बार-बार सिरदर्द होना 6 खतरनाक बीमारियों की ओर करता है इशारा, संकेत दिखते ही भागें डॉक्टर के पास

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गोद में लैपटॉप रखकर काम करने वाली लड़कियां सावधान! इनफर्टिलिटी का है खतरा

गोद में लैपटॉप रखकर काम करने वाली लड़कियां सावधान! इनफर्टिलिटी का है खतरा



<p style="text-align: justify;">वर्क कल्चर में गैजेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. ऐसा ही एक गैजेट है लैपटाॅप. वर्कप्लेस से लेकर घरों तक में इस पर डिपेंडेंसी बढ़ी है. ऑफिस का काम निपटाना हो या फिर पढ़ाई करनी हो, लैपटाॅप की जरूरत पड़ती है. मूवी से लेकर गेम्स खेलने के लिए भी ये एक पाॅपुलर गैजेट बन चुका है. लेकिन क्या आप इस गैजेट के नुकसान से अवेयर है. ये महिलाओं में इनफर्टिलिटी की वजह बन सकता है. आइए जानते हैं ये खतरा क्या है और इससे किस तरह बचा जा सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस तरह पहुंचता है नुकसान?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लैपटॉप से निकलने वाली हीट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन (ईएमएफ) का शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है. हार्मोन असंतुलन समेत कई तरह की प्राॅब्लम देखने को मिलती है. सिर्फ महिलाओं तक ही ये दिक्कत सीमित नहीं है, ब​ल्कि पुरुषों को भी इनसे जूझना पड़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महिलाओं को किस तरह खतरा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अक्सर घर पर महिलाएं लैपटाॅप का यूज करते समय लापरवाह हो जाती हैं. लेटकर या फिर गोद में रखकर इस गैजेट का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन लैपटाॅप का इस्तेमाल महिलाओं में कई हेल्थ इश्यू की वजह बन सकता है. लगातार यूज से लैपटाॅप हीट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन जेनरेट करता है. जिससे महिलाओं में हार्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है. बाॅडी के लगातार लैपटाॅप की हीट के संपर्क में रहने से पीरियड डिस्टर्ब हो सकते हैं. मूड में बदलाव महसूस हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फ​र्टिलिटी पर किस तरह असर?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लैपटाॅप से निकलने वाली हीट के लगातार संपर्क में रहने से बाॅडी के अंदर चेजेंस देखने को मिल सकते हैं. पे​ल्विक ऑर्गन्स में सूजन आ सकती है. इसका मेलाटोनिन उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. मेलाटोनिन की कमी का असर महिलाओं में एग की क्वालिटी पर देखने को मिल सकता है. इससे न सिर्फ प्रेग्नेंसी में दिक्कत का सामना करना पड़ता है, ब​ल्कि गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खतरे से बचा कैसे जाए?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस खतरे का सबसे प्रमुख कारण लैपटाॅप यूज करने के तरीके में छिपा है. वर्कप्लेस पर महिलाएं लैपटाॅप को टेबल पर रखकर यूज करती हैं, लेकिन घर पर वह आराम चाहती हैं. ये आराम की दरकार उन्हें खतरे की ओर ले जाती है. जिस लैपटाॅप काे वह ऑफिस में टेबल पर रखती हैं, वह अब उनकी गोद में या बेड पर जगह ले लेता है. अगर महिला पढ़ाई भी कर रहीं होती हैं तो इसी तरह लापरवाह दिखती हैं. खतरे से वह अंजान रहती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लैपटाॅप का इस तरह करें यूज</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>टेबल या स्टैंड करें इस्तेमाल:</strong> लैपटाॅप का यूज करने के दाैरान टेबल या फिर स्टैंड का इस्तेमाल करें. इससे बाॅडी पर पड़ने वाले प्रभाव से बचा जा सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कूलिंग पैड:</strong> कूलिंग पैड या इंसुलेटेड ट्रे का उपयोग कर सकते हैं. जिससे लैपटाॅप से निकलने वाली हीट से बचा जा सके.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>एक जगह तय करें:</strong> डेस्कटाॅप की तरह लैपटाॅप यूज करने के लिए भी घर पर एक जगह तय कर लें. इससे गलत तरीके से इसके इस्तेमाल से बचा जा सकेगा.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/eat-green-leaf-every-day-foam-disappear-from-urine-and-kidney-2963121">रोजाना एक हरा पत्ता खा लिया तो पेशाब से गायब हो जाएंगे सारे झाग, किडनी की सेहत बनी रहेगी</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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फायदा ही नहीं पहुंचाता, चेहरा बिगाड़ भी सकता है एलोवरा, भूलकर भी न करें ये गलतियां

फायदा ही नहीं पहुंचाता, चेहरा बिगाड़ भी सकता है एलोवरा, भूलकर भी न करें ये गलतियां


Aloe Vera Side Effects: एलोवेरा को आमतौर पर त्वचा की देखभाल में बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसके जैल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और हाइड्रेटिंग गुण पाए जाते हैं, जो चेहरे की चमक बढ़ाने से लेकर पिंपल्स, झुर्रियां और दाग-धब्बों को हटाने में इसकी खूबियां गिनाई जाती हैं.  क्या आप जानते हैं कि एलोवेरा का गलत इस्तेमाल चेहरे को निखारने की जगह बिगाड़ भी सकता है?

एलोवेरा से हो सकते हैं ये साइड इफेक्ट्स

त्वचा एक्सपर्ट के मुताबिक, हर स्किन टाइप पर एलोवेरा एक जैसा असर नहीं करता. कुछ लोगों को इससे एलर्जी, जलन, दाने या दाग धब्बे जैसी दिक्कतें हो जाती हैं.

ये दिक्कतें कर सकती हैं परेशान

  • त्वचा पर खुजली या जलन
  • चेहरे पर लाल निशान या रैशेज
  • स्किन ज्यादा रूखी और बेजान होना
  • धूप में चेहरे का रंग और गहरा पड़ जाना

ये गलतियां बिल्कुल न करें 

  • पैक लगाकर घंटों छोड़ना: एलोवेरा जैल को ज्यादा देर तक चेहरे पर छोड़ना स्किन को ड्राई बना सकता है.
  • बिना पैच टेस्ट के लगाना: किसी भी नए प्रोडक्ट की तरह एलोवेरा का भी पैच टेस्ट जरूरी है. क्योंकि हर किसी की स्किन अलग होती है, इसलिए पहले एलोवेरा को हाथ या कान के पीछे लगाकर जांच लें.
  • रातभर छोड़ना: कई लोग एलोवेरा जैल को पूरी रात चेहरे पर लगा छोड़ते हैं, जिससे त्वचा रूखी और डल हो सकती है.
  • धूप में लगाकर बाहर निकलना: एलोवेरा लगाने के बाद तेज धूप में जाने से स्किन पर जलन और पिग्मेंटेशन हो सकती है.
  • हर दिन लगाना: कुछ स्किन टाइप्स को रोजाना एलोवेरा जैल सूखा और रुखा बना सकता है.
  • केमिकल युक्त जेल का इस्तेमाल: सस्ते या मिलावटी एलोवेरा जेल स्किन को फायदे की जगह नुकसान दे सकता है.

एलोवेरा इस्तेमाल करने का सही तरीका 

  • साफ चेहरे और हाथों से लगाएं.
  • 5 से 10 मिनट तक ही रखें, फिर धो लें.
  • सप्ताह में 2-3 बार ही उपयोग करें.
  • धूप में जाने से पहले न लगाएं.
  • बाजार से खरीदते समय शुद्ध और ऑर्गेनिक एलोवेरा जेल को ही चुनें.

स्किन एक्सपर्ट की सलाह

स्किन एक्सपर्ट के मुताबिक, नेचुरल चीजें भी तब तक ही फायदेमंद होती हैं जब तक उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए. एलोवेरा का भी इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है, वरना इसके साइड इफेक्ट्स चेहरे को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पीरियड्स में क्या वाकई नहीं धोने चाहिए बाल? जान लीजिए क्या है सच

पीरियड्स में क्या वाकई नहीं धोने चाहिए बाल? जान लीजिए क्या है सच


Hair Wash During Periods: पीरियड्स चलते वक्त बाल मत धोना, ऐसा करने से तबीयत खराब हो सकती है! “इन दिनों में ठंडा पानी सिर पर नहीं डालना चाहिए, बाल गीले करने से सिर दर्द होता है!” आपने भी कभी न कभी ये बातें जरूर सुनी होंगी, खासकर घर की बड़ी बुज़ुर्ग महिलाओं ऐसा कहती हैं. माहवारी यानी पीरियड्स से जुड़ी ऐसी कई धारणाएं हमारे समाज में आज भी गहराई से जमी हुई हैं. इनमें से एक आम धारणा है कि पीरियड्स के दौरान बाल नहीं धोने चाहिए. लेकिन क्या वाकई ऐसा कोई वैज्ञानिक कारण है? या फिर ये भी एक और भ्रम है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है?

पीरियड्स के दौरान बाल धोने की धारणा कहां से आई?

भारतीय संस्कृति में पीरियड्स को लंबे समय से अशुद्धि से जोड़ा गया है. पुराने ज़माने में जब सुविधाएं सीमित थीं और गर्म पानी या साफ-सफाई के साधन पर्याप्त नहीं थे, तब महिलाओं को इन दिनों आराम करने और शरीर को ठंड से बचाने की सलाह दी जाती थी.  इसका एक हिस्सा यह भी था कि इन दिनों सिर पर पानी न डालें, जिससे सर्दी या थकावट न हो. धीरे-धीरे यह एक सामाजिक नियम जैसा बन गया कि पीरियड्स में बाल धोना मना है. 

ये भी पढ़े- लड़कियों को क्यों नहीं पहननी चाहिए टाइट जींस? इस बीमारी का रहता है खतरा

वैज्ञानिक नजरिए से क्या है सच्चाई?

कोई मेडिकल रिसर्च यह नहीं कहती कि पीरियड्स में बाल धोने से कोई नुकसान होता है. 

यह पूरी तरह से एक मिथक है जो केवल परंपरा पर आधारित है, विज्ञान पर नहीं. 

यदि बहुत ठंडा पानी इस्तेमाल किया जाए तो सिर दर्द या थकावट हो सकती है, लेकिन वो पीरियड्स की वजह से नहीं, बल्कि तापमान की वजह से है. 

अगर आप गर्म या गुनगुने पानी से नहाते हैं और बाल धोते हैं, तो इससे न केवल ताजगी मिलती है, बल्कि शरीर की बदबू और बैक्टीरिया से भी राहत मिलती है. 

क्या बाल धोने से पीरियड्स की फ्लो बढ़ता है?

कई लोगों का यह भी मानना है कि बाल धोने से ब्लीडिंग अधिक हो सकती है. हालांकि यह केवल एक भ्रम है. गर्म पानी से नहाने से ब्लड फ्लो थोड़ा सामान्य हो सकता है, जिससे शरीर हल्का और रिलैक्स महसूस करता है. लेकिन यह नुकसानदायक नहीं है. 

किन बातों का ध्यान रखें?

बहुत ठंडा पानी न इस्तेमाल करें

सिर धोने के बाद बाल अच्छी तरह सुखाएं

अगर थकान ज्यादा है तो आराम करें, मजबूरी न बनाएं

साफ-सफाई बनाए रखें, ताकि इंफेक्शन से बच सकें

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लड़कियों को क्यों नहीं पहननी चाहिए टाइट जींस? इस बीमारी का रहता है खतरा

लड़कियों को क्यों नहीं पहननी चाहिए टाइट जींस? इस बीमारी का रहता है खतरा


Side Effect of Tight Jeans: फैशन की दुनिया में हर दिन कुछ नया ट्रेंड करता है और आज की युवा लड़कियों में टाइट फिटिंग जींस पहनना स्टाइल का प्रतीक बन गया है. कॉलेज हो या कैफे, मेट्रो हो या मॉल, हर दूसरी लड़की को स्किन फिट जींस में देखा जा सकता है. ये दिखने में स्मार्ट जरूर लगती है, लेकिन यह फैशन आपकी सेहत के लिए कितना भारी पड़ सकता है. इसका आपको अंदाजा भी नहीं होगा. आपको जानकर हैरानी होगी कि टाइट जींस केवल असहजता ही नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी को भी जन्म दे सकती है. 

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टाइट जींस से जुड़ा मुख्य खतरा

जब कोई कपड़ा शरीर से पूरी तरह चिपका हो और हवा का आना-जाना नहीं हो पाए तो वहां बैक्टीरिया और फंगस के पनपने की संभावना बढ़ जाती है. टाइट जींस इसी स्थिति को जन्म देती है, जिससे लड़कियों में योनि संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. 

यह संक्रमण खुजली, जलन, असामान्य डिसचार्ज और दुर्गंध जैसी समस्याएं पैदा करता है. कई बार संक्रमण इतना गंभीर हो सकता है कि डॉक्टर की दवा और लंबे इलाज की जरूरत पड़ जाती है. 

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जो टाइट जींस से हो सकती हैं

स्किन एलर्जी और रैशेज: टाइट जींस से त्वचा पर रगड़ बढ़ जाती है, जिससे रैशेज और जलन हो सकती है. 

ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट: शरीर के निचले हिस्से में ब्लड फ्लो धीमा हो सकता है, जिससे झनझनाहट और सुन्नपन हो सकता है. 

पेल्विक मसल्स पर दबाव: लगातार टाइट कपड़े पहनने से पेल्विक एरिया में खिंचाव होता है, जिससे दर्द और असहजता महसूस हो सकती है. 

पाचन में गड़बड़ी: टाइट जींस पेट को दबाती है, जिससे गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. 

क्यों टाइट जींस बनती है संक्रमण का कारण?

हवा का प्रवाह न होने से पसीना सुख नहीं पाता

नमी वाली जगह पर बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं

सिंथेटिक मटीरियल बैक्टीरिया को बाहर नहीं जाने देता

ज्यादा समय तक पहनने से स्किन ब्रीथ नहीं कर पाती

बचाव के उपाय क्या हैं

टाइट जींस की बजाय कॉटन या थोड़ी लूज फिटिंग पहनें

लंबे समय तक टाइट कपड़े न पहनें, खासकर गर्मियों में

दिन में एक बार कपड़े जरूर बदलें, अगर पसीना आया हो

अंडरगारमेंट्स हमेशा साफ और सूती हो

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सिर्फ राहत नहीं लाता मानसून…ये छह बीमारियां भी देती हैं आपके घर दस्तक, ऐसे करें बचाव

सिर्फ राहत नहीं लाता मानसून…ये छह बीमारियां भी देती हैं आपके घर दस्तक, ऐसे करें बचाव


गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए मानसून राहत लेकर आता है. आसमान से राहत की बूंद बरसने के साथ ही चेहरे ​खिल उठते हैं. लेकिन इस दाैरान कई बीमारियां भी दस्तक देती हैं. डाॅक्टर से कंसल्ट करने के साथ ही बीमारी को डायग्नोज करने के लिए पैथोलाॅजी जांच भी करानी पड़ती है. इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है. आइए जानते हैं कि मानसून सीजन में पनपने वाली इन बीमारियों से कैसे बच सकते हैं…

टाइफाइड लेता है चपेट में

बारिश के सीजन में टाइफाइड के केस सामने आने लगते हैं. ये दिक्कत दूषित खाने और पानी से होती है. इसके लक्षणों में लगातार तेज बुखार आना, कमजोरी महसूस होना, पेट में दर्द और भूख न लगने के लक्षण दिखते हैं. इस दाैरान ब्लड की जांच से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

मलेरिया का रिस्क

ये बीमारी मच्छरों से होती है. बारिश में घर में आसपास पानी इकट्ठा हो जाता है. इसमें मलेरिया के मच्छर पनपते हैं. मलेरिया की चपेट में आने पर तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, जरूरत से ज्यादा पसीना आना और गंभीर एनीमिया आदि प्राॅब्लम देखने को मिल सकती हैं. लापरवाही बरतने पर सेरेब्रल मलेरिया हो सकता है, जो एक खतरनाक ​स्थिति है. इसके साथ दौरे पड़ना, किडनी फेल्योर, पीलिया और सांस से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं. इस बीमारी का पता लगाने के लिए डाॅक्टर खून की जांच कराते हैं.

डेंगू का खतरा

बारिश में ये बीमारी सबसे अ​धिक फैलने का खतरा रहता है. एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल भारत में हजारों लोग इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवा बैठते हैं. साल 2021 में डेंगू के एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. असल में बारिश का पानी जमा होने पर मादा एडीज मच्छर पनपता है. इस मच्छर के काटने से डेंगू होता है. ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय या सूरज ढलने से पहले काटता है. तेज बुखार के साथ बदन दर्द डेंगू के आम लक्षण हैं. इसके अलावा पसीना आना, सिर दर्द, आंखों में दर्द होना, मतली, उल्टी, कमजोरी, हल्की ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर कम होने जैसे लक्षण भी डेंगू के दाैरान देखने को मिल सकते हैं. डेंगू में लापरवाही खतरनाक हो सकती है. प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर ब्लीडिंग से आॅर्गन फेल्योर का जो​खिम हो सकता है.

जोड़ों में दर्द यानी चिकनगुनिया

चिकनगुनिया भी मच्छरों से होने वाली बीमारी है, जो रुके हुए पानी में पनपते हैं. चिकनगुनिया टाइगर एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर के कारण फैलता है. इसके लक्षण आमताैर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 7 दिनों के बाद नजर आते हैं. इसमें बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में तेज दर्द होता है.

इन्फ्लूएंजा भी करता है परेशान

बदलते माैसम में इन्फ्लूएंजा के मामले भी बढ़ने लगते हैं. यह संक्रमण तेजी से फैलने वाला होता है. बुखार, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बंद होना, सूखी और लगातार खांसी होने जैसे लक्षण दिखते हैं.

गड़बड़ा सकता है पेट

बरसात के माैसम में हाईजीन में लापरवाही पेट के इंफेक्शन का कारण बन सकती है. इससे पेट में ऐंठन महसूस होने के साथ दस्त हो सकते हैं. डा​यरिया से शरीर में पानी की कमी होने का रिस्क बन जाता है.

इस तरह करें बचाव

  • हाईजीन का ध्यान रखें
  • दिन में नियमित अंतराल पर हाथ धोते रहें
  • बाहर खाने से बचें
  • पानी उबालकर या फिल्टर कर पीएं
  • घर में आसपास बारिश का पानी इकट्ठा होने से रोकें

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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