सिर्फ राहत नहीं लाता मानसून…ये छह बीमारियां भी देती हैं आपके घर दस्तक, ऐसे करें बचाव

सिर्फ राहत नहीं लाता मानसून…ये छह बीमारियां भी देती हैं आपके घर दस्तक, ऐसे करें बचाव


गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए मानसून राहत लेकर आता है. आसमान से राहत की बूंद बरसने के साथ ही चेहरे ​खिल उठते हैं. लेकिन इस दाैरान कई बीमारियां भी दस्तक देती हैं. डाॅक्टर से कंसल्ट करने के साथ ही बीमारी को डायग्नोज करने के लिए पैथोलाॅजी जांच भी करानी पड़ती है. इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है. आइए जानते हैं कि मानसून सीजन में पनपने वाली इन बीमारियों से कैसे बच सकते हैं…

टाइफाइड लेता है चपेट में

बारिश के सीजन में टाइफाइड के केस सामने आने लगते हैं. ये दिक्कत दूषित खाने और पानी से होती है. इसके लक्षणों में लगातार तेज बुखार आना, कमजोरी महसूस होना, पेट में दर्द और भूख न लगने के लक्षण दिखते हैं. इस दाैरान ब्लड की जांच से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

मलेरिया का रिस्क

ये बीमारी मच्छरों से होती है. बारिश में घर में आसपास पानी इकट्ठा हो जाता है. इसमें मलेरिया के मच्छर पनपते हैं. मलेरिया की चपेट में आने पर तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, जरूरत से ज्यादा पसीना आना और गंभीर एनीमिया आदि प्राॅब्लम देखने को मिल सकती हैं. लापरवाही बरतने पर सेरेब्रल मलेरिया हो सकता है, जो एक खतरनाक ​स्थिति है. इसके साथ दौरे पड़ना, किडनी फेल्योर, पीलिया और सांस से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं. इस बीमारी का पता लगाने के लिए डाॅक्टर खून की जांच कराते हैं.

डेंगू का खतरा

बारिश में ये बीमारी सबसे अ​धिक फैलने का खतरा रहता है. एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल भारत में हजारों लोग इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवा बैठते हैं. साल 2021 में डेंगू के एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. असल में बारिश का पानी जमा होने पर मादा एडीज मच्छर पनपता है. इस मच्छर के काटने से डेंगू होता है. ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय या सूरज ढलने से पहले काटता है. तेज बुखार के साथ बदन दर्द डेंगू के आम लक्षण हैं. इसके अलावा पसीना आना, सिर दर्द, आंखों में दर्द होना, मतली, उल्टी, कमजोरी, हल्की ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर कम होने जैसे लक्षण भी डेंगू के दाैरान देखने को मिल सकते हैं. डेंगू में लापरवाही खतरनाक हो सकती है. प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर ब्लीडिंग से आॅर्गन फेल्योर का जो​खिम हो सकता है.

जोड़ों में दर्द यानी चिकनगुनिया

चिकनगुनिया भी मच्छरों से होने वाली बीमारी है, जो रुके हुए पानी में पनपते हैं. चिकनगुनिया टाइगर एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर के कारण फैलता है. इसके लक्षण आमताैर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 7 दिनों के बाद नजर आते हैं. इसमें बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में तेज दर्द होता है.

इन्फ्लूएंजा भी करता है परेशान

बदलते माैसम में इन्फ्लूएंजा के मामले भी बढ़ने लगते हैं. यह संक्रमण तेजी से फैलने वाला होता है. बुखार, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बंद होना, सूखी और लगातार खांसी होने जैसे लक्षण दिखते हैं.

गड़बड़ा सकता है पेट

बरसात के माैसम में हाईजीन में लापरवाही पेट के इंफेक्शन का कारण बन सकती है. इससे पेट में ऐंठन महसूस होने के साथ दस्त हो सकते हैं. डा​यरिया से शरीर में पानी की कमी होने का रिस्क बन जाता है.

इस तरह करें बचाव

  • हाईजीन का ध्यान रखें
  • दिन में नियमित अंतराल पर हाथ धोते रहें
  • बाहर खाने से बचें
  • पानी उबालकर या फिल्टर कर पीएं
  • घर में आसपास बारिश का पानी इकट्ठा होने से रोकें

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कोई भी खा सकता है Liv. 52 दवा, जानें इस बात में कितनी हकीकत?

क्या कोई भी खा सकता है Liv. 52 दवा, जानें इस बात में कितनी हकीकत?


लिवर में कोई भी दिक्कत हो तो हर कोई Liv. 52 दवा खाने की सलाह देने लगता है. सभी का दावा होता है कि लिवर की हर बीमारी को इससे ठीक किया जा सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लिव 52 को कोई भी खा सकता है? आइए जानते हैं कि इस दावे में कितनी सच्चाई है?

इन बीमारियों में काम आती है यह दवा

Liv. 52 एक लोकप्रिय आयुर्वेदिक हर्बल सप्लीमेंट है, जिसे लिवर की सेहत दुरुस्त करने और डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है. इस दवा का इस्तेमाल दशकों से भारत और दुनिया के कई देशों में हो रहा है. वायरल हेपेटाइटिस, अल्कोहलिक लिवर डिजीज (ALD), नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) और लिवर डैमेज आदि दिक्कतों में लिव 52 को फायदेमंद माना जाता है. 

क्या है लिव 52 दवा?

Liv. 52 एक पॉलीहर्बल फॉर्मूलेशन है, जिसमें कैपर बुश (हिम्सरा), चिकोरी (कसनी), मंडूर भस्म, टर्मिनलिया अर्जुना और सोलनम नाइग्रम जैसी कई औषधीय जड़ी-बूटियां शामिल हैं. सामान्य रूप से यह दवा लिवर हेल्थ बेहतर करने, भूख बढ़ाने और पाचन में सुधार के लिए इस्तेमाल की जाती है.

क्या हैं Liv. 52 के फायदे?

2022 से 2025 के बीच पब्लिश हुईं कई स्टडीज में Liv. 52 को लिवर के लिए बेहतरीन दवा बताया गया है. यह लिवर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है. इसमें मौजूद चिकोरी (कसनी) और कैपर बुश (हिम्सरा) जैसे तत्व ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं. साथ ही, अल्कोहलिक लिवर डिजीज (ALD) और NAFLD के मरीजों में लिवर एंजाइम लेवल (ALT, AST, और बिलीरुबिन) में इजाफा करते हैं. 

इसके अलावा लिवर सेल्स पुनर्जनन को बढ़ावा देती है, जो लिवर डैमेज के केसेज में कारगर है. वहीं, यह दवा भूख बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने में असरदार है. Liv. 52 को हल्के से मध्यम गंभीरता वाले वायरल हेपेटाइटिस, NAFLD और अल्कोहलिक लिवर डिजीज के लक्षणों में सुधार के लिए सहायक पाया गया है.

Liv. 52 के साइड इफेक्ट्स

Liv. 52 को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इसके साइड इफेक्ट भी देखे गए हैं.कुछ लोगों को इस दवा के हर्बल घटकों से एलर्जी हो सकती है, जिसकी वजह से स्किन पर चकत्ते, खुजली या सूजन हो सकती है. गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. वहीं, कुछ रोगियों ने Liv. 52 लेने के बाद हल्के पेट दर्द, मतली, उल्टी या दस्त की शिकायत की है. कुछ रेयर केसेज में Liv. 52 के इस्तेमाल से किडनी डिसफंक्शन की दिक्कत हुई है. 

इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को यह दवा डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए. जिन लोगों को हर्बल चीजों से एलर्जी है, उन्हें इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करवाना चाहिए. इसके अलावा किडनी डिसफंक्शन या अन्य पुरानी बीमारियों जूझ रहे लोगों को भी डॉक्टर की सलाह के बिना यह दवा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए.

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लिवर का ये एक टेस्ट बता देगा आपका भविष्य, पता चल जाएगा कब आ सकता है हार्ट अटैक

लिवर का ये एक टेस्ट बता देगा आपका भविष्य, पता चल जाएगा कब आ सकता है हार्ट अटैक



<p style="text-align: justify;">हार्ट की प्राॅब्लम अब किसी एक एज ग्रुप तक सीमित नहीं है. बुजुर्ग से लेकर युवा तक इसकी चपेट में हैं. लेकिन इस खतरे का कई वर्ष पहले ही पता लगाया जा सकता है. वो भी चंद रुपये खर्च कर खून की एक आसान जांच से. एसजीपीटी नाम की ये जांच वैसे तो लिवर की हेल्थ जानने के लिए की जाती है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इसकी वैल्यू हार्ट हेल्थ भी डिसाइड करती है. आइए इस बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस तरह समझें खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एसजीपीटी टेस्ट की मदद से शरीर में इंफ्लेमेशन का पता लगाने में मदद मिलती है. लंबे समय तक बनी रहने वाली इंफ्लेमेशन (सूजन) की समस्या हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ा सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर कोई युवक 26 साल का है. युवक की बाॅडी फिट है. जिम जाते हैं या किसी तरह से वर्कआउट करते हैं. लेकिन जब टेस्ट कराते हैं तो एसजीपीटी की वैल्यू 80 आती है. यानी युवक की ओवरऑल हेल्थ खतरे में है. जब युवक की उम्र 36 वर्ष होगी तो वह कार्डियक अरेस्ट या हार्ट प्राॅब्लम से जूझ सकता है. इसके चांसेंस सामान्य से सात गुणा अ​धिक हो जाते हैं. ऐसे में समय रहते इस खतरे के प्रति लोगों को सजग हो जाना चाहिए. जिससे आने वाले खतरे को भांपकर पहले ही उचित कदम उठाए जा सकें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एसजीपीटी टेस्ट क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एसजीपीटी से बाॅडी में इंफ्लेमेशन का लेवल पता लगता है. बाॅडी में एसजीपीटी और एसजीओटी, दो प्रकार के लिवर एंजाइम्स होते हैं. एसजीपीटी लिवर में ही पाया जाता है. अगर टेस्ट रिपोर्ट में एसजीपीटी का लेवल सामान्य से अ​धिक पाया जाता है तो ये खतरे का संकेत हो सकता है. ये सिर्फ लिवर ही नहीं, ब​ल्कि हार्ट को भी नुकसान पहुंचा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एसजीपीटी की नाॅर्मल वैल्यू क्या?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एसजीपीटी की नाॅर्मल वैल्यू 30 है. अगर टेस्ट के दाैरान इससे अ​धिक एसजीपीटी का लेवल पाया जाता है तो अलर्ट हो जाना चाहिए. ब्लड में एसजीपीटी की वैल्यू 56 से ज्यादा है तो ये लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एसजीपीटी क्यों बढ़ता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ब्लड में एसजीपीटी का लेवल बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. मोटापा, डायबिटीज, हार्ट अटैक, हेपेटाइटिस सी, गाॅल ब्लैडर में स्वेलिंग और शराब के सेवन से ये समस्या देखने को मिल सकती है. लिवर के टिश्यूज को नुकसान से भी एसजीपीटी का लेवल बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लिवर का ह्यूमन बाॅडी में रोल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर का बाॅडी में अहम ऑर्गन है. यह बाॅडी का सबसे बड़ा इंटरनल ऑर्गन है. इसका वजन 3 से 5 पाउंड के बीच होता है. लिवर बाॅडी के ऊपरी हिस्से के ओर, लंग्स के नीचे स्थित होता है. लिवर की सबसे बड़ी भूमिका खून को पूरे दिन, हर दिन ​फिल्टर करना है. एक हेल्दी लिवर का रंग गहरा लाल-भूरा हो जाता है, क्योंकि वह ब्लड से भीगा होता है. लिवर बाॅडी में हर मिनट एक लीटर से अधिक खून फिल्टर करता है. जो खाना खाते हैं, उसे पचाने का काम भी लिवर ही करता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लिवर खराब होने के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">पीलिया (स्किन और आंखों का पीला पड़ना)</li>
<li style="text-align: justify;">थकान महसूस होना</li>
<li style="text-align: justify;">नौसिया और उल्टी की​ ​शिकायत</li>
<li style="text-align: justify;">भूख कम लगना</li>
<li style="text-align: justify;">अचानक से वजन घटना शुरू होना</li>
<li style="text-align: justify;">पेट में दर्द होना या सूजन महसूस होना</li>
<li style="text-align: justify;">पेशाब का रंग गहरा हो जाना</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/eat-green-leaf-every-day-foam-disappear-from-urine-and-kidney-2963121">रोजाना एक हरा पत्ता खा लिया तो पेशाब से गायब हो जाएंगे सारे झाग, किडनी की सेहत बनी रहेगी</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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सुबह खाली पेट ड्राई फ्रूट खाना चाहिए या नहीं? जानिए खाने का सही तरीका

सुबह खाली पेट ड्राई फ्रूट खाना चाहिए या नहीं? जानिए खाने का सही तरीका


Dry Fruits on Emplty Stomach: हर सुबह जब हम जल्दी में होते हैं. कभी चाय तो कभी ब्रेड से काम चला लेते हैं. लेकिन आजकल सोशल मीडिया पर एक चीज खूब ट्रेंड कर रही है. सुबह खाली पेट ड्राई फ्रूट खाना. कोई कहता है इससे पेट साफ रहता है, कोई कहता है दिमाग तेज़ होता है. लेकिन क्या सच में ये आदत हर किसी के लिए फायदेमंद है? और अगर खाएं, तो कैसे खाएं, कितने खाएं, इन्हीं सवालों के जवाब आज हम जानेंगे. 

ड्राई फ्रूट्स सुबह खाली पेट खाना चाहिए या नहीं?

ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं. सुबह खाली पेट इन्हें खाने से शरीर को एनर्जी का जबरदस्त बूस्ट मिलता है. लेकिन ये हर किसी के लिए एक जैसा असर नहीं करते. 

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फायदे जो आपको जानने चाहिए

एनर्जी बूस्टर: भीगे हुए बादाम या किशमिश सुबह खाने से दिमाग एक्टिव रहता है और थकान जल्दी नहीं होती. 

पाचन में मददगार: अंजीर और किशमिश में फाइबर होता है जो कब्ज से राहत देता है और पेट साफ रखता है. 

स्किन और बालों के लिए वरदान: बादाम, अखरोट और काजू में मौजूद हेल्दी फैट्स स्किन को निखारते हैं और बालों को मज़बूती देते हैं, 

दिल के लिए फायदेमंद: अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है और दिल की सेहत सुधरता है. 

कब और कैसे खाएं

भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स ज़्यादा फायदेमंद होते हैं 

बादाम, किशमिश और अंजीर को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाना सबसे अच्छा माना जाता है. 

खाली पेट खाएं, लेकिन सीमित मात्रा में

4-5 बादाम, 2 अखरोट, 5 किशमिश और 1 अंजीर – ये मात्रा रोज़ काफी है. 

चाय या कॉफी के साथ न खाएं

इससे ड्राई फ्रूट्स के पोषक तत्व पूरी तरह शरीर में नहीं जाते. 

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

जिन्हें डायबिटीज, पाचन की दिक्कत या नट एलर्जी हो, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए. 

ड्राई फ्रूट्स अगर सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाए जाएं, तो ये किसी टॉनिक से कम नहीं हैं. सुबह खाली पेट इन्हें खाना एक हेल्दी आदत है, जो धीरे-धीरे आपकी एनर्जी, पाचन, और स्किन हेल्थ को बेहतर बनाएगी. 

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Health Tips: मोटापा घटाएं, सेहत बढ़ाएं: ‘5 P’ के साथ करें स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत

Health Tips: मोटापा घटाएं, सेहत बढ़ाएं: ‘5 P’ के साथ करें स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत


5P principles: आज के आधुनिक जीवन में मोटापा और फिटनेस में तेजी से आती गिरावट एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गए हैं. इस संबंध काफी हद तक कुपोषण के साथ जुड़ा हुआ है. इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आहार में “5 पी” के सिद्धांत को अपनाने के लिए बढ़ावा दिया है. यह नई पहल न केवल सुरक्षित भोजन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रेरित करती है. यह अभियान मोटापा कम करने और फिट रहने और लोगों को बेहतर भोजन की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है.

क्या है 5 पी? 

‘5 पी’ क्या हैं? एफएसएसएआई ने “5 पी” की अवधारणा को पेश किया है. अपने आहार में ताजे फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी शामिल करना आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, आपको हाइड्रेटेड रखता है, और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है.

जानेंं 5 पी का मतलब

  • ‘5 पी’ में पहले ‘पी’ से ‘प्लेंटी ऑफ फ्रूट्स वेजिटेबल एंड वॉटर’ है; यानी फलों, सब्जियों और पानी की प्रचुरता. आप अपने आहार में ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां और पर्याप्त पानी शामिल कर सकते हैं, यह न केवल पोषण देता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने और शरीर को हाइड्रेट रखता है.
  • दूसरी ‘पी’ है ‘पिक हेल्दी फैट’, जिसका मतलब है- आहार में स्वस्थ वसा चुनें. ‘गुड फैट’ वह वसा होती है जो शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में योगदान देने के अलावा शरीर में हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल का स्तर और शरीर में मोटापे को कम करने में मदद करते हैं. ये मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए. नट्स, सीड्स या ऑलिव ऑयल से प्राप्त होने वाली वसा ‘गुड फैट’ के अच्छे उदाहरण हैं.
  • तीसरा ‘पी’ है- ‘पावर योर प्लेट विद बैलेंस्ड न्यूट्रिशन’ – यह संतुलित आहार बनाए रखने के बारे में है. संतुलित आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा का संतुलन होता है. प्रोटीन शरीर की कार्यप्रणाली के लिए अहम पोषक तत्व होने के अलावा मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी है. कार्बोहाइड्रेट से हमें दैनिक कार्यों को करने की ऊर्जा मिलती है. वसा भी ऊर्जा का एक सोर्स है जो संतुलित मात्रा में लेने से शारीरिक कार्यप्रणाली में अपनी भूमिका निभाता है.
  • चौथा ‘पी’ है- ‘प्लान मिल टाइम माइंडफुली’ – यानी भोजन की टाइमिंग पर सजगता से ध्यान देना. इसके लिए आप नियत समय पर भोजन करें. दो मील के बीच में कम से कम चार घंटे का गैप रखने की सलाह कई विशेषज्ञ देते हैं. इससे शरीर को भोजन पचाने में पर्याप्त समय मिल जाता है, जो बेहतर पाचन में अहम भूमिका अदा करता है. इसलिए बार-बार बेवजह कुछ ना कुछ खाने की आदत से छुटकारा पाना चाहिए. इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार भोजन को चबा-चबाकर खाना चाहिए. भोजन करते समय पानी न पीएं. हालांकि आप भोजन करने के आधा घंटा पहले पहले और बाद में पानी पी सकते हैं.
  • पांचवां ‘पी’ है- ‘पे अटेंशन टू पोर्सन्स एंड फूड च्वाइस’ यानी अपने भोजन के चयन और उसकी मात्रा पर खास ध्यान देना. इसके लिए सही मात्रा में भोजन करें और प्रोसेस्ड या जंक फूड से दूर रहें. पेट को ज्यादा भरने से भी पाचन प्रभावित होता है. साथ ही, जंक फूड का ज्यादा सेवन करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जबकि पोषक भोजन शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

इस तरह से संतुलित आहार के साथ, आहार में विविधता न सिर्फ मोटापे के जोखिम को कम कर सकती है, क्योंकि यह मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है. भारत में पिछले दो दशकों में प्रोसेस्ड फूड की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. यह मोटापे की बढ़ती समस्या का एक प्रमुख कारण है. ‘5 पी’ के तहत प्लान किया गया भोजन आपका जीवन शैली का वह हिस्सा हो सकता है जो केवल वजन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है. समग्र स्वास्थ्य के तहत संतुलित, विविध आहार के साथ व्यायाम, योग और मेडिटेशन जैसी चीजों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. तो आज से ही अपने आहार में बदलाव शुरू करें और मोटापे से लड़ने में योगदान दें.

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क्यों फोन देखे बिना नहीं रह पाते हम, बार-बार टच करते हैं स्क्रीन, ये है इसकी बड़ी वजह

क्यों फोन देखे बिना नहीं रह पाते हम, बार-बार टच करते हैं स्क्रीन, ये है इसकी बड़ी वजह


What is Dopamine: क्या आपने कभी महसूस किया है कि फोन को स्क्रॉल करते समय आप खुद को अगला मजेदार वीडियो या पोस्ट देखने से रोक नहीं पाते? या कभी आपने अपना लक्ष्य हासिल होने पर, या स्वादिष्ट भोजन करने पर या अपना ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट भरने पर उत्साहित महसूस किया हो. कुछ अनुभव इतने संतोषजनक क्यों लगते हैं, जबकि कुछ दूसरे हमें उदास महसूस कराते हैं? खैर, इसके लिए डोपामाइन जिम्मेदार हो सकता है. यहां बताया गया है कि यह हमारे मस्तिष्क और शरीर में क्या करता है.

 क्या है डोपामाइन?

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर, एक रासायनिक संदेशवाहक है जो मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के बीच संचार की सुविधा प्रदान करता है. यह आपके तंत्रिका तंत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संदेश भेजता है, जिससे आपके शरीर और मस्तिष्क को आपकी हरकत से लेकर आपके मिजाज तक सब कुछ समन्वित करने में मदद मिलती है.

डोपामाइन को अल्पकालिक आनंद में अपनी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, और इससे हमें स्वादिष्ट भोजन करने, शराब पीने, सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या प्यार में पड़ने जैसी चीजों सा एहसास होता है.

डोपामाइन सीखने, ध्यान और एकाग्रता बनाए रखने में भी सहायता करता है, और हमें यादों को संग्रहीत करने में मदद करता है. यह हमारे द्वारा उत्सर्जित नमक और पानी के स्तर को नियंत्रित करके गुर्दे के कार्य में भी भूमिका निभाता है. इसके विपरीत, डोपामाइन के निम्न स्तर को पार्किंसंस रोग जैसे स्मृतिक्षय विकारों से जोड़ा गया है. डोपामाइन हमें आनंद की तलाश करने के लिए कैसे प्रेरित करता है.

आनंद की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है डोपामाइन

डोपामाइन केवल तभी सक्रिय नहीं होता जब हम आनंददायक चीजें करते हैं. यह पहले से ही सक्रिय होता है और हमें आनंद की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है. मान लीजिए कि मैं एक कैफे में जाता हूं और डोनट खरीदने का फैसला करता हूं. जब मैं डोनट को खाता हूं, तो इसका स्वाद शानदार होता है. डोपामाइन बढ़ता है और मुझे खुशी का अनुभव होता है.

अगली बार जब मैं कैफे के पास से गुजरता हूं, तो डोपामाइन पहले से ही सक्रिय होता है. यह पिछली बार खाए गए डोनट की और इस बात की याद दिलाता है कि यह कितना स्वादिष्ट था. डोपामाइन मुझे फिर से कैफे में जाने, एक और डोनट खरीदने और उसे खाने के लिए प्रेरित करता है. विकासवादी दृष्टिकोण से देखें तो डोपामाइन अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण था और इसने प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित किया.

इसने शिकार और भोजन की तलाश जैसे व्यवहारों को प्रेरित किया. इसने आश्रय और सुरक्षा की तलाश करने और शिकारियों से दूर रहने को मजबूती प्रदान की. और इसने साथी खोजने और प्रजनन करने के लिए प्रेरित किया.

आधुनिक तकनीक ने डोपामाइन के प्रभावों को बढ़ा दिया

हालांकि, आधुनिक तकनीक ने डोपामाइन के प्रभावों को बढ़ा दिया है, जिससे नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, जुआ, शराब पीना, नशीली दवाओं का उपयोग, सेक्स, पोर्नोग्राफी और गेमिंग जैसी गतिविधियां डोपामाइन के रिसाव को उत्तेजित कर सकती हैं, जिससे लत और बाध्यकारी व्यवहार का चक्र बन सकता है.

हमारे डोपामाइन का स्तर अलग-अलग हो सकता है हमारा मस्तिष्क लगातार ‘बेसलाइन’ दर पर डोपामाइन की कुछ मात्रा जारी करता रहता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि डोपामाइन हमारे मस्तिष्क और शरीर के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे उसमें आनंद हो या न हो.

हर किसी की बेसलाइन अलग होती है, जो हमारे डीआरडी2 डोपामाइन रिसेप्टर जीन जैसे आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होती है. कुछ लोग अन्य लोगों की तुलना में डोपामाइन का उत्पादन और चयापचय तेजी से करते हैं. हमारे बेसलाइन स्तर हमारे जीवन में नींद, पोषण और तनाव से भी प्रभावित हो सकते हैं. चूंकि हम सभी के पास डोपामाइन की एक बेसलाइन होती है, इसलिए किसी भी समय हमारे आनंद का अनुभव हमारी बेसलाइन दर और पहले जो हुआ है, उसके सापेक्ष होता है.

 कब रिलीज होता है डोपामाइन?

अगर मैं सुबह-सुबह अपने फोन पर गेम खेलता हूं और उससे डोपामाइन रिलीज होता है, फिर मैं सुबह की चाय के साथ कुछ स्वादिष्ट खाता हूं, तो मुझे उस स्तर की संतुष्टि या आनंद का अनुभव नहीं हो सकता है जो मुझे उन गेम के नहीं खेलने पर होता.

मस्तिष्क खुद को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मेहनत करता है और यह हमें लगातार ‘उच्च’ डोपामाइन की स्थिति में रहने की अनुमति नहीं देगा. इसका मतलब है कि हम कुछ रोमांचक गतिविधियों के प्रति सहनशीलता विकसित कर सकते हैं यदि हम उन्हें बहुत अधिक चाहते हैं, क्योंकि मस्तिष्क लगातार ‘उच्च’ डोपामाइन की स्थिति में रहने से बचना चाहता है. शुक्र है कि आपके डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने के लिए स्वस्थ और बिना नशे की लत वाले तरीके हैं.

व्यायाम स्वाभाविक रूप से डोपामाइन बढ़ाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है. चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या यहां तक कि नृत्य जैसी शारीरिक गतिविधियां डोपामाइन के स्राव को ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे मूड में सुधार हो सकता है और अच्छी प्रेरणा मिलती है.

मस्तिष्क ज्यादा डोपामाइन छोड़ता है- रिसर्च 

रिसर्च से पता चला है कि आपको जो संगीत पसंद है उसे सुनने से आपका मस्तिष्क ज्यादा डोपामाइन छोड़ता है, जिससे आपको एक सुखद अनुभव मिलता है. और हां, जिन लोगों की संगत हमें पसंद है उनके साथ समय बिताना डोपामाइन को सक्रिय करने का एक और बढ़िया तरीका है. इन आदतों को दैनिक जीवन में शामिल करने से आपके मस्तिष्क के प्राकृतिक डोपामाइन उत्पादन में सहायता मिल सकती है और आपको प्रेरणा, मनोदशा और समग्र स्वास्थ्य में स्थायी सुधार का आनंद लेने में मदद मिल सकती है.

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