क्यों फोन देखे बिना नहीं रह पाते हम, बार-बार टच करते हैं स्क्रीन, ये है इसकी बड़ी वजह

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What is Dopamine: क्या आपने कभी महसूस किया है कि फोन को स्क्रॉल करते समय आप खुद को अगला मजेदार वीडियो या पोस्ट देखने से रोक नहीं पाते? या कभी आपने अपना लक्ष्य हासिल होने पर, या स्वादिष्ट भोजन करने पर या अपना ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट भरने पर उत्साहित महसूस किया हो. कुछ अनुभव इतने संतोषजनक क्यों लगते हैं, जबकि कुछ दूसरे हमें उदास महसूस कराते हैं? खैर, इसके लिए डोपामाइन जिम्मेदार हो सकता है. यहां बताया गया है कि यह हमारे मस्तिष्क और शरीर में क्या करता है.

 क्या है डोपामाइन?

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर, एक रासायनिक संदेशवाहक है जो मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के बीच संचार की सुविधा प्रदान करता है. यह आपके तंत्रिका तंत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संदेश भेजता है, जिससे आपके शरीर और मस्तिष्क को आपकी हरकत से लेकर आपके मिजाज तक सब कुछ समन्वित करने में मदद मिलती है.

डोपामाइन को अल्पकालिक आनंद में अपनी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, और इससे हमें स्वादिष्ट भोजन करने, शराब पीने, सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या प्यार में पड़ने जैसी चीजों सा एहसास होता है.

डोपामाइन सीखने, ध्यान और एकाग्रता बनाए रखने में भी सहायता करता है, और हमें यादों को संग्रहीत करने में मदद करता है. यह हमारे द्वारा उत्सर्जित नमक और पानी के स्तर को नियंत्रित करके गुर्दे के कार्य में भी भूमिका निभाता है. इसके विपरीत, डोपामाइन के निम्न स्तर को पार्किंसंस रोग जैसे स्मृतिक्षय विकारों से जोड़ा गया है. डोपामाइन हमें आनंद की तलाश करने के लिए कैसे प्रेरित करता है.

आनंद की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है डोपामाइन

डोपामाइन केवल तभी सक्रिय नहीं होता जब हम आनंददायक चीजें करते हैं. यह पहले से ही सक्रिय होता है और हमें आनंद की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है. मान लीजिए कि मैं एक कैफे में जाता हूं और डोनट खरीदने का फैसला करता हूं. जब मैं डोनट को खाता हूं, तो इसका स्वाद शानदार होता है. डोपामाइन बढ़ता है और मुझे खुशी का अनुभव होता है.

अगली बार जब मैं कैफे के पास से गुजरता हूं, तो डोपामाइन पहले से ही सक्रिय होता है. यह पिछली बार खाए गए डोनट की और इस बात की याद दिलाता है कि यह कितना स्वादिष्ट था. डोपामाइन मुझे फिर से कैफे में जाने, एक और डोनट खरीदने और उसे खाने के लिए प्रेरित करता है. विकासवादी दृष्टिकोण से देखें तो डोपामाइन अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण था और इसने प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित किया.

इसने शिकार और भोजन की तलाश जैसे व्यवहारों को प्रेरित किया. इसने आश्रय और सुरक्षा की तलाश करने और शिकारियों से दूर रहने को मजबूती प्रदान की. और इसने साथी खोजने और प्रजनन करने के लिए प्रेरित किया.

आधुनिक तकनीक ने डोपामाइन के प्रभावों को बढ़ा दिया

हालांकि, आधुनिक तकनीक ने डोपामाइन के प्रभावों को बढ़ा दिया है, जिससे नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, जुआ, शराब पीना, नशीली दवाओं का उपयोग, सेक्स, पोर्नोग्राफी और गेमिंग जैसी गतिविधियां डोपामाइन के रिसाव को उत्तेजित कर सकती हैं, जिससे लत और बाध्यकारी व्यवहार का चक्र बन सकता है.

हमारे डोपामाइन का स्तर अलग-अलग हो सकता है हमारा मस्तिष्क लगातार ‘बेसलाइन’ दर पर डोपामाइन की कुछ मात्रा जारी करता रहता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि डोपामाइन हमारे मस्तिष्क और शरीर के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे उसमें आनंद हो या न हो.

हर किसी की बेसलाइन अलग होती है, जो हमारे डीआरडी2 डोपामाइन रिसेप्टर जीन जैसे आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होती है. कुछ लोग अन्य लोगों की तुलना में डोपामाइन का उत्पादन और चयापचय तेजी से करते हैं. हमारे बेसलाइन स्तर हमारे जीवन में नींद, पोषण और तनाव से भी प्रभावित हो सकते हैं. चूंकि हम सभी के पास डोपामाइन की एक बेसलाइन होती है, इसलिए किसी भी समय हमारे आनंद का अनुभव हमारी बेसलाइन दर और पहले जो हुआ है, उसके सापेक्ष होता है.

 कब रिलीज होता है डोपामाइन?

अगर मैं सुबह-सुबह अपने फोन पर गेम खेलता हूं और उससे डोपामाइन रिलीज होता है, फिर मैं सुबह की चाय के साथ कुछ स्वादिष्ट खाता हूं, तो मुझे उस स्तर की संतुष्टि या आनंद का अनुभव नहीं हो सकता है जो मुझे उन गेम के नहीं खेलने पर होता.

मस्तिष्क खुद को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मेहनत करता है और यह हमें लगातार ‘उच्च’ डोपामाइन की स्थिति में रहने की अनुमति नहीं देगा. इसका मतलब है कि हम कुछ रोमांचक गतिविधियों के प्रति सहनशीलता विकसित कर सकते हैं यदि हम उन्हें बहुत अधिक चाहते हैं, क्योंकि मस्तिष्क लगातार ‘उच्च’ डोपामाइन की स्थिति में रहने से बचना चाहता है. शुक्र है कि आपके डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने के लिए स्वस्थ और बिना नशे की लत वाले तरीके हैं.

व्यायाम स्वाभाविक रूप से डोपामाइन बढ़ाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है. चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या यहां तक कि नृत्य जैसी शारीरिक गतिविधियां डोपामाइन के स्राव को ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे मूड में सुधार हो सकता है और अच्छी प्रेरणा मिलती है.

मस्तिष्क ज्यादा डोपामाइन छोड़ता है- रिसर्च 

रिसर्च से पता चला है कि आपको जो संगीत पसंद है उसे सुनने से आपका मस्तिष्क ज्यादा डोपामाइन छोड़ता है, जिससे आपको एक सुखद अनुभव मिलता है. और हां, जिन लोगों की संगत हमें पसंद है उनके साथ समय बिताना डोपामाइन को सक्रिय करने का एक और बढ़िया तरीका है. इन आदतों को दैनिक जीवन में शामिल करने से आपके मस्तिष्क के प्राकृतिक डोपामाइन उत्पादन में सहायता मिल सकती है और आपको प्रेरणा, मनोदशा और समग्र स्वास्थ्य में स्थायी सुधार का आनंद लेने में मदद मिल सकती है.

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दही नमक डालकर खानी चाहिए या फिर चीनी? 99 फीसदी लोग नहीं जानते हैं ये बात

दही नमक डालकर खानी चाहिए या फिर चीनी? 99 फीसदी लोग नहीं जानते हैं ये बात



<p style="text-align: justify;">दही पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ खाने की थाली में प्रमुखता से जगह बना चुका है. कई लोगों को ​तो बिना दही के खाना ही अच्छा नहीं लगता. कई डिशेज तैयार करने के लिए ये मुख्य इंग्रीडिएंट बन चुका है. ऐसे में इसके सेवन को लेकर लोगों के दिमाग में एक कंफ्यूजन हमेशा बना रहता है. दही का सेवन चीनी या फिर नमक डालकर करना चाहिए. मीठा दही अच्छा है या फिर नमकीन. अब इसको लेकर कोई शंका नहीं रहेगी. आइए इसके बारे में जानते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दही में नमक मिलाने का असर</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">नमक मिलाने से दही में गुड बैक्टीरिया काफी हद तक खत्म हो जाते हैं. इससे दही का सेवन शरीर के लिए उतना लाभकारी नहीं रहता.</li>
<li style="text-align: justify;">अगर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं तो दही में नमक नहीं डालना चाहिए. ये शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;">आयुर्वेद के जानकारों की मानें तो दही में नमक डालकर खाने से शरीर पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है. पित्त की समस्या बढ़ सकती है. ऐसे में पित्त से जुड़ी समस्या पर इसका सेवन जहर के समान है.</li>
<li style="text-align: justify;">दही में नमक डालकर खाने से डाइजेशन प्राॅब्लम देखने को​ मिल सकती है. अगर पहले से पेट की प्राॅब्लम से जूझ रहे हैं तो इस तरह दही का सेवन करने बचना चाहिए.</li>
<li style="text-align: justify;">अगर खांसी की समस्या से जूझ रहे हैं तो दही में नमक मिलाकर न खाएं. इससे खांसी की समस्या बढ़ सकती है.&nbsp;</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>दही के साथ चीनी कितनी फायदेमंद?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">दही में चीनी मिलाकर खाने को भी लोग खूब पसंद करते हैं. इसका बाॅडी पर भी असर देखने को मिलता है. ये डाइजेशन सिस्टम को सपोर्ट करता है.</li>
<li style="text-align: justify;">चीनी से दही में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया खत्म नहीं होते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">चीनी मिलाकर मीठा दही खाने से पेट की जलन को भी शांत करने में मदद मिलती है.</li>
<li style="text-align: justify;">दही में चीनी डालकर खाने से बाॅडी को हाई कैलोरी मिलती है. इससे वजन बढ़ने की संभावना रहती है.</li>
<li style="text-align: justify;">डायबिटीज मरीजों को मीठा दही खाने से परहेज करना चाहिए. इससे बाॅडी में ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>दही किस तरह खाएं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शरीर के लिए दही का सेवन लाभकारी गुणों से भरपूर है. थोड़ी मात्रा में नमक या चीनी डालकर इसका सेवन किया जा सकता है. लेकिन इस दाैरान बाॅडी की मेडिकल कंडीशन का ध्यान रखना भी जरूरी होता है. अगर मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी किसी प्री मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं तो डाॅक्टर की सलाह पर इसका सेवन करना चाहिए. ये शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो दही का सेवन शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है. ऐसे में बिना चीनी या नमक के ही इसका इस्तेमाल करना एक अच्छा विकल्प है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/diabetes-has-become-threat-worldwide-causing-15-lakhs-deaths-every-year-2963623">हार्ट से लेकर किडनी फेल्योर तक का खतरा, हर साल 15 लाख लोगों की सांसें छीन लेती है यह बीमारी</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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चीनी छोड़ने के बाद किन चीजों से पूरी कर सकते हैं शुगर की कमी? ये रही पूरी लिस्ट

चीनी छोड़ने के बाद किन चीजों से पूरी कर सकते हैं शुगर की कमी? ये रही पूरी लिस्ट



<p style="text-align: justify;">चीनी का अ​धिक सेवन शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इसको लेकर आगाह कर चुके हैं. डायबिटीज के मरीजों को तो पूरी तरह से इससे दूरी बनाने की सलाह दी जाती है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनाैती होती है कि चीनी की कमी को पूरा कैसे किया जाए? कई लोगों का तो मुंह मीठा करे बिना दिन ही नहीं गुजरता. ऐसे में कुछ ऑप्शन अपनाकर चीनी जैसा ही टेस्ट फील कर सकते हैं. साथ ही नाॅर्मल शुगर की अपेक्षा इन ऑप्शन का सेवन करना काफी हद तक सेफ भी है. आइए इनके बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गुड़</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गुड़ पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें आयरन, कै​िल्शयम, पोटे​शियम, मैंगनीज, मै​ग्नी​शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसका सेवन बाॅडी में एनीमिया जैसी प्राॅब्लम को दूर करने में भी मदद करता है. ऐसे में मुंह मीठा करने के लिए नाॅर्मल शुगर की अपेक्षा इसका यूज अ​धिक सेफ माना जाता है. इसका यूज चाय बनाने से लेकर किसी डिश को तैयार करने में भी किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कोकोनट शुगर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नारियल अपनी खूबियों के चलते शरीर के लिए कई तरीके से फायदेमंद है. इसमें कै​िल्शयम, मैग्नी​शियम, विटामिन सी, प्रोटीन, सोडियम, फाॅस्फोरस, पोटे​शियम, विटामिन बी 12 जैसे पोष्क तत्व होते हैं. इससे बाॅडी की इम्यूनिटी इंप्रूव होती है. कोकोनट से तैयार की गई चीनी का सेवन डाइट में किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मोंक फ्रूट स्वीटनर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ये एक प्राकृतिक स्वीटनर है. ये चीन में पाए जाने वाले मोंक फ्रूट से प्राप्त होता है. इसे सिराटिया ग्रोसवेनोरी भी कहा जाता है. मोंक फ्रूट के एक्सट्रैक्ट कर इस स्वीटनर को तैयार किया जाता है. टेबल शुगर की तुलना में यह 200 से 250 गुना ज्यादा मीठा होता है. इसमें कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा शून्य होती है. जिससे ये बाॅडी में ब्लड शुगर को नहीं बढ़ाता है. चीनी की जगह डायबिटीज मरीज भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जाइलिटोल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जाइलिटोल भी एक नैचुरल स्वीटनर है. ये फलों, सब्जियों और पेड़ों में पाया जाता है. इसमें 70 फीसद तक मिठास होती है. नाॅर्मल टेबल शुगर की तुलना में इसमे कैलोरी की मात्रा में सिर्फ पांच फीसद होती है. इसलिए इसका सेवन नाॅर्मल शुगर की जगह पर सेफ माना जाता है. ये ओरल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शहद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शहद में विटामिन सी, बी, एंटी ऑ​क्सिडेंट्स, एंजाइम्स जैसे गुण पाए जाते हैं. ये डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद हो सकते हैं. ऐसे में नाॅर्मल शुगर की जगह इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही डायबिटीज के मरीज भी हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह पर सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एडवांटेम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एडवांटेम एक आर्टिफि​शियल स्वीटरन है. नाॅर्मल शुगर की तुलना में 20 हजार गुना अ​धिक मीठा होता है. इसे डायबिटीज मरीजों के लिए भी सेफ माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/diabetes-has-become-threat-worldwide-causing-15-lakhs-deaths-every-year-2963623">हार्ट से लेकर किडनी फेल्योर तक का खतरा, हर साल 15 लाख लोगों की सांसें छीन लेती है यह बीमारी</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद जरूर करें ये 6 आसान योग, कुछ ही दिनों में हो जाएगी रिकवरी

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भ्रामरी प्राणायाम: आंखें बंद करें, गहरी सांस लें और फिर “म” ध्वनि के साथ धीरे-धीरे सांस छोड़ें. यह मधुमक्खी जैसी आवाज निकालने की प्रक्रिया है. इसे करने से तनाव और बेचैनी कम होती है. हार्मोन बैलेंस होता है, साथ ही नींद बेहतर होती है.

कटिचक्रासन: पैरों को थोड़ा फैलाकर सीधे खड़े हों, हाथ कंधे की ऊंचाई तक फैलाएं और शरीर को कमर से एक बार दाईं और फिर बाईं ओर घुमाएं. ये आसन कमर और पीठ की अकड़न कम करता है। साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है.

कटिचक्रासन: पैरों को थोड़ा फैलाकर सीधे खड़े हों, हाथ कंधे की ऊंचाई तक फैलाएं और शरीर को कमर से एक बार दाईं और फिर बाईं ओर घुमाएं. ये आसन कमर और पीठ की अकड़न कम करता है। साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है.

तितली आसन: फर्श पर बैठें, दोनों पैरों के तलवे आपस में मिलाकर पकड़ें और धीरे-धीरे घुटनों को ऊपर-नीचे हिलाएं. ये पेल्विक एरिया की स्ट्रेचिंग करता है. साथ ही बैठने की क्षमता को बेहतर करता है.

तितली आसन: फर्श पर बैठें, दोनों पैरों के तलवे आपस में मिलाकर पकड़ें और धीरे-धीरे घुटनों को ऊपर-नीचे हिलाएं. ये पेल्विक एरिया की स्ट्रेचिंग करता है. साथ ही बैठने की क्षमता को बेहतर करता है.

पवनमुक्तासन: पीठ के बल लेटें, एक पैर मोड़ें और घुटने को पेट की ओर लाएं. दोनों हाथों से पकड़े रहें और सिर घुटने की ओर लाएं. ये पाचन ठीक करता है. गैस और ब्लोटिंग से राहत देता है.

पवनमुक्तासन: पीठ के बल लेटें, एक पैर मोड़ें और घुटने को पेट की ओर लाएं. दोनों हाथों से पकड़े रहें और सिर घुटने की ओर लाएं. ये पाचन ठीक करता है. गैस और ब्लोटिंग से राहत देता है.

सेतु बंधासन: पीठ के बल लेटकर, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें. धीरे-धीरे कमर को ऊपर उठाएं, कंधे और पैर जमीन पर रहें. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. थकान कम करता है. साथ ही हार्मोन संतुलन में मदद करता है.

सेतु बंधासन: पीठ के बल लेटकर, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें. धीरे-धीरे कमर को ऊपर उठाएं, कंधे और पैर जमीन पर रहें. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. थकान कम करता है. साथ ही हार्मोन संतुलन में मदद करता है.

शवासन: पीठ के बल सीधे लेट जाएं, आंखें बंद करें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें. धीरे-धीरे लंबी गहरी सांसें लें. ये शरीर को पूरी तरह आराम देता है. मानसिक शांति लाता है. स्ट्रेस और एंग्जायटी को कम करता है.

शवासन: पीठ के बल सीधे लेट जाएं, आंखें बंद करें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें. धीरे-धीरे लंबी गहरी सांसें लें. ये शरीर को पूरी तरह आराम देता है. मानसिक शांति लाता है. स्ट्रेस और एंग्जायटी को कम करता है.

Published at : 17 Jun 2025 05:25 PM (IST)

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Cold and Cough to Children: मौसम बदलना जितना रोमांचक होता है, उतनी ही चुनौतियां भी साथ लाता है, खासकर जब बात छोटे बच्चों की हो. जैसे ही तापमान घटता-बढ़ता है, घर में छींकने-खांसने की आवाज आने लगती है. जिन बच्चों रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इस बदलाव को जल्दी पकड़ लेते हैं. नतीजा, सर्दी, खांसी, बुखार और कभी-कभी गला बैठ जाना. मां-बाप के लिए ये समय चिंता भरा होता है. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे घर में ही मौजूद कुछ घरेलू नुस्खे बच्चों को सर्दी-जुकाम से राहत दिला सकते हैं.

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हल्दी वाला दूध 

रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर देने से बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और गले की खराश में राहत मिलती है. हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं. 

अजवाइन और लहसुन की पोटली से सेक

छोटे बच्चों को ठंड से राहत दिलाने के लिए अजवाइन और लहसुन की पोटली बनाकर हल्का गर्म कर लें और छाती, पीठ और तलवों पर धीरे-धीरे सेक करें. इससे बंद नाक खुलती है और बच्चे को सुकून मिलता है. 

तुलसी-अदरक का काढ़ा 

कुछ तुलसी के पत्ते, अदरक का छोटा टुकड़ा, और काली मिर्च के दाने पानी में उबालकर छान लें. इसमें थोड़ा शहद मिलाकर 1 चम्मच बच्चों को दें. यह काढ़ा कफ और जुकाम को कम करने में असरदार होता है. 

सरसों के तेल की मालिश

सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलियां और थोड़ी अजवाइन डालकर गर्म करें. जब ठंडा हो जाए, तो इससे बच्चे की छाती, पीठ और तलवों पर मालिश करें. इससे शरीर में गर्मी आती है और ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है. 

भाप लेना 

अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है और सहन कर सकता है, तो हल्की भाप दिलवाना बंद नाक खोलने और गले की खराश में राहत दिला सकता है. पानी में थोड़ा सा विक्स या यूकेलिप्टस ऑयल डालकर भाप लेना लाभकारी होता है. 

बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-जुकाम से पूरी तरह बचाना शायद संभव न हो, लेकिन इन घरेलू उपायों से उनकी तकलीफ जरूर कम की जा सकती है. सबसे ज़रूरी बात यह है कि मां-बाप धैर्य रखें और हर छोटे लक्षण को गंभीरता से लें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देर न करें. क्योंकि एक स्वस्थ बच्चा ही खिलखिलाता है और घर को रोशन करता है. 

ये भी पढ़ें: कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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