deficiency-2966082">कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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धनिये के बीज चबाने से क्या होता है फायदा, जानें किन लोगों के लिए है ये बेस्ट

धनिये के बीज चबाने से क्या होता है फायदा, जानें किन लोगों के लिए है ये बेस्ट


भारतीय रसोई औषधीय गुणों का खजाना होती है. इसमें पाए जाने वाले तरह-तरह के मसाले खाने का टेस्ट बढ़ाने के साथ सेहत को भी कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. ऐसा ही एक मसाला है धनिया. किचन में इसके बिना शायद ही कोई डिश तैयार होती हो. इसका अ​धिकतर इस्तेमाल पाउडर के रूप में किया जाता है, लेकिन इसके बीज भी गुणों से भरपूर होते हैं. आइए जानते हैं कि धनिये के बीज किस तरह शरीर को फायदा पहुंचा सकते हैं…

डायबिटीज में भी असरदार

डायबिटीज के केस तेजी से बढ़ रहे हैं. इस बीमारी को सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए अक्सर रेगुलर दवाइयां खानी पड़ती हैं. लेकिन धनिये के बीज डायबिटीज कंट्रोल करने में सपोर्ट कर सकते हैं. एक स्टडी के अनुसार धनिये के बीजों के अर्क में कुछ ऐसे कंपाउंड होते हैं, जो एंटी-हाइपरग्लाइकेमिक, इंसुलिन डिस्चार्जिंग और इंसुलिन की गति को इंप्रूव कर सकते हैं. इससे बाॅडी में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

डाइजेशन सिस्टम होता है इंप्रूव

लाइफस्टाइल चेंज की वजह से डाइजेशन सबसे बड़ी प्राॅब्लम बन गया है. धनिये के बीज में एंटी-ऑक्सीडेंट और डाइटरी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. जिससे ये लिवर फंक्शन को सपोर्ट कर डाइजे​स्टिव सिस्टम को इंप्रूव करने में मदद करते हैं. अगर डाइजेशन की प्राॅब्लम से जूझ रहे हैं तो ये काफी लाभदायक साबित हो सकते हैं.

​स्किन प्राॅब्लम में राहत

​​एक रिसर्च के मुताबिक धनिये के बीज ​स्किन प्राॅब्लम को दूर करने में भी मदद करते हैं. इससे एक्जिमा, इचिंग, चकत्ते और सूजन जैसी विभिन्न ​स्किन प्राॅब्लम से राहत मिल सकती है. असल में धनिये के बीज में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जिससे मुंह के छालों और घावों को भी ठीक करने में भी मदद मिलती है.

बालों की ग्रोथ बढ़ाए

बालों का टूटना एक आम समस्या है. किसी भी एज ग्रुप में ये समस्या देखने को मिल रही है. अगर आप इस समस्या से जूझ रहे हैं तो धनिये के बीज राहत दे सकते हैं. धनिये के बीज बालों को झड़ने से रोकने और नए बालों के विकास के लिए जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. बालों के रोमों को मजबूत कर बालों के झड़ने की समस्या से राहत दिलाते हैं.

कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करे

बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल का लेवल बढ़ने से कई बीमारियों का रिस्क पैदा हो जाता है. इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. साथ ही ये स्ट्रोक की वजह भी बन सकता है. ऐसे में जरूरी है कि शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखा जाए. इसके लिए भी धनिये के बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है. दरअसल धनिये के बीज में कोरिएन्ड्रिन नामक एक कंपाउंड होता है, जो लिपिड पाचन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है.

ये भी पढ़ें: कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?

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पीलिया होने पर आंखें और नाखून क्यों पड़ जाते हैं पीले? ये है वजह

पीलिया होने पर आंखें और नाखून क्यों पड़ जाते हैं पीले? ये है वजह



<p style="text-align: justify;">पीलिया एक सामान्य हेल्थ प्राॅब्लम है. इसके लक्षण के रूप में बाॅडी में पीलापन दिखने लगता है. ​आंखों से लेकर नाखूनों तक पर असर देखने को मिलता है. इनकी अनेदखी कई बार शरीर में खतरनाक ​स्थिति पैदा कर देती है. आइए जानते हैं कि पीलिया में आ​खिर आंखें और नाखून क्यों पीले पड़ जाते हैं. इन सिम्पटम्स को देखकर कब सतर्क हो जाने की जरूरत है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसलिए नजर आता है पीलापन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बिलीरुबीन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है. शरीर में समय-समय पर लाल रक्त कोशिकाएं बनती हैं और मृत होती हैं. मृत कोशिकाओं को लिवर छानने का काम करता है. जब लिवर मृत कोशिकाओं को छानने में असमर्थ होने लगता है, तो खून में बिलीरुबीन की मात्रा बढ़ने लगती है. ये शरीर के अन्य अंगों में पहुंचता है, जिससे शरीर के तमाम हिस्सों में पीलापन आ जाता है. इसे ही पीलिया के नाम से जाना जाता है. खून की जांच से इस बीमारी का पता लगाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये लक्षण आते हैं नजर</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">आंख, नाखून, पेशाब में पीलापन</li>
<li style="text-align: justify;">​स्किन पीला दिखना</li>
<li style="text-align: justify;">भूख न लगना</li>
<li style="text-align: justify;">जी मिचलाना</li>
<li style="text-align: justify;">कुछ खाने का मन न करना</li>
<li style="text-align: justify;">पेट में दर्द</li>
<li style="text-align: justify;">थकान महसूस करना</li>
<li style="text-align: justify;">वजन घटना</li>
<li style="text-align: justify;">शुरुआती स्टेज में वायरल फीवर की प्राॅब्लम</li>
<li style="text-align: justify;">ठंड लगना</li>
<li style="text-align: justify;">पेट दर्द</li>
<li style="text-align: justify;">टैरी ब्लैक रंग का मल</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे करें बचाव</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">दूषित खानपान से बचें</li>
<li style="text-align: justify;">शराब का सेवन न करें</li>
<li style="text-align: justify;">उबला हुआ पानी पिएं</li>
<li style="text-align: justify;">ऑयली फूड से परहेज करें</li>
<li style="text-align: justify;">मसालेदार भोजन से दूरी बनाएं</li>
<li style="text-align: justify;">खानपान के दौरान साफ सफाई का विशेष ध्यान दें</li>
<li style="text-align: justify;">लक्षण दिखने पर डाॅक्टर से कंसल्ट करें</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीलिया होने के कारण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">वायरल इंफेक्शन जैसे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई से ये समस्या हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;">कुछ दवाओं जैसे पैरासिटामोल की ओवरडोज से ऐसा हो सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;">टॉक्सिक पदार्थों जैसे जहरीले मशरूम का सेवन करने से ये हो सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;">जन्मजात डिसऑर्डर जैसे गिल्बर्ट सिंड्रोम, डुबिन-जॉनसन सिंड्रोम आदि से ये ​स्थिति बन सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;">पित्त नली में रुकावट या पित्त की पथरी से भी पीलिया की​ ​शिकायत हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;">लिवर का कैंसर</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या लिवर को नुकसान पहुंचाता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पीलिया में लिवर को नुकसान पहुंचता है. ये समझने से पहले इस बीमारी की वजह जानना जरूरी है. असल में जब लिवर प्राॅपर वर्क नहीं कर पाता तो बिलीरुबिन शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है. इसका लेवल शरीर में बढ़ जाता है. ऐसे में अगर पीलिया के साथ-साथ गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल, थकावट, मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह लिवर डैमेज होने का संकेत हो सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/people-feel-electric-shocks-because-of-vitamin-b12-deficiency-2966082">कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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एक्सरसाइज के बाद भी नहीं घट रहा वजन? तुरंत कराएं इस चीज का टेस्ट

एक्सरसाइज के बाद भी नहीं घट रहा वजन? तुरंत कराएं इस चीज का टेस्ट


अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है तो थायरॉइड टेस्ट जरूर कराना चाहिए. यह शरीर में थायरॉइड हार्मोन के संतुलन को जांचने में मदद करता है, जो मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल, वजन और मेंटल कंडीशन पर सीधा असर डालता है.

अगर किसी को पहले से हाइपरथायरॉइडिज्म है और वजन घटने का नाम नहीं ले रहा तो डॉक्टर से मिलकर थायरॉइड की जांच कराएं. इसके लिए TSH, T3 और T4 नामक टेस्ट किए जाते हैं.

अगर किसी को पहले से हाइपरथायरॉइडिज्म है और वजन घटने का नाम नहीं ले रहा तो डॉक्टर से मिलकर थायरॉइड की जांच कराएं. इसके लिए TSH, T3 और T4 नामक टेस्ट किए जाते हैं.

खासकर गर्भवती महिलाओं, परिवार में थायरॉइड का इतिहास होने वालों और थकान या सुस्ती महसूस करने वालों को यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए.

खासकर गर्भवती महिलाओं, परिवार में थायरॉइड का इतिहास होने वालों और थकान या सुस्ती महसूस करने वालों को यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए.

महिलाओं में बढ़ते वजन का एक आम कारण पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हो सकता है. यह हार्मोन से जुड़ी समस्या है, जिसमें पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और अंडाशय ठीक से अंडाणु नहीं बना पाता. इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है और घटाना काफी मुश्किल हो जाता है.

महिलाओं में बढ़ते वजन का एक आम कारण पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हो सकता है. यह हार्मोन से जुड़ी समस्या है, जिसमें पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और अंडाशय ठीक से अंडाणु नहीं बना पाता. इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है और घटाना काफी मुश्किल हो जाता है.

थायरॉइड की जांच के लिए थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4), विटामिन D, विटामिन B12, फास्टिंग इंसुलिन, ब्लड शुगर टेस्ट कराने चाहिए. इसके अलावा पीसीओएस और हार्मोनल प्रोफाइल की जांच भी करानी चाहिए.

थायरॉइड की जांच के लिए थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4), विटामिन D, विटामिन B12, फास्टिंग इंसुलिन, ब्लड शुगर टेस्ट कराने चाहिए. इसके अलावा पीसीओएस और हार्मोनल प्रोफाइल की जांच भी करानी चाहिए.

वजन कम करने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना काफी नहीं होता, बल्कि आपकी दूसरी आदतें भी बहुत अहम होती हैं. कई बार लोग एक्सरसाइज करने के बाद जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, ठीक से सोते नहीं या लगातार स्ट्रेस में रहते हैं.

वजन कम करने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना काफी नहीं होता, बल्कि आपकी दूसरी आदतें भी बहुत अहम होती हैं. कई बार लोग एक्सरसाइज करने के बाद जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, ठीक से सोते नहीं या लगातार स्ट्रेस में रहते हैं.

ये चीजें ही हमारे वजन को कम करने की कोशिश पर पानी फेर देती हैं. अच्छी सेहत के लिए एक्सरसाइज के साथ साथ हमें अपनी नींद, डाइट और मन को भी शांत बनाए रखने की जरूरत है.

ये चीजें ही हमारे वजन को कम करने की कोशिश पर पानी फेर देती हैं. अच्छी सेहत के लिए एक्सरसाइज के साथ साथ हमें अपनी नींद, डाइट और मन को भी शांत बनाए रखने की जरूरत है.

अगर आप रोजाना मेहनत कर रहे हैं फिर भी थायरॉइड या किसी और वजह से वजन में कोई फर्क नहीं आ रहा है, तो खुद को गलत मानने के बजाय एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

अगर आप रोजाना मेहनत कर रहे हैं फिर भी थायरॉइड या किसी और वजह से वजन में कोई फर्क नहीं आ रहा है, तो खुद को गलत मानने के बजाय एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

मुमकिन है कि इसके पीछे कोई अंदरूनी स्वास्थ्य कारण हो, जो आपकी नजर से छूट गया हो. सही जांच से असली वजह सामने आ सकती है और फिर इलाज भी उसी के मुताबिक किया जा सकता है.

मुमकिन है कि इसके पीछे कोई अंदरूनी स्वास्थ्य कारण हो, जो आपकी नजर से छूट गया हो. सही जांच से असली वजह सामने आ सकती है और फिर इलाज भी उसी के मुताबिक किया जा सकता है.

Published at : 21 Jun 2025 02:58 PM (IST)

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