लड़कियों की इस एक गलती की वजह से होता है यूरिन इंफेक्शन, नहीं जानते होंगे आप
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लड़कियों की इस एक गलती की वजह से होता है यूरिन इंफेक्शन, नहीं जानते होंगे आप
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<p style="text-align: justify;">किडनी शरीर का महत्वपूर्ण ऑर्गन है, लेकिन कई बार ये ऑर्गन डैमेज हो जाता है. ऐसे में लाइफ खतरे में आ जाती है. क्या बिना किडनी के भी लाइफ हो सकती है? ये एक ऐसा सवाल है जिस पर चर्चा शुरू हो गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियां करीब 20 साल से खराब है. इसके बावजूद संत हर रोज सुबह वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और राधा रानी की भक्ति में लीन रहते हैं. कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इंसान दोनों किडनी खराब होने के बाद भी इस तरह जीवित रह सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जब डाॅक्टर ने प्रेमानंद महाराज को बताई थी यह बात</strong></p>
<p style="text-align: justify;">संत प्रेमानंद महाराज ने कई बार अपनी वीडियो में बताया कि वह कैसे जिंदा हैं. उन्होंने बताया था कि वर्षों पहले दिल्ली के अस्पताल में एक डॉक्टर ने कहा था कि बाबा आपकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं. ढाई वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक ही आपका जीवन है. इसके बाद जीवन समाप्त. इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने बताया कि भगवान पर भरोसा है इसलिए आज जीवित हूं. राधारानी मेरे साथ है और उनका आशीर्वाद है. इसलिए आज भी आप सब के बीच हूं और उनके नाम का जप कर रहा हूं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किडनी की किस डिसीज से पीड़ित हैं संत?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जानकारी के मुताबिक प्रेमानंद महाराज ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से पीड़ित हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आती है, जिसमें किडनी का आकार बड़ा हो जाता है. किडनी में पानी जमा हो जाता है. जिसके बाद धीरे-धीरे गांठे बन जाती हैं और फिर किडनी काम करना बंद कर देती है. प्रेमानंद महाराज को इतनी खतरनाक बीमारी है, उसके बाद भी वह जिंदा हैं. यह सब देख मेडिकल साइंस भी हैरान है. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि हमारी दोनों किडनी खराब है, लेकिन मेरे साथ मेरे ठाकुर जी है. हमें कोई चिंता नहीं. हम उन्हीं की वजह से जिंदा हैं और बैठे हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक किडनी के साथ भी जीवन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंसान के शरीर में दो किडनी होती हैं. किसी बीमारी या हेल्थ प्राॅब्लम के चलते एक किडनी निकाल भी ली जाए तो वो सेहतमंद जीवन जी सकता है. कई बार ऐसे केस भी सामने आते हैं जब लोग एक ही किडनी के साथ जन्म लेते हैं. फिर एक किडनी के जरिए ही अपनी पूरी जिंदगी बिता देते हैं. हालांकि एक किडनी के व्यक्ति को रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में बहुत सारे बदलाव करने की सलाह दी जाती है. खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड का सेवन, शराब और सिगरेट की वजह से लोगों की किडनी पर बुरा असर पड़ रहा है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किडनी खराब होने पर ट्रीटमेंट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी खराब होने पर मरीजों की डायलिसिस की जाती है. इसके साथ ही मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह भी दी जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/people-feel-electric-shocks-because-of-vitamin-b12-deficiency-2966082">कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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<p style="text-align: justify;">दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में हाल ही में हैरान करने वाला एक मामला सामने आया. यहां 30 साल के एक युवक ने दवाई के साथ 8 सेमी लंबी स्टील की चम्मच भी निगल ली. आइए जानते हैं कि इस शख्स के पेट से चम्मच कैसे निकाली गई और अब उसकी हालत कैसी है? साथ ही, यह भी जानते हैं कि इस तरह की घटना सेहत के लिए कितनी खतरनाक है? </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह है पूरा मामला</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जून 2025 के दौरान दिल्ली के एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में 30 साल के युवक ने पेट में तेज दर्द और खाना न पचने की शिकायत की. उसने बताया कि दवाई लेते वक्त पानी के साथ स्टील का चम्मच उसने निगल लिया. यह चम्मच उसकी ऊपरी आंत में फंस गया था, जिससे उसे दिक्कत हो रही थी. डॉक्टरों जांच के दौरान देखा कि 8 सेमी की चम्मच मरीज की ऊपरी आंत में अटकी हुई है. यह बेहद खतरनाक कंडीशन थी, क्योंकि धातु की वस्तु आंत में छेद (पर्फोरेशन) या गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकती थी. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेट में ऐसे चली गई चम्मच</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मरीज ने बताया कि वह दवाई ले रहा था और जल्दबाजी में उसने पानी के गिलास के साथ चम्मच को भी मुंह में डाल लिया. इस तरह की लापरवाही नॉर्मल नहीं है, लेकिन इसके नतीजे बेहद घातक हो सकते हैं. दरअसल, काफी लोग जल्दबाजी के चक्कर में इस तरह की गलती कर बैठते हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे निकाली गई चम्मच?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को एनेस्थीसिया देकर इमरजेंसी अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (GI) एंडोस्कोपी की. इस प्रक्रिया में एक पतली लचीली ट्यूब एंडोस्कोप इस्तेमाल की गई. इस ट्यूब में एक कैमरा और लाइट लगी होती है, जो डॉक्टरों को इंटरनल ऑर्गन को देखने में मदद करती है. सर्जिकल टीम ने फोरसेप (स्पेशल मेडिकल औजार) की मदद से सावधानीपूर्वक चम्मच को आंत से निकाल लिया. चम्मच निकालने के दौरान मरीज की आंत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. महज 30 मिनट में पेट से चम्मच निकाल दी गई. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पहले भी सामने आ चुके ऐसे मामले</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की असामान्य घटना सामने आई हो. 2022 के दौरान मुजफ्फरनगर में एक व्यक्ति के पेट से स्टील की 62 चम्मच निकाली गई थीं. वह नशा मुक्ति केंद्र में रहता था और उसने एक साल में सारे चम्मच निगले थे. इस मामले में दो घंटे की सर्जरी के बाद चम्मच निकाले गए. वहीं, 2023 के दौरान मुजफ्फरपुर में एक युवक के पेट से स्टील का ग्लास निकाला गया. वह 20 दिन तक पेट दर्द से पीड़ित था. इस तरह के मामलों में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि धातु की चीजों से पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/people-feel-electric-shocks-because-of-vitamin-b12-deficiency-2966082">कुछ लोगों को क्यों लगता है इलेक्ट्रिक शॉक, क्या विटामिन बी12 की कमी है इसकी वजह?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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किसी से हाथ मिलाते वक्त तो कभी कोई सामान छूते ही क्या आपको भी बिजली का झटका महसूस होता है? कई बार यह झटका इतना तगड़ा होता है कि लोग इसे किसी बीमारी का लक्षण समझ लेते हैं. हालांकि, कई रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि इस तरह के इलेक्ट्रिक शॉक सेंसेशन की वजह विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है. आइए जानते हैं कि इसमें क्या हकीकत है?
क्या है इलेक्ट्रिक शॉक सेंसेशन?
इलेक्ट्रिक शॉक सेंसेशन को मेडिकल टर्म में लर्मिट साइन कहते हैं. इसमें किसी भी शख्स को अपने शरीर में बिजली के झटके जैसा अहसास होता है. यह आमतौर पर रीढ़ की हड्डी से शुरू होकर नीचे की ओर पैरों या बांहों तक फैलता है. यह अहसास तब होता है, जब व्यक्ति अपनी गर्दन आगे की ओर झुकाता है. इसे ‘बार्बर चेयर फिनोमेनन’ भी कहा जाता है. यह अहसास कुछ सेकंड तक रह सकता है और दिन में कई बार महसूस हो सकती है. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह अहसास नर्वस सिस्टम में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. इसके पीछे नर्व डैमेज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, रीढ़ की हड्डी की चोट या विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है.
विटामिन बी12 बॉडी के लिए क्यों जरूरी?
विटामिन बी12 को कोबालमिन भी कहते हैं. यह पानी में घुलनशील विटामिन है, जो ह्यूमन बॉडी के लिए बेहद जरूरी होता है. रेड ब्लड सेल्स बनने और हेल्दी नर्वस सिस्टम के लिए विटामिन बी12 बेहद कारगर है. यह तंत्रिकाओं को ढंकने वाली मायलिन शीथ बनाने में मदद करता है. अहम बात यह है कि हमारे शरीर में विटामिन बी12 का प्रॉडक्शन नहीं होता है. यह खाने से सप्लीमेंट्स से मिलता है. वेजिटेरियन और वीगन डाइट वाले लोगों में इसकी कमी का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि पौधों में यह विटामिन स्वाभाविक रूप से नहीं मिलता है. एक अडल्ट को रोजाना औसतन 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 की जरूरत होती है.
विटामिन बी12 की कमी के कारण
कई रिसर्च में सामने आया है कि भारत में 15 पर्सेंट से ज्यादा लोग विटामिन बी12 की कमी से पीड़ित हैं. इनमें ज्यादातर लोग वेजिटेरियन हैं. दरअसल, वेज या वीगन डाइट लेने वाले लोगों में विटामिन बी12 अक्सर कम पाया जाता है. अगर किसी को पर्निशियस एनीमिया, क्रोहन डिजीज, सीलियक डिजीज या गैस्ट्राइटिस है तो उनका शरीर सही तरीके से विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का प्रॉडक्शन कम हो सकता है, जो विटामिन बी12 के अवशोषण के लिए बेहद जरूरी है.
इलेक्ट्रिक शॉक सेंसेशन से विटामिन बी12 का कनेक्शन
एक्सपर्ट्स की मानें तो विटामिन बी12 की कमी से नर्वस सिस्टम पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि यह मायलिन शीथ को बनाने और उसकी देखभाल करने के लिए जरूरी होता है. ऐसे में विटामिन बी12 की कमी के कारण मायलिन शीथ डैमेज हो सकती है. मेडिकल टर्म में इसे डिमाइलिनेशन (demyelination) कहते हैं. यह कंडीशन नर्वस सिग्नल्स में गड़बड़ी पैदा करती है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रिक शॉक जैसा अहसास हो सकता है.
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Home Remedies for Gut Health: सुबह उठते ही पेट साफ न हो तो पूरा दिन बेकार लगने लगता है. चेहरे की रौनक गायब, चिड़चिड़ा और मन किसी काम में नहीं लगता. ये परेशानी छोटी दिखती है, लेकिन असर बड़ा करती है, इसका नाम है कब्ज.आज के समय में जब भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अनहेल्दी खानपान और स्ट्रेस से घिरे रहते हैं, तब कब्ज और पेट की गड़बड़ी आम बात हो गई है.
बता दें, हमारी दादी-नानी के देसी नुस्खों में ऐसे कई राज छिपे हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के पेट की सफाई और पाचन शक्ति को सुधार सकते है. तो चलिए जानते हैं कुछ असरदार घरेलू उपाय, जो न सिर्फ कब्ज को दूर करेंगे, बल्कि पेट को भी रखेंगे एकदम हल्का और स्वस्थ.
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गुनगुना पानी और नींबू का जादू
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी में आधा नींबू और एक चुटकी नमक मिलाकर पीना कब्ज से राहत पाने का सबसे आसान और कारगर तरीका है. ये मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और पेट को साफ रखने में मदद करता है.
त्रिफला चूर्ण
रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लेने से न सिर्फ कब्ज ठीक होती है, बल्कि आंतों की सफाई भी गहराई से होती है. यह आयुर्वेदिक नुस्खा पाचन तंत्र को मजबूत करता है.
एक चम्मच देसी घी
अगर आप रोज़ रात को गर्म दूध में एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीते हैं, तो आंतों की नमी बनी रहती है और मल नरम होता है, जिससे सुबह पेट आसानी से साफ हो जाता है.
इसबगोल
इसबगोल भूसी को गर्म दूध या पानी के साथ लेना एक पुराना लेकिन असरदार उपाय है. ये फाइबर से भरपूर होता है और मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाता है.
पपीता और फाइबर युक्त फल
रोज के खाने में पपीता, सेब, चुकंदर, गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें. इनमें मौजूद फाइबर कब्ज को दूर करने में मदद करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है.
रोजाना योग करना न भूलें
केवल खानपान ही नहीं, बल्कि हल्की फुल्की एक्टिविटी जैसे सुबह-शाम टहलना या कुछ मिनटों का योग (जैसे पवनमुक्तासन और त्रिकोणासन) भी कब्ज से राहत दिलाने में कारगर है.
कब्ज एक ऐसी समस्या है जिसे समय रहते समझना और ठीक करना बेहद जरूरी है. अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह सिरदर्द, मुंह की बदबू, त्वचा की समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी कई परेशानियों की वजह बन सकती है. इसलिए दवाओं पर निर्भर रहने की बजाय इन देसी नुस्खों को अपनाएं और अपनी पाचन शक्ति को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाएं.
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