बदलते मौसम में रोजाना पिएं दालचीनी का पानी, एक नहीं इन 6 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी
बदलते मौसम में रोजाना पिएं दालचीनी का पानी, एक नहीं इन 6 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी
Source link
बदलते मौसम में रोजाना पिएं दालचीनी का पानी, एक नहीं इन 6 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी
Source link
मैच से पहले भड़के इंग्लैंड के कप्तान, विराट, रोहित और अश्विन की गैरमौजूदगी को लेकर कहा-‘अब बस बहुत हुआ…’
Symptoms of Arthritis: सुबह उठते ही उंगलियों में जकड़न, घुटनों में अकड़न और चलने में दर्द होता है. यह सिर्फ उम्र का असर नहीं, बल्कि गठिया की शुरुआत हो सकती है. कई लोग इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर ध्यान नहीं देते, लेकिन जब रोजमर्रा के काम मुश्किल लगने लगें तो समझ लीजिए कि शरीर मदद मांग रहा है. ये बीमारी 30 की उम्र में भी हो सकती है. आज इस लेख में हम समझेंगे कि गठिया का दर्द शरीर में कहां-कहां होता है, ये क्यों होता है और इसे नज़रअंदाज़ करने के क्या नतीजे हो सकते हैं.
ये भी पढ़े- इन लोगों की सेहत का दुश्मन है अदरक, खाते ही हो सकती है ये परेशानी
गठिया का दर्द कहां-कहां महसूस होता है?
गठिया का दर्द शरीर के किसी भी जोड़ में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह कुछ खास हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है.
घुटनों में दर्द
गठिया का सबसे आम शिकार हमारे घुटने होते हैं.
चलने, बैठने और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है.
घुटनों में सूजन और गर्माहट महसूस होती है.
उंगलियों और हाथों के जोड़
सुबह उठते ही उंगलियों में अकड़न
अगर आपको भी किसी जोड़ में बार-बार दर्द या जकड़न महसूस होती है, तो इसे न टालें, वक्त रहते इलाज लें. गठिया का समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव, आपके भविष्य को दर्दमुक्त बना सकता है.
कमर और रीढ़ की हड्डी
लंबे समय तक बैठने के बाद उठने में दर्द
झुकने या खड़े होने पर दर्द बढ़ जाना
गर्दन और पीठ में भी अकड़न
टखनों और पैरों में दर्द
सुबह उठते ही पैरों में तेज दर्द
जूते पहनने में दिक्कत
चलने पर तेज़ जलन और सूजन
गठिया की मुख्य वजह
जोड़ों में सूजन: खासकर रुमेटॉइड गठिया में
शरीर का वजन ज्यादा होना: जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है
पारिवारिक इतिहास: अगर परिवार में किसी को है तो रिस्क बढ़ जाता है
पुरानी चोटें या असंतुलित लाइफस्टाइल
गठिया कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है. इसके लक्षणों को नज़रअंदाज करना खुद को तकलीफ देने जैसा है. इसलिए ऊपर दिए गए जो भी लक्षण आपके शरीर में दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.
ये भी पढ़ें: कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Ginger Side Effects: सर्दी लगे तो अदरक वाली चाय, पेट दर्द हो तो अदरक का टुकड़ा और खांसी-जुकाम में तो दादी की पहली सलाह ‘थोड़ा अदरक ले लो.’” अदरक भारतीय रसोई की शान है और आयुर्वेद में इसे औषधि माना गया है. लेकिन कुछ लोगों के लिए अदरक ‘रामबाण’ नहीं, बल्कि सेहत का छुपा दुश्मन साबित हो सकती है. आज हम बात करेंगे उन लोगों की जिनके लिए अदरक नुकसानदायक हो सकती है और जानेंगे कि ये छोटी सी चीज कैसे बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है.
ये भी पढ़े- रोज बैठकर पोछा लगाने से होती है नॉर्मल डिलीवरी? ये हैं इसके सबसे सटीक उपाय
जिनकी पाचन क्रिया बहुत तेज है
अदरक खाने से पेट में एसिडिटी बढ़ सकती है. जिन लोगों को गैस और जलन की शिकायत रहती है, उनके लिए अदरक तकलीफ बढ़ा सकती है.
पेट में जलन
खट्टी डकार
छाती में दर्द जैसा एहसास
जिनकी स्किन बहुत सेंसिटिव है
अदरक से कुछ लोगों को एलर्जी रहती है. इससे स्किन पर खुजली, लाल चकत्ते या सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आप स्किन एलर्जी के मरीज हैं तो अदरक खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
ब्लड थिनर दवा लेने वाले लोग
अगर आप पहले से ही ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं तो अदरक से अधिक ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. खासकर सर्जरी से पहले अदरक से बचना जरूरी होता है.
प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में नहीं लेना चाहिए
अदरक आमतौर पर मॉर्निंग सिकनेस में फायदेमंद होती है, लेकिन प्रेगनेंसी के आखिरी ट्राइमेस्टर में इसका अधिक सेवन गर्भाशय संकुचन बढ़ा सकता है, जिससे समय से पहले प्रसव की आशंका हो सकती है.
लो ब्लड प्रेशर के मरीज
अदरक ब्लड प्रेशर को कम करता है, जो हाई बीपी वालों के लिए अच्छा है. लेकिन अगर आपका बीपी पहले से ही कम रहता है, तो अदरक आपको कमजोरी, चक्कर और थकान महसूस करवा सकता है.
अदरक एक चमत्कारी औषधि है, लेकिन हर औषधि हर किसी को नहीं सूट करती. जिस तरह कुछ दवा हर मरीज के लिए एक जैसी नहीं होती, उसी तरह अदरक भी सभी के लिए फायदेमंद नहीं हो सकती. अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई परेशानी है तो अदरक से दूरी बनाएं या फिर किसी एक्सपर्ट की राय लें.
ये भी पढ़ें: कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
क्या वाकई हेल्दी होते हैं कद्दू के बीज? ये 5 कारण दूर कर देंगे आपकी ये गलतफहमी
Source link
Sickle Cell Disease: सरकार ने गुरुवार (19 जून) को ‘सिकल सेल’ रोग के इलाज के लिए दवा विकसित करने के वास्ते 10 करोड़ रुपये के पुरस्कार की घोषणा की. यह बीमारी भारत की जनजातीय आबादी को विशेष तौर पर प्रभावित करती है. ‘सिकल सेल’ रोग वंशानुगत रक्त विकारों का एक समूह है, जो हीमोग्लोबिन को प्रभावित करता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाएं सिकल (हंसिया) के आकार की हो जाती हैं और रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर देती हैं, जिससे स्ट्रोक, आंखों की समस्याएं और संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं.
2023 में हुई थी ‘सिकल सेल एनीमिया’ उन्मूलन मिशन की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक इस बीमारी को खत्म करने के उद्देश्य से एक जुलाई, 2023 को राष्ट्रीय ‘सिकल सेल एनीमिया’ उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी. सरकार का लक्ष्य इस मिशन के तहत 40 साल के तक की आयु के सात करोड़ लोगों की जांच करना है.
केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने ‘विश्व सिकल सेल दिवस’ के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रोग के इलाज के लिए दवा विकसित करने के वास्ते बिरसा मुंडा पुरस्कार की स्थापना की घोषणा की.
बीमारी के इलाज के लिए अभी उपलब्ध है एक ही दवा
मंत्री ने कहा कि इस बीमारी के इलाज के लिए अभी केवल एक ही दवा उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में रोगी की शारीरिक स्थिति और बीमारी की गंभीरता के आधार पर कई विकल्पों में से उपयुक्त दवा चुनने का कोई विकल्प नहीं है.
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था या अन्य गंभीर चिकित्सा स्थितियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, इसलिए एक नयी दवा विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है. जनजातीय मामलों का मंत्रालय दवा विकसित करने के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सहयोग से एक प्रतियोगिता आयोजित करेगा.
मिलेगा 10 करोड़ रुपये तक का वित्त पोषण
उइके ने कहा कि चयनित प्रस्ताव को 10 करोड़ रुपये तक का वित्त पोषण किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय एम्स-दिल्ली के तहत जनजातीय स्वास्थ्य और अनुसंधान संस्थान के लिए एक केंद्र स्थापित करेगा, जिसमें आदिवासी लोगों को उच्चतम गुणवत्ता वाली चिकित्सा प्रदान करने के वास्ते बाह्य रोगी और आंतरिक रोगी सुविधाएं भी होंगी.
मंत्री ने कहा कि आदिवासी चिकित्सा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे जनजातीय समुदायों की दीर्घकालिक स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने में मदद मिलेगी, जो अक्सर भौगोलिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और प्रणालीगत बाधाओं के कारण वंचित रह जाते हैं.
इस विशेष पाठ्यक्रम को जनजातीय परिवेश के अनुरूप प्रासंगिक ज्ञान, नैदानिक कौशल और सार्वजनिक स्वास्थ्य दक्षताओं के साथ चिकित्सकों का एक कैडर विकसित करने के लिए डिजाइन किया जाएगा.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator